अगस्त 2020

इस अंक की झलकियां

2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी 23.9% की दर पर सिकुड़ी

2020-21 की अप्रैल-जून की तिमाही में जीडीपी (स्थिर मूल्यों पर) 23.9% की दर पर सिकुड़ गई। कृषि को छोड़कर सभी क्षेत्रों में वृद्धि नकारात्मक रही और निर्माण तथा व्यापार एवं होटल क्षेत्र में सबसे अधिक गिरावट रही। 

केंद्र ने जीएसटी मुआवजे की कमी को पूरा करने के लिए राज्यों को उधारी के दो विकल्प दिए

2.3 लाख करोड़ रुपए की कमी को पूरा करने के लिए राज्य निम्नलिखित विकल्प चुन सकते हैं: (iजीएसटी संबंधित कमी (97,000 करोड़ रुपए) को पूरा करने के लिए उधार ले सकते हैं, और बाकी भविष्य में सेस कलेक्शन से देय होगा, या (iiपूरी कमी के लिए उधार लिया जाए।.

कुछ राहतों के साथ देशव्यापी लॉकडाउन 30 सितंबर तक बढ़ाया गया

जिला प्रशासन कंटेनमेंट जोन्स को चिन्हित कर सकते हैं जहां केवल अनिवार्य गतिविधियों की अनुमति होगी। शिक्षण संस्थान 30 सितंबर तक बंद रहेंगे, पर कुछ राहत दी जाएगी। मेट्रो सेवा 7 सितंबर से बहाल होगी। 

मॉनिटरी पॉलिसी रेपो और रिवर्स रेपो 4% और 3.35% पर अपरिवर्तनीय

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट क्रमशः 4% और 3.35% पर अपरिवर्तनीय हैं। एमपीसी ने मौद्रिक नीति के समायोजन के रुख को बरकरार रखने का फैसला किया है।

ड्राफ्ट स्वास्थ्य डेटा प्रबंधन नीति जारी

नीति निर्धारित करती है कि राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के लागू होने के बाद डेटा प्राइवेसी को कैसे बरकरार रखा जाएगा। इसका उद्देश्य एक ऐसी डिजिटल व्यक्तिगत और मेडिकल स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रणाली तैयार करना है जो आसानी से उपलब्ध हो।  

ड्राफ्ट रक्षा खरीद और निर्यात संवर्धन नीति 2020 जारी

नीति का उद्देश्य 2025 तक एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में 1,75,000 करोड़ रुपए के टर्नओवर का लक्ष्य हासिल करना है। 2025 तक घरेलू पूंजीगत खरीद को 1,40,000 करोड़ रुपए तक बढ़ाया जाएगा। इसके लिए एक अलग बजटीय मद बनाई जाएगी। 

आरबीआई ने कोविड-19 संबंधी स्ट्रेस के लिए रेज़ोल्यूशन फ्रेमवर्क बनाया

फ्रेमवर्क व्यक्तिगत एवं दूसरे लोन्स के लिए रेज़ोल्यूशन प्लान बनाने हेतु एक स्पेशल विंडो का प्रावधान करता है। इसे उधारकर्ता के खाते के एसेट वर्गीकरण में परिवर्तन के बिना लागू किया जा सकता है।

आधार एक्ट के अंतर्गत आधार सत्यापन के इस्तेमाल के लिए नियम अधिसूचित

नियमों में प्रावधान है कि केंद्र सरकार एंटिटीज़ को स्वैच्छिक आधार पर आधार आधारित सत्यापन की मांग करने की अनुमति दे सकती है, और ऐसा सुशासन प्रदान करने एवं लाभों की लीकेज को रोकने के उद्देश्य से किया जा सकता है।

स्ट्रेस्ड एमएसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम के लिए दिशानिर्देश

दिशानिर्देश निर्दिष्ट करते हैं कि स्ट्रेस्ड एमएसएमई के प्रमोटर को उनके स्टेक (इक्विटी और ऋण) के 15के बराबर या 75 लाख रुपए (जो भी कम होगा) क्रेडिट दिया जाएगा। यह राशि इक्विटी के रूप में एमएसएमई में डाली जाएगी। 

सर्वोच्च न्यायालय ने परीक्षाओं के संचालन के लिए यूजीसी दिशानिर्देशों की वैधता को बरकरार रखा

अदालत ने कहा कि राज्य परीक्षाओं के बिना फाइनल ईयर/सेमिस्टर के विद्यार्थियों को प्रमोट नहीं कर सकते। हालांकि अगर कोई राज्य परीक्षाएं संचालित नहीं कर सकता तो वह यूजीसी से तारीख आने बढ़ाने का अनुरोध कर सकता है।
 

पीपीपी मॉडल के अंतर्गत तीन हवाईअड्डों को लीज पर देने को कैबिनेट की मंजूरी

कैबिनेट ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी के अंतर्गत जयपुर, गुवाहाटी और तिरुअनंतपुरम हवाईअड्डों को लीज पर देने को मंजूरी दी है। नीलामी प्रक्रिया के जरिए अडानी इंटरप्राइज़ेज़ को 50 वर्षों के लिए लीज दी गई है। 

खनन क्षेत्र में प्रस्तावित सुधारों पर टिप्पणियां आमंत्रित

एमएमडीआर एक्ट, 1957 में कुछ संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं, जैसे: (iएंड यूज प्रतिबंधों को हटाना, (iiएक्सप्लोरेशन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना, और (iiiनॉन वर्किंग खदानों को दोबारा आबंटित करना, इत्यादि।
 

कोविड-19

31 अगस्त2020 तक भारत में कोविड-19 के 36,21,245 पुष्ट मामले थे।[1] इनमें 27,74,801 मरीजों का इलाज हो चुका है/उन्हें डिस्चार्ज किया जा चुका है और 64,469 की मृत्यु हुई है।1  देश और विभिन्न राज्यों में दैनिक मामलों की संख्या के लिए कृपया यहां देखें।  

केंद्र सरकार ने महामारी की रोकथाम के लिए अनेक नीतिगत फैसलों और इससे प्रभावित नागरिकों और व्यवसायों को मदद देने के वित्तीय उपायों की घोषणाएं की हैं। केंद्र और राज्यों द्वारा जारी मुख्य अधिसूचनाओं के विवरण के लिए कृपया यहां देखें। अगस्त 2020 में इस संबंध में मुख्य घोषणाएं इस प्रकार हैं।

लॉकडाउन 30 सितंबर तक बढ़ाया गयाअतिरिक्त राहत दी गई

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटी (एनडीएमए) ने मार्च में 21 दिन का देशव्यापी लॉकडाउन किया था।[2]  इसके बाद लॉकडाउन को सात बार बढ़ाया गया है। इस बार का लॉकडाउन 30 सितंबर2020 तक लागू है।[3] संशोधित दिशानिर्देशों में जिला अथॉरिटीज़ को इस बात की अनुमति दी गई है कि वे संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानदंडों के आधार पर कंटेनमेंट जोन्स में कुछ क्षेत्रों की हदबंदी करें। कंटेनमेंट जोन्स में लॉकडाउन जारी रहेगा। इन जोन्स में केवल मेडिकल इमरजेंसी और अनिवार्य वस्तुओं एवं सेवाओं की सप्लाई की अनुमति होगी।

कंटेनमेंट जोन्स के बाहर के क्षेत्रों में केवल पांच किस्म की गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा, और उनकी चरणबद्ध बहाली के लिए कुछ प्रावधान होंगे:    

  • सबसे पहले, शिक्षण संस्थान और कोचिंग संस्थान 30 सितंबर, 2020 तक बंद रहेंगे। हालांकि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी एसओपीज़ के आधार पर 21 सितंबर से राज्य(i) कंटेनमेंट जोन्स से बाहर के स्कूलों में 50% टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को ऑनलाइन टीचिंग या टेली-काउंसिलिंग संबंधी कार्यों के लिए स्कूल बुलाने की अनुमति दे सकते हैं, (ii) कंटेनमेंट जोन्स से बाहर के स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को टीचर्स के मार्गदर्शन के लिए स्वेच्छा से आने की अनुमति दे सकते हैं और उसमें माता-पिता की लिखित सहमति होनी चाहिए, और (iii) विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों जैसे राष्ट्रीय दक्षता प्रशिक्षण संस्थान में दक्षता या उद्यमिता के प्रशिक्षण की अनुमति दे सकते हैं। रिसर्च स्कॉलर्स (पीएचडी) तथा तकनीकी एवं प्रोफेशनल प्रोग्राम्स के पोस्टग्रैजुएट विद्यार्थी, जिन्हें लेबोरेट्री या एक्सपेरिमेंटल कार्यों की जरूरत है, उच्च शिक्षण संस्थानों को एक्सेस कर सकते हैं जिसका आकलन उच्च शिक्षा विभाग गृह मंत्रालय की सलाह से करेगा।  
     
  • दूसरा 7 सितंबर, 2020 से मेट्रो रेल को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की अनुमति होगी जोकि आवासन एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी एसओपी पर आधारित होगा।
     
  • तीसरा, 21 सितंबर, 2020 से 100 लोगों वाले सामाजिक, अकादमिक, राजनैतिक और अन्य बड़े जमावड़ों की अनुमति होगी और सोशल डिस्टेंसिंग के अनिवार्य नियम लागू होंगे। इस बीच शादियों और दाह संस्कारों के लिए क्रमशः 50 और 20 मेहमानों की मौजूदा सीमा लागू रहेगी।
     
  • चौथा, सिनेमा घर, स्विमिंग पूल, इंटरटेनमेंट पार्क्स थियेटर और ऐसी ही दूसरी जगहें बंद रहेंगी। हालांकि ओपन एयर थियेटर 21 सितंबर, 2020 से खुल सकते हैं।
     
  • पांचवां, अंतरराष्ट्रीय यात्रा सिर्फ गृह मंत्रालय की अनुमति से जा सकती हैं। ट्रेन, घरेलू हवाई यात्रा और व्यक्तियों की भारत आने और जाने की अंतरराष्ट्रीय गतिविधि को इस संबंध में जारी एसओपी द्वारा ही रेगुलेट किया जाएगा। 

राज्यों को केंद्र सरकार की पूर्व सलाह लिए बिना कंटेनमेंट जोन्स के बाहर स्थानीय लॉकडाउन करने की अनुमति नहीं है।3 इसके अतिरिक्त व्यक्तियों और वस्तुओं की राज्यों के भीतर या राज्यों के बीच की आवाजाही पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता और इसमें पड़ोसी देशों के साथ लैंड बॉर्डर ट्रेड (संधियों के आधार पर) के जरिए आने वाले व्यक्ति या वस्तुएं भी शामिल है।

दिशानिर्देशों में कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर कोविड-19 के प्रबंधन के लिए कुछ डायरेक्टिव्स अनिवार्य किए गए हैं। इन उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सार्वजनिक स्थलों और काम करने के स्थानों में फेस कवर को अनिवार्य रूप से पहननाऔर (ii) सभी कार्यस्थलों पर काम के अलग अलग घंटे।

आरबीआई ने लिक्विडिटी सपोर्ट के लिए अतिरिक्त उपायों की घोषणा की 

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कोविड-19 के कारण वित्तीय तनाव को कम करने के लिए वित्तीय बाजारों और व्यक्तियों को लिक्विडी सपोर्टे देने की घोषणा की है।[4]  इसके लिए आरबीआई ने जिन उपायों की घोषणा की है, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी), राष्ट्रीय आवासीय बैंक (एनएचबी) और एक्जिम बैंक जैसे वित्तीय संस्थानों के लिए 65,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त लिक्विडिटी फेसिलिटी।
     
  • लघु वित्त संस्थानों और दूसरे छोटे एनबीएफसीज़ को रीफाइनांस करने के लिए नाबार्ड को 5,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त विशेष लिक्विडिटी फेसिलिटी दी जाएगी। यह फेसिलिटी आरबीआई के रेपो रेट पर एक वर्ष की अवधि के लिए उपलब्ध होगी।   
     
  • सोने की जूलरी पर लोन की राशि की सीमा 75से बढ़ाकर 90की गई है। यह राहत 31 मार्च, 2021 तक उपलब्ध होगी। 

कोविड-19 संबंधी स्ट्रेस के लिए रेज़ोल्यूशन फ्रेमवर्क

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

आरबीआई ने कोविड संबंधी स्ट्रेस का सामना करने वाले उधारकर्ताओं के लिए रेज़ोल्यूशन फ्रेमवर्क जारी किया है।[5]  जून 2019 में आरबीआई ने स्ट्रेस्ड एसेट्स के रेज़ोल्यूशन के लिए प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क के अंतर्गत उधारकर्ताओं के डीफॉल्ट्स को हल करने हेतु स्पेशल विंडो जारी किया था।[6]  2019 के फ्रेमवर्क के अंतर्गत उधारकर्ताओं के रेज़ोल्यूशन प्लान में एसेट क्लासिफिकेशन डाउनग्रेड शामिल है (बशर्ते उधारकर्ता के ओनरशिप में कोई परिवर्तन है)। 

उल्लेखनीय है कि कोविड-19 के कारण फाइनांशियल स्ट्रेस से कंपनियों की लंबे समय की वायबिलिटी पर असर हो सकता है, इसलिए आरबीआई ने एक विशेष रेज़ोल्यूशन फ्रेमवर्क तैयार किया है। इसकी मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल है:

