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इस अंक की झलकियां

देश व्यापी लॉकडाउन को 31 जुलाई तक बढ़ाया गया और कुछ राहत दी गई

जिला प्रशासन कंटेनमेंट जोन्स को चिन्हित कर सकते हैं जहां अनिवार्य गतिविधियों के अतिरिक्त दूसरी सभी प्रकार की आवाजाही प्रतिबंधित होगी। शैक्षणिक संस्थान 31 जुलाई तक बंद रहेंगे। नाइट कर्फ्यू रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक रहेगा।

बैंकिंग रेगुलेशन (संशोधन) अध्यादेश, 2020 जारी

मुख्य प्रावधानों में आरबीआई को निम्नलिखित शक्तियां प्रदान करना है: (i) बिना मोरटोरियम के बैंकों के पुनर्गठन और एकीकरण के लिए योजना बनाना, और (ii) कोऑरेटिव बैंकों को बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के कुछ प्रावधानों से छूट देना।

इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता में संशोधन के लिए अध्यादेश

अध्यादेश कुछ कॉरपोरेट लेनदारों को 25 मार्च, 2020 से लेकर छह महीने की अवधि के दौरान किए गए डीफॉल्ट पर इनसॉल्वेंसी की किसी भी कार्रवाई से छूट देता है (इस अवधि को अधिसूचना के जरिए एक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है)। 

कृषि क्षेत्र के लिए तीन अध्यादेश जारी किए गए

अध्यादेश निम्नलिखित का प्रयास करते हैं: (iराज्य एपीएमसी बाजारों के बाहर कृषि उपज का व्यापार करने की अनुमति, (iiकेंद्र सरकार की खाद्य सामग्रियों को रेगुलेट करने की शक्ति को सीमित करना, और (iiiकृषि समझौतों पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क प्रदान करना। 

सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को नवंबर 2020 तक बढ़ाया

योजना के अंतर्गत अप्रैल-जून 2020 तक गरीब परिवारों के लोगों को प्रत्येक महीने पांच किलो गेहूं या चावल और एक किलो दाल मुफ्त दी जाएगी। इस योजना की लागत लगभग 90,000 करोड़ रुपए आने की उम्मीद है।

वित्त मंत्रालय ने 2020-21 में नई योजनाओं को शुरू करने पर प्रतिबंध लगाया

कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारी वित्तीय संसाधनों की अप्रत्याशित मांग के कारण यह प्रतिबंध लगाया गया है। यह आत्मनिर्भर भारत इकोनॉमिक पैकेज और दूसरे किसी विशेष पैकेज पर लागू नहीं होगा। 

2019-20 की चौथी तिमाही में चालू खाता अधिशेष जीडीपी का 0.1%

2019-20 की चौथी तिमाही में भारत के चालू खाता शेष में 0.6 बिलियन USD (जीडीपी का 0.1%) का अधिशेष दर्ज किया गया, जबकि 2018-19 की चौथी तिमाही में 4.6 बिलियन USD (जीडीपी का 0.7%) का घाटा दर्ज किया गया था।

सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम दर्जे के उद्यमों के वर्गीकरण के मानदंड में संशोधन किए

संशोधित मानदंड के अनुसार, मौजूदा परिभाषा (2006 का एक्ट) के अंतर्गत निवेश की सीमा को बढ़ाया गया है और उद्यम के वार्षिक टर्नओवर को एमएसएमईज़ के वर्गीकरण के अतिरिक्त मानदंड के रूप में इस्तेमाल किया गया है।  

मुद्रा योजना के अंतर्गत शिशु ऋणों के लिए ब्याज अनुदान की योजना को मंजूरी दी गई

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत सभी शिशु ऋणों (50,000 रुपए तक के ऋण) के लिए 2का ब्याज अनुदान उपलब्ध होगा, ये ऐसे ऋण हैं जोकि 31 मार्च, 2020 तक बकाया थे और जिन्हें नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया गया। 

रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों के लिए विशेष सूक्ष्म ऋण योजना

पात्र लाभार्थी एक वर्ष के लिए ब्याज सबसिडी के साथ कोलेट्रल मुक्त वर्किंग कैपिटल लोन ले सकते हैं। योजना लोन्स पर डीफॉल्ट की स्थिति में ऋणदाताओं को गारंटी प्रदान करती है।  

राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के आधार पर 59 मोबाइल ऐप्स पर पाबंदी

इन ऐप्स में टिकटॉक, शेयरइट, यूसी ब्राऊजर और एमआई वीडियो कॉल शामिल हैं। इन ऐप्स को इस आधार पर प्रतिबंधित किया गया है कि वे सीमा पार के सर्वरों को अनाधिकृत तरीके से उपयोगकर्ता के डेटा को चुरा कर, गुप्त तरीके से भेज रहे थे।

कैबिनेट ने 2020-21 के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों को मंजूरी दी

विपणन सीजन 2020-21 के लिए धान (सामान्य) का लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1,868 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया हैजो पिछले वर्ष की एमएसपी (1,815 रुपए प्रति क्विंटल) से 2.9% अधिक है।
 

कोविड-19

30 जून2020 तक भारत में कोविड-19 के 5,66,840 पुष्ट मामले हैं।[1]  इनमें 3,34,822 मरीजों का इलाज हो चुका है/उन्हें डिस्चार्ज किया जा चुका है और 16,893 की मृत्यु हुई है।1 देश और विभिन्न राज्यों में दैनिक मामलों की संख्या के लिए कृपया यहां देखें  

जैसे इस महामारी का प्रकोप बढ़ा हैकेंद्र सरकार ने इसकी रोकथाम के लिए अनेक नीतिगत फैसलों और महामारी से प्रभावित नागरिकों और व्यवसायों को मदद देने के उपायों की घोषणाएं की हैं। केंद्र और राज्यों द्वारा जारी मुख्य अधिसूचनाओं के विवरण के लिए कृपया यहां देखें। जून 2020 में इस संबंध में मुख्य घोषणाएं इस प्रकार हैं।

कंटेनमेंट जोन्स में लॉकडाउन 31 जुलाई तक बढ़ाया गया, कुछ राहत भी दी गई

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटी (एनडीएमए) ने मार्च में 21 दिन का देशव्यापी लॉकडाउन किया था।[2]  इसके बाद लॉकडाउन को पांच बार बढ़ाया गया है। इस बार का लॉकडाउन 31 जुलाई, 2020 तक लागू है।[3] इन उपायों को आपदा प्रबंधन एक्ट, 2005 के प्रावधानों के अंतर्गत जारी किया जाता है। यह एक्ट राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटीज़ की स्थापना करता है और इन अथॉरिटीज़ को इस बात की शक्तियां देता है कि वे आपदाओं का प्रभावी प्रबंधन कर सकें।

संशोधित दिशानिर्देशों में जिला अथॉरिटीज़ को इस बात की अनुमति दी गई है कि वे संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानदंडों के आधार पर कुछ क्षेत्रों को कंटेनमेंट जोन्स में रिस्क प्रोफाइल करें। कंटेनमेंट जोन्स को संबंधित जिला कलेक्टरों और राज्यों को ऑनलाइन अधिसूचित किया जाएगा और इस सूचना को स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ साझा किया जाएगा। इन कंटेनमेंट जोन्स में लॉकडाउन जारी रहेगा और व्यक्तियों की आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा, केवल मेडिकल इमरजेंसी और अनिवार्य वस्तुओं एवं सेवाओं की सप्लाई को छोड़कर। राज्य बफर जोन्स को भी चिन्हित कर सकते हैं (कंटेनमेंट जोन्स के बाहर), जहां जिला प्रशासन अतिरिक्त प्रतिबंध लगा सकता है।3  

कंटेनमेंट जोन्स के बाहर के क्षेत्रों में निम्नलिखित के सिवाय सभी गतिविधियों की अनुमति होगी: (i) अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा, इसमें सिर्फ गृह मंत्रालय की अनुमति से यात्रा की जा सकती है, (ii) शैक्षणिक संस्थान और कोचिंग संस्थान (जोकि 31 जुलाई, 2020 तक बंद रहेंगे), (iii) मेट्रो रेल, (iv) थियेटर, जिम, ऑडिटोरियम और ऐसी ही दूसरी जगहें, और (iv) बड़े जमावड़े, जैसे सामाजिक, राजनैतिक या धार्मिक कार्यक्रम। केंद्र और राज्य सरकार के प्रशिक्षण संस्थानों को 15 जुलाई, 2020 से काम करने की अनुमति है जोकि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर पर आधारित होगा।

अनिवार्य गतिविधियों को छोड़कर रात को 10 बजे और सुबह 5 बजे के बीच व्यक्तियों के मूवमेंट पर प्रतिबंध लगा रहेगा। यह कर्फ्यू औद्योगिक इकाइयों के कामकाज, राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर व्यक्तियों और वस्तुओं की आवाजाही और कार्गो की लोडिंग-अनलोडिंग पर लागू होगा। 

राज्य स्थितियों का आकलन करते हुए कंटेनमेंट जोन्स के बाहर के क्षेत्रों में अतिरिक्त प्रतिबंध लगा सकते हैं। हालांकि व्यक्तियों और वस्तुओं की राज्यों के भीतर या राज्यों के बीच की आवाजाही पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता और इसमें पड़ोसी देशों के साथ लैंड बॉर्डर ट्रेड (संधियों के आधार पर) से आने वाले व्यक्ति या वस्तुएं भी शामिल है। ट्रेन, घरेलू हवाई परिवहन द्वारा यात्रा और भारत में और भारत से बाहर व्यक्तियों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को इस संबंध में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स द्वारा ही रेगुलेट किया जाएगा। 

दिशानिर्देशों में कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर कोविड-19 के प्रबंधन के लिए कुछ डायरेक्टिव्स अनिवार्य किए गए हैं। इन उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सार्वजनिक स्थलों और काम करने के स्थानों में फेस कवर को अनिवार्य रूप से पहनना, (ii) विवाह समारोहों में अधिकतम 50 मेहमान और दाह संस्कारों में अधिकतम 20 लोग शामिल हो सकते हैं, और (iii) सभी कार्यस्थलों पर काम के अलग अलग घंटे।

इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी अध्यादेश जारी 

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को जारी किया गया।[4]  यह अध्यादेश इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता, 2016 में संशोधन करता है। संहिता कंपनियों और व्यक्तियों के बीच इनसॉल्वेंसी को रिजॉल्व करने की समयबद्ध प्रक्रिया प्रदान करती है। इनसॉल्वेंसी वह स्थिति हैजब व्यक्ति या कंपनियां अपना बकाया ऋण नहीं चुका पाते। अध्यादेश कुछ कॉरपोरेट देनदारों को कोविड-19 के दौरान कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन की प्रक्रिया से संबंधित संहिता के प्रावधानों से छूट देता है। अध्यादेश की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन को शुरू करना: जब डीफॉल्ट होता है तो कंपनी के क्रेडिटर्स (फाइनांशियल या ऑपरेशनल) या कंपनी खुद कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया (सीआईआरपी) को शुरू करने के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के मंजूर होने पर कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) का गठन किया जाता है जिसमें फाइनांशियल क्रेडिटर्स शामिल होते हैं। सीओसी एक रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल को नियुक्त करती है जो रेज़ोल्यूशन की प्रक्रिया को प्रबंधित करता है और सीओसी के सामने एक रेज़ोल्यूशन प्लान पेश करता है। रेज़ोल्यूशन प्लान के मंजूर होने के बाद रेज़ोल्यूशन की प्रक्रिया 180 दिनों में पूरी हो जानी चाहिए (जिसे 90 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है)।
     
  • अध्यादेश कुछ कंपनियों को सीआईआरपी को शुरू करने के प्रावधानों से छूट देता है। इसमें कहा गया है कि अगर 25 मार्च, 2020 के बाद छह महीने की अवधि के दौरान कोई डीफॉल्ट हुआ है तो उस अवधि के लिए सीआईआरपी को शुरू करने का आवेदन नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए इस अवधि को एक वर्ष कर सकती है। अध्यादेश स्पष्ट करता है कि इस अवधि के दौरान होने वाले डीफॉल्ट के लिए कभी भी कोई कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती।
     
  • धोखाधड़ी से किया जाने वाला व्यापार: रेज़ोल्यूशन के दौरान अगर यह पाया जाता है कि कंपनी का कारोबार अपने क्रेडिटर्स के साथ धोखाधड़ी करने के उद्देश्य से किया जा रहा है तो एनसीएलटी ऐसे कारोबार करने वाले लोगों को कंपनी के एसेट में योगदान करने के आदेश दे सकता है। इसके अतिरिक्त रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल एनसीएलटी में यह आवेदन कर सकता है कि वह कंपनी के निदेशक या पार्टनर को योगदान देने का आदेश दे, अगर (i) इनसॉल्वेंसी की तारीख से पहले निदेशक या पार्टनर को यह पता था या उसे पता होना चाहिए था कि सीआईआरपी से बचने की कोई उचित संभावना नहीं है, या (ii) निदेशक या पार्टनर ने कंपनी के क्रेडिटर्स के संभावित नुकसान को कम करने के लिए ज्यादा कोशिश नहीं की।
     
  • अध्यादेश के अनुसार, रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल ऐसी कंपनियों के लिए एनसीएलटी में इस संबंध में आवेदन नहीं कर सकता कि वह कंपनी के पार्टनर्स या निदेशकों को कंपनी के एसेट में योगदान देने का निर्देश दे। 

अध्यादेश पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखे

वित्त मंत्रालय ने 2020-21 में नई योजनाओं को शुरू करने पर प्रतिबंध लगाया

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

वित्त मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में नई योजनाओं को शुरू करने के प्रस्तावों पर प्रतिबंध लगाया है।[5] उसने सभी मंत्रालयों/विभागों को नई योजनाओं/उपयोजनाओं को शुरू करने से प्रतिबंधित किया है जिसमें वे योजनाएं भी शामिल हैं जिन्हें वित्त मंत्रालय ने इन-प्रिंसिपल मंजूरी दे दी थी। यह प्रतिबंध आत्मनिर्भर भारत इकोनॉमिक पैकेज और दूसरे अन्य विशेष पैकेज/घोषणाओं के अंतर्गत आने वाली योजनाओं पर लागू नहीं होगा।5 कोविड-19 महामारी के कारण सार्वजनिक वित्तीय संसाधनों की अप्रत्याशित मांग के कारण यह प्रतिबंध लगाया गया है। 

कैबिनेट ने मुद्रा योजना के अंतर्गत ऋणों के पुनर्भुगतान पर ब्याज अनुदान को मंजूरी दी 

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के अंतर्गत सभी शिशु लोन एकाउंट उधारकर्ताओं को 2का ब्याज अनुदान (ब्याज सबसिडी) देने की योजना को मंजूरी दी है।[6]   यह ब्याज अनुदान 12 महीने की अवधि के लिए उपलब्ध होगा। पीएमएमवाई के अंतर्गत आय सर्जन गतिविधियों के लिए 50,000 रुपए तक के लोन्स को शिशु लोन्स कहा जाता है। यह योजना सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए है ताकि उन्हें कोविड-19 के असर से उबरने के लिए मदद दी जाए। 

यह ब्याज अनुदान उन सभी लोन्स के लिए उपलब्ध होगा जोकि 31 मार्च, 2020 से बकाया हैं और जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। टर्म लोन के मामले में नॉन परफॉर्मिंग एसेट एक ऐसा खाता होता है जिसमें लोन 90 दिनों से अधिक की अवधि के लिए ओवरड्यू होता है।28  लोन्स के नियमित पुर्नभुगतान को बढ़ावा देने के लिए एनपीए खातों के लिए ब्याज अनुदान उन महीनों के लिए भी उपलब्ध रहेगा, जिनके दौरान वे अपने पुनर्भुगतान को नियमित करते हैं और स्टैंडर्ड (गैर एनपीए) खाते बन जाते हैं। योजना भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी। 

उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने मई 2020 में टर्म लोन (जो कि 31 मार्च2020 तक बकाया था) पर मोहलत को 31 अगस्त2020 तक बढ़ा दिया था।[7]   ऐसे उधारकर्ता जिन्हें उनके ऋणदाताओं द्वारा मोहलत दी गई है, के लिए यह योजना सितंबर, 2020 से शुरू होगी। अन्य उधारकर्ताओं के लिए यह योजना जून, 2020 से शुरू होगी। अनुमान है कि इस योजना पर लगभग 1,542 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 

आरबीआई ने कोविड-19 के मद्देनजर सीआरआर और एमएसएफ में बदलाव की समय सीमा बढ़ाई  

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

आरबीआई ने कोविड-19 के निरंतर असर को ध्यान में रखते हुए कैश रिजर्व रेशो (सीआरआर) के न्यूनतम दैनिक मेनटेनेंस और मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी (एमएसएफ) के अंतर्गत उधार की सीमा को अगले तीन महीनों के लिए बढ़ा दिया है।[8],[9] इससे संबंधित विवरण इस प्रकार है:

  • कैश रिजर्व रेशो: सीआरआर तरल नकदी की राशि है जो बैंकों को अपनी कुल जमा (शुद्ध मांग और समय देनदारियों) के प्रतिशत के रूप मेंआरबीआई के पास रखनी होती है। मार्च 2020 में आरबीआई ने 26 जून, 2020 तक दैनिक न्यूनतम सीआरआर बैलेंस को 90% से घटाकर 80% कर दिया।[10]  अब इसे तीन महीने बढ़ाकर 25 सितंबर, 2020 कर दिया गया है। 
     
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी: एमएसएफ के अंतर्गत बैंक अपने वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) का इस्तेमाल करके आरबीआई से उधार ले सकते हैं। एसएलआर तरल संपत्ति का अनुपात है जैसे सोनाट्रेजरी बॉन्ड और नेट डिमांड एंड टाइम लायबिलिटीज़ (एनडीटीएल) के लिए सरकारी सिक्योरिटी। मार्च 2020 में एमएसएफ के लिए उधार की सीमा को एनडीटीएल के 2% से बढ़ाकर 30 जून, 2020 तक एनडीटीएल का 3% कर दिया गया था। इसे अब तीन महीने के लिए और बढ़ाकर 30 सितंबर, 2020 तक कर दिया गया है।

वित्त मंत्रालय ने विभिन्न कर अनुपालनों की समय सीमा बढ़ाई

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

वित्त मंत्रालय ने टैक्सेशन और अन्य कानून (विभिन्न प्रावधानों में राहत) अध्यादेश, 2020 की शक्तियों के जरिए इनकम टैक्स एक्ट, 1961 (आईटी एक्ट) के अंतर्गत विभिन्न अनुपालनों की समय सीमा बढ़ाई है।[11] इस अध्यादेश को मार्च 2020 में जारी किया गया था ताकि कर अनुपालन से संबंधित राहत दी जा सके, जैसे कोविड-19 के मद्देनजर समय सीमा को बढ़ाना और जुर्माने से छूट इत्यादि।[12]

आईटी एक्टअध्यादेश के अंतर्गत कुछ अनुपालनों और कार्यों को करने की समय सीमाजिन्हें 20 मार्च2020 से 29 जून2020 के दौरान करना था, को 30 जून2020 तक बढ़ाया गया था। इनमें निम्नलिखित कार्य शामिल हैं: (i) नोटिस और अधिसूचनाएं जारी करना, कार्यवाहियों को पूरा करना और अथॉरिटीज़ एवं ट्रिब्यूनलों द्वारा आदेश जारी करना, और (ii) अपील फाइल करना, जवाब देना और आवेदन, तथा दस्तावेज प्रस्तुत करना। इस अवधि को 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाया गया है। यह समय सीमा उन कार्यों पर भी लागू होगी जिन्हें 30 जून, 2020 से 31 दिसंबर, 2020 के बीच पूरा किया जाना है।

अध्यादेश सरकार को इस बात की अनुमति देता है कि वह विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए अलग-अलग नियत तिथियों को अधिसूचित कर सकती है। जैसे आकलन वर्ष (एवाई) 2019-20 (यानी वित्तीय वर्ष 2018-19) के लिए इनकम का रिटर्न फाइल करने की नियत तारीख को बढ़ाकर 31 जुलाई2020 कर दिया गया है। एवाई 2020-21 के लिए रिटर्न फाइल करने की तारीख 30 नवंबर2020 तक बढ़ा दी गई है। हालांकि2020 मेंउन लोगों के मामले मेंजिनके पास एक लाख रुपये से अधिक का कर भुगतान बकाया है (पहले से चुकाए गए या काटे गए टैक्स की एकाउंटिंग के बाद), बकाया टैक्स पर 12% ब्याज लगेगा, अगर आईटी एक्ट के अंतर्गत निर्दिष्ट मूल देय तिथि (व्यक्तियों के लिए 31 जुलाई और कंपनियों के लिए 31 अक्टूबर) के बाद रिटर्न दाखिल किया जाता है 

अगर किसी को वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए आईटी एक्ट के 80 सी से 80 जीजीसी सेक्शंस के अंतर्गत कुछ कटौतियां का दावा करना है तो वह 31 जुलाई, 2020 तक निवेश कर सकता है (कुछ कैपिटल गेन्स कटौतियों का मामले में यह तारीख 30 सितंबर, 2020 है)।  

जीएसटीअध्यादेश ने केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर एक्ट, 2017 में संशोधन किए थे, ताकि केंद्र सरकार जीएसटी परिषद के सुझाव के आधार पर एक्ट के अंतर्गत आने वाले जीएसटी अनुपालनों की समय सीमा को बढ़ाने की अधिसूचना जारी कर सके। इस प्रकार सरकार ने 20 मार्च, 2020 से 29 जून, 2020 के बीच किए जाने वाले कार्यों की समय सीमा 30 जून, 2020 कर दी थी।[13]  इस समय सीमा को 31 अगस्त, 2020 कर दिया गया है।[14] 31 अगस्त, 2020 की समय सीमा उन कार्यों पर भी लागू होगी, जिन्हें 30 जून, 2020 से 30 अगस्त, 2020 के दौरान पूरा किया जाना है।

डायग्नॉस्टिक किट्स, पीपीईज़, सैनिटाइजर्स, हाइड्रोक्लोरोक्वीन के लिए निर्यात नीतियों में संशोधन

Saket Surya (saket@prsindia.org)

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कोविड-19 की रोकथाम, निदान और उपचार में इस्तेमाल होने वाले निम्नलिखित आइटम्स की निर्यात नीतियों में संशोधन किए हैं: 

  • एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर्स: मार्च 2020 में सभी प्रकार के सैनिटाइजर्स के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था।[15]  मई 2020 में एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर्स के अतिरिक्त दूसरे सभी प्रकार के सैनिटाइजर्स के निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया।[16]  एल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर्स के निर्यात को अब मुक्त कर दिया गया है, पर डिस्पेंसर पंप वाले कंटेनरों में पैक किए गए सैनिटाइजर्स अब भी निर्यात नहीं किए जा सकते।[17]  
  • डायग्नॉस्टिक किट्सडायग्नॉस्टिक किट्स और लेबोरेट्री रीजेंट्स के निर्यात पर अप्रैल में लगे प्रतिबंध में राहत दी गई है और अब इन वस्तुओं को निर्यात किया जा सकता है।[18]  हालांकि आरएनए एक्सट्रैक्शन किट्स और रीजेंट्स, तथा आरटी-पीसीआर किट्स और रीजेंट्स सहित कुछ विशिष्ट डायग्नॉस्टिक किट्स के निर्यात पर अब भी पाबंदी है।[19]
  • कुछ डायग्नॉस्टिक उपकरणों, अपरेटस, और रीजेंट्स की निर्यात नीति में संशोधन किए गए हैं ताकि उन्हें प्रतिबंध से मुक्त किया जा सके।19  इनमें कोविड-19 टेस्टिंग और विभिन्न प्रकार के स्वैब्स के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रोब्स और प्राइमर्स शामिल हैं।
     
  • हाइड्रोक्लोरोक्वीन: मार्च 2020 में हाइड्रोक्लोरोक्वीन और उसके फॉर्मूलेशन के निर्यात पर कुछ मामलों को छोड़कर प्रतिबंध लगाया गया था। इनमें पड़ोसी देशों को निर्यात भी शामिल था जोकि दवाओं के लिए भारत पर निर्भर हैं और ऐसे देश जोकि कोविड-19 से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इस दवा के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया गया है।[20],[21]  
     
  • पीपीईज़जनवरी में क्लोथिंग और मास्क कवरऑल्स सहित पर्सनल प्रोटेक्शन एक्विपमेंट (पीपीईज़) के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था।[22]  हालांकि मई में नॉन सर्जिकल और नॉन मेडिकल मास्क्स के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया गया।[23]  अब सभी पीपीईज़ को मुक्त रूप से निर्यात किया जा सकता है, लेकिन निम्नलिखित पर अब भी प्रतिबंध है: (iसभी प्रकार के मेडिकल कवरऑल्स, (iiमेडिकल गॉगल्स, (iiiनॉन मेडिकल और नॉन सर्जिकल मास्क्स को छोड़कर सभी मास्क्स, (ivनाइट्राइल ग्लव्स, और (vफेस शील्ड्स।[24]  

रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों (स्ट्रीट वेंडर्स) के लिए विशेष सूक्ष्म वित्त सुविधा की शुरुआत 

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

आवासन और शहरी मामलों के मंत्रालय ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना की शुरुआत की।[25]  इस योजना के जरिए रेहड़ी-पटरीवाले दुकानदारों के लिए वर्किंग कैपिटल लोन दिया जाएगा जिनका कारोबार कोविड-19 के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ है।[26] योजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • पात्रतायह योजना उन राज्यों को उपलब्ध है जिन्होंने स्ट्रीट वेंडर्स (जीविकोपार्जन का संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का रेगुलेशन) एक्ट, 2014 के अंतर्गत नियमों और योजनाओं को अधिसूचित किया है। यह एक्ट स्ट्रीट वेंडर्स के अधिकारों और बाध्यताओं को निर्दिष्ट करता है और उनके कारोबार को रेगुलेट करता है।[27] एक्ट के अंतर्गत राज्यों से टाउन वेंडिंग कमिटी बनाने की अपेक्षा की जाती है जोकि अपने जोन/वार्ड में वेंडर्स के आइडेंटिफिकेशन सर्वे के लिए जिम्मेदार होती हैं।
     
  • वित्त योजना का लाभ ऐसे स्ट्रीट वेंडर्स को मिलेगा जोकि 24 मार्च, 2020 से शहरी क्षेत्रों में वेंडिंग कर रहे हैं। स्ट्रीट वेंडर्स को निम्नलिखित मानदंडों के आधार पर चिन्हित किया जाएगा: (iवेंडिंग के सर्टिफिकेट (आइडेंटिटी कार्ड) वाले वेंडर्स, (iiसर्टिफिकेट रहित वेंडर्स, लेकिन आइडेंटिफिकेशन सर्वे में चिन्हित, या (iiiआइडेंटिफिकेशन सर्वे में छूट गए वेंडर्स, लेकिन जिन्हें शहरी स्थानीय निकाय या टाउन वेंडिंग कमिटी ने लेटर ऑफ रिकमेंडेशन जारी किया है।
     
  • लोन और ब्याज अनुदानयोजना के अंतर्गत पात्र स्ट्रीट वेंडर्स अनुसूचित कमर्शियल बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और सूक्ष्म वित्त संस्थानों से एक वर्ष की अवधि के लिए 10,000 रुपए तक के कोलेट्रल मुक्त वर्किंग कैपिटल लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
     
  • इस योजना के अंतर्गत वेंडर्स प्रति वर्ष 7की ब्याज सब्सिडी के पात्र होंगे। यह सब्सिडी 31 मार्च, 2022 तक मिलेगी और केवल उन खातों के लिए उपलब्ध होगी, जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। टर्म लोन के मामले में नॉन परफॉर्मिंग एसेट ऐसा खाता या लोन होता है जिसमें लोन की किश्त 90 दिनों से अधिक बकाया होती है।[28]  
     
  • ऋण गारंटीइस योजना के अंतर्गत कुल लोन पोर्टफोलियो के अधिकतम 5तक के डीफॉल्ट्स पूरी तरह से (100%) गारंटीशुदा होंगे। कुल लोन पोर्टफोलियो के 5से 15के बीच के डीफॉल्ट्स के लिए 75डीफॉल्ट राशि गारंटीशुदा होगी। क्रेडिट गारंटी एक वर्ष के लिए पोर्टफोलियो के अधिकतम 15% कवरेज के अधीन है। 

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को 5 महीने यानी नवंबर 2020 तक के लिए बढ़ाया गया 

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को पांच महीने के लिए, नवंबर 2020 तक बढ़ा दिया है।[29] इस योजना की घोषणा मार्च 2020 में की गई थी जिसका उद्देश्य कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के मद्देनजर गरीबों को राहत देना था। योजना के अंतर्गत अप्रैल-जून 2020 के दौरान गरीब परिवारों को हर महीने पांच किलो गेहूं या चावल और एक किलो दाल दिया गया। अब इस योजना के लाभ को अगले पांच वर्षों के लिए, नवंबर 2020 तक बढ़ाया गया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एक्ट के अंतर्गत सभी लाभार्थियों को यह लाभ दिया जाएगा और एक्ट के अंतर्गत प्रदत्त खाद्यान्नों के अतिरिक्त यह लाभ दिया जाएगा। पांच महीने तक इस योजना को और संचालित करने की सरकारी लागत 90,000 करोड़ रुपए से अधिक की है।[30]

गरीब कल्याण रोजगार अभियान शुरू

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

प्रधानमंत्री ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान को शुरू किया था।[31] इस अभियान का उद्देश्य उन प्रवासी श्रमिकों को जीविकोपार्जन के अवसर प्रदान करना है जो कोविड-19 के कारण अपने गांवों को लौट गए। योजना का लक्ष्य सड़कोंआवासआंगनवाड़ियों और सामुदायिक परिसरों से संबंधित गांवों में सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एसेट्स का निर्माण करना भी है।

यह अभियान छह राज्यों के 116 जिलों में संचालित किया जाएगा। ये राज्य हैं, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओड़िशा। 

इसे सड़क परिवहन और राजमार्गखदानपर्यावरणरेलवेपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैसदूरसंचार और कृषि सहित केंद्र सरकार के 11 मंत्रालयों द्वारा लागू किया जाएगा। अभियान 125 दिनों (20 जून2020 तक) के लिए काम करेगा और 25 सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के कामों की पहचान की गई हैजिन्हें पूरा करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। इसे सड़क परिवहन और राजमार्गखननपर्यावरणरेलवेपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैसदूरसंचार और कृषि सहित केंद्र सरकार के 11 मंत्रालयों द्वारा लागू किया जाएगा। अभियान 125 दिनों (20 जून, 2020 तक) के लिए काम करेगा और 25 सार्वजनिक बुनियादी ढांचों की पहचान की गई हैजिन्हें पूरा करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानों पर पाबंदी बढ़ाई गई 

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने घोषणा की है कि भारत में आने वाली और भारत से जाने वाली अनुसूचित अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल यात्री उड़ानों पर पाबंदी को 15 जुलाई, 2020 तक जारी रखा जाएगा।[32]  पहले इन उड़ानों पर 30 जून, 2020 तक पाबंदी थी।[33]  

ये प्रतिबंध डीजीसीए द्वारा विशेष रूप से मंजूर इंटरनेशनल ऑल-कार्गो ऑपरेशंस और उड़ानों पर लागू नहीं होंगे। मामलों को देखते हुए चुनींदा मार्गों पर अंतरराष्ट्रीय अनुसूचित उड़ानों को अनुमति दी जा सकती है।

डीजीसीए ने अन्य रेगुलेशंस से संबंधित कुछ दिशानिर्देशों को भी जारी किया है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एयरलाइन क्रू का प्रबंधन: एयरलाइन क्रू का रिस्क एसेसमेंट संबंधित एयरलाइन डॉक्टर द्वारा किया जाएगा और आईसीएमआर के दिशानिर्देशों के अनुसार टेस्टिंग की सलाह दी जाएगी।[34]  रिस्क एसेसमेंट के आधार पर क्रू के सदस्यों के लिए 14 दिनों के क्वारंटाइन को तय किया जाएगा। अगर क्रू का कोई सदस्य कोविड-19 के मामले के संपर्क में आता है तो उसके लिए होम क्वारंटाइन अनिवार्य होगा। क्रू के सभी सदस्यों को आरोग्य सेतु डाउनलोड करने और उसके जरिए अपने हेल्थ स्टेटस पर निगरानी रखने की सलाह दी जाएगी। 
     
  • डेंजरस गुड्स रेगुलेशंस ट्रेनिंग दोबारा करना: डेंजरस गुड्स रेगुलेशंस ट्रेनिंग की सभी श्रेणियों के प्रमाणपत्रों की वैधता, जो 20 मार्च, 2020 को या उसके बाद समाप्त हो रही थीको और बढ़ा दिया गया है।[35]  यह एक्सटेंशन 30 सितंबर, 2020 तक या सर्कुलर के रद्द होने तक- जो भी पहले हो- मान्य होगा। खतरनाक वस्तुओं के सुरक्षित परिवहन के लिए यह प्रशिक्षण आवश्यक है। ऑपरेटरों को ऑडिट के लिए ऐसे विस्तारित प्रमाणपत्रों के अलग-अलग रिकॉर्ड रखने होंगे। 
     
  • कोविड-19 की एयरोमेडिकल व्यवस्था: सिविल एयरक्रू के पॉजिटिव पाए जाने की स्थिति में एयरोमेडिकल व्यवस्था की दो श्रेणियां हैं।[36]  ये इस प्रकार हैं
  1. पॉजिटिव एसिम्पटोमैटिक/माइल्डली सिम्पटोमैटिक एयरक्रू: रिकवरी के बाद या सार्स-को वि-2 नेगेटिव घोषित एयरक्रू को निर्बाध उड़ान के लिए फिट घोषित किया जाएगा, अगर उनका क्लिनिकल पैरामीटर सामान्य होता है। यह घोषणा डीजीसीए के एम्पैनल्ड मेडिकल एग्जामिनर द्वारा की जाएगी।
     
  2. पॉजिटिव मॉडरेट/गंभीर/क्लिनिकल सिम्पटोमिक एयरक्रू: पूरी क्लिनिकल रिकवरी के बाद ऐसे एयरक्रू को भारतीय वायु सेना के बोर्डिंग केंद्र में विशेष चिकित्सा जांच से गुजरना होगा। उन्हें पल्मोनोलॉजिस्ट/मेडिकल स्पेशलिस्ट का ओपीनियन/क्योर सर्टिफिकेट हासिल करना होगा। अगर एयरक्रू की क्लिनिकल और लेबोरेट्री जांच में ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं निकालता जोकि किसी फंक्शनल नुकसान का कारण बनता है तो निर्बाध उड़ान के लिए उस पर विचार हो सकता है।
  • वन्यजीव जोखिम प्रबंधन: एयरपोर्ट ऑपरेटरों को सलाह दी जाती है कि वे पक्षी एवं वन्यजीव नियंत्रण उपायों को बंद न करें और पक्षी एवं वन्यजीव निरीक्षण को जारी रखें।[37]  घटते वायु यातायात के कारण पक्षी एवं वन्यजीव गतिविधियों को बढ़ाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। 

कुछ विशेष श्रेणियों के विदेशी व्यक्तियों को भारत आने की अनुमति 

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

कोविड-19 के मद्देनजर गृह मामलों के मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध लगाया है और कुछ विशेष स्थितियों में इसमें राहत दी गई है, जैसे विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की निकासी।[38]

