जून 2020

इस अंक की झलकियां

देश व्यापी लॉकडाउन को 31 जुलाई तक बढ़ाया गया और कुछ राहत दी गई

जिला प्रशासन कंटेनमेंट जोन्स को चिन्हित कर सकते हैं जहां अनिवार्य गतिविधियों के अतिरिक्त दूसरी सभी प्रकार की आवाजाही प्रतिबंधित होगी। शैक्षणिक संस्थान 31 जुलाई तक बंद रहेंगे। नाइट कर्फ्यू रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक रहेगा।

बैंकिंग रेगुलेशन (संशोधन) अध्यादेश, 2020 जारी

मुख्य प्रावधानों में आरबीआई को निम्नलिखित शक्तियां प्रदान करना है: (i) बिना मोरटोरियम के बैंकों के पुनर्गठन और एकीकरण के लिए योजना बनाना, और (ii) कोऑरेटिव बैंकों को बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के कुछ प्रावधानों से छूट देना।

इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता में संशोधन के लिए अध्यादेश

अध्यादेश कुछ कॉरपोरेट लेनदारों को 25 मार्च, 2020 से लेकर छह महीने की अवधि के दौरान किए गए डीफॉल्ट पर इनसॉल्वेंसी की किसी भी कार्रवाई से छूट देता है (इस अवधि को अधिसूचना के जरिए एक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है)। 

कृषि क्षेत्र के लिए तीन अध्यादेश जारी किए गए

अध्यादेश निम्नलिखित का प्रयास करते हैं: (iराज्य एपीएमसी बाजारों के बाहर कृषि उपज का व्यापार करने की अनुमति, (iiकेंद्र सरकार की खाद्य सामग्रियों को रेगुलेट करने की शक्ति को सीमित करना, और (iiiकृषि समझौतों पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क प्रदान करना। 

सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को नवंबर 2020 तक बढ़ाया

योजना के अंतर्गत अप्रैल-जून 2020 तक गरीब परिवारों के लोगों को प्रत्येक महीने पांच किलो गेहूं या चावल और एक किलो दाल मुफ्त दी जाएगी। इस योजना की लागत लगभग 90,000 करोड़ रुपए आने की उम्मीद है।

वित्त मंत्रालय ने 2020-21 में नई योजनाओं को शुरू करने पर प्रतिबंध लगाया

कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारी वित्तीय संसाधनों की अप्रत्याशित मांग के कारण यह प्रतिबंध लगाया गया है। यह आत्मनिर्भर भारत इकोनॉमिक पैकेज और दूसरे किसी विशेष पैकेज पर लागू नहीं होगा। 

2019-20 की चौथी तिमाही में चालू खाता अधिशेष जीडीपी का 0.1%

2019-20 की चौथी तिमाही में भारत के चालू खाता शेष में 0.6 बिलियन USD (जीडीपी का 0.1%) का अधिशेष दर्ज किया गया, जबकि 2018-19 की चौथी तिमाही में 4.6 बिलियन USD (जीडीपी का 0.7%) का घाटा दर्ज किया गया था।

सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम दर्जे के उद्यमों के वर्गीकरण के मानदंड में संशोधन किए

संशोधित मानदंड के अनुसार, मौजूदा परिभाषा (2006 का एक्ट) के अंतर्गत निवेश की सीमा को बढ़ाया गया है और उद्यम के वार्षिक टर्नओवर को एमएसएमईज़ के वर्गीकरण के अतिरिक्त मानदंड के रूप में इस्तेमाल किया गया है।  

मुद्रा योजना के अंतर्गत शिशु ऋणों के लिए ब्याज अनुदान की योजना को मंजूरी दी गई

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत सभी शिशु ऋणों (50,000 रुपए तक के ऋण) के लिए 2का ब्याज अनुदान उपलब्ध होगा, ये ऐसे ऋण हैं जोकि 31 मार्च, 2020 तक बकाया थे और जिन्हें नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया गया। 

रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों के लिए विशेष सूक्ष्म ऋण योजना

पात्र लाभार्थी एक वर्ष के लिए ब्याज सबसिडी के साथ कोलेट्रल मुक्त वर्किंग कैपिटल लोन ले सकते हैं। योजना लोन्स पर डीफॉल्ट की स्थिति में ऋणदाताओं को गारंटी प्रदान करती है।  

राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के आधार पर 59 मोबाइल ऐप्स पर पाबंदी

इन ऐप्स में टिकटॉक, शेयरइट, यूसी ब्राऊजर और एमआई वीडियो कॉल शामिल हैं। इन ऐप्स को इस आधार पर प्रतिबंधित किया गया है कि वे सीमा पार के सर्वरों को अनाधिकृत तरीके से उपयोगकर्ता के डेटा को चुरा कर, गुप्त तरीके से भेज रहे थे।

कैबिनेट ने 2020-21 के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों को मंजूरी दी

विपणन सीजन 2020-21 के लिए धान (सामान्य) का लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1,868 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया हैजो पिछले वर्ष की एमएसपी (1,815 रुपए प्रति क्विंटल) से 2.9% अधिक है।
 

कोविड-19

30 जून2020 तक भारत में कोविड-19 के 5,66,840 पुष्ट मामले हैं।[1]  इनमें 3,34,822 मरीजों का इलाज हो चुका है/उन्हें डिस्चार्ज किया जा चुका है और 16,893 की मृत्यु हुई है।1 देश और विभिन्न राज्यों में दैनिक मामलों की संख्या के लिए कृपया यहां देखें  

जैसे इस महामारी का प्रकोप बढ़ा हैकेंद्र सरकार ने इसकी रोकथाम के लिए अनेक नीतिगत फैसलों और महामारी से प्रभावित नागरिकों और व्यवसायों को मदद देने के उपायों की घोषणाएं की हैं। केंद्र और राज्यों द्वारा जारी मुख्य अधिसूचनाओं के विवरण के लिए कृपया यहां देखें। जून 2020 में इस संबंध में मुख्य घोषणाएं इस प्रकार हैं।

कंटेनमेंट जोन्स में लॉकडाउन 31 जुलाई तक बढ़ाया गया, कुछ राहत भी दी गई

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटी (एनडीएमए) ने मार्च में 21 दिन का देशव्यापी लॉकडाउन किया था।[2]  इसके बाद लॉकडाउन को पांच बार बढ़ाया गया है। इस बार का लॉकडाउन 31 जुलाई, 2020 तक लागू है।[3] इन उपायों को आपदा प्रबंधन एक्ट, 2005 के प्रावधानों के अंतर्गत जारी किया जाता है। यह एक्ट राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटीज़ की स्थापना करता है और इन अथॉरिटीज़ को इस बात की शक्तियां देता है कि वे आपदाओं का प्रभावी प्रबंधन कर सकें।

संशोधित दिशानिर्देशों में जिला अथॉरिटीज़ को इस बात की अनुमति दी गई है कि वे संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानदंडों के आधार पर कुछ क्षेत्रों को कंटेनमेंट जोन्स में रिस्क प्रोफाइल करें। कंटेनमेंट जोन्स को संबंधित जिला कलेक्टरों और राज्यों को ऑनलाइन अधिसूचित किया जाएगा और इस सूचना को स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ साझा किया जाएगा। इन कंटेनमेंट जोन्स में लॉकडाउन जारी रहेगा और व्यक्तियों की आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा, केवल मेडिकल इमरजेंसी और अनिवार्य वस्तुओं एवं सेवाओं की सप्लाई को छोड़कर। राज्य बफर जोन्स को भी चिन्हित कर सकते हैं (कंटेनमेंट जोन्स के बाहर), जहां जिला प्रशासन अतिरिक्त प्रतिबंध लगा सकता है।3  

कंटेनमेंट जोन्स के बाहर के क्षेत्रों में निम्नलिखित के सिवाय सभी गतिविधियों की अनुमति होगी: (i) अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा, इसमें सिर्फ गृह मंत्रालय की अनुमति से यात्रा की जा सकती है, (ii) शैक्षणिक संस्थान और कोचिंग संस्थान (जोकि 31 जुलाई, 2020 तक बंद रहेंगे), (iii) मेट्रो रेल, (iv) थियेटर, जिम, ऑडिटोरियम और ऐसी ही दूसरी जगहें, और (iv) बड़े जमावड़े, जैसे सामाजिक, राजनैतिक या धार्मिक कार्यक्रम। केंद्र और राज्य सरकार के प्रशिक्षण संस्थानों को 15 जुलाई, 2020 से काम करने की अनुमति है जोकि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर पर आधारित होगा।

अनिवार्य गतिविधियों को छोड़कर रात को 10 बजे और सुबह 5 बजे के बीच व्यक्तियों के मूवमेंट पर प्रतिबंध लगा रहेगा। यह कर्फ्यू औद्योगिक इकाइयों के कामकाज, राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर व्यक्तियों और वस्तुओं की आवाजाही और कार्गो की लोडिंग-अनलोडिंग पर लागू होगा। 

राज्य स्थितियों का आकलन करते हुए कंटेनमेंट जोन्स के बाहर के क्षेत्रों में अतिरिक्त प्रतिबंध लगा सकते हैं। हालांकि व्यक्तियों और वस्तुओं की राज्यों के भीतर या राज्यों के बीच की आवाजाही पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता और इसमें पड़ोसी देशों के साथ लैंड बॉर्डर ट्रेड (संधियों के आधार पर) से आने वाले व्यक्ति या वस्तुएं भी शामिल है। ट्रेन, घरेलू हवाई परिवहन द्वारा यात्रा और भारत में और भारत से बाहर व्यक्तियों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को इस संबंध में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स द्वारा ही रेगुलेट किया जाएगा। 

दिशानिर्देशों में कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर कोविड-19 के प्रबंधन के लिए कुछ डायरेक्टिव्स अनिवार्य किए गए हैं। इन उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सार्वजनिक स्थलों और काम करने के स्थानों में फेस कवर को अनिवार्य रूप से पहनना, (ii) विवाह समारोहों में अधिकतम 50 मेहमान और दाह संस्कारों में अधिकतम 20 लोग शामिल हो सकते हैं, और (iii) सभी कार्यस्थलों पर काम के अलग अलग घंटे।

इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी अध्यादेश जारी 

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को जारी किया गया।[4]  यह अध्यादेश इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता, 2016 में संशोधन करता है। संहिता कंपनियों और व्यक्तियों के बीच इनसॉल्वेंसी को रिजॉल्व करने की समयबद्ध प्रक्रिया प्रदान करती है। इनसॉल्वेंसी वह स्थिति हैजब व्यक्ति या कंपनियां अपना बकाया ऋण नहीं चुका पाते। अध्यादेश कुछ कॉरपोरेट देनदारों को कोविड-19 के दौरान कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन की प्रक्रिया से संबंधित संहिता के प्रावधानों से छूट देता है। अध्यादेश की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन को शुरू करना: जब डीफॉल्ट होता है तो कंपनी के क्रेडिटर्स (फाइनांशियल या ऑपरेशनल) या कंपनी खुद कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया (सीआईआरपी) को शुरू करने के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के मंजूर होने पर कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) का गठन किया जाता है जिसमें फाइनांशियल क्रेडिटर्स शामिल होते हैं। सीओसी एक रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल को नियुक्त करती है जो रेज़ोल्यूशन की प्रक्रिया को प्रबंधित करता है और सीओसी के सामने एक रेज़ोल्यूशन प्लान पेश करता है। रेज़ोल्यूशन प्लान के मंजूर होने के बाद रेज़ोल्यूशन की प्रक्रिया 180 दिनों में पूरी हो जानी चाहिए (जिसे 90 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है)।
     
  • अध्यादेश कुछ कंपनियों को सीआईआरपी को शुरू करने के प्रावधानों से छूट देता है। इसमें कहा गया है कि अगर 25 मार्च, 2020 के बाद छह महीने की अवधि के दौरान कोई डीफॉल्ट हुआ है तो उस अवधि के लिए सीआईआरपी को शुरू करने का आवेदन नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए इस अवधि को एक वर्ष कर सकती है। अध्यादेश स्पष्ट करता है कि इस अवधि के दौरान होने वाले डीफॉल्ट के लिए कभी भी कोई कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती।
     
  • धोखाधड़ी से किया जाने वाला व्यापार: रेज़ोल्यूशन के दौरान अगर यह पाया जाता है कि कंपनी का कारोबार अपने क्रेडिटर्स के साथ धोखाधड़ी करने के उद्देश्य से किया जा रहा है तो एनसीएलटी ऐसे कारोबार करने वाले लोगों को कंपनी के एसेट में योगदान करने के आदेश दे सकता है। इसके अतिरिक्त रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल एनसीएलटी में यह आवेदन कर सकता है कि वह कंपनी के निदेशक या पार्टनर को योगदान देने का आदेश दे, अगर (i) इनसॉल्वेंसी की तारीख से पहले निदेशक या पार्टनर को यह पता था या उसे पता होना चाहिए था कि सीआईआरपी से बचने की कोई उचित संभावना नहीं है, या (ii) निदेशक या पार्टनर ने कंपनी के क्रेडिटर्स के संभावित नुकसान को कम करने के लिए ज्यादा कोशिश नहीं की।
     
  • अध्यादेश के अनुसार, रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल ऐसी कंपनियों के लिए एनसीएलटी में इस संबंध में आवेदन नहीं कर सकता कि वह कंपनी के पार्टनर्स या निदेशकों को कंपनी के एसेट में योगदान देने का निर्देश दे। 

अध्यादेश पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया देखे

वित्त मंत्रालय ने 2020-21 में नई योजनाओं को शुरू करने पर प्रतिबंध लगाया

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

वित्त मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में नई योजनाओं को शुरू करने के प्रस्तावों पर प्रतिबंध लगाया है।[5] उसने सभी मंत्रालयों/विभागों को नई योजनाओं/उपयोजनाओं को शुरू करने से प्रतिबंधित किया है जिसमें वे योजनाएं भी शामिल हैं जिन्हें वित्त मंत्रालय ने इन-प्रिंसिपल मंजूरी दे दी थी। यह प्रतिबंध आत्मनिर्भर भारत इकोनॉमिक पैकेज और दूसरे अन्य विशेष पैकेज/घोषणाओं के अंतर्गत आने वाली योजनाओं पर लागू नहीं होगा।5 कोविड-19 महामारी के कारण सार्वजनिक वित्तीय संसाधनों की अप्रत्याशित मांग के कारण यह प्रतिबंध लगाया गया है। 

कैबिनेट ने मुद्रा योजना के अंतर्गत ऋणों के पुनर्भुगतान पर ब्याज अनुदान को मंजूरी दी 

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के अंतर्गत सभी शिशु लोन एकाउंट उधारकर्ताओं को 2का ब्याज अनुदान (ब्याज सबसिडी) देने की योजना को मंजूरी दी है।[6]   यह ब्याज अनुदान 12 महीने की अवधि के लिए उपलब्ध होगा। पीएमएमवाई के अंतर्गत आय सर्जन गतिविधियों के लिए 50,000 रुपए तक के लोन्स को शिशु लोन्स कहा जाता है। यह योजना सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए है ताकि उन्हें कोविड-19 के असर से उबरने के लिए मदद दी जाए। 

यह ब्याज अनुदान उन सभी लोन्स के लिए उपलब्ध होगा जोकि 31 मार्च, 2020 से बकाया हैं और जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। टर्म लोन के मामले में नॉन परफॉर्मिंग एसेट एक ऐसा खाता होता है जिसमें लोन 90 दिनों से अधिक की अवधि के लिए ओवरड्यू होता है।28  लोन्स के नियमित पुर्नभुगतान को बढ़ावा देने के लिए एनपीए खातों के लिए ब्याज अनुदान उन महीनों के लिए भी उपलब्ध रहेगा, जिनके दौरान वे अपने पुनर्भुगतान को नियमित करते हैं और स्टैंडर्ड (गैर एनपीए) खाते बन जाते हैं। योजना भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी। 

उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने मई 2020 में टर्म लोन (जो कि 31 मार्च2020 तक बकाया था) पर मोहलत को 31 अगस्त2020 तक बढ़ा दिया था।[7]   ऐसे उधारकर्ता जिन्हें उनके ऋणदाताओं द्वारा मोहलत दी गई है, के लिए यह योजना सितंबर, 2020 से शुरू होगी। अन्य उधारकर्ताओं के लिए यह योजना जून, 2020 से शुरू होगी। अनुमान है कि इस योजना पर लगभग 1,542 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 

आरबीआई ने कोविड-19 के मद्देनजर सीआरआर और एमएसएफ में बदलाव की समय सीमा बढ़ाई  

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

आरबीआई ने कोविड-19 के निरंतर असर को ध्यान में रखते हुए कैश रिजर्व रेशो (सीआरआर) के न्यूनतम दैनिक मेनटेनेंस और मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी (एमएसएफ) के अंतर्गत उधार की सीमा को अगले तीन महीनों के लिए बढ़ा दिया है।[8],[9] इससे संबंधित विवरण इस प्रकार है:

  • कैश रिजर्व रेशो: सीआरआर तरल नकदी की राशि है जो बैंकों को अपनी कुल जमा (शुद्ध मांग और समय देनदारियों) के प्रतिशत के रूप मेंआरबीआई के पास रखनी होती है। मार्च 2020 में आरबीआई ने 26 जून, 2020 तक दैनिक न्यूनतम सीआरआर बैलेंस को 90% से घटाकर 80% कर दिया।[10]  अब इसे तीन महीने बढ़ाकर 25 सितंबर, 2020 कर दिया गया है। 
     
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी: एमएसएफ के अंतर्गत बैंक अपने वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) का इस्तेमाल करके आरबीआई से उधार ले सकते हैं। एसएलआर तरल संपत्ति का अनुपात है जैसे सोनाट्रेजरी बॉन्ड और नेट डिमांड एंड टाइम लायबिलिटीज़ (एनडीटीएल) के लिए सरकारी सिक्योरिटी। मार्च 2020 में एमएसएफ के लिए उधार की सीमा को एनडीटीएल के 2% से बढ़ाकर 30 जून, 2020 तक एनडीटीएल का 3% कर दिया गया था। इसे अब तीन महीने के लिए और बढ़ाकर 30 सितंबर, 2020 तक कर दिया गया है।