  • पात्रता: स्पेशल फ्रेमवर्क के अंतर्गत उधारकर्ताओं के स्टैंडर्ड एकाउंट्स (जोकि नॉन परफॉर्मिंग एसेट नहीं हैं, या ऐसे लोन और एडवांस नहीं हैं जिनका रीपेमेंट पिछले 90 दिनों में नहीं किया गया है) रेज़ोल्यूशन के लिए पात्र होंगे। ये एकाउंट्स 1 मार्च, 2020 को 30 दिनों से अधिक समय से डीफॉल्ट में नहीं होने चाहिए और उन्हें रेज़ोल्यूशन प्लान के आमंत्रण की तारीख तक स्टैंडर्ड बने रहना चाहिए। एमएसएमई के लोन्स (25 करोड़ रुपए से कम), कृषि और ग्रामीण विकास के संस्थागत ऋण, वित्तीय सेवा प्रदाता और केंद्र एवं राज्य सरकार इस फ्रेमवर्क के अंतर्गत रेज़ोल्यूशन के लिए पात्र नहीं हैं।
     
  • पर्सनल लोन्स के लिए रेज़ोल्यूशन: रेज़ोल्यूशन प्लान में भुगतान को रीशेड्यूल करना, अतिरिक्त क्रेडिट की मंजूरी (जमा ब्याज के लिए) और भुगतान पर मोहलत (मोराटोरियम) देना शामिल हो सकता है। मोराटोरियम किसी निर्दिष्ट लेनदेन पर भुगतान को टालने को कानूनन अधिकृत करता है। भुगतान पर मोराटोरियम अधिकतम दो वर्षों के लिए लागू हो सकता है। रेज़ोल्यूशन को 31 दिसंबर, 2020 से पहले लागू किया जाना चाहिए और इसे 90 दिनों में पूरा होना चाहिए। अगर रेज़ोल्यूशन प्लान को इस फ्रेमवर्क के अंतर्गत लागू किया जाता है तो स्टैंडर्ड्स एकाउंट्स का एसेट वर्गीकरण बहाल होगा। प्लान के लागू होने के बाद डीफॉल्ट से एसेट क्लासिफिकेशन डाउनग्रेड हो जाएगा। 
     
  • दूसरे एक्सपोजर्स के लिए रेज़ोल्यूशन: रेज़ोल्यूशन प्लान में मौजूदा ऋण पर दोबारा बातचीत किए बिना अतिरिक्त क्रेडिट की मंजूरी शामिल हो सकती है। यह भुगतान मोराटोरियम के साथ या उसके बिना, लोन के बचे हुए समय को दो वर्ष की अवधि तक के लिए बढ़ा सकता है। रेज़ोल्यूशन को 31 दिसंबर, 2020 से पहले लागू होना चाहिए और उसे 180 दिनों के भीतर पूरा होना चाहिए। अगर रेज़ोल्यूशन प्लान को इस फ्रेमवर्क के अंतर्गत लागू किया जाता है तो स्टैंडर्ड एकाउंट्स का एसेट क्लासिफिकेशन बरकरार रहेगा। रेज़ोल्यूशन प्लान के लागू होने के बाद डीफॉल्ट पर 30 दिनों का रिव्यू पीरियड चालू हो जाएगा- हालांकि एसेट क्लासिफिकेशन में बदलाव नहीं होगा। अगर रिव्यू पीरियड के अंत में उधारकर्ता किसी भी ऋणदाता के साथ डीफॉल्ट में रहता है तो एसेट क्लासिफिकेशन डाउनग्रेड हो जाएगा।
     
  • एक्सपर्ट कमिटी का गठन: आरबीआई ने रेज़ोल्यूशन फ्रेमवर्क से संबंधित एक एक्सपर्ट कमिटी का गठन किया जिसके चेयरमैन के.वी.कामत हैं।[7] कमिटी नॉन पर्सनल लोन्स के लिए रेज़ोल्यूशन प्लान बनाने और 1,500 करोड़ रुपए और उससे अधिक के एक्सपोज़र प्लान की समीक्षा के लिए वित्तीय मानदंडों के उपयोग का सुझाव देगी।
     

एमएसएमईज़ के लिए सबऑर्डिनेट ऋण हेतु क्रेडिट गारंटी योजना के दिशानिर्देश जारी

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने स्ट्रेस्ड एमएसएमईज़ के लिए सबऑर्डिनेट ऋण हेतु क्रेडिट गारंटी योजना के दिशानिर्देश जारी किए हैं।[8] इस योजना की घोषणा मई 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत की गई थी और इसे जून 2020 में शुरू किया गया।[9],[10] इसका उद्देश्य स्ट्रेस्ड एमएसएमईज़ के प्रमोटर्स को व्यक्तिगत लोन देना है। इस क्रेडिट से एंटिटी में इक्विटी डाली जाएगी। दिशानिर्देशों में निम्नलिखित प्रावधान हैं:

  • गारंटी कवर: एमएसएमई एंटिटी के प्रमोटर को क्रेडिट (पर्सनल लोन) उनकी हिस्सेदारी (इक्विटी और ऋण) के 15% या 75 लाख रुपए के बराबर दिया जाएगा (इनमें से जो भी कम हो)। गारंटी कवरेज का 90% योजना से और शेष 10% संबंधित प्रमोटर से आएगा। उन्हें इस राशि को इक्विटी के रूप में एमएसएमई एंटिटी में डालना होगा। गारंटी कवर किसी भी मौजूदा स्वीकृत ऋण के ऊपर होगा।
     
  • पात्र उधारकर्ता: इस योजना के अंतर्गत पात्र उधारकर्ता वह एमएसएमईज़ (ऐसे एमएसएमईज़ के प्रमोटर) होंगे जो 30 अप्रैल, 2020 को स्ट्रेस में हों (जहां राशि 60 दिनों तक अधिक समय तक देय हो) और लेंडिंग संस्थानों (अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक) के मूल्यांकन के अनुसार कमर्शियल रूप से वायबल हों। योजना के लिए धोखाधड़ी वाले खातों और जान बूझकर डिफॉल्ट करने वालों पर विचार नहीं किया जाएगा।
     
  • योजना की अवधि: योजना निम्नलिखित से अधिकतम 10 वर्ष की अवधि तक लागू रहेगी: गारंटी का लाभ उठाने वाली तारीख या 31 मार्च, 2021 तक (इनमें से जो भी पहले हो) या जब तक कि गारंटी राशि में 20,000 करोड़ रुपए की राशि मंजूर नहीं हो जाती। 
     
  • क्रेडिट की अवधिचुकौती के लिए अधिकतम अवधि 10 वर्ष होगी। मूलधन के भुगतान पर वर्ष (अधिकतम) का मोराटोरियम होगा (7वें वर्ष तककेवल ब्याज का भुगतान किया जाएगा)। जैसा कि पहले के दिशानिर्देशों में आरबीआई ने निर्दिष्ट किया गया थाएमएसएमज़ी को ऋणों पर ब्याज दर एक बाहरी बेंचमार्क तिथि के अनुसार निर्धारित की जाएगी।[11],[12]  

इस योजना का संचालन सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट के माध्यम से किया जाएगा। एमएसएमई मंत्रालय योजना के संचालन के लिए कोष को 4,000 करोड़ रुपए का प्रारंभिक कोष प्रदान करेगा।

पीपीई, मास्क्स और वेंटिलेटर्स के लिए निर्यात नीति में संशोधन किया गया 

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई), मास्क्स और वेंटिलेटर्स की निर्यात नीति में संशोधन किए।[13],[14]  जनवरी में मेडिकल कवरऑल्स और मास्क्स सहित पीपीई के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था।[15]  जुलाई में पीपीई और मास्क्स पर इस प्रतिबंध को आंशिक रूप से हटाया गया।[16],[17],[18] मार्च में वेंटिलेटर्स और ब्रीदिंग डिवाइसेज़ का निर्यात प्रतिबंधित और सीमित था।[19]  

हाल की अधिसूचना के अनुसार, पीपीई मेडिकल कवरऑल्स, एन 95 को छोड़कर सभी मास्क्स और वेंटिलेटर्स को मुक्त रूप से निर्यात किया जा सकता है। 

कुछ योजनाओं के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एसओपीज़ जारी

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

कोविड-19 के अंतर्गत गृह मामलों के मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा को रद्द कर दिया था।[20]  हालांकि वंदे भारत मिशन के अंतर्गत विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की वापसी के कुछ अपवाद थे।[21]  इसके अतिरिक्त नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कुछ देशों (जैसे यूएसए और फ्रांस) के साथ एयर ट्रांसपोर्ट बबल्स का प्रबंध किया था जिसमें पारस्परिक आधार पर सीमित कमर्शियल यात्री सेवाओं की अनुमति दी गई थी।[22] अब मंत्रालय ने इन प्रबंधों के अंतर्गत गैर अनुसूचित कमर्शियल उड़ानों पर अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल्स (एसओपीज़) जारी किए हैं।[23]  

एसओपीज़ के अनुसार, इनबाउंड फ्लाइट्स के लिए: (i) गृह मामलों का मंत्रालय पात्र व्यक्तियों की श्रेणी तय करेगा और जरूरी मामलों जैसे नौकरी से निकाले गए प्रवासी श्रमिकों और मेडिकल इमरजेंसी वाले लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी, (iiगैर अधिसूचित कमर्शियल उड़ानों के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय सोप्स जारी करेगा और जहाजों के लिए सैन्य मामलों का मंत्रालय या शिपिंग मंत्रालय सोप्स जारी करेगा, और उनके आधार पर यात्रा का प्रबंध किया जाएगा, और (iiiवंदे भारत के अंतर्गत यात्रा की इच्छा रखने वाले लोगों को उन देशों में भारतीय मिशन्स के साथ खुद को रजिस्टर करना होगा, जहां वे फंसे हुए हैं।

आउट-बाउंड्स फ्लाइट्स के लिए: (iगृह मामलों का मंत्रालय पात्र व्यक्तियों की श्रेणियों पर फैसला लेगा, (iiनागरिक उड्डयन मंत्रालय अपनी वेबसाइट पर यात्रा के पात्र व्यक्तियों की श्रेणियों की सूची प्रकाशित करेगा, (iiiनागरिक उड्डयन मंत्रालय की अनुमति से गैर अनुसूचित कमर्शियल उड़ानों पर यात्रा की व्यवस्था की जाएगी और (ivविदेशों में जहाजों पर काम करने के इच्छुक भारतीय सीफेयरर्स/क्रू नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा अनुमत गैर अधिसूचित कमर्शियल उड़ानों से या शिपिंग मंत्रालय द्वारा स्वीकृत नियोक्ता प्रबंधित उड़ानों से यात्रा कर सकते हैं।

इन प्रबंधों के अंतर्गत यात्रियों को यात्रा खर्चा उठाना होगा। 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय आगमन के लिए दिशानिर्देश जारी किए

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय आगमनों के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं जोकि 8 अगस्त, 2020 से प्रभावी हैं।[24]  शुरुआती दिशानिर्देश मई 2020 को जारी किए गए थे।[25]  संशोधित दिशानिर्देशों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • यात्रा की योजना: सभी यात्रियों को अधिसूचित यात्रा से कम से कम 72 घंटे पहले एक ऑनलाइन सेल्फ डेक्लरेशन फॉर्म जमा कराना होगा। उन्हें 14 दिनों के अनिवार्य क्वारंटाइन के लिए एक ऑनलाइन अंडरटेकिंग देनी होगी (जिसमें संस्थागत क्वारंटाइन के सात दिन और घरेलू क्वारंटाइन के सात दिन शामिल हैं)। उन्हें मानव संकट (जैसे गर्भावस्थापरिवार में मृत्यु और 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ माता-पिता) जैसे कारणों के चलते संस्थागत क्वारंटाइन से छूट दी जा सकती है। इस छूट के लिए (iबोर्डिंग से कम से कम 72 घंटे पहले आवेदन करना होगा, या (ii) आगमन पर नेगेटिव रियल टाइम पोलीमरेस चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) रिपोर्ट सौंपनी होगी (ऑनलाइन भी अपलोड करनी होगी) जोकि यात्रा शुरू करने से 96 घंटे पहले किया गया हो।
     
  • बोर्डिंग और यात्राकेवल लक्षणरहित यात्रियों को थर्मल स्क्रीनिंग के बाद विमान या जहाज में चढ़ने की अनुमति होगी। ऐसे ही प्रोटोकॉल भू सीमा से आने वाले यात्रियों पर भी लागू होंगे।
     
  • आगमनआगमन पर सभी यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग होगी। लक्षण वाले व्यक्तियों को तुरंत आइसोलेट कर दिया जाएगा और संबंधित प्रोटोकॉल के हिसाब से स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जाएगा। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद यात्रियों को न्यूनतम सात दिनों के लिए संस्थागत क्वारंटाइन केंद्र ले जाया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से आने वाले यात्रियों की घरेलू हवाई यात्रा के लिए दिशानिर्देश जारी 

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से आने वाले यात्रियों की घरेलू हवाई यात्रा के लिए दिशानिर्देश जारी किए।[26]  इन यात्रियों को घरेलू उड़ानों से यात्रा की अनुमति होगी, अगर वे: (iहवाई अड्डे पर स्वास्थ्य अधिकारियों को सेल्फ डेक्लरेशन फॉर्म सौंपेंगे, (iiअनिवार्य थर्मल स्क्रीनिंग पूरी करेंगे, और (iii) उन्हें उस राज्य में संस्थागत क्वारंटाइन से छूट दी गई है जहां स्थित हवाई अड्डे पर उन्होने सबसे पहले लैंडिंग की है। यह छूट नेगेटिव आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट सौंपने के बाद राज्य प्रशासन से हासिल की जा सकती है। यह टेस्ट यात्रा शुरू करने से 96 घंटे पहले किया जाना चाहिए। दिशानिर्देशों को पायलट आधार पर लागू किया जाएगा और भविष्य में समीक्षा का विषय बनाया जाएगा।