मंत्रालय ने भारत आने वाले विदेशी नागरिकों की चार श्रेणियों के यात्रा प्रतिबंधों में राहत दी है।[39]  ये इस प्रकार हैं: (i) बिजनेस वीज़ा पर भारत में प्रवेश करने वाले व्यक्ति (बी-3 वीजा को छोड़कर (10 करोड़ रुपए से अधिक टर्नओवर वाले बिजनेस) और गैर अनुसूचित कमर्शियल या चार्टर्ड फ्लाइट्स में खेलों के सिलसिले में आने वाले लोगों की यात्रा, (ii) हेल्थकेयर प्रोफेशनल, हेल्थ रिसर्चर्स, भारत के हेल्थकेयर सेक्टर के केंद्रों में टेक्निकल काम के लिए आने वाले इंजीनियर्स और टेक्निशियंस (जोकि पंजीकृत हेल्थकेयर केंद्र, फार्मास्यूटिकल कंपनी या सत्यापित भारतीय विश्वविद्यालय से प्राप्त निमंत्रण पर आधारित हो), (iii) विदेशी इंजीनियरिंग, डिजाइन या दूसरे स्पेशलिस्ट्स जो भारत में स्थिति विदेशी बिजनेस एंटिटिज़ की ओर से भारत में यात्रा कर रहे हों, और (iv) विदेशी टेक्निकल एक्सपर्ट और इंजीनियरजो पंजीकृत भारतीय बिजनेस एंटिटी के निमंत्रण पर भारत में विदेशी मशीनरी की स्थापनामरम्मत और रखरखाव के लिए यात्रा कर रहे हों। 

हवाई यात्रा के लिए कोविड-19 संबंधित सेल्फ डिक्लरेशन की शर्त में संशोधन

Saket Surya (saket@prsindia.org)

मई 2020 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने घरेलू हवाई यात्रा को दोबारा शुरू करने से संबंधित दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया था।[40]  इन दिशानिर्देशों में यात्रियों से यह अपेक्षा की गई थी कि वह खुद इस बात की घोषणा करे कि पिछले दो महीने को दौरान उसे कोविड-19 पॉजिटिव नहीं घोषित किया गया है। इस समय सीमा को कम करके अब तीन हफ्ते कर दिया गया है।40   कोविड-19 से रिकवर हुए व्यक्तियों से इस शर्त के अलावा यह अपेक्षा भी की जाएगी कि वे कोविड-19 का इलाज करने वाले किसी भी संस्थान से कोविड-19 रिकवर्ड/डिस्चार्ड सर्टिफिकेट भी दिखाएं। 

भारतीय रेलवे 14 अप्रैल, 2020 को या उससे पहले बुक किए गए सभी टिकट्स को रीफंड करेगा 

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

रेलवे मंत्रालय ने घोषणा की है कि नियमित समय पर चलने वाली ट्रेनों के लिए 14 अप्रैल2020 को या उससे पहले बुक किए गए सभी ट्रेन टिकट रद्द कर दिए जाएंगे।[41]  यात्रियों को रद्द टिकट्स का रीफंड दिया जाएगा। 

शहरी परिवहन सेवाएं प्रदान के उपाय जारी

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

आवासन और शहरी मामलों के मंत्रालय ने कोविड-19 के मद्देनजर शहरी परिवहन सेवाएं प्रदान करने हेतु राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों/मेट्रो रेल कंपनियों को एडवाइजरी जारी की।[42]  एडवाइजरी में तीन स्तरीय रणनीति का सुझाव दिया गया जोकि चरणों में अपनाई जा सकती है(i) शॉर्ट टर्म (छह महीनों में), (ii) मीडियम टर्म (एक वर्ष में), और (iii) लॉन्ग टर्म (एक से तीन वर्ष)। मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं

  • गैर मोटरीकृत परिवहन को बढ़ावा देना और उसे रिवाइव करना, चूंकि अधिकतर शहरी यात्राएं पांच किलोमीटर से कम दूरी की होती हैं। 
     
  • सार्वजनिक परिवहन को फिर से शुरू किया जा सकता है। इस स्थिति में सैनिटाइजेशन, कंटेनमेंट और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपाय करके सार्वजनिक परिवहन के जरिए संक्रमण फैलने से रोका जा सकता है।  
  • वायरस को फैलने से रोकने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा सकता है। इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टमदेसी कैशलेस और टचलेस पेमेंट सिस्टम्स, को एनेबल करना तथा नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड से सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों में मानव संपर्क को कम किया जा सकता है। 

मोटर वाहन दस्तावेजों की वैधता को 30 सितंबर, 2020 तक बढ़ाया गया

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन दस्तावेजों (जैसे फिटनेस प्रमाणपत्रपरमिटड्राइविंग लाइसेंसपंजीकरणया किसी अन्य संबंधित दस्तावेज) की वैधता को 30 सितंबर, 2020 तक बढ़ा दिया है।[43]  इससे पूर्व मार्च 2020 में मंत्रालय ने कुछ दस्तावेजों की वैधता को 30 जून, 2020 तक बढ़ा दिया था।[44] इनमें निम्नलिखित दस्तावेज शामिल हैं (i) जिनकी वैधता लॉकडाउन के कारण बढ़ाई नहीं जा सकी और जोकि 1 फरवरी, 2020 को रद्द हो गए हैं, और (ii) जो 30 जून, 2020 को रद्द होंगे। 

पोस्टल बैलेट से वोट करने वाले लोगों की श्रेणियां बढ़ाई गईं 

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

भारत में मतदाताओं की कुछ श्रेणियां पोस्टल बैलेट के माध्यम से अपना वोट डालने के लिए पात्र हैं। पोस्टल वोटिंग वह होती है जब मतदाता अथॉरिटी से बैलेट पेपर प्राप्त करता है और पोस्ट के माध्यम से अपना वोट वापस कर सकता है। चुनाव आचरण नियम, 1961 उन व्यक्तियों की श्रेणियों को निर्दिष्ट करता है जो पोस्टल बैलट के माध्यम से मतदान कर सकते हैं। इनमें सशस्त्र बलों के कर्मचारीविकलांग मतदाता और 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक जैसे मतदाता शामिल हैं।

1961 के नियमों को निम्नलिखित को शामिल करने के लिए संशोधित किया गया है: (iवरिष्ठ नागरिकों की आयु सीमा को 80 वर्ष से कम करके 65 वर्ष करना, (iiकोविड-19 के संदिग्ध या प्रभावित व्यक्ति।[45] कोविड-19 के संदिग्ध या प्रभावित व्यक्तियों का अर्थ ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें: (iसरकारी अस्पताल या सरकार द्वारा कोविड अस्पताल के रूप में मान्यता प्राप्त अस्पताल द्वारा कोविड-19 पॉजिटिव जांचा गया है, या (ii) कोविड -19 के कारण घर या संस्थागत क्वारंटाइन के अंतर्गत और एक सक्षम अथॉरिटी द्वारा प्रमाणित किया जाता हैजैसा कि राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है।

कोविड-19 के लिए शॉर्ट टर्म हेल्थ इंश्योरेंस के दिशानिर्देश जारी 

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

इंश्योरेंस रेगुलेटरी और डेवलपमेंट अथॉरिटी (इरडा) ने कोविड-19 के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों के कवरेज हेतु शॉर्ट टर्म हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी शुरू करने संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं।[46] इन दिशानिर्देशों में इंश्योरेंस कंपनियों को कोविड-19 विशिष्ट शॉर्ट टर्म (3 महीने और 11 महीने) लाइफ, हेल्थ या जनरल इंश्योरेंस पॉलिसी शुरू करने की अनुमति दी गई है।  

दिशानिर्देशों के अनुसार, पॉलिसी को एक व्यक्तिगत उत्पाद या समूह उत्पाद के रूप में पेश किया जा सकता हैलेकिन यह केवल कोविड-19 के लिए विशिष्ट होना चाहिए। इस तरह की पॉलिसी के लिए अलग से ऐड-ऑन की अनुमति नहीं है। ये दिशानिर्देश 31 मार्च, 2021 तक मान्य रहेंगे।46 

कंपनी एक्ट, 2003 के अंतर्गत कुछ समय सीमाओं को बढ़ाया गया 

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

कोविड-19 के मद्देनजर कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनी एक्ट, 2013 के अंतर्गत कुछ समय सीमाओं को बढ़ाया है।[47]  इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सामान्य और विशेष प्रस्तावों को पारित करना: एक्ट में कंपनियों को इस बात की अनुमति देने वाले विशिष्ट प्रावधान नहीं हैं कि वे वीडियो कांफ्रेंसिंग या दूसरे ऑडियो-विजुअल मोड के जरिए अपने शेयरहोल्डर्स की जनरल मीटिंग्स कर सकती हैं। मंत्रालय ने वीडियो कांफ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो-विजुअल तरीके से मीटिंग करने और पोस्टल बैलेट के जरिए कारोबार करने की अनुमति देने के लिए दिशानिर्देश सर्कुलेट किए थे।[48] ये दिशानिर्देश 30 जून, 2020 तक वैध थे। मंत्रालय ने इन दिशानिर्देशों की वैधता को 30 सितंबर, 2020 तक बढ़ा दिया है।[49]  
     
  • चार्ज संबंधी फॉर्म्स भरने में रियायत की योजनाएक्ट के अंतर्गत अगर कंपनियों की संपत्तियों पर कोई सिक्योरिटी इंटरेस्ट क्रिएट होता है (जैसे अगर कंपनी की संपत्तियां रेहन रखी जाती हैं) या चार्ज मॉडिफाई होता है तो कंपनियों को कई फॉर्म्स भरने होते हैं। सिक्योरिटी क्रिएट होने के 30 दिनों के अंदर ये फॉर्म्स भरे जाने चाहिए (इस अवधि को अतिरिक्त फीस चुकाकर 300 दिन तक बढ़ाया जा सकता है)। इन फॉर्म्स को भरने के लिए एक निश्चित समय अवधि का कैलकुलेशन किया जाता है। इस समय अवधि से मार्च से सितंबर 2020 की अवधि को बाहर रखने के लिए एक योजना शुरू की गई है।[50]

कैबिनेट ने अन्य पिछड़ा वर्गों के उप-वर्गीकरण की जांच हेतु गठित आयोग की अवधि को बढ़ाने को मंजूरी दी 

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) के उप-वर्गीकरण की जांच हेतु गठित आयोग की अवधि को बढ़ाने को मंजूरी दी।[51] इस आयोग को 2017 में गठित किया गया था। इस आयोग का काम यह सुझाव देना था कि ओबीसीज़ की मौजूदा सूची में आने वाले समुदायों को किस प्रकार केंद्र सरकार के पदों में नियुक्ति और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में दाखिले में आरक्षण का लाभ मिल सकता है।  

आयोग का कार्यकाल पहले 31 जुलाई2020 तक बढ़ाया गया थाक्योंकि ओबीसी की मौजूदा सूची में अस्पष्टताविसंगतियों और वर्तनी की त्रुटियों को दूर करने की जरूरत है। हालांकि कोविड-19 महामारी के कारण देशव्यापी लॉकडाउन हुआ और आयोग यह काम नहीं कर पाया। इसलिए आयोग का कार्यकाल छह महीने यानी 31 जनवरी2021 तक के लिए बढ़ा दिया गया है।

पर्यटन सेवा प्रदाताओं, रेस्त्रां, होटल और होम स्टेज़ के लिए ऑपरेशनल दिशानिर्देश 

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

कोविड-19 के बाद पर्यटन क्षेत्र में सुरक्षा कायम करने के लिए पर्यटन मंत्रालय ने सुरक्षा और स्वच्छता संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं। साथ ही पर्यटन के कुछ क्षेत्रों के लिए ऑपरेशनल दिशानिर्देश भी जारी किए हैं।52,53,54,55 इन दिशानिर्देशों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पर्यटन सेवा प्रदाताइनमें ट्रैवल एजेंट्स, टूर ऑपरेटर्स, टूरिस्ट परिवहन ऑपरेटर, टूरिस्ट फेसिलिटेटर और गाइड्स शामिल हैं।[52] पर्यटन सेवा प्रदाताओं के दिशानिर्देशों में कई विनिर्देश हैं, जैसे ऑफिस परिसर का सैनिटाइजेशन, ऑफिस स्टाफ का हाइजीन प्रोटोकॉल, टूरिस्ट बुकिंग करने से पहले सैलानियों की घोषणा और मेडिकल प्रूफ और सैलानियों को बैठाने से पहले वाहनों का डिसइंफेक्शन, इत्यादि। 
     
  • रेस्त्रां: रेस्त्रां के कुछ दिशानिर्देशों में निम्नलिखित शामिल हैं(i) सीटिंग क्षमता को 50% कम करना और सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखने के लिए सीटिंग साइकिल को बदलना, (ii) परिसर में पूरी तरह से फंक्शनल सीसीटीवी कैमरा हैं ताकि संक्रमित लोगों को ट्रैक करना आसान हो, और (iii) प्रवेश देने से पहले प्रत्येक मेहमान के आरोग्य सेतु एप के स्टेटस को चेक करना।[53]
     
  • होटलोंहोटलों के दिशानिर्देशों में होटल परिसर, कर्मचारी और मेहमान आते हैं।[54]  इनमें से कुछ दिशानिर्देश इस प्रकार हैं(i) यह सुनिश्चित करना कि सभी कर्मचारियों ने मास्क और हेड ग्लव्स पहने हैं (जिन्हें हर ग्राहक के बाद बदला या डिसइंफेक्ट किया जाए), (ii) मामलों की रोकथाम, मामलों के प्रभावी प्रबंधन और असर को कम करने के लिए रैपिड रिस्पांस टीम की स्थापना, (iii) कमरे में भेजने से पहले सामान को डिसइंफेक्ट करना, और (iv) यह सुनिश्चित करना कि सभी कर्मचारी और मेहमान आरोग्य सेतु मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करें। ऐसे दिशानिर्देश बेड और ब्रेकफास्ट्स, होम स्टेज़ और फार्म स्टेज़ के लिए भी दिए गए हैं।[55] 

दिल्ली उच्च न्यायालय ने ड्राफ्ट पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2020 पर फीडबैक की समय सीमा बढ़ाई 

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

मार्च 2020 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ड्राफ्ट पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2020 जारी की थी।[56]   ड्राफ्ट अधिसूचना पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 का स्थान लेने का प्रयास करती है। यह 2006 की अधिसूचना में कुछ परिवर्तनों को प्रस्तावित करती है जैसे कुछ प्रॉजेक्ट्स को पब्लिक कंसल्टेशन से बाहर रखना। इनमें सभी इमारतें, निर्माण एवं क्षेत्र विकास परियोजनाएं, राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार या उन्हें बड़ा करना, और सिंचाई परियोजनाओं का आधुनिकीकरण शामिल हैं।56  

इस ड्राफ्ट अधिसूचना पर पहले 11 मई, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित थीं। कोविड-19 लॉकडाउन के मद्देनजर मंत्रालय ने इस समय सीमा को 30 जून, 2020 तक बढ़ा दिया था।[57]  समाचार पत्रों की रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस समय अवधि को 11 अगस्त, 2020 तक बढ़ा दिया है।[58]

ड्राफ्ट पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2020 पर अधिक विवरण के लिए कृपया देखें

कट और पॉलिश्ड हीरों को जीरो ड्यूटी पर दोबारा आयात करने की समय सीमा बढ़ाई गई 

Saket Surya (saket@prsindia.org)

मौजूदा नीति के अनुसार, जांच के लिए विदेश भेजे गए कट और पॉलिश्ड हीरों को तीन महीनों के भीतर जीरो ड्यूटी पर फिर से आयात किया जा सकता है।[59]  कोविड-19 के मद्देनजर इसे उन मामलों के लिए संशोधित किया गया है, जहां दोबारा निर्यात करने की अवधि 1 फरवरी, 2020 और 31 जुलाई, 2020 के दौरान समाप्त हो रही थी। अब यह अवधि स्वतः तीन महीने बढ़ा दी गई है।

 

समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

Saket Surya (saket@prsindia.org)

2019-20 की चौथी तिमाही में मौजूदा खाता घाटा जीडीपी के 0.1पर

2018-19 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में भारत के मौजूदा खाता शेष (सीएबी) में 4.6 बिलियन USD (जीडीपी का 0.7%) का घाटा दर्ज किया गया था, इसकी तुलना में 2019-20 में इसी अवधि के दौरान सीएबी में 0.6 बिलियन USD (जीडीपी का 0.1%) का मामूली अधिशेष हुआ है।[60] 2019-20 की पिछली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के सीएबी में 2.6 बिलियन USD (जीडीपी का 0.4%का घाटा हुआ था। चौथी तिमाही में अधिशेष के मुख्य कारण हैं: (iनिम्न व्यापार घाटा (देश के निर्यात और आयात का अंतर), जोकि 35.0 बिलियन USD है, और (ii) पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 35.6 बिलियन USD के साथ शुद्ध अदृश्य प्राप्तियों में जबरदस्त वृद्धि।60  अदृश्य प्राप्तियों में ट्रेड इन सर्विसेज़ (जैसे सॉफ्टवेयर और ट्रैवल सेवाएं) और निजी हस्तांतरण, जैसे विदेशों में कार्यरत भारतीयों के प्रेषण से होने वाली प्राप्तियां शामिल हैं।

2019-20 की चौथी तिमाही में विदेशी मुद्रा कोष 18.8 बिलियन USD बढ़ गया जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में 14.2 बिलियन USD की वृद्धि हुई थी। इसकी तुलना में 2019-20 की तीसरी तिमाही में विदेशी मुद्रा भंडार में 21.6 बिलियन USD की वृद्धि हुई थी। निम्नलिखित तालिका में 2019-20 की चौथी तिमाही में भुगतान संतुलन प्रदर्शित है।

तालिका 1: 2019-20 की चौथी तिमाही में भुगतान संतुलन (बिलियन USD) 

 

ति4
 2018
-19

ति3

2019-20

ति4

2019-20

मौजूदा खाता

-4.6

-2.6

0.6

पूंजी खाता

19.2

23.6

17.4

भूल चूक-लेनी देनी

-0.4

0.6

  0.9

कोष में परिवर्तन

14.2

21.6

18.8

SourcesReserve Bank of India; PRS.

वित्तीय वर्ष 2019-20 में सीएबी ने जीडीपी का 0.9घाटा दर्ज किया, जबकि 2018-19 में यह घाटा 2.1था (तालिका 2)। 2019-20 में भारत का व्यापार घाटा पिछले वर्ष के 180.3 बिलियन USD के घाटे की तुलना में 157.5 बिलियन USD हो गया। विदेशी मुद्रा कोष 2019-20 में 59.5 बिलियन USD बढ़ गया, जबकि 2018-19 में इसमें 3.3 बिलियन USD की गिरावट हुई थी।  

तालिका 2: 2019-20 में भुगतान संतुलन (बिलियन USD) 

 

2018-19

2019-20

मौजूदा खाता

-57.2

-24.6

पूंजी खाता

54.4

83.2

भूल चूक- लेनी देनी

-0.5

1.0

कोष में परिवर्तन 

-3.3

59.5

SourcesReserve Bank of India; PRS.

 

वित्त

बैंकिंग रेगुलेशन (संशोधन) अध्यादेश, 2020 जारी

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

बैंकिंग रेगुलेशन (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को जारी किया गया।[61] यह अध्यादेश बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 में संशोधन करता है। एक्ट बैंकों के कामकाज को रेगुलेट करता है और विभिन्न पहलुओं का विवरण प्रदान करता है जैसे बैंकों की लाइसेंसिंग, प्रबंधन और संचालन। अध्यादेश की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • मोरटोरियम के बिना पुनर्गठन या एकीकरण: एक्ट के अंतर्गत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) केंद्र सरकार को आवेदन कर सकता है कि वह किसी बैंकिंग कंपनी को मोरटोरियम में रख सकती है। मोरटोरियम के दौरान अगर आरबीआई को यह प्रतीत होता है कि बैंक के उचित प्रबंधन के लिए, या जमाकर्ताओं, आम लोगों या बैंकिंग प्रणाली के हित के लिए ऐसा आदेश जरूरी है तो वह बैंक के पुनर्गठन या एकीकरण के लिए योजना बना सकता है। अध्यादेश आरबीआई को इस बात की अनुमति देता है कि वह मोरटोरियम के बिना भी पुनर्गठन या एकीकरण के लिए योजना शुरू कर सकता है।
     
  • बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का सुपरसेशनएक्ट कहता है कि आरबीआई कुछ स्थितियों में मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का अधिकतम पांच वर्षों के लिए सुपरसेशन कर सकता है। इन स्थितियों में ऐसे मामले शामिल हैं जहां आरबीआई के लिए जनहित में या जमाकर्ताओं की सुरक्षा के लिए बोर्ड का सुपरसेशन जरूरी है। अध्यादेश कहता है कि अगर कोऑपरेटिव बैंक किसी राज्य के रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसायटीज में पंजीकृत है तो आरबीआई संबंधित राज्य सरकार की सलाह से बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को सुपसीड करेगा और उस अवधि के लिए ऐसा करेगा, जिसे निर्दिष्ट किया गया हो।
     
  • एक्सक्लूजन्सएक्ट कुछ कोऑपरेटिव सोसायटीज़ पर लागू नहीं होता, जैसे प्राइमरी कृषि ऋण सोसायटीज़ और कोऑपरेटिव लैंड मॉर्गेज बैंक। अध्यादेश निम्नलिखित को एक्ट के प्रावधानों से हटाने के लिए संशोधन करता है: (iप्राइमरी कृषि ऋण सोसायटीज़और (iiकृषि विकास के लिए दीर्घकालीन वित्त प्रदान करने वाली कोऑपरेटिव सोसायटीज़, अगर वे अपने नाम में बैंक,’ ‘बैंकर या ‘बैंकिंग का इस्तेमाल नहीं करतीं और चेक क्लीयर करने वाली एंटिटीज़ के तौर पर व्यवहार नहीं करतीं।
     
  • कोऑपरेटिव बैंकों को छूट देने की शक्तिअध्यादेश कहता है कि आरबीआई अधिसूचना के जरिए कोऑपरेटिव बैंक या कोऑपरेटिव बैंकों की किसी श्रेणी को एक्ट के कुछ प्रावधानों से छूट दे सकता है। ये कुछ प्रकार के रोजगार पर प्रतिबंध, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के क्वालिफिकेशन और चेयरपर्सन की नियुक्ति से जुड़े प्रावधान हैं। छूट की समय अवधि और शर्तों को आरबीआई द्वारा निर्दिष्ट किया जाएगा।

अध्यादेश पर पीआरएस के सारांश के लिए कृपया देखें 

सेबी ने रेगुलेटरी सैंडबॉक्स के लिए फ्रेमवर्क शुरू किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

सिक्योरिटीज़ और एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने रेगुलेटरी सैंडबॉक्स के लिए फ्रेमवर्क शुरू किया।[62]  रेगुलेटरी सैंडबॉक्स एक ऐसा परिवेश प्रदान करता है जिसमें बाजार प्रतिभागी को एक नियंत्रित परिवेश में ग्राहकों के साथ नए फिनटेक सॉल्यूशंस (प्रॉडक्ट्स, सेवाएं या बिजनेस मॉडल) का परीक्षण करने का मौका मिलता है।[63] सेबी में पंजीकृत सभी एंटिटीज़ सैंडबॉक्स में परीक्षण के लिए पात्र होंगे।  

  • मानदंड: सेबी निम्नलिखित मानदंडों के आधार पर एप्लिकेंट्स का मूल्यांकन करेगा: (i) नई तकनीक का प्रयोग, (ii) निवेशकों या बाजारों को लाभ, (iii) जोखिम को मापने और उसे कम करने के मानदंड, (iv) स्पष्टतया वर्णित शिकायत निवारण प्रणाली, और (v) परीक्षण के बाद सॉल्यूशन के प्रयोग की व्यावहारिकता।
     
  • छूट: नए प्रयोग के साथ रेगुलेटरी अनुपालन कम से कम हो, इसे बढ़ावा देने के लिए सेबी प्रस्तावित फिनटेक सॉल्यूशन के आधार पर एंटिटीज़ को छूट देगा, जोकि मामलों को देखकर दी जाएगी। लेकिन केवाईसी और एंटी मनी लॉन्ड्रिंग रेगुलेशंस से कोई छूट नहीं दी जाएगी।
     
  • परीक्षण: मंजूरी के बाद एप्लिकेंट को अपने यूजर्स को यह बताना चाहिए कि सॉल्यूशन सैंडबॉक्स में ऑपरेट होगा और परीक्षण शुरू करने से पहले यूजर से इससे जुड़े खतरे की स्वीकृति लेगा। परीक्षण की अधिकतम अवधि 12 महीने है जिसे आगे बढ़ाया जा सकता है। परीक्षण के दौरान एप्लिकेंट को सेबी को आउटकम/प्रदर्शन संकेतकों और चिन्हित मुद्दों के साथ अंतरिम रिपोर्ट्स देनी होंगी। परीक्षण पूरा होने के बाद सेबी यह तय करेगा कि क्या सॉल्यूशन को बड़े पैमाने पर बाजार में उतारना चाहिए। वैकल्पिक तौर पर एप्लिकेंट एक्सटेंशन का अनुरोध कर सकता है, या एक एग्जिट स्ट्रैटेजी को इस्तेमाल कर सकता है।
     
  • मंजूरी रद्द होना: सेबी कुछ स्थितियों में प्रतिभागियों की मंजूरी को रद्द कर सकता है, जैसे (iअगर वे जोखिम कम करने का काम नहीं कर पाते, (iiगलत सूचना देते हैं, या (iiiलिक्विडी में जाते हैं। 

वित्त मंत्री ने ड्राफ्ट पेंशन फंड (विदेशी निवेश) नियम, 2020 जारी किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

वित्त मंत्रालय ने ड्राफ्ट पेंशन फंड (विदेशी निवेश) नियम, 2020 जारी किया।[64]   नियम निर्दिष्ट करते हैं कि भारत में पेंशन फंड्स में कितने विदेशी निवेश की अनुमति है। नियमों के अनुसारविदेशी निवेशकों द्वारा इक्विटी शेयरों में कुल विदेशी निवेश फंड की पेडअप इक्विटी पूंजी के 49% से अधिक नहीं होना चाहिए। इस सीमा तक ऑटोमैटिक रूट से विदेशी निवेश की अनुमति होगी। उल्लेखनीय है कि एफडीआई नीति के अंतर्गत ऑटोमैटिक रूट से पेंशन क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 49% है।[65] 

नियमों के अनुसार, अगर निवेश करने वाली एंटिटी चीन सहित सीमावर्ती देशों की है तो विदेशी निवेश के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी होगी। ड्राफ्ट नियमों पर टिप्पणियां 19 जुलाई, 2020 तक आमंत्रित हैं। 

आरबीआई ने निजी क्षेत्र के बैंकों के स्वामित्व की समीक्षा के लिए वर्किंग ग्रुप का गठन किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भारतीय निजी क्षेत्र के बैंकों के स्वामित्व और कॉरपोरेट स्ट्रक्चर पर दिशानिर्देशों की समीक्षा के लिए इंटरनल वर्किंग ग्रुप का गठन किया।[66]   वर्किंग ग्रुप पिछले कुछ घटनाक्रमों के मद्देनजर निजी क्षेत्र के बैंकों के स्वामित्व, गवर्नेंस और कॉरपोरेट स्ट्रक्चर से संबंधित रेगुलेटरी दिशानिर्देशों की समीक्षा करेगा। आरबीआई के अनुसार, इस समीक्षा से अलग-अलग समयावधि में बैंकों के लिए निर्धारित मानदंडों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का अवसर मिलेगा। कमिटी में पांच सदस्य शामिल होंगेऔर इसकी अध्यक्षता आरबीआई के केंद्रीय मंडल के निदेशक द्वारा की जाएगी।

वर्किंग ग्रुप की संदर्भ की शर्तों में निम्नलिखित शामिल होंगे: (i) निजी क्षेत्र के बैंकों में स्वामित्व और नियंत्रण के अत्यधिक कॉनसेंट्रेशन को ध्यान में रखते हुए स्वामित्व के उपयुक्त मानदंडों का सुझाव देना, (ii) बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने हेतु एंटिटीज़ के लिए पात्रता के मानदंड की समीक्षा, (iii) लाइसेंसिंग के चरण में प्रमोटर शेयरहोल्डिंग और बाद के चरणों में शेयरहोल्डिंग के विलयन की समय सीमा की समीक्षा करना।

कमिटी को 30 सितंबर, 2020 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।  

आरबीआई ने पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के निर्माण की घोषणा की

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

आरबीआई ने एक्वायर्स को टियर-3 से लेकर टियर-6 केंद्रों और पूर्वोत्तर राज्यों में प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) इंफ्रास्ट्रक्चर (फिजिकल या डिजिटल) लगाने हेतु पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड बनाने की घोषणा की।[67] इन स्थानों पर भुगतान प्रणालियों के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया जाएगा। आरबीआई के वर्गीकरण के अनुसार, टियर-3 केंद्र ऐसे क्षेत्र होते हैं जिनकी आबादी 50,000 से कम (जनगणना 2011 के अनुसार) और टियर-6 केंद्रों में 5,000 से कम होती है।[68]  

आरबीआई इस फंड में 250 करोड़ रुपए का शुरुआती योगदान देगा। शेष योगदान कार्ड इश्यू करने वाले बैंक और देश में काम करने वाले कार्ड नेटवर्क्स द्वारा किया जाएगा। कार्ड इश्यू करने वाले बैंक और कार्ड नेटवर्क्स के ऑपरेशनल खर्च को कवर करने के लिए फंड को आवर्ती योगदान भी हासिल होगा। अगर जरूरी हुआ तो आरबीआई साल के बीच में योगदान देगा। फंड को एडवाइजरी काउंसिल द्वारा गवर्न और आरबीआई द्वारा प्रबंधित किया जाएगा। 

 

कृषि

अनिवार्य वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, 2020 जारी

Saket Surya (saket@prsindia.org)

अनिवार्य वस्तुएं (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को को जारी किया गया।[69]  यह अध्यादेश अनिवार्य वस्तुएं एक्ट, 1955 में संशोधन करता है। एक्ट केंद्र सरकार को कुछ वस्तुओं के उत्पादन, सप्लाई, वितरण, व्यापार और वाणिज्य को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। अध्यादेश कृषि क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि करने का प्रयास करता है। मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • खाद्य पदार्थों का रेगुलेशनएक्ट केंद्र सरकार को कुछ वस्तुओं (जैसे खाद्य पदार्थ, उर्वरक और पेट्रोलियम उत्पाद) को अनिवार्य वस्तुओं के रूप में निर्दिष्ट करने का अधिकार देता है। केंद्र सरकार ऐसी अनिवार्य वस्तुओं के उत्पादन, सप्लाई, वितरण, व्यापार और वाणिज्य को रेगुलेट या प्रतिबंधित कर सकती है। अध्यादेश में यह प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार केवल असामान्य परिस्थितियों में कुछ खाद्य पदार्थों, जैसे अनाज, दालों, आलू, प्याज, खाद्य तिलहन और तेलों की सप्लाई को रेगुलेट कर सकती है। इन परिस्थितियों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) युद्ध, (ii) अकाल, (iii) असामान्य मूल्य वृद्धि, और (iv) गंभीर प्रकृति की प्राकृतिक आपदा।
     
  • स्टॉक लिमिट लागू करना: एक्ट के अंतर्गत केंद्र सरकार यह रेगुलेट कर सकती है कि कोई व्यक्ति किसी अनिवार्य वस्तु का कितना स्टॉक रख सकता है। अध्यादेश में यह अपेक्षा की गई है कि विशिष्ट वस्तुओं की स्टॉक की सीमा मूल्य वृद्धि पर आधारित होनी चाहिए। स्टॉक की सीमा निम्नलिखित स्थितियों में लागू की जा सकती है: (i) अगर बागवानी उत्पाद के रीटेल मूल्य में 100% की वृद्धि होती है, और (ii) नष्ट न होने वाले कृषि खाद्य पदार्थों के रीटेल मूल्य में 50% की वृद्धि होती है। वृद्धि की गणना, पिछले 12 महीने के मूल्य, या पिछले पांच महीने के औसत रीटेल मूल्य (इनमें से जो भी कम होगा) के आधार पर की जाएगी।
     
  • अध्यादेश में प्रावधान है कि कृषि उत्पाद के प्रोसेसर या वैल्यू चेन के हिस्सेदार व्यक्ति पर स्टॉक की सीमा लागू नहीं होगी, अगर उस व्यक्ति का स्टॉक निम्नलिखित से कम है: (i) प्रोसेसिंग की इंस्टॉल्ड क्षमता की सीमा, या (ii) निर्यातक की स्थिति में निर्यात की मांग। वैल्यू चेन के हिस्सेदार का अर्थ है, ऐसा व्यक्ति जो उत्पादन में संलग्न है या कृषि उत्पाद की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, स्टोरेज, परिवहन या वितरण के किसी चरण में उसका मूल्य संवर्धन करता है।

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उत्पाद की बिक्री हेतु हस्ताक्षरित कृषि समझौतों को रेगुलेट करने के लिए अध्यादेश जारी 

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org

मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता अध्यादेश, 2020 को जारी किया गया।[70] यह अध्यादेश कृषि उत्पादों की बिक्री और खरीद के संबंध में किसानों को संरक्षण देने और उनके सशक्तीकरण हेतु फ्रेमवर्क प्रदान करता है। इस अध्यादेश के प्रावधान राज्यों के एपीएमसी एक्ट्स के प्रावधानों के होते हुए भी लागू रहेंगे। अध्यादेश के मुख्य प्रावधानों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कृषि समझौताअध्यादेश में प्रावधान है कि किसी कृषि उत्पाद के उत्पादन या पालन से पहले कृषि समझौता किया जाएगा, जिसका उद्देश्य यह है कि किसान अपने कृषि उत्पादों को स्पॉन्सर्स को आसानी से बेच सकें। स्पान्सर में व्यक्ति, पार्टनरशिप फर्म्स, कंपनियां, लिमिटेड लायबिलिटी ग्रुप्स और सोसाइटियां शामिल हैं। ये समझौते निम्नलिखित के बीच हो सकते हैं: (i) किसान और स्पान्सर, या (ii) किसान, स्पॉन्सर, और तीसरा पक्ष। तीसरे पक्ष में एग्रीगेटर भी शामिल हैं और कृषि समझौते में उनकी भूमिका और सेवाओं का स्पष्ट रूप से उल्लेख होगा। एग्रीगेटर वे होते हैं जो एग्रीगेशन से संबंधित सेवाएं प्रदान करने के लिए किसान और स्पॉन्सर के बीच बिचौलिये का काम करते हैं। समझौते में कृषि उत्पाद की सप्लाई, गुणवत्ता, मानदंड और मूल्य से संबंधित नियमों और शर्तों तथा कृषि सेवाओं की सप्लाई से संबंधित नियमों का उल्लेख हो सकता है। ये नियम और शर्तें खेती और पालन की प्रक्रिया के दौरान, या डिलिवरी के समय निरीक्षण और सर्टिफिकेशन का विषय हो सकते हैं।
     
  • समझौते की अवधि: समझौते की अवधि एक फसल मौसम या पशु का एक प्रजनन चक्र होगा। अधिकतम अवधि पांच वर्ष होगी। पांच वर्ष के बाद उत्पादन चक्र के लिए, समझौते की अधिकतम अवधि को किसान और स्पॉन्सर आपस में तय करेंगे।
     