वित्त मंत्रालय ने विभिन्न कर अनुपालनों की समय सीमा बढ़ाई

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

वित्त मंत्रालय ने टैक्सेशन और अन्य कानून (विभिन्न प्रावधानों में राहत) अध्यादेश, 2020 की शक्तियों के जरिए इनकम टैक्स एक्ट, 1961 (आईटी एक्ट) के अंतर्गत विभिन्न अनुपालनों की समय सीमा बढ़ाई है।[11] इस अध्यादेश को मार्च 2020 में जारी किया गया था ताकि कर अनुपालन से संबंधित राहत दी जा सके, जैसे कोविड-19 के मद्देनजर समय सीमा को बढ़ाना और जुर्माने से छूट इत्यादि।[12]

आईटी एक्टअध्यादेश के अंतर्गत कुछ अनुपालनों और कार्यों को करने की समय सीमाजिन्हें 20 मार्च2020 से 29 जून2020 के दौरान करना था, को 30 जून2020 तक बढ़ाया गया था। इनमें निम्नलिखित कार्य शामिल हैं: (i) नोटिस और अधिसूचनाएं जारी करना, कार्यवाहियों को पूरा करना और अथॉरिटीज़ एवं ट्रिब्यूनलों द्वारा आदेश जारी करना, और (ii) अपील फाइल करना, जवाब देना और आवेदन, तथा दस्तावेज प्रस्तुत करना। इस अवधि को 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाया गया है। यह समय सीमा उन कार्यों पर भी लागू होगी जिन्हें 30 जून, 2020 से 31 दिसंबर, 2020 के बीच पूरा किया जाना है।

अध्यादेश सरकार को इस बात की अनुमति देता है कि वह विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए अलग-अलग नियत तिथियों को अधिसूचित कर सकती है। जैसे आकलन वर्ष (एवाई) 2019-20 (यानी वित्तीय वर्ष 2018-19) के लिए इनकम का रिटर्न फाइल करने की नियत तारीख को बढ़ाकर 31 जुलाई2020 कर दिया गया है। एवाई 2020-21 के लिए रिटर्न फाइल करने की तारीख 30 नवंबर2020 तक बढ़ा दी गई है। हालांकि2020 मेंउन लोगों के मामले मेंजिनके पास एक लाख रुपये से अधिक का कर भुगतान बकाया है (पहले से चुकाए गए या काटे गए टैक्स की एकाउंटिंग के बाद), बकाया टैक्स पर 12% ब्याज लगेगा, अगर आईटी एक्ट के अंतर्गत निर्दिष्ट मूल देय तिथि (व्यक्तियों के लिए 31 जुलाई और कंपनियों के लिए 31 अक्टूबर) के बाद रिटर्न दाखिल किया जाता है 

अगर किसी को वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए आईटी एक्ट के 80 सी से 80 जीजीसी सेक्शंस के अंतर्गत कुछ कटौतियां का दावा करना है तो वह 31 जुलाई, 2020 तक निवेश कर सकता है (कुछ कैपिटल गेन्स कटौतियों का मामले में यह तारीख 30 सितंबर, 2020 है)।  

जीएसटीअध्यादेश ने केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर एक्ट, 2017 में संशोधन किए थे, ताकि केंद्र सरकार जीएसटी परिषद के सुझाव के आधार पर एक्ट के अंतर्गत आने वाले जीएसटी अनुपालनों की समय सीमा को बढ़ाने की अधिसूचना जारी कर सके। इस प्रकार सरकार ने 20 मार्च, 2020 से 29 जून, 2020 के बीच किए जाने वाले कार्यों की समय सीमा 30 जून, 2020 कर दी थी।[13]  इस समय सीमा को 31 अगस्त, 2020 कर दिया गया है।[14] 31 अगस्त, 2020 की समय सीमा उन कार्यों पर भी लागू होगी, जिन्हें 30 जून, 2020 से 30 अगस्त, 2020 के दौरान पूरा किया जाना है।

डायग्नॉस्टिक किट्स, पीपीईज़, सैनिटाइजर्स, हाइड्रोक्लोरोक्वीन के लिए निर्यात नीतियों में संशोधन

Saket Surya (saket@prsindia.org)

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कोविड-19 की रोकथाम, निदान और उपचार में इस्तेमाल होने वाले निम्नलिखित आइटम्स की निर्यात नीतियों में संशोधन किए हैं: 

  • एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर्स: मार्च 2020 में सभी प्रकार के सैनिटाइजर्स के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था।[15]  मई 2020 में एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर्स के अतिरिक्त दूसरे सभी प्रकार के सैनिटाइजर्स के निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया।[16]  एल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर्स के निर्यात को अब मुक्त कर दिया गया है, पर डिस्पेंसर पंप वाले कंटेनरों में पैक किए गए सैनिटाइजर्स अब भी निर्यात नहीं किए जा सकते।[17]  
  • डायग्नॉस्टिक किट्सडायग्नॉस्टिक किट्स और लेबोरेट्री रीजेंट्स के निर्यात पर अप्रैल में लगे प्रतिबंध में राहत दी गई है और अब इन वस्तुओं को निर्यात किया जा सकता है।[18]  हालांकि आरएनए एक्सट्रैक्शन किट्स और रीजेंट्स, तथा आरटी-पीसीआर किट्स और रीजेंट्स सहित कुछ विशिष्ट डायग्नॉस्टिक किट्स के निर्यात पर अब भी पाबंदी है।[19]
  • कुछ डायग्नॉस्टिक उपकरणों, अपरेटस, और रीजेंट्स की निर्यात नीति में संशोधन किए गए हैं ताकि उन्हें प्रतिबंध से मुक्त किया जा सके।19  इनमें कोविड-19 टेस्टिंग और विभिन्न प्रकार के स्वैब्स के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रोब्स और प्राइमर्स शामिल हैं।
     
  • हाइड्रोक्लोरोक्वीन: मार्च 2020 में हाइड्रोक्लोरोक्वीन और उसके फॉर्मूलेशन के निर्यात पर कुछ मामलों को छोड़कर प्रतिबंध लगाया गया था। इनमें पड़ोसी देशों को निर्यात भी शामिल था जोकि दवाओं के लिए भारत पर निर्भर हैं और ऐसे देश जोकि कोविड-19 से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इस दवा के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया गया है।[20],[21]  
     
  • पीपीईज़जनवरी में क्लोथिंग और मास्क कवरऑल्स सहित पर्सनल प्रोटेक्शन एक्विपमेंट (पीपीईज़) के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था।[22]  हालांकि मई में नॉन सर्जिकल और नॉन मेडिकल मास्क्स के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया गया।[23]  अब सभी पीपीईज़ को मुक्त रूप से निर्यात किया जा सकता है, लेकिन निम्नलिखित पर अब भी प्रतिबंध है: (iसभी प्रकार के मेडिकल कवरऑल्स, (iiमेडिकल गॉगल्स, (iiiनॉन मेडिकल और नॉन सर्जिकल मास्क्स को छोड़कर सभी मास्क्स, (ivनाइट्राइल ग्लव्स, और (vफेस शील्ड्स।[24]  

रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों (स्ट्रीट वेंडर्स) के लिए विशेष सूक्ष्म वित्त सुविधा की शुरुआत 

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

आवासन और शहरी मामलों के मंत्रालय ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना की शुरुआत की।[25]  इस योजना के जरिए रेहड़ी-पटरीवाले दुकानदारों के लिए वर्किंग कैपिटल लोन दिया जाएगा जिनका कारोबार कोविड-19 के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ है।[26] योजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • पात्रतायह योजना उन राज्यों को उपलब्ध है जिन्होंने स्ट्रीट वेंडर्स (जीविकोपार्जन का संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का रेगुलेशन) एक्ट, 2014 के अंतर्गत नियमों और योजनाओं को अधिसूचित किया है। यह एक्ट स्ट्रीट वेंडर्स के अधिकारों और बाध्यताओं को निर्दिष्ट करता है और उनके कारोबार को रेगुलेट करता है।[27] एक्ट के अंतर्गत राज्यों से टाउन वेंडिंग कमिटी बनाने की अपेक्षा की जाती है जोकि अपने जोन/वार्ड में वेंडर्स के आइडेंटिफिकेशन सर्वे के लिए जिम्मेदार होती हैं।
     
  • वित्त योजना का लाभ ऐसे स्ट्रीट वेंडर्स को मिलेगा जोकि 24 मार्च, 2020 से शहरी क्षेत्रों में वेंडिंग कर रहे हैं। स्ट्रीट वेंडर्स को निम्नलिखित मानदंडों के आधार पर चिन्हित किया जाएगा: (iवेंडिंग के सर्टिफिकेट (आइडेंटिटी कार्ड) वाले वेंडर्स, (iiसर्टिफिकेट रहित वेंडर्स, लेकिन आइडेंटिफिकेशन सर्वे में चिन्हित, या (iiiआइडेंटिफिकेशन सर्वे में छूट गए वेंडर्स, लेकिन जिन्हें शहरी स्थानीय निकाय या टाउन वेंडिंग कमिटी ने लेटर ऑफ रिकमेंडेशन जारी किया है।
     
  • लोन और ब्याज अनुदानयोजना के अंतर्गत पात्र स्ट्रीट वेंडर्स अनुसूचित कमर्शियल बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और सूक्ष्म वित्त संस्थानों से एक वर्ष की अवधि के लिए 10,000 रुपए तक के कोलेट्रल मुक्त वर्किंग कैपिटल लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
     
  • इस योजना के अंतर्गत वेंडर्स प्रति वर्ष 7की ब्याज सब्सिडी के पात्र होंगे। यह सब्सिडी 31 मार्च, 2022 तक मिलेगी और केवल उन खातों के लिए उपलब्ध होगी, जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। टर्म लोन के मामले में नॉन परफॉर्मिंग एसेट ऐसा खाता या लोन होता है जिसमें लोन की किश्त 90 दिनों से अधिक बकाया होती है।[28]  
     
  • ऋण गारंटीइस योजना के अंतर्गत कुल लोन पोर्टफोलियो के अधिकतम 5तक के डीफॉल्ट्स पूरी तरह से (100%) गारंटीशुदा होंगे। कुल लोन पोर्टफोलियो के 5से 15के बीच के डीफॉल्ट्स के लिए 75डीफॉल्ट राशि गारंटीशुदा होगी। क्रेडिट गारंटी एक वर्ष के लिए पोर्टफोलियो के अधिकतम 15% कवरेज के अधीन है। 

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को 5 महीने यानी नवंबर 2020 तक के लिए बढ़ाया गया 

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को पांच महीने के लिए, नवंबर 2020 तक बढ़ा दिया है।[29] इस योजना की घोषणा मार्च 2020 में की गई थी जिसका उद्देश्य कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के मद्देनजर गरीबों को राहत देना था। योजना के अंतर्गत अप्रैल-जून 2020 के दौरान गरीब परिवारों को हर महीने पांच किलो गेहूं या चावल और एक किलो दाल दिया गया। अब इस योजना के लाभ को अगले पांच वर्षों के लिए, नवंबर 2020 तक बढ़ाया गया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एक्ट के अंतर्गत सभी लाभार्थियों को यह लाभ दिया जाएगा और एक्ट के अंतर्गत प्रदत्त खाद्यान्नों के अतिरिक्त यह लाभ दिया जाएगा। पांच महीने तक इस योजना को और संचालित करने की सरकारी लागत 90,000 करोड़ रुपए से अधिक की है।[30]

गरीब कल्याण रोजगार अभियान शुरू

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

प्रधानमंत्री ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान को शुरू किया था।[31] इस अभियान का उद्देश्य उन प्रवासी श्रमिकों को जीविकोपार्जन के अवसर प्रदान करना है जो कोविड-19 के कारण अपने गांवों को लौट गए। योजना का लक्ष्य सड़कोंआवासआंगनवाड़ियों और सामुदायिक परिसरों से संबंधित गांवों में सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एसेट्स का निर्माण करना भी है।

यह अभियान छह राज्यों के 116 जिलों में संचालित किया जाएगा। ये राज्य हैं, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओड़िशा। 

इसे सड़क परिवहन और राजमार्गखदानपर्यावरणरेलवेपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैसदूरसंचार और कृषि सहित केंद्र सरकार के 11 मंत्रालयों द्वारा लागू किया जाएगा। अभियान 125 दिनों (20 जून2020 तक) के लिए काम करेगा और 25 सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के कामों की पहचान की गई हैजिन्हें पूरा करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। इसे सड़क परिवहन और राजमार्गखननपर्यावरणरेलवेपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैसदूरसंचार और कृषि सहित केंद्र सरकार के 11 मंत्रालयों द्वारा लागू किया जाएगा। अभियान 125 दिनों (20 जून, 2020 तक) के लिए काम करेगा और 25 सार्वजनिक बुनियादी ढांचों की पहचान की गई हैजिन्हें पूरा करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानों पर पाबंदी बढ़ाई गई 

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने घोषणा की है कि भारत में आने वाली और भारत से जाने वाली अनुसूचित अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल यात्री उड़ानों पर पाबंदी को 15 जुलाई, 2020 तक जारी रखा जाएगा।[32]  पहले इन उड़ानों पर 30 जून, 2020 तक पाबंदी थी।[33]  

ये प्रतिबंध डीजीसीए द्वारा विशेष रूप से मंजूर इंटरनेशनल ऑल-कार्गो ऑपरेशंस और उड़ानों पर लागू नहीं होंगे। मामलों को देखते हुए चुनींदा मार्गों पर अंतरराष्ट्रीय अनुसूचित उड़ानों को अनुमति दी जा सकती है।

डीजीसीए ने अन्य रेगुलेशंस से संबंधित कुछ दिशानिर्देशों को भी जारी किया है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एयरलाइन क्रू का प्रबंधन: एयरलाइन क्रू का रिस्क एसेसमेंट संबंधित एयरलाइन डॉक्टर द्वारा किया जाएगा और आईसीएमआर के दिशानिर्देशों के अनुसार टेस्टिंग की सलाह दी जाएगी।[34]  रिस्क एसेसमेंट के आधार पर क्रू के सदस्यों के लिए 14 दिनों के क्वारंटाइन को तय किया जाएगा। अगर क्रू का कोई सदस्य कोविड-19 के मामले के संपर्क में आता है तो उसके लिए होम क्वारंटाइन अनिवार्य होगा। क्रू के सभी सदस्यों को आरोग्य सेतु डाउनलोड करने और उसके जरिए अपने हेल्थ स्टेटस पर निगरानी रखने की सलाह दी जाएगी। 
     
  • डेंजरस गुड्स रेगुलेशंस ट्रेनिंग दोबारा करना: डेंजरस गुड्स रेगुलेशंस ट्रेनिंग की सभी श्रेणियों के प्रमाणपत्रों की वैधता, जो 20 मार्च, 2020 को या उसके बाद समाप्त हो रही थीको और बढ़ा दिया गया है।[35]  यह एक्सटेंशन 30 सितंबर, 2020 तक या सर्कुलर के रद्द होने तक- जो भी पहले हो- मान्य होगा। खतरनाक वस्तुओं के सुरक्षित परिवहन के लिए यह प्रशिक्षण आवश्यक है। ऑपरेटरों को ऑडिट के लिए ऐसे विस्तारित प्रमाणपत्रों के अलग-अलग रिकॉर्ड रखने होंगे। 
     
  • कोविड-19 की एयरोमेडिकल व्यवस्था: सिविल एयरक्रू के पॉजिटिव पाए जाने की स्थिति में एयरोमेडिकल व्यवस्था की दो श्रेणियां हैं।[36]  ये इस प्रकार हैं
  1. पॉजिटिव एसिम्पटोमैटिक/माइल्डली सिम्पटोमैटिक एयरक्रू: रिकवरी के बाद या सार्स-को वि-2 नेगेटिव घोषित एयरक्रू को निर्बाध उड़ान के लिए फिट घोषित किया जाएगा, अगर उनका क्लिनिकल पैरामीटर सामान्य होता है। यह घोषणा डीजीसीए के एम्पैनल्ड मेडिकल एग्जामिनर द्वारा की जाएगी।
     
  2. पॉजिटिव मॉडरेट/गंभीर/क्लिनिकल सिम्पटोमिक एयरक्रू: पूरी क्लिनिकल रिकवरी के बाद ऐसे एयरक्रू को भारतीय वायु सेना के बोर्डिंग केंद्र में विशेष चिकित्सा जांच से गुजरना होगा। उन्हें पल्मोनोलॉजिस्ट/मेडिकल स्पेशलिस्ट का ओपीनियन/क्योर सर्टिफिकेट हासिल करना होगा। अगर एयरक्रू की क्लिनिकल और लेबोरेट्री जांच में ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं निकालता जोकि किसी फंक्शनल नुकसान का कारण बनता है तो निर्बाध उड़ान के लिए उस पर विचार हो सकता है।
  • वन्यजीव जोखिम प्रबंधन: एयरपोर्ट ऑपरेटरों को सलाह दी जाती है कि वे पक्षी एवं वन्यजीव नियंत्रण उपायों को बंद न करें और पक्षी एवं वन्यजीव निरीक्षण को जारी रखें।[37]  घटते वायु यातायात के कारण पक्षी एवं वन्यजीव गतिविधियों को बढ़ाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। 

कुछ विशेष श्रेणियों के विदेशी व्यक्तियों को भारत आने की अनुमति 

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

कोविड-19 के मद्देनजर गृह मामलों के मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध लगाया है और कुछ विशेष स्थितियों में इसमें राहत दी गई है, जैसे विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की निकासी।[38]

मंत्रालय ने भारत आने वाले विदेशी नागरिकों की चार श्रेणियों के यात्रा प्रतिबंधों में राहत दी है।[39]  ये इस प्रकार हैं: (i) बिजनेस वीज़ा पर भारत में प्रवेश करने वाले व्यक्ति (बी-3 वीजा को छोड़कर (10 करोड़ रुपए से अधिक टर्नओवर वाले बिजनेस) और गैर अनुसूचित कमर्शियल या चार्टर्ड फ्लाइट्स में खेलों के सिलसिले में आने वाले लोगों की यात्रा, (ii) हेल्थकेयर प्रोफेशनल, हेल्थ रिसर्चर्स, भारत के हेल्थकेयर सेक्टर के केंद्रों में टेक्निकल काम के लिए आने वाले इंजीनियर्स और टेक्निशियंस (जोकि पंजीकृत हेल्थकेयर केंद्र, फार्मास्यूटिकल कंपनी या सत्यापित भारतीय विश्वविद्यालय से प्राप्त निमंत्रण पर आधारित हो), (iii) विदेशी इंजीनियरिंग, डिजाइन या दूसरे स्पेशलिस्ट्स जो भारत में स्थिति विदेशी बिजनेस एंटिटिज़ की ओर से भारत में यात्रा कर रहे हों, और (iv) विदेशी टेक्निकल एक्सपर्ट और इंजीनियरजो पंजीकृत भारतीय बिजनेस एंटिटी के निमंत्रण पर भारत में विदेशी मशीनरी की स्थापनामरम्मत और रखरखाव के लिए यात्रा कर रहे हों। 