घरेलू उड़ानों में मील सर्विस और इन फ्लाइट इंटरटेनमेंट के लिए दिशानिर्देश जारी 

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने घरेलू हवाई यात्रा के लिए दिशानिर्देशों में संशोधन किए हैं।[27]  संशोधनों में एयरलाइन्स के ऑन बोर्ड यात्रियों को मील सर्विस को बहाल करने की अनुमति दी गई है। मील्स (बेवरेज सहित) डिस्पोजेबल यूनिट्स में प्री-पैक्ड होंगे। सभी श्रेणियों में एयरलाइन डिस्पोजेबल ट्रे और क्रॉकरी का इस्तेमाल करेंगी। रोटेबल्स को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए अच्छी तरह से साफ और डिसइंफेक्ट किया जाना चाहिए। रोटेबल्स हवाई उड़ानों में यात्रियों की सर्विंग में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं होती हैं (जैसे सर्विंग ट्रे)। क्रू से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह मील सर्विस के बाद इस्तेमाल हुए डिस्पोजेबल्स और रोटेबल्स को फेंक देगा। क्रू से यह अपेक्षा भी जाएगी कि वह हर मील सर्विस के बाद ग्लव्स का नया सेट इस्तेमाल करेगा। 

वर्तमान में किसी यात्री (स्वास्थ्य समस्याओं वाले यात्रियों को छोड़कर) को उड़ानों में भोजन करने की अनुमति नहीं है। हालांकि उड़ान के दौरान उनकी सीटों पर पानी उपलब्ध कराया जाता है। 

संशोधनों में कुछ शर्तों पर इन-फ्लाइट इंटरटेनमेंट के इस्तेमाल की अनुमति है। ये शर्तें इस प्रकार हैं:

  • हर सीट पर इन-फ्लाइट इंटरटेनमेंट यूनिट होनी चाहिए। इन-फ्लाइट इंटरटेनमेंट का अर्थ है, उड़ान के दौरान यात्रियों को उपलब्ध होने वाली मनोरंजक सेवाएं। इन सेवाओं में फिल्में, गाने और समाचार शामिल हैं। इन यूनिट्स को बोर्डिंग से पहले डिसइंफेक्टेड होना चाहिए।
     
  • यात्रियों को डिस्पोजेबल ईयरफोन्स, या साफ और डिसइंफेक्टेड ईयरफोन्स दिए जाने चाहिए। 
     
  • फ्लाइट के बाद सभी पैसेंजर टचप्वाइंट्स को साफ और डिसइंफेक्ट किया जाना चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय ने यूजीसी के दिशानिर्देशों को बहाल रखा जिसमे फाइनल ईयर की परीक्षाओं को अनिवार्य किया गया था

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

सर्वोच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के उन दिशानिर्देशों की वैधता को बरकरार रखा है जिसमें यह कहा गया था कि विश्वविद्यालयों को सितंबर 2020 के अंत तक विद्यार्थियों के लिए फाइनल सेमिस्टर/ईयर की परीक्षाओं को पूरा करना होगा।[28]  हालांकि अदालत ने कहा कि अगर राज्य आपदा प्रबंधन अथॉरिटी (एसडीएमए) यह तय करती है कि कोविड-19 के चलते मौजूदा स्थितियों के मद्देनजर परीक्षाओं को लंबित किया जाना चाहिए तो एसडीएमए का फैसला यूजीसी के दिशानिर्देशों पर हावी रहेगा।

परीक्षाओं के आयोजन पर यूजीसी के दिशानिर्देश (जुलाई 2020 को जारी) निर्दिष्ट करते हैं कि विश्वविद्यालयों को सितंबर 2020 के अंत तक परीक्षाएं पूरी करनी होंगी।[29] वे ऑफलाइन, ऑनलाइन, ब्लेंडेड (ऑनलाइन+ऑफलाइन) मोड में परीक्षाएं ले सकते हैं। यह फैसला दिया गया कि परीक्षाओं के जरिए फाइनल ईयर या फाइनल सेमिस्टर के स्टूडेंट्स का अनिवार्य मूल्यांकन किया जाना चाहिए, पर सोशल डिस्टेंसिंग के प्रोटोकॉल को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इंटरमीडिएट सेमिस्टर/ईयर के विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय उनकी तैयारी के स्तर, निवास की स्थिति, महामारी के प्रकोप इत्यादि का आकलन करके परीक्षाएं करा सकते हैं। अगर कोविड-19 के मद्देनजर स्थिति सामान्य नहीं लगती तो आंतरिक मूल्यांकन और पिछले सेमिस्टर के अंकों के आधार पर इंटरमीडिएट सेमिस्टर के विद्यार्थियों की ग्रेडिंग की जा सकती है।  

अदालत ने कहा कि राज्य एडवाइजरी या गैर वैधानिक के तौर पर यूजीसी के दिशानिर्देश को अनदेखा नहीं कर सकते। राज्य या विश्वविद्यालय परीक्षाओं को संचालित किए बिना अंतिम वर्ष/सेमेस्टर में विद्यार्थियों को प्रमोट नहीं कर सकते। हालांकि न्यायालय ने कहा कि एसडीएमए और राज्य सरकारें मानव जीवन को बचाने के लिए आपदा की रोकथाम और शमन के लिए उपाय कर सकती हैं। इसलिए राज्य सरकार का कोई भी विपरीत निर्णय (परीक्षा को स्थगित करने के लिए) 30 सितंबर, 2020 तक यूजीसी की परीक्षाओं को पूरा करने के निर्देश पर हावी हो सकता है। न्यायालय ने कहा कि कोई भी राज्य जो यह तय करता है कि 30 सितंबर, 2020 तक परीक्षाएं संचालित करना संभव नहीं हैइस समय सीमा को बढ़ाने के लिए यूजीसी से संपर्क कर सकता है।

एमसीए ने मेडिकल अनुसंधान पर व्यय की अनुमति देने के लिए सीएसआर नियमों में संशोधन किए 

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनी (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी नीति) नियम, 2014 में संशोधन करके कंपनी (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी नीति) नियम, 2020 जारी किए।[30] 2014 के नियमों के अनुसार, कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) नीति का अर्थ कंपनी के ऐसे कार्यक्रम हैं जो उसके सामान्य व्यापार के अतिरिक्त निर्दिष्ट गतिविधियां होती हैं।[31] इनमें जिन गतिविधियों को शामिल किया जा सकता है, वे हैं: (i) शिक्षा को बढ़ावा देना, (ii) लैंगिक समानता को बढ़ावा देना, और (iii) एचआईवी, एड्स, और दूसरी बीमारियों से मुकाबला।[32]  

पात्र सीएसआर नीतियों की सूची में मार्च 2020 के बाद से दो बार संशोधन किए गए हैं। इस सूची में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (पीएम केयर्स) में योगदान, और (ii) विज्ञान, तकनीक और मेडिसिन के क्षेत्र में इन्क्यूबेटर्स या अनुसंधान परियोजनाओं में योगदान (केंद्र सरकार, राज्य सरकार, किसी अन्य एजेंसी और पब्लिक फंडेड विश्वविद्यालयों से वित्त पोषित)।[33],[34]

2020 के नियम सीएसआर नीति के कवरेज में संशोधन करते हैं ताकि इसमें निम्नलिखित को शामिल किया जा सके: (i) सामान्य व्यवसाय के दौरान नई वैक्सीन, दवाओं और मेडिकल उपकरणों का विकास और उनका अनुसंधान, और (ii) 2020-21 से 2022-23 के दौरान तीन वित्तीय वर्षों में कोविड-19 से संबंधित अनुसंधान और विकास संबंधी गतिविधियां। इन अनुसंधानों को केंद्र या राज्य सरकार या निर्दिष्ट सार्वजनिक संस्थानों के सहयोग से संचालित किया जाना चाहिए।

मोटर वाहन दस्तावेजों की वैधता दिसंबर 2020 तक बढ़ाई गई

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन एक्ट, 1988 और केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के अंतर्गत विभिन्न दस्तावेजों की वैधता की समय अवधि बढ़ाई है।[35] जिन दस्तावेजों की वैधता 1 फरवरी, 2020 को समाप्त हो चुकी है या 31 दिसंबर, 2020 को समाप्त होने वाली है, और लॉकडाउन के कारण जिन्हें वैधता नहीं दी जा सकी है, उन्हें 31 दिसंबर, 2020 तक वैध माना जाएगा। इनमें परमिट्स, लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन, फिटनेस और दूसरे दस्तावेज शामिल हैं। इससे पहले इन दस्तावेजों की वैधता की अवधि 30 सितंबर, 2020 की गई थी।  

शिपिंग मंत्रलय ने क्रूज़ शिप्स के लिए पोर्ट टैरिफ दर घटाईं

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

शिपिंग मंत्रालय ने क्रूज़ शिप्स की टैरिफ दरों को रैशनलाइज किया है।[36] मंत्रालय का अनुमान है कि इससे पोर्ट के शुल्क में 60से 70की गिरावट होगी। इन संशोधनों से क्रूज़ शिपिंग के कारोबार को मदद मिलेगी जिस पर कोविड-19 महामारी के कारण प्रतिकूल असर पड़ा है। रैशनलाइज्ड टैरिफ एक साल के लिए लागू रहेगा जिसकी शुरुआत अगस्त 2020 से हुई है। रैशनलाइज्ड टैरिफ इस प्रकार हैं:

  • क्रूज़ शिप्स के लिए पोर्ट के शुल्क को पहले 12 घंटे स्टे (निर्धारित दर) और $5 प्रति पैसेंजर (हेड टैक्स) के लिए $0.35 प्रति ग्रॉस रजिस्टर्ड टनेज (जीआरटी) से कम करके $0.085 प्रति ग्रॉस रजिस्टर्ड टनेज (जीआरटी) कर दिया गया है। पोर्ट अन्य किसी प्रकार की दर नहीं वसूलेगा, जैसे बर्थ हायर, पोर्ट ड्यूजड, पायलटेज और पैसेंजर फी, इत्यादि।
     
  • 12 घंटे से अधिक के स्टे के लिए क्रूज़ शिप्स पर निर्धारित चार्ज अनुसूचित दरों के अनुसार देय बर्थ हायर चार्ज के बराबर होगा (क्रूज़ शिप्स के लिए लागू 40छूट के साथ)।
     
  • इसके अतिरिक्त जो क्रूज़ शिप्स (i1-50 कॉल्स (प्रति वर्ष) करेंगी, उन्हें 10%(ii51-100 कॉल्स करेंगी, उन्हें 20%, और (iii) 100 से अधिक कॉल्स करेंगी, उन्हें 30% की छूट मिलेगी। 

प्रयोक्ता की अवस्था की जांच के लिए आरोग्य सेतु ऐप में ओपन एपीआई सर्विस शुरू 

Saket Surya (saket@prsindia.org)

आरोग्य सेतु ऐप के अंतर्गत ओपन एपीआई सर्विस को शुरू किया गया है ताकि संगठन ऐप के प्रयोक्ताओं की अवस्था की जांच कर सकें और उन्हें अपने वर्क फ्रॉम होम फीचर्स में शामिल कर सकें।[37] आरोग्य सेतु केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई मोबाइल ऐप-बेस्ड टेक्नोलॉजी है जो किसी व्यक्ति के लिए कोविड-19 संक्रमण के जोखिम को निर्धारित करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग का इस्तेमाल करती है। ओपन एपीआई सर्विस सार्वजनिक स्तर पर उपलब्ध एप्लिकेशन प्रोग्राम इंटरफेस है जोकि किसी सॉफ्टवेयर को प्रोग्रामैटिक एक्सेस प्रदान करता है। इसके जरिए दो सॉफ्टवेयर परस्पर इंटरैक्ट कर सकते हैं।

ओपन एपीआई को 50 से अधिक कर्मचारियों वाले संगठन और बिजनेस एंटिटी ही इस्तेमाल कर सकते हैं। वे रियल टाइम में आरोग्य सेतु एप्लिकेशन से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही अपने कर्मचारियों और ऐप के उन प्रयोक्ताओं के स्वास्थ्य की दशा की जानकारी ले सकते हैं जिन्होंने अपनी दशा को संगठन के साथ साझा करने के लिए सहमति जताई है। ओपन एपीआई सर्विस का इस्तेमाल करने वाली एंटिटीज़ के साथ सिर्फ व्यक्ति का नाम और उसकी आरोग्य सेतु अवस्था को साझा किया जाएगा। 

मीडिया प्रोडक्शन के लिए कोविड-19 महामारी संबंधी सोप्स जारी  

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मीडिया प्रोडक्शन के लिए कोविड-19 की रोकथाम हेतु दिशानिर्देश सिद्धांत और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (सोप्स) जारी किए हैं।[38]  राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपने मूल्यांकन के आधार पर अतिरिक्त उपायों को प्रस्तावित कर सकते हैं। सोप्स में निम्नलिखित प्रावधान हैं

  • प्रोडक्शन क्रू को कम से कम करने के उपाय किए जाने चाहिए। जहां तक संभव हो छह फीट की फिजिकल डिस्टेंसिंग होनी चाहिए जिसमें शूट लोकेशंस, साउंड रिकॉर्डिंग स्टूडियो शामिल हैं। सेट्स पर विजिटर्स की अनुमति नहीं होगी। सभी शूट लोकेशंस पर एंट्री और एक्जिट प्वाइंट तय होंगे।
     