  • मौजूदा कानूनों से छूट: कृषि समझौते के अंतर्गत कृषि उत्पाद को उन सभी राज्य कानूनों से छूट मिलेगी, जो कृषि उत्पाद की बिक्री और खरीद को रेगुलेट करते हैं। इन उत्पादों को अनिवार्य वस्तु एक्ट, 1955 के प्रावधानों से छूट मिलेगी और उन पर स्टॉक सीमा की कोई बाध्यता लागू नहीं होगी।
     
  • क़ृषि उत्पाद का मूल्य निर्धारण: अध्यादेश में यह अपेक्षा की गई है कि कृषि उत्पाद की खरीद का मूल्य समझौते में दर्ज होगा। यह कृषि उत्पादों के भुगतान और वितरण के बारे में विवरण भी प्रदान करता है। मूल्य परिवर्तन होने की स्थिति में उनके मूल्य निर्धारण का तरीका कृषि समझौते में उल्लिखित होगा।
     
  • विवाद निपटारा: अध्यादेश विवाद निपटान के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था प्रदान करता है। सबसे पहलेसभी विवादों को समाधान के लिए एक बोर्ड को भेजा जाना चाहिए। यदि तीस दिनों के बाद विवाद अनसुलझा रहता हैतो पक्ष रेज़ोल्यूशन के लिए उप-विभागीय मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सकते हैं। मजिस्ट्रेट के निर्णयों के खिलाफ पक्षों को अपीलीय अथॉरिटी के पास अपील करने का अधिकार होगा।

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किसान उपज व्यापार और वाणिज्य अध्यादेश, 2020 जारी

Saket Surya (saket@prsindia.org)

किसान उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020 को जारी किया गया।[71]  यह अध्यादेश राज्यों के कृषि उत्पाद मार्केट कानूनों (राज्य एपीएमसी एक्ट्स) के अंतर्गत अधिसूचित बाजारों के बाहर किसानों की उपज के निर्बाध व्यापार का प्रावधान करता है। इस अध्यादेश के प्रावधान राज्यों के एपीएमसी एक्ट्स के प्रावधानों के होते हुए भी लागू रहेंगे। मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • उत्पाद का व्यापारअध्यादेश अनुमति देता है कि उपज का राज्यों के बीच और राज्य के भीतर व्यापार निम्नलिखित के बाहर भी किया जा सकता है: (i) राज्य एपीएमसी एक्ट्स के अंतर्गत गठित मार्केट कमिटी द्वारा संचालित मार्केट यार्ड्स के भौतिक परिसर, और (ii) राज्य एपीएमसी एक्ट्स के अंतर्गत अधिसूचित अन्य बाजार, जैसे निजी मार्केट यार्ड्स और मार्केट सब यार्ड्स, प्रत्यक्ष मार्केटिंग कलेक्शन सेंटर्स और निजी किसान उपभोक्ता मार्केट यार्ड्स। उपज के उत्पादन, उसे जमा और एकत्र करने वाली किसी भी जगह पर व्यापार किया जा सकता है, जिसमें फार्म गेट्स, कारखाने के परिसर, वेयरहाउस, सिलो, और कोल्ड स्टोरेज शामिल हैं ।
     
  • व्यापार के लिए पात्रता: अध्यादेश किसानों, किसान उत्पादक संगठनों और किसान उपज की खरीद करने वालों को राज्यों के बीच और राज्य के भीतर व्यापार में निम्नलिखित की अनुमति देता है: (i) थोक व्यापार, (ii) रीटेल, (iii) एंड यूज, (iv) मूल्य संवर्धन, (v) प्रोसेसिंग, (vi) मैन्यूफैक्चरिंग, (vii) निर्यात, या (viii) उपभोग।
  • हालांकि अधिसूचित किसान उपज (राज्य एपीएमसीज़ एक्ट्स के अंतर्गत निर्दिष्ट और रेगुलेटेड कृषि उत्पाद) का व्यापार करने के लिए एंटिटी को निम्नलिखित में से एक होना चाहिए: (i) एक किसान उत्पादक संगठन या कृषि सहकारी संघ, या (ii) एक कृषि सहकारी संघ, या (iii) एक ऐसा व्यक्ति जिसके पास इनकम टैक्स एक्ट के अंतर्गत परमानेंट एकाउंट नंबर हो या ऐसा कोई दस्तावेज जिसे केंद्र सरकार ने अधिसूचित किया हो। 
     
  • इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग: अध्यादेश निर्दिष्ट व्यापार क्षेत्र में किसान उपज की इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग की अनुमति देता है। इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग और ट्रांज़ैक्शन प्लेटफॉर्म को तैयार किया जा सकता है ताकि किसान उपज को प्रत्यक्ष और ऑनलाइन खरीदा और बेचा जा सके। केंद्र सरकार ऐसे प्लेटफॉर्म्स के लिए मोडैलिटी तय कर सकती हैं, जैसे (i) प्रक्रिया, नियम और पंजीकरण का तरीका, और (ii) आचार संहिता, गुणवत्ता का आकलन, और भुगतान का तरीका।
     
  • राज्यों द्वारा कोई फीस नहीं वसूली जाएगी: अध्यादेश के अंतर्गत कोई भी व्यापार करने पर राज्य सरकार किसानों, व्यापारियों और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स से कोई बाजार फीस, सेस या प्रभार नहीं वसूलेगी। 

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कैबिनेट ने 2020-21 खरीफ फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्यों को मंजूरी दी

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने 2020-21 मौसम के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों (एमएसपीज़) को मंजूरी दी।[72] धान (सामान्य) के लिए एमएसपी 1,868 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है जिसमें पिछले वर्ष की एमएसपी (1,815 रुपए प्रति क्विंटल) से 2.9% की बढ़ोतरी है। तालिका 3 में 2020-21 के बाजार मौसम के लिए अधिसूचित एमएसपी तथा 2019-20 की तुलना में परिवर्तन को प्रदर्शित किया गया है।

तालिका 3: 2020-21 मौसम के लिए खरीफ फसलों की एमएसपी (रुपए प्रति क्विंटल में) 

फसल

2019-20

2020-21

परिवर्तन (%)

धान (सामान्य)

1,815

1,868

2.9%

धान (ग्रेड ए) 

1,835

1,888

2.9%

ज्वार (हाइब्रिड) 

2,550

2,620

2.7%

ज्वार (मलडंडी) 

2,570

2,640

2.7%

बाजरा

2,000

2,150

7.5%

रागी

3,150

3,295

4.6%

मक्का

1,760

1,850

5.1%

अरहर (तूअर)

5,800

6,000

3.4%

मूंग

7,050

7,196

2.1%

उड़द

5,700

6,000

5.3%

मूंगफली

5,090

5,275

3.6%

सूरजमुखी के बीज

5,650

5,885

4.2%

सोयाबीन (पीली) 

3,710

3,880

4.6%

तिल

6,485

6,855

5.7%

रामतिल

5,940

6,695

12.7%

कपास (मध्यम रेशा)

5,255

5,515

4.9%

कपास (लंबा रेशा)

5,550

5,825

5.0%

Sources:  Press Information Bureau; PRS.

कैबिनेट ने पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कोष को मंजूरी दी

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने 15,000 करोड़ रुपए के साथ पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कोष की स्थापना को मंजूरी दे दी है जिसकी घोषणा आत्मनिर्भर भारत इकोनॉमिक पैकेज के अंतर्गत की गई है।[73],[74] इस कोष का लक्ष्य डेयरी और मीट प्रोसेसिंग तथा मूल्य संवर्धन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में निजी निवेश को बढ़ावा देना है। इसके दायरे में पशु चारा संयंत्रों की स्थापना हेतु निवेश भी शामिल है।

निजी कंपनियां, एमएसएमईज़, किसान उत्पादक संगठन और व्यक्ति इसके पात्र लाभार्थी होंगे, बशर्ते कि वे अपने कुल निवेश का कम से कम 10योगदान दें। शेष 90निवेश के लिए बैंक ऋण देगा। 

केंद्र सरकार पात्र लाभार्थियों को उनके ऋण पर 3ब्याज सबसिडी देगी। इसके अतिरिक्त लाभार्थी दो वर्ष की मोरटोरियम की अवधि समाप्त होने के बाद छह वर्ष के बीच ऋण की मूल राशि चुका सकते हैं। सरकार 750 करोड़ रुपए की राशि से ऋण गारंटी कोष की स्थापना भी करेगी जिसे नाबार्ड द्वारा प्रबंधित किया जाएगा। यह कोष एमएसएमईज़ की स्वीकृत परियोजनाओं हेतु अधिकतम 25ऋण राशि पर गारंटी प्रदान करेगा।

 

एमएसएमई

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के वर्गीकरण में संशोधन किए 

सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम दर्जे के उद्यमों की परिभाषा में परिवर्तन को अधिसूचित किया।[75] वर्तमान में एमएसएमईज़ को सूक्ष्मलघु और मध्यम उद्यम विकास एक्ट2006 के अंतर्गत परिभाषित किया जाता है। यह एक्ट उन्हें निम्नलिखित के आधार पर सूक्ष्मलघु और मध्यम दर्जे के उद्यमों में वर्गीकृत करता है: (i) माल की मैन्यूफैक्चरिंग या उत्पादन में संलग्न उद्यमों द्वारा प्लांट और मशीनरी में निवेशऔर (ii) सेवाएं प्रदान करने वाले उद्यमों द्वारा उपकरणों में निवेश। संशोधित परिभाषा के अनुसार, निवेश सीमा को बढ़ाया गया है और उद्यमों के वार्षिक टर्नओवर को एमएसएमई के वर्गीकरण के अतिरिक्त मानदंड के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। संशोधित निवेश और टर्नओवर की सीमाओं को तालिका 4 में निर्दिष्ट किया गया है। यह 1 जुलाई, 2020 से प्रभावी होगा। 

तालिका 4: एमएसएमईज़ को परिभाषित करने के मानदंड 

 

2006 एक्ट के मानदंड

संशोधित मानदंड

 

निवेश (रुपए में)

निवेश और टर्नओवर (रुपए में)

प्रकार

मैन्यूफैक्चरिंग

सेवा

मैन्यूफैक्चरिंग और सेवाएं, दोनों

सूक्ष्म

25 लाख रु तक

10 लाख रु तक

निवेश: करोड़ रु तक टर्नओवर: करोड़ रु तक

लघु

25 लाख रु से 5 करोड़ रु 

10 लाख रु से 2 करोड़ रु

निवेश: करोड़ रु से 10 करोड़ रु - टर्नओवर: करोड़ रु से 50 करोड़ रु 

मध्यम

करोड़ रु से 

10 करोड़ रु

करोड़ रु से 5 करोड़ रु

निवेश: 10 करोड़ रु से 50 करोड़ रु- टर्नओवर: 50 करोड़ रु से 250 करोड़ रु

SourcesMSME Development Act 2006; Gazette Notification, Ministry of Micro, Medium and Small Enterprises (June 1, 2020); PRS.   

प्लांट और मशीनरी में निवेश के कैलकुलेशन को पिछले वर्षों के दौरान इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के अंतर्गत दायर रिटर्न से जोड़ा जाएगा।[76]  नए उद्यमों के लिए निवेश उद्यम के प्रमोटर की स्वघोषणा पर आधारित होगा।  

टर्नओवर की जानकारी जीएसटी आइडेंटिफिकेशन नंबर (जीएसटीआईएन) से जुड़ी होगी। वर्गीकरण के लिए किसी भी उद्यम के कारोबार को कैलकुलेट करते समय वस्तुओं या सेवाओं के निर्यात को बाहर रखा जाएगा। सूचीबद्ध जीएसटीआईएन वाली सभी इकाइयों जिनका एक ही परमानेंट एकाउंट नंबर होगा, को टर्नओवर और निवेश के आंकड़ों के लिए एक उद्यम के रूप में माना जाएगा।

एमएसएमईज़ के लिए गौण ऋण हेतु क्रेडिट गारंटी योजना शुरू

एमएसएमई मंत्रालय ने गौण ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी योजना शुरू की है जिसके अंतर्गत सरकार प्रमोटर्स को स्ट्रेस्ड एमएसएमईज़ में निवेश के लिए 20,000 करोड़ रुपए की गारंटी प्रदान करेगी।[77]  इस योजना को आत्मनिर्भर भारत योजना के अंतर्गत मई 2020 में वित्त मंत्री द्वारा घोषित किया गया था।[78]

योजना के अंतर्गत स्ट्रेस्ड एमएसएमईज़ (जोकि 30 अप्रैल, 2020 को एनपीए बने हैं) के प्रमोटर्स को उनके हिस्से (इक्विटी और ऋण) या 75 लाख रुपए, जो भी कम हो, के बराबर ऋण दिया जाएगा। प्रमोटर इस राशि को इक्विटी के रूप में एमएसएमई में डालेंगे ताकि लिक्विडी में इजाफा हो और ऋण-इक्विटी अनुपात बरकरार रहे। मूल राशि के भुगतान पर सात वर्ष का मोरटोरियम दिया जाएगा। पुनर्भुगतान की अधिकतम अवधि 10 वर्ष होगी। योजना का संचालन सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट के माध्यम से किया जाएगा। 

 

व्यापार और वाणिज्य

Saket Surya (saket@prsindia.org)

निवेश आकर्षित करने के लिए सचिवों के एम्पावर्ड ग्रुप का गठन किया गया

केंद्रीय कैबिनेट ने देश में निवेश को आकर्षित करने के लिए सभी मंत्रालयों/विभागों में सचिवों के एम्पावर्ड ग्रुप और प्रॉजेक्ट विकास इकाइयों की स्थापना को मंजूरी दी है।[79]  इससे विभिन्न मंत्रालयों के बीच तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच निवेश संबंधी नीतियों के लिए समन्वय बढ़ने की उम्मीद है। इसका लक्ष्य बड़ी कंपनियों से विशेष रूप से एफडीआई प्रवाह को आकर्षित करना भी है जोकि कोविड 19 महामारी के कारण उत्पन्न जोखिमों को कम करने के लिए नए भौगोलिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं।  

कैबिनेट सचिव इस एम्पावर्ड ग्रुप के अध्यक्ष होंगे। ग्रुप के अन्य सदस्यों में नीति आयोग के चीफ एग्जेकेटिव ऑफिसर और निम्नलिखित विभागों के सचिव शामिल होंगे: (iउद्योग और आंतरिक व्यापार का संवर्धन, (iiवाणिज्य, (iiiराजस्व और (ivआर्थिक मामले। एम्पावर्ड ग्रुप निम्नलिखित के लिए जिम्मेदार होगा(iसमूचे विवेश वातावरण में नीतिगत स्थिरता और निरंतरता सुनिश्चित करना, (iiमुख्य निवेशकों द्वारा लक्षित तरीके से निवेश को सहज बनाना, (iiiविभाग के निवेश प्रस्तावों का मूल्यांकन, और (ivसमय पर विभिन्न विभागों की मंजूरियों को सुनिश्चित करना।

प्रत्येक विभाग/मंत्रालय के अंतर्गत प्रॉजेक्ट विकास इकाई निवेश प्रॉजेक्ट्स के विकास के लिए जिम्मेदार होगी और वह सुनिश्चित करेगी कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय स्थापित हो। प्रॉजेक्ट विकास इकाइयों के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (iसभी मंजूरियों के साथ प्रॉजेक्ट्स तैयार करना और आबंटन के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करना, और (iiनिवेश संबंधी बाधाओं को चिन्हित करना और उन्हें एम्पावर्ड ग्रुप के समक्ष प्रस्तुत करना।

 

कॉरपोरेट मामले

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

सीएसआर की पात्र गतिविधियों की सूची बढ़ाई गई

कंपनी एक्ट, 2013 के अंतर्गत एक निर्दिष्ट राशि से अधिक नेट वर्थ, टर्नओवर या लाभ वाली कंपनियों को पिछले तीन वत्तीय वर्षों के दौरान अपने औसत शुद्ध लाभ का 2कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी पर खर्च करना होगा। इस धन राशि को कुछ अधिसूचित गतिविधियों पर खर्च किया जाना चाहिए, जैसे शिक्षा को बढ़ावा देना। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने इस सूची में अतिरिक्त मदों को शामिल किया है। इसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के पूर्व सैनिकों तथा विधवा सहित उनके आश्रितों के लाभ हेतु योगदान शामिल है।[80]  

 

इलेक्ट्रॉनिक्स और इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी

Saket Surya (saket@prsindia.org)

राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सार्वजनिक व्यवस्था के आधार पर 59 मोबाइल एप्स पर पाबंदी

इलेक्ट्रॉनिक्स और इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने 59 ऐप्स को इस आधार पर प्रतिबंधित कर दिया कि वे राज्य की संप्रभुताअखंडतासुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं।[81]  इन ऐप्स में टिकटॉक, शेयरइट, यूसी ब्राउजर, एमआई वीडियो कॉल और कैम स्कैनर शामिल हैं। इन ऐप्स का उपयोग मोबाइल और गैर-मोबाइल इंटरनेट-एनेब्ल्ड उपकरणों दोनों में नहीं किया जा सकता।

यह प्रतिबंध इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 के अंतर्गत लगाया गया है।[82] एक्ट केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि वह किसी कंप्यूटर रिसोर्स के माध्यम से किसी जानकारी को सार्वजनिक स्तर पर पहुंचने से रोकने के लिए निर्देश जारी कर सकती है, अगर ऐसा करना राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक हित में है। निर्देश का पालन करने में विफल रहने वाले एक इंटरमीडियरी को सात वर्ष तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।

मंत्रालय ने उल्लेख किया कि ये ऐप्स भारत के बाहर स्थिति सर्वरों को अनाधिकृत तरीके से उपयोगकर्ताओं के डेटा को चोरी करने और गुप्त तरीके से प्रसारित करने में लगे हुए हैं। यह कहा गया कि शत्रु तत्वों द्वारा इस तरह के डेटा के संकलन, उनकी माइनिंग और प्रोफाइलिंग से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। इन ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने भी दिया है।

भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ग्लोबल पार्टनरशिप का संस्थापक सदस्य बना

भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  पर ग्लोबल पार्टनरशिप (जीपीएआई) की सहस्थापना की। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जिम्मेदारपूर्ण विकास और उपयोग के लिए स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय अंतर-सरकारी पहल है।[83]  जीपीएआई के अन्य संस्थापक सदस्य देशों में अमेरिकाब्रिटेनयूरोपीय संघकनाडाजापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। जीपीएआई एआई में अनुसंधानसहयोग और लागू गतिविधियों का सहयोग देना चाहता है। यह एआई के विकास में भाग लेने वाले देशों के अनुभवों और विविधता का लाभ उठाना चाहता है। कोविड-19 के कारण वर्तमान विश्वव्यापी संकट पर बेहतर प्रतिक्रिया देने के लिए एआई का कैसे लाभ उठाया जा सकता हैयह प्रदर्शित करने के तरीके भी विकसित किए जाएंगे। पेरिस में जीपीएआई का एक सचिवालयऔर मॉन्ट्रियल और पेरिस में विशेषज्ञता केंद्र होंगे। 

इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के लिए दिशानिर्देश 

मार्च 2020 में केंद्रीय कैबिनेट ने इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कुछ योजनाओं को मंजूरी दी है।[84],[85],[86]  इलेक्ट्रॉनिक और इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने इन योजनाओं के लिए दिशानिर्देशों की घोषणा की है।[87],[88],[89] घोषणाओं का विवरण इस प्रकार हैं:

  • बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग के लिए प्रोडक्शन इन्सेंटिव योजना: योजना में मोबाइल फोन मैन्यूफैक्चरिंग तथा एसेंबली, टेस्टिंग, मार्केटिंग और पैकेजिंग यूनिट्स सहित विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव को प्रस्तावित किया गया है।84 योजना का उद्देश्य इन इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करना है। योजना बेस ईयर में भारत में बनने वाली वस्तुओं की इनक्रेमेंटल सेल पर 4% से 6इन्सेंटिव प्रदान करेगी।87  यह इन्सेंटिव बेस ईयर, जिसे स्पष्ट किया जाएगा, से लेकर पांच वर्ष तक उपलब्ध होगा।87
     
  • इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और सेमीकंडक्टर्स की मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए योजना: योजना कुछ निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की मैन्यूफैक्चरिंग के लिए 25पूंजीगत व्यय के लिए वित्तीय इन्सेंटिव प्रदान करेगी।85 अनुसंधान और विकास सहित प्लांट, मशीनरी, उपकरण और तकनीक पर पूंजीगत व्यय इस योजना के दायरे में आएंगे।88 योजना के अंतर्गत सेगमेंट्स में निम्नलिखित शामिल हैं: (iमोबाइल, कंज्यूमर और मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, और (iiटेलीकॉम उपकरण।88 
     
  • संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर्स (ईएमसी 2.0) योजना: ईएमसी 2.0 योजना 2012 में घोषित ईएमसी योजना का स्थान लेगी। पिछली योजना के लिए अक्टूबर 2017 तक एप्लिकेशंस ओपन थे।86,[90] योजना इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर्स (ईएमसी) और कॉमन फेसिलिटी सेंटर्स (सीएफसी) को स्थापित करने तथा मौजूदा ईएमसीज़ और सीएफसीज़ को विस्तार देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।89 ईएमसीज़ और सीएफसीज़ इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिज़ाइन और मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को कॉमन फेसिलिटीज़ और सुविधाओं के साथ तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करेंगे।  

 

परिवहन

रेलवे ने खरीद नियमों को सरल बनाने और व्यापार सुगमता में सुधार के लिए परिवर्तनों की घोषणा की

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

रेल मंत्रालय ने खरीद नियमों को सरल बनाने और व्यापार सुगमता में सुधार के लिए परिवर्तनों की घोषणा की।[91]  इससे पूर्व ब्रेक इक्विपमेंट जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं को उन वेंडर्स से खरीदा जाता था जिन्हें उस खास वस्तु के लिए नॉमिनेटेड वेंडर एप्रूविंग एजेंसियों द्वारा मंजूर किया जाता था।[92] उस खास वस्तु के लिए वेंडर्स को मल्टीपल वेंडर एप्रूविंग एजेंसियों से संपर्क करना पड़ता था और मल्टीपल रेलवे यूनिट्स के लिए टेंडर्स में हिस्सा लेने के लिए एप्रूव्ज वेंडर के तौर पर पंजीकरण कराना पड़ता था। 

नए खरीद नियमों के अनुसार, किसी वस्तु के लिए भारतीय रेलवे की किसी वेंडर एप्रूविंग एजेंसी में मंजूर किए गए वेंडर को उस खास वस्तु के लिए सभी रेलवे यूनिट्स द्वारा एप्रूव्ड वेंडर माना जाएगा।

रेंट अ मोटर कैब/साइकिल स्कीम्स को लागू करने के लिए एडवाइजरी जारी  

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने रेंट अ मोटर कैब और रेंट अ मोटरसाइकिल स्कीम्स को लागू करने के लिए एडवाइजरी जारी की।[93]  योजनाएं मोटर कैब्स और मोटरसाइकिल्स को किराए पर लेने से संबंधित कारोबार को रेगुलेट करती हैं। योजनाएं निम्नलिखित से संबंधित प्रावधान करती हैं: (iलाइसेंस देना, (iiमोटर कैब्स को किराए पर देने वाले के कर्तव्य और जिम्मेदारियां, और (iii) लाइसेंसिंग अथॉरिटीज़ की शक्तियां।[94]   

इससे पूर्व किराए पर वाहन चलाने वाले लोगों से यह अपेक्षा की जाती थी कि वे उपयुक्त अथॉरिटी द्वारा जारी आइडेंटिफिकेशन नंबर वाला बैच प्रदर्शित करें। एडवाइजरी के अनुसार, किराए पर वाहन चलाने वाले व्यक्ति से बैच नहीं मांगा जाएगा, अगर उसके पास निम्नलिखित मौजूद हैं: (i) वैध ड्राइविंग लाइसेंस या इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट, और (ii) मोटर कैब या मोटरसाइकिल को रेंट करने के लाइसेंस की प्रति। एडवाइजरी के अनुसार, किराए की मोटरसाइकिल को राज्यों के बीच यात्रा करने की अनुमति है, अगर संबंधित करों का भुगतान किया जाता है। योजना के अंतर्गत किराए की मोटरसाइकिलों की अंतरराज्यीय आवाजाही पर अस्पष्टता नहीं थी।[95]

मोटर वाहन नियमों में ड्राफ्ट संशोधन जारी

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में प्रस्तावित विभिन्न संशोधनों से संबंधित सुझाव आमंत्रित किए हैं।[96],[97],[98],[99]  ये नियम मोटर वाहन एक्ट, 1988 के अंतर्गत जारी किए गए हैं। मुख्य ड्राफ्ट संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पड़ोसी देशों के साथ परिवहनमंत्रालय ने हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के अनुसार पड़ोसी देशों के साथ यात्री या माल वाहनों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए संशोधनों का प्रस्ताव किया।96 संशोधनों में निम्नलिखित से संबंधित प्रावधान हैं (i) सीमा पार वाहनों के परिवहन की शर्तें और परमिट, (ii) ड्राइवर और कंडक्टर के लिए शर्तें, (iii) परिवहन वाहनों पर प्रदर्शित होने वाले विवरण, और (iv) संबंधित राज्यों के परिवहन एवं स्वास्थ्य विभागों, इंटेलिजेंस ब्यूरो और राज्य पुलिस सहित विभिन्न एंटिटीज़ की जिम्मेदारियां। इन पर 18 जुलाई तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।96
  • बीएस-IV उत्सर्जन नियमों के लिए मोहलत: मंत्रालय ने निर्माण उपकरण वाहनों, ट्रैक्टर और हार्वेस्टर के लिए बीएस (सीईवी/टीआरईएम)-IV उत्सर्जन नियमों के अनुपालन में मोहलत से संबंधित संशोधन भी प्रस्तावित किए।97 वर्तमान में इन वाहनों को 1 अक्टूबर, 2020 तक बीएस-IV का अनुपालन करना था। ड्राफ्ट नियम इस समय सीमा को 1 अप्रैल, 2021 तक बढ़ाने का प्रयास करते हैं। इन संशोधनों पर 19 जुलाई, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।97 

इसके अतिरिक्त मंत्रालय ने मार्च 2020 में परामर्श के लिए मूल रूप से जारी किए गए कुछ ड्राफ्ट संशोधनों पर टिप्पणियों को फिर से आमंत्रित किया है।98,99  कोविड-19 के प्रकोप के मद्देनजर टिप्पणियों को फिर से आमंत्रित किया गया है। इनमें निम्नलिखित के प्रावधान वाले संशोधन शामिल हैं: (i) क्रमशः नेशनल रजिस्ट्रार ऑफ ड्राइविंग लाइसेंस और मोटर वाहन के पोर्टल, (ii) लर्नर्स लाइसेंस हासिल करने के तरीके में बदलाव, (iii) टेस्टिंग एजेंसियों के लिए क्वालिटी स्टैंडर्ड्स, और (iv) खराब मोटर वाहनों के निर्देश और रीकॉल का तरीका। इन संशोधनों पर अधिक विवरण के लिए देखें संशोधनों पर 28 जुलाई, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

हल्के या मध्यम दर्जे के कलर ब्लाइंड लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी नियम अधिसूचित 

Saket Surya (saket@prsindia.org)

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन (पांचवां संशोधन) नियम, 2020 को अधिसूचित किया जोकि हल्के से मध्यम कलर ब्लाइंड लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस देने की अनुमति देते हैं।[100],[101] 

नियम केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन करते हैं और इन्हें मोटर वाहन एक्ट, 1988 के अंतर्गत जारी किया गया है। लाइसेंस हासिल करने के लिए मेडिकल फिटनेस के सर्टिफिकेट की जरूरत होगी, जो यह सर्टिफाई करेगा कि(iउस व्यक्ति ने स्टैंडर्ड इशिहारा चार्ट का इस्तेमाल करते हुए कलर ब्लाइंडनेस का टेस्ट दिया है, और (iiव्यक्ति गंभीर या पूरी तरह से कलर ब्लाइंड नहीं है। 

 

आवासन और शहरी मामले

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

पैदल यात्रियों के अनुकूल बाजार बनाने के उपाय 

आवासन और शहरी मामलों के मंत्रालय ने विभिन्न शहरों और म्यूनिसिपल क्षेत्रों में पैदल यात्रियों के अनुकूल बाजार बनाने से संबंधित उपायों का सुझाव दिया है।[102]  ये उपाय साइकिल ट्रैक और पैदल यात्री अनुकूल बाजारों पर विशेष ध्यान देते हुए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देकर वायु गुणवत्ता में सुधार करने का प्रयास करते हैं। मुख्य उपायों में शामिल हैं:

  • बाजारों का चयन: दस लाख या उससे अधिक आबादी वाले शहर कम से कम तीन बाजारों का चयन कर सकते हैं और उन्हें पैदल यात्रियों के अनुकूल बनाने के लिए अधिसूचित कर सकते हैं। अन्य सभी शहर कम से कम एक ऐसे बाजार को अधिसूचित कर सकते हैं। इन बाजार को 30 जून, 2020 तक अधिसूचित किया जा सकता है।
     
  • योजना: विभिन्न हितधारकों के परामर्श से पैदल यात्री अनुकूल बाजारों की योजना बनाई जा सकती है। इनमें विक्रेतानगरपालिका अधिकारीयातायात पुलिसपार्किंग फेसिलिटी देने वालेदुकान मालिक और उपभोक्ता शामिल हो सकते हैं। 30 सितंबर, 2020 तक इसकी योजना बनाई जा सकती है।
     
  • कार्यान्वयन: योजनाओं को छोटी और लंबी अवधि में लागू किया जा सकता है। अल्पकालिक कार्यान्वयन के उपायों में अवरोधक और वाहनों के लिए सड़क बंद करने जैसे अस्थायी और आसान कार्य शामिल हैं। अन्य उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं: (iअतिरिक्त सड़कों के माध्यम से पहुंच में सुधार(iiफुटपाथों को चौड़ा करनाऔर (iiiसाइकिलों के लिए अलग से रास्ता प्रदान करना। अल्पकालिक उपायों के कार्यान्वयन को अक्टूबर 2020 के पहले सप्ताह में शुरू किया जा सकता है। इस तरह के अल्पकालिक उपायों के सफल होने पर पैदल यात्रा को बढ़ावा देने हेतु दीर्घकालिक स्थायी संरचनाएं बनाई जा सकती हैं। 

 

खनन

Saket Surya (saket@prsindia.org)

कोल लिंकेज के रैशनलाइजेशन के लिए नई तकनीक अधिसूचित 

कोयला मंत्रालय ने कोल लिंकेज/कोयले की स्वैपिंग के रैशनलाइजेशन के लिए नई तकनीक को अधिसूचित किया है।[103] कोल लिंकेज बिजली एवं स्टील प्लांट्स जैसे उपभोक्ताओं को कोयला सप्लाई हेतु कोयला खदानों का आबंटन होता है। कोयला कंपनी और कोयला उपभोक्ता के बीच एक अनुबंध के माध्यम से कोयले की सप्लाई की जाती है। रैशनलाइजेशन में कोयले की सप्लाई के स्रोत का हस्तांतरण एक खदान से दूसरे खदान में इस प्रकार किया जाता है कि उपभोक्ता को अपने निकट के स्रोत से कोयला प्राप्त हो। इसका उद्देश्य कोयला परिवहन लागत को कम करना है। इस नई कार्यप्रणाली की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • पात्रता: रैशनलाइजेशन का अर्थ यह है कि दो इच्छुक उपभोक्ता अपनी निश्चित माता का पूरा या उसका कुछ हिस्सा अदल-बदल लें। पहले की पद्धति के अनुसारकेवल बिजली क्षेत्र (पावर प्लांट) के उपभोक्ता ही इसके पात्र थे। नई पद्धति प्रावधान करती है कि अन्य सभी क्षेत्र (जैसे स्टील और सीमेंट क्षेत्र) भी इसके पात्र होंगे। यह व्यवस्था केवल समान क्षेत्र के उपभोक्ताओं को प्राप्त होगी, यानी बिजली से बिजली और रेगुलेटरी से रेगुलेटरी। इस पद्धति के अंतर्गत केवल गैर-कोकिंग कोयले पर विचार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त ई-नीलामी योजनाओं और कैप्टिव कोयला ब्लॉकों से खरीदा गया कोयला इस योजना का पात्र नहीं होगा। केवल घरेलू कोयला लिंकेज और आयातित कोयले से रैशनलाइजेशन किया जा सकता है। हालांकिआयातित कोयले के दो उपभोक्ताओं के बीच ऐसी किसी भी व्यवस्था की अनुमति नहीं दी जाएगी।
     
  • रैशनलाइजेशन की शर्तेंरैशनलाइजेशन ग्रॉस कैलोरिफिक वैल्यू इक्विलेंस में कैलकुलेट की गई मात्रा पर आधारित होगा। इसलिए कोयले की मात्रा पर भी विचार किया जाएगा। लिंकेज धारक मौजूदा अनुबंध के आधार पर मूल्य चुकाएगा और कमर्शियल शर्तों में कोई परिवर्तन नहीं होगा। इस समझौते की न्यूनतम अवधि छह महीने होगी। इसकी अधिकतम अवधि दोनों पक्षों के मौजूदा अनुबंधों की समाप्ति का विषय होगी, जो भी पहले हो।
     
  • बचत का लेखा-जोखा: रैशनलाइजेशन से होने वाली बचत निम्नलिखित को दी जाएगी: (i) अगर कोयला पावर परचेज एग्रीमेंट के अंतर्गत सप्लाई किया गया है तो बिजली वितरण कंपनी को, और (iiगैर रेगुलेटेड क्षेत्र के उपभोक्ताओं (जैसे स्टील और सीमेंट) की स्थिति में भारतीय रेलवे को।

पूर्व मंजूरियों के साथ खनिज ब्लॉक्स की नीलामी के लिए दिशानिर्देश अधिसूचित 

खदान मंत्रालय ने पूर्व मंजूरियों (प्री-एम्बेडेड क्लीयरेंस) के साथ ग्रीनफील्ड खनिज ब्लॉक्स की नीलामी के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।[104] इन खनिज ब्लॉक्स के लिए, खनन का काम शुरू करने के लिए वैधानिक मंजूरियों को राज्य सरकारों से हासिल किया जाएगा और नीलामी में खदान के साथ सफल बोली लगाने वाले को दिया जाएगा।   

इससे निम्नलिखित संभव होगा: (iनीलामी के बाद उत्पादन शुरू करने में विलंब नहीं होगा, (iiव्यापार सुगमता में सुधार होगा, और (iiiभागीदारी बढ़ेगी और नीलामी में उच्च दरें प्राप्त होंगी। इस योजना को राज्यों द्वारा पायलट आधार पर लागू किया जाएगा। प्रत्येक राज्य पूर्व मंजूरियों के साथ नीलामी के लिए कम से कम पांच खनिज ब्लॉक्स को चिन्हित करेंगे। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • मंजूरी हासिल करने के लिए एजेंसी: राज्य सरकार अपेक्षित मंजूरी और अनुमोदन प्राप्त करने के लिए एक परियोजना निगरानी इकाई (पीएमयू) स्थापित कर सकती है। पीएमयू खनन योजना तैयार और मंजूर करवाएगी। सफल बोलीदाता को उत्पादन सीमा को 25% तक बढ़ाने या कम करने की अनुमति दी जाएगी। पीएमयू सरकारी और निजी स्वामित्व वाली भूमि, दोनों के लिए खनन हेतु भूमि अधिकार भी प्राप्त करेगी।
     
  • वन मंजूरी: खनन कार्यों सहित गैर-वन उद्देश्य के लिए वन भूमि के इस्तेमाल हेतु मंजूरी प्राप्त करना आवश्यक है। वन मंजूरी को इन-प्रिंसिपल अप्रूवल और फॉर्मल अप्रूवल के रूप में प्रदान किया जाता है और इसे चरण और चरण II की मंजूरी के लिए भेजा जाता है। पीएमयू केवल चरण I की मंजूरी प्राप्त करेगा। सफल बोली लगाने वाले को नीलामी के बाद चरण II की मंजूरी प्राप्त करनी होगी।
     
  • पर्यावरणीय मंजूरी: सफल बोलीदाता को नई पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त किए बिना अपनी उत्पादन सीमा को 25% बढ़ाने या कम करने की अनुमति दी जाएगी।
  • खर्चों का लेखा-जोखा: मंजूरी प्राप्त करने के लिए पीएमयू द्वारा भुगतान की गई फीसप्रारंभिक रूप से राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी। राज्य सरकार पीएमयू की  संलग्नता और मंजूरी प्राप्त करने के लिए जितना धन खर्च करेगी, उसे बाद में बोलीकर्ता से वसूला जाएगा।

 

बिजली

Saket Surya (saket@prsindia.org)

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के दिशानिर्देशों और मानदंडों में संशोधन

बिजली मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के दिशानिर्देशों और मानदंडों में संशोधनों को अधिसूचित किया है।[105] मूल दिशानिर्देश दिसंबर 2018 में जारी किए गए थे और उन्हें अक्टूबर 2019 में संशोधित किया गया था। मुख्य परिवर्तन इस प्रकार हैं:

  • बिजली आपूर्ति के लिए टैरिफ: संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसारकेंद्रीय या राज्य बिजली रेगुलेटरी आयोग बिजली एक्ट, 2003 के अंतर्गत जारी टैरिफ नीति के अनुसार सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों को बिजली की आपूर्ति के लिए टैरिफ का निर्धारण करेंगे। संशोधनों में कहा गया है कि टैरिफ सप्लाई की औसत लागत तथा 15से अधिक नहीं होगा, जब तक कि टैरिफ नीति द्वारा अन्यथा निर्दिष्ट न किया गया हो। 
     
  • चार्जिंग स्टेशन के प्रकारसंशोधनों में चार्जिंग स्टेशनों के विभिन्न प्रकारों को स्पष्ट किया गया है (तालिका 5)। ये एंटिटीज़ मौजूदा दिशानिर्देशों में स्पष्ट नहीं थीं। संशोधनों में प्रावधान है कि बैटरी चार्जिंग स्टेशन को पब्लिक चार्जिंग स्टेशन के समान माना जाएगा और दोनों प्रकार के चार्जिंग स्टेशन पर बिजली सप्लाई के लिए एक समान टैरिफ लागू होगा।

तालिका 5: विभिन्न प्रकार के चार्जिंग स्टेशनों की परिभाषा

एंटिटी

परिभाषा

पब्लिक चार्जिंग स्टेशन

जहां कोई भी इलेक्ट्रिक वाहन अपनी बैटरी को रीचार्ज कर सकता है

बैटरी चार्जिंग स्टेशन

जहां इलेक्ट्रिक वाहनों की डिस्चार्ज या आंशिक रूप डिस्चार्ज बैटरियों को रीचार्ज किया जा सकता है

कैप्टिव चार्जिंग स्टेशन

जहां चार्जिंग स्टेशन के मालिक के स्वामित्व या नियंत्रण वाले वाहनों की सर्विसिंग होती है

बैटरी स्वैपिंग स्टेशन

जहां इलेक्ट्रिक वाहन अपनी डिस्चार्ज बैटरी को चार्ज बैटरी से बदल सकते हैं

SourceNotification No12/2/2018-EV, Ministry of Power; PRS.

जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों के लिए संयुक्त बिजली रेगुलेटरी आयोग 

केंद्र सरकार ने बिजली एक्ट, 2003 के प्रावधानों के अंतर्गत जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों के लिए संयुक्त बिजली रेगुलेटरी आयोग की स्थापना की।[106] आयोग इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली क्षेत्र के स्वतंत्र रेगुलेटर के तौर पर काम करेगा।

 

नवीन और अक्षय ऊर्जा

Saket Surya (saket@prsindia.org)

नवोन्मेषी स्टैंडएलोन सोलर पंप्स के इंस्टॉलेशन के लिए दिशानिर्देश जारी

नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने नवोन्मेषी स्टैंडएलोन सोलर पंप्स के इंस्टॉलेशन के लिए दिशानिर्देश जारी किए।[107]  वर्तमान में मंत्रालय द्वारा संचालित योजनाओं के अंतर्गतकेवल मंत्रालय के विनिर्देशों को पूरा करने वाले सोलर पंप लगाए जा सकते हैं। मंत्रालय ने कहा कि उसे लागत प्रभावी तरीके से बेहतर प्रदर्शन करने वाले सोलर पंपों के विभिन्न डिजाइन/सॉफ्टवेयर के उपयोग के संबंध में रिप्रेजेंटेशंस प्राप्त हुए हैं। इस प्रकार तकनीक में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने टेस्ट मोड में अपनी योजनाओं के अंतर्गत नवोन्मेषी स्टैंडएलोन सोलर पंप्स के इंस्टॉलेशन की अनुमति देने का निर्णय लिया है। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • आवेदन की प्रक्रिया: मंत्रालय समय-समय पर इनोवेटर्स से आवेदन आमंत्रित करेगा। केवल वे उत्पाद जो परीक्षण और फील्ड परीक्षण के लिए उपलब्ध हैंभागीदारी के लिए पात्र होंगे। प्रस्ताव के साथ एक लागत-लाभ विश्लेषण की आवश्यकता होगी। आवेदनों की जांच के लिए मंत्रालय एक मूल्यांकन समिति का गठन करेगा। आवेदक को उत्पाद की परीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करना जरूरी होगा। कुछ मामलों में मूल्यांकन समिति उत्पाद के प्रदर्शन का दोबारा परीक्षण कर सकती है। 
     
  • फील्ड में प्रदर्शन: मूल्यांकन समिति के सुझाव पर इनोवेटर को प्रदर्शन के उद्देश्य से 50 सोलर पंप लगाने की अनुमति दी जाएगी। फील्ड में प्रदर्शन कम से कम एक वर्ष तक जारी रहेगा। इन पंप्स को कम से कम मंत्रालय के निर्दिष्ट मौजूदा मानकों को पूरा करना होगा।
     
  • इनोवेटर को सोलर पंप के इंस्टॉलेशन पर उसे किए गए भुगतान के बराबर की एक बैंक गारंटी जमा करानी होगी। अगर सोलर पंप के खराब होने के कारण किसानों को नुकसान होता है तो इनोवेटर को उसके नुकसान की भरपाई करनी होगी। 
     
  • तकनीक को अपनानामूल्यांकन समिति के सुझावों पर मंत्रालय नवोन्मेषी तकनीक का इस्तेमाल कर सकता है और स्टेकहोल्डर्स से सलाह करके मौजूदा स्पेसिफिकेशंस को अपडेट कर सकता है।

कचरे से ऊर्जा कार्यक्रम की वैधता को बढ़ाया गया 

शहरीऔद्योगिककृषि अपशिष्ट/अवशेषों और शहरी ठोस कचरे से ऊर्जा पर केंद्रित कार्यक्रम को 31 मार्च, 2021 या 15 वें वित्त आयोग के सुझाव लागू होने की तारीख तक बढ़ाया गया है (इनमें से जो भी पहले हो)।[108]  कार्यक्रम 31 मार्च, 2020 को समाप्त हो गया है। यह कार्यक्रम बायोगैस उत्पादन और बायोगैस से बिजली उत्पादन सहित कचरे से ऊर्जा प्रॉजेक्ट्स को लगाने के लिए डेवलपर्स को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

 

पर्यावरण

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के अंतर्गत उत्पादकों की जिम्मेदारियों के लिए दिशानिर्देश जारी 

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी (ईपीआर) के यूनिफॉर्म फ्रेमवर्क पर दिशानिर्देश जारी किए।[109]  प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम में ईपीआर का अर्थ है, उत्पाद के पूरे जीवन चक्र में उत्पादक की पर्यावरणीय प्रबंधन की जिम्मेदारी।[110]  इस फ्रेमवर्क का आधार यह है कि उत्पादक प्लास्टिक कचरा एकत्र प्रणालियों तथा रीसाइकलिंग उद्योग को वित्तीय प्रोत्साहन देने के लिए जिम्मेदार है ताकि वे सरकार के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्लास्टिक कचरे को जमा और प्रसंस्करित करें।

ईपीआर को लागू करने की प्रणाली का मूल्यांकन करने हेतु गठित कमिटी ने कहा था कि कचरे को जमा करने और उसे अलग-अलग करने की जिम्मेदारी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) की है। उसने कहा था कि उत्पादकों को यह जिम्मेदारी देना अप्रभावी साबित होगा। उसने ईपीआर के लिए यूनिफॉर्म फ्रेमवर्क का सुझाव दिया था जोकि राष्ट्रीय रजिस्ट्रेशन और डेटाबेस रेपोजिटरी तैयार करने पर आधारित होना चाहिए। ईपीआर के अंतर्गत सभी लेनदेन वेब पोर्टल से प्रबंधित होने चाहिए। इसके अतिरिक्त कमिटी ने कहा था कि ईपीआर के लिए एक सिंगल विंडो पूरे देश के लिए काम नहीं करेगा। उसने ईपीआर अनुपालन के लिए विभिन्न मॉडल्स का सुझाव दिया था। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं

  • फी आधारित मॉडल: यह मॉडल ऐसे उत्पादकों (आयातकों और ब्रांड ओनर्स सहित) पर लागू हो सकता है जो पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक की कम मात्रा (सरकार द्वारा निर्धारित कट-ऑफ से कम) का इस्तेमाल करते हैं। उन्हें केंद्रीय स्तर पर ईपीआर कॉरपस फंड में योगदान करना चाहिए। कोई उत्पादक कितनी राशि का योगदान करेगा, यह प्लास्टिक कचरे के उत्सर्जन और यूएलबी द्वारा उस कचरे को हैंडिल करने में किए गए प्रयास और खर्च किए गए धन पर आधारित होगा।
     
  • प्लास्टिक क्रेडिट मॉडलइस मॉडल के अंतर्गत उत्पादक को अपनी पैकेजिंग को खुद रीसाइकिल करने की जरूरत नहीं, बल्कि उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि इस बाध्यता को पूरा करने के लिए उसने उतने ही पैकेजिंग कचर को रिकवर और रीसाइकल किया है। उत्पादक के लिए यह अनिवार्य है कि वह सत्यापित प्रोसेसर या निर्यातक से रीसाइकलिंग का प्रमाण (प्लास्टिक क्रेडिट) हासिल करे।
     
  • प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी ऑर्गेनाइजेशंस: उत्पादक प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी ऑर्गेनाइजेशन (पीआरओ) का सदस्य बन सकते हैं जोकि अपनी सदस्य कंपनियों की ओर से कानूनी जरूरतों को पूरा करते हैं। पीआरओज़ उत्पादक की कॉन्ट्रैक्टर सेवा के तौर पर काम करेंगे। हालांकि प्लास्टिक पैकेजिंग की रीप्रोसेसिंग का प्रमाण देने की अंतिम जिम्मेदारी उत्पादक की ही होगी। 

दिशानिर्देशों पर टिप्पणियां 31 जुलाई, 2020 तक आमंत्रित हैं।

विदेशी जीवित प्रजातियों के आयात और  अधिकार के लिए एडवाइजरी जारी 

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भारत में जीवित विदेशी प्रजातियों के आयात और अधिकार पर एडवाइजरी जारी की।[111]  जीवित विदेशी प्रजातियां ऐसे पशुओं को कहते हैं जोकि कन्वेंशन ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड इन एंडेंजर्ड स्पीशीज़ ऑफ वाइल्ड फॉना एंड फ्लोरा (सीआईटीईएस) के अंतर्गत आते हैं। सीआईटीईएस सरकारों के बीच अंतरराष्ट्रीय समझौता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वन्य जीवों और पौधों की प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार से उनके अस्तित्व को कोई खतरा नहीं है।[112]  भारत ने सीआईटीईएस को 1976 में रैटिफाई किया है।[113]

एडवाइजरी की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • स्वैच्छिक खुलासा: जीवित विदेशी प्रजातियों की इन्वेंटरी स्वैच्छिक प्रकटीकरण (डिस्क्लोजर) योजना के जरिए विकसित की जाएगी। उनके ओनर या होल्डर को संबंधित राज्य चीफ वाइल्डलाइफ वॉर्डन (वन्य जीव (संरक्षण) एक्ट, 1972 के अंतर्गत स्थापित) को यह खुलासा एडवाइजरी जारी होने के छह महीने के भीतर करना होगा। वॉर्डन छह महीने के भीतर स्टॉक को रजिस्टर करेगा और अधिकार (या जीवित विदेशी प्रजातियों के कब्जे) से संबंधित सर्टिफिकेट जारी करेगा।
     
  • अगर जीवित विदेशी प्रजातियों का खुलासा छह महीने के भीतर कर दिया जाता है तो ओनर या होल्डर को मौजूदा कानूनों के अंतर्गत दस्तावेजीकरण का अनुपालन करना होगा।
     
  • किसी अधिग्रहण, मृत्यु, व्यापार, कब्जे में परिवर्तन या आयातित पशु के जन्म देने से संबंधित खुलासा संबंधित राज्य चीफ वाइल्डलाइफ वॉर्डन को ऐसी गतिविधि के 30 दिनों के भीतर करना होगा। 
     
  • आयात और स्टॉक का रखरखावआयातक को जीवित विदेशी प्रजातियों के लाइसेंस के लिए आवेदन करने के साथ-साथ संबंधित राज्य चीफ वाइल्डलाइफ वॉर्डन से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट भी लेना होगा। आयातक को इन प्रजातियों के स्टॉक के रखरखाव के लिए कुछ कदम उठाने होंगे। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) आयातित प्रजातियों का हेल्थ कार्ड रखना, (iiउनकी हाउसिंग की सुविधाओं का विवरण प्रदान, और (iiiयह सुनिश्चिचत करना कि जीवित विदेशी प्रजातियों को देशी पशु प्रजातियों से मिक्स या ब्रेड नहीं किया गया है।

 

स्वास्थ्य

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

कैबिनेट ने भारतीय चिकित्सा और होम्योपैथी के लिए फार्माकोपिया आयोग की स्थापना को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने आयुष मंत्रालय के अधीनस्थ कार्यालय के तौर पर भारतीय चिकित्सा और होम्योपैथी के लिए फार्माकोपिया आयोग (पीसीआईएमएंडएच) की स्थापना को मंजूरी दी।[114]  भारतीय चिकित्सा की फार्माकोपिया लेबोरेट्री और होम्योपैथिक फार्माकोपिया लेबोरेट्री के साथ इसका विलय किया जाएगा। इन दोनों केंद्रीय प्रयोगशालाओं को 1975 में गाजियाबाद में स्थापित किया गया था। विलय से पूर्व पीसीआईएमएंडएच आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन था। पुनर्गठन के बाद पीसीआईएमएंडएच आयुष दवाओं और फॉर्मूलेशंस के लिए मानकों का एक समान रूप से विकसित करने, दवाओं के स्टैंडर्डाजेशन वर्क के डुप्लिकेशन को रोकने और संसाधनों के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ावा देने का काम करेगा। 

 

महिला एवं बाल विकास

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

मातृत्व और शैशव से संबंधित मुद्दों की जांच के लिए टास्क फोर्स गठित

2020-21 के लिए केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री ने मातृत्व और शैशव से संबंधित मुद्दों पर टास्क फोर्स गठित करने का प्रस्ताव रखा था जोकि छह महीने में अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।[115]  इसके बाद केंद्र सरकार ने इन मुद्दों की जांच के लिए टास्क फोर्स बनाई।[116]  यह निम्नलिखित के साथ विवाह की उम्र और मातृत्व के बीच अंतर संबंध की भी जांच करेगी: (iमां और बच्चे का स्वास्थ्य, चिकित्सकीय कल्याण और पोषण की स्थिति, (ii) मुख्य मापदंड, जैसे शिशु मृत्यु दर, मातृत्व मृत्यु दर और बच्चों का लिंग अनुपात, तथा (iiiइस संबंध में स्वास्थ्य एवं पोषण से संबंधित अन्य प्रासंगिक मुद्दे। इसके अतिरिक्त वह महिलाओं में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उपाय सुझा सकती है। अपने अध्ययन के आधार पर टास्क फोर्स यह भी सलाह दे सकती है कि उसके सुझावों को लागू करने के लिए क्या कानूनी बदलाव किए जाएं। टास्क फोर्स की अध्यक्ष जया जेटली होंगी और यह अपनी रिपोर्ट 31 जुलाई, 2020 तक सौंप देंगी।

 

सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

नशा मुक्त भारत: वार्षिक कार्य योजना (2020-21) प्रारंभ

सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्रालय ने 2020-21 के लिए नशा मुक्त भारत: वार्षिक कार्य योजना की शुरुआत की। योजना देश के 272 सर्वाधिक प्रभावित जिलों में मादक पदार्थों के सेवन की समस्या पर केंद्रित है।[117]  योजना में खास तौर शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और स्कूलों में जागरूकता फैलाने से संबंधित कार्यक्रम शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त इसमें नशे के लती लोगों की पहचान करना और अस्पतालों तथा नशा मुक्ति केंद्रों में उपचार शामिल होगा। इस योजना को मंत्रालय और नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा लागू किया जाएगा।

 

युवा मामले और खेल

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

राज्य और जिला स्तर पर खेलो इंडिया केंद्र स्थापित

युवा मामले और खेल मंत्रालय प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सिलेंस (केआईएससीई) की स्थापना करेगा।[118]  ये एलीट और ओलंपिक स्तर के एथलीट्स को प्रशिक्षित करेंगे। 

आठ राज्यों में राज्य के स्वामित्व वाले खेल संगठनों की पहचान की गई है जिन्हें केआईएससीई में अपग्रेड किया जाएगा। इन राज्यों में कर्नाटकओडिशाकेरलतेलंगानाअरुणाचल प्रदेशमणिपुरमिजोरम और नागालैंड शामिल हैं। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश केआईएससीई चलाएंगेजबकि केंद्र सरकार सुविधाओं को अपग्रेड करने के लिए धन मुहैया कराएगी।

इसके अलावा मंत्रालय वित्त वर्ष 2020-21 में स्थापित होने वाले 100 केआईसी के साथ जिला स्तर पर 1,000 खेलो इंडिया सेंटर (केआईसी) स्थापित करेगा।[119]  मौजूदा स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के एक्सटेंशन सेंटरों को केआईसी में बदलने का विकल्प दिया जाएगा। इसके अलावाअपनी अकादमियों को स्थापित करने के लिए पूर्व चैंपियन की पहचान की जाएगी। प्रत्येक कोआईसी को कोचों के पारिश्रमिकउपकरणों की खरीदखेल किटऔर प्रतियोगिता और कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए अनुदान प्रदान किया जाएगा।

 

अंतरिक्ष

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

कैबिनेट ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सुधारों को मंजूरी दी   

केंद्रीय कैबिनेट ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूती देने के लिए कुछ सुधारों को मंजूरी दी।[120],[121]  इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर नामक स्वायत्त नोडल एजेंसी अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत स्थापित की जाएगीजो अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी उद्योग की गतिविधियों को अनुमति देने और रेगुलेट करने के लिए एक अलग वर्टिकल होगा। 

सेंटर इसरो से तकनीकी विशेषज्ञता के साथ नीतियों और एक अनुकूल रेगुलेटरी वातावरण के जरिए अंतरिक्ष क्षेत्र निजी उद्योगों को बढ़ावा देगा और उनका मार्गदर्शन करेगा। निजी उद्योग की आवश्यकताओं का आकलन करने और गतिविधियों के समन्वय के लिए तकनीकीकानूनीसुरक्षा और निगरानी के लिए इसके अपने स्वतंत्र निदेशालय होंगे। अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएलअंतरिक्ष सेवाओं के लिए सप्लाई के स्थान पर मांग बेस्ड मॉडल के आधार पर काम करेगा। एनएसआईएल इसरो की वाणिज्यिक शाखा हैजो वर्तमान में इसरो की लघु उपग्रह प्रौद्योगिकी को उद्योगों को ट्रांसफर करती है। लॉन्च वेहिकल, सेटेलाइट प्रोडक्शन, लॉन्च सर्विस और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं के क्षेत्र में इसरो जो काम करता है, उसे एनएसआईएल द्वारा किया जाएगा। यह उद्योग संघों के माध्यम से इन गतिविधियों को अंजाम देगा। इन सुधारों से इसरो को अनुसंधान और विकास के लिए अधिक समय और संसाधन मिलेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है। 

 

[1] Ministry of Health and Family Welfare website, last accessed on March 31, 2020, https://www.mohfw.gov.in/index.html.

[2] Order No40-3/2020-DM-I(A), Ministry of Home Affairs, March 24, 2020, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHAorder%20copy.pdf

[3] Order No40-3/2020-DM-I(A), Ministry of Home Affairs, June 29, 2020, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHAOrder_29062020.pdf.

[4] The Insolvency and Bankruptcy (AmendmentOrdinance, 2020, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/IBC.pdf

[6] 2Interest Subvention approved on prompt repayment of Shishu Loans under Pradhan Mantri MUDRA Yojana for a period of 12 months, Cabinet, Press Information Bureau, June 24, 2020.

[7] "COVID-19 – Regulatory Package", Notifications, Reserve Bank of India, May 23, 2020, https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=11902&Mode=0.

[8] Section 42(1of the Reserve Bank of India Act, 1934 Change in Minimum Daily Maintenance of the Cash Reserve Requirement, Notifications, Reserve Bank of India, June 26, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NT2605F809C57D5964AA38BBA3D126E91AF10.PDF.

[9] Section 24 of the Banking Regulation Act, 1949 – Maintenance of Statutory Liquidity Ratio (SLR) – Marginal Standing Facility (MSF)”, Notifications, Reserve Bank of India, June 26, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/259MSFE3EA811D8394E4DD8B6989A714CBCD466.PDF.

[10] Statement on Developmental and Regulatory Practices, Reserve Bank of India, Press Releases, March 27, 2020, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=49582.

[11] S.O2033(E), Gazette of India, Ministry of Finance, June 24, 2020, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220145.pdf.

[12] The Taxation and Other Laws (Relaxation of Certain ProvisionsOrdinance, 2020, Gazette of India, Ministry of Law and Justice, March 31, 2020, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/218979.pdf.

[13] G.S.R235(E), Gazette of India, Ministry of Finance, April 3, 2020, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/219000.pdf.

[14] G.S.R416(E), Gazette of India, Ministry of Finance, June 27, 2020, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220211.pdf.

[15] Notification No 53/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, March 24, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2053_0.pdf.

[16] Notification No 4/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, May 6, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%204%20dt%2006.05.2020%20Eng_0.pdf.

[17] Notification No08/2015-20,  Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 1, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/noti%2008%20eng_0.pdf.

[18] Notification No 59/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, April 4, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2059%20Final%20Eng_0.pdf.

[19] Notification No 09/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 10, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2009%20eng_0.pdf.

[20] Notification No 54/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, March 25, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/notification%2054_0.pdf

[21] Notification No 13/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 18 , 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2013%20Eng_0.pdf.

[22] Notification No 44/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, January 31 , 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2044_0.pdf.

[23] Notification No 6//2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, May 16, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Notification%20English%20Final_0.pdf.

[24] Notification No 14/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 22, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2014%20Eng%20ss_0.pdf.

[25] Scheme guidelines for PM Street Vendors AtmaNirbhar Nidhi, Ministry of Housing and Urban Affairs, http://mohua.gov.in/pm_svandhi/guidelines.pdf

[26] Scheme of Special Micro-Credit Facility launched for Street Vendors-Striving towards Atmanirbhar Bharat, Ministry of Housing and Urban Affairs, Press Information Bureau, June 19, 2020

[27] Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending Act, 2014, http://legislative.gov.in/sites/default/files/A2014-7.pdf.  

[28] Master Circular NoDBOD.No.BP.BC17/21.04.048/2009-10, Reserve Bank of India, July 1, 2009,

https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/39MCC010709_FULL.pdf.

[29] FNo7-1/2019-BP.III(Pt.)(371225), Department of Food and Public Distribution, June 30, 2020, https://dfpd.gov.in/LwB3AHIAaQB0AGUAcgBlAGEAZABkAGEAdABhAC8AUABvAHIAdABhAGwALwBOAGUAdwBzAC8A297_1_Extension_of_PMGKAY.pdf.

[30] PM announces extension of Pradhan Mantri Garib Kalyan Ann Yojana till November, Press Information Bureau, Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Distribution, June 30, 2020.

[31] “Massive employment generation-cum-rural public works creation campaign the Garib Kalyan Rojgar Abhiyaan launched by Prime Minister Shri Narendra Modi today, Ministry of Rural Development, Press Information Bureau, June 20, 2020.

[32] “Travel and Visa restrictions related to COVID-19, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, June 26, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130652663

[33] “Travel and Visa restrictions related to COVID-19, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, May 30, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130625797 

[34] “Management of airlines crew due to COVID-19 outbreak, Addendum to Circular No4/1/2020-IR dated 23.03.20, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, June 22, 2020,  https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130648509

[35] “Extension of validity of recurrent dangerous goods regulations training due to the COVID-19 pandemic, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, June 19, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130651660

[36] “Aeromedical Disposition of COVID-19, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, June 22, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130649317

[37] “Wildlife hazard management at airports, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, June 8, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130636326

[39] Office Memorandum No25022/24/2020-F.V./F.I., Foreigners Division, Ministry of Home Affairs, June 22, http://164.100.117.97/WriteReadData/userfiles/Business%20Visa%20permission%2001.06.2020.pdf.

[40] F.NoAV.29017/5/2020-DT, Ministry of Civil Aviation, June 29, 2020, https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/MoCA_OM_dated_29_06_2020.pdf.

[41] Indian Railways to give full refund for all tickets booked on or prior to 14th April 2020 for regular time tabled trains, Press Information Bureau, Ministry of Railways, June 23, 2020.

[42] Measures to be taken by StatesUTsCities/Metro Rail Companies in view of COVID-19 for providing urban transport services, Press Information Bureau, Ministry of Housing and Urban Affairs, June 12, 2020.  

[43] Validity of motor vehicle documents further extended till 30th September, 2020, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, June 9, 2020.

[44] “Validity of expired Driving Licences and Vehicle Registration Extended Till June 30, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, March 31, 2020

[45]   S.O1964(E), Gazette of India, Ministry of Law and Justice, June 19, 2020,  http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220011.pdf.

[46] Guidelines on introduction of short term health insurance policies providing coverage for COVID-19 disease, Circular, Insurance Regulatory and Development Authority of India, June 23, 2020, https://www.irdai.gov.in/ADMINCMS/cms/whatsNew_Layout.aspx?page=PageNo4159&flag=1.

[48] General Circular No15/2020, Ministry of Corporate Affairs, April 8, 2020, http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/Circular14_08042020.pdf

[49] General Circular No22/2020, Ministry of Corporate Affairs, June 15, 2020http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/Circular22_15062020.pdf.

[50] General Circular No23/2020, Ministry of Corporate Affairs, June 17, 2020, http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/Circular23_17062020.pdf.

[51] “Cabinet approves Extension of tenure of the Commission constituted under Article 340 of the constitution to examine the issue of sub-categorization within Other Backward Classes in the Central List, Press Information Bureau, Cabinet, June 24, 2020

[52] Operational Recommendations for Tourism Service Providers, Ministry of Tourism, http://tourism.gov.in/sites/default/files/Operational%20Recommendations%20forTourism%20Service%20Providers.pdf.

[53] Operational Recommendations for Restaurants, Ministry of Tourism, http://tourism.gov.in/sites/default/files/SOP%20Restaurants1.pdf.

[54] Operational Recommendations for Hotels, Ministry of Tourism, http://tourism.gov.in/sites/default/files/SOP%20Hotels.pdf.

[55] Operational Recommendations for B&BHomestayFarmstay, Ministry of Tourism, http://tourism.gov.in/sites/default/files/Operational%20Recommendations%20for%20%20Homestay.pdf.

[56] Draft Environment Impact Assessment Notification 2020, Ministry of Environment, Forests and Climate Change, March 12, 2020, http://moef.gov.in/wp-content/uploads/2020/03/Draft_EIA2020.pdf.

[57] S.O1429(E), Ministry of Environment, Forests and Climate Change, May 8, 2020, http://moef.gov.in/wp-content/uploads/2020/05/EIA-2020_extn-of-period.pdf.

[58] Delhi HC extends public response deadline to draft EIA 2020, The Hindu, June 30, 2020, https://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/delhi-hc-extends-public-response-deadline-to-draft-eia-2020/article31951610.ece.

[59] Notification No 15/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 25, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Notification%2015%20English.pdf.

[60] “Developments in Indias Balance of Payments during the Fourth Quarter (January-Marchof 2019-20, Reserve Bank of India, June 30, 2020,  https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR256878A4C6211C9A47D6A9B09BC8100C57D1.PDF.

[62] "Framework for Regulatory Sandbox", Circulars, Securities and Exchange Board of India, June 5, 2020, https://www.sebi.gov.in/legal/circulars/jun-2020/framework-for-regulatory-sandbox_46778.html.

[63] Enabling Framework for Regulatory Sandbox, Reports, Reserve Bank of India, August 13, 2019, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PublicationReport/Pdfs/ENABLING79D8EBD31FED47A0BE21158C337123BF.PDF.

[64] Draft Pension Fund (Foreign InvestmentRules, 2020, Department of Financial Services, Ministry of Finance, June 19, 2020, https://financialservices.gov.in/sites/default/files/Draft%20Pension%20Fund%20%28Foreign%20Investment%29%20Rules%2C%202020.pdf.

[65] Consolidated FDI Policy, Department of Industrial Policy and Promotion, Ministry of Commerce and Industry, https://dipp.gov.in/sites/default/files/CFPC_2017_FINAL_RELEASED_28.8.17.pdf.

[66] Reserve Bank constitutes an Internal Working Group to review extant ownership guidelines and corporate structure for Indian private sector banks, Press Releases, Reserve Bank of India, June 12, 2020, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=49945.

[67] RBI announces creation of Payments Infrastructure Development Fund, Press Releases, Reserve Bank of India, June 5, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR2453983A1FE6D395422BB8A282B63C27FC09.PDF.

[68] Details of tier-wise classification of centres based on population, Master Circular on Branch Authorisation Census data 2011, Reserve Bank of India, September 1, 2016, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NT60319C925B21E045D9952EA3023925A8B9.PDF.

[70] The Farmers (Empowerment and ProtectionAgreement on Price Assurance and Farm Services Ordinance, 2020, https://www.prsindia.org/billtrack/farmers-empowerment-and-protection-agreement-price-assurance-and-farm-services-ordinance

[72] Minimum Support Prices (MSPfor Kharif Crops for marketing season 2020-21, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, June 1, 2020.

[73] Cabinet approves establishment of Animal Husbandry Infrastructure Development Fund, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, June 24, 2020.

[74] Presentation of details of 3rd Tranche by Union Finance & Corporate Affairs Minister SmtNirmala Sitharaman under Aatmanirbhar Bharat Abhiyaan to support Indian economy in fight against COVID-19, Press Information Bureau, Ministry of Finance, May 15, 2020.

[75] S.O1702(E), Notification, Ministry of Micro, Medium and Small Enterprises, The Gazette of India, June 1, 2020, https://msme.gov.in/sites/default/files/MSME_gazette_of_india_0.pdf.

[76] S.O2119(E), Notification, Ministry of Micro, Medium and Small Enterprises, The Gazette of India, June 26, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220191.pdf.

[77] Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises (MSMEslaunches another funding scheme to help the distressed MSME sector, Press Information Bureau, Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises, June 24, 2020.

[79] “Government approves setting up of an Empowered Group of Secretaries (EGoSand Project Development Cells (PDCsin Ministries/Departments for attracting investments in India, Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, June 3, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1629037

[80] G.S.R399(E), Gazette of India, Ministry of Corporate Affairs, June 23, 2020,  http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220133.pdf.

[81] “Government Bans 59 mobile apps which are prejudicial to sovereignty and integrity of India, defence of India, security of state and public order, Press Information Bureau, Ministry of Electronics and Information Technology, June 29, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1635206.

[82] Section 69A, The Information Technology Act, 2000, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/1999/3/A2000-21.pdf.

[83] India joins Global Partnership on Artificial Intelligence (GPAIas a founding member to support the responsible and human-centric development and use of AI, Press Information Bureau, Ministry of Electronics and Information Technology, June 15, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1631676. 

[84] Cabinet approves Production Linked Incentive Scheme for Large Scale Electronics Manufacturing, Union Cabinet, Press Information Bureau, March 21, 2020.

[85] Cabinet approves Scheme for Promotion of manufacturing of Electronic Components and Semiconductors, Union Cabinet, Press Information Bureau, March 21, 2020.

[86] “Cabinet approves Modified Electronics Manufacturing Clusters (EMC 2.0Scheme, Union Cabinet, Press Information Bureau, March 21, 2020.

[87] “Guidelines for the operation of Production Linked Incentive Scheme for Large Scale Electronics Manufacturing,   Ministry of Electronics and Information Technology, June 1, 2020, https://meity.gov.in/writereaddata/files/PLI-Guidelines-01062020.pdf.

[88] “Appraisal and Disbursement Guidelines for effective functioning of the scheme for promotion of manufacturing of electronic components and semiconductors (SPECS), Ministry of Electronics and Information Technology, June 1, 2020, https://meity.gov.in/writereaddata/files/SPECS-Guidelines-01062020.pdf.

[89] “Guidelines for implementation of Modified Electronics Manufacturing Clusters (EMC 2.0Scheme, Ministry of Electronics and Information Technology, June 1, 2020, https://meity.gov.in/writereaddata/files/EMC-2.0-Guidelines-01062020.pdf.

[90] The Electronics Manufacturing Cluster Scheme, Ministry of Electronics and Information Technology, November 7, 2012, https://meity.gov.in/writereaddata/files/Notification-EMC-Gazette.pdf.

[91] Ministry of Railways takes an important decision to ease procurement norms and improve ease of doing business.”, Press Information Bureau, Ministry of Railways, June 21, 2020

[93] Road Ministry issues advisory for implementing Rent a Motor Cab/Cycle Schemes, Ministry of Road Transport and Highways, June 1, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1628362.

[94] Rent a Cab Scheme, 1989, Ministry of Road Transport and Highways, http://transport.bih.nic.in/Docs/rent-a-cab.pdf.

[95] Rent a Motor Cycle Scheme, 1997, Ministry of Road Transport and Highways, https://himachal.nic.in/WriteReadData/l892s/3_l892s/the_rent_a_motor_cycle_scheme_1997-96609884.pdf.