हवाई यात्रा के लिए कोविड-19 संबंधित सेल्फ डिक्लरेशन की शर्त में संशोधन

Saket Surya (saket@prsindia.org)

मई 2020 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने घरेलू हवाई यात्रा को दोबारा शुरू करने से संबंधित दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया था।[40]  इन दिशानिर्देशों में यात्रियों से यह अपेक्षा की गई थी कि वह खुद इस बात की घोषणा करे कि पिछले दो महीने को दौरान उसे कोविड-19 पॉजिटिव नहीं घोषित किया गया है। इस समय सीमा को कम करके अब तीन हफ्ते कर दिया गया है।40   कोविड-19 से रिकवर हुए व्यक्तियों से इस शर्त के अलावा यह अपेक्षा भी की जाएगी कि वे कोविड-19 का इलाज करने वाले किसी भी संस्थान से कोविड-19 रिकवर्ड/डिस्चार्ड सर्टिफिकेट भी दिखाएं। 

भारतीय रेलवे 14 अप्रैल, 2020 को या उससे पहले बुक किए गए सभी टिकट्स को रीफंड करेगा 

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

रेलवे मंत्रालय ने घोषणा की है कि नियमित समय पर चलने वाली ट्रेनों के लिए 14 अप्रैल2020 को या उससे पहले बुक किए गए सभी ट्रेन टिकट रद्द कर दिए जाएंगे।[41]  यात्रियों को रद्द टिकट्स का रीफंड दिया जाएगा। 

शहरी परिवहन सेवाएं प्रदान के उपाय जारी

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

आवासन और शहरी मामलों के मंत्रालय ने कोविड-19 के मद्देनजर शहरी परिवहन सेवाएं प्रदान करने हेतु राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों/मेट्रो रेल कंपनियों को एडवाइजरी जारी की।[42]  एडवाइजरी में तीन स्तरीय रणनीति का सुझाव दिया गया जोकि चरणों में अपनाई जा सकती है(i) शॉर्ट टर्म (छह महीनों में), (ii) मीडियम टर्म (एक वर्ष में), और (iii) लॉन्ग टर्म (एक से तीन वर्ष)। मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं

  • गैर मोटरीकृत परिवहन को बढ़ावा देना और उसे रिवाइव करना, चूंकि अधिकतर शहरी यात्राएं पांच किलोमीटर से कम दूरी की होती हैं। 
     
  • सार्वजनिक परिवहन को फिर से शुरू किया जा सकता है। इस स्थिति में सैनिटाइजेशन, कंटेनमेंट और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपाय करके सार्वजनिक परिवहन के जरिए संक्रमण फैलने से रोका जा सकता है।  
  • वायरस को फैलने से रोकने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा सकता है। इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टमदेसी कैशलेस और टचलेस पेमेंट सिस्टम्स, को एनेबल करना तथा नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड से सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों में मानव संपर्क को कम किया जा सकता है। 

मोटर वाहन दस्तावेजों की वैधता को 30 सितंबर, 2020 तक बढ़ाया गया

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन दस्तावेजों (जैसे फिटनेस प्रमाणपत्रपरमिटड्राइविंग लाइसेंसपंजीकरणया किसी अन्य संबंधित दस्तावेज) की वैधता को 30 सितंबर, 2020 तक बढ़ा दिया है।[43]  इससे पूर्व मार्च 2020 में मंत्रालय ने कुछ दस्तावेजों की वैधता को 30 जून, 2020 तक बढ़ा दिया था।[44] इनमें निम्नलिखित दस्तावेज शामिल हैं (i) जिनकी वैधता लॉकडाउन के कारण बढ़ाई नहीं जा सकी और जोकि 1 फरवरी, 2020 को रद्द हो गए हैं, और (ii) जो 30 जून, 2020 को रद्द होंगे। 

पोस्टल बैलेट से वोट करने वाले लोगों की श्रेणियां बढ़ाई गईं 

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

भारत में मतदाताओं की कुछ श्रेणियां पोस्टल बैलेट के माध्यम से अपना वोट डालने के लिए पात्र हैं। पोस्टल वोटिंग वह होती है जब मतदाता अथॉरिटी से बैलेट पेपर प्राप्त करता है और पोस्ट के माध्यम से अपना वोट वापस कर सकता है। चुनाव आचरण नियम, 1961 उन व्यक्तियों की श्रेणियों को निर्दिष्ट करता है जो पोस्टल बैलट के माध्यम से मतदान कर सकते हैं। इनमें सशस्त्र बलों के कर्मचारीविकलांग मतदाता और 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक जैसे मतदाता शामिल हैं।

1961 के नियमों को निम्नलिखित को शामिल करने के लिए संशोधित किया गया है: (iवरिष्ठ नागरिकों की आयु सीमा को 80 वर्ष से कम करके 65 वर्ष करना, (iiकोविड-19 के संदिग्ध या प्रभावित व्यक्ति।[45] कोविड-19 के संदिग्ध या प्रभावित व्यक्तियों का अर्थ ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें: (iसरकारी अस्पताल या सरकार द्वारा कोविड अस्पताल के रूप में मान्यता प्राप्त अस्पताल द्वारा कोविड-19 पॉजिटिव जांचा गया है, या (ii) कोविड -19 के कारण घर या संस्थागत क्वारंटाइन के अंतर्गत और एक सक्षम अथॉरिटी द्वारा प्रमाणित किया जाता हैजैसा कि राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है।

कोविड-19 के लिए शॉर्ट टर्म हेल्थ इंश्योरेंस के दिशानिर्देश जारी 

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

इंश्योरेंस रेगुलेटरी और डेवलपमेंट अथॉरिटी (इरडा) ने कोविड-19 के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों के कवरेज हेतु शॉर्ट टर्म हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी शुरू करने संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं।[46] इन दिशानिर्देशों में इंश्योरेंस कंपनियों को कोविड-19 विशिष्ट शॉर्ट टर्म (3 महीने और 11 महीने) लाइफ, हेल्थ या जनरल इंश्योरेंस पॉलिसी शुरू करने की अनुमति दी गई है।  

दिशानिर्देशों के अनुसार, पॉलिसी को एक व्यक्तिगत उत्पाद या समूह उत्पाद के रूप में पेश किया जा सकता हैलेकिन यह केवल कोविड-19 के लिए विशिष्ट होना चाहिए। इस तरह की पॉलिसी के लिए अलग से ऐड-ऑन की अनुमति नहीं है। ये दिशानिर्देश 31 मार्च, 2021 तक मान्य रहेंगे।46 

कंपनी एक्ट, 2003 के अंतर्गत कुछ समय सीमाओं को बढ़ाया गया 

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

कोविड-19 के मद्देनजर कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनी एक्ट, 2013 के अंतर्गत कुछ समय सीमाओं को बढ़ाया है।[47]  इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सामान्य और विशेष प्रस्तावों को पारित करना: एक्ट में कंपनियों को इस बात की अनुमति देने वाले विशिष्ट प्रावधान नहीं हैं कि वे वीडियो कांफ्रेंसिंग या दूसरे ऑडियो-विजुअल मोड के जरिए अपने शेयरहोल्डर्स की जनरल मीटिंग्स कर सकती हैं। मंत्रालय ने वीडियो कांफ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो-विजुअल तरीके से मीटिंग करने और पोस्टल बैलेट के जरिए कारोबार करने की अनुमति देने के लिए दिशानिर्देश सर्कुलेट किए थे।[48] ये दिशानिर्देश 30 जून, 2020 तक वैध थे। मंत्रालय ने इन दिशानिर्देशों की वैधता को 30 सितंबर, 2020 तक बढ़ा दिया है।[49]  
     
  • चार्ज संबंधी फॉर्म्स भरने में रियायत की योजनाएक्ट के अंतर्गत अगर कंपनियों की संपत्तियों पर कोई सिक्योरिटी इंटरेस्ट क्रिएट होता है (जैसे अगर कंपनी की संपत्तियां रेहन रखी जाती हैं) या चार्ज मॉडिफाई होता है तो कंपनियों को कई फॉर्म्स भरने होते हैं। सिक्योरिटी क्रिएट होने के 30 दिनों के अंदर ये फॉर्म्स भरे जाने चाहिए (इस अवधि को अतिरिक्त फीस चुकाकर 300 दिन तक बढ़ाया जा सकता है)। इन फॉर्म्स को भरने के लिए एक निश्चित समय अवधि का कैलकुलेशन किया जाता है। इस समय अवधि से मार्च से सितंबर 2020 की अवधि को बाहर रखने के लिए एक योजना शुरू की गई है।[50]

कैबिनेट ने अन्य पिछड़ा वर्गों के उप-वर्गीकरण की जांच हेतु गठित आयोग की अवधि को बढ़ाने को मंजूरी दी 

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) के उप-वर्गीकरण की जांच हेतु गठित आयोग की अवधि को बढ़ाने को मंजूरी दी।[51] इस आयोग को 2017 में गठित किया गया था। इस आयोग का काम यह सुझाव देना था कि ओबीसीज़ की मौजूदा सूची में आने वाले समुदायों को किस प्रकार केंद्र सरकार के पदों में नियुक्ति और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में दाखिले में आरक्षण का लाभ मिल सकता है।  

आयोग का कार्यकाल पहले 31 जुलाई2020 तक बढ़ाया गया थाक्योंकि ओबीसी की मौजूदा सूची में अस्पष्टताविसंगतियों और वर्तनी की त्रुटियों को दूर करने की जरूरत है। हालांकि कोविड-19 महामारी के कारण देशव्यापी लॉकडाउन हुआ और आयोग यह काम नहीं कर पाया। इसलिए आयोग का कार्यकाल छह महीने यानी 31 जनवरी2021 तक के लिए बढ़ा दिया गया है।

पर्यटन सेवा प्रदाताओं, रेस्त्रां, होटल और होम स्टेज़ के लिए ऑपरेशनल दिशानिर्देश 

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

कोविड-19 के बाद पर्यटन क्षेत्र में सुरक्षा कायम करने के लिए पर्यटन मंत्रालय ने सुरक्षा और स्वच्छता संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं। साथ ही पर्यटन के कुछ क्षेत्रों के लिए ऑपरेशनल दिशानिर्देश भी जारी किए हैं।52,53,54,55 इन दिशानिर्देशों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पर्यटन सेवा प्रदाताइनमें ट्रैवल एजेंट्स, टूर ऑपरेटर्स, टूरिस्ट परिवहन ऑपरेटर, टूरिस्ट फेसिलिटेटर और गाइड्स शामिल हैं।[52] पर्यटन सेवा प्रदाताओं के दिशानिर्देशों में कई विनिर्देश हैं, जैसे ऑफिस परिसर का सैनिटाइजेशन, ऑफिस स्टाफ का हाइजीन प्रोटोकॉल, टूरिस्ट बुकिंग करने से पहले सैलानियों की घोषणा और मेडिकल प्रूफ और सैलानियों को बैठाने से पहले वाहनों का डिसइंफेक्शन, इत्यादि। 
     
  • रेस्त्रां: रेस्त्रां के कुछ दिशानिर्देशों में निम्नलिखित शामिल हैं(i) सीटिंग क्षमता को 50% कम करना और सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखने के लिए सीटिंग साइकिल को बदलना, (ii) परिसर में पूरी तरह से फंक्शनल सीसीटीवी कैमरा हैं ताकि संक्रमित लोगों को ट्रैक करना आसान हो, और (iii) प्रवेश देने से पहले प्रत्येक मेहमान के आरोग्य सेतु एप के स्टेटस को चेक करना।[53]
     
  • होटलोंहोटलों के दिशानिर्देशों में होटल परिसर, कर्मचारी और मेहमान आते हैं।[54]  इनमें से कुछ दिशानिर्देश इस प्रकार हैं(i) यह सुनिश्चित करना कि सभी कर्मचारियों ने मास्क और हेड ग्लव्स पहने हैं (जिन्हें हर ग्राहक के बाद बदला या डिसइंफेक्ट किया जाए), (ii) मामलों की रोकथाम, मामलों के प्रभावी प्रबंधन और असर को कम करने के लिए रैपिड रिस्पांस टीम की स्थापना, (iii) कमरे में भेजने से पहले सामान को डिसइंफेक्ट करना, और (iv) यह सुनिश्चित करना कि सभी कर्मचारी और मेहमान आरोग्य सेतु मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करें। ऐसे दिशानिर्देश बेड और ब्रेकफास्ट्स, होम स्टेज़ और फार्म स्टेज़ के लिए भी दिए गए हैं।[55] 

दिल्ली उच्च न्यायालय ने ड्राफ्ट पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2020 पर फीडबैक की समय सीमा बढ़ाई 

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

मार्च 2020 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ड्राफ्ट पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2020 जारी की थी।[56]   ड्राफ्ट अधिसूचना पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 का स्थान लेने का प्रयास करती है। यह 2006 की अधिसूचना में कुछ परिवर्तनों को प्रस्तावित करती है जैसे कुछ प्रॉजेक्ट्स को पब्लिक कंसल्टेशन से बाहर रखना। इनमें सभी इमारतें, निर्माण एवं क्षेत्र विकास परियोजनाएं, राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार या उन्हें बड़ा करना, और सिंचाई परियोजनाओं का आधुनिकीकरण शामिल हैं।56  

इस ड्राफ्ट अधिसूचना पर पहले 11 मई, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित थीं। कोविड-19 लॉकडाउन के मद्देनजर मंत्रालय ने इस समय सीमा को 30 जून, 2020 तक बढ़ा दिया था।[57]  समाचार पत्रों की रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस समय अवधि को 11 अगस्त, 2020 तक बढ़ा दिया है।[58]

ड्राफ्ट पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2020 पर अधिक विवरण के लिए कृपया देखें

कट और पॉलिश्ड हीरों को जीरो ड्यूटी पर दोबारा आयात करने की समय सीमा बढ़ाई गई 

Saket Surya (saket@prsindia.org)

मौजूदा नीति के अनुसार, जांच के लिए विदेश भेजे गए कट और पॉलिश्ड हीरों को तीन महीनों के भीतर जीरो ड्यूटी पर फिर से आयात किया जा सकता है।[59]  कोविड-19 के मद्देनजर इसे उन मामलों के लिए संशोधित किया गया है, जहां दोबारा निर्यात करने की अवधि 1 फरवरी, 2020 और 31 जुलाई, 2020 के दौरान समाप्त हो रही थी। अब यह अवधि स्वतः तीन महीने बढ़ा दी गई है।

 

समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

Saket Surya (saket@prsindia.org)

2019-20 की चौथी तिमाही में मौजूदा खाता घाटा जीडीपी के 0.1पर

2018-19 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में भारत के मौजूदा खाता शेष (सीएबी) में 4.6 बिलियन USD (जीडीपी का 0.7%) का घाटा दर्ज किया गया था, इसकी तुलना में 2019-20 में इसी अवधि के दौरान सीएबी में 0.6 बिलियन USD (जीडीपी का 0.1%) का मामूली अधिशेष हुआ है।[60] 2019-20 की पिछली तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के सीएबी में 2.6 बिलियन USD (जीडीपी का 0.4%का घाटा हुआ था। चौथी तिमाही में अधिशेष के मुख्य कारण हैं: (iनिम्न व्यापार घाटा (देश के निर्यात और आयात का अंतर), जोकि 35.0 बिलियन USD है, और (ii) पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 35.6 बिलियन USD के साथ शुद्ध अदृश्य प्राप्तियों में जबरदस्त वृद्धि।60  अदृश्य प्राप्तियों में ट्रेड इन सर्विसेज़ (जैसे सॉफ्टवेयर और ट्रैवल सेवाएं) और निजी हस्तांतरण, जैसे विदेशों में कार्यरत भारतीयों के प्रेषण से होने वाली प्राप्तियां शामिल हैं।

2019-20 की चौथी तिमाही में विदेशी मुद्रा कोष 18.8 बिलियन USD बढ़ गया जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में 14.2 बिलियन USD की वृद्धि हुई थी। इसकी तुलना में 2019-20 की तीसरी तिमाही में विदेशी मुद्रा भंडार में 21.6 बिलियन USD की वृद्धि हुई थी। निम्नलिखित तालिका में 2019-20 की चौथी तिमाही में भुगतान संतुलन प्रदर्शित है।

तालिका 1: 2019-20 की चौथी तिमाही में भुगतान संतुलन (बिलियन USD) 

 

ति4
 2018
-19

ति3

2019-20

ति4

2019-20

मौजूदा खाता

-4.6

-2.6

0.6

पूंजी खाता

19.2

23.6

17.4

भूल चूक-लेनी देनी

-0.4

0.6

  0.9

कोष में परिवर्तन

14.2

21.6

18.8

SourcesReserve Bank of India; PRS.

वित्तीय वर्ष 2019-20 में सीएबी ने जीडीपी का 0.9घाटा दर्ज किया, जबकि 2018-19 में यह घाटा 2.1था (तालिका 2)। 2019-20 में भारत का व्यापार घाटा पिछले वर्ष के 180.3 बिलियन USD के घाटे की तुलना में 157.5 बिलियन USD हो गया। विदेशी मुद्रा कोष 2019-20 में 59.5 बिलियन USD बढ़ गया, जबकि 2018-19 में इसमें 3.3 बिलियन USD की गिरावट हुई थी।  

तालिका 2: 2019-20 में भुगतान संतुलन (बिलियन USD) 

 

2018-19

2019-20

मौजूदा खाता

-57.2

-24.6

पूंजी खाता

54.4

83.2

भूल चूक- लेनी देनी

-0.5

1.0

कोष में परिवर्तन 

-3.3

59.5

SourcesReserve Bank of India; PRS.