  • क्रू में एक निर्दिष्ट कोविड समन्वक नामित किया जाएगा जोकि निम्नलिखित कार्य करेगा: (iवर्कप्लेस वाले स्थान पर जोन (रेड/ऑरेंज/ग्रीन) का रिकॉर्ड रखना, (iiयह सुनिश्चित करना कि हर व्यक्ति ने अपने फोन पर आरोग्य सेतु इंस्टॉल किया है, (iiiकलाकारों और क्रू की मेडिकल हिस्ट्री, ट्रैवल हिस्ट्री और स्वास्थ्य का रिकॉर्ड रखना, (ivकोविड-19 के लक्षण दर्शाने वाले सदस्यों को आइसोलेट करने के लिए क्वारंटाइन क्षेत्रों को निर्धारित करना, और (vसैनिटेशन के प्रोटोकॉल्स की निगरानी करना। 
     
  • कास्ट और क्रू के लिए फेस कवर या मास्क लगाना अनिवार्य होगा, सिर्फ कैमरे के सामने रहने वाले कलाकारों को छोड़कर। कॉलर माइक्स को शेयर नहीं किया जाएगा। कंटेनमेंट जोन्स में मीडिया प्रोडक्शन गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। 

कैबिनेट ने डिस्कॉम्स के लिए वर्किंग कैपिटल लोन्स की सीमा में राहत दी

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन द्वारा राज्यों के स्वामित्व वाली वितरण कंपनियों को दिए गए वर्किंग कैपिटल लोन्स की सीमा में राहत को मंजूरी दी है।[39]  यह राहत वन टाइम है यानी उदय योजना द्वारा दी गई सीमा, यानी पिछले साल के राजस्व के 25% पर राहत दी गई है। उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) वर्किंग कैपिटल लोन को डिस्कॉम के पिछले वर्ष के राजस्व के 25% पर सीमित करता है। इससे बिजली क्षेत्र को लिक्विडिटी मिलेगी जोकि कोविड-19 के कारण वित्तीय संकट से जूझ रहा है। 

अक्षय ऊर्जा प्रॉजेक्ट्स की अनुसूचित कमीशनिंग की तारीख बढ़ाई गई

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने अक्षय ऊर्जा (आरई) प्रॉजेक्ट्स की अनुसूचित कमीशनिंग तिथियों में पांच महीने (25 मार्च से 24 अगस्त) का एक्सटेंशन दिया है। यह उन प्रॉजेक्ट्स पर लागू होता है जिन्हें मंत्रालय द्वारा निर्दिष्ट एजेंसियों के जरिए या मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लागू किया गया है। इन प्रॉजेक्ट्स को 25 मार्च, 2020 को लागू होना चाहिए। कोविड-19 के कारण सप्लाई चेन में बाधा के मद्देनजर यह एक्सटेंशन दिया गया है।

इसका लाभ उठाने वाले डेवलपर्स को इस एक्सटेंशन के लिए प्रमाण दिखाने की जरूरत नहीं। वे वैल्यू चेन के दूसरे हितधारकों जैसे सामग्री और उपकरण सप्लाई करने वालों को भी समय सीमा में बढ़ोतरी का लाभ दे सकते हैं। मंत्रालय ने कोविड-19 को ‘फोर्स मेज़ोर’ माना है। ‘फोर्स मेज़ोर’ का अर्थ ऐसी अप्रत्याशित घटना है जोकि किसी अनुबंध को पूरा करने से रोकती है। हालांकि राज्य आरई विभाग अपने विवेक के आधार पर कोविड-19 को फोर्स मेज़ोर मान सकते हैं। 

जेनको और ट्रांसको द्वारा लेट पेमेंट सरचार्ज की अधिकतम सीमा का सुझाव

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

बिजली मंत्रालय ने बिजली उत्पादक कंपनियों (जेनको) और ट्रांसमिशन कंपनियों (ट्रांसको) को सलाह दी है कि वे वितरण कंपनियों पर 12% प्रति वर्ष की सामान्य ब्याज दर के साथ लेट पेमेंट सरचार्ज की सीमा तय करें।[40] यह सीमा निम्नलिखित पर लागू होगी(iबिजली की खरीद के लिए वितरण कंपनियों द्वारा जेनको और ट्रांसको को भुगतान में 30 जून, 2020 तक विलंब, और (ii) आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत पावर फाइनांस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी) की लिक्विडिटी इन्फ्यूजन स्कीम में किए गए सभी भुगतान। इस योजना के अंतर्गत पीएफसी और आरईसी के लोन्स के रूप में 90,000 रुपए के लिक्विडिटी इन्फ्यूजन की घोषणा की गई है।[41] मंत्रालय ने कहा है कि हालांकि पिछले कुछ वर्षों में देश में ब्याज दरें कम हुई हैं, देर से किए गए भुगतान पर सरचार्ज की दर ऊंची बनी हुई है (18% वार्षिक पर)। 

आत्मनिर्भर भारत अभियान पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां देखें

 

समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी 23.9की दर से सिकुड़ी

2019-20 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) की तुलना में 2020-21 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) (2011-12 की स्थिर कीमत पर) 23.9% की दर से सिकुड़ गई।[42] इसकी तुलना में 2019-20 के चौथी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि 3.1% थी।

जीडीपी के मुख्य घटकों में निजी उपभोग (वस्तुओं एवं सेवाओं पर परिवारों का व्यय), सरकारी उपभोग (वस्तुओं एवं सेवाओं पर सरकारी व्यय), अचल पूंजी निर्माण (निर्माण, मशीनरी आदि पर निवेश में व्यय) और शुद्ध निर्यात (निर्यात घटा आयात) शामिल होते हैं। हालांकि सरकारी उपभोग 16% बढ़ा, निजी उपभोग और अचल पूंजी निर्माण क्रमशः 27% और 40% सिकुड़े। निर्यात में 20% की गिरावट हुई, और आयात में 40% की जिसके कारण शुद्ध निर्यात में वृद्धि हुई।

अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में जीडीपी को सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) के लिहाज से मापा जाता है। 2019-20 की पहली तिमाही की तुलना में 2020-21 की पहली तिमाही में कृषि को छोड़कर सभी क्षेत्रों में वृदधि नकारात्मक रही। 42  निर्माण और व्यापार, होटल और परिवहन क्षेत्रों में वृद्धि में क्रमशः 50और 47की गिरावट रही।42 तालिका 1 में जीवीए की क्षेत्रगत वृद्धि को प्रस्तुत किया जा रहा है। 

तालिका 1: 2020-21 की पहली तिमाही में विभिन्न क्षेत्रों में सकल मूल्य संवर्धन में वृद्धि (%वर्ष दर वर्ष)

क्षेत्र

ति1

2019-20

ति4

2019-20

ति1

2020-21

कृषि

3.0%

5.9%

3.4%

खनन

4.7%

5.2%

-23.3%

मैन्यूफैक्चरिंग

3.0%

-1.4%

-39.3%

बिजली

8.8%

4.5%

-7.0%

निर्माण

5.2%

-2.2%

-50.3%

व्यापार

3.5%

2.6%

-47.0%

वित्तीय सेवाएं

6.0%

2.4%

-5.3%

जन सेवाएं

7.7%

10.1%

-10.3%

जीवीए

4.8%

3.0%

-22.8%

जीडीपी

5.2%

3.1%

-23.9%

Note: GVA is GDP without taxes and subsidies, at constant prices (2011-12 base year). 

SourcesMinistry of Statistics and Programme Implementation; PRS.

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय सांख्यिकी डेटा को जमा करने और प्रकाशित करने के लिए जिम्मेदार होता है। मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 और सरकार के लॉकडाउन के कारण डेटा कलेक्शन पर असर पड़ा है। उसने कहा है कि 2020-21 की पहली तिमाही के लिए प्रकाशित किए गए अनुमान वैकल्पिक डेटा सोर्स पर आधारित हैं और उनमें संशोधन की संभावना है।42 

2020-21 की पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन में 36की गिरावट

2019-20 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) की तुलना में 2020-21 की पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) 36% की दर पर सिकुड़ गया।[43]  2020-21 के अप्रैल, मई और जून में खनन, मैन्यूफैक्चरिंग और बिजली उत्पादन में वृद्धि नकारात्मक थी। 2019-20 की चौथी तिमाही में आईआईपी -3.8% की वृद्धि के साथ गिरा था। रेखाचित्र 1 में 2020-21 की पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन में परिवर्तन प्रदर्शित है। 

रेखाचित्र 1: 2020-21 की पहली तिमाही में आईआईपी में नकारात्मक वृद्धि

 image

SourcesMinistry of Statistics and Programme Implementation; PRS

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट क्रमशः 4% और 3.35पर अपरिवर्तनीय

मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (एमपीसी) ने 2020-21 का दूसरा द्विमासिक मौद्रिक नीतिगत वक्तव्य जारी किया।[44]  पॉलिसी रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों को ऋण देता है) 4% पर अपरिवर्तनीय रही। एमपीसी के अन्य निर्णयों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • रिवर्स रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों से उधार लेता है) 3.35% पर अपरिवर्तनीय रहा।
     
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट (जिस दर पर बैंक अतिरिक्त धन उधार ले सकते हैं) और बैंक रेट (जिस दर पर आरबीआई बिल्स ऑफ एक्सचेंज को खरीदता है) 4.25% पर अपरिवर्तनीय रहा।
     
  • एमपीसी ने आर्थिक वृद्धि पर कोविड-19 के प्रभाव को कम करने के लिए मौद्रिक नीति के समायोजन के रुख को बरकरार रखने का फैसला किया।

 

वित्त

केंद्र ने राज्यों के लिए जीएसटी मुआवजे की कमी को पूरा करने के लिए दो विकल्प रखे 

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

केंद्र सरकार ने जीएसटी परिषद को 2020-21 के लिए जीएसटी मुआवजे के अनुमान पेश किए और राज्यों के सामने मुआवजा सेस कलेक्शन में कमी को पूरा करने के लिए दो विकल्प रखे।[45]   जीएसटी (राज्यों को मुआवजा) एक्ट, 2017 के अंतर्गत केंद्र सरकार से राज्यों को मुआवजा चुकाने की अपेक्षा की जाती है, अगर जुलाई 2017 से जून 2022 के दौरान किसी वर्ष उनका जीएसटी राजस्व 14से कम बढ़ता है। एक्ट के अंतर्गत केंद्र सरकार जीएसटी मुआवजा सेस का इस्तेमाल करते हुए राज्यों के मुआवजे की जरूरत को पूरा कर सकती है। यह सेस लग्जरी और सिन गुड्स जैसे सिगरेट और तंबाकू उत्पादों, पान मसाला, कैफिनेटेड बेवेरेज, कोयला और कुछ पैसेंजर वाहनों पर 28के जीएसटी के साथ वसूले जाते हैं। 

2020-21 के लिए अनुमान2020-21 के लिए राज्यों के मुआवजे की जरूरत 3 लाख करोड़ रुपए के करीब है, जबकि सेस से 68,704 करोड़ रुपए के कलेक्शन का अनुमान है।45 इससे लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपए की कमी का अनुमान है। केंद्र सरकार ने जीएसटी के कार्यान्वयन के कारण 97,000 करोड़ रुपए की कमी को जिम्मेदार ठहराया और शेष कमी के लिए कोविड-19 को। 

उधारी का विकल्पकेंद्र सरकार ने राज्यों के लिए 2.3 लाख करोड़ रुपए की कमी को पूरा करने के लिए दो विकल्प पेश किए हैं: (i) 2020-21 के लिए जीएसटी कार्यान्वयन से सिर्फ संबंधित कमी (97,000 करोड़ रुपए) को पूरा करने के लिए उधार लिया जाए और बाकी की राशि को 2022 के सेस कलेक्शन से चुकाया जाएगा, या (ii) पूरी कमी को दूर करने के लिए 2020-21 में उधार लिया जाए। राज्य व्यक्तिगत रूप से अपने विकल्पों का उपयोग कर पाएंगे। दोनों प्रकार की उधारियों की मुख्य विशेषता इस प्रकार हैं:

  • पुनर्भुगतानदोनों विकल्पों के अंतर्गत राज्य अपनी उधारियों को भविष्य के सेस कलेक्शन से चुकाएंगे। विकल्प 1 में (आंशिक उधारी) उधारियों पर ब्याज भविष्य के सेस कलेक्शन से चुकाया जाएगा। हालांकि विकल्प 2 में (पूर्ण उधारी) राज्यों को अपने संसाधनों के जरिए बाजार दर पर ब्याज चुकाना होगा। 
     
  • राजकोषीय घाटा सीमा: प्रत्येक वर्ष केंद्र सरकार राज्यों के लिए राजकोषीय घाटे की सीमा को मंजूर करती है। राज्य उस वर्ष उस सीमा तक उधार ले सकते हैं। 2020-21 के लिए केंद्र सरकार ने संशोधित राजकोषीय घाटे की सीमा को जीएसडीपी का 5% तय किया है जिसमें से 1% राज्यों द्वारा कुछ सुधार लागू करने पर निर्भर है।45 विकल्प 1 के अंतर्गत किसी किस्म की उधारी उनके लिए मंजूर जीएसडीपी की 5% की सीमा से ऊपर है, यानी उसे जीएसडीपी की 5% की सीमा में नहीं गिना जाएगा। इसके विपरीत विकल्प 2 के अंतर्गत राज्यों द्वारा ली गई उधारी को जीएसडीपी की 5% की सीमा से छूट नहीं दी जाएगी। ये विकल्प राज्यों को बिना शर्त राजकोषीय घाटे का अंग होंगे। हालांकि जीएसडीपी के 1% से अधिक की किसी भी उधारी को छूट दी जाएगी।