[100] “Citizens with mild or medium colour blindness to also obtain Driving License now, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, June 26, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1634481.

[101] The Central Motor Vehicles (Fifth AmendmentRules, 2020, The Gazette of India, Ministry of Road Transport and Highways, June 24, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220141.pdf.

[102] MoHUA recommends Holistic Planning for Pedestrian Friendly Market Spaces in Consultation with Stake Holders, Press Information Bureau, Ministry of Housing and Urban Affairs, June 1, 2020

[103] F.No23011/79/2014-CPD (VolIII), Ministry of Coal, June 5, 2020, https://coal.nic.in/sites/upload_files/coal/files/curentnotices/Methodology.pdf.

[104] No 16/4/2020-M.VI, Ministry of Mines, June 3, 2020, https://mines.gov.in/writereaddata/UploadFile/order03062020.PDF.

[106] FNo47/1/2020-R&R, Ministry of Power, The Gazette of India, June 18, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220088.pdf

[107] FNo32/5/2020-SPV Division, Ministry of New and Renewable Energy, June 22, 2020, https://mnre.gov.in/img/documents/uploads/file_f-1593132038861.PDF.

[108] FNo20/222/2016-17-WTE, Ministry of New and Renewable Energy, June 17, 2020, https://mnre.gov.in/img/documents/uploads/file_f-1592568011984.pdf.

[109] Guideline Document on Uniform Framework for Extended Producers Responsibility (Under Plastic Waste Management Rules, 2016), Ministry of Environment, Forest and Climate Change, June 23, 2020, http://moef.gov.in/wp-content/uploads/2020/06/Final-Uniform-Framework-on-EPR-June2020-for-comments.pdf.

[110] Plastic Waste Management Rules, 2016, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, March 18, 2016, http://www.mppcb.nic.in/proc/Plastic%20Waste%20Management%20Rules,%202016%20English.pdf.

[111] Advisory for dealing with import of exotic live species in India and declaration of stock, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, Wildlife Division, http://environmentclearance.nic.in/writereaddata/om/30052020WildlifeAdvisorySpecies.pdf

[112] What is CITES, Website of Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora, last accessed on June 24, https://cites.org/eng/disc/what.php#:~:text=CITES%20(the%20Convention%20on%20International,does%20not%20threaten%20their%20survival..

[113] List of Contracting Parties, Website of Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora, last accessed on June 24, https://cites.org/eng/disc/parties/chronolo.php.

[114] Cabinet approves establishment of Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy (PCIM&Has Subordinate Office under Ministry of AYUSH, Press Information Bureau, Cabinet, June 3, 2020.

[115] Union Budget Speech, 2020-21, February 1, 2020, https://www.indiabudget.gov.in/doc/Budget_Speech.pdf.

[116] S.O1736(E), Gazette of India, Ministry of Women and Child Development, June 4, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/219718.pdf

[117] “Nasha Mukt BharatAnnual Action Plan (2020-21for 272 Most Affected Districts E-Launched on International Day against Drug Abuse & Illicit Trafficking Today, Press Information Bureau, Ministry of Social Justice and Empowerment, June 26, 2020

[118] “Sports Ministry to establish Khelo India State Centres of Excellence (KISCEto enhance India's Olympic performanceShriKiren Rijiju, Press Information Bureau, Ministry of Youth Affairs and Sports, June 17, 2020

[119] “Sports Ministry to establish 1000 district-level Khelo India centers to engage past champions in sports training, Press Information Bureau, Ministry of Youth Affairs and Sports, June 19, 2020.

[120] “Private sector participation in Space activities approved., Press Information Bureau, Department of Space, June 24, 2020.

[121] “Briefing by Secretary, DOS/Chairman, ISRO, June 25, 2020, Department of Space, Indian Space Research Organisationhttps://www.isro.gov.in/update/25-jun-2020/briefing-secretary-dos-chairman-isro.

 

अस्वीकरणः प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।

Highlights of this Issue

National lockdown extended till July 31 with further relaxations

District authorities may identify containment zones where movement will be restricted, except for essential activities.  Educational institutions to remain closed till July 31.   Night curfew to apply from 10 PM to 5 AM.

The Banking Regulation (Amendment) Ordinance, 2020 promulgated

Key provisions include powers to RBI to: (i) frame scheme for reconstruction or amalgamation of banks without imposing moratorium, and (ii) exempt cooperative banks from certain provisions of the Banking Regulation Act.

Ordinance to amend the Insolvency and Bankruptcy Code issued

The Ordinance exempts corporate debtors from being subjected to insolvency proceedings for defaults arising during a period of six months starting from March 25, 2020 (extendable to one year by notification).

Three Ordinances promulgated in the agriculture sector

The Ordinances seek to: (i) allow trade of farmers’ produce outside state APMC markets, (ii) restrict the powers of the central government to regulate food items, and (iii) provide a national framework on farming agreements.

Government extends the PM Garib Kalyan Anna Yojana till November 2020

Under the scheme, five kg of wheat or rice and one kg of pulses was being provided for free every month to persons from poor families during April-June 2020.  The extension is expected to cost around Rs 90,000 crore.

Ministry of Finance imposes restriction on initiation of new schemes in 2020-21

The restriction has been imposed due to an unprecedented demand on public financial resources during the COVID-19 pandemic.  It will not apply to the Aatmanirbhar Bharat Economic Package and any other special package.  

Current Account Surplus at 0.1% of GDP during the fourth quarter of 2019-20

India’s Current Account Balance in the fourth quarter of 2019-20 recorded a surplus of USD 0.6 billion (0.1% of GDP) as compared to a deficit of USD 4.6 billion (0.7% of GDP) in the fourth quarter of 2018-19.

Government revises classification criteria of Micro, Small and Medium Enterprises

As per the revised criteria, the investment limits under the current definition (2006 Act) have been revised upwards and the annual turnover of the enterprise have been used as additional criteria for classification of MSMEs.

Scheme for interest subvention for Shishu loans under MUDRA Yojana approved

An interest subvention of 2% will be available for all Shishu loans (loans up to Rs 50,000) under the Pradhan Mantri Mudra Yojana which were outstanding as on March 31, 2020 and not classified as non-performing assets.

Special Micro-Credit Scheme for street vendors launched

Eligible beneficiaries can obtain a collateral free working capital loan with interest subsidy for one year.  The scheme provides credit guarantee coverage for lenders facing default on loans provided under this scheme.

59 mobile apps banned on the grounds of national security and public order

These apps include TikTok, Shareit, UC Browser, and Mi Video Call.  These apps were banned on the grounds that they engaged in stealing and secretive transmission of users’ data in an unauthorised manner to cross-border servers.

Cabinet approves the Minimum Support Prices for Kharif crops for 2020-21

The Minimum Support Price (MSP) for paddy (common) has been fixed at Rs 1,868 per quintal for the marketing season 2020-21, which is an increase of 2.9% over the previous year’s MSP (Rs 1,815 per quintal).

 

COVID-19

As of June 30, 2020, there were 5,66,840 confirmed cases of COVID-19 in India.[1]   Of these, 3,34,822 had been cured/discharged and 16,893 persons had died.1  For details on the number of daily cases in the country and across states, please see here.  

With the spread of COVID-19, the central government has announced several policy decisions to contain the spread, and financial measures to support citizens and businesses who would get affected.  For details on the major notifications released by centre and the states, please see here.  Key announcements made in this regard in June 2020 are as follows.

Lockdown extended till July 31 in containment zones with additional relaxations

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

To contain the spread of COVID-19, the National Disaster Management Authority (NDMA) had imposed a 21-day national lockdown in March.[2]  Since then, the lockdown has been extended five times, with the latest extension till July 31, 2020.[3]  These measures have been issued under the provisions of the Disaster Management Act, 2005.  The Act sets up national and state-level Disaster Management Authorities and gives these authorities powers for the effective management of disasters.  

The revised lockdown guidelines allow district authorities to risk profile certain areas as containment zones based on the guidelines prescribed by the Ministry of Health and Family Welfare to break the chain of transmission.  Containment zones will be notified online by respective district collectors and states, and this information will be shared with the Health Ministry.  The lockdown will continue to remain in force in containment zones, and the movement of persons will not be allowed except for medical emergencies and for supply of essential goods and services.  States may also identify buffer zones (outside containment zones) where district authorities may impose additional restrictions.3  

In areas outside containment zones, all activities will be permitted, except for: (i) international air travel, except as permitted by the Ministry of Home Affairs, (ii) educational institutions and coaching institutions (which will remain closed till July 31, 2020), (iii) metro rail, (iv) theatres, gyms, auditoriums and similar places, and (v) large congregations such as social, political, or religious functions.  Training institutions of the central and state government will be allowed to function from July 15, 2020 based on Standard Operating Procedures issued by the Department of Personnel and Training. 

Movement of people will remain prohibited between 10 pm and 5 am, except for essential activities.  The curfew will also apply to the operation of industrial units, movements of persons and goods on national and state highways, and loading and unloading of cargo.

States may impose further restrictions or prohibitions in areas outside containment zones, based on their assessment of the situation.  However, no restriction may be imposed on intra-state and inter-state movement of persons and goods including those for land-border trade with neighbouring countries (based on treaties).  Travel by trains, domestic air travel, and international movement of persons to and from India will continue to be regulated by Standard Operating Procedures issued in this regard.

The guidelines continue to mandate certain directives for COVID-19 management in workplaces and public spaces.  These measures include: (i) compulsory wearing of face cover in public spaces and workplaces, (ii) limit on marriage gatherings of up to 50 guests, and in funerals of up to 20 persons, and (iii) staggering of work hours in all workplaces. 

Insolvency and Bankruptcy Ordinance promulgated 

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

The Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) Ordinance, 2020 was promulgated.[4]  The Ordinance amends the Insolvency and Bankruptcy Code, 2016.  The Code provides a time-bound process for resolving insolvency in companies and among individuals.  The Ordinance exempts certain corporate debtors from being subjected to insolvency proceedings during COVID-19.  Key features of the Ordinance include:

  • Initiation of insolvency resolution:  When a default occurs, creditors of the company (financial or operational) or the company itself may file an application before the National Company Law Tribunal (NCLT) for initiating a corporate insolvency resolution process (CIRP).   Once the application is accepted, a Committee of Creditors (CoC) consisting of the financial creditors of the company appoints a resolution professional to present a resolution plan to the CoC.  Once the resolution plan is approved, the resolution process is required to be completed in 180 days (extendable by 90 days).  
     
  • The Ordinance exempts certain companies from the provisions on initiation of CIRP.  It states that an application for CIRP cannot be filed where a default has arisen during a period of six months starting from March 25, 2020.  The central government may extend this period to one year through notification.  The Ordinance clarifies that no proceedings can ever be initiated for defaults during this period. 
     
  • Fraudulent trading:  During the resolution, if it is found that the business of the company is being carried out with an intent to defraud its creditors, the NCLT can pass orders against persons involved in such business to make contributions to the assets of the company.  Further, the resolution professional can apply to the NCLT for an order to direct the director or partner of the company to make such contributions if: (i) before the insolvency date, the director or partner knew or should have known that there was no reasonable prospect of avoiding CIRP, or (ii) the director or partner did not exercise due diligence to minimise the potential loss to the company’s creditors.  
     
  • The Ordinance states that for companies exempted from CIRP, the resolution professional cannot file an application to the NCLT for directions against the partners or directors of the company to make contributions to the assets of the company.  

For a PRS summary of the Ordinance, see here.

Ministry of Finance imposes restriction on initiation of new schemes in 2020-21

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

The Ministry of Finance has imposed restriction on proposals for initiating new schemes in the financial year 2020-21.[5]  It has prohibited all ministries/departments from initiating new schemes/sub-schemes, including the ones which have already received in-principle approval from the Ministry of Finance.  This restriction will not apply to the schemes announced under the Aatmanirbhar Bharat Economic Package and any other special package/ announcement.5  The restriction has been imposed in wake of an unprecedented demand on public financial resources due to the COVID-19 pandemic.

Cabinet approves interest subvention on repayment of loans under Mudra Yojana 

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

The Union Cabinet approved a scheme for interest subvention (interest subsidy) of 2% for all ‘Shishu’ loan account borrowers under the Pradhan Mantri Mudra Yojana (PMMY) scheme.[6]  The interest subvention will be available for a period of 12 months.  Under PMMY, loans for income generating activities up to Rs 50,000 are termed as Shishu loans.  The scheme is aimed at helping micro and small enterprises, funded through Shishu loans, to recover from the impact of COVID-19.

The interest subvention will be available for all loans which were outstanding as on March 31, 2020 and which are not classified as non-performing assets (NPA) as per the guidelines of the Reserve Bank of India.  In the case of a term loan, a non-performing asset is an account where the loan remains overdue for more than 90 days.28  To incentivise regular repayment of loans, the interest subsidy would also be available for NPA accounts for the months during which they regularise their repayment and become standard (non-NPA) accounts.  The Scheme will be implemented through the Small Industries Development Bank of India.

Note that the RBI, in May 2020, had extended the moratorium on term loans (which were outstanding as on March 31, 2020) till August 31, 2020.[7]  For borrowers who have been allowed a moratorium by their lenders, the Scheme will commence from September 1, 2020.  For other borrowers, the scheme will commence from June 1, 2020.   The cost of the Scheme to the government is estimated to be approximately Rs 1,542 crore.  

RBI extends changes made to CRR and MSF in view of COVID-19  

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

The RBI has extended the relaxation of the minimum daily maintenance of the Cash Reserve Ratio (CRR) and the borrowing limit under the  Marginal Standing Facility (MSF) for another three months keeping in mind the continuing effect of COVID-19.[8],[9] Details of the extension are as follows:

  • Cash Reserve Ratio: CRR is the amount of liquid cash that banks have to maintain with the RBI, as a percentage of their total deposits (net demand and time liabilities).  In March 2020, the RBI reduced the daily required minimum CRR balance from 90% to 80%, till June 26, 2020.[10]  This has now been extended for another three months, till September 25, 2020.   
     
  • Marginal Standing Facility: Under the MSF, banks can borrow overnight from RBI by dipping into their statutory liquidity ratio (SLR).  SLR is the ratio of liquid assets such as gold, treasury bonds and government securities to net demand and time liabilities (NDTL).  In March 2020, the borrowing limit for MSF was increased from 2% of NDTL to 3% of NDTL till June 30, 2020.  This has now been extended for another three months, till September 30, 2020.   

Ministry of Finance extends the time limit for various compliances under tax laws

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

The Ministry of Finance extended the time limit for various compliances under the Income Tax Act, 1961 (IT Act), through the powers under the Taxation and Other Laws (Relaxation of Certain Provisions) Ordinance, 2020.[11]  The Ordinance was issued in March 2020 to provide certain relaxations related to tax compliance, such as extension of time limit and waiver of penalty, in view of the spread of the COVID-19 pandemic.[12]

IT Act:  Under the Ordinance, the time limit for undertaking certain compliances and actions, which fell due between March 20, 2020 to June 29, 2020, was extended to June 30, 2020.  Such actions include: (i) issuing notices and notifications, completing proceedings, and passing orders by authorities and tribunals, and (ii) filing of appeals, replies, and applications, and furnishing documents.   This deadline has been extended to March 31, 2021.  The deadline of March 31, 2021 will also apply to such actions which were required to be completed during the period June 30, 2020 to December 31, 2020.

The Ordinance allows the government to notify different due dates for completion of different actions.  For instance, the due date for filing return of income for the assessment year (AY) 2019-20 (i.e. the financial year 2018-19) has been extended to July 31, 2020.  The due date for filing return of income for the AY 2020-21 has been extended to November 30, 2020.  However, in AY 2020-21, in case of persons who have tax payment due of more than one lakh rupees (after accounting for tax already paid or deducted), 12% interest will be levied on the tax dues if the return is filed after the original due date specified under the IT Act (July 31 for individuals and October 31 for companies).

Further, any investment for claiming certain deductions from income, such as those under the Sections 80C to 80GGC of the IT Act, for the financial year 2019-20 can now be made up to July 31, 2020 (up to September 30, 2020 in case of certain capital gains deductions).

GST:  The Ordinance amended the Central Goods and Services Tax Act, 2017 to allow the central government to notify an extension to the time limit for various GST-related compliances under the Act, on the recommendation of the GST Council.  Accordingly, the government had specified June 30, 2020 as the deadline for completing various actions, which were earlier due during the period March 20, 2020 to June 29, 2020.[13]  This deadline has been extended to August 31, 2020.[14]  The deadline of August 31, 2020 will also apply to such actions which were required to be completed during the period June 30, 2020 to August 30, 2020.

Export policies revised for diagnostic kits, PPEs, sanitizers, Hydroxychloroquine

Saket Surya (saket@prsindia.org)

The Ministry of Commerce and Industry revised the export policies for the following items used in the prevention, diagnostics, and treatment of COVID-19:

  • Alcohol-based sanitizers:  In March 2020, the export of all types of sanitizers was prohibited.[15]  In May 2020, the prohibition was lifted for all types of sanitizers except for alcohol-based hand sanitizers.[16]  Alcohol-based hand sanitizers have now been made freely exportable, except the ones packaged in containers with a dispenser pump, which remain prohibited.[17]  
  • Diagnostic kits:  The restrictions on the export of diagnostic kits and laboratory reagents imposed in April 2020 have been relaxed and these items can be freely exported.[18]  However, the export of certain specified diagnostic kits including RNA extraction kits and reagents, and RT-PCR kits and reagents will remain restricted.[19]
     
  • The export policy of certain diagnostic instruments, apparatus, and reagents has been amended from free to restricted.19  These include probes and primers specifically used for COVID-19 testing and certain types of swabs.  
     
  • Hydroxychloroquine:  In March 2020, export of Hydroxychloroquine and its formulations was prohibited, except in certain cases.  These included export to neighbouring countries which depend on India for the drug and to countries which are severely affected by COVID-19.  The prohibition on the export of the drug has been removed.[20],[21]  
     
  • PPEs: In January, export of Personal Protection Equipment (PPEs) including clothing and mask coveralls were prohibited.[22]  However, in May, prohibited on export of non-surgical and non-medical masks was lifted.[23]  All PPEs can now be freely exported except the following specified items which remain prohibited: (i) all types of medical coveralls, (ii) medical goggles, (iii) all masks other than non-medical and non-surgical masks, (iv) nitrile gloves, and (v) face shield.[24]  

Special Micro-Credit Facility for Street Vendors launched 

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

The Ministry of Housing and Urban Affairs (MoHUA) launched the PM Street Vendor’s AtmaNirbhar Nidhi (PM SVANidhi) scheme.[25]  The scheme seeks to provide working capital loans to street vendors whose businesses were impacted by COVID-19.[26]  Key features of the scheme are:

  • Eligibility:  The scheme is available to states which have notified rules and schemes under the Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act, 2014.   The Act specifies the rights and obligations of street vendors and regulates their business. [27]  Under the Act, states are required to establish Town Vending Committees that are responsible for conducting an identification survey of vendors in their zone/ward.  
     
  • The scheme is available to street vendors in these states who are engaged in vending in urban areas as of March 24, 2020.   The street vendors will be identified on the basis on the criteria: (i) vendors with a Certificate of Vending (Identity Card), (ii) vendors without a certificate, but identified in an identification survey, or (iii) vendors left out of the identification survey but issued a Letter of Recommendation by the urban local body or Town Vending Committee.   
     
  • Loan and interest subvention: Under the scheme, eligible street vendors may apply for collateral-free working capital loans of up to Rs 10,000 with one-year tenure from scheduled commercial banks, regional rural banks, non-banking financial companies, and micro finance institutions.  
     
  • Vendors under the scheme will also be eligible to receive an interest subsidy of 7% per annum.  This subsidy will be available up to March 31, 2022 and will only be available for accounts which have not been classified as non -performing assets as per guidelines of the Reserve Bank of India.  In the case of a term loan, a non-performing asset is an account or loan where an instalment of the loan remains overdue for more than 90 days.[28]   
     
  • Credit guarantee:  For loans under this scheme, defaults on loans of up to 5% of total loan portfolio will be fully (100%) guaranteed.  For default between 5% to 15% of total loan portfolio, 75% of default amount will be guaranteed.  The credit guarantee is subject to a maximum coverage of 15% of the portfolio for the year.

PM Garib Kalyan Anna Yojana extended for another 5 months, till November 2020

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

The central government extended the Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojana for another five months, till November 2020.[29]  The scheme was announced in March 2020 as a part of the relief package provided for the poor in light of the COVID-19 pandemic and the lockdown.  Under the scheme, five kg of wheat or rice and one kg of pulses was being provided for free every month to persons from poor families during the period April-June 2020.  The benefits under the scheme have been extended for another five months, till November 2020.  These benefits will continue to be provided to all beneficiaries under the National Food Security Act and will be in addition to their food grain entitlements under the Act.  The extension of the scheme for five months is expected to cost the government more than Rs 90,000 crore.[30]

Garib Kalyan Rojgar Abhiyaan launched

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

The Garib Kalyan Rojgar Abhiyaan was launched by the Prime Minister.[31]  The campaign aims to provide livelihood opportunities to migrant workers who have returned to their villages due to the COVID-19 pandemic.  It also aims to create public infrastructure and assets in villages related to roads, housing, anganwadis, and community complexes, among others.

The campaign is being undertaken in 116 districts across six states.   These states are Bihar, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh, Rajasthan, Jharkhand, and Odisha.  It will be implemented by 11 ministries of the central government including Road Transport and Highways, Mines, Environment, Railways, Petroleum and Natural Gas, Telecom, and Agriculture.  The campaign will operate for 125 days (from June 20, 2020) and 25 public infrastructure works have been identified which will be taken up for completion. 

International passenger flight ban extended 

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

The Director General of Civil Aviation (DGCA) announced that the ban on scheduled international commercial passenger flights to and from India will be extended further till July 15, 2020.[32]  Earlier these flights were banned till June 30, 2020.[33]  

These restrictions will not apply to international all-cargo operations and flights specially approved by DGCA.  International scheduled flights may be allowed on selected routes on a case-to-case basis. 

The DGCA also released certain guidelines related to other regulations.  These include:

  • Management of airline crew:  Risk assessment for airline crew will be done by the concerned airline doctor, and testing will be advised as per ICMR guidelines.[34]  The requirement of 14 days quarantine for the crew member will be decided on the basis of this risk assessment.  If a crew member has come in contact with a COVID-19 case, home quarantine will be mandatory for them.  All crew members must be advised to download the Aarogya Setu app and monitor their health status through it. 
     
  • Recurrent dangerous goods regulations training:  The validity of certifications of all categories of dangerous goods regulations training that were expiring on or after March 20, 2020 have been extended further.[35]  The extension will be valid up to September 30, 2020, or the revocation of the circular, whichever is earlier.  This training is required for the safe transport of dangerous goods.  Operators are required to maintain separate training records of such extended certificates for audit purposes.
     
  • Aeromedical disposition of COVID-19:  There will be two categories of aeromedical disposition of civil aircrew who have tested positive.[36]  These are: 
  1. Positive Asymptomatic/ Mildly Symptomatic Aircrew: After recovery and being declared SARS-CoV-2 negative, such aircrew will be declared fit for unrestricted flying if their clinical parameters are normal.  Such declaration will be provided by a DGCA empanelled medical examiner.
     
  2. Positive Moderate/ Severe/ Critical Symptomatic Aircrew: After complete clinical recovery, such aircrew must undergo a Special Medical Examination at one of the Indian Air Force Boarding Centres.   They will also be required to get an opinion/ cure certificate of a Pulmonologist/ Medical Specialist.  Such aircrew will be considered for unrestricted flying if their clinical and laboratory examinations reveal no findings that could cause any functional deficit.
  • Wildlife hazard management:  Airport operators are advised not to ease bird and wildlife control measures, and continue with bird and wildlife monitoring.[37]  Attention should be given to increase of bird and wildlife activities due to reduced air traffic. 

Certain categories of foreign persons permitted to travel to India 

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

In view of COVID-19, the Ministry of Home Affairs has prohibited international travel and relaxed it only in special circumstances, such as evacuating Indian nationals stranded abroad.[38]

The Ministry has now relaxed travel restrictions for four categories of foreign nationals travelling to India.[39]   These are: (i) persons entering India on a business visa (except those on B-3 visa (businesses with turnover of over Rs 10 crore) and travelling in connection with sports in a non-scheduled commercial or chartered flight, (ii) healthcare professionals, health researchers, engineers and technicians coming for technical work in Indian health sector facilities (based on invitation from a registered healthcare facility, pharmaceutical company or accredited Indian university), (iii) foreign engineering, design or other specialists travelling to India on behalf of foreign business entities located in India, and (iv) foreign technical specialists and engineers travelling for installation, repair and maintenance of foreign-origin machinery in India, on the invitation of a registered Indian business entity. 

Self-declaration requirement regarding COVID-19 for air travel amended

Saket Surya (saket@prsindia.org)

In May 2020, the Ministry of Civil Aviation had notified the guidelines for resumption of domestic air travel.[40]  The guidelines require a passenger to give a declaration that he/she has not tested positive for COVID-19 in last two months from the date of travel.  This time limit has now been reduced to three weeks.40   A COVID-19 recovered person fulfilling the above condition will also be required to show a COVID-19 recovered/discharged certificate from any institution dealing with COVID-19 patients.

Indian Railways will refund all tickets booked on or before April 14, 2020 

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

The Ministry of Railways announced that all train tickets booked on or prior to April 14, 2020 for regular time-tabled trains will be cancelled.[41]  Passengers will be issued a refund for all these cancelled tickets. 

Measures to be undertaken for providing urban transport services released

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

The Ministry of Housing and Urban Affairs released an advisory for states/ union territories/ metro rail companies for providing urban transport services in view of COVID-19.[42]  The advisory suggests a three-pronged strategy which may be adopted in phases: (i) short term (within six months), (ii) medium term (within a year), and (iii) long term (one to three years).  Key suggestions include: 

  • Encouraging and reviving non-motorised transport since most of urban trips are less than five kilometres. 
     
  • Public transport may be re-commenced.  However, transmission of infection through usage of public transport should be curbed by adopting measures related to sanitisation, containment and social distancing.  
     
  • Technology may be utilised to curb the spread of virus.   Enabling technologies such as Intelligent Transportation Systems, indigenous cashless and touch less payment systems, and National Common Mobility Card will reduce human interaction in the operations of public transport systems.

Validity of motor vehicle documents extended till September 30, 2020

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

The Ministry of Road Transport and Highways further extended the validity of motor vehicle documents (such as fitness certificates, permits, driving license, registration, or any other concerned documents) till September 30, 2020.[43]   Earlier, in March 2020, the Ministry had extended the validity of certain documents till June 30, 2020.[44]   These include documents (i) whose validity could not be extended due to the lockdown, and which had expired since February 1, 2020, or (ii) would expire by June 30, 2020.

Categories of persons permitted to vote by postal ballot expanded 

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

In India, certain categories of voters are eligible to cast their vote through postal voting.   Postal voting is where a voter receives ballot paper from the authority and may return his/her vote through the post.   The Conduct of Election Rules, 1961 specify the categories of persons who can vote through postal ballot.   These include service voters such as employees of armed forces, voters with disabilities, and senior citizens above 80 years of age.   

The 1961 Rules have been amended to: (i) reduce the age limit for senior citizens from 80 years to 65 years of age, and (ii) include COVID-19 suspect or affected persons.[45]  COVID-19 suspect or affected persons mean persons who are: (i) tested as COVID-19 positive by a government hospital or a hospital recognized as a COVID hospital by the government, or (ii) under home or institutional quarantine due to COVID-19 and are certified by a competent authority, as may be notified by the state government. 

Guidelines issued on short term health insurance for COVID-19 

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

The Insurance Regulatory and Development Authority (IRDAI) has issued guidelines on introduction of short term health insurance policies to provide coverage for persons contracting COVID-19.[46]  The guidelines permit insurance companies to offer COVID-19 specific short-term (between 3 and 11 months) life, health, or general insurance policies.  

According to the guidelines, the policy can be offered as an individual product or a group product, but should be specific to only COVID-19.  No separate add-ons are permitted for such a policy.  These guidelines will remain valid till March 31, 2021.46 

Extension of some deadlines under Companies Act, 2013 

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

In view of COVID-19, the Ministry of Corporate Affairs extended certain deadlines under the Companies Act, 2013.[47]  These include:

  • Passing of ordinary and special resolutions:  The Act does not contain specific provisions to allow companies to hold general meetings of its shareholders through video conferencing or other audio-visual modes.   The Ministry had circulated guidelines to allow meetings via video conferencing and other audio-visual means and for conducting business through postal ballot.[48]  These guidelines were valid up to June 30, 2020.   The Ministry extended the validity of these guidelines to September 30, 2020.[49]  
     
  • Scheme for relaxation for filing charge-related forms:   Under the Act, companies have to file various forms if any security interest is created over their properties (for example, a mortgage over the company’s properties) or if the charge is modified.  These forms need to be filed within 30 days of the date on which the security interest is created (extendable to 300 days on payment of additional fee).  A new scheme has been launched to exclude the period from March to September 2020 from calculation of the time period for filing these forms.[50]

Cabinet approves extension of tenure of the Commission constituted to examine the issue of sub-categorization of OBC 

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

The Union Cabinet has approved the extension of the term of the Commission set up to examine the issue of sub-categorization of Other Backward Classes (OBCs).[51]  The Commission was constituted in 2017 to recommend the manner in which communities in the existing list of OBCs may benefit from reservations in appointment to central government posts and for admission in central government education institutions. The term of the Commission was previously extended until July 31, 2020 because ambiguities, inconsistencies and spelling errors in the existing list of OBCs need to be cleared.  However, due to the nationwide lockdown imposed on account of the COVID-19 pandemic, the Commission was not able to perform the task assigned to it. Therefore, the term of the Commission has been extended by six months, i.e. up to January 31, 2021.

Operational guidelines provided for tourism service providers, restaurants, hotels, and home stays 

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

To ensure a safe and prepared approach for a post-COVID-19 revival of the tourism sector, the Ministry of Tourism provided safety and hygiene guidelines and operational recommendations for certain areas of the tourism sector.52,53,54,55  Some of the key features of these guidelines are:

  • Tourism Service Providers:  These include: travel agents, tour operators, tourist transport operators, and tourist facilitators and guides.[52]  The guidelines for tourism service providers specify sanitisation of office premises, hygiene protocol for office staff, declaration and medical proof of tourists before taking tourist bookings, and disinfection of vehicles prior to boarding of tourists, among others.
     
  • Restaurants: Some of guidelines for restaurants include: (i) ensuring that the seating capacity is reduced by 50% and the seating style is changed to maintain social distancing, (ii) ensuring that the premises has fully functional CCTV cameras to ease tracking of infected persons, and (iii) checking the Aarogya Setu app status of every guest for allowing entry.[53]
     
  • Hotels:  Guidelines for hotels cover the hotel premises, staff, and guests.[54]  Some of the guidelines include: (i) ensuring all staff wears mask and hand gloves (which are changed or disinfected after handling each customer), (ii) establishing a Rapid Response Team responsible for preventing incidents, effectively managing cases, and mitigating impact, (iii) disinfecting luggage before sending it to the room, and (iv) ensuring all employees and guests download Aarogya Setu mobile application.  Similar guidelines have been provided for bed and breakfasts, homestays and farm stays.[55] 

Delhi HC extends the deadline for feedback on the draft Environment Impact Assessment Notification, 2020 

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

In March 2020, the Ministry of Environment, Forest and Climate Change had released the Draft Environment Impact Assessment Notification, 2020.[56]  The draft notification seeks to replace the Environment Impact Assessment Notification, 2006.  It proposes certain changes to the 2006 notification such as exemption of certain projects from public consultation.  These include all building, construction and area development projects, expansion or widening of national highways, and modernisation of irrigation projects.56  

Earlier, comments on the draft notification were invited till May 11, 2020.  In view of the lockdown imposed due to the COVID-19 pandemic, the Ministry had extended this deadline till June 30, 2020.[57]  As per newspaper reports, the Delhi High Court has further extended the deadline to August 11, 2020.[58]

For details on the Draft Environment Impact Assessment Notification, 2020, please see here.

Extension in the time limit for re-import of cut and polished diamonds at zero duty

Saket Surya (saket@prsindia.org)

As per the existing policy, cut and polished diamonds sent abroad for testing can be re-imported within three months (from the date of export) at zero duty.[59]  In light of COVID-19, this has been revised to provide that for cases where the re-import period is expiring between February 1, 2020, and July 31, 2020, the period will be automatically extended by three months.

 

Macroeconomic Development

Saket Surya (saket@prsindia.org)

Current Account Surplus at 0.1% of GDP during the fourth quarter of 2019-20

India’s Current Account Balance (CAB) in the fourth quarter (January-March) of 2019-20 recorded a marginal surplus of USD 0.6 billion (0.1% of GDP) as compared to a deficit of USD 4.6 billion (0.7% of GDP) in the fourth quarter of 2018-19.[60]  CAB in the previous quarter (October-December) of 2019-20 was a deficit of USD 2.6 billion (0.4% of GDP).  The current account surplus in the fourth quarter of 2019-20 was primarily due to: (i) a lower trade deficit (the difference between a country’s exports and imports) at USD 35.0 billion, and (ii) a sharp rise in net invisible receipts at USD 35.6 billion, as compared with the corresponding period of the last year.60  Invisible receipts include receipts from trade in services (such as software and travel services) and private transfers such as remittances by Indians employed overseas.

Foreign exchange reserves increased by USD 18.8 billion in the fourth quarter of 2019-20, as compared with an increase of USD 14.2 billion in the fourth quarter of 2018-19.   In comparison, foreign exchange reserves had increased by USD 21.6 billion in the third quarter of 2019-20.   Table 1 shows India’s balance of payments in the fourth quarter of 2019-20.

Table 1: Balance of Payments, Q4 2019-20 (USD billion)

 

Q4
 2018-19

Q3

2019-20

Q4

2019-20

Current Account

-4.6

-2.6

0.6

Capital Account

19.2

23.6

17.4

Errors and Omissions

-0.4

0.6

  0.9

Change in reserves

14.2

21.6

18.8

Sources: Reserve Bank of India; PRS.

In the financial year 2019-20, CAB recorded a deficit of 0.9% of GDP, as compared to a deficit of 2.1% of GDP in 2018-19 (Table 2).  In 2019-20, India’s trade deficit decreased to USD 157.5 billion from USD 180.3 billion in 2018-19.  Foreign exchange reserves increased by USD 59.5 billion in 2019-20 as compared to a decrease of USD 3.3 billion in 2018-19.

Table 2: Balance of Payments, 2019-20 (USD billion)

 

2018-19

2019-20

Current Account

-57.2

-24.6

Capital Account

54.4

83.2

Errors and Omissions

-0.5

1.0

Change in reserves

-3.3

59.5

Sources: Reserve Bank of India; PRS.