 

वित्त

बैंकिंग रेगुलेशन (संशोधन) अध्यादेश, 2020 जारी

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

बैंकिंग रेगुलेशन (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को जारी किया गया।[61] यह अध्यादेश बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 में संशोधन करता है। एक्ट बैंकों के कामकाज को रेगुलेट करता है और विभिन्न पहलुओं का विवरण प्रदान करता है जैसे बैंकों की लाइसेंसिंग, प्रबंधन और संचालन। अध्यादेश की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • मोरटोरियम के बिना पुनर्गठन या एकीकरण: एक्ट के अंतर्गत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) केंद्र सरकार को आवेदन कर सकता है कि वह किसी बैंकिंग कंपनी को मोरटोरियम में रख सकती है। मोरटोरियम के दौरान अगर आरबीआई को यह प्रतीत होता है कि बैंक के उचित प्रबंधन के लिए, या जमाकर्ताओं, आम लोगों या बैंकिंग प्रणाली के हित के लिए ऐसा आदेश जरूरी है तो वह बैंक के पुनर्गठन या एकीकरण के लिए योजना बना सकता है। अध्यादेश आरबीआई को इस बात की अनुमति देता है कि वह मोरटोरियम के बिना भी पुनर्गठन या एकीकरण के लिए योजना शुरू कर सकता है।
     
  • बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का सुपरसेशनएक्ट कहता है कि आरबीआई कुछ स्थितियों में मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का अधिकतम पांच वर्षों के लिए सुपरसेशन कर सकता है। इन स्थितियों में ऐसे मामले शामिल हैं जहां आरबीआई के लिए जनहित में या जमाकर्ताओं की सुरक्षा के लिए बोर्ड का सुपरसेशन जरूरी है। अध्यादेश कहता है कि अगर कोऑपरेटिव बैंक किसी राज्य के रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसायटीज में पंजीकृत है तो आरबीआई संबंधित राज्य सरकार की सलाह से बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को सुपसीड करेगा और उस अवधि के लिए ऐसा करेगा, जिसे निर्दिष्ट किया गया हो।
     
  • एक्सक्लूजन्सएक्ट कुछ कोऑपरेटिव सोसायटीज़ पर लागू नहीं होता, जैसे प्राइमरी कृषि ऋण सोसायटीज़ और कोऑपरेटिव लैंड मॉर्गेज बैंक। अध्यादेश निम्नलिखित को एक्ट के प्रावधानों से हटाने के लिए संशोधन करता है: (iप्राइमरी कृषि ऋण सोसायटीज़और (iiकृषि विकास के लिए दीर्घकालीन वित्त प्रदान करने वाली कोऑपरेटिव सोसायटीज़, अगर वे अपने नाम में बैंक,’ ‘बैंकर या ‘बैंकिंग का इस्तेमाल नहीं करतीं और चेक क्लीयर करने वाली एंटिटीज़ के तौर पर व्यवहार नहीं करतीं।
     
  • कोऑपरेटिव बैंकों को छूट देने की शक्तिअध्यादेश कहता है कि आरबीआई अधिसूचना के जरिए कोऑपरेटिव बैंक या कोऑपरेटिव बैंकों की किसी श्रेणी को एक्ट के कुछ प्रावधानों से छूट दे सकता है। ये कुछ प्रकार के रोजगार पर प्रतिबंध, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के क्वालिफिकेशन और चेयरपर्सन की नियुक्ति से जुड़े प्रावधान हैं। छूट की समय अवधि और शर्तों को आरबीआई द्वारा निर्दिष्ट किया जाएगा।

अध्यादेश पर पीआरएस के सारांश के लिए कृपया देखें 

सेबी ने रेगुलेटरी सैंडबॉक्स के लिए फ्रेमवर्क शुरू किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

सिक्योरिटीज़ और एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने रेगुलेटरी सैंडबॉक्स के लिए फ्रेमवर्क शुरू किया।[62]  रेगुलेटरी सैंडबॉक्स एक ऐसा परिवेश प्रदान करता है जिसमें बाजार प्रतिभागी को एक नियंत्रित परिवेश में ग्राहकों के साथ नए फिनटेक सॉल्यूशंस (प्रॉडक्ट्स, सेवाएं या बिजनेस मॉडल) का परीक्षण करने का मौका मिलता है।[63] सेबी में पंजीकृत सभी एंटिटीज़ सैंडबॉक्स में परीक्षण के लिए पात्र होंगे।  

  • मानदंड: सेबी निम्नलिखित मानदंडों के आधार पर एप्लिकेंट्स का मूल्यांकन करेगा: (i) नई तकनीक का प्रयोग, (ii) निवेशकों या बाजारों को लाभ, (iii) जोखिम को मापने और उसे कम करने के मानदंड, (iv) स्पष्टतया वर्णित शिकायत निवारण प्रणाली, और (v) परीक्षण के बाद सॉल्यूशन के प्रयोग की व्यावहारिकता।
     
  • छूट: नए प्रयोग के साथ रेगुलेटरी अनुपालन कम से कम हो, इसे बढ़ावा देने के लिए सेबी प्रस्तावित फिनटेक सॉल्यूशन के आधार पर एंटिटीज़ को छूट देगा, जोकि मामलों को देखकर दी जाएगी। लेकिन केवाईसी और एंटी मनी लॉन्ड्रिंग रेगुलेशंस से कोई छूट नहीं दी जाएगी।
     
  • परीक्षण: मंजूरी के बाद एप्लिकेंट को अपने यूजर्स को यह बताना चाहिए कि सॉल्यूशन सैंडबॉक्स में ऑपरेट होगा और परीक्षण शुरू करने से पहले यूजर से इससे जुड़े खतरे की स्वीकृति लेगा। परीक्षण की अधिकतम अवधि 12 महीने है जिसे आगे बढ़ाया जा सकता है। परीक्षण के दौरान एप्लिकेंट को सेबी को आउटकम/प्रदर्शन संकेतकों और चिन्हित मुद्दों के साथ अंतरिम रिपोर्ट्स देनी होंगी। परीक्षण पूरा होने के बाद सेबी यह तय करेगा कि क्या सॉल्यूशन को बड़े पैमाने पर बाजार में उतारना चाहिए। वैकल्पिक तौर पर एप्लिकेंट एक्सटेंशन का अनुरोध कर सकता है, या एक एग्जिट स्ट्रैटेजी को इस्तेमाल कर सकता है।
     
  • मंजूरी रद्द होना: सेबी कुछ स्थितियों में प्रतिभागियों की मंजूरी को रद्द कर सकता है, जैसे (iअगर वे जोखिम कम करने का काम नहीं कर पाते, (iiगलत सूचना देते हैं, या (iiiलिक्विडी में जाते हैं। 

वित्त मंत्री ने ड्राफ्ट पेंशन फंड (विदेशी निवेश) नियम, 2020 जारी किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

वित्त मंत्रालय ने ड्राफ्ट पेंशन फंड (विदेशी निवेश) नियम, 2020 जारी किया।[64]   नियम निर्दिष्ट करते हैं कि भारत में पेंशन फंड्स में कितने विदेशी निवेश की अनुमति है। नियमों के अनुसारविदेशी निवेशकों द्वारा इक्विटी शेयरों में कुल विदेशी निवेश फंड की पेडअप इक्विटी पूंजी के 49% से अधिक नहीं होना चाहिए। इस सीमा तक ऑटोमैटिक रूट से विदेशी निवेश की अनुमति होगी। उल्लेखनीय है कि एफडीआई नीति के अंतर्गत ऑटोमैटिक रूट से पेंशन क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 49% है।[65] 

नियमों के अनुसार, अगर निवेश करने वाली एंटिटी चीन सहित सीमावर्ती देशों की है तो विदेशी निवेश के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी होगी। ड्राफ्ट नियमों पर टिप्पणियां 19 जुलाई, 2020 तक आमंत्रित हैं। 

आरबीआई ने निजी क्षेत्र के बैंकों के स्वामित्व की समीक्षा के लिए वर्किंग ग्रुप का गठन किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भारतीय निजी क्षेत्र के बैंकों के स्वामित्व और कॉरपोरेट स्ट्रक्चर पर दिशानिर्देशों की समीक्षा के लिए इंटरनल वर्किंग ग्रुप का गठन किया।[66]   वर्किंग ग्रुप पिछले कुछ घटनाक्रमों के मद्देनजर निजी क्षेत्र के बैंकों के स्वामित्व, गवर्नेंस और कॉरपोरेट स्ट्रक्चर से संबंधित रेगुलेटरी दिशानिर्देशों की समीक्षा करेगा। आरबीआई के अनुसार, इस समीक्षा से अलग-अलग समयावधि में बैंकों के लिए निर्धारित मानदंडों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का अवसर मिलेगा। कमिटी में पांच सदस्य शामिल होंगेऔर इसकी अध्यक्षता आरबीआई के केंद्रीय मंडल के निदेशक द्वारा की जाएगी।

वर्किंग ग्रुप की संदर्भ की शर्तों में निम्नलिखित शामिल होंगे: (i) निजी क्षेत्र के बैंकों में स्वामित्व और नियंत्रण के अत्यधिक कॉनसेंट्रेशन को ध्यान में रखते हुए स्वामित्व के उपयुक्त मानदंडों का सुझाव देना, (ii) बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने हेतु एंटिटीज़ के लिए पात्रता के मानदंड की समीक्षा, (iii) लाइसेंसिंग के चरण में प्रमोटर शेयरहोल्डिंग और बाद के चरणों में शेयरहोल्डिंग के विलयन की समय सीमा की समीक्षा करना।

कमिटी को 30 सितंबर, 2020 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।  

आरबीआई ने पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के निर्माण की घोषणा की

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

आरबीआई ने एक्वायर्स को टियर-3 से लेकर टियर-6 केंद्रों और पूर्वोत्तर राज्यों में प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) इंफ्रास्ट्रक्चर (फिजिकल या डिजिटल) लगाने हेतु पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड बनाने की घोषणा की।[67] इन स्थानों पर भुगतान प्रणालियों के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया जाएगा। आरबीआई के वर्गीकरण के अनुसार, टियर-3 केंद्र ऐसे क्षेत्र होते हैं जिनकी आबादी 50,000 से कम (जनगणना 2011 के अनुसार) और टियर-6 केंद्रों में 5,000 से कम होती है।[68]  

आरबीआई इस फंड में 250 करोड़ रुपए का शुरुआती योगदान देगा। शेष योगदान कार्ड इश्यू करने वाले बैंक और देश में काम करने वाले कार्ड नेटवर्क्स द्वारा किया जाएगा। कार्ड इश्यू करने वाले बैंक और कार्ड नेटवर्क्स के ऑपरेशनल खर्च को कवर करने के लिए फंड को आवर्ती योगदान भी हासिल होगा। अगर जरूरी हुआ तो आरबीआई साल के बीच में योगदान देगा। फंड को एडवाइजरी काउंसिल द्वारा गवर्न और आरबीआई द्वारा प्रबंधित किया जाएगा। 

 

कृषि

अनिवार्य वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, 2020 जारी

Saket Surya (saket@prsindia.org)

अनिवार्य वस्तुएं (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को को जारी किया गया।[69]  यह अध्यादेश अनिवार्य वस्तुएं एक्ट, 1955 में संशोधन करता है। एक्ट केंद्र सरकार को कुछ वस्तुओं के उत्पादन, सप्लाई, वितरण, व्यापार और वाणिज्य को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। अध्यादेश कृषि क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि करने का प्रयास करता है। मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • खाद्य पदार्थों का रेगुलेशनएक्ट केंद्र सरकार को कुछ वस्तुओं (जैसे खाद्य पदार्थ, उर्वरक और पेट्रोलियम उत्पाद) को अनिवार्य वस्तुओं के रूप में निर्दिष्ट करने का अधिकार देता है। केंद्र सरकार ऐसी अनिवार्य वस्तुओं के उत्पादन, सप्लाई, वितरण, व्यापार और वाणिज्य को रेगुलेट या प्रतिबंधित कर सकती है। अध्यादेश में यह प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार केवल असामान्य परिस्थितियों में कुछ खाद्य पदार्थों, जैसे अनाज, दालों, आलू, प्याज, खाद्य तिलहन और तेलों की सप्लाई को रेगुलेट कर सकती है। इन परिस्थितियों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) युद्ध, (ii) अकाल, (iii) असामान्य मूल्य वृद्धि, और (iv) गंभीर प्रकृति की प्राकृतिक आपदा।
     
  • स्टॉक लिमिट लागू करना: एक्ट के अंतर्गत केंद्र सरकार यह रेगुलेट कर सकती है कि कोई व्यक्ति किसी अनिवार्य वस्तु का कितना स्टॉक रख सकता है। अध्यादेश में यह अपेक्षा की गई है कि विशिष्ट वस्तुओं की स्टॉक की सीमा मूल्य वृद्धि पर आधारित होनी चाहिए। स्टॉक की सीमा निम्नलिखित स्थितियों में लागू की जा सकती है: (i) अगर बागवानी उत्पाद के रीटेल मूल्य में 100% की वृद्धि होती है, और (ii) नष्ट न होने वाले कृषि खाद्य पदार्थों के रीटेल मूल्य में 50% की वृद्धि होती है। वृद्धि की गणना, पिछले 12 महीने के मूल्य, या पिछले पांच महीने के औसत रीटेल मूल्य (इनमें से जो भी कम होगा) के आधार पर की जाएगी।
     
  • अध्यादेश में प्रावधान है कि कृषि उत्पाद के प्रोसेसर या वैल्यू चेन के हिस्सेदार व्यक्ति पर स्टॉक की सीमा लागू नहीं होगी, अगर उस व्यक्ति का स्टॉक निम्नलिखित से कम है: (i) प्रोसेसिंग की इंस्टॉल्ड क्षमता की सीमा, या (ii) निर्यातक की स्थिति में निर्यात की मांग। वैल्यू चेन के हिस्सेदार का अर्थ है, ऐसा व्यक्ति जो उत्पादन में संलग्न है या कृषि उत्पाद की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, स्टोरेज, परिवहन या वितरण के किसी चरण में उसका मूल्य संवर्धन करता है।

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उत्पाद की बिक्री हेतु हस्ताक्षरित कृषि समझौतों को रेगुलेट करने के लिए अध्यादेश जारी 

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org

मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता अध्यादेश, 2020 को जारी किया गया।[70] यह अध्यादेश कृषि उत्पादों की बिक्री और खरीद के संबंध में किसानों को संरक्षण देने और उनके सशक्तीकरण हेतु फ्रेमवर्क प्रदान करता है। इस अध्यादेश के प्रावधान राज्यों के एपीएमसी एक्ट्स के प्रावधानों के होते हुए भी लागू रहेंगे। अध्यादेश के मुख्य प्रावधानों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कृषि समझौताअध्यादेश में प्रावधान है कि किसी कृषि उत्पाद के उत्पादन या पालन से पहले कृषि समझौता किया जाएगा, जिसका उद्देश्य यह है कि किसान अपने कृषि उत्पादों को स्पॉन्सर्स को आसानी से बेच सकें। स्पान्सर में व्यक्ति, पार्टनरशिप फर्म्स, कंपनियां, लिमिटेड लायबिलिटी ग्रुप्स और सोसाइटियां शामिल हैं। ये समझौते निम्नलिखित के बीच हो सकते हैं: (i) किसान और स्पान्सर, या (ii) किसान, स्पॉन्सर, और तीसरा पक्ष। तीसरे पक्ष में एग्रीगेटर भी शामिल हैं और कृषि समझौते में उनकी भूमिका और सेवाओं का स्पष्ट रूप से उल्लेख होगा। एग्रीगेटर वे होते हैं जो एग्रीगेशन से संबंधित सेवाएं प्रदान करने के लिए किसान और स्पॉन्सर के बीच बिचौलिये का काम करते हैं। समझौते में कृषि उत्पाद की सप्लाई, गुणवत्ता, मानदंड और मूल्य से संबंधित नियमों और शर्तों तथा कृषि सेवाओं की सप्लाई से संबंधित नियमों का उल्लेख हो सकता है। ये नियम और शर्तें खेती और पालन की प्रक्रिया के दौरान, या डिलिवरी के समय निरीक्षण और सर्टिफिकेशन का विषय हो सकते हैं।
     
  • समझौते की अवधि: समझौते की अवधि एक फसल मौसम या पशु का एक प्रजनन चक्र होगा। अधिकतम अवधि पांच वर्ष होगी। पांच वर्ष के बाद उत्पादन चक्र के लिए, समझौते की अधिकतम अवधि को किसान और स्पॉन्सर आपस में तय करेंगे।
     
  • मौजूदा कानूनों से छूट: कृषि समझौते के अंतर्गत कृषि उत्पाद को उन सभी राज्य कानूनों से छूट मिलेगी, जो कृषि उत्पाद की बिक्री और खरीद को रेगुलेट करते हैं। इन उत्पादों को अनिवार्य वस्तु एक्ट, 1955 के प्रावधानों से छूट मिलेगी और उन पर स्टॉक सीमा की कोई बाध्यता लागू नहीं होगी।
     
  • क़ृषि उत्पाद का मूल्य निर्धारण: अध्यादेश में यह अपेक्षा की गई है कि कृषि उत्पाद की खरीद का मूल्य समझौते में दर्ज होगा। यह कृषि उत्पादों के भुगतान और वितरण के बारे में विवरण भी प्रदान करता है। मूल्य परिवर्तन होने की स्थिति में उनके मूल्य निर्धारण का तरीका कृषि समझौते में उल्लिखित होगा।
     
  • विवाद निपटारा: अध्यादेश विवाद निपटान के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था प्रदान करता है। सबसे पहलेसभी विवादों को समाधान के लिए एक बोर्ड को भेजा जाना चाहिए। यदि तीस दिनों के बाद विवाद अनसुलझा रहता हैतो पक्ष रेज़ोल्यूशन के लिए उप-विभागीय मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सकते हैं। मजिस्ट्रेट के निर्णयों के खिलाफ पक्षों को अपीलीय अथॉरिटी के पास अपील करने का अधिकार होगा।

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किसान उपज व्यापार और वाणिज्य अध्यादेश, 2020 जारी

Saket Surya (saket@prsindia.org)