आरबीआई ने 2020-25 के लिए राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा रणनीति को जारी किया

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा केंद्र ने भारतीय रिजर्व बैंकसिक्योरिटीज़ एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया, भारतीय बीमा रेगुलेटरी और विकास अथॉरिटी और पेंशन फंड रेगुलेटरी और विकास अथॉरिटी के परामर्श से 2020-25 के लिए दूसरी राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा रणनीति (एनएसएफईजारी की।[46] एनएसएफई के मुख्य पहलुओं में निम्नलिखित शामिल हैं:  

  • उद्देश्य: (iवित्तीय शिक्षा के माध्यम से वित्तीय साक्षरता को बढ़ाकर इसे जीवन कौशल बनाना(iiसक्रिय बचत को प्रोत्साहित करना(iiiवित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए वित्तीय बाजारों में भागीदारी को प्रोत्साहित करनाऔर (ivऋण अनुशासन विकसित करना और औपचारिक वित्तीय संस्थानों से लाभकारी ऋण को प्रोत्साहित करना। 
     
  • नीति का डिजाइन: वित्तीय शिक्षा के घटकों में शामिल हैं: (iबचत का महत्वब्याज दरमुद्रास्फीतिबीमा की जरूरत जैसी बुनियादी अवधारणाएं, (iiउपलब्ध वित्तीय सेवाओं के प्रकारों पर क्षेत्रगत जानकारी, जिसमें डिजिटल वित्तीय सेवाओं के सुरक्षित उपयोग की जानकारी भी शामिल हैऔर (iiiप्रक्रियाओं की शिक्षा ताकि यह सुनिश्चित हो कि ज्ञान व्यवहार में परिवर्तित हो (जैसे एटीएम कार्ड का उपयोगबीमा कवर खरीदना और ऋण आवेदन करना जैसे विषय शामिल)।
  • कार्य योजना: एनएसएफई अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने पर निम्नलिखित पर ध्यान केंद्रित करती है (iस्कूलोंकॉलेजोंप्रशिक्षण प्रतिष्ठानों के लिए वित्तीय साक्षरता सामग्री विकसित करना(iiवित्तीय सेवा प्रदाताओं की क्षमता विकसित करना(iiiवित्तीय साक्षरता के प्रसार के लिए समुदाय आधारित दृष्टिकोण को अपनाना(ivवित्तीय शिक्षा संदेशों को प्रसारित करने के लिए प्रौद्योगिकी और जन संचार माध्यमों का उपयोग करना, और (vहितधारकों के बीच सहयोग ताकि सभी वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों का डिजिटल भंडार बनाया जा सके और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में वित्तीय साक्षरता को एकीकृत किया जा सके। 
  • कार्य योजना प्रत्येक उद्देश्य को हासिल करने के लिए समय सीमा प्रस्तुत करती है। उदाहरण के लिए इस योजना का उद्देश्य मार्च 2021 तक छठी से दसवीं कक्षा के लिए वित्तीय शिक्षा के लिए स्कूली पाठ्यक्रम को अपडेट करना है।
     
  • निगरानी और मूल्यांकन: एनएसएफई की निगरानी का काम वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में) करती है। वित्तीय समावेशन और वित्तीय साक्षरता पर एक तकनीकी समूह (टीजीएफआईएफएल) (आरबीआई के डेप्युटी गवर्नर की अध्यक्षता में) एनएसएफई के कार्यान्वयन की निगरानी करेगा।
     
  • 2022-23 में एनएसएफई के कार्यान्वयन के तीन वर्षों के अंत में एक मध्यावधि मूल्यांकन किया जाएगा। 2025 में एनएसएफई कार्यान्वयन अवधि के अंत में एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण किया जाएगा। 

सेबी ने प्रॉक्सी सलाहकारों के लिए प्रक्रियागत दिशानिर्देश अधिसूचित किए 

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

2014 में सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने प्रॉक्सी सलाहकारों के आचरण को अभिशासित करने के लिए रेगुलेशंस को अधिसूचित किया था।47  एक प्रॉक्सी सलाहकार कोई भी ऐसा व्यक्ति है जो किसी कंपनी के संस्थागत निवेशकों या शेयरधारकों को कंपनी में उनके वोटिंग के अधिकारों के प्रयोग की सलाह देता है।[47] सेबी ने इन प्रॉक्सी सलाहकारों के लिए प्रक्रियागत दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया है।[48]  इन उपायों से प्रॉक्सी सलाहकारों की स्वतंत्रता सुनिश्चित होने की उम्मीद है। 2018 में सेबी ने प्रॉक्सी सलाहकारों की समस्याओं पर एक वर्किंग ग्रुप का गठन किया था। इस ग्रुप के सुझावों में ये उपाय शामिल थे।[49]  

प्रक्रियागत दिशानिर्देशों में शामिल हैं: 

  • वोटिंग के सुझाव पर नीतियां: प्रॉक्सी सलाहकार वोटिंग के सुझावों पर नीतियां बनाएंगे और अपने क्लाइंट्स को उनके बारे में बताएंगे। इन नीतियों की सालाना समीक्षा की जानी चाहिए।
     
  • खुलासे का तरीका: सलाहकार अपने क्लाइंट्स को अपने अनुसंधान और सुझावों के विकास की पद्धति और प्रक्रियाओं के बारे में बताएंगे।
     
  • रिपोर्टों को साझा करना: सलाहकार एक ही समय में अपने ग्राहकों और कंपनी के संबंध में अपने सुझावों को साझा करेंगे। कंपनी की टिप्पणीयदि कोई होको सलाहकारों की अनुशंसा रिपोर्ट के परिशिष्ट के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। यदि किसी सुझाव पर कंपनी का दृष्टिकोण अलग हैतो सलाहकार उनकी अनुशंसा को संशोधित भी कर सकते हैं।
     
  • हितों का टकराव: सलाहकार हर उस दस्तावेज पर हितों के टकराव का खुलासा करेंगे जिस पर वे सलाह देते हैं। खुलासे में हितों के टकराव के संभावित क्षेत्रों और संघर्षों को कम करने के उपयोग शामिल होने चाहिए। प्रॉक्सी सलाहकार परामर्श सेवाओं सहित अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से उत्पन्न हितों के टकराव का खुलासा करनेउनका प्रबंधन करने और उन्हें कम करने के लिए स्पष्ट प्रक्रियाएं बताएंगे।

ये दिशानिर्देश जनवरी, 2021 से लागू होंगे।[50]

आरबीआई ने रीटेल भुगतान पर केंद्रित अंब्रेला एंटिटीज़ की स्थापना के लिए फ्रेमवर्क जारी किया

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

आरबीआई ने रीटेल भुगतान प्रणालियों पर केंद्रित अखिल भारतीय अंब्रेला एंटिटीज़ की स्थापना के लिए फ्रेमवर्क जारी किया।[51] वर्तमान में आरबीआई रीटेल भुगतान और निपटान प्रणाली के लिए एक अंब्रेला संगठन का संचालन करता हैजिसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया नामक एक अलाभकारी संगठन के रूप में बनाया गया है। 

फ्रेमवर्क की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:

  • स्थापना: इस कंपनी को कंपनी एक्ट, 2013 के अंतर्गत बनाया जाना चाहिए और यह एक लाभकारी कंपनी हो सकती है। इसका भुगतान और निपटान प्रणाली एक्ट, 2007 के अंतर्गत आरबीआई द्वारा रेगुलेशन और सुपरविजन किया जाएगा।
     
  • गतिविधियां: एंटिटी की गतिविधियों के दायरे में निम्नलिखित शामिल हैं: (iएटीएमआधार-आधारित भुगतान और प्रेषण सेवाओंऔर नई भुगतान विधियों सहित रीटेल स्पेस में नई भुगतान प्रणालियों को स्थापित, प्रबंधित और संचालित करना, और (ii) इनमें भाग लेने वाले बैंकों और गैर-बैंकों के लिए क्लियरिंग और निपटान का काम करना।
     
  • प्रमोटर्स के लिए पात्रता: अंब्रेला एंटिटी के पेड अप कैपिटल का 25से अधिक होल्ड करने वाली कोई भी एंटिटी प्रमोटर मानी जाएगी। प्रमोटर को पेमेंट इकोसिस्टम में कम से कम तीन वर्ष के अनुभव के साथ एक निवासी भारतीय नागरिक (विदेशी मुद्रा प्रबंधन एक्ट, 1999 (फेमा) के अनुसार) होना चाहिए। प्रमोटर आरबीआई द्वारा निर्दिष्ट 'फिट और प्रॉपर' मानदंडों के भी अनुरूप होना चाहिए।
     
  • विदेशी निवेश: फेमा के नियमों के अनुसार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की अनुमति होगी।
     
  • पूंजी: एंटिटी के पास न्यूनतम 500 करोड़ रुपए का पेड अप कैपिटल होना चाहिए। कोई भी प्रमोटर एंटिटी की पूंजी में 40से अधिक निवेश नहीं कर सकता है। प्रमोटर की शेयरहोल्डिंग एंटिटी के व्यवसाय के शुरू होने के पांच साल बाद न्यूनतम 25तक कम हो सकती है।
     
  • आवेदन की प्रोसेसिंगएक बाहरी सलाहकार कमिटी अंब्रेला एंटिटी के लिए आवेदनों की जांच करेगी और भुगतान और निपटान प्रणाली (बीपीएसएस) के रेगुलेशन और सुपरविजन के लिए आरबीआई के बोर्ड को सुझाव प्रस्तुत करेगी। बीपीएसएस आवेदन पर फैसला लेने वाली अंतिम अथॉरिटी होगा।

आरबीआई ने सेल्फ रेगुलेटरी संगठन की मान्यता हेतु ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

आरबीआई ने भुगतान प्रणाली के ऑपरेटर्स के लिए सेल्फ रेगुलेटरी संगठन की मान्यता हेतु ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया और उस पर सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।[52]  एक भुगतान प्रणाली में क्लियरिंग, भुगतान और निपटान सेवाओं के जरिए भुगतानकर्ता और लाभार्थी के बीच भुगतान होता है।[53]  आरबीआई भुगतान और निपटान प्रणाली को नियंत्रित करता है। ड्राफ्ट फ्रेमवर्क में कहा गया है कि जैसे जैसे भुगतान प्रणालियों की संख्या बढ़ रही है, उद्योग के लिए सुरक्षामूल्य निर्धारणउपभोक्ता संरक्षण और शिकायत समाधान के मानकों को विकसित करना आवश्यक हैताकि आरबीआई के रेगुलेटरी संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके।[54]  सेल्फ रेगुलेटरी संगठन एक गैर-सरकारी संगठन होगा जो ऐसे भुगतान प्रणाली के ऑपरेटरों के लिए नियमों और मानकों को निर्धारित और लागू करता है।

ड्राफ्ट फ्रेमवर्क में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पात्रता की शर्तें: सेल्फ-रेगुलेटरी संगठन को कंपनी एक्ट, 2013 के अंतर्गत एक अलाभकारी कंपनी के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसमें उद्योग के अधिकांश सदस्य होने चाहिए। आरबीआई पात्र संगठनों को मान्यता पत्र प्रदान करेगा। वह संगठन की गवर्निंग बॉडी में महत्वपूर्ण पदों की नियुक्ति को मंजूरी देने का अधिकार भी सुरक्षित रखेगा।
     
  • प्रबंधन: प्रबंधन और सेल्फ रेगुलेटरी संगठन के निदेशक मंडल को आरबीआई द्वारा निर्दिष्ट फिट और प्रॉपर’ मानदंडों को पूरा करना होगा। संगठन अपने सदस्यों के लिए एक आचार संहिता की रूपरेखा तैयार करेगा और वह इस बात की निगरानी करेगा कि उसके सदस्य इस संहिता का अनुपालन करें।
     
  • कार्य और बाध्यताएंसेल्फ रेगुलेटरी संगठन न्यूनतम मानक स्थापित करेगा और अपने सदस्यों को प्रशिक्षण प्रदान करेगा। यह अपने सभी सदस्यों के लिए एक समान शिकायत समाधान और विवाद प्रबंधन ढांचा भी स्थापित करेगा। इसे आरबीआई के साथ संवाद बनाए रखना होगाकिसी भी उल्लंघन की तुरंत रिपोर्टिंग करनी होगी और इसके द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना होगा।

ड्राफ्ट फ्रेमवर्क पर 15 सितंबर, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

आरबीआई ने डिजिटल भुगतान पर ऑनलाइन विवाद समाधान प्रणाली शुरू की

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

आरबीआई ने डिजिटल भुगतान से संबंधित ग्राहक के विवादों के समाधान के लिए एक ऑनलाइन विवाद समाधान प्रणाली की शुरुआत की है।[55] अधिकृत बैंक और गैर-बैंक भुगतान प्रणाली ऑपरेटर (पीएसओऑनलाइन विवाद को हल करने के लिए व्यवस्था तैयार करेंगे जोकि प्रौद्योगिकी-संचालितनियम-आधारितउपयोगकर्ता के अनुकूल और पारदर्शी हो। एक भुगतान प्रणाली एक भुगतानकर्ता और लाभार्थी के बीच भुगतान को सक्षम बनाती हैजिसमें क्लियरिंगभुगतान या निपटान सेवा शामिल है।53 आरबीआई ने ऑनलाइन विवाद समाधान प्रणाली की न्यूनतम शर्तें जारी की हैं। इसमें निम्नलिखित शामिल है:  