 

Finance

The Banking Regulation (Amendment) Ordinance, 2020 promulgated

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

The Banking Regulation (Amendment) Ordinance, 2020 was promulgated.[61]  It amends the Banking Regulation Act, 1949 which regulates the functioning of banks and provides details on various aspects such as licensing, management and operations of banks.  Key features of the Ordinance include:

  • Reconstruction or amalgamation without imposing moratorium: Under the Act, the Reserve Bank of India (RBI) may apply to the central government to place a banking company under moratorium.  During the moratorium, RBI may prepare a scheme for reconstruction or amalgamation of the bank, if it is satisfied that such an order is needed to secure proper management of the bank, or in the interest of depositors, general public, or the banking system.  The Ordinance allows RBI to initiate a scheme for reconstruction or amalgamation without imposing a moratorium. 
  • Supersession of Board of Directors:  The Act states that RBI may supersede the Board of Directors of a multi-state cooperative bank for up to five years under certain conditions.  These conditions include cases where it is in the public interest for RBI to supersede the Board, and to protect depositors.  The Ordinance adds that in case of a co-operative bank registered with the Registrar of Co-operative Societies of a state, the RBI will supersede the Board of Directors after consultation with the concerned state government, and within such period as specified by it.
  • Exclusions: The Act does not apply to certain cooperative societies, such as primary agricultural credit societies, and cooperative land mortgage banks.  The Ordinance amends this to exclude: (i) primary agricultural credit societies, and (ii) cooperative societies that provide long term financing for agricultural development from the provisions of the Act if such societies do not use the words ‘bank’, ‘banker’ or ‘banking’ in their name and do not act as entities that clear cheques. 
     
  • Power to exempt cooperative banks: The Ordinance states that RBI may exempt a cooperative bank or a class of cooperative banks from certain provisions of the Act through notification.  These provisions relate to restrictions of certain types of employment, qualifications of the Board of Directors and, appointment of a chairman.  The time period and conditions for the exemption will be specified by RBI.

For a PRS summary of the Ordinance, see here

SEBI introduces framework for regulatory sandbox

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

The Securities and Exchange Board of India (SEBI) introduced a framework for regulatory sandbox.[62]   A regulatory sandbox provides an environment which allows market participants to test new FinTech solutions (products, services or business models) with customers in a controlled environment.[63]  All entities registered with SEBI will be eligible for testing in the sandbox.  

  • Criteria: SEBI will evaluate the applicants based on criteria such as: (i) use of innovative technology, (ii) benefits to investors or markets, (iii) parameters for measurement and mitigation of risk, (iv) clearly defined grievance redressal mechanism, and (v) feasibility of deployment of the solution post testing. 
     
  • Exemptions: To encourage innovation with minimum regulatory compliance burden, SEBI will exempt the entities based on a case-by-case approach, depending on the FinTech solution proposed.  However, no exemptions would be given from the KYC and anti-money laundering regulations. 
     
  • Testing: After approval, the applicant must disclose to their users that the solution will operate in a sandbox and obtain user’s acknowledgement of associated risks, before initiating testing.  The maximum duration of testing is 12 months, which may be extended further.  During testing, applicant must submit interim reports to SEBI with outcome/performance indicators and issues that have been identified.  Upon completion of testing, SEBI will decide whether to allow introducing the solution in the market on a wider scale.  Alternatively, the applicant may request an extension, or employ an exit strategy.  
     
  • Cancellation of approval: SEBI may, at any time, cancel the approval of a participant in certain situations, such as, if it: (i) fails to carry out risk mitigation, (ii) submits incorrect information, or (iii) undergoes liquidation.    

Finance Ministry releases Draft Pension Fund (Foreign Investment) Rules, 2020

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

The Ministry of Finance released the Draft Pension Fund (Foreign Investment) Rules, 2020.[64]  The rules specify the quantum of foreign investment that may be permitted in pension funds in India.  According to the rules, total foreign investment in equity shares by foreign investors should not exceed 49% of the paid up equity capital of the fund.   Foreign investment will be permitted through the automatic route up to this limit.  Note that the Foreign Direct Investment (FDI) limit for pension sector under the automatic route is capped at 49% under the FDI policy.[65] 

As per the rules, government approval would be necessary for foreign investment if the investing entity is from any of the bordering countries, including China.  Comments on the draft Rules are invited till July 19, 2020. 

RBI constitutes a working group to review ownership of private sector banks

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

The Reserve Bank of India (RBI) constituted an Internal Working Group to review the guidelines on ownership and corporate structure of Indian private sector banks.[66]  The Working Group will examine regulatory guidelines relating to ownership, governance and corporate structure in private sector banks, taking into account key developments over the years.  According to RBI, the review will provide an opportunity to harmonise the norms applicable to banks set up at different time periods.   The Committee will comprise five members, and will be chaired by the Director, Central Board of RBI.  

The terms and reference of the Working Group include: (i) to suggest appropriate norms for ownership, keeping in mind the issue of excessive concentration of ownership and control in private sector banks, (ii) to review the eligibility criteria for entities to apply for a banking license, (iii) to review the norms for promoter shareholding at the licensing stage and timelines for dilution of shareholding in subsequent stages.  

The Committee is required to submit its report by September 30, 2020. 

RBI announces creation of Payments Infrastructure Development Fund

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

The RBI announced the creation of a Payments Infrastructure Development Fund to encourage acquirers to deploy point-of-sale (PoS) infrastructure (physical or digital) in tier 3 to 6 centres and north eastern states.[67]   This will be done to incentivise digitisation of payment systems in these places.  According to RBI classification, tier-3 centres are areas of population below 50,000 (according to Census 2011), and tier-6 centres are areas of population of less than 5,000.[68]  

The RBI will make an initial contribution of Rs 250 crores to the Fund.  The remaining contribution will be from card issuing banks and card networks operating in the country.  The Fund will also receive recurring contributions to cover operational expenses from card issuing banks and card networks.  RBI will contribute to yearly shortfalls, if necessary.  The Fund will be governed through an advisory council and managed by the RBI.  

 

Agriculture

The Essential Commodities (Amendment) Ordinance, 2020 promulgated

Saket Surya (saket@prsindia.org)

The Essential Commodities (Amendment) Ordinance, 2020 was promulgated.[69]  It amends the Essential Commodities Act, 1955, which empowers the central government to control the production, supply, distribution, trade, and commerce of certain commodities.  The Ordinance aims to liberalise the regulatory system and increase competition in the agriculture sector.  Key features include:

  • Regulation of food items: The Act empowers the central government to designate certain commodities (such as food items, fertilizers, and petroleum products) as essential commodities.  The central government may regulate or prohibit the production, supply, distribution, trade, and commerce of such essential commodities.  The Ordinance provides that the central government may regulate the supply of certain food items, including cereals, pulses, potato, onions, and edible oilseeds and oils, only under extraordinary circumstances.   These include: (i) war, (ii) famine, (iii) extraordinary price rise, and (iv) natural calamity of grave nature.
     
  • Imposition of stock limit: The Act empowers the central government to regulate the stock of an essential commodity that a person can hold.  The Ordinance requires that imposition of any stock limit must be based on price rise.  A stock limit may be imposed for agricultural produce only if there is: (i) 100% increase in retail price, in case of horticultural produce; and (ii) 50% increase in the retail price, in case of non-perishable agricultural food items.   The increase will be calculated over the price prevailing one year ago, or the average retail price of the last five years, whichever is lower.
     
  • The Ordinance provides that any stock limit will not apply to a processor or value chain participant of agricultural produce if the stock held by such person is less than the: (i) overall ceiling of installed capacity of processing, or (ii) demand for export in case of an exporter.  A value chain participant means a person engaged in production, or in value addition at any stage of processing, packaging, storage, transport, and distribution of agricultural produce.

For a PRS summary of the Ordinance, see here.

Ordinance issued to regulate farming agreements signed for sale of produce

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

The Farmers (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance and Farm Services Ordinance, 2020 was promulgated.[70]  It provides for a farming agreement aimed at defining a framework for the protection and empowerment of farmers with reference to the sale and purchase of farm produce.   Key provisions of the Ordinance include:

  • Farming agreement:  The Ordinance provides for a farming agreement aimed at facilitating farmers in selling farm produce to sponsors.  A sponsor includes individuals, partnership firms, companies, and limited liability groups and societies.  The agreement may be between: (i) a farmer and a sponsor, or (ii) a farmer, a sponsor, and a third party.  The role and services of any third party, including aggregators (who act as intermediaries between farmer(s) and sponsor) will have to be specified in the agreement.  The agreement may provide for mutually agreed terms and conditions for supply, quality, standards and price of farming produce as well as terms related to supply of farm services.  These terms and conditions may be subjected to monitoring and certification during the process of cultivation or rearing, or during delivery.
     
  • Duration of agreement:  The minimum duration of an agreement will be one crop season, or one production cycle of livestock.  The maximum period will be five years.  For production cycle of more than five years, the maximum period will be mutually decided by the farmer and the sponsor.
     
  • Exemptions from existing laws:  Farming produce under a farming agreement will be exempted from all state Acts regulating sale and purchase of farming produce.  Such produce will also be exempted from the stock limit obligations under the Essential Commodities Act, 1955 or any other law.
     
  • Pricing of farming produce:  The Ordinance requires the price of farming produce to be mentioned in the agreement.  It also provides details regarding payment and delivery of farming products.  In case of products subjected to price variation, the method of determining their price will be provided in the farming agreement.
     
  • Dispute settlement:  The Ordinance provides for a three-tier system for dispute settlement.   At first, all disputes must be referred to a Board for resolution.  If the dispute remains unresolved after thirty days, parties may approach the Sub-Divisional Magistrate for resolution.  Parties will have a right to appeal to an Appellate Authority against decisions of the Magistrate.

For a PRS summary of the Ordinance, see here.

The Farmers’ Produce Trade and Commerce Ordinance, 2020 promulgated

Saket Surya (saket@prsindia.org)

The Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Ordinance, 2020 was promulgated.[71]  It seeks to provide for barrier-free trade of farmers’ produce outside the markets notified under the various state agricultural produce market laws (state APMC Acts).  The Ordinance will prevail over the state APMC Acts.  Key features include:

  • Trade of produce: The Ordinance allows intra-state and inter-state trade of farmers’ produce outside: (i) the physical premises of market yards run by APMCs and (ii) other markets notified under the state APMC acts such as private market yards and market sub-yards, direct marketing collection centres, and private farmer-consumer market yards.  Such trade can be conducted in any place of production, collection, and aggregation of farmers’ produce including farm gates, factory premises, warehouses, silos, and cold storages.
     
  • Eligibility for trade: The Ordinance allows farmers and farmer producer organisations to engage in intra-state or inter-state trade.  It also allows anyone who buys farmers’ produce for: (i) wholesale trade, (ii) retail, (iii) end-use, (iv) value addition, (v) processing, (vi) manufacturing, (vii) export, or (viii) consumption.  
     
  • However, to trade in scheduled farmers’ produce (agricultural produce specified and regulated under state APMC Acts), an entity must be either: (i) a farmer producer organisation, or (ii) an agricultural cooperative society, or (iii) a person having permanent account number under the Income Tax Act or any other document notified by the central government.
     
  • Electronic trading: The Ordinance permits the electronic trading of farmers’ produce in the specified trade area.  An electronic trading and transaction platform may be set up to facilitate the direct and online buying and selling of farmers’ produce.  The central government may prescribe modalities for such platforms including: (i) procedure, norms, and manner of registration, and (ii) code of conduct, quality assessments, and modes of payment. 
     
  • No fees to be levied by states: The Ordinance prohibits state governments from levying any market fee, cess or levy on farmers, traders, and electronic trading platforms for any trade under the Ordinance. 

For a PRS summary of the Ordinance, see here

Cabinet approves Minimum Support Prices for Kharif crops for 2020-21

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

The Union Cabinet approved the Minimum Support Prices (MSPs) for Kharif crops for the 2020-21 season.[72]  The MSP for paddy (common) has been fixed at Rs 1,868 per quintal, which is an increase of 2.9% over the previous year’s MSP (Rs 1,815 per quintal).  Table 3 shows the MSPs notified for the marketing season 2020-21, and change as compared to 2019-20.

Table 3:  MSPs approved for Kharif crops for the 2020-21 season (in Rs per quintal)

Crop

2019-20

2020-21

Change (%)

Paddy (common)

1,815

1,868

2.9%

Paddy (grade A)

1,835

1,888

2.9%

Jowar (hybrid)

2,550

2,620

2.7%

Jowar (maldandi)

2,570

2,640

2.7%

Bajra

2,000

2,150

7.5%

Ragi

3,150

3,295

4.6%

Maize

1,760

1,850

5.1%

Arhar (tur)

5,800

6,000

3.4%

Moong

7,050

7,196

2.1%

Urad

5,700

6,000

5.3%

Groundnut

5,090

5,275

3.6%

Sunflower seed

5,650

5,885

4.2%

Soyabean (yellow)

3,710

3,880

4.6%

Sesamum

6,485

6,855

5.7%

Nigerseed

5,940

6,695

12.7%

Cotton (medium staple)

5,255

5,515

4.9%

Cotton (long staple)

5,550

5,825

5.0%

Sources:  Press Information Bureau; PRS.

Cabinet approves the Animal Husbandry Infrastructure Development Fund

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

The Union Cabinet approved the establishment of the Animal Husbandry Infrastructure Development Fund of Rs 15,000 crore, which was announced under the Aatmanirbhar Bharat Economic Package.[73],[74]  The Fund aims to incentivise private investment in infrastructure for dairy and meat processing and value addition.  It also covers investment made for establishment of animal feed plants.

Private companies, MSMEs, Farmer Producer Organizations, and individuals would be eligible beneficiaries, provided they contribute at least 10% of the total investment.  Banks will extend loans for the balance 90% of the investment.

The central government will provide 3% interest subsidy to eligible beneficiaries on their loans.  Further, beneficiaries can repay the principal loan amount over a period of six years, after the completion of the two-year moratorium period.  The government will also set up a Credit Guarantee Fund of Rs 750 crore, which will be managed by NABARD.  The Fund will provide guarantee for up to 25% of the loan amount for sanctioned projects undertaken by MSMEs.

 

MSME

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

Government revises classification of Micro, Small and Medium Enterprises 

The government notified a change in the definition of Micro, Small and Medium Enterprises.[75]  Currently, MSMEs are defined under the Micro, Small and Medium Enterprises Development Act, 2006.  The Act classifies micro, small and medium enterprises based on: (i) amount of investment in plant and machinery for enterprises engaged in manufacturing or production of goods, and (ii) amount of investment in equipment for enterprises providing services.  

As per the revised definition, the investment limits will be revised upwards and annual turnover of the enterprise will be used as additional criteria for the classification of MSMEs.  The revised investment and turnover limits are specified in Table 4 below.  It will come into effect from July 1, 2020.   

Table 4: Criteria used for defining MSMEs

Criteria under 2006 Act

Revised criteria

 

Investment (in Rs)

Investment and Turnover

(in Rs)

Type

Manufacturing

Services

Both Manufacturing 

and Services

Micro

Up to 

25 lakh

Up to 

10 lakh

Investment: Up to 1 crore
 Turnover: Up to 5 crore

Small

25 lakh to 

5 crore

10 lakh to 

2 crore

Investment: 1 to 10 crore

Turnover: 5 to 50 crore

Medium

5 to 10 crore

2 to 5 crore

Investment: 10 to 50 crore
 Turnover: 50 to 250 crore

Sources: MSME Development Act 2006; Gazette Notification, Ministry of Micro, Medium and Small Enterprises (June 1, 2020); PRS.  

The calculation of investment in plant and machinery will be linked to the Income Tax return of the previous years filed under the Income Tax Act, 1961.[76]  For new enterprises, the investment will be based on self-declaration of the promoter of the enterprise.  

Information on turnover will be linked to the GST identification number (GSTIN).  Exports of goods or services will be excluded while calculating the turnover of any enterprise for classification.  All units with GSTIN listed against the same Permanent Account Number will be collectively treated as one enterprise for turnover and investment figures.

Credit Guarantee scheme for sub-ordinate debt launched for MSMEs 

The Ministry of MSME launched the Credit Guarantee scheme for subordinate debt, under which the government will provide a guarantee cover worth Rs 20,000 crore to promoters for investing in stressed MSMEs.[77]  The scheme was announced by the Finance Minister in May 2020 under the Aatma Nirbhar Bharat Scheme.[78]

Under the scheme, promoters of stressed MSMEs (which have become NPA as on April 30, 2020) will be given credit equal to 15% of their stake (equity plus debt) or Rs 75 lakh, whichever is lower.  Promoters will infuse this amount in the MSME as equity to enhance the liquidity and maintain the debt-equity ratio.  There will be a moratorium of seven years on payment of principal.  The maximum tenor for repayment will be 10 years.  The scheme will be operationalised through Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises.  

 

Trade and Commerce

Saket Surya (saket@prsindia.org)

Empowered Group of Secretaries to be constituted for attracting investment

The Union Cabinet approved setting up of an Empowered Group of Secretaries and Project Development Cells in all ministries/ departments for attracting investment in the country.[79]   This is expected to enhance coordination between various ministries and among the central and state government regarding investment-related policies.  This is also aimed at attracting FDI inflows especially from large companies which are trying to diversify their investments into new geographies for mitigating the risks exposed by the COVID-19 pandemic.

The Empowered Group will be chaired by the Cabinet Secretary.  Other members of the Group include the Chief Executive Officer of NITI Aayog and the Secretaries of the following departments: (i) Promotion of Industry and Internal Trade, (ii) Commerce, (iii) Revenue, and (iv) Economic Affairs.  The Empowered Group will be responsible for: (i) ensuring policy stability and consistency in the overall investment environment, (ii) facilitating investment by top investors in a targeted manner, (iii) evaluating investment proposals put forward by the departments, and (iv) ensuring timely clearances from various departments.

The Project Development Cell under each Department/Ministry will be responsible for development of investible projects and ensuring coordination between the central government and state governments.  The functions of the Project Development Cell include: (i) creating projects with all approvals and ensuring the availability of land for allocation, and (ii) identifying roadblocks in attracting investments and putting forth these issues before the Empowered Group.

 

Corporate Affairs

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

List of CSR eligible activities expanded

Under the Companies Act, 2013 companies with net worth, turnover or profits above a specified amount are required to spend 2% of their average net profits in the last three financial years towards Corporate Social Responsibility activities.  These funds must be spent towards certain scheduled activities, such as promoting education.  The Ministry of Corporate Affairs notified an additional item in the list.  This includes contributions towards the benefit of the veterans in the Central Armed Police Forces and Central Para Military Forces, and their dependents, including widows.[80]  

 

Electronics and Information Technology

Saket Surya (saket@prsindia.org)

59 mobile apps banned on the grounds of national security and public order

The Ministry of Electronics and Information Technology banned 59 apps on the grounds that these pose a threat to the sovereignty, integrity, defence and security of the state, and public order.[81]  These apps include TikTok, ShareIt, UC Browser, Mi Video Call, and Cam Scanner.  Use of these apps has been disallowed in both mobile and non-mobile internet-enabled devices.

The ban has been imposed under the provisions of the Information Technology Act, 2000.[82]  The Act empowers the central government to issue directions to block public access of any information through any computer resource where it is in the interest of national security or public order.  An intermediary failing to comply with the direction may be punished with imprisonment up to seven years and fine.

The Ministry noted that these apps have engaged in stealing and secretive transmission of users’ data in an unauthorised manner to servers which are outside India.  It noted that the compilation of such data, its mining and profiling by hostile elements can be a threat to national security.  The ban on these apps has also been recommended by the Indian Cyber Crime Coordination Centre of the Ministry of Home Affairs.

India joins Global Partnership on Artificial Intelligence as founding member

India co-founded the Global Partnership on Artificial Intelligence (GPAI), an international inter-governmental initiative for responsible development and use of artificial intelligence (AI).[83]   Other founding member countries of GPAI include USA, UK, European Union, Canada, Japan, and South Korea.  GPAI seeks to support research, collaboration and applied activities in AI.  It seeks to leverage the experience and diversity of participating countries for the development of AI.  It will also evolve methodologies to showcase how AI can be leveraged to better respond to the present global crisis due to COVID-19.  GPAI will have a secretariat in Paris, and centres of expertise in Montreal and Paris.

Guidelines for schemes for the promotion of electronics manufacturing

In March 2020, the Union Cabinet had approved certain schemes for the promotion of electronics manufacturing.[84],[85],[86]   The Ministry of Electronics and Information Technology announced the guidelines for these schemes.[87],[88],[89]   Details of the announcements are:

  • Production Incentive Scheme for Large Scale Electronics Manufacturing:  The scheme proposes production-linked incentive in mobile phone manufacturing and specified electronics components including assembly, testing, marketing, and packing units.84  The objective of the scheme is to promote domestic manufacturing of such electronics items and attract large investments in this area.  The scheme will provide an incentive of 4% to 6% on incremental sales of goods manufactured in India over the base year.87  The incentive will be available for five years from the base year as may be defined.87
     
  • Scheme for promotion of manufacturing of electronic components and semiconductors: The scheme will provide a financial incentive of 25% of capital expenditure for manufacturing of certain specified electronic goods.85  The capital expenditure on plant, machinery, equipment and technology including research and development will be covered under the scheme.88  The segments to be covered under the scheme include: (i) mobile, consumer and medical electronics, and (ii) telecom equipment.88 
     
  • Modified Electronics Manufacturing Clusters (EMC2.0) Scheme:  The EMC2.0 scheme will succeed the EMC scheme which was announced in 2012 and was open for application until October 2017.86,[90]  The scheme will provide financial assistance for setting up of both Electronics Manufacturing Clusters (EMC) and Common Facility Centres (CFC) and expansion of existing EMCs and CFCs.89  The EMCs and CFCs will provide ready infrastructure along with common facilities and amenities to the electronics systems design and manufacturing sector.  

 

Transport

Changes to ease procurement norms and improve ease of doing business announced by Railways

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

The Ministry of Railways announced changes to ease procurement norms and improve ease of doing business.[91]   Previously, critical items like brake equipment were procured from vendors that were approved by the nominated vendor approving agencies for that particular item.[92]  For a particular item, vendors had to approach multiple vendor approving agencies and register as an approved vendor before participating in tenders for multiple Railway Units.  

According to the new procurement norms, a vendor approved for an item by any Vendor Approving Agency of the Indian Railways shall be considered as an approved vendor by all Railway units for that particular item.   

Advisory issued for implementing Rent a Motor Cab/Cycle Schemes   

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

The Ministry of Road Transport and Highways issued an advisory for implementing the Rent a Motor Cab and Rent a Motorcycle Schemes.[93]  The schemes regulate the business of renting motor cabs and motorcycles, respectively.   The schemes provide for: (i) grant of license, (ii) duties and responsibilities of the hirer of motor cabs, and (iii) powers of licensing authorities.[94]   

Previously, persons driving rented vehicles were required to display a badge with an identification number issued by the appropriate authority.  As per the advisory, the person driving the rented vehicle will not be asked for any badge if he is carrying: (i) a valid driving license or international driving permit, and (ii) a copy of the license for renting a motor cab or motorcycle.  As per the advisory, a rented motorcycle will now be allowed to travel across states on payment of relevant taxes.  There was a lack of clarity on the inter-state movement of the rented motorcycles under the scheme.[95]

Draft amendments to the Motor Vehicle Rules released

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

The Ministry of Road Transport and Highways invited suggestions regarding various amendments proposed in the Central Motor Vehicles Rules, 1989.[96],[97],[98],[99]   These Rules are issued under the Motor Vehicles Act, 1988.  Key draft amendments include:

  • Transport with neighbouring countries: The Ministry proposed amendments to facilitate the movement of passenger or goods vehicles with neighbouring countries as per the Memorandum of Understanding signed with them.96  The amendments provide for: (i) eligibility condition and permit to ply transport vehicle across the border, (ii) conditions for the driver and conductor, (iii) particulars to be exhibited on the transport vehicle, and (iv) responsibilities of various entities including the transport and health departments of respective states, intelligence bureau, and state police.  Comments are invited on these by July 18, 2020.96
  • Deferment of BS-IV emission norms: The Ministry also proposed amendments to defer compliance with BS (CEV/TREM)-IV emissions norms for construction equipment vehicles, tractors, and harvesters.97  Currently, these vehicles have to be compliant with BS-IV by October 1, 2020.  The draft Rules seek to extend this deadline to April 1, 2021. Comments are invited on these amendments by July 19, 2020.97 

Further, the Ministry has re-invited comments on certain draft amendments originally released for consultation in March 2020.98,99  Comments have been re-invited in light of outbreak of COVID-19.  These include amendments providing for: (i) portals for National Registers of Driving Licenses and Motor Vehicles, respectively, (ii) changes in manner of obtaining a learner’s licence, (iii) quality standards for testing agencies, and (iv) manner of designation and recall of defective motor vehicles.  More details on these amendments can be found here.  Comments on these amendments are invited by July 28, 2020.  

Rules notified to allow persons with mild or medium colour blindness to obtain a driving licence

Saket Surya (saket@prsindia.org)

The Ministry of Road Transport and Highways notified the Central Motor Vehicles (Fifth Amendment) Rules, 2020 which allow persons with mild to medium colour blindness to obtain a driving licence.[100],[101] 

The Rules amend the Central Motor Vehicles Rules, 1989 and are issued under the Motor Vehicles Act, 1988.  For obtaining a licence, a certificate of medical fitness will be required to certify that: (i) the person has been tested for colour blindness using the standard Ishihara chart, and (ii) the person is not suffering from severe or total colour blindness.

 

Housing and Urban Affairs

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

Measures to create pedestrian friendly market spaces recommended

The Ministry of Housing and Urban Affairs recommended measures to create pedestrian- friendly market spaces in various cities and municipal areas.[102]  These measures seek to improve air quality by promoting public transportation with special focus on cycle tracks and pedestrian-friendly market spaces.  Key measures include: 

  • Selection of market places:  Cities with population of one million or more may select at least three market places and notify them for making them pedestrian-friendly.  All other cities may notify at least one such market place.  These market places may be notified by June 30, 2020.
     
  • Planning:  The development of the plan for pedestrian friendly market places may be done in consultation with various stakeholders.  These may include vendors, municipal officers, traffic police, parking facility owners, shop owners, and consumers.  Such planning may be undertaken by September 30, 2020. 
     
  • Implementation:  The plans may be implemented in the short and long term.  Short-term implementation measures include temporary and easy to install interventions such as barricades, and road closure for vehicles.   Other measures include: (i) improving access through additional streets, (ii) widening footpaths, and (iii) providing dedicated cycle paths.  Implementation of short-term measures may be started in the first week of October 2020.   Long term permanent structures to promote pedestrianisation can be developed if such short-term measures are successful.  

 

Mining

Saket Surya (saket@prsindia.org)

New methodology notified for rationalisation of coal linkages

The Ministry of Coal notified a new methodology for rationalisation of coal linkages/swapping of coal.[103]   Coal linkage is the allocation of coal mines for supply to coal consumers such as power and steel plants.   Such supply of coal is facilitated through a contractual agreement between a coal company and a coal consumer.   Rationalisation involves transfer of coal supply source of a consumer from one coal mine to another such that the consumer may get coal supply from mines closer to it.  The objective of this exercise is to reduce coal transportation costs.  Key features of the new methodology are as follows:

  • Eligibility:  Rationalisation will be achieved through bilateral arrangements between two willing consumers involving swapping of full or part of their eligible quantities.  As per the earlier methodology, only consumers from power sector (power plants) were eligible.  The new methodology provides that all other sectors (such as steel and cement sectors) will also be eligible.  The arrangement will be allowed only between consumers within the same sector, i.e., power with power and non-regulated with non-regulated.   Only non-coking coal will be considered under the methodology.  Further, coal procured from e-auction schemes and captive coal blocks will not be eligible.   Rationalisation can be done across domestic coal linkage and imported coal.  However, any such arrangement will not be allowed between two consumers of imported coal.
     
  • Terms of rationalisation:   The rationalisation will be based on the quantity calculated in Gross Calorific Value equivalence.  Hence, the quality of coal will also be factored.  The linkage holder will continue to pay the price as per the existing contract and there will be no change in any of its commercial terms.  The minimum tenure of the arrangement will be six months.  The maximum term of the arrangement will be subject to the expiry of the existing contracts of the two parties, whichever is earlier.
     
  • Accounting of savings:  Savings from the rationalisation will be passed on to: (i) power distribution companies in the case of coal supplied under power purchase agreements, and (ii) the Indian Railways in the case of non-regulated sector consumers (steel and cement).

Guidelines notified for auction of mineral blocks with pre-embedded clearances

The Ministry of Mines released guidelines for auction of greenfield mineral blocks with pre-embedded clearances.[104]  For such mineral blocks, statutory clearances required to start mining operations will be obtained by state governments and will be provided to the successful bidder along with the award of the mine in the auction.  

This is expected to: (i) overcome delays in starting production after the auction, (ii) improve the ease of doing business, and (iii) bring greater participation and higher rates in auctions.  This scheme will be implemented by states on a pilot basis.  Each state will identify at least five mineral blocks for auction with pre-embedded clearances.  Key features of the guidelines are:

  • Agency for obtaining clearances: The state government may set up a Project Monitoring Unit (PMU) for obtaining requisite clearances and approvals.  The PMU will get the mining plan prepared and approved.  The successful bidder will be allowed to either enhance or reduce production limit by 25%. The PMU will also obtain land rights for mining in case of both government as well as privately owned land.
     
  • Forest clearance: Forest clearance is required to be obtained for diversion of forest land for non-forest purpose including mining operations.  Forest clearance is provided in the form of in-principal approval and formal approval and is referred to as stage-I and stage-II approval.  The PMU will only obtain stage-I clearance.  The successful bidder will be required to obtain the stage-II approval after the auction.
     
  • Environment clearance: The successful bidder will be allowed to either enhance or reduce production limit by 25% without being required to obtain fresh environment clearance approval.
     
  • Accounting of expenses: The fees paid by PMU for obtaining clearances will be initially borne by the state government.  Costs incurred by the state government for engagement of PMU and obtaining clearances will be subsequently recovered from the successful bidder for the mine.

 

Power

Saket Surya (saket@prsindia.org)

The Guidelines and Standards for Charging Infrastructure for Electric Vehicles amended

The Ministry of Power notified amendments in the Guidelines and Standards for Charging Infrastructure for Electric Vehicles.[105]  The original guidelines were released in December 2018 and were subsequently revised in October 2019.  Key changes are as follows:

  • Tariff for electricity supply: As per the revised guidelines, the Central or State Electricity Regulatory Commissions will determine the tariff for supply of electricity to the public charging stations as per the Tariff Policy issued under the Electricity Act, 2003.   The amendments add that the tariff will not be more than the average cost of supply plus 15% unless specified otherwise by the Tariff Policy.
     
  • Types of charging stations: The amendments define various types of charging stations (Table 5).  These entities were not defined in the existing guidelines.  The amendments provide that a Battery Charging Station will be treated at par with Public Charging Station and same tariff for electricity supply will apply to both types of charging stations.

Table 5: Definition of various types of charging stations

Entity

Definition

Public Charging Station

where any electric vehicle can get its battery recharged

Battery Charging Station

where discharged or partially discharged batteries for electric vehicles are recharged

Captive Charging Station

where vehicles owned or controlled by the owner of the charging stations are serviced

Battery Swapping Station

where any electric vehicle can get its discharged battery replaced by a charged battery

Source: Notification No. 12/2/2018-EV, Ministry of Power; PRS.

Joint Electricity Regulatory Commission constituted for union territories of Jammu & Kashmir and Ladakh

The central government has constituted a Joint Electricity Regulatory Commission for the union territories of Jammu & Kashmir and Ladakh under the provisions of the Electricity Act, 2003.[106]  The Commission will act as the independent regulator of the power sector in the two union territories.

 

New and Renewable Energy

Saket Surya (saket@prsindia.org)

Guidelines released for installation of innovative stand-alone solar pumps

The Ministry of New and Renewable Energy released guidelines for installation of innovative stand-alone solar pumps.[107]  Currently, under the schemes run by the Ministry, only solar pumps meeting the specifications by the Ministry can be installed.  The Ministry noted that it has received representations regarding the use of different design/software for solar pumps for better performance in a cost-effective manner.  Thus, to promote innovation in technology, the Ministry has decided to permit the installation of innovative stand-alone solar pumps under its schemes in test mode.   Key features of the guidelines are as follows:

  • Process for application: The Ministry will invite application from innovators from time-to-time.  Only those products which are available for testing and field trial will be eligible for participation.  A cost-benefit analysis will be required along with the proposal.  The Ministry will constitute an Evaluation Committee to examine the applications.  The applicant will be required to submit a test report of the product.  In certain cases, the Evaluation Committee may require re-testing of performance of the product of the applicant.
     
  • Field demonstration: Upon the recommendation of the Evaluation Committee, the innovator will be allowed to install up to 50 solar pumps for demonstration purpose.  The field demonstration will continue for at least one year.  The installed pumps will be required to meet at least the existing performance standards specified by the Ministry.
     
  • The innovator will be required to deposit a bank guarantee equivalent to the payment made to him against the installation of the solar pump.  The innovator will be required to compensate for any damage caused to farmers due to the underperformance of its solar pump.
     
  • Adoption of technology: On recommendations of the Evaluation Committee, the Ministry may adopt the innovative technology and update the existing specifications after a stakeholder consultation on the same.

Validity of Waste to Energy Programme to be extended 

The Programme on Energy from Urban, Industrial, Agricultural Wastes/Residues and Municipal Solid Waste has been extended up to March 31, 2021, or the date the recommendations of the 15th Finance Commission comes into effect, whichever is earlier.[108]  The programme had ended on March 31, 2020.  The programme provides financial assistance to developers for installation of waste to energy projects including biogas generation and power generation from biogas.

 

Environment

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

Guidelines issued for Producers Responsibility under Plastic Waste Management Rules, 2016 

The Ministry of Environment, Forest and Climate Change issued guidelines on uniform framework for Extended Producer Responsibility (EPR) for plastic waste management.[109]  The Plastic Waste Management Rules, define EPR as the responsibility of a producer for environmentally sound management of a product until the end of its life.[110]  This framework is based on the premise that producers are responsible for providing financial incentives to the plastic waste collection systems and the recycling industry to collect and process plastic waste to meet the targets set by the government. 

A Committee constituted to evaluate the mechanism for the implementation of EPR noted that the responsibility of waste collection and segregation is that of an Urban Local Bodies (ULB).  It observed that handing over this responsibility to the producers would be inefficient.  It suggested a uniform framework for EPR, which shall be based on creation of national registration and database repository.  All transactions under EPR shall be governed through a web portal.   Further, the Committee noted that one single model for EPR may not work for the entire country.  It suggested various models for EPR compliance.  These include:

  • Fee based modelThis model could be applicable to producers (including importers and brand owners) who use less quantity of plastic (lower than a cut-off decided by the government) for packaging.  They shall contribute to the EPR corpus fund at the central level.  The amount to be contributed by each of the producer will be decided based on the generation of plastic waste and the efforts required and money spent by the ULB to handle plastic waste.
     
  • Plastic credit model: Under this model, a producer will not be required to recycle their own packaging, but to ensure that an equivalent amount of packaging waste has been recovered and recycled to meet their obligation.  Producers will be mandated to acquire evidence of recycling (plastic credit) from accredited processors or exporters.  
     
  • Producer Responsibility Organisations: Producers can join a Producer Responsibility Organization (PRO), which will carry out the legal requirements on behalf of their member companies.  PROs will operate as a contractor service to the producers.  However, the final responsibility of providing evidence of reprocessing of plastic packaging will be with the producer only.

Comments on the guidelines are invited till July 31, 2020.

Advisory issued for import and possession of exotic live species 

The Ministry of Environment, Forest and Climate Change issued an advisory on import and possession of exotic live species in India.[111]  Exotic live species refer to animals under the Convention of International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora (CITES).  CITES is an international agreement between governments to ensure that international trade of wild animal and plant species does not threaten their survival.[112]  India ratified CITES in 1976.[113]

Key features of the advisory include:

  • Voluntary Disclosure:  An inventory of exotic live species will be developed through a voluntary disclosure scheme.  Such disclosure may be made by the owner or holder of the exotic live species to the respective state Chief Wildlife Warden (constituted under the Wild Life (Protection) Act, 1972) within six months from the date of the advisory.   The Warden will register the stock and issue a certificate of possession within six months.
     