किसान उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020 को जारी किया गया।[71]  यह अध्यादेश राज्यों के कृषि उत्पाद मार्केट कानूनों (राज्य एपीएमसी एक्ट्स) के अंतर्गत अधिसूचित बाजारों के बाहर किसानों की उपज के निर्बाध व्यापार का प्रावधान करता है। इस अध्यादेश के प्रावधान राज्यों के एपीएमसी एक्ट्स के प्रावधानों के होते हुए भी लागू रहेंगे। मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • उत्पाद का व्यापारअध्यादेश अनुमति देता है कि उपज का राज्यों के बीच और राज्य के भीतर व्यापार निम्नलिखित के बाहर भी किया जा सकता है: (i) राज्य एपीएमसी एक्ट्स के अंतर्गत गठित मार्केट कमिटी द्वारा संचालित मार्केट यार्ड्स के भौतिक परिसर, और (ii) राज्य एपीएमसी एक्ट्स के अंतर्गत अधिसूचित अन्य बाजार, जैसे निजी मार्केट यार्ड्स और मार्केट सब यार्ड्स, प्रत्यक्ष मार्केटिंग कलेक्शन सेंटर्स और निजी किसान उपभोक्ता मार्केट यार्ड्स। उपज के उत्पादन, उसे जमा और एकत्र करने वाली किसी भी जगह पर व्यापार किया जा सकता है, जिसमें फार्म गेट्स, कारखाने के परिसर, वेयरहाउस, सिलो, और कोल्ड स्टोरेज शामिल हैं ।
     
  • व्यापार के लिए पात्रता: अध्यादेश किसानों, किसान उत्पादक संगठनों और किसान उपज की खरीद करने वालों को राज्यों के बीच और राज्य के भीतर व्यापार में निम्नलिखित की अनुमति देता है: (i) थोक व्यापार, (ii) रीटेल, (iii) एंड यूज, (iv) मूल्य संवर्धन, (v) प्रोसेसिंग, (vi) मैन्यूफैक्चरिंग, (vii) निर्यात, या (viii) उपभोग।
  • हालांकि अधिसूचित किसान उपज (राज्य एपीएमसीज़ एक्ट्स के अंतर्गत निर्दिष्ट और रेगुलेटेड कृषि उत्पाद) का व्यापार करने के लिए एंटिटी को निम्नलिखित में से एक होना चाहिए: (i) एक किसान उत्पादक संगठन या कृषि सहकारी संघ, या (ii) एक कृषि सहकारी संघ, या (iii) एक ऐसा व्यक्ति जिसके पास इनकम टैक्स एक्ट के अंतर्गत परमानेंट एकाउंट नंबर हो या ऐसा कोई दस्तावेज जिसे केंद्र सरकार ने अधिसूचित किया हो। 
     
  • इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग: अध्यादेश निर्दिष्ट व्यापार क्षेत्र में किसान उपज की इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग की अनुमति देता है। इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग और ट्रांज़ैक्शन प्लेटफॉर्म को तैयार किया जा सकता है ताकि किसान उपज को प्रत्यक्ष और ऑनलाइन खरीदा और बेचा जा सके। केंद्र सरकार ऐसे प्लेटफॉर्म्स के लिए मोडैलिटी तय कर सकती हैं, जैसे (i) प्रक्रिया, नियम और पंजीकरण का तरीका, और (ii) आचार संहिता, गुणवत्ता का आकलन, और भुगतान का तरीका।
     
  • राज्यों द्वारा कोई फीस नहीं वसूली जाएगी: अध्यादेश के अंतर्गत कोई भी व्यापार करने पर राज्य सरकार किसानों, व्यापारियों और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स से कोई बाजार फीस, सेस या प्रभार नहीं वसूलेगी। 

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कैबिनेट ने 2020-21 खरीफ फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्यों को मंजूरी दी

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने 2020-21 मौसम के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों (एमएसपीज़) को मंजूरी दी।[72] धान (सामान्य) के लिए एमएसपी 1,868 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है जिसमें पिछले वर्ष की एमएसपी (1,815 रुपए प्रति क्विंटल) से 2.9% की बढ़ोतरी है। तालिका 3 में 2020-21 के बाजार मौसम के लिए अधिसूचित एमएसपी तथा 2019-20 की तुलना में परिवर्तन को प्रदर्शित किया गया है।

तालिका 3: 2020-21 मौसम के लिए खरीफ फसलों की एमएसपी (रुपए प्रति क्विंटल में) 

फसल

2019-20

2020-21

परिवर्तन (%)

धान (सामान्य)

1,815

1,868

2.9%

धान (ग्रेड ए) 

1,835

1,888

2.9%

ज्वार (हाइब्रिड) 

2,550

2,620

2.7%

ज्वार (मलडंडी) 

2,570

2,640

2.7%

बाजरा

2,000

2,150

7.5%

रागी

3,150

3,295

4.6%

मक्का

1,760

1,850

5.1%

अरहर (तूअर)

5,800

6,000

3.4%

मूंग

7,050

7,196

2.1%

उड़द

5,700

6,000

5.3%

मूंगफली

5,090

5,275

3.6%

सूरजमुखी के बीज

5,650

5,885

4.2%

सोयाबीन (पीली) 

3,710

3,880

4.6%

तिल

6,485

6,855

5.7%

रामतिल

5,940

6,695

12.7%

कपास (मध्यम रेशा)

5,255

5,515

4.9%

कपास (लंबा रेशा)

5,550

5,825

5.0%

Sources:  Press Information Bureau; PRS.

कैबिनेट ने पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कोष को मंजूरी दी

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने 15,000 करोड़ रुपए के साथ पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कोष की स्थापना को मंजूरी दे दी है जिसकी घोषणा आत्मनिर्भर भारत इकोनॉमिक पैकेज के अंतर्गत की गई है।[73],[74] इस कोष का लक्ष्य डेयरी और मीट प्रोसेसिंग तथा मूल्य संवर्धन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में निजी निवेश को बढ़ावा देना है। इसके दायरे में पशु चारा संयंत्रों की स्थापना हेतु निवेश भी शामिल है।

निजी कंपनियां, एमएसएमईज़, किसान उत्पादक संगठन और व्यक्ति इसके पात्र लाभार्थी होंगे, बशर्ते कि वे अपने कुल निवेश का कम से कम 10योगदान दें। शेष 90निवेश के लिए बैंक ऋण देगा। 

केंद्र सरकार पात्र लाभार्थियों को उनके ऋण पर 3ब्याज सबसिडी देगी। इसके अतिरिक्त लाभार्थी दो वर्ष की मोरटोरियम की अवधि समाप्त होने के बाद छह वर्ष के बीच ऋण की मूल राशि चुका सकते हैं। सरकार 750 करोड़ रुपए की राशि से ऋण गारंटी कोष की स्थापना भी करेगी जिसे नाबार्ड द्वारा प्रबंधित किया जाएगा। यह कोष एमएसएमईज़ की स्वीकृत परियोजनाओं हेतु अधिकतम 25ऋण राशि पर गारंटी प्रदान करेगा।

 

एमएसएमई

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के वर्गीकरण में संशोधन किए 

सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम दर्जे के उद्यमों की परिभाषा में परिवर्तन को अधिसूचित किया।[75] वर्तमान में एमएसएमईज़ को सूक्ष्मलघु और मध्यम उद्यम विकास एक्ट2006 के अंतर्गत परिभाषित किया जाता है। यह एक्ट उन्हें निम्नलिखित के आधार पर सूक्ष्मलघु और मध्यम दर्जे के उद्यमों में वर्गीकृत करता है: (i) माल की मैन्यूफैक्चरिंग या उत्पादन में संलग्न उद्यमों द्वारा प्लांट और मशीनरी में निवेशऔर (ii) सेवाएं प्रदान करने वाले उद्यमों द्वारा उपकरणों में निवेश। संशोधित परिभाषा के अनुसार, निवेश सीमा को बढ़ाया गया है और उद्यमों के वार्षिक टर्नओवर को एमएसएमई के वर्गीकरण के अतिरिक्त मानदंड के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। संशोधित निवेश और टर्नओवर की सीमाओं को तालिका 4 में निर्दिष्ट किया गया है। यह 1 जुलाई, 2020 से प्रभावी होगा। 

तालिका 4: एमएसएमईज़ को परिभाषित करने के मानदंड 

 

2006 एक्ट के मानदंड

संशोधित मानदंड

 

निवेश (रुपए में)

निवेश और टर्नओवर (रुपए में)

प्रकार

मैन्यूफैक्चरिंग

सेवा

मैन्यूफैक्चरिंग और सेवाएं, दोनों

सूक्ष्म

25 लाख रु तक

10 लाख रु तक

निवेश: करोड़ रु तक टर्नओवर: करोड़ रु तक

लघु

25 लाख रु से 5 करोड़ रु 

10 लाख रु से 2 करोड़ रु

निवेश: करोड़ रु से 10 करोड़ रु - टर्नओवर: करोड़ रु से 50 करोड़ रु 

मध्यम

करोड़ रु से 

10 करोड़ रु

करोड़ रु से 5 करोड़ रु

निवेश: 10 करोड़ रु से 50 करोड़ रु- टर्नओवर: 50 करोड़ रु से 250 करोड़ रु

SourcesMSME Development Act 2006; Gazette Notification, Ministry of Micro, Medium and Small Enterprises (June 1, 2020); PRS.   

प्लांट और मशीनरी में निवेश के कैलकुलेशन को पिछले वर्षों के दौरान इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के अंतर्गत दायर रिटर्न से जोड़ा जाएगा।[76]  नए उद्यमों के लिए निवेश उद्यम के प्रमोटर की स्वघोषणा पर आधारित होगा।  

टर्नओवर की जानकारी जीएसटी आइडेंटिफिकेशन नंबर (जीएसटीआईएन) से जुड़ी होगी। वर्गीकरण के लिए किसी भी उद्यम के कारोबार को कैलकुलेट करते समय वस्तुओं या सेवाओं के निर्यात को बाहर रखा जाएगा। सूचीबद्ध जीएसटीआईएन वाली सभी इकाइयों जिनका एक ही परमानेंट एकाउंट नंबर होगा, को टर्नओवर और निवेश के आंकड़ों के लिए एक उद्यम के रूप में माना जाएगा।

एमएसएमईज़ के लिए गौण ऋण हेतु क्रेडिट गारंटी योजना शुरू

एमएसएमई मंत्रालय ने गौण ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी योजना शुरू की है जिसके अंतर्गत सरकार प्रमोटर्स को स्ट्रेस्ड एमएसएमईज़ में निवेश के लिए 20,000 करोड़ रुपए की गारंटी प्रदान करेगी।[77]  इस योजना को आत्मनिर्भर भारत योजना के अंतर्गत मई 2020 में वित्त मंत्री द्वारा घोषित किया गया था।[78]

योजना के अंतर्गत स्ट्रेस्ड एमएसएमईज़ (जोकि 30 अप्रैल, 2020 को एनपीए बने हैं) के प्रमोटर्स को उनके हिस्से (इक्विटी और ऋण) या 75 लाख रुपए, जो भी कम हो, के बराबर ऋण दिया जाएगा। प्रमोटर इस राशि को इक्विटी के रूप में एमएसएमई में डालेंगे ताकि लिक्विडी में इजाफा हो और ऋण-इक्विटी अनुपात बरकरार रहे। मूल राशि के भुगतान पर सात वर्ष का मोरटोरियम दिया जाएगा। पुनर्भुगतान की अधिकतम अवधि 10 वर्ष होगी। योजना का संचालन सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट के माध्यम से किया जाएगा। 

 

व्यापार और वाणिज्य

Saket Surya (saket@prsindia.org)

निवेश आकर्षित करने के लिए सचिवों के एम्पावर्ड ग्रुप का गठन किया गया

केंद्रीय कैबिनेट ने देश में निवेश को आकर्षित करने के लिए सभी मंत्रालयों/विभागों में सचिवों के एम्पावर्ड ग्रुप और प्रॉजेक्ट विकास इकाइयों की स्थापना को मंजूरी दी है।[79]  इससे विभिन्न मंत्रालयों के बीच तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच निवेश संबंधी नीतियों के लिए समन्वय बढ़ने की उम्मीद है। इसका लक्ष्य बड़ी कंपनियों से विशेष रूप से एफडीआई प्रवाह को आकर्षित करना भी है जोकि कोविड 19 महामारी के कारण उत्पन्न जोखिमों को कम करने के लिए नए भौगोलिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं।  

कैबिनेट सचिव इस एम्पावर्ड ग्रुप के अध्यक्ष होंगे। ग्रुप के अन्य सदस्यों में नीति आयोग के चीफ एग्जेकेटिव ऑफिसर और निम्नलिखित विभागों के सचिव शामिल होंगे: (iउद्योग और आंतरिक व्यापार का संवर्धन, (iiवाणिज्य, (iiiराजस्व और (ivआर्थिक मामले। एम्पावर्ड ग्रुप निम्नलिखित के लिए जिम्मेदार होगा(iसमूचे विवेश वातावरण में नीतिगत स्थिरता और निरंतरता सुनिश्चित करना, (iiमुख्य निवेशकों द्वारा लक्षित तरीके से निवेश को सहज बनाना, (iiiविभाग के निवेश प्रस्तावों का मूल्यांकन, और (ivसमय पर विभिन्न विभागों की मंजूरियों को सुनिश्चित करना।

प्रत्येक विभाग/मंत्रालय के अंतर्गत प्रॉजेक्ट विकास इकाई निवेश प्रॉजेक्ट्स के विकास के लिए जिम्मेदार होगी और वह सुनिश्चित करेगी कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय स्थापित हो। प्रॉजेक्ट विकास इकाइयों के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (iसभी मंजूरियों के साथ प्रॉजेक्ट्स तैयार करना और आबंटन के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करना, और (iiनिवेश संबंधी बाधाओं को चिन्हित करना और उन्हें एम्पावर्ड ग्रुप के समक्ष प्रस्तुत करना।

 

कॉरपोरेट मामले

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

सीएसआर की पात्र गतिविधियों की सूची बढ़ाई गई

कंपनी एक्ट, 2013 के अंतर्गत एक निर्दिष्ट राशि से अधिक नेट वर्थ, टर्नओवर या लाभ वाली कंपनियों को पिछले तीन वत्तीय वर्षों के दौरान अपने औसत शुद्ध लाभ का 2कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी पर खर्च करना होगा। इस धन राशि को कुछ अधिसूचित गतिविधियों पर खर्च किया जाना चाहिए, जैसे शिक्षा को बढ़ावा देना। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने इस सूची में अतिरिक्त मदों को शामिल किया है। इसमें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के पूर्व सैनिकों तथा विधवा सहित उनके आश्रितों के लाभ हेतु योगदान शामिल है।[80]  

 

इलेक्ट्रॉनिक्स और इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी

Saket Surya (saket@prsindia.org)

राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सार्वजनिक व्यवस्था के आधार पर 59 मोबाइल एप्स पर पाबंदी

इलेक्ट्रॉनिक्स और इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने 59 ऐप्स को इस आधार पर प्रतिबंधित कर दिया कि वे राज्य की संप्रभुताअखंडतासुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं।[81]  इन ऐप्स में टिकटॉक, शेयरइट, यूसी ब्राउजर, एमआई वीडियो कॉल और कैम स्कैनर शामिल हैं। इन ऐप्स का उपयोग मोबाइल और गैर-मोबाइल इंटरनेट-एनेब्ल्ड उपकरणों दोनों में नहीं किया जा सकता।

यह प्रतिबंध इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 के अंतर्गत लगाया गया है।[82] एक्ट केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि वह किसी कंप्यूटर रिसोर्स के माध्यम से किसी जानकारी को सार्वजनिक स्तर पर पहुंचने से रोकने के लिए निर्देश जारी कर सकती है, अगर ऐसा करना राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक हित में है। निर्देश का पालन करने में विफल रहने वाले एक इंटरमीडियरी को सात वर्ष तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।

मंत्रालय ने उल्लेख किया कि ये ऐप्स भारत के बाहर स्थिति सर्वरों को अनाधिकृत तरीके से उपयोगकर्ताओं के डेटा को चोरी करने और गुप्त तरीके से प्रसारित करने में लगे हुए हैं। यह कहा गया कि शत्रु तत्वों द्वारा इस तरह के डेटा के संकलन, उनकी माइनिंग और प्रोफाइलिंग से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। इन ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने भी दिया है।

भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ग्लोबल पार्टनरशिप का संस्थापक सदस्य बना

भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  पर ग्लोबल पार्टनरशिप (जीपीएआई) की सहस्थापना की। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जिम्मेदारपूर्ण विकास और उपयोग के लिए स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय अंतर-सरकारी पहल है।[83]  जीपीएआई के अन्य संस्थापक सदस्य देशों में अमेरिकाब्रिटेनयूरोपीय संघकनाडाजापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। जीपीएआई एआई में अनुसंधानसहयोग और लागू गतिविधियों का सहयोग देना चाहता है। यह एआई के विकास में भाग लेने वाले देशों के अनुभवों और विविधता का लाभ उठाना चाहता है। कोविड-19 के कारण वर्तमान विश्वव्यापी संकट पर बेहतर प्रतिक्रिया देने के लिए एआई का कैसे लाभ उठाया जा सकता हैयह प्रदर्शित करने के तरीके भी विकसित किए जाएंगे। पेरिस में जीपीएआई का एक सचिवालयऔर मॉन्ट्रियल और पेरिस में विशेषज्ञता केंद्र होंगे। 

इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के लिए दिशानिर्देश 

मार्च 2020 में केंद्रीय कैबिनेट ने इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कुछ योजनाओं को मंजूरी दी है।[84],[85],[86]  इलेक्ट्रॉनिक और इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने इन योजनाओं के लिए दिशानिर्देशों की घोषणा की है।[87],[88],[89] घोषणाओं का विवरण इस प्रकार हैं:

  • बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग के लिए प्रोडक्शन इन्सेंटिव योजना: योजना में मोबाइल फोन मैन्यूफैक्चरिंग तथा एसेंबली, टेस्टिंग, मार्केटिंग और पैकेजिंग यूनिट्स सहित विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव को प्रस्तावित किया गया है।84 योजना का उद्देश्य इन इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करना है। योजना बेस ईयर में भारत में बनने वाली वस्तुओं की इनक्रेमेंटल सेल पर 4% से 6इन्सेंटिव प्रदान करेगी।87  यह इन्सेंटिव बेस ईयर, जिसे स्पष्ट किया जाएगा, से लेकर पांच वर्ष तक उपलब्ध होगा।87
     
  • इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और सेमीकंडक्टर्स की मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए योजना: योजना कुछ निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की मैन्यूफैक्चरिंग के लिए 25पूंजीगत व्यय के लिए वित्तीय इन्सेंटिव प्रदान करेगी।85 अनुसंधान और विकास सहित प्लांट, मशीनरी, उपकरण और तकनीक पर पूंजीगत व्यय इस योजना के दायरे में आएंगे।88 योजना के अंतर्गत सेगमेंट्स में निम्नलिखित शामिल हैं: (iमोबाइल, कंज्यूमर और मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, और (iiटेलीकॉम उपकरण।88 
     
  • संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर्स (ईएमसी 2.0) योजना: ईएमसी 2.0 योजना 2012 में घोषित ईएमसी योजना का स्थान लेगी। पिछली योजना के लिए अक्टूबर 2017 तक एप्लिकेशंस ओपन थे।86,[90] योजना इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर्स (ईएमसी) और कॉमन फेसिलिटी सेंटर्स (सीएफसी) को स्थापित करने तथा मौजूदा ईएमसीज़ और सीएफसीज़ को विस्तार देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।89 ईएमसीज़ और सीएफसीज़ इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिज़ाइन और मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को कॉमन फेसिलिटीज़ और सुविधाओं के साथ तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करेंगे।  

 

परिवहन

रेलवे ने खरीद नियमों को सरल बनाने और व्यापार सुगमता में सुधार के लिए परिवर्तनों की घोषणा की

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

रेल मंत्रालय ने खरीद नियमों को सरल बनाने और व्यापार सुगमता में सुधार के लिए परिवर्तनों की घोषणा की।[91]  इससे पूर्व ब्रेक इक्विपमेंट जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं को उन वेंडर्स से खरीदा जाता था जिन्हें उस खास वस्तु के लिए नॉमिनेटेड वेंडर एप्रूविंग एजेंसियों द्वारा मंजूर किया जाता था।[92] उस खास वस्तु के लिए वेंडर्स को मल्टीपल वेंडर एप्रूविंग एजेंसियों से संपर्क करना पड़ता था और मल्टीपल रेलवे यूनिट्स के लिए टेंडर्स में हिस्सा लेने के लिए एप्रूव्ज वेंडर के तौर पर पंजीकरण कराना पड़ता था। 

नए खरीद नियमों के अनुसार, किसी वस्तु के लिए भारतीय रेलवे की किसी वेंडर एप्रूविंग एजेंसी में मंजूर किए गए वेंडर को उस खास वस्तु के लिए सभी रेलवे यूनिट्स द्वारा एप्रूव्ड वेंडर माना जाएगा।

रेंट अ मोटर कैब/साइकिल स्कीम्स को लागू करने के लिए एडवाइजरी जारी  

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने रेंट अ मोटर कैब और रेंट अ मोटरसाइकिल स्कीम्स को लागू करने के लिए एडवाइजरी जारी की।[93]  योजनाएं मोटर कैब्स और मोटरसाइकिल्स को किराए पर लेने से संबंधित कारोबार को रेगुलेट करती हैं। योजनाएं निम्नलिखित से संबंधित प्रावधान करती हैं: (iलाइसेंस देना, (iiमोटर कैब्स को किराए पर देने वाले के कर्तव्य और जिम्मेदारियां, और (iii) लाइसेंसिंग अथॉरिटीज़ की शक्तियां।[94]   

इससे पूर्व किराए पर वाहन चलाने वाले लोगों से यह अपेक्षा की जाती थी कि वे उपयुक्त अथॉरिटी द्वारा जारी आइडेंटिफिकेशन नंबर वाला बैच प्रदर्शित करें। एडवाइजरी के अनुसार, किराए पर वाहन चलाने वाले व्यक्ति से बैच नहीं मांगा जाएगा, अगर उसके पास निम्नलिखित मौजूद हैं: (i) वैध ड्राइविंग लाइसेंस या इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट, और (ii) मोटर कैब या मोटरसाइकिल को रेंट करने के लाइसेंस की प्रति। एडवाइजरी के अनुसार, किराए की मोटरसाइकिल को राज्यों के बीच यात्रा करने की अनुमति है, अगर संबंधित करों का भुगतान किया जाता है। योजना के अंतर्गत किराए की मोटरसाइकिलों की अंतरराज्यीय आवाजाही पर अस्पष्टता नहीं थी।[95]

मोटर वाहन नियमों में ड्राफ्ट संशोधन जारी

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में प्रस्तावित विभिन्न संशोधनों से संबंधित सुझाव आमंत्रित किए हैं।[96],[97],[98],[99]  ये नियम मोटर वाहन एक्ट, 1988 के अंतर्गत जारी किए गए हैं। मुख्य ड्राफ्ट संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पड़ोसी देशों के साथ परिवहनमंत्रालय ने हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के अनुसार पड़ोसी देशों के साथ यात्री या माल वाहनों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए संशोधनों का प्रस्ताव किया।96 संशोधनों में निम्नलिखित से संबंधित प्रावधान हैं (i) सीमा पार वाहनों के परिवहन की शर्तें और परमिट, (ii) ड्राइवर और कंडक्टर के लिए शर्तें, (iii) परिवहन वाहनों पर प्रदर्शित होने वाले विवरण, और (iv) संबंधित राज्यों के परिवहन एवं स्वास्थ्य विभागों, इंटेलिजेंस ब्यूरो और राज्य पुलिस सहित विभिन्न एंटिटीज़ की जिम्मेदारियां। इन पर 18 जुलाई तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।96
  • बीएस-IV उत्सर्जन नियमों के लिए मोहलत: मंत्रालय ने निर्माण उपकरण वाहनों, ट्रैक्टर और हार्वेस्टर के लिए बीएस (सीईवी/टीआरईएम)-IV उत्सर्जन नियमों के अनुपालन में मोहलत से संबंधित संशोधन भी प्रस्तावित किए।97 वर्तमान में इन वाहनों को 1 अक्टूबर, 2020 तक बीएस-IV का अनुपालन करना था। ड्राफ्ट नियम इस समय सीमा को 1 अप्रैल, 2021 तक बढ़ाने का प्रयास करते हैं। इन संशोधनों पर 19 जुलाई, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।97 

इसके अतिरिक्त मंत्रालय ने मार्च 2020 में परामर्श के लिए मूल रूप से जारी किए गए कुछ ड्राफ्ट संशोधनों पर टिप्पणियों को फिर से आमंत्रित किया है।98,99  कोविड-19 के प्रकोप के मद्देनजर टिप्पणियों को फिर से आमंत्रित किया गया है। इनमें निम्नलिखित के प्रावधान वाले संशोधन शामिल हैं: (i) क्रमशः नेशनल रजिस्ट्रार ऑफ ड्राइविंग लाइसेंस और मोटर वाहन के पोर्टल, (ii) लर्नर्स लाइसेंस हासिल करने के तरीके में बदलाव, (iii) टेस्टिंग एजेंसियों के लिए क्वालिटी स्टैंडर्ड्स, और (iv) खराब मोटर वाहनों के निर्देश और रीकॉल का तरीका। इन संशोधनों पर अधिक विवरण के लिए देखें संशोधनों पर 28 जुलाई, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

हल्के या मध्यम दर्जे के कलर ब्लाइंड लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी नियम अधिसूचित 

Saket Surya (saket@prsindia.org)

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन (पांचवां संशोधन) नियम, 2020 को अधिसूचित किया जोकि हल्के से मध्यम कलर ब्लाइंड लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस देने की अनुमति देते हैं।[100],[101] 

नियम केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन करते हैं और इन्हें मोटर वाहन एक्ट, 1988 के अंतर्गत जारी किया गया है। लाइसेंस हासिल करने के लिए मेडिकल फिटनेस के सर्टिफिकेट की जरूरत होगी, जो यह सर्टिफाई करेगा कि(iउस व्यक्ति ने स्टैंडर्ड इशिहारा चार्ट का इस्तेमाल करते हुए कलर ब्लाइंडनेस का टेस्ट दिया है, और (iiव्यक्ति गंभीर या पूरी तरह से कलर ब्लाइंड नहीं है। 

 

आवासन और शहरी मामले

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

पैदल यात्रियों के अनुकूल बाजार बनाने के उपाय 

आवासन और शहरी मामलों के मंत्रालय ने विभिन्न शहरों और म्यूनिसिपल क्षेत्रों में पैदल यात्रियों के अनुकूल बाजार बनाने से संबंधित उपायों का सुझाव दिया है।[102]  ये उपाय साइकिल ट्रैक और पैदल यात्री अनुकूल बाजारों पर विशेष ध्यान देते हुए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देकर वायु गुणवत्ता में सुधार करने का प्रयास करते हैं। मुख्य उपायों में शामिल हैं:

  • बाजारों का चयन: दस लाख या उससे अधिक आबादी वाले शहर कम से कम तीन बाजारों का चयन कर सकते हैं और उन्हें पैदल यात्रियों के अनुकूल बनाने के लिए अधिसूचित कर सकते हैं। अन्य सभी शहर कम से कम एक ऐसे बाजार को अधिसूचित कर सकते हैं। इन बाजार को 30 जून, 2020 तक अधिसूचित किया जा सकता है।
     
  • योजना: विभिन्न हितधारकों के परामर्श से पैदल यात्री अनुकूल बाजारों की योजना बनाई जा सकती है। इनमें विक्रेतानगरपालिका अधिकारीयातायात पुलिसपार्किंग फेसिलिटी देने वालेदुकान मालिक और उपभोक्ता शामिल हो सकते हैं। 30 सितंबर, 2020 तक इसकी योजना बनाई जा सकती है।
     
  • कार्यान्वयन: योजनाओं को छोटी और लंबी अवधि में लागू किया जा सकता है। अल्पकालिक कार्यान्वयन के उपायों में अवरोधक और वाहनों के लिए सड़क बंद करने जैसे अस्थायी और आसान कार्य शामिल हैं। अन्य उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं: (iअतिरिक्त सड़कों के माध्यम से पहुंच में सुधार(iiफुटपाथों को चौड़ा करनाऔर (iiiसाइकिलों के लिए अलग से रास्ता प्रदान करना। अल्पकालिक उपायों के कार्यान्वयन को अक्टूबर 2020 के पहले सप्ताह में शुरू किया जा सकता है। इस तरह के अल्पकालिक उपायों के सफल होने पर पैदल यात्रा को बढ़ावा देने हेतु दीर्घकालिक स्थायी संरचनाएं बनाई जा सकती हैं। 

 

खनन

Saket Surya (saket@prsindia.org)

कोल लिंकेज के रैशनलाइजेशन के लिए नई तकनीक अधिसूचित 

कोयला मंत्रालय ने कोल लिंकेज/कोयले की स्वैपिंग के रैशनलाइजेशन के लिए नई तकनीक को अधिसूचित किया है।[103] कोल लिंकेज बिजली एवं स्टील प्लांट्स जैसे उपभोक्ताओं को कोयला सप्लाई हेतु कोयला खदानों का आबंटन होता है। कोयला कंपनी और कोयला उपभोक्ता के बीच एक अनुबंध के माध्यम से कोयले की सप्लाई की जाती है। रैशनलाइजेशन में कोयले की सप्लाई के स्रोत का हस्तांतरण एक खदान से दूसरे खदान में इस प्रकार किया जाता है कि उपभोक्ता को अपने निकट के स्रोत से कोयला प्राप्त हो। इसका उद्देश्य कोयला परिवहन लागत को कम करना है। इस नई कार्यप्रणाली की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • पात्रता: रैशनलाइजेशन का अर्थ यह है कि दो इच्छुक उपभोक्ता अपनी निश्चित माता का पूरा या उसका कुछ हिस्सा अदल-बदल लें। पहले की पद्धति के अनुसारकेवल बिजली क्षेत्र (पावर प्लांट) के उपभोक्ता ही इसके पात्र थे। नई पद्धति प्रावधान करती है कि अन्य सभी क्षेत्र (जैसे स्टील और सीमेंट क्षेत्र) भी इसके पात्र होंगे। यह व्यवस्था केवल समान क्षेत्र के उपभोक्ताओं को प्राप्त होगी, यानी बिजली से बिजली और रेगुलेटरी से रेगुलेटरी। इस पद्धति के अंतर्गत केवल गैर-कोकिंग कोयले पर विचार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त ई-नीलामी योजनाओं और कैप्टिव कोयला ब्लॉकों से खरीदा गया कोयला इस योजना का पात्र नहीं होगा। केवल घरेलू कोयला लिंकेज और आयातित कोयले से रैशनलाइजेशन किया जा सकता है। हालांकिआयातित कोयले के दो उपभोक्ताओं के बीच ऐसी किसी भी व्यवस्था की अनुमति नहीं दी जाएगी।
     
  • रैशनलाइजेशन की शर्तेंरैशनलाइजेशन ग्रॉस कैलोरिफिक वैल्यू इक्विलेंस में कैलकुलेट की गई मात्रा पर आधारित होगा। इसलिए कोयले की मात्रा पर भी विचार किया जाएगा। लिंकेज धारक मौजूदा अनुबंध के आधार पर मूल्य चुकाएगा और कमर्शियल शर्तों में कोई परिवर्तन नहीं होगा। इस समझौते की न्यूनतम अवधि छह महीने होगी। इसकी अधिकतम अवधि दोनों पक्षों के मौजूदा अनुबंधों की समाप्ति का विषय होगी, जो भी पहले हो।
     
  • बचत का लेखा-जोखा: रैशनलाइजेशन से होने वाली बचत निम्नलिखित को दी जाएगी: (i) अगर कोयला पावर परचेज एग्रीमेंट के अंतर्गत सप्लाई किया गया है तो बिजली वितरण कंपनी को, और (iiगैर रेगुलेटेड क्षेत्र के उपभोक्ताओं (जैसे स्टील और सीमेंट) की स्थिति में भारतीय रेलवे को।

पूर्व मंजूरियों के साथ खनिज ब्लॉक्स की नीलामी के लिए दिशानिर्देश अधिसूचित 

खदान मंत्रालय ने पूर्व मंजूरियों (प्री-एम्बेडेड क्लीयरेंस) के साथ ग्रीनफील्ड खनिज ब्लॉक्स की नीलामी के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।[104] इन खनिज ब्लॉक्स के लिए, खनन का काम शुरू करने के लिए वैधानिक मंजूरियों को राज्य सरकारों से हासिल किया जाएगा और नीलामी में खदान के साथ सफल बोली लगाने वाले को दिया जाएगा।   

इससे निम्नलिखित संभव होगा: (iनीलामी के बाद उत्पादन शुरू करने में विलंब नहीं होगा, (iiव्यापार सुगमता में सुधार होगा, और (iiiभागीदारी बढ़ेगी और नीलामी में उच्च दरें प्राप्त होंगी। इस योजना को राज्यों द्वारा पायलट आधार पर लागू किया जाएगा। प्रत्येक राज्य पूर्व मंजूरियों के साथ नीलामी के लिए कम से कम पांच खनिज ब्लॉक्स को चिन्हित करेंगे। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • मंजूरी हासिल करने के लिए एजेंसी: राज्य सरकार अपेक्षित मंजूरी और अनुमोदन प्राप्त करने के लिए एक परियोजना निगरानी इकाई (पीएमयू) स्थापित कर सकती है। पीएमयू खनन योजना तैयार और मंजूर करवाएगी। सफल बोलीदाता को उत्पादन सीमा को 25% तक बढ़ाने या कम करने की अनुमति दी जाएगी। पीएमयू सरकारी और निजी स्वामित्व वाली भूमि, दोनों के लिए खनन हेतु भूमि अधिकार भी प्राप्त करेगी।
     
  • वन मंजूरी: खनन कार्यों सहित गैर-वन उद्देश्य के लिए वन भूमि के इस्तेमाल हेतु मंजूरी प्राप्त करना आवश्यक है। वन मंजूरी को इन-प्रिंसिपल अप्रूवल और फॉर्मल अप्रूवल के रूप में प्रदान किया जाता है और इसे चरण और चरण II की मंजूरी के लिए भेजा जाता है। पीएमयू केवल चरण I की मंजूरी प्राप्त करेगा। सफल बोली लगाने वाले को नीलामी के बाद चरण II की मंजूरी प्राप्त करनी होगी।
     
  • पर्यावरणीय मंजूरी: सफल बोलीदाता को नई पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त किए बिना अपनी उत्पादन सीमा को 25% बढ़ाने या कम करने की अनुमति दी जाएगी।
  • खर्चों का लेखा-जोखा: मंजूरी प्राप्त करने के लिए पीएमयू द्वारा भुगतान की गई फीसप्रारंभिक रूप से राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी। राज्य सरकार पीएमयू की  संलग्नता और मंजूरी प्राप्त करने के लिए जितना धन खर्च करेगी, उसे बाद में बोलीकर्ता से वसूला जाएगा।

 

बिजली

Saket Surya (saket@prsindia.org)

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के दिशानिर्देशों और मानदंडों में संशोधन

बिजली मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के दिशानिर्देशों और मानदंडों में संशोधनों को अधिसूचित किया है।[105] मूल दिशानिर्देश दिसंबर 2018 में जारी किए गए थे और उन्हें अक्टूबर 2019 में संशोधित किया गया था। मुख्य परिवर्तन इस प्रकार हैं:

  • बिजली आपूर्ति के लिए टैरिफ: संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसारकेंद्रीय या राज्य बिजली रेगुलेटरी आयोग बिजली एक्ट, 2003 के अंतर्गत जारी टैरिफ नीति के अनुसार सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों को बिजली की आपूर्ति के लिए टैरिफ का निर्धारण करेंगे। संशोधनों में कहा गया है कि टैरिफ सप्लाई की औसत लागत तथा 15से अधिक नहीं होगा, जब तक कि टैरिफ नीति द्वारा अन्यथा निर्दिष्ट न किया गया हो। 
     
  • चार्जिंग स्टेशन के प्रकारसंशोधनों में चार्जिंग स्टेशनों के विभिन्न प्रकारों को स्पष्ट किया गया है (तालिका 5)। ये एंटिटीज़ मौजूदा दिशानिर्देशों में स्पष्ट नहीं थीं। संशोधनों में प्रावधान है कि बैटरी चार्जिंग स्टेशन को पब्लिक चार्जिंग स्टेशन के समान माना जाएगा और दोनों प्रकार के चार्जिंग स्टेशन पर बिजली सप्लाई के लिए एक समान टैरिफ लागू होगा।

तालिका 5: विभिन्न प्रकार के चार्जिंग स्टेशनों की परिभाषा

एंटिटी

परिभाषा

पब्लिक चार्जिंग स्टेशन

जहां कोई भी इलेक्ट्रिक वाहन अपनी बैटरी को रीचार्ज कर सकता है

बैटरी चार्जिंग स्टेशन

जहां इलेक्ट्रिक वाहनों की डिस्चार्ज या आंशिक रूप डिस्चार्ज बैटरियों को रीचार्ज किया जा सकता है

कैप्टिव चार्जिंग स्टेशन

जहां चार्जिंग स्टेशन के मालिक के स्वामित्व या नियंत्रण वाले वाहनों की सर्विसिंग होती है

बैटरी स्वैपिंग स्टेशन

जहां इलेक्ट्रिक वाहन अपनी डिस्चार्ज बैटरी को चार्ज बैटरी से बदल सकते हैं

SourceNotification No12/2/2018-EV, Ministry of Power; PRS.

जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों के लिए संयुक्त बिजली रेगुलेटरी आयोग 

केंद्र सरकार ने बिजली एक्ट, 2003 के प्रावधानों के अंतर्गत जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों के लिए संयुक्त बिजली रेगुलेटरी आयोग की स्थापना की।[106] आयोग इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली क्षेत्र के स्वतंत्र रेगुलेटर के तौर पर काम करेगा।

 

नवीन और अक्षय ऊर्जा

Saket Surya (saket@prsindia.org)

नवोन्मेषी स्टैंडएलोन सोलर पंप्स के इंस्टॉलेशन के लिए दिशानिर्देश जारी

नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने नवोन्मेषी स्टैंडएलोन सोलर पंप्स के इंस्टॉलेशन के लिए दिशानिर्देश जारी किए।[107]  वर्तमान में मंत्रालय द्वारा संचालित योजनाओं के अंतर्गतकेवल मंत्रालय के विनिर्देशों को पूरा करने वाले सोलर पंप लगाए जा सकते हैं। मंत्रालय ने कहा कि उसे लागत प्रभावी तरीके से बेहतर प्रदर्शन करने वाले सोलर पंपों के विभिन्न डिजाइन/सॉफ्टवेयर के उपयोग के संबंध में रिप्रेजेंटेशंस प्राप्त हुए हैं। इस प्रकार तकनीक में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने टेस्ट मोड में अपनी योजनाओं के अंतर्गत नवोन्मेषी स्टैंडएलोन सोलर पंप्स के इंस्टॉलेशन की अनुमति देने का निर्णय लिया है। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • आवेदन की प्रक्रिया: मंत्रालय समय-समय पर इनोवेटर्स से आवेदन आमंत्रित करेगा। केवल वे उत्पाद जो परीक्षण और फील्ड परीक्षण के लिए उपलब्ध हैंभागीदारी के लिए पात्र होंगे। प्रस्ताव के साथ एक लागत-लाभ विश्लेषण की आवश्यकता होगी। आवेदनों की जांच के लिए मंत्रालय एक मूल्यांकन समिति का गठन करेगा। आवेदक को उत्पाद की परीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करना जरूरी होगा। कुछ मामलों में मूल्यांकन समिति उत्पाद के प्रदर्शन का दोबारा परीक्षण कर सकती है। 
     
  • फील्ड में प्रदर्शन: मूल्यांकन समिति के सुझाव पर इनोवेटर को प्रदर्शन के उद्देश्य से 50 सोलर पंप लगाने की अनुमति दी जाएगी। फील्ड में प्रदर्शन कम से कम एक वर्ष तक जारी रहेगा। इन पंप्स को कम से कम मंत्रालय के निर्दिष्ट मौजूदा मानकों को पूरा करना होगा।
     
  • इनोवेटर को सोलर पंप के इंस्टॉलेशन पर उसे किए गए भुगतान के बराबर की एक बैंक गारंटी जमा करानी होगी। अगर सोलर पंप के खराब होने के कारण किसानों को नुकसान होता है तो इनोवेटर को उसके नुकसान की भरपाई करनी होगी। 
     
  • तकनीक को अपनानामूल्यांकन समिति के सुझावों पर मंत्रालय नवोन्मेषी तकनीक का इस्तेमाल कर सकता है और स्टेकहोल्डर्स से सलाह करके मौजूदा स्पेसिफिकेशंस को अपडेट कर सकता है।

कचरे से ऊर्जा कार्यक्रम की वैधता को बढ़ाया गया 

शहरीऔद्योगिककृषि अपशिष्ट/अवशेषों और शहरी ठोस कचरे से ऊर्जा पर केंद्रित कार्यक्रम को 31 मार्च, 2021 या 15 वें वित्त आयोग के सुझाव लागू होने की तारीख तक बढ़ाया गया है (इनमें से जो भी पहले हो)।[108]  कार्यक्रम 31 मार्च, 2020 को समाप्त हो गया है। यह कार्यक्रम बायोगैस उत्पादन और बायोगैस से बिजली उत्पादन सहित कचरे से ऊर्जा प्रॉजेक्ट्स को लगाने के लिए डेवलपर्स को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

 

पर्यावरण

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के अंतर्गत उत्पादकों की जिम्मेदारियों के लिए दिशानिर्देश जारी 

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी (ईपीआर) के यूनिफॉर्म फ्रेमवर्क पर दिशानिर्देश जारी किए।[109]  प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम में ईपीआर का अर्थ है, उत्पाद के पूरे जीवन चक्र में उत्पादक की पर्यावरणीय प्रबंधन की जिम्मेदारी।[110]  इस फ्रेमवर्क का आधार यह है कि उत्पादक प्लास्टिक कचरा एकत्र प्रणालियों तथा रीसाइकलिंग उद्योग को वित्तीय प्रोत्साहन देने के लिए जिम्मेदार है ताकि वे सरकार के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्लास्टिक कचरे को जमा और प्रसंस्करित करें।

ईपीआर को लागू करने की प्रणाली का मूल्यांकन करने हेतु गठित कमिटी ने कहा था कि कचरे को जमा करने और उसे अलग-अलग करने की जिम्मेदारी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) की है। उसने कहा था कि उत्पादकों को यह जिम्मेदारी देना अप्रभावी साबित होगा। उसने ईपीआर के लिए यूनिफॉर्म फ्रेमवर्क का सुझाव दिया था जोकि राष्ट्रीय रजिस्ट्रेशन और डेटाबेस रेपोजिटरी तैयार करने पर आधारित होना चाहिए। ईपीआर के अंतर्गत सभी लेनदेन वेब पोर्टल से प्रबंधित होने चाहिए। इसके अतिरिक्त कमिटी ने कहा था कि ईपीआर के लिए एक सिंगल विंडो पूरे देश के लिए काम नहीं करेगा। उसने ईपीआर अनुपालन के लिए विभिन्न मॉडल्स का सुझाव दिया था। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं

  • फी आधारित मॉडल: यह मॉडल ऐसे उत्पादकों (आयातकों और ब्रांड ओनर्स सहित) पर लागू हो सकता है जो पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक की कम मात्रा (सरकार द्वारा निर्धारित कट-ऑफ से कम) का इस्तेमाल करते हैं। उन्हें केंद्रीय स्तर पर ईपीआर कॉरपस फंड में योगदान करना चाहिए। कोई उत्पादक कितनी राशि का योगदान करेगा, यह प्लास्टिक कचरे के उत्सर्जन और यूएलबी द्वारा उस कचरे को हैंडिल करने में किए गए प्रयास और खर्च किए गए धन पर आधारित होगा।
     
  • प्लास्टिक क्रेडिट मॉडलइस मॉडल के अंतर्गत उत्पादक को अपनी पैकेजिंग को खुद रीसाइकिल करने की जरूरत नहीं, बल्कि उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि इस बाध्यता को पूरा करने के लिए उसने उतने ही पैकेजिंग कचर को रिकवर और रीसाइकल किया है। उत्पादक के लिए यह अनिवार्य है कि वह सत्यापित प्रोसेसर या निर्यातक से रीसाइकलिंग का प्रमाण (प्लास्टिक क्रेडिट) हासिल करे।
     
  • प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी ऑर्गेनाइजेशंस: उत्पादक प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी ऑर्गेनाइजेशन (पीआरओ) का सदस्य बन सकते हैं जोकि अपनी सदस्य कंपनियों की ओर से कानूनी जरूरतों को पूरा करते हैं। पीआरओज़ उत्पादक की कॉन्ट्रैक्टर सेवा के तौर पर काम करेंगे। हालांकि प्लास्टिक पैकेजिंग की रीप्रोसेसिंग का प्रमाण देने की अंतिम जिम्मेदारी उत्पादक की ही होगी। 

दिशानिर्देशों पर टिप्पणियां 31 जुलाई, 2020 तक आमंत्रित हैं।

विदेशी जीवित प्रजातियों के आयात और  अधिकार के लिए एडवाइजरी जारी 

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भारत में जीवित विदेशी प्रजातियों के आयात और अधिकार पर एडवाइजरी जारी की।[111]  जीवित विदेशी प्रजातियां ऐसे पशुओं को कहते हैं जोकि कन्वेंशन ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड इन एंडेंजर्ड स्पीशीज़ ऑफ वाइल्ड फॉना एंड फ्लोरा (सीआईटीईएस) के अंतर्गत आते हैं। सीआईटीईएस सरकारों के बीच अंतरराष्ट्रीय समझौता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वन्य जीवों और पौधों की प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार से उनके अस्तित्व को कोई खतरा नहीं है।[112]  भारत ने सीआईटीईएस को 1976 में रैटिफाई किया है।[113]

एडवाइजरी की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • स्वैच्छिक खुलासा: जीवित विदेशी प्रजातियों की इन्वेंटरी स्वैच्छिक प्रकटीकरण (डिस्क्लोजर) योजना के जरिए विकसित की जाएगी। उनके ओनर या होल्डर को संबंधित राज्य चीफ वाइल्डलाइफ वॉर्डन (वन्य जीव (संरक्षण) एक्ट, 1972 के अंतर्गत स्थापित) को यह खुलासा एडवाइजरी जारी होने के छह महीने के भीतर करना होगा। वॉर्डन छह महीने के भीतर स्टॉक को रजिस्टर करेगा और अधिकार (या जीवित विदेशी प्रजातियों के कब्जे) से संबंधित सर्टिफिकेट जारी करेगा।
     
  • अगर जीवित विदेशी प्रजातियों का खुलासा छह महीने के भीतर कर दिया जाता है तो ओनर या होल्डर को मौजूदा कानूनों के अंतर्गत दस्तावेजीकरण का अनुपालन करना होगा।
     
  • किसी अधिग्रहण, मृत्यु, व्यापार, कब्जे में परिवर्तन या आयातित पशु के जन्म देने से संबंधित खुलासा संबंधित राज्य चीफ वाइल्डलाइफ वॉर्डन को ऐसी गतिविधि के 30 दिनों के भीतर करना होगा। 
     
  • आयात और स्टॉक का रखरखावआयातक को जीवित विदेशी प्रजातियों के लाइसेंस के लिए आवेदन करने के साथ-साथ संबंधित राज्य चीफ वाइल्डलाइफ वॉर्डन से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट भी लेना होगा। आयातक को इन प्रजातियों के स्टॉक के रखरखाव के लिए कुछ कदम उठाने होंगे। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) आयातित प्रजातियों का हेल्थ कार्ड रखना, (iiउनकी हाउसिंग की सुविधाओं का विवरण प्रदान, और (iiiयह सुनिश्चिचत करना कि जीवित विदेशी प्रजातियों को देशी पशु प्रजातियों से मिक्स या ब्रेड नहीं किया गया है।

 

स्वास्थ्य

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

कैबिनेट ने भारतीय चिकित्सा और होम्योपैथी के लिए फार्माकोपिया आयोग की स्थापना को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने आयुष मंत्रालय के अधीनस्थ कार्यालय के तौर पर भारतीय चिकित्सा और होम्योपैथी के लिए फार्माकोपिया आयोग (पीसीआईएमएंडएच) की स्थापना को मंजूरी दी।[114]  भारतीय चिकित्सा की फार्माकोपिया लेबोरेट्री और होम्योपैथिक फार्माकोपिया लेबोरेट्री के साथ इसका विलय किया जाएगा। इन दोनों केंद्रीय प्रयोगशालाओं को 1975 में गाजियाबाद में स्थापित किया गया था। विलय से पूर्व पीसीआईएमएंडएच आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन था। पुनर्गठन के बाद पीसीआईएमएंडएच आयुष दवाओं और फॉर्मूलेशंस के लिए मानकों का एक समान रूप से विकसित करने, दवाओं के स्टैंडर्डाजेशन वर्क के डुप्लिकेशन को रोकने और संसाधनों के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ावा देने का काम करेगा। 

 

महिला एवं बाल विकास

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

मातृत्व और शैशव से संबंधित मुद्दों की जांच के लिए टास्क फोर्स गठित

2020-21 के लिए केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री ने मातृत्व और शैशव से संबंधित मुद्दों पर टास्क फोर्स गठित करने का प्रस्ताव रखा था जोकि छह महीने में अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।[115]  इसके बाद केंद्र सरकार ने इन मुद्दों की जांच के लिए टास्क फोर्स बनाई।[116]  यह निम्नलिखित के साथ विवाह की उम्र और मातृत्व के बीच अंतर संबंध की भी जांच करेगी: (iमां और बच्चे का स्वास्थ्य, चिकित्सकीय कल्याण और पोषण की स्थिति, (ii) मुख्य मापदंड, जैसे शिशु मृत्यु दर, मातृत्व मृत्यु दर और बच्चों का लिंग अनुपात, तथा (iiiइस संबंध में स्वास्थ्य एवं पोषण से संबंधित अन्य प्रासंगिक मुद्दे। इसके अतिरिक्त वह महिलाओं में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उपाय सुझा सकती है। अपने अध्ययन के आधार पर टास्क फोर्स यह भी सलाह दे सकती है कि उसके सुझावों को लागू करने के लिए क्या कानूनी बदलाव किए जाएं। टास्क फोर्स की अध्यक्ष जया जेटली होंगी और यह अपनी रिपोर्ट 31 जुलाई, 2020 तक सौंप देंगी।

 

सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

नशा मुक्त भारत: वार्षिक कार्य योजना (2020-21) प्रारंभ

सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्रालय ने 2020-21 के लिए नशा मुक्त भारत: वार्षिक कार्य योजना की शुरुआत की। योजना देश के 272 सर्वाधिक प्रभावित जिलों में मादक पदार्थों के सेवन की समस्या पर केंद्रित है।[117]  योजना में खास तौर शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और स्कूलों में जागरूकता फैलाने से संबंधित कार्यक्रम शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त इसमें नशे के लती लोगों की पहचान करना और अस्पतालों तथा नशा मुक्ति केंद्रों में उपचार शामिल होगा। इस योजना को मंत्रालय और नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा लागू किया जाएगा।

 

युवा मामले और खेल

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

राज्य और जिला स्तर पर खेलो इंडिया केंद्र स्थापित

युवा मामले और खेल मंत्रालय प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सिलेंस (केआईएससीई) की स्थापना करेगा।[118]  ये एलीट और ओलंपिक स्तर के एथलीट्स को प्रशिक्षित करेंगे। 

आठ राज्यों में राज्य के स्वामित्व वाले खेल संगठनों की पहचान की गई है जिन्हें केआईएससीई में अपग्रेड किया जाएगा। इन राज्यों में कर्नाटकओडिशाकेरलतेलंगानाअरुणाचल प्रदेशमणिपुरमिजोरम और नागालैंड शामिल हैं। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश केआईएससीई चलाएंगेजबकि केंद्र सरकार सुविधाओं को अपग्रेड करने के लिए धन मुहैया कराएगी।

इसके अलावा मंत्रालय वित्त वर्ष 2020-21 में स्थापित होने वाले 100 केआईसी के साथ जिला स्तर पर 1,000 खेलो इंडिया सेंटर (केआईसी) स्थापित करेगा।[119]  मौजूदा स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के एक्सटेंशन सेंटरों को केआईसी में बदलने का विकल्प दिया जाएगा। इसके अलावाअपनी अकादमियों को स्थापित करने के लिए पूर्व चैंपियन की पहचान की जाएगी। प्रत्येक कोआईसी को कोचों के पारिश्रमिकउपकरणों की खरीदखेल किटऔर प्रतियोगिता और कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए अनुदान प्रदान किया जाएगा।

 

अंतरिक्ष

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

कैबिनेट ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सुधारों को मंजूरी दी   

केंद्रीय कैबिनेट ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूती देने के लिए कुछ सुधारों को मंजूरी दी।[120],[121]  इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर नामक स्वायत्त नोडल एजेंसी अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत स्थापित की जाएगीजो अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी उद्योग की गतिविधियों को अनुमति देने और रेगुलेट करने के लिए एक अलग वर्टिकल होगा। 

सेंटर इसरो से तकनीकी विशेषज्ञता के साथ नीतियों और एक अनुकूल रेगुलेटरी वातावरण के जरिए अंतरिक्ष क्षेत्र निजी उद्योगों को बढ़ावा देगा और उनका मार्गदर्शन करेगा। निजी उद्योग की आवश्यकताओं का आकलन करने और गतिविधियों के समन्वय के लिए तकनीकीकानूनीसुरक्षा और निगरानी के लिए इसके अपने स्वतंत्र निदेशालय होंगे। अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएलअंतरिक्ष सेवाओं के लिए सप्लाई के स्थान पर मांग बेस्ड मॉडल के आधार पर काम करेगा। एनएसआईएल इसरो की वाणिज्यिक शाखा हैजो वर्तमान में इसरो की लघु उपग्रह प्रौद्योगिकी को उद्योगों को ट्रांसफर करती है। लॉन्च वेहिकल, सेटेलाइट प्रोडक्शन, लॉन्च सर्विस और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं के क्षेत्र में इसरो जो काम करता है, उसे एनएसआईएल द्वारा किया जाएगा। यह उद्योग संघों के माध्यम से इन गतिविधियों को अंजाम देगा। इन सुधारों से इसरो को अनुसंधान और विकास के लिए अधिक समय और संसाधन मिलेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है। 

 

[1] Ministry of Health and Family Welfare website, last accessed on March 31, 2020, https://www.mohfw.gov.in/index.html.