  • एप्लिकेबिलिटी: शर्तें सभी अधिकृत पीएसओ और भाग लेने वाले सदस्यों पर लागू होती हैं।
     
  • संरचना: प्रत्येक पीएसओ विफल लेनदेन से उत्पन्न विवादों और शिकायतों के समाधान के लिए एक प्रणाली स्थापित करेगा। ग्राहकों को ऐसे लेनदेन की शिकायत दर्ज करने की सुविधा प्रदान की जानी चाहिएचाहे वह ऑन अस हो या ऑफ-अस हो। ऑन अस लेनदेन केवल एकल बैंक या गैर-बैंक एंटिटी के खातों को प्रभावित करते हैं और एंटिटीज़ में निपटारे की आवश्यकता नहीं होती है।
     
  • लेनदेन के प्रकार: प्रारंभ में ऑनलाइन विवाद समाधान प्रणाली का दायरा विफल लेनदेन से संबंधित शिकायतों तक सीमित रहेगा। असफल लेनदेन के लिए प्रणाली को जनवरी 2021 तक लागू किया जाएगा। इस प्रणाली में बाद में विफल लेनदेन के अतिरिक्त दूसरी शिकायतों का भी समाधान किया जाएगा।
     
  • शिकायतों को दर्ज करना और उन पर नज़र रखना: विवादों और शिकायतों को दर्ज करने के लिए ग्राहकों को कम से कम एक चैनल (जैसे वेब-आधारितपेपर-आधारित शिकायत फ़ॉर्ममोबाइल ऐपकॉल सेंटरया एसएमएस) प्रदान किया जाना चाहिए। समाधान प्रणाली को एक यूनीक रिफरेंस नंबर का उपयोग करके शिकायतों की स्थिति को ट्रैक करने की सुविधा प्रदान करनी चाहिए।

आरबीआई ने ऑफलाइन रीटेल भुगतान के लिए पायलट योजना शुरू की

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

आरबीआई ने ऑफलाइन मोड में छोटी कीमत वाले भुगतानों की अनुमति देने के लिए पायलट योजना शुरू की।[56]  यह ध्यान दिया गया कि इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमीविशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों मेंडिजिटल भुगतान को अपनाने में एक बाधा है। इस समस्या को ऑफ़लाइन मोड में भुगतान विकल्प उपलब्ध करके आंशिक रूप से हल किया जा सकता है। योजना के अंतर्गत अधिकृत बैंक और गैर-बैंक भुगतान प्रणाली ऑपरेटर कार्डवॉलेट या मोबाइल उपकरणों का उपयोग करके ऑफलाइन भुगतान समाधान प्रदान कर सकते हैं। इन भुगतान समाधानों पर कुछ शर्तों इस प्रकार हैं: (i200 रुपए के एकल लेनदेन की अधिकतम सीमा(ii2,000 रुपए के एकल इंस्ट्रूमेंट पर ऑफलाइन लेनदेन के लिए कुल सीमा(iiiभुगतान प्रणाली ऑपरेटरों द्वारा रियल टाइम अलर्ट का प्रावधानऔर (ivप्रयोक्ता की पसंद पर अतिरिक्त सत्यापन के साथ ऑफलाइन मोड में लेनदेन प्रदान करने का विकल्प।

योजना के अंतर्गत परिचालन शुरू करने से पहलेभुगतान प्रणाली का ऑपरेटर अपने समाधानों के बारे में आरबीआई को सूचित करेगा। हालांकिभुगतान प्रणाली ऑपरेटर आरबीआई से अनुमोदन के बिना परिचालन शुरू कर सकते हैं। पायलट योजना 31 मार्च, 2021 तक संचालित की जाएगी।

 

स्वास्थ्य

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

ड्राफ्ट स्वास्थ्य डेटा प्रबंधन नीति सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्राफ्ट स्वास्थ्य डेटा प्रबंधन नीति को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी कर दिया।[57]  राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (एनडीएचएम) के लागू होने के बाद डेटा प्राइवेसी कैसे बरकरार रखी जाती है, यह नीति वह तरीका बताती है। एनडीएचएम का उद्देश्य हेल्थ रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए रजिस्ट्रीज़ बरकरार रखना है। स्वास्थ्य डेटा प्रबंधन नीति के मुख्य पहलुओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एप्लिकेबिलिटी: नीति एनडीएचएम में शामिल सभी एंटिटी पर लागू होगी जैसे: (iहेल्थकेयर प्रोफेशनल्स(iiस्वास्थ्य सूचना प्रदाता(iiiभुगतानकर्ता (केंद्र या राज्य सरकार और बीमाकर्ता, इत्यादि)(ivदवा निर्माताऔर (vअनुसंधान निकाय।
     
  • उद्देश्य: नीति उन व्यक्तियों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षित प्रोसेसिंग के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करेगी जो राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम (एनडीएचईका हिस्सा हैं। इसके अतिरिक्त इसका उद्देश्य डिजिटल व्यक्तिगत और मेडिकल हेल्थ रिकॉर्ड बनाना है जो व्यक्तियों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को आसानी से सुलभ हो। अन्य उद्देश्यों में शामिल हैं: (iडेटा प्राइवेसी के महत्व पर बढ़ती जागरूकताऔर (iiस्वास्थ्य सेवाओं के प्रावधान में राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करना।
     
  • डेटा प्रिंसिपल की सहमति और अधिकार: डेटा प्रिंसिपल्स को उनके व्यक्तिगत डेटा को जमा करने और प्रोसेसिंग के तरीके पर पूरा नियंत्रण और निर्णय लेने की शक्ति दी जानी चाहिए। डेटा प्रिंसिपल की सहमति को तब वैध माना जाए, अगर वह: (iस्वतंत्र रूप से दी गई हो(iiसूचना से लैस हो(iiiविशिष्ट(ivस्पष्ट रूप से दी गई होऔर (vवापस ली जा सके। इसके अतिरिक्त डेटा प्रिंसिपल्स के पास निम्नलिखित अधिकार हैं: (iप्रोसेसिंग की पुष्टि करना और डेटा फिड्यूरशरीज़ की सूचना तक पहुंच, (iiअपने डेटा में संशोधन करना और उसे मिटाना(iiiखुलासे को सीमित करना या उस पर आपत्तिऔर (ivडेटा की एक प्रति के लिए अनुरोध या किसी अन्य फिड्यूशरी को स्थानांतरित करना।
     
  • हेल्थ आईडीडेटा प्रिंसिपल बिना किसी कीमत के हेल्थ आईडी बनाने का अनुरोध कर सकते हैं। आईडी बनने से वे एनडीएचई में भाग ले सकते हैं। डेटा प्रिंसिपल के व्यक्तिगत डेटा को उनके हेल्थ आईडी से लिंक कर दिया जाएगा।

ड्राफ्ट नीति पर सार्वजनिक टिप्पणियां 10 सितंबर, 2020 तक आमंत्रित हैं। 

 

कॉरपोरेट मामले

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

बिजनेस रिस्पांसिबिलिटी रिपोर्टिंग फॉरमैट पर कमिटी रिपोर्ट जारी

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने बिजनेस रिस्पांसिबिलिटी रिपोर्टिंग पर कमिटी रिपोर्ट को जारी किया।[58]  इस कमिटी का गठन नवंबर 2018 में किया गया था ताकि नेशनल गाइडलाइन्स ऑन रिस्पांसिबल बिजनेस कंडक्ट (एनजीआरबीसी) के अंतर्गत सूचीबद्ध और गैर सूचीबद्ध कंपनियों के लिए बिजनेस रिस्पांसिबिलिटी रिपोर्टिंग (बीआरआर) के लिए फॉरमैट को अंतिम रूप दिया जा सके।[59] दिशानिर्देशों को नौ सिद्धांतों के एक सेट के रूप में स्पष्ट किया गया है जो जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इनमें नैतिक प्रशासनपर्यावरण की सुरक्षा और समावेशी विकास को बढ़ावा देना शामिल है।[60]  

2012 में सिक्योरिटीज़ एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने सेबी-बीआरआर पेश किया था जोकि शीर्ष 100 (बाद में 1,000 तक विस्तारित) सूचीबद्ध कंपनियों के लिए सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग का पहला रेगुलेटरी मैन्डेट था। कमिटी द्वारा प्रस्तावित रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क एनजीआरबीसी के सिद्धांतों को शामिल करने के लिए सेबी-बीआरआर फॉरमैट में संशोधित करता है।

समिति ने सुझाव दिया कि प्रकटीकरण के लिए प्रस्तावित फॉरमैट को बिजनेस रिस्पांसिबिलिटी रिपोर्टिंग एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग (बीआरएसआर) कहा जाएगा। बीआरएसआर प्रश्नावली में तीन खंड होते हैं: (i) सामान्य प्रकटीकरण (नामसंचालन का क्षेत्रकर्मचारियों का प्रोफाइलसीएसआर गतिविधियां)(ii) नेतृत्वशासन और हितधारकों की संलग्नता से संबंधित कंपनी की नीतियों की जानकारी (आरजीआरबीसी सिद्धांतों के अनुरूप)और (iii) सिद्धांत-वार प्रदर्शन (प्रत्येक एनजीआरबीसी सिद्धांत के लिए कार्यों और परिणामों के साथ)। कमिटी ने सुझाव दिया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए प्रकटीकरण को प्रभावी बनाया जाएगा।

मंत्रालय बाद में निर्दिष्ट सीमा से अधिक टर्नओवर या पेड-अप कैपिटल वाली गैर सूचीबद्ध कंपनियों को रिपोर्टिंग के दायरे में ला सकता है। छोटी गैर सूचीबद्ध कंपनियों के लिए बीआरएसआर को अलग-अलग समय पर लागू किया जाएगा। शुरुआत स्वैच्छिक आधार से की जाएगी। कमिटी ने ऐसी कंपनियों के लिए बीआरएसआर फॉरमैट का एक संस्करण भी प्रस्तावित कियाजिसे बीआरएसआर लाइट कहा जाता है। इन कंपनियों के लिए प्रश्नों की संख्या कम है।

 

विधि और न्याय

Madhunika Iyer (madhunika@prsindia.org)

इलेक्ट्रॉनिक एवं इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने आधार एक्ट के अंतर्गत आधार सत्यापन के उपयोग के लिए नियमों को अधिसूचित किया

इलेक्ट्रॉनिक्स और इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने गुड गवर्नेंस (सोशल वेलफेयरइनोवेशननॉलेज) नियम, 2020 के लिए आधार सत्यापन को अधिसूचित किया। इन नियमों को आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडीलाभ और सेवाओं की लक्षित डिलीवरी) एक्ट, 2016 (आधार एक्ट) के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है।[61]  आधार एक्ट केंद्र सरकार को इस बात की अनुमति देता है कि वह उन उद्देश्यों के लिए नियम बनाए जिनके लिए आधार के सत्यापन की मांग की जा सकती है।[62]  

नियम यह प्रावधान करते हैं कि केंद्र सरकार कुछ उद्देश्यों के लिए एंटिटीज़ को आधार सत्यापन की अनुमति दे सकती है, जैसे सुशासन कायम करना, धन के रिसाव को रोकनानिवासियों को बेहतर जीवन देना और सेवाओं तक बेहतर पहुंच। निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए सत्यापन की मांग की जा सकती है: (i) सुशासन सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल प्लेटफार्मों का उपयोग(ii) सामाजिक कल्याण लाभों में धांधलेबाजी को रोकना और (iii) नवाचार को आसाना बनाना और ज्ञान का प्रसार।

इन उद्देश्यों के लिए सत्यापन स्वैच्छिक आधार पर होगा। उपरोक्त उद्देश्यों के लिए आधार सत्यापन का उपयोग करने के लिए इच्छुक कोई भी केंद्रीय मंत्रालय या राज्य सरकार एक प्रस्ताव तैयार करेगी और इसे मंजूरी के लिए यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया को सौंपेगी।   

 

सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद का गठन

ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) एक्ट, 2019 में केंद्र सरकार से यह अपेक्षा की गई है कि वह ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय परिषद का गठन करेगी। इस संबंध में सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण मंत्रालय ने राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर व्यक्ति परिषद का गठन किया है।[63] परिषद की अध्यक्षता सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण मंत्री द्वारा की जाएगी। 

परिषद के कार्यों में निम्नलिखित शामिल होगा: (i) केंद्र सरकार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए नीतियां, कानून और प्रॉजेक्ट्स बनाने के संबंध में सलाह देना, (ii) ट्रांसजेंडर लोगों के लाभ के हेतु नीतियों और कार्यक्रमों का निरीक्षण करना, और (iii) ट्रांसजेंडर लोगों की शिकायतों का निवारण करना।63 

परिषद में विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जैसे सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, गृह मामलों का मंत्रालय और अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय। इसके अतिरिक्त परिषद में ट्रांसजेंडर समुदाय के पांच प्रतिनिधि, ट्रांसजेंडर लोगों के कल्याण के लिए कार्य करने वाले एनजीओज़ के पांच प्रतिनिधि तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एवं राष्ट्रीय महिला आयोग के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों में जम्मू एवं कश्मीर, आंध्र प्रदेश, ओड़िशा, गुजरात और त्रिपुरा (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और पूर्वोत्तर में से एक राज्य को रोटेशन से चुना जाएगा) के लोग शामिल होंगे।[64]

 