  • If the disclosure of the exotic live species is made after six months, the owner or holder will be required to comply with the documentation under the existing laws.
     
  • Any acquisition, death, trade, change of possession, or birth by the imported animal after the disclosure should be informed to the respective state Chief Wildlife Warden within 30 days of such activity.
     
  • Import and stock maintenance:   An importer has to apply for a license for import of exotic live species accompanied by a no-objection certificate from the respective state Chief Wildlife Warden.  The importer has to take certain steps to maintain the stock of such species.  These include: (i) maintaining a health card for each exotic live species imported, (ii) providing details of facilities for their housing, and (iii) ensuring that the exotic live species are not mixed or bred with indigenous animal species.

 

Health

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

Cabinet approves establishment of Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine and Homoeopathy

The Union Cabinet has approved the re-establishment of the Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine and Homoeopathy (PCIM&H) as a subordinate office under the Ministry of AYUSH.[114]  It will be merged with the Pharmacopoeia Laboratory for Indian Medicine and Homoeopathic Pharmacopoeia Laboratory, which are two central laboratories established at Ghaziabad since 1975.  Prior to the merger, PCIM&H existed as an autonomous organisation under the Ministry of AYUSH.  After reconstitution, the PCIM&H will facilitate the uniform development of standards for AYUSH drugs and formulations, prevent duplication of drug standardization work, and promote optimal utilisation of resources, amongst others. 

 

Women and Child Development

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

Task Force set up to examine issues related to motherhood and infancy

In the Union Budget Speech for 2020-21, the Finance Minister proposed to set up a Task Force on the issues related to motherhood and infancy that would submit a report of its findings within six months.[115]   Consequently, the central government has set up a Task Force to examine these issues.[116]  It will examine the correlation between age of marriage and motherhood with: (i) health, medical well-being, and nutritional status of mother and child, (ii) key parameters such as Infant Mortality Rate, Maternal Mortality Rate, and Child Sex Ratio, and (iii) other relevant points related to health and nutrition in this context.  Further, it may suggest measures to promote higher education among women.  Based on its study, the Task Force may suggest legislative changes needed to implement its recommendations.  The Task Force will be headed by Ms. Jaya Jaitly and is required to submit its report by July 31, 2020.

 

Social Justice and Empowerment

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

Nasha Mukt Bharat: Annual Action Plan (2020-21) launched

The Ministry of Social Justice and Empowerment launched the Nasha Mukt Bharat Annual Action Plan for 2020-21.  The Plan will focus on the problem of drug abuse in 272 of the most affected districts of the country.[117]  The Plan will include awareness generation programmes, especially in higher educational institutions, universities, and school.  Further, it will include identification of dependent populations, and treatment in hospital facilities or de-addiction centres.  The Plan will be implemented by the Ministry and the Narcotics Bureau.  

 

Youth Affairs and Sports

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

Khelo India centres to be established at the state and district level

The Ministry of Youth Affairs and Sports will establish one Khelo India State Centre of Excellence (KISCE) in each state and union territory.[118]   These will train elite and Olympic level athletes.  State-owned sports facilities have been identified in eight states, which will be upgraded to a KISCE.  These states include Karnataka, Odisha, Kerala, Telangana, Arunachal Pradesh, Manipur, Mizoram and Nagaland.  States and union territories will run the KISCE while the central government will provide funding to upgrade the facilities.

In addition, the Ministry will establish 1,000 Khelo India Centres (KICs) at the district level, with 100 KICs to be established in FY 2020-21.[119]   Existing Sports Authority of India extension centres will be given the option of converting into a KIC.   Further, past champions will be identified to establish their own academies.  Grants will be provided to each KIC for remuneration of coaches, purchase of equipment, sports kits, and participation in competition and events, among others.

 

Space

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

Cabinet approves reforms to boost private sector participation in Space  

The Union Cabinet approved certain reforms to boost private sector participation in Space.[120],[121]  An autonomous nodal agency called Indian National Space Promotion and Authorisation Centre will be set up under the Department of Space, as a separate vertical for permitting and regulating the activities of private industry in space sector.  

The Centre will promote and guide private industries in space activities through encouraging policies and a favourable regulatory environment, with technical expertise from ISRO.  It will have its own independent directorates for technical, legal, safety and monitoring for assessing the private industry requirements and coordinating the activities.   

The role of New Space India Ltd. (NSIL), a public sector undertaking under the Department of Space, will be re-defined from a supply-driven model to a demand-driven model for space-based services.  NSIL is the commercial arm of ISRO, currently responsible for transfer of ISRO’s small satellite technology to industry, among other things.  Current activities of ISRO in the areas of launch vehicle, satellite production, launch services and space-based services will be taken up by NSIL.  It will execute these activities through industry consortiums.  These reforms are expected to allow ISRO to allocate more time and resources for research and development. 

 

[1] Ministry of Health and Family Welfare website, last accessed on March 31, 2020, https://www.mohfw.gov.in/index.html.

[2] Order No. 40-3/2020-DM-I(A), Ministry of Home Affairs, March 24, 2020, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHAorder%20copy.pdf

[3] Order No. 40-3/2020-DM-I(A), Ministry of Home Affairs, June 29, 2020, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHAOrder_29062020.pdf.

[4] The Insolvency and Bankruptcy (Amendment) Ordinance, 2020, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/IBC.pdf

[6] “2% Interest Subvention approved on prompt repayment of Shishu Loans under Pradhan Mantri MUDRA Yojana for a period of 12 months”, Cabinet, Press Information Bureau, June 24, 2020.

[7] "COVID-19 – Regulatory Package", Notifications, Reserve Bank of India, May 23, 2020, https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=11902&Mode=0.

[8] “Section 42(1) of the Reserve Bank of India Act, 1934 - Change in Minimum Daily Maintenance of the Cash Reserve Requirement”, Notifications, Reserve Bank of India, June 26, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NT2605F809C57D5964AA38BBA3D126E91AF10.PDF.

[9] “Section 24 of the Banking Regulation Act, 1949 – Maintenance of Statutory Liquidity Ratio (SLR) – Marginal Standing Facility (MSF)”, Notifications, Reserve Bank of India, June 26, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/259MSFE3EA811D8394E4DD8B6989A714CBCD466.PDF.

[10] “Statement on Developmental and Regulatory Practices”, Reserve Bank of India, Press Releases, March 27, 2020, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=49582.

[11] S.O. 2033(E), Gazette of India, Ministry of Finance, June 24, 2020, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220145.pdf.

[12] The Taxation and Other Laws (Relaxation of Certain Provisions) Ordinance, 2020, Gazette of India, Ministry of Law and Justice, March 31, 2020, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/218979.pdf.

[13] G.S.R. 235(E), Gazette of India, Ministry of Finance, April 3, 2020, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/219000.pdf.

[14] G.S.R. 416(E), Gazette of India, Ministry of Finance, June 27, 2020, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220211.pdf.

[15] Notification No 53/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, March 24, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2053_0.pdf.

[16] Notification No 4/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, May 6, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%204%20dt%2006.05.2020%20Eng_0.pdf.

[17] Notification No. 08/2015-20,  Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 1, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/noti%2008%20eng_0.pdf.

[18] Notification No 59/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, April 4, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2059%20Final%20Eng_0.pdf.

[19] Notification No 09/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 10, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2009%20eng_0.pdf.

[20] Notification No 54/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, March 25, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/notification%2054_0.pdf

[21] Notification No 13/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 18 , 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2013%20Eng_0.pdf.

[22] Notification No 44/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, January 31 , 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2044_0.pdf.

[23] Notification No 6//2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, May 16, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Notification%20English%20Final_0.pdf.

[24] Notification No 14/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 22, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2014%20Eng%20ss_0.pdf.

[25] Scheme guidelines for PM Street Vendor’s AtmaNirbhar Nidhi, Ministry of Housing and Urban Affairs, http://mohua.gov.in/pm_svandhi/guidelines.pdf

[26] “Scheme of Special Micro-Credit Facility launched for Street Vendors-Striving towards Atmanirbhar Bharat”, Ministry of Housing and Urban Affairs, Press Information Bureau, June 19, 2020. 

[27] Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending ) Act, 2014, http://legislative.gov.in/sites/default/files/A2014-7.pdf.  

[28] Master Circular No. DBOD.No.BP.BC. 17/21.04.048/2009-10, Reserve Bank of India, July 1, 2009,

https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/39MCC010709_FULL.pdf.

[29] F. No. 7-1/2019-BP.III(Pt.)(371225), Department of Food and Public Distribution, June 30, 2020, https://dfpd.gov.in/LwB3AHIAaQB0AGUAcgBlAGEAZABkAGEAdABhAC8AUABvAHIAdABhAGwALwBOAGUAdwBzAC8A297_1_Extension_of_PMGKAY.pdf.

[30] “PM announces extension of Pradhan Mantri Garib Kalyan Ann Yojana till November”, Press Information Bureau, Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Distribution, June 30, 2020.

[31] “Massive employment generation-cum-rural public works creation campaign - the Garib Kalyan Rojgar Abhiyaan launched by Prime Minister Shri Narendra Modi today”, Ministry of Rural Development, Press Information Bureau, June 20, 2020.

[32] “Travel and Visa restrictions related to COVID-19”, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, June 26, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130652663

[33] “Travel and Visa restrictions related to COVID-19”, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, May 30, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130625797 

[34] “Management of airlines crew due to COVID-19 outbreak”, Addendum to Circular No. 4/1/2020-IR dated 23.03.20, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, June 22, 2020,  https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130648509

[35] “Extension of validity of recurrent dangerous goods regulations training due to the COVID-19 pandemic”, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, June 19, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130651660

[36] “Aeromedical Disposition of COVID-19”, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, June 22, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130649317

[37] “Wildlife hazard management at airports”, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, June 8, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130636326

[39] Office Memorandum No. 25022/24/2020-F.V./F.I., Foreigners Division, Ministry of Home Affairs, June 22, http://164.100.117.97/WriteReadData/userfiles/Business%20Visa%20permission%2001.06.2020.pdf.

[40] F.No. AV.29017/5/2020-DT, Ministry of Civil Aviation, June 29, 2020, https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/MoCA_OM_dated_29_06_2020.pdf.

[41] “Indian Railways to give full refund for all tickets booked on or prior to 14th April 2020 for regular time tabled trains”, Press Information Bureau, Ministry of Railways, June 23, 2020.

[42] “Measures to be taken by States/ UT’s/ Cities/Metro Rail Companies in view of COVID-19 for providing urban transport services”, Press Information Bureau, Ministry of Housing and Urban Affairs, June 12, 2020.   

[43] “Validity of motor vehicle documents further extended till 30th September, 2020”, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, June 9, 2020.

[44] “Validity of expired Driving Licences and Vehicle Registration Extended Till June 30”, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, March 31, 2020. 

[45]   S.O. 1964(E), Gazette of India, Ministry of Law and Justice, June 19, 2020,  http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220011.pdf.

[46] “Guidelines on introduction of short term health insurance policies providing coverage for COVID-19 disease”, Circular, Insurance Regulatory and Development Authority of India, June 23, 2020, https://www.irdai.gov.in/ADMINCMS/cms/whatsNew_Layout.aspx?page=PageNo4159&flag=1.

[48] General Circular No. 15/2020, Ministry of Corporate Affairs, April 8, 2020, http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/Circular14_08042020.pdf

[49] General Circular No. 22/2020, Ministry of Corporate Affairs, June 15, 2020, http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/Circular22_15062020.pdf.

[50] General Circular No. 23/2020, Ministry of Corporate Affairs, June 17, 2020, http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/Circular23_17062020.pdf.

[51] “Cabinet approves Extension of tenure of the Commission constituted under Article 340 of the constitution to examine the issue of sub-categorization within Other Backward Classes in the Central List”, Press Information Bureau, Cabinet, June 24, 2020. 

[52] Operational Recommendations for Tourism Service Providers, Ministry of Tourism, http://tourism.gov.in/sites/default/files/Operational%20Recommendations%20forTourism%20Service%20Providers.pdf.

[53] Operational Recommendations for Restaurants, Ministry of Tourism, http://tourism.gov.in/sites/default/files/SOP%20Restaurants1.pdf.

[54] Operational Recommendations for Hotels, Ministry of Tourism, http://tourism.gov.in/sites/default/files/SOP%20Hotels.pdf.

[55] Operational Recommendations for B&B/ Homestay/ Farmstay, Ministry of Tourism, http://tourism.gov.in/sites/default/files/Operational%20Recommendations%20for%20%20Homestay.pdf.

[56] Draft Environment Impact Assessment Notification - 2020, Ministry of Environment, Forests and Climate Change, March 12, 2020, http://moef.gov.in/wp-content/uploads/2020/03/Draft_EIA2020.pdf.

[57] S.O. 1429(E), Ministry of Environment, Forests and Climate Change, May 8, 2020, http://moef.gov.in/wp-content/uploads/2020/05/EIA-2020_extn-of-period.pdf.

[58] Delhi HC extends public response deadline to draft EIA 2020, The Hindu, June 30, 2020, https://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/delhi-hc-extends-public-response-deadline-to-draft-eia-2020/article31951610.ece.

[59] Notification No 15/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 25, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Notification%2015%20English.pdf.

[60] “Developments in India’s Balance of Payments during the Fourth Quarter (January-March) of 2019-20”, Reserve Bank of India, June 30, 2020,  https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR256878A4C6211C9A47D6A9B09BC8100C57D1.PDF.

[62] "Framework for Regulatory Sandbox", Circulars, Securities and Exchange Board of India, June 5, 2020, https://www.sebi.gov.in/legal/circulars/jun-2020/framework-for-regulatory-sandbox_46778.html.

[63] Enabling Framework for Regulatory Sandbox, Reports, Reserve Bank of India, August 13, 2019, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PublicationReport/Pdfs/ENABLING79D8EBD31FED47A0BE21158C337123BF.PDF.

[64] “Draft Pension Fund (Foreign Investment) Rules, 2020”, Department of Financial Services, Ministry of Finance, June 19, 2020, https://financialservices.gov.in/sites/default/files/Draft%20Pension%20Fund%20%28Foreign%20Investment%29%20Rules%2C%202020.pdf.

[65] Consolidated FDI Policy, Department of Industrial Policy and Promotion, Ministry of Commerce and Industry, https://dipp.gov.in/sites/default/files/CFPC_2017_FINAL_RELEASED_28.8.17.pdf.

[66] “Reserve Bank constitutes an Internal Working Group to review extant ownership guidelines and corporate structure for Indian private sector banks”, Press Releases, Reserve Bank of India, June 12, 2020, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=49945.

[67] “RBI announces creation of Payments Infrastructure Development Fund”, Press Releases, Reserve Bank of India, June 5, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR2453983A1FE6D395422BB8A282B63C27FC09.PDF.

[68] Details of tier-wise classification of centres based on population, Master Circular on Branch Authorisation - Census data 2011, Reserve Bank of India, September 1, 2016, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NT60319C925B21E045D9952EA3023925A8B9.PDF.

[70] The Farmers (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance and Farm Services Ordinance, 2020, https://www.prsindia.org/billtrack/farmers-empowerment-and-protection-agreement-price-assurance-and-farm-services-ordinance

[72] “Minimum Support Prices (MSP) for Kharif Crops for marketing season 2020-21”, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, June 1, 2020.

[73] “Cabinet approves establishment of Animal Husbandry Infrastructure Development Fund”, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, June 24, 2020.

[74] “Presentation of details of 3rd Tranche by Union Finance & Corporate Affairs Minister Smt. Nirmala Sitharaman under Aatmanirbhar Bharat Abhiyaan to support Indian economy in fight against COVID-19”, Press Information Bureau, Ministry of Finance, May 15, 2020.

[75] S.O. 1702(E), Notification, Ministry of Micro, Medium and Small Enterprises, The Gazette of India, June 1, 2020, https://msme.gov.in/sites/default/files/MSME_gazette_of_india_0.pdf.

[76] S.O. 2119(E), Notification, Ministry of Micro, Medium and Small Enterprises, The Gazette of India, June 26, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220191.pdf.

[77] “Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises (MSMEs) launches another funding scheme to help the distressed MSME sector”, Press Information Bureau, Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises, June 24, 2020.

[79] “Government approves setting up of an Empowered Group of Secretaries (EGoS) and Project Development Cells (PDCs) in Ministries/Departments for attracting investments in India”, Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, June 3, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1629037

[80] G.S.R. 399(E), Gazette of India, Ministry of Corporate Affairs, June 23, 2020,  http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220133.pdf.

[81] “Government Bans 59 mobile apps which are prejudicial to sovereignty and integrity of India, defence of India, security of state and public order”, Press Information Bureau, Ministry of Electronics and Information Technology, June 29, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1635206.

[82] Section 69A, The Information Technology Act, 2000, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/1999/3/A2000-21.pdf.

[83] “India joins Global Partnership on Artificial Intelligence (GPAI) as a founding member to support the responsible and human-centric development and use of AI”, Press Information Bureau, Ministry of Electronics and Information Technology, June 15, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1631676

[84] “Cabinet approves Production Linked Incentive Scheme for Large Scale Electronics Manufacturing”, Union Cabinet, Press Information Bureau, March 21, 2020.

[85] “Cabinet approves Scheme for Promotion of manufacturing of Electronic Components and Semiconductors”, Union Cabinet, Press Information Bureau, March 21, 2020.

[86] “Cabinet approves Modified Electronics Manufacturing Clusters (EMC 2.0) Scheme”, Union Cabinet, Press Information Bureau, March 21, 2020.

[87] “Guidelines for the operation of Production Linked Incentive Scheme for Large Scale Electronics Manufacturing”,   Ministry of Electronics and Information Technology, June 1, 2020, https://meity.gov.in/writereaddata/files/PLI-Guidelines-01062020.pdf.

[88] “Appraisal and Disbursement Guidelines for effective functioning of the scheme for promotion of manufacturing of electronic components and semiconductors (SPECS), Ministry of Electronics and Information Technology, June 1, 2020, https://meity.gov.in/writereaddata/files/SPECS-Guidelines-01062020.pdf.

[89] “Guidelines for implementation of Modified Electronics Manufacturing Clusters (EMC 2.0) Scheme”, Ministry of Electronics and Information Technology, June 1, 2020, https://meity.gov.in/writereaddata/files/EMC-2.0-Guidelines-01062020.pdf.

[90] The Electronics Manufacturing Cluster Scheme, Ministry of Electronics and Information Technology, November 7, 2012, https://meity.gov.in/writereaddata/files/Notification-EMC-Gazette.pdf.

[91] “Ministry of Railways takes an important decision to ease procurement norms and improve ease of doing business.”, Press Information Bureau, Ministry of Railways, June 21, 2020. 

[93] Road Ministry issues advisory for implementing Rent a Motor Cab/Cycle Schemes, Ministry of Road Transport and Highways, June 1, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1628362.

[94] Rent a Cab Scheme, 1989, Ministry of Road Transport and Highways, http://transport.bih.nic.in/Docs/rent-a-cab.pdf.

[95] Rent a Motor Cycle Scheme, 1997, Ministry of Road Transport and Highways, https://himachal.nic.in/WriteReadData/l892s/3_l892s/the_rent_a_motor_cycle_scheme_1997-96609884.pdf.

[100] “Citizens with mild or medium colour blindness to also obtain Driving License now”, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, June 26, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1634481.

[101] The Central Motor Vehicles (Fifth Amendment) Rules, 2020, The Gazette of India, Ministry of Road Transport and Highways, June 24, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220141.pdf.

[102] “MoHUA recommends Holistic Planning for Pedestrian Friendly Market Spaces in Consultation with Stake Holders”, Press Information Bureau, Ministry of Housing and Urban Affairs, June 1, 2020. 

[103] F.No. 23011/79/2014-CPD (Vol. III), Ministry of Coal, June 5, 2020, https://coal.nic.in/sites/upload_files/coal/files/curentnotices/Methodology.pdf.

[104] No 16/4/2020-M.VI, Ministry of Mines, June 3, 2020, https://mines.gov.in/writereaddata/UploadFile/order03062020.PDF.

[106] F. No. 47/1/2020-R&R, Ministry of Power, The Gazette of India, June 18, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220088.pdf

[107] F. No. 32/5/2020-SPV Division, Ministry of New and Renewable Energy, June 22, 2020, https://mnre.gov.in/img/documents/uploads/file_f-1593132038861.PDF.

[108] F. No. 20/222/2016-17-WTE, Ministry of New and Renewable Energy, June 17, 2020, https://mnre.gov.in/img/documents/uploads/file_f-1592568011984.pdf.

[109] Guideline Document on Uniform Framework for Extended Producers Responsibility (Under Plastic Waste Management Rules, 2016), Ministry of Environment, Forest and Climate Change, June 23, 2020, http://moef.gov.in/wp-content/uploads/2020/06/Final-Uniform-Framework-on-EPR-June2020-for-comments.pdf.

[110] Plastic Waste Management Rules, 2016, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, March 18, 2016, http://www.mppcb.nic.in/proc/Plastic%20Waste%20Management%20Rules,%202016%20English.pdf.

[111] Advisory for dealing with import of exotic live species in India and declaration of stock, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, Wildlife Division, http://environmentclearance.nic.in/writereaddata/om/30052020WildlifeAdvisorySpecies.pdf

[112] What is CITES, Website of Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora, last accessed on June 24, https://cites.org/eng/disc/what.php#:~:text=CITES%20(the%20Convention%20on%20International,does%20not%20threaten%20their%20survival..

[113] List of Contracting Parties, Website of Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora, last accessed on June 24, https://cites.org/eng/disc/parties/chronolo.php.

[114] “Cabinet approves establishment of Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy (PCIM&H) as Subordinate Office under Ministry of AYUSH, Press Information Bureau, Cabinet, June 3, 2020.

[115] Union Budget Speech, 2020-21, February 1, 2020, https://www.indiabudget.gov.in/doc/Budget_Speech.pdf.

[116] S.O. 1736(E), Gazette of India, Ministry of Women and Child Development, June 4, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/219718.pdf

[117] “Nasha Mukt Bharat: Annual Action Plan (2020-21) for 272 Most Affected Districts E-Launched on International Day against Drug Abuse & Illicit Trafficking Today”, Press Information Bureau, Ministry of Social Justice and Empowerment, June 26, 2020. 

[118] “Sports Ministry to establish Khelo India State Centres of Excellence (KISCE) to enhance India's Olympic performance: Shri. Kiren Rijiju”, Press Information Bureau, Ministry of Youth Affairs and Sports, June 17, 2020. 

[119] “Sports Ministry to establish 1000 district-level Khelo India centers to engage past champions in sports training”, Press Information Bureau, Ministry of Youth Affairs and Sports, June 19, 2020.

[120] “Private sector participation in Space activities approved.”, Press Information Bureau, Department of Space, June 24, 2020.

[121] “Briefing by Secretary, DOS/Chairman, ISRO”, June 25, 2020, Department of Space, Indian Space Research Organisationhttps://www.isro.gov.in/update/25-jun-2020/briefing-secretary-dos-chairman-isro.

 

DISCLAIMER: This document is being furnished to you for your information. You may choose to reproduce or redistribute this report for non-commercial purposes in part or in full to any other person with due acknowledgement of PRS Legislative Research (“PRS”). The opinions expressed herein are entirely those of the author(s). PRS makes every effort to use reliable and comprehensive information, but PRS does not represent that the contents of the report are accurate or complete. PRS is an independent, not-for-profit group. This document has been prepared without regard to the objectives or opinions of those who may receive it.

Highlights of this Issue

COVID-19 in India: number of cases cross 1,90,000 by end-May

As of May 31, 2020, there were 1,90,535 confirmed cases of Coronavirus disease 2019 (COVID-19) in India.  Of these, 91,819 had been cured/discharged and 5,394 persons have died. 

National lockdown extended till June 30 with several relaxations from June 8

District authorities may identify containment zones where movement will be restricted, except for essential activities.  In other areas, restrictions will be relaxed in a phased manner.  Night curfew to apply from 9PM to 5AM.

GDP estimated to grow at 4.2% in 2019-20; growth of 3.1% in Q4

GDP growth (at constant prices) in the January-March quarter was lower than the 5.7% growth in Q4 of 2018-19.  Growth in all sectors, except agriculture and mining decreased from Q4 of 2018-19.

CGA released the provisional data on central government accounts for 2019-20

Fiscal deficit was at 4.6% of GDP, 22% higher than the 2019-20 revised estimate.  Gross tax revenue decreased by 3.4% over 2018-19.  However, centre’s net tax revenue increased by 2.9% as devolution to states fell by 14.5%.

Certain announcements made under the Aatma Nirbhar Bharat Package

A special economic package of Rs 20 lakh crore (equivalent to 10% of India’s GDP) was announced.  This includes measures by RBI, incentives for MSMEs and relief packages for poor people including migrants and farmers. 

RBI announces further measures to ease financial stress caused by COVID-19

The repo rate has been further reduced from 4.4% to 4%, reverse repo rate to 3.35% and MSF to 4.65%.  The 3-month moratorium on term loans announced earlier is extended by another three months till August 31, 2020.

Domestic passenger train and air travel services resume gradually

Domestic passenger train travel resumed partially on May 12, 2020, with more trains set to resume from June 1, 2020.  Domestic air travel resumed on May 25, 2020.

Supreme Court issues interim orders on movement of migrant labourers

The Court observed that there have been lapses in the process of registration, transportation and in providing food and shelter to migrant workers.   It issued certain interim directions including providing free food and transport.

Data Access and Knowledge Sharing Protocol released for Aarogya Setu application

The protocol specifies guidelines for data collection, storage and sharing of data with other entities.  Data collection should be minimised to the extent necessary; collected data should be processed in a fair and transparent manner.

Mandatory washing of coal in thermal power plants removed

The Environment Protection Rules, 1986 were amended to remove the requirement for certain coal-based thermal power plants to only use coal with ash content up to 34%.  

Auction of coal and lignite blocks for commercial sale on revenue sharing basis

A new methodology for auction of coal and lignite blocks for the purpose of commercial sale was approved by the Cabinet.  The bidders will be required to bid for a percentage share of revenue payable to the government.

Operational Guidelines for Swatch Bharat Mission (Grameen) Phase II notified

The aim of the second phase is to sustain the open defecation free status of villages and to improve the levels of cleanliness in rural areas through solid and liquid waste management.

 

Macroeconomic Development

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

GDP estimated to grow at 4.2% in 2019-20; growth of 3.1% in Q4

Provisional estimates suggest that the annual Gross Domestic Product (GDP) growth for 2019-20 is 4.2% at constant prices.[1]  This is estimated to be lower than the 6.1% growth in 2018-19.   GDP grew at 3.1% in the fourth quarter of 2019-20, over the corresponding quarter of 2018-19.  This is lower than the 4.7% growth in the third quarter of 2019-20 and the 5.7% growth in the fourth quarter of 2018-19.   Figure 1 shows the quarterly trend of GDP growth over the last two financial years.  

Figure 1: Growth in GDP (%, year-on-year)

 image

Sources: Ministry of Statistics and Programme Implementation; PRS.

GDP growth across economic sectors is measured in terms of Gross Value Added (GVA).  Growth in all sectors except agriculture and mining is expected to decrease in the fourth quarter of 2019-20 over the corresponding quarter of 2018-19. 1   Growth in manufacturing and construction is expected to be negative in the fourth quarter of 2019-20, decelerating further from the third quarter.1  Table 1 provides details on sectoral growth in GVA. 

Table 1: Growth in Gross Value Added across sectors in Q4 of 2019-20 (%, year-on-year)

Sector

Q4

2018-19

Q3

2019-20

Q4

2019-20

Agriculture

1.6%

3.6%

5.9%

Mining

-4.8%

2.2%

5.2%

Manufacturing

2.1%

-0.8%

-1.4%

Electricity

5.5%

-0.7%

4.5%

Construction

6.0%

0.0%

-2.2%

Services

8.7%

5.7%

4.4%

GVA

5.6%

3.5%

3.0%

GDP

5.7%

4.1%

3.1%

Note: GVA is GDP without taxes and subsidies, at constant prices (2011-12 base year). 

Sources: Ministry of Statistics and Programme Implementation; PRS.

The Ministry of Statistics and Programme Implementation is responsible for the collection and publication of statistical data.  The Ministry notes that data collection is affected due to COVID-19 and the lockdown imposed by the government.  It further adds that the estimates published for the fourth quarter and the year 2019-20 are based on available data and are likely to undergo revision.1 

Industrial production fell by 3.8% in the fourth quarter of 2019-20

The Index of Industrial Production (IIP) contracted by 3.8% in the fourth quarter (Jan-Mar) of 2019-20, as compared to the same period in 2018-19.[2]  This was driven by negative growth in the manufacturing sector which has a 78% weightage in calculation of IIP.  Manufacturing production contracted by 5.8% in the fourth quarter of 2019-2020 over the fourth quarter in 2018-19.  However, the mining sector (14% weightage in IIP) saw an increase of 4.4% in this quarter and the electricity sector grew by 2.2%.  In 2019-20, IIP grew at -0.7% over 2018-19.  Figure 2 shows the change in industrial production during the fourth quarter of 2019-20.

Figure 2: Growth in IIP in fourth quarter of 2019-20 (year-on-year)

Sources: Ministry of Statistics and Programme Implementation; PRS. 

 

Finance

CGA releases provisional data on central government accounts for 2019-20

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

The Controller General of Accounts (CGA) released provisional data on the central government’s accounts for the financial year 2019-20.[3]  Table 2 compares the provisional accounts of the government for 2019-20 with the revised estimates for the year as presented on February 1, 2020.  Key highlights include:

  • The government spent Rs 26,86,362 crore in 2019-20, which is 0.5% less than the revised estimate for 2019-20.  The reduction was almost entirely in capital expenditure.
     
  • Receipts (other than borrowings) were estimated to be Rs 19,31,706 crore, but stood 9.4% lower at Rs 17,50,727 crore.
     
  • Fiscal deficit in 2019-20 was 22% higher than the revised estimate at Rs 9,35,635 crore.  This is equivalent to 4.6% of GDP, higher than the estimate of 3.8% of GDP.

Table 2:  Provisional accounts of the central government for the year 2019-20 (Rs crore)

Item

Revised
 2019-20

Provisional
 2019-20

% change

Total Expenditure

26,98,552

26,86,362

-0.5%

        Revenue

23,49,645

23,49,618

0.0%

        Capital

3,48,907

3,36,744

-3.5%

Total Receipts (without borrowings)

19,31,706

17,50,727

-9.4%

       Tax revenue (net)

15,04,587

13,55,886

-9.9%

       Non-tax revenue

3,45,514

3,26,221

-5.6%

       Disinvestment

65,000

50,304

-22.6%

       Other receipts

16,605

18,316

10.3%

Fiscal Deficit

7,66,846

9,35,635

22.0%

    As % of GDP

3.8%

4.6%

 

Revenue Deficit

4,99,544

6,67,511

33.6%

    As % of GDP

2.4%

3.3%

 

Sources:  Controller General of Accounts; Union Budget 2020-21; PRS.

Table 3 compares the tax revenue of the central government in 2019-20 (as per the provisional accounts) with the revised estimates for the year.  While the gross tax revenue in 2019-20 was 7.1% lower than the revised estimate, the central government’s net tax revenue was 9.9% lower than the revised estimate.

Table 3:  Tax revenue in 2019-20 (Rs crore)

Item

Revised
 2019-20

Provisional
 2019-20

% change

Gross tax revenue

21,63,423

20,09,882

-7.1%

        GST

6,12,327

5,98,825

-2.2%

        Corporation tax

6,10,500

5,56,876

-8.8%

        Income tax

5,47,000

4,80,341

-12.2%

        Other taxes

3,93,596

3,73,840

-5.0%

Tax revenue (net)

15,04,587

13,55,886

-9.9%

Devolution to states

6,56,046

6,50,677

-0.8%

Sources:  Controller General of Accounts; Union Budget 2020-21; PRS.

Change over 2018-19:  While the government’s expenditure increased by 16% in 2019-20 over the previous year, its receipts (other than borrowings) increased at a rate of 5% and borrowings/fiscal deficit increased by 44%.

In 2019-20, gross tax revenue decreased by 3.4% over the previous year, primarily due to a 16.1% decrease in corporation tax revenue.  However, the central government’s net tax revenue increased by 2.9% as devolution of central taxes to states decreased by 14.5%.

Central government increases its market borrowings target for 2020-21 by 54%

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

The central government increased its gross market borrowings target for the financial year 2020-21 from Rs 7.8 lakh crore to Rs 12 lakh crore.[4]  This is an increase of 54% over the budget estimate and is equivalent to 1.87% of the GDP estimated in the 2020-21 budget.  The government has revised its borrowings target upwards on account of the COVID-19 pandemic.

Cabinet approves modifications in the Partial Credit Guarantee Scheme

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

The Union Cabinet approved modifications to the Partial Credit Guarantee Scheme to expand the coverage of the scheme.[5]  The scheme was announced in the Union Budget 2019-20 and approved by Cabinet in December 2019.[6]    Under the scheme, a government guarantee (covering initial losses of 10% of the value of the assets or Rs 10,000 crore, whichever is lower) is given to public sector banks (PSBs) for buying high-rated pooled assets from financially sound non-banking financial companies (NBFCs) or housing finance companies (HFCs).

Under the expanded scheme, the government will also provide PSBs with a guarantee for covering upto 20% of first loss for the purchase of Bonds or Commercial Papers issued by NBFCs and Micro Finance Institutions (MFIs).   The minimum rating for such bonds or commercial papers should be AA or below (including unrated paper with initial maturity of up to one year). 

The government expects that the guarantee will help NBFCs, MFIs and HFCs continue with capital formation in small and medium enterprises, and help mitigate adverse effects of COVID-19.  The scheme was originally valid till June, 2020.   It will now be valid till March 31, 2021, or till such date by which Rs 10,000 crore worth of guarantees are provided by the government, whichever is earlier.     

Cabinet approves extension of Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

The Union Cabinet approved the extension of the Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana for a period of three years up to 31st March, 2023.[7]  The scheme aims to provide social security for persons above 60 years of age to protect them against a future fall in their interest income due to uncertain market conditions.[8]   Under the scheme, an assured interest return is guaranteed by the insurer.  The difference between return generated by the insurer and the assured return is borne by the government of India as subsidy on an annual basis.    

For 2020-21, the assured rate of return will be 7.4%.   This will be revised every year.  The scheme can be purchased at a minimum purchase price of Rs 1,56,658 for a yearly pension of Rs 12,000.  For monthly pension pay-out option, the minimum purchase price will be Rs 1,62,162 for a monthly pension of Rs 1,000.  

 

COVID-19

As of May 31, 2020, there were 1,90,535 confirmed cases in India.[9]   Of these, 91,819 had been cured/discharged and 5,394 persons had died.9  For details on the number of daily cases in the country and across states, please see here.  

With the spread of COVID-19, the central government has announced several policy decisions to contain the spread, and financial measures to support citizens and businesses who would get affected.  For details on the major notifications released by centre and the states, please see here.  Key announcements made in this regard in May 2020 are as follows.

Lockdown extended till June 30 with several relaxations

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

To contain the spread of COVID-19, the National Disaster Management Authority (NDMA) had imposed a 21-day national lockdown in March.[10]  Since then, the lockdown has been extended four times, with the latest extension till June 30, 2020.[11]   These measures have been issued under the provisions of the Disaster Management Act, 2005.  The Act sets up national and state-level Disaster Management Authorities and gives these authorities powers for the effective management of disasters.  