[2] Order No40-3/2020-DM-I(A), Ministry of Home Affairs, March 24, 2020, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHAorder%20copy.pdf

[3] Order No40-3/2020-DM-I(A), Ministry of Home Affairs, June 29, 2020, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHAOrder_29062020.pdf.

[4] The Insolvency and Bankruptcy (AmendmentOrdinance, 2020, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/IBC.pdf

[6] 2Interest Subvention approved on prompt repayment of Shishu Loans under Pradhan Mantri MUDRA Yojana for a period of 12 months, Cabinet, Press Information Bureau, June 24, 2020.

[7] "COVID-19 – Regulatory Package", Notifications, Reserve Bank of India, May 23, 2020, https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=11902&Mode=0.

[8] Section 42(1of the Reserve Bank of India Act, 1934 Change in Minimum Daily Maintenance of the Cash Reserve Requirement, Notifications, Reserve Bank of India, June 26, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NT2605F809C57D5964AA38BBA3D126E91AF10.PDF.

[9] Section 24 of the Banking Regulation Act, 1949 – Maintenance of Statutory Liquidity Ratio (SLR) – Marginal Standing Facility (MSF)”, Notifications, Reserve Bank of India, June 26, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/259MSFE3EA811D8394E4DD8B6989A714CBCD466.PDF.

[10] Statement on Developmental and Regulatory Practices, Reserve Bank of India, Press Releases, March 27, 2020, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=49582.

[11] S.O2033(E), Gazette of India, Ministry of Finance, June 24, 2020, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220145.pdf.

[12] The Taxation and Other Laws (Relaxation of Certain ProvisionsOrdinance, 2020, Gazette of India, Ministry of Law and Justice, March 31, 2020, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/218979.pdf.

[13] G.S.R235(E), Gazette of India, Ministry of Finance, April 3, 2020, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/219000.pdf.

[14] G.S.R416(E), Gazette of India, Ministry of Finance, June 27, 2020, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220211.pdf.

[15] Notification No 53/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, March 24, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2053_0.pdf.

[16] Notification No 4/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, May 6, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%204%20dt%2006.05.2020%20Eng_0.pdf.

[17] Notification No08/2015-20,  Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 1, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/noti%2008%20eng_0.pdf.

[18] Notification No 59/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, April 4, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2059%20Final%20Eng_0.pdf.

[19] Notification No 09/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 10, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2009%20eng_0.pdf.

[20] Notification No 54/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, March 25, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/notification%2054_0.pdf

[21] Notification No 13/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 18 , 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2013%20Eng_0.pdf.

[22] Notification No 44/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, January 31 , 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2044_0.pdf.

[23] Notification No 6//2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, May 16, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Notification%20English%20Final_0.pdf.

[24] Notification No 14/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 22, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2014%20Eng%20ss_0.pdf.

[25] Scheme guidelines for PM Street Vendors AtmaNirbhar Nidhi, Ministry of Housing and Urban Affairs, http://mohua.gov.in/pm_svandhi/guidelines.pdf

[26] Scheme of Special Micro-Credit Facility launched for Street Vendors-Striving towards Atmanirbhar Bharat, Ministry of Housing and Urban Affairs, Press Information Bureau, June 19, 2020

[27] Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending Act, 2014, http://legislative.gov.in/sites/default/files/A2014-7.pdf.  

[28] Master Circular NoDBOD.No.BP.BC17/21.04.048/2009-10, Reserve Bank of India, July 1, 2009,

https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/39MCC010709_FULL.pdf.

[29] FNo7-1/2019-BP.III(Pt.)(371225), Department of Food and Public Distribution, June 30, 2020, https://dfpd.gov.in/LwB3AHIAaQB0AGUAcgBlAGEAZABkAGEAdABhAC8AUABvAHIAdABhAGwALwBOAGUAdwBzAC8A297_1_Extension_of_PMGKAY.pdf.

[30] PM announces extension of Pradhan Mantri Garib Kalyan Ann Yojana till November, Press Information Bureau, Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Distribution, June 30, 2020.

[31] “Massive employment generation-cum-rural public works creation campaign the Garib Kalyan Rojgar Abhiyaan launched by Prime Minister Shri Narendra Modi today, Ministry of Rural Development, Press Information Bureau, June 20, 2020.

[32] “Travel and Visa restrictions related to COVID-19, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, June 26, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130652663

[33] “Travel and Visa restrictions related to COVID-19, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, May 30, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130625797 

[34] “Management of airlines crew due to COVID-19 outbreak, Addendum to Circular No4/1/2020-IR dated 23.03.20, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, June 22, 2020,  https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130648509

[35] “Extension of validity of recurrent dangerous goods regulations training due to the COVID-19 pandemic, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, June 19, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130651660

[36] “Aeromedical Disposition of COVID-19, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, June 22, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130649317

[37] “Wildlife hazard management at airports, Director General of Civil Aviation, Ministry of Civil Aviation, June 8, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130636326

[39] Office Memorandum No25022/24/2020-F.V./F.I., Foreigners Division, Ministry of Home Affairs, June 22, http://164.100.117.97/WriteReadData/userfiles/Business%20Visa%20permission%2001.06.2020.pdf.

[40] F.NoAV.29017/5/2020-DT, Ministry of Civil Aviation, June 29, 2020, https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/MoCA_OM_dated_29_06_2020.pdf.

[41] Indian Railways to give full refund for all tickets booked on or prior to 14th April 2020 for regular time tabled trains, Press Information Bureau, Ministry of Railways, June 23, 2020.

[42] Measures to be taken by StatesUTsCities/Metro Rail Companies in view of COVID-19 for providing urban transport services, Press Information Bureau, Ministry of Housing and Urban Affairs, June 12, 2020.  

[43] Validity of motor vehicle documents further extended till 30th September, 2020, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, June 9, 2020.

[44] “Validity of expired Driving Licences and Vehicle Registration Extended Till June 30, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, March 31, 2020

[45]   S.O1964(E), Gazette of India, Ministry of Law and Justice, June 19, 2020,  http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220011.pdf.

[46] Guidelines on introduction of short term health insurance policies providing coverage for COVID-19 disease, Circular, Insurance Regulatory and Development Authority of India, June 23, 2020, https://www.irdai.gov.in/ADMINCMS/cms/whatsNew_Layout.aspx?page=PageNo4159&flag=1.

[48] General Circular No15/2020, Ministry of Corporate Affairs, April 8, 2020, http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/Circular14_08042020.pdf

[49] General Circular No22/2020, Ministry of Corporate Affairs, June 15, 2020http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/Circular22_15062020.pdf.

[50] General Circular No23/2020, Ministry of Corporate Affairs, June 17, 2020, http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/Circular23_17062020.pdf.

[51] “Cabinet approves Extension of tenure of the Commission constituted under Article 340 of the constitution to examine the issue of sub-categorization within Other Backward Classes in the Central List, Press Information Bureau, Cabinet, June 24, 2020

[52] Operational Recommendations for Tourism Service Providers, Ministry of Tourism, http://tourism.gov.in/sites/default/files/Operational%20Recommendations%20forTourism%20Service%20Providers.pdf.

[53] Operational Recommendations for Restaurants, Ministry of Tourism, http://tourism.gov.in/sites/default/files/SOP%20Restaurants1.pdf.

[54] Operational Recommendations for Hotels, Ministry of Tourism, http://tourism.gov.in/sites/default/files/SOP%20Hotels.pdf.

[55] Operational Recommendations for B&BHomestayFarmstay, Ministry of Tourism, http://tourism.gov.in/sites/default/files/Operational%20Recommendations%20for%20%20Homestay.pdf.

[56] Draft Environment Impact Assessment Notification 2020, Ministry of Environment, Forests and Climate Change, March 12, 2020, http://moef.gov.in/wp-content/uploads/2020/03/Draft_EIA2020.pdf.

[57] S.O1429(E), Ministry of Environment, Forests and Climate Change, May 8, 2020, http://moef.gov.in/wp-content/uploads/2020/05/EIA-2020_extn-of-period.pdf.

[58] Delhi HC extends public response deadline to draft EIA 2020, The Hindu, June 30, 2020, https://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/delhi-hc-extends-public-response-deadline-to-draft-eia-2020/article31951610.ece.

[59] Notification No 15/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 25, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Notification%2015%20English.pdf.

[60] “Developments in Indias Balance of Payments during the Fourth Quarter (January-Marchof 2019-20, Reserve Bank of India, June 30, 2020,  https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR256878A4C6211C9A47D6A9B09BC8100C57D1.PDF.

[62] "Framework for Regulatory Sandbox", Circulars, Securities and Exchange Board of India, June 5, 2020, https://www.sebi.gov.in/legal/circulars/jun-2020/framework-for-regulatory-sandbox_46778.html.

[63] Enabling Framework for Regulatory Sandbox, Reports, Reserve Bank of India, August 13, 2019, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PublicationReport/Pdfs/ENABLING79D8EBD31FED47A0BE21158C337123BF.PDF.

[64] Draft Pension Fund (Foreign InvestmentRules, 2020, Department of Financial Services, Ministry of Finance, June 19, 2020, https://financialservices.gov.in/sites/default/files/Draft%20Pension%20Fund%20%28Foreign%20Investment%29%20Rules%2C%202020.pdf.

[65] Consolidated FDI Policy, Department of Industrial Policy and Promotion, Ministry of Commerce and Industry, https://dipp.gov.in/sites/default/files/CFPC_2017_FINAL_RELEASED_28.8.17.pdf.

[66] Reserve Bank constitutes an Internal Working Group to review extant ownership guidelines and corporate structure for Indian private sector banks, Press Releases, Reserve Bank of India, June 12, 2020, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=49945.

[67] RBI announces creation of Payments Infrastructure Development Fund, Press Releases, Reserve Bank of India, June 5, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR2453983A1FE6D395422BB8A282B63C27FC09.PDF.

[68] Details of tier-wise classification of centres based on population, Master Circular on Branch Authorisation Census data 2011, Reserve Bank of India, September 1, 2016, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NT60319C925B21E045D9952EA3023925A8B9.PDF.

[70] The Farmers (Empowerment and ProtectionAgreement on Price Assurance and Farm Services Ordinance, 2020, https://www.prsindia.org/billtrack/farmers-empowerment-and-protection-agreement-price-assurance-and-farm-services-ordinance

[72] Minimum Support Prices (MSPfor Kharif Crops for marketing season 2020-21, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, June 1, 2020.

[73] Cabinet approves establishment of Animal Husbandry Infrastructure Development Fund, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, June 24, 2020.

[74] Presentation of details of 3rd Tranche by Union Finance & Corporate Affairs Minister SmtNirmala Sitharaman under Aatmanirbhar Bharat Abhiyaan to support Indian economy in fight against COVID-19, Press Information Bureau, Ministry of Finance, May 15, 2020.

[75] S.O1702(E), Notification, Ministry of Micro, Medium and Small Enterprises, The Gazette of India, June 1, 2020, https://msme.gov.in/sites/default/files/MSME_gazette_of_india_0.pdf.

[76] S.O2119(E), Notification, Ministry of Micro, Medium and Small Enterprises, The Gazette of India, June 26, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220191.pdf.

[77] Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises (MSMEslaunches another funding scheme to help the distressed MSME sector, Press Information Bureau, Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises, June 24, 2020.

[79] “Government approves setting up of an Empowered Group of Secretaries (EGoSand Project Development Cells (PDCsin Ministries/Departments for attracting investments in India, Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, June 3, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1629037

[80] G.S.R399(E), Gazette of India, Ministry of Corporate Affairs, June 23, 2020,  http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220133.pdf.

[81] “Government Bans 59 mobile apps which are prejudicial to sovereignty and integrity of India, defence of India, security of state and public order, Press Information Bureau, Ministry of Electronics and Information Technology, June 29, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1635206.

[82] Section 69A, The Information Technology Act, 2000, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/1999/3/A2000-21.pdf.

[83] India joins Global Partnership on Artificial Intelligence (GPAIas a founding member to support the responsible and human-centric development and use of AI, Press Information Bureau, Ministry of Electronics and Information Technology, June 15, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1631676. 

[84] Cabinet approves Production Linked Incentive Scheme for Large Scale Electronics Manufacturing, Union Cabinet, Press Information Bureau, March 21, 2020.

[85] Cabinet approves Scheme for Promotion of manufacturing of Electronic Components and Semiconductors, Union Cabinet, Press Information Bureau, March 21, 2020.

[86] “Cabinet approves Modified Electronics Manufacturing Clusters (EMC 2.0Scheme, Union Cabinet, Press Information Bureau, March 21, 2020.

[87] “Guidelines for the operation of Production Linked Incentive Scheme for Large Scale Electronics Manufacturing,   Ministry of Electronics and Information Technology, June 1, 2020, https://meity.gov.in/writereaddata/files/PLI-Guidelines-01062020.pdf.

[88] “Appraisal and Disbursement Guidelines for effective functioning of the scheme for promotion of manufacturing of electronic components and semiconductors (SPECS), Ministry of Electronics and Information Technology, June 1, 2020, https://meity.gov.in/writereaddata/files/SPECS-Guidelines-01062020.pdf.

[89] “Guidelines for implementation of Modified Electronics Manufacturing Clusters (EMC 2.0Scheme, Ministry of Electronics and Information Technology, June 1, 2020, https://meity.gov.in/writereaddata/files/EMC-2.0-Guidelines-01062020.pdf.

[90] The Electronics Manufacturing Cluster Scheme, Ministry of Electronics and Information Technology, November 7, 2012, https://meity.gov.in/writereaddata/files/Notification-EMC-Gazette.pdf.

[91] Ministry of Railways takes an important decision to ease procurement norms and improve ease of doing business.”, Press Information Bureau, Ministry of Railways, June 21, 2020

[93] Road Ministry issues advisory for implementing Rent a Motor Cab/Cycle Schemes, Ministry of Road Transport and Highways, June 1, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1628362.

[94] Rent a Cab Scheme, 1989, Ministry of Road Transport and Highways, http://transport.bih.nic.in/Docs/rent-a-cab.pdf.

[95] Rent a Motor Cycle Scheme, 1997, Ministry of Road Transport and Highways, https://himachal.nic.in/WriteReadData/l892s/3_l892s/the_rent_a_motor_cycle_scheme_1997-96609884.pdf.

[100] “Citizens with mild or medium colour blindness to also obtain Driving License now, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, June 26, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1634481.

[101] The Central Motor Vehicles (Fifth AmendmentRules, 2020, The Gazette of India, Ministry of Road Transport and Highways, June 24, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220141.pdf.

[102] MoHUA recommends Holistic Planning for Pedestrian Friendly Market Spaces in Consultation with Stake Holders, Press Information Bureau, Ministry of Housing and Urban Affairs, June 1, 2020

[103] F.No23011/79/2014-CPD (VolIII), Ministry of Coal, June 5, 2020, https://coal.nic.in/sites/upload_files/coal/files/curentnotices/Methodology.pdf.

[104] No 16/4/2020-M.VI, Ministry of Mines, June 3, 2020, https://mines.gov.in/writereaddata/UploadFile/order03062020.PDF.

[106] FNo47/1/2020-R&R, Ministry of Power, The Gazette of India, June 18, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220088.pdf

[107] FNo32/5/2020-SPV Division, Ministry of New and Renewable Energy, June 22, 2020, https://mnre.gov.in/img/documents/uploads/file_f-1593132038861.PDF.

[108] FNo20/222/2016-17-WTE, Ministry of New and Renewable Energy, June 17, 2020, https://mnre.gov.in/img/documents/uploads/file_f-1592568011984.pdf.

[109] Guideline Document on Uniform Framework for Extended Producers Responsibility (Under Plastic Waste Management Rules, 2016), Ministry of Environment, Forest and Climate Change, June 23, 2020, http://moef.gov.in/wp-content/uploads/2020/06/Final-Uniform-Framework-on-EPR-June2020-for-comments.pdf.

[110] Plastic Waste Management Rules, 2016, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, March 18, 2016, http://www.mppcb.nic.in/proc/Plastic%20Waste%20Management%20Rules,%202016%20English.pdf.

[111] Advisory for dealing with import of exotic live species in India and declaration of stock, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, Wildlife Division, http://environmentclearance.nic.in/writereaddata/om/30052020WildlifeAdvisorySpecies.pdf

[112] What is CITES, Website of Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora, last accessed on June 24, https://cites.org/eng/disc/what.php#:~:text=CITES%20(the%20Convention%20on%20International,does%20not%20threaten%20their%20survival..

[113] List of Contracting Parties, Website of Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora, last accessed on June 24, https://cites.org/eng/disc/parties/chronolo.php.

[114] Cabinet approves establishment of Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy (PCIM&Has Subordinate Office under Ministry of AYUSH, Press Information Bureau, Cabinet, June 3, 2020.

[115] Union Budget Speech, 2020-21, February 1, 2020, https://www.indiabudget.gov.in/doc/Budget_Speech.pdf.

[116] S.O1736(E), Gazette of India, Ministry of Women and Child Development, June 4, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/219718.pdf

[117] “Nasha Mukt BharatAnnual Action Plan (2020-21for 272 Most Affected Districts E-Launched on International Day against Drug Abuse & Illicit Trafficking Today, Press Information Bureau, Ministry of Social Justice and Empowerment, June 26, 2020

[118] “Sports Ministry to establish Khelo India State Centres of Excellence (KISCEto enhance India's Olympic performanceShriKiren Rijiju, Press Information Bureau, Ministry of Youth Affairs and Sports, June 17, 2020

[119] “Sports Ministry to establish 1000 district-level Khelo India centers to engage past champions in sports training, Press Information Bureau, Ministry of Youth Affairs and Sports, June 19, 2020.

[120] “Private sector participation in Space activities approved., Press Information Bureau, Department of Space, June 24, 2020.

[121] “Briefing by Secretary, DOS/Chairman, ISRO, June 25, 2020, Department of Space, Indian Space Research Organisationhttps://www.isro.gov.in/update/25-jun-2020/briefing-secretary-dos-chairman-isro.

 

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