सूचना एवं प्रसार

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के एम्पैनेलमेंट के लिए दिशानिर्देश जारी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्यूनिकेशन के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एम्पैनेलमेंट के लिए नीतिगत दिशानिर्देश जारी किए हैं।[65] ब्यूरो प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, आउटडोर मीडिया या भारत सरकार के मंत्रालयों या विभागों की ओर से वेबसाइट्स के जरिए पेड आउटरीच कैंपेन्स के लिए जिम्मेदार एक नोडल एजेंसी है। दिशानिर्देशों के मुख्य पहलुओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एम्पैनेलमेंट के लिए पात्रता: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के भारत में हर महीने न्यूनतम 25 मिलियन यूनीक यूजर्स होने चाहिए (जोकि पिछले तीन महीने के डेटा पर निर्भर करेगा)। इसके अतिरिक्त प्लेटफॉर्म को उसी डोमेन नेम से कम से कम छह महीने के लिए ऑपरेशन में होना चाहिए।
     
  • संलग्नता: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ब्यूरो के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट करना होगा। एग्रीमेंट की शर्तों में प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित होगा कि उनका कंटेंट राष्ट्रविरोधी, अश्लील, सांप्रदायिक सौहार्द्र और राष्ट्रीय एकता को खतरे में डालने वाली नहीं या साइबर कानून का उल्लंघन करने वाला नहीं है।
     
  • ब्यूरो कंटेंट, लक्षित ऑडियंस, कैंपेन के बजट और अवधि के आधार पर निर्धारित करेगा कि क्लाइंट मंत्रालय/विभाग की प्लान्ड आउटरीच गतिविधि के लिए उपयुक्त है या नहीं। भारत में स्थिति प्लेटफॉर्म्स को वरीयता दी जाएगी।
     
  • मूल्य निर्धारणब्यूरो सरकारी संदेशों के लिए इनवेंटरी/स्पेस खरीदने के लिए नीलामी प्रक्रिया में भाग लेगा। ये संदेश टेक्स्ट, वीडियो ऐड्स, कैरोयूजल ऐड्स, कलेक्शन ऐड्स, इत्यादि के रूप में हो सकते हैं। इन इनवेंटरी/स्पेस खरीदने के मॉडल निम्नलिखित हो सकते हैं: (iडायनमिक प्राइजिंग मॉडल (जहां ब्यूरो से क्लिक या व्यूज़ के आधार पर शुल्क लिया जाएगा), (ii) ऑक्शन मॉडल (जहां इनवेंटरी खरीदने के लिए कुछ बोली राशि का संकेत देकर ब्यूरो को ऑनलाइन नीलामी में भाग लेना होगा), या (iiपहुंच और फ्रीक्वेंसी मॉडल (जहां ब्यूरो एक निश्चित मूल्य के लिए एडवांस में कैंपेन बुक कर सकता है)। संबंधित क्लाइंट मंत्रालय और विभाग को एडवांस में ब्यूरो को 100फंड्स देने होंगे।
     
  • प्लेटफॉर्म्स के कर्तव्यसोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक रियल टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से डिजिटल रिपोर्ट सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगा जो कैंपेन से संबंधित मात्रात्मक परिणाम दिखाता है (जैसे कि व्यूज़, क्लिकइंप्रेशनफॉलोअर्स की संख्या)। इसके अतिरिक्त प्लेटफार्म्स को भारत सरकार के किसी मंत्रालय या एजेंसी द्वारा सस्पेंड या ब्लैकलिस्ट नहीं होना चाहिए।   

दिशानिर्देश पांच वर्ष की अवधि के लिए वैध होंगे। 

 

कृषि

Saket Surya (saket@prsindia.org)

चीनी विकास फंड (संशोधन) नियम, 2020 अधिसूचित

खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने चीनी विकास फंड (संशोधन) नियम, 2020 को अधिसूचित किया।[66],[67] चीनी विकास फंड एक्ट,  1982 के अंतर्गत स्थापित इस फंड को चीनी उद्योग की विकास संबंधी गतिविधियों को वित्तपोषित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 2020 नियमों की प्रमुख विशेषताएं हैं:

  • चीनी कारखानों को ऋण: मौजूदा नियमों के अंतर्गत, 2,500 टन प्रति दिन या उससे अधिक गन्ने की पेराई क्षमता वाले कारखाने फंड से ऋण के लिए पात्र हैं। इस ऋण को निम्नलिखित से संबंधित प्रॉजेक्ट्स को लागू करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है: (iएल्कोहल या गुड़ से एनहाइड्रस एल्कोहल या इथेनॉल का उत्पादन(iiमौजूदा इथेनॉल प्लांट को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्लांट में बदलनाऔर (iiiबैगेज बेस्ड बिजली का कोजनरेशन।

2020 के नियमों के अंतर्गत संशोधन यह प्रावधान करते हैं कि 1,250 टन और 2,500 टन प्रतिदिन के बीच पेराई क्षमता वाले चीनी कारखाने भी इन क्षेत्रों में ऋण के लिए पात्र होंगे। हालांकि ऐसे कारखानों को आधुनिकीकरण और विस्तार प्रॉजेक्ट्स के लिए ऋण प्रदान किया जाएगा जो कि कोजेनरेशन या इथेनॉल प्लांट के साथ एकीकृत हैं। यह कुछ शर्तों के अधीन होगा, जैसे: (iबैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा प्रॉजेक्ट की वित्तीय व्यवहार्यता का प्रमाणन(iiराष्ट्रीय चीनी संस्थानकानपुरया केंद्र सरकार द्वारा नामित किसी अन्य संस्थान द्वारा तकनीकी व्यवहार्यता का प्रमाणीकरणऔर (iiiऋण के लिए राज्य सरकार की गारंटी प्रस्तुत करना।

  • ऋण पर डीफॉल्ट के लिए जुर्माना: अगर कोई फंड के ऋण को चुकाने में डीफॉल्ट करता है तो उसे डीफॉल्ट की राशि पर 6प्रति वर्ष की ब्याज दर चुकानी होती है या वह दर चुकानी होती है, जिसे केंद्र सरकार तय करती है। संशोधन में इस ब्याज दर को कम करके 4प्रति वर्ष कर दिया गया है।

कैबिनेट ने चीनी मौसम 2020-21 के लिए गन्ने की एफआरपी को मंजूरी दी 

केंद्रीय कैबिनेट ने चीनी मौसम 2020-21 (अक्टूबर 2020 से सितंबर 2021) के लिए गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) को मंजूरी दे दी है।[68]  एफआरपी वह मूल्य होता है जो किसानों से गन्ना खरीदने वाली चीनी मिलें चुकाती हैं।

2020-21 के लिए एफआरपी को 10की बेसिक रिकवरी रेट के लिए 285 रुपए प्रति क्विंटल पर तय किया गया है।68 बेसिक रिकवरी रेट गन्ने से चीनी निकलने पर तय किया जाता है और यह गन्ने में सुक्रोज की मौजूदगी, उत्पादन प्रक्रियाओं और चीनी मिलों की तकनीक और संचालन पर निर्भर करता है। 2020-21 के लिए एफआरपी पिछले वर्ष की एफआरपी (275 रुपए प्रति क्विंटल) से 3.6अधिक है।[69] 

10से अधिक रिकवरी में हर 0.1की बढ़ोतरी पर 2.85 रुपए प्रति क्विंटल के प्रीमियम को मंजूर किया गया है।68  इसी प्रकार 10की रिकवरी में हर 0.1की गिरावट पर 2.85 रुपए प्रति क्विंटल एफआरपी कम हो जाएगी।68 अगर रिकवरी 9.5या उससे कम है तो एफआरपी 270.75 रुपए प्रति क्विंटल है।68

 

रक्षा

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

ड्राफ्ट रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्धन नीति 2020 जारी 

रक्षा मंत्रालय ने ड्राफ्ट रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्धन नीति, 2020 जारी की।[70] इस नीति का उद्देश्य देश की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को बढ़ावा देनाआयात पर निर्भरता कम करना और रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता के लिए निर्यात को बढ़ावा देना है। नीति के प्रमुख पहलुओं में शामिल हैं:[71]   

  • रक्षा उद्योग का कारोबार: घरेलू रक्षा उद्योग (एयरोस्पेस और नौसैनिक जहाज निर्माण सहित) का आकार वर्तमान में लगभग 80,000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। नीति का लक्ष्य 2025 तक एयरोस्पेस और रक्षा वस्तुओं और सेवाओं में 1,75,000 करोड़ रुपए का कारोबार हासिल करना है (35,000 करोड़ रुपए के निर्यात सहित)।
     
  • घरेलू खरीद: वर्तमान में घरेलू उद्योग से खरीद लगभग 70,000 करोड़ रुपए (कुल रक्षा खरीद का 60%) है। इस नीति का लक्ष्य 2025 तक इसे दोगुना कर 1,40,000 करोड़ रुपए करना है। यह रक्षा बजट में घरेलू पूंजीगत खरीद के लिए एक अलग मद बनाने का प्रस्ताव रखती है और अगले पांच वर्षों के लिए घरेलू पूंजीगत खरीद के आबंटन में हर साल न्यूनतम 15की वृद्धि करना चाहती है।
     
  • अधिग्रहण प्रक्रिया को सहयोग देने और अनुबंधों के प्रबंधन को सुविधाजनक बनाने हेतु विशेषज्ञता के लिए एक प्रॉजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट बनाई जाएगी। यूनिट में रक्षा सेवाओं को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त सभी सेवाओं के प्रतिनिधियों वाला टेक्नोलॉजी एसेसमेंट सेल बनाया जाएगा जोकि प्रमुख प्लेटफार्म्स और प्रणालियों के लिए टेक्नोलॉजी रेडिनेस लेव्स  का विश्लेषण करेगा।
     
  • अनुसंधान और नवाचार: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे कि हाइपरसोनिक मिसाइलोंसुरक्षित संचार उपकरणों और हवाई सेंसरों को विकसित करने के लिए चुनिंदा क्षेत्रों में मिशन स्थापित करेगा। डिफेंस एक्सीलेंस (आईडेक्सपहल के नवाचारों को अगले पांच वर्षों में 300 और स्टार्टअप के साथ जुड़ने और 60 नई तकनीकों को विकसित करने के लिए बढ़ाया जाएगा। आईडेक्स का उद्देश्य अनुसंधान संस्थानोंशिक्षाविदोंउद्योगों और स्टार्ट-अप्स को धन या अनुदान प्रदान करके रक्षा में प्रौद्योगिकी विकास को प्रोत्साहित करना है।[72] 
     
  • डीपीएसयूज़ में सुधार: नीति कहती है कि ऑर्डिनेंस कारखानों और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयूज़को भविष्य के लिए सुधार की जरूरत है ताकि वे निजी उद्योग के साथ मिलकर काम करें। इसमें यह प्रस्तावित किया गया है कि डीपीएसयू में विनिवेश को आगे बढ़ाया जाएगा और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए ऑर्डिनेंस कारखानों का निगमीकरण किया जाएगा। उन्हें 2025 तक अपने राजस्व का कम से कम 25 हिस्सा निर्यात से अर्जित करना होगा।

रक्षा मंत्रालय ने आयात एंबार्गो के लिए 101 वस्तुओं की सूची प्रकाशित की

रक्षा मंत्रालय ने 101 वस्तुओं की एक सूची प्रकाशित की है जिसने आयात पर एंबार्गो (प्रतिबंध) होगा।[73] सूची में हथियार प्रणालीजैसे आर्टिलरी गन्सऔर एंटी सबमरीन रॉकेट लांचरऔर उच्च शक्ति वाले रडार और अपग्रेड सिस्टम जैसे उपकरण शामिल हैं। किसी भी आइटम पर प्रतिबंध उसके लिए निर्दिष्ट समय सीमा के अनुसार लागू होगा। 69 वस्तुओं के लिएप्रतिबंध दिसंबर 2020 से लागू होगा। 11 वस्तुओं के लिएयह दिसंबर 2021 से लागू होगा। शेष 21 वस्तुओं के लिएप्रतिबंध दिसंबर 2022 या उसके बाद से होगा।

भविष्य में आयात की नेगेटिव लिस्ट में शामिल किसी वस्तु को प्रोसेस नहीं किया जाए, यह सुनिश्चित करने के लिए रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में एंबार्गो का एक नोट भी बनाया जाएगा। मंत्रालय द्वारा घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, इसीलिए आयात पर प्रतिबंध लगाया गया है। मंत्रालय ने अनुमान लगाया है कि अगले पांच से सात वर्षों के भीतर एम्बार्गो के परिणामस्वरूप लगभग चार लाख करोड़ रुपए के घरेलू अनुबंध होंगे। ध्यान दें कि मई 2020 में वित्त मंत्री ने घोषणा की थी कि आयात के लिए प्रतिबंधित हथियारों और प्लेटफार्म्स की एक सूची वर्ष भर की समयावधि के आधार पर जारी की जाएगीजो कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत होगी।[74]   

डीआरडीओ ने घरेलू उद्योग द्वारा डिजाइन और विकास के लिए 108 सिस्टम्स को चिन्हित किया 

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 108 सिस्टम्स और सबसिस्टम्स की सूची को चिन्हित किया है जिन्हें भारतीय उद्योग द्वारा डिजाइन और विकसित किया जाएगा।[75] इनमें मिनी और माइक्रो अनमैन्ड एरियल वेहिकल, मरीन रॉकेट लॉन्चर, फायर डिटेक्शन प्रणाली और ट्रांसपॉन्डर सिस्टम आदि शामिल हैं। डीआरडीओ जरूरत के आधार पर उद्योग को इन सिस्टम्स के डिजाइन, विकास और परीक्षण के लिए सहयोग प्रदान करेगा। उसने सिस्टम्स के विकास के लिए 2021 की समयावधि तय की है।   

 

नागरिक उड्डयन

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

कैबिनेट ने जयपुर, गुवाहाटी और तिरुअनंतपुरम हवाईअड्डों को पीपीपी मॉडल के जरिए लीज़ पर देने को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने जयपुर, गुवाहाटी और तिरुअनंतपुरम हवाईअड्डों के संचालन, प्रबंधन और विकास को सार्वजनिक निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत लीज़ पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।[76]  इन तीन हवाईअड्डों को प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी प्रक्रिया के जरिए अडानी इंटरप्राइज़ेज़ लिमिटेड को 50 वर्षों की अवधि के लिए लीज़ पर दिया गया है। नीलामी प्रक्रिया फीस प्रति यात्री के मानदंड पर आधारित थी। 

नवंबर 2018 में कैबिनेट ने छह हवाईअड्डों (अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुअनंतपुरम और मैंगलोर) को लीज़ पर देने के लिए मंजूरी दी थी।[77]   अहमदाबाद, लखनऊ और मैंगलोर के हवाईड्डों को जुलाई 2019 में लीज़ आउट कर दिया गया। हालांकि जयपुर, गुवाहाटी और तिरुअनंतपुरम की लीज़ मुकदमेबाजी और अन्य कारणों से नहीं दी जा सकी।[78]   भारतीय एयरपोर्ट अथॉरिटी (एएआई) बोर्ड ने पीपीपी मॉडल के जरिए छह और हवाईअड्डों (भुवनेश्वर, वाराणसी, इंदौर, अमृतसर, रायपुर और त्रिचि) को लीज़ पर देने का सुझाव दिया था।[79] भारत में एएआई द्वारा 129 हवाईअड्डों का प्रबंधन करता है और छह बड़े हवाईअड्डों का प्रबंधन निजी संगठन करते हैं।[80],[81] ये हैं, बेंगलुरू, कोच्चि, दिल्ली, गोवा, हैदराबाद और मुंबई।

उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान) योजना के अंतर्गत नए रूट्स को मंजूरी

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस)-उड़ान के चौथे दौर के अंतर्गत 78 नए रूट्स को मंजूरी दे दी है।[82] यह मंजूरी नीलामी प्रक्रिया के जरिए दी गई है जिसमें हेलीकॉप्टर और सीप्लेन्स भी शामिल हैं। योजना के चौथे दौर की शुरुआत दिसंबर 2019 में की गई थी और इसमें पूर्वोत्तर क्षेत्रों, पहाड़ी राज्यों और द्वीपों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। विभिन्न क्षेत्रों में जिन रूट्स को मंजूरी दी गई है, वे हैं (i) गुवाहाटी से तेजू, रूपसी, पासीघाट, मीसा और शिलांग, (ii) हिसार से चंडीगढ़, देहरादून और धर्मशाला, और (iii) वाराणसी से चित्रकूट और श्रावस्ती। 

उड़ान योजना को 2016 में शुरू किया गया था ताकि सस्ती कीमतों पर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की सुविधा मुहैय्या कराई जा सके।[83]   वर्तमान में योजना के अंतर्गत 766 रूट्स को मंजूरी दी गई है। इनमें से 274 रूट्स को संचालित किया जा रहा है।82 

 

सड़क परिवहन

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

मोटर वाहनों से संबंधित नियमों में विभिन्न ड्राफ्ट संशोधन जारी किए गए 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में विभिन्न ड्राफ्ट संशोधन जारी किए। इनमें संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

वाहन के रजिस्ट्रेशन डॉक्यूमेंट्स में स्वामित्व का उल्लेख:   मंत्रालय ने मोटर वाहन रजिस्ट्रेशन के दस्तावेजों में स्वामित्व को शामिल करने के लिए सुझाव आमंत्रित किए हैं।[84] मंत्रालय ने कहा कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के अंतर्गत वाहन के रजिस्ट्रेशन के फॉर्म्स में फिलहाल स्वामित्व से संबंधित विवरण उचित तरीके से प्रदर्शित नहीं होते। प्रस्तावित ड्राफ्ट नियम एक नए सेक्शन को शामिल करते हैं जिसमें स्वामित्व के प्रकार का प्रावधान है। इसके अंतर्गत श्रेणियों में निम्नलिखित शामिल हैं: (iस्वायत्त निकाय(iiकेंद्र सरकार(iii)  ड्राइविंग स्कूल, (ivदिव्यांगजन, (vफर्म, (viव्यक्तिगत(viiपुलिस विभाग, और (viii) बहु स्वामित्व इत्यादि। 

कृषि मशीनरी के लिए उत्सर्जन के नियममंत्रालय ने कृषि मशीनरी (जैसे खेती में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर, पावर टिलर्स और कंबाइंड हार्वेस्टर्स) और निर्माण उपकरण वाहनों (सीईवी) के लिए उत्सर्जन नियमों को अलग-अलग करने पर सुझाव मांगें हैं।[85] वह इन वाहनों के लिए उत्सर्जन नियमों की शब्दावली को भारत चरण IV (बीएस- IV) और बीएस V से बदलकर (i) ट्रैक्टरों औऱ दूसरे उपकरणों के लिए आरईएम चरण IV और टीआरईएम चरण V, और (ii) निर्माण उपकरण वाहनों के लिए सीईवी- चरण IV और सीईवी चरण V करने का प्रयास करता है। इससे मोटर वाहनों के नियमों में भ्रम पैदा नहीं होगा। मंत्रालय ट्रैक्टरों के लिए इन नियमों की एप्लिकेबिलिटी की समय सीमा को अक्टूबर 2020 से बढ़ाकर अक्टूबर 2021 करने का प्रयास करता है। सीईवीज़ के नियम अप्रैल 2021 से लागू होंगे।

हेलमेट्स का मैन्यूफैक्चरमंत्रालय ने दुपहिया चालकों के लिए सुरक्षात्मक हेलमेट्स को ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2016 (बीआईएस एक्ट) के अनुसार अनिवार्य सर्टिफिकेशन के अंतर्गत लाने के लिए ड्राफ्ट अधिसूचना जारी की है।[86] इससे भारत में केवल बीआईएस सर्टिफाइड हेलमेट्स की मैन्यूफैक्चरिंग और बिक्री होगी। 

पहले से फिटेड बैटरी के बिना इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन की अनुमति

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पहले से फिटेड बैटरी के बिना इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन की अनुमति दे दी है।[87] मंत्रालय ने निर्दिष्ट किया है कि ऐसे वाहनों को टेस्ट एजेंसी द्वारा जारी टाइप अप्रूवल सर्टिफिकट के आधार पर बेचा और रजिस्टर कराया जा सकता है। इसके अतिरिक्त बैटरी के मेक/टाइप या किसी और विवरण को निर्दिष्ट करना रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी नहीं होगा। हालांकि इलेक्ट्रिक वाहन के प्रोटोटाइप और बैटरी (नियमित बैटरी या स्वैपेबल बैटरी) को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के अंतर्गत निर्दिष्ट टेस्टिंग एजेंसियों द्वारा टाइप अप्रूव्ड होना चाहिए। 

नेशनल हाइवे फ्री प्लाजा पर छूट लेने के लिए फास्टैग अनिवार्य 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने टोल फी प्लाजा पर वापसी यात्रा छूट लेने या किसी और किस्म की छूट लेने के लिए फास्टैग को अनिवार्य कर दिया है।[88]   नेशनल हाइवे फी (दरों और कलेक्शन का निर्धारण) नियम, 2008 में संशोधन किया गया था ताकि कुछ छूटों के लिए देय शुल्क को प्री पेड इंस्ट्रूमेंट्स, स्मार्ट कार्ड या फास्टैग या ऑन बोर्ड यूनिट (ट्रांसपोंडर) या किसी अन्य उपकरण से चुकाया जा सके।[89]   नागरिकों को वाहन पर वैध और फंक्शनल फास्टैग होने पर 24 घंटे के भीतर वापसी यात्रा पर स्वतः छूट मिल जाएगी।

 

रेलवे 

Saket Surya (saket@prsindia.org)

रेलवे ने सुरक्षा के लिए ड्रोन आधारित सर्विंलांस प्रणाली शुरू की

रेलवे ने ड्रोन आधारित सर्विलांस प्रणाली स्थापित करने के लिए नौ ड्रोन्स और दो निन्जा अनमैन्ड एरियल वेहिकल खरीदे हैं।[90]   रेलवे की सुरक्षा के लिए रेलवे संरक्षण बल इनका इस्तेमाल करेगा। ड्रोन्स को निम्नलिखित के लिए तैनात किया जाएगा: (iरेलवे एसेट्स का निरीक्षण, (iiआपराधिक और असामाजिक गतिविधियों, जैसे जुए, कचरा फेंकने आदि पर नजर रखना, (iiiआपदा की स्थिति में बचाव, रिकवरी और बहाली, और (ivडेटा जमा करने के कुछ कार्यों, जैसे भीड़ की स्थिति को मापना। रेलवे भविष्य में 17 अतिरिक्त ड्रोन्स भी खरीदेगा। 

 

खनन

Saket Surya (saket@prsindia.org)

खनन क्षेत्र में प्रस्तावित सुधारों पर टिप्पणियां आमंत्रित

खान मंत्रालय ने खनन क्षेत्र में प्रस्तावित सुधारों पर टिप्पणियां आमंत्रित की है।[91] इन सुधारों में खनन क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत घोषणाओं को लागू करने का प्रयास किया गया है।[92] खदान और खनिज (विकास एवं रेगुलेशन) एक्ट, 1957 और एक्ट के अंतर्गत अधिसूचित नियमों में कुछ संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं ताकि इन सुधारों को लागू किया जा सके। प्रस्तावित सुधारों में निम्नलिखित शामिल हैं

  • एंड यूज के प्रतिबंध को हटाना: भविष्य में सभी खदानों को एंड यूज के प्रतिबंधों के बिना नीलाम किया जाएगा। इसके अतिरिक्त मौजूदा कैप्टिव खदानों को उपलब्ध फर्स्ट रिफ्यूजल के अधिकार को भी समाप्त किया जाएगा। वर्तमान में कैप्टिव खदानें पिछले वर्ष उत्खनित कुल खनिजों में से 25तक को बेच सकती हैं। इस सीमा को बढ़ाकर 50कर दिया गया है।
     
  • निजी एंटिटीज़ द्वारा खोज: प्रॉस्पेक्टिंग कम माइनिंग लीज़ नीलामी के जरिए खनिज ब्लॉक्स की आंशिक खोज के लिए दी जाती है। यह लीज़ प्रॉस्पेक्टिंग और खनन गतिविधियों, दोनों के लिए कंपोजिट लाइसेंस होती है। निजी एंटिटीज़ खोज के काम में संलग्न होंगी। उनके द्वारा खोज के काम को राष्ट्रीय मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट फंड द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा।
     
  • ऑक्शन ओन्ली रिजीम से आगे बढ़ना: 2015 के संशोधन एक्ट में यह प्रावधान था कि मौजूदा कनसेशन होल्डर्स और आवेदकों को कुछ अधिकार होंगे।[93] इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) रीकॉनसेंस या प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस (2015 के संशोधन एक्ट के शुरू होने से पहले जारी) के धारक को प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस या माइनिंग लीज़ हासिल करने का अधिकार, और (ii) माइनिंग लीज़ देने का अधिकार, जहां केंद्र सरकार ने अपनी मंजूरी दी हो या 2015 के संशोधन एक्ट के लागू होने से पहले राज्य सरकार ने लेटर ऑफ इनटेंट दिया हो।

मंत्रालय ने कहा था कि संभाव्य से अधिक बड़ी संख्या में लीज़ ब्लॉक हो गई हैं क्योंकि या तो उन्हें लीज़ देने की अवधि खत्म हो गई है या कानूनी गतिरोध के कारण वे नीलामी में शामिल नहीं हो पाई हैं। मंत्रालय ने 1957 के एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव रखा ताकि ऐसे ब्लॉक्स को नीलामी के जरिए दोबारा आबंटित किया जा सके। उसने एक ऐसी अथॉरिटी की नियुक्ति का प्रस्ताव भी रखा जो उन लोगों को खोज में खर्च हुए व्यय की अदायगी कर सके, जिनके अधिकार रद्द हो जाएंगे। 

  • नॉन वर्किंग खदानों का दोबारा आबंटननिजी कंपनियों के स्वामित्व वाली खदानें जो तीन साल से ऑपरेशनल नहीं हैं, उन्हें नीलामी के जरिए दोबारा आबंटित करने के लिए संबंधित राज्य को दे दिया जाएगा। सार्वजनिक क्षेत्र की यूटिलिटीज़ को आबंटित खदानों के साथ भी ऐसा ही किया जाएगा, जो उत्पादन नहीं कर रही हैं।
     
  • गैरकानूनी खनन की परिभाषामंत्रालय ने कहा कि वर्तमान में लीज़होल्ड क्षेत्र के बाहर होने वाले गैरकानूनी खनन और माइनिंग लीज़ क्षेत्र के भीतर मंजूरियों का उल्लंघन करते हुए खनन के बीच कोई फर्क नहीं है। 1957 के संशोधन एक्ट में यही प्रस्तावित किया गया है कि लीज़होल्ड क्षेत्र के बाहर गैरकानूनी खनन को लीज़ क्षेत्र के भीतर के खनन से अलग करके देखा जाएगा। 

 

बिजली

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

कुछ सोलर और विंड पावर प्लांट्स के लिए अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन चार्ज और ट्रांसमिशन के नुकसान पर छूट

बिजली मंत्रालय ने कुछ सोलर और विंड पावर प्लांट्स के अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन चार्ज और ट्रांसमिशन के नुकसान पर छूट से