The revised lockdown guidelines allow district authorities to risk profile certain areas as containment zones based on the parameters prescribed by the Ministry of Health and Family Welfare.  The lockdown will continue to remain in force in containment zones, and movement of persons will not be allowed except for medical emergencies and for supply of essential goods and services.  States may also identify buffer zones (outside containment zones) where district authorities may impose additional restrictions.11  

In areas outside containment zones, all activities will be permitted, except for certain restrictions.  These restrictions will be lifted in a phased manner based on Standing Operating Procedures issued by the Ministry of Health and Family Welfare.  In Phase-I (starting from June 8), the following places will be re-opened: (i) religious places, (ii) hotels, restaurants and other hospitality services, and (iii) shopping malls.  In Phase-II, a decision for re-opening educational institutions will be taken in July based on consultation with states.  In Phase-III, the following activities will be allowed based on further assessment: (i) international air travel, (ii) metro rail, (iii) theatres, gyms, auditoriums and similar places, and (iv) large congregations such as social, political, or religious functions.11    

Further, all intra-state and inter-state movement of persons and goods will be freely permitted, unless states assess otherwise.  Details of any movement restrictions decided by states must be given wide publicity in advance.  Movement of goods between India and neighbouring countries (based on treaties) will also be permitted.  Travel by trains, domestic air travel and international movement of persons from India and to India will continue to be regulated by Standard Operating Procedures issued in this regard.

Movement of people will remain prohibited between 9 pm in the evening and 5 am in the morning, except for essential activities.  

States may impose further restrictions or prohibitions in areas outside containment zones, based on their assessment of the situation.  However, they cannot dilute the restrictions imposed by the central government.11  

The guidelines also mandate certain directives for COVID-19 management in workplaces and public spaces.  These measures include: (i) compulsory wearing of face cover in public spaces and workplaces, (ii) limit on marriage gatherings of up to 50 guests, and in funerals of up to 20 persons, and (iii) staggering of work hours in all workplaces.11 

Announcements made under the Aatma Nirbhar Bharat Abhiyaan package 

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

In light of the COVID-19 pandemic, a special economic package of Rs 20 lakh crore (equivalent to 10% of India’s GDP) was announced by the Finance Minister.12  The aim of the package is to prepare the country for the tough competition in the global supply chain and to empower the poor, labourers, and migrants who have been adversely affected by the pandemic and the lockdown.  Table 4 below shows components of the economic package.

Table 4: Break-up of stimulus from Aatma Nirbhar Bharat Abhiyaan package 

Description

Amount (in Rs crore)

Stimulus from earlier measures

1,92,800

Business including Micro, Small and Medium Enterprises (MSMEs)

5,94,550

Poor people including migrants and farmers.

3,10,000

Agriculture and allied sectors.

1,50,000

Other sectors such as: coal and mineral, defence, civil aviation, power, social infrastructures, space, atomic energy 

48,100

Sub Total

1,295,400

RBI Measures (Actual)

8,01,603

Grand Total

20,97,053

Source:   Presentations made by Union Finance Minister Ms. Nirmala Sitharaman under Aatmanirbhar Bharat Abhiyaan; PRS.

Some key initiatives under various sectors announced under the package are as follows:

Government Reforms:

  • Increase in borrowing limits: The borrowing limits of state governments will be increased from 3% to 5% of Gross State Domestic Product (GSDP) for the year 2020-21.  The increase beyond 3.5% of the GSDP will be conditionally linked to reforms on -   universalisation of ‘One Nation One Ration card’, ease of doing business, power distribution, and urban local body revenues.[12]
     
  • Privatisation of Public Sector Enterprises (PSEs): A new PSE policy has been announced.  The policy is aimed at privatisation of PSEs, except the ones functioning in certain strategic sectors.  A list of strategic sector PSEs will be notified by the government at a later stage.  In strategic sectors, at least one PSE will remain, but private sector enterprises will also be allowed.[13] 

Business (including MSMEs): 

  • Collateral free loans: Collateral free loans up to three lakh crore rupees will be provided to all businesses.  These loans will be provided through banks and Non-Banking Financial Companies (NBFCs).[14]  
     
  • Change in MSME definition: The Micro, Small and Medium Enterprises Development Act, 2006 will be amended to change the MSME definition.  As per the proposed definition, investment limit will be increased for MSMEs.  A new criteria of annual turnover will be introduced.  The turnover limit for micro, small and medium enterprises will be Rs 5 crore, Rs 50 crore, and Rs 100 crore, respectively.
     
  • Reduction in tax rates: The rates of Tax Deduction at Source for the non-salaried specified payments made to residents and Tax Collected at Source will be reduced by 25% from the existing rates.  This will apply from May 14, 2020 to March 31, 2021.

Agriculture and allied sectors: 

  • Support to farmers and infrastructure: Key initiatives in the sector to support farmers and infrastructural developments include (i) concessional credit worth two lakh crore rupees for 2.5 crore farmers, (ii) fund of one lakh crore rupees for development of agriculture infrastructure projects, and (iii) additional fund of Rs 30,000 crore to meet the crop loan demand through NABARD and Rural Banks. 
     
  • Amendment to the Essential Commodities Act, 1955: The Essential Commodities Act, 1955 will be amended to deregulate food items including cereals, edible oils, oilseeds, pulses, and onions for attracting investments and enabling competition in the sector.

Migrant Workers: 

  • One nation one card: Under the scheme of One Nation One Card, the migrant workers will be allowed to access the Public Distribution System (Ration) from any Fair Price Shop in India by March 2021.[15]  
     
  • Affordable Rental Housing Complexes (ARHC) for Migrant Workers / Urban Poor: The migrant labour/urban poor will be provided living facilities at affordable rent under Pradhan Mantri Awas Yojana.

Civil Aviation: 

  • Efficient airspace management: Restrictions on utilisation of the Indian Air Space will be eased allowing optimal utilisation of airspace, reduction in fuel use, and time to save about Rs 1,000 crore per year for the aviation sector.
     
  • Public Private Partnership (PPP) model for airports: World-class airports will be built through PPP model to enable private sector investment of around Rs 13,000 crore in 12 airports.

Defence: 

  • Increase in FDI limit: FDI limit in defence manufacturing under automatic route will be increased from 49% to 74%.  
     
  • Make in India: A list of weapons/platforms will be released which will be banned for import based on a year wise timeline.  Further, the government has planned to improve the autonomy, accountability and efficiency in Ordnance Supplies by corporatisation of Ordnance Factory Board.

Energy: 

  • Liquidity support for distribution companies (discoms): A liquidity support of Rs 90,000 crore will be provided to power discoms in the form of funds from Power Finance Corporation and Rural Electrification Corporation.  Discoms will also be provided with state government guaranteed loans exclusively for discharging their liabilities to power generation companies.[16]  Rs 50,000 crore will be spent on infrastructure development for evacuation of coal. 

Housing and Social Sector: 

  • Credit Linked Subsidy Scheme for Middle Income Group (MIG): The Credit Linked Subsidy Scheme for Middle Income Group (annual income between Rs 6 lakh and Rs 18 lakh) will be extended by one year up to March 2021.  
     
  • Support to real estate sector: COVID 19 will be treated as an event of “Force Majeure” under Real Estate Regulatory Authority (RERA) by states/union territories and their Regulatory Authorities.  An extension of six months will be given on registration and completion dates of all registered projects.  This is for projects expiring on or after March 25, 2020 without individual applications.
     
  • Allocation for MGNREGS: Additional Rs 40,000 crore will be allocated under MGNREGS.  This increases the Union Budget allocation for MGNREGS from Rs 61,500 crore to Rs 1,01,500 crore (65% increase) for 2020-21.

For a detailed summary of the package, please see here.

RBI announces additional measures to ease financial stress caused by COVID-19

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

The Reserve Bank of India (RBI) has announced several additional measures to ease the financial stress caused by COVID-19 disruption.[17],[18]  The measures include further reduction in repo rate, further extension of moratorium on loans, and measures to support import and exports.  These are elaborated below: 

  • Policy Rates: The repo rate (the rate at which RBI lends money to banks) was reduced from 4.4% to 4.%.[19]  The reverse repo rate (the rate at which RBI borrows money from banks) was reduced from 3.75% to 3.35%.  The marginal standing facility rate (the rate at which banks can borrow additional money) and the bank rate (the rate at which RBI buys bills of exchange) were reduced from 4.65% to 4.25%.  The accommodative stance of monetary policy (loosening or expansion of money supply) will be continued in order to revive growth and mitigate the impact of coronavirus on the economy. 
     
  • Moratorium on term loans: In March 2020, the RBI had permitted all lending institutions to grant a moratorium of three months on payment of all term loans outstanding as on March 1, 2020.  This has been extended by another three months (till August 31, 2020).   Such deferment will not result in downgrade in asset classification.  For working capital such as cash credit or overdraft as well, lending institutions are permitted to allow a deferment of further three months on recovery of interest (till August 31, 2020). 
     
  • Export and Import related measures: Remittances for imports (excluding gold, diamonds or jewellery) are currently required to be completed within a period of six months from the date of shipment.  RBI has extended this time period from six months to twelve months from the date of shipment for such imports made on or before July 31, 2020.  A line of credit of Rs 15,0000 crore will be extended to the Export-Import Bank of India to meet its foreign exchange requirements for raising funds in international debt capital markets. 
     
  • Other measures: Currently, the exposure limit of a bank to a group of connected counterparties is 25% of the eligible capital base of the bank.  As a one-time measure to ease difficulty in raising funds, this limit has been relaxed to 30% of capital base of bank. 

Supreme Court issues interim orders on movement of migrant labourers

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

The Supreme Court of India took cognisance of the problems of migrant labourers who have been stranded in different parts of the country.  In its order, the Court observed that there have been lapses in the process of registration, transportation and in providing food and shelter to migrant workers.[20]  In view of these difficulties, the Court issued the following interim directions:  

  • Arrangements for food:  Free of cost food should be provided to the migrant workers who are stranded at different places in the country by the concerned state governments.  This information should be publicised and notified to workers who are waiting for their turn to board a train or bus.  Further, for travel by train, originating states must initially provide food and water, and the Railways must provide food and water during the journey.  The same facilities must be extended where migrant workers are transported by bus.
     
  • Payment of fare:  Fare must not be charged from migrant workers for travel by trains or bus.  Railway fare must be shared by the states as per their arrangement.  
     
  • Registration of migrant workers:  States must simplify and speed up the process of registering migrant workers and provide a help desk for registration where workers are stranded.  Complete information regarding the modes of transport must be publicised to stranded workers.  
     
  • Obligations of receiving state:  After the migrant workers reach their native place, the receiving state must provide health screening, transport and other facilities, free of cost. 
     
  • Duties towards migrant workers found walking:  Migrant workers found walking on highways or roads must be provided transportation to their destination and all facilities including food and water.

Aarogya Setu Data Access and Knowledge Sharing Protocol released; app made open source

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

The Ministry of Electronics and Information Technology released the Aarogya Setu Data Access and Knowledge Sharing Protocol, 2020 in reference to the Aarogya Setu mobile application (app).[21]  The app was launched by the central government in April 2020 to enable contact tracing (identification and monitoring of persons who are at a higher risk of being infected by COVID-19) and for users to assess their own risk of getting infected.[22]  

The protocol aims to ensure secure and efficient collection and sharing of data by the application protect the personal data of individuals.   Key features of the protocol include: 

  • Data collection: Data collected by the app and the purpose for which it will be used should be clearly specified in the privacy policy of the app.  Data collection should be minimised to the extent that it is required for formulating or implementing health responses.  The collected should be processed in a fair, transparent and non-discriminatory manner. 
     
  • Data storage: The app collects data regarding: (i) demographic details of the user, (ii) location of user from time to time, (iii) data of other individuals who have come in proximity with the user, and (iv) self-assessment data.   Demographic details will be stored with the government for as long as necessary, unless the user requests for deletion of their data.  Location data and data of other users who have come in proximity will remain on the user's device, but it may be uploaded to the government server (shared with the government) to formulate or implement health responses.  This data, along with any self-assessment data will not be stored for more than 180 days from the date of collection.  
     
  • Sharing of personal data: Any data collected by the app can be shared with the health ministry or health department of any state or the national (or state) disaster management authorities for formulating or implementing appropriate health responses.  Data may be shared with other departments of the central or state government in a de-identified (where personal identifiers are removed or masked from the dataset) format, if required.  The National Informatics Centre (developer of the app) will maintain a list of agencies with whom such data has been shared.  Data may be shared for the purpose of research in an anonymised manner (where it is not possible to identify the user to whom the data pertains to).  

Violation of the protocol may lead to penalties as prescribed under the Disaster Management Act.  The protocol is applicable for 6 months and maybe revised, subsequently.  Further, the source code of the application has been made open source for review and collaboration for the android version of the application.[23]   

Domestic passenger train travel resumes

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

The Ministry of Railways resumed domestic passenger train travel from May 12, 2020 starting with 15 pairs of special trains.[24]   These are in addition to the Shramik Special Trains.  These special trains had only air-conditioned classes and the fare structure was the same as the Rajdhani trains.  Passengers travelling on these trains were instructed to: (i) wear face masks at the entry and during travel, (ii) arrive at least 90 minutes early at the station to facilitate thermal screening, and (iii) maintain social distancing.  All passengers were advised to download and use the Aarogya Setu application.  

Following this, the Ministry announced that 200 additional passenger trains will be operated from June 1, 2020 onwards.[25]  Key features and guidelines for these trains include:

  • These trains will be fully reserved with both AC and non-AC classes.  General coaches will also have reserved seating.  There will be no unreserved coaches in these trains.  Fares will be charged as per the corresponding class.   All existing passenger quotas (for regular trains) will be permitted. 
     
  • Only online booking of tickets will be allowed.   The advance reservation period will be a maximum of 30 days.  Further, tatkal and premium tatkal booking will not be permitted.
  • All passengers will be screened and only asymptomatic passengers will be allowed to board the train.  
     
  • Provision for pre-paid meal booking, e-catering will be disabled.  No linen, blankets, and curtains will be provided inside the train.

Movement of stranded persons by special trains

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

The Ministry of Home Affairs (MHA) issued Standard Operating Protocols for the movement of stranded workers by trains.[26]  As per the Protocols, the Ministry of Railways will permit the movement of stranded workers by trains in consultation with MHA.  The Ministry of Railways will finalise the schedules for trains including the stoppages and destinations and will communicate it to states.  The sending state will be required to ensure that all passengers are compulsorily screened, and only asymptomatic passengers are allowed to board the train.  On arrival at the destination, the travelling passengers will have to adhere to the health protocols as prescribed by the destination state.  

Domestic air travel resumes 

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

The Ministry of Civil Aviation announced that domestic passenger air travel will resume in a phased manner from May 25, 2020.  The Ministry also released details of the guidelines for air travel to be followed by the passengers and key stakeholders (airlines, airports, security agencies, ground handling agencies, etc.).[27]  Key guidelines include:

  • One-third of operations will be permitted for now.   More flights will be added gradually in a calibrated way.
     
  • Airlines will adhere to the fare limits prescribed by the Ministry.  Fare limits have been set as per prescribed sectors.  Fares range from minimum Rs 2,000 to a maximum of Rs 18,600.[28]  These fares are exclusive of other charges such as user development fee, and GST. 
     
  • Passengers will be required to provide a self-declaration or share their status on the Aarogya Setu app which specifies that the passenger is free of COVID-19 symptoms.  Airlines will ensure that boarding passes are given to passengers only after they provide a self-declaration in the specified manner.
     
  • Passengers with red status on the app or living in a containment zone will not be allowed to travel.  If such passengers undertake air travel, they will be penalised. 
     
  • All passengers will have to do web check-in and obtain boarding passes.  
     
  • Airlines will be required to provide protection kit (three-layer surgical mask, face shield, and sanitiser) to each passenger.   
     
  • Airlines will also be required to provide the passenger manifest of each flight to the states/union territories.  This manifest will include details such as passenger’s name, contact, and destination address. 
     
  • Airports will be required to earmark areas for isolation and COVID-19 testing of passengers suspected to be infected.   They will also have to earmark separate areas for staff to change their PPE gear.

UDAN flights:  The Ministry also announced the modalities for resumption of flights under the Regional Connectivity Scheme (RCS-UDAN).[29]   Under this, the routes that have been allowed to resume operations include: (i) all operational routes in priority areas (north-east region, hilly states and islands), (ii) all operational helicopter routes, (iii) all operational routes with zero viability gap funding, and (iv) all operational routes with up to 500 km stage length.  

The Directorate General of Civil Aviation also announced the resumption of pilot proficiency and other related training for pilots to ensure that they are meeting their flying requirements.[30]  

Eligibility criteria for repatriation under Vande Bharat Mission

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

The Ministry of Civil Aviation also released the eligibility criteria for passengers purchasing tickets for flights departing from India (under the Vande Bharat Mission).[31]  Key criteria include:

  • Prospective travellers must ensure that they are eligible to enter or transit the country for which they are purchasing the ticket.
     
  • Persons who will be allowed to travel to destination countries include those who: (i) are citizens of that country, (ii) hold visa of at least one-year duration of that country, and (iii) Green Card or OCI cardholder.  
     
  • Some countries are allowing only their nationals to enter in (including Malaysia, Saudi Arabia, Qatar, Oman, and Philippines).   Other passengers who want to travel to these countries (such as work visa or resident visa holders), may separately obtain written permission from the embassies of these countries in India, or their nearest consulates.  

Welfare scheme for seafarers announced

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

The Seafarers Welfare Fund Society, which is an autonomous body under the Ministry of Shipping, has announced a welfare scheme for Indian seafarers and their families who may suffer from COVID-19.[32]  The scheme will be effective from February 1, 2020 till December 31, 2020.  Under the scheme, seafarers and their families will be provided with financial support: (i) for in-patient treatment for COVID-19 in notified hospitals, and (ii) in case of death of seafarers.  The maximum financial support for medical treatment will be one lakh rupees, and in case of death would be two lakh rupees (paid to next of kin of the seafarer). 

Deadlines for payment of certain fee under the Motor Vehicles Act extended 

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

The Ministry of Road Transport and Shipping has extended the deadline for the payment of certain licensing and registration fee required under the Motor Vehicles Act, 1988 and the Central Motor Vehicles Rules, 1989.[33]   These include the fee required for obtaining and renewing driving licenses, and transfer of vehicle ownership.   This will not apply to the issue of registration and assignment of new registration mark for vehicles.  

Under the notification, if the specified activities (licensing or registration) could not be completed due to COVID-19, the fee that was paid for the specified activities on or after February 1, 2020 will continue to be valid.  Such activities must be completed by July 31, 2020.  If there was a delay in payment of fee for such activities, then such fee can also be paid by July 31, 2020 without any late fee or additional fee for such delay.  

PM CARES Fund included in the list of CSR eligible activities

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

The Ministry of Corporate Affairs notified the inclusion of Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in emergency Situations (PMCARES) Fund in the list of activities eligible for Corporate Social Responsibility (CSR) under the Companies Act, 2013.[34]  Under the Act, companies with net worth, turnover or profits above a specified amount are required to spend 2% of their average net profits in the last three financial years towards CSR activities.  

This measure will come into effect retrospectively from March 28, 2020, when the fund was setup.[35] 

Amendments introduced for reduction of employer and employee contribution rates towards PF accounts

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

The Employees’ Provident Funds Scheme, 1952, provides for a contribution-based provident fund (PF) scheme for employees in establishments.  

Earlier in the month, the Finance Minister had given details of measures under the economic package of Rs 20 lakh crore announced by the Prime Minister.12  One of the announcements related to reduction in rate of contribution of employers and employees towards the PF scheme from 12% to 10% for three months.  This would not apply to: (i) workers who are eligible under the PM Garib Kalyan Package announced by the Finance Minister in March 2020, and (ii) to central and state public enterprises.[36]  

The Ministry of Labour and Employment notified provisions for implementing this measure.[37]  The amendment will be effective for a period of three months, starting May 2020.   

Further, the Employees’ Provident Fund Organisation (set up under the administrative control of the Ministry) has also clarified that no proceedings will be initiated under the Act for any delay in payment of contributions or other charges by employers during the lockdown.[38]

Last date for feedback on the draft Environment Impact Assessment Notification, 2020 extended till June 30

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

In March 2020, the Ministry of Environment, Forest and Climate Change had released the Draft Environment Impact Assessment Notification, 2020.[39] It seeks to replace the Environment Impact Assessment Notification, 2006.  It proposes certain changes to the 2006 notification such as exemption of certain projects from public consultation.  These include all, construction, expansion of national highways, and modernisation of irrigation projects.39  

Comments on the draft notification were invited till May 10, 2020.   This has now been extended till June 30, 2020 in view of the lockdown imposed due to the COVID-19 pandemic.[40]

Relaxation in terms and conditions for work from home facility extended

Saket Surya (saket@prsindia.org)

In March, the Department of Telecommunications (DoT) had granted certain relaxations in the terms and conditions for work from home facility applicable to Other Service Providers (OSPs) till April 30, 2020.[41]  This was later extended until May 31, 2020.[42]  These relaxations are now further extended until July 31, 2020.[43]  

OSPs are companies which provide various application services such as tele-banking, tele-commerce, call centre, and other IT-enabled services.[44]  For example, a Business Process Outsourcing company (BPO) is an OSP.  They are required to register with the DoT for offering services in the country.  The OSPs may also employ persons who work from home.  OSPs are required to seek permission from DoT and provide a bank guarantee for extending the work from home facility.

Key relaxations in the terms and conditions for work from home facility include exemption from: (i) securing prior permission of DoT, (ii) using secured virtual private network (VPN) from authorised service providers, and (iii) furnishing security deposit and agreement.

Extension in grant of permission agreements for community radio stations expiring up to June 2020

Saket Surya (saket@prsindia.org)

The Ministry of Information and Broadcasting extended the grant of permission agreements for community radio stations which have expired or will expire by June 30, 2020.[45]  The extension has been provided as many organisations could not get their permissions agreements renewed due to the situation arisen from COVID-19. 

Such agreements will be renewed for an interim period of up to October 31, 2020 on the same terms and conditions as agreed in the last agreement. The interim renewal period will be counted towards any future period of renewal.

Advisory to State Electricity Regulatory Commissions to allow online listing and hearing of petitions

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

The State Electricity Regulatory Commissions (SERCs) had postponed listings and hearing of petitions due to nationwide lockdown in the wake of COVID-19.  The Ministry of New and Renewable Energy issued an advisory to the SERCs to: (i) allow online filing and listing of petitions and (ii) conduct hearings through video conferencing on urgent matters.[46]

Validity period for star classifications of hotels and other accommodations extended till June 30

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

The Ministry of Tourism classifies hotels under the star rating system to conform to the expected standards for different classes of tourists.[47]  This certification is valid for five years.  In light of the COVID-19 pandemic, the Ministry of Tourism has extended the validity of these certifications for hotels and other accommodations until June, 30, 2020.  This is for those hotels whose project classification/ reclassification have expired or is likely to expire during the period between March 24, 2020 and June 29, 2020.47

Similarly, the Ministry has a scheme of approving travel agents, tour operators, and tourist transport operators, among others.  The Ministry of Tourism will allow a six month extension to all categories of tour operators and travel agents seeking approval.47   This applies if: (i) their approval expired or expires during the period of March 20, 2020 till the end of the lockdown, and (ii) they apply for renewal before expiry of their current/previous approval.

 

Coal

Saket Surya (saket@prsindia.org)

Auction of coal and lignite blocks for commercial sale on revenue sharing basis

The Union Cabinet approved a new methodology based on revenue sharing for auction of coal and lignite blocks for commercial sale.[48]  Prior to this, coal and lignite based blocks were awarded on a fixed rupees per tonne basis methodology.[49]  Under the new methodology, successful bidders will be required to share a percentage of revenue with the government instead of paying a fixed price per tonne of production.48

Key features of the methodology are as follows:

  • Bid parameter: The bidders will be required to bid for a percentage share of revenue payable to the government.  The floor price will be 4% of the revenue share.
     
  • Payment of upfront amount: The successful bidder will be required to pay an upfront amount which will be 0.25% of the value of estimated geological reserves of the mine.  The upfront amount will not be more than: (i) Rs 100 crore for geological reserves up to 200 million tonnes, and (ii) Rs 500 crore for geological reserves up to 500 million tonnes.
     
  • Monthly payment: The successful bidder will be required to make a monthly payment to the government which will be a product of: (i) percentage of revenue share, (ii) quantity of coal on which statutory royalty is payable during the month, and (iii) notional or actual price, whichever is higher.
     
  • Incentives for early production and clean usage: The successful bidder will be given a rebate in revenue share in events of: (i) early production and (ii) coal consumed or sold for gasification and liquefaction.
     
  • Coal bed methane: The methodology also permits commercial exploitation of the coal bed methane present in the lease area.  Coal bed methane is a form of natural gas found near coal deposits.

Tenure of coking coal linkage 

The Cabinet also approved an increase in the maximum tenure of coking coal linkage in the non-regulated sector from 15 years to 30 years.48  The non-regulated sector includes cement, steel, sponge iron, and aluminium.  Coal is supplied to such sectors on a long-term basis through fuel supply agreements with coal companies.

The Coal Blocks Allocation (Amendment) Rules, 2020 notified

The Ministry of Coal notified the Coal Blocks Allocation (Amendment) Rules, 2020 to amend the Coal Blocks Allocation Rules, 2017.[50]  The 2017 Rules issued under the Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957 provide for terms and conditions for the auction and allotment of coal blocks.[51]

The amendments in the 2017 Rules have been notified to give effect to: (i) the provisions of the Mineral Laws (Amendment) Act, 2020 and (ii) auction of coal and lignite blocks for commercial sale on revenue sharing basis.48,[52]  Among other changes, the Act removed the restriction on end-use for certain coal blocks specified under the Coal Mines (Special Provisions) Act, 2015.

Key amendments to the Coal Blocks Allocation Rules, 2017 include:

  • Prices for auction or allotment: The 2017 Rules provide for a ceiling price, floor price, and reserve price that the central government could fix for certain types of auctions or allotments.  This has been amended to provide that these prices could either be specified as a price or a percentage.  This seeks to enable the allocation of coal blocks on the revenue sharing model.
     
  • Performance bank guarantee: The 2017 Rules provide that successful allottee will provide a performance bank guarantee to the central government.  It also enables the state government to require a performance bank guarantee from the allottee upon the grant of mining lease.  This has been amended to provide that the successful allottee will be required to provide an unconditional and irrevocable performance bank guarantee upon the grant of mine opening permission.  This guarantee provided to the state government will be equivalent to the performance bank guarantee submitted to the central government.

Specified end-use clause: The 2017 Rules provided for allocation of certain coal mines with specified end-use such as power generation and steel production.   These provisions have been removed. This is consequent to the provisions of the Mineral Laws (Amendment) Act, 2020 which removed the restriction on end-use of coal from mines specified under the Coal Mines (Special Provisions) Act, 2015.

  • Prospecting license-cum-mining lease: Various provisions regarding allocation order under the 2017 Rules (such as issuance and cancellation) will now also cover the prospecting license-cum-mining lease for a coal block.  The Mineral Laws (Amendment) Act, 2020 added the provision for a composite license which will provide for both prospecting and mining activities.

Standard Operating Procedure for National Coal Index

The Ministry of Coal released the standard operating procedure (SOP) for National Coal Index.[53]  The Index will reflect the market price of coal.[54]  Other uses of the Index include: (i) use as a base indicator for taxation purpose and (ii) for future calculation of upfront amount and intrinsic value of mines.54

The SOP provides that the Index will be published once in two months.  The Coal Controller’s Organisation will be responsible for: (i) collecting data pertaining to coal prices, (ii) statistical validation of price data, and (iii) preparation of detailed technical note on the price movements.  The Ministry of Coal will be responsible for scrutiny of data and publication of the results.

 

Power

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

Amendment in methodology for allocation of coal for short-term linkage under the SHAKTI policy  

The Ministry of Power amended the methodology for allocation of coal under the SHAKTI Policy in May 2020.[55]  The SHAKTI policy seeks to provide for the allocation of coal among thermal power plants in a transparent and accountable manner.[56]  Under the policy, short-term linkage is provided to thermal power plants.  Currently, except the captive power plants, all other power plants with united capacity more than 50% (generation capacity without power purchase agreements) are eligible to participate in short term coal linkage auctions.  The linkage is provided for a period of three months.   The amendment will now allow all power plants not having power purchase agreements to participate in coal linkage auctions.  The duration of coal linkage provided to these power plants will now be up to one year.   

Draft Guidelines and Model PPA released for implementation of off-grid solar power plants under RESCO model

The Ministry of New & Renewable Energy has released draft guidelines and a model power purchase agreement (PPA) for implementation of off-grid solar power plants.[57]  The salient features of the guidelines are as follows:

Applicability: The guidelines apply to off-grid solar power plants with capacity up to 25kWp in areas beyond the reach of grid power and those with unreliable grid connections.  The beneficiaries of these plants will be public service institutions including hostel, schools, panchayats and police stations.  

Implementation Model: The plants will be made operational through a framework based on Renewable Energy Service Company (RESCO) model.  In this model, an external company or a government agency owns all the equipment and performs complete maintenance as well as repair work.   The beneficiary only pays the service charge which covers the cost of providing electricity including cost of maintenance and repairs.  This will help in avoiding financial challenges and utilise the costly assets of solar PV systems effectively

Features of solar PV plants: The guidelines provide details on features of plants in areas isolated from grid system and areas with unreliable grid connections.  Some of the common features in both areas include: (i) use of energy efficient equipment such as LED lights, (ii) battery back-up to support power supply for two days in case of essential/emergency load. (iii) use of MPPT inverters, and (iv) deployment of remote monitoring systems.  For the isolated off-grid systems, the system will be designed only for DC appliances wherever possible. Moreover, there will be no provision for feeding surplus power to the grid. 

Central financial assistance: Central Financial Assistance (CFA) will be provided to plants in using one of the following financial models: 

  • Upfront payment of CFA: 90% of the benchmark cost will be paid upon commissioning of the plant.
     
  • Payment of CFA in instalments: Under this model, 50% of the CFA will be paid at the time of commissioning. Rest of the amount will be paid in two ways: (i) rest 50% after five years, or (ii) 25% after five years and remaining 25% after ten years. The subsequent instalments will be paid at the end of the specified period or replacement of batteries, whichever is later.

Tariff estimation: The tariff estimation is provided for two cases: (i) in case of upfront payment of the subsidy; and (ii) in case of payment of 50% subsidy upfront and rest 50% is paid after 5 years.  The tariff for first and second cases will be Rs 5.96 per kWh and Rs 9.55 per kWh respectively.  The estimation is based on a representative system of 4kWp.

Power Purchase Agreement (PPA): The draft model PPA between the contractor and the beneficiary (i.e. the public service institutions) provides for details on the design, manufacture, supply, installation, testing and commissioning of the off-grid solar PV plants in RESCO mode.   The model agreement includes details on warranty, operation and maintenance of the off-grid plants.

NTPC and ONGC to set up a joint venture for renewable energy business

National Thermal Power Corporation (NTPC) and Oil and Natural Gas Commission (ONGC) signed a Memorandum of Understanding (MoU) to set up a joint venture for renewable energy business.[58]  The MoU provides for: (i) setting up of offshore wind and other renewable projects in India and abroad, and (ii) collaborating in fields of sustainability, e-mobility, and ESG (Environmental, Social and Governance) compliant projects.

The MoU is expected to assist NTPC and ONGC in achieving 32 GW and 10 GW of renewable energy capacity by 2032 and 2040, respectively.

 

Transport 

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

Draft amendments to Motor Vehicles Rules regarding compliance of emission and noise standards released

The Ministry of Road Transport and Highways released draft amendments to the Central Motor Vehicles Rules, 1989.[59]  The draft notification suggests some changes to the certificate which provides for compliance of vehicles with air pollution standards and road worthiness.  

The certificate is issued by the vehicle manufacturer or importer or registered association in case of an e-rickshaw or e-cart certifying that the vehicle meets certain prescribed standards.  The proposed rules add some pollutants (such as methane, ammonia, and number of particles) whose emission levels would also need to be reported in the form. 

Comments on the draft amendments are invited within 30 days from the date of publication of the draft rules, i.e., before June 10, 2020. 

Vehicles with invalid FASTag will be charged twice the toll fee 

The Ministry of Road Transport and Highways notified the National Highways Fee (Determination of Rates and Collection), Amendment Rules, 2020.[60]  It amends the National Highways Fee (Determination of Rates and Collection), Rules, 2008, which provide for payment of toll fees in cash, or through smart card, or through an on board unit with no additional charge for not using cash.[61]  The 2008 Rules were amended in 2014 to allow for payment of toll fees through FASTag (by providing for dedicated lanes for vehicles with FASTags). [62]  FASTag is a reloadable tag which enables automatic deduction of toll fees at the toll plaza.  

The 2014 amendment also mandated that vehicles using the FASTag lane without a FASTag would be charged twice the toll fees applicable to such vehicles.62  The 2020 amendments add that vehicles with an invalid FASTag or with insufficient funds in the tag account to pay the toll fees, will be charged twice the toll fees applicable to such vehicles.60

BS VI emission norms for quadricycles notified

The Ministry of Road Transport and Highways notified the Central Motor Vehicles (Fourth) Amendment, 2020.[63]  The amendment provides for Bharat Stage -VI (BS-VI) emission standards and testing procedure for quadricycles manufactured on or after April 1, 2020.  A quadricycle is a four-wheeler, which is smaller and lighter than a passenger car.   The Bharat Stage Emission Standards are instituted by the central government to regulate air pollutants released from motor vehicles.  This notification completes the process of BS-VI for all two and three wheelers, quadricycles, passenger vehicles and commercial vehicles in India.    

 

Agriculture

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

Third advance estimates of production of crops released for the year 2019-20

The Ministry of Agriculture and Farmers’ Welfare released the third advance estimates of production of foodgrains and commercial crops for the year 2019-20.[64]  Table 5 gives a comparison of the third advance estimates for 2019-20 with the production in the year 2018-19.  Following are some of the highlights:

  • Foodgrain production in the year 2019-20 is estimated to increase by 3.7% as compared to 2018-19.   The increase is largely due to a 3.6% growth in the production of cereals.  Rice and wheat production are estimated to increase by 1.3% and 3.5%, respectively.
     
  • In 2019-20, the production of coarse cereals is estimated to increase by 10.4%, and that of pulses is estimated to increase by 4.2%.
     
  • The production of oilseeds is estimated to increase by 6.3% in 2019-20.  While the production of soyabean is estimated to see a 7.7% decrease, groundnut production is estimated to increase by 38.9%.
     
  • The production of cotton is estimated to increase by 28.6% in 2019-20.  Sugarcane production is estimated to decrease by 11.7% to 358.1 million tonnes in 2019-20.

Table 5:  Third advance estimates of crop production in 2019-20 (million tonnes)

Crop

Final 2018-19

3rd advance estimates 2019-20

% change over 2018-19

Foodgrains (A+B)

285.2

295.7

3.7%

A. Cereals

263.1

272.7

3.6%

     Rice

116.5

117.9

1.3%

     Wheat

103.6

107.2

3.5%

     Coarse

     Cereals

43.1

47.5

10.4%

B. Pulses

22.1

23.0

4.2%

     Gram

9.9

10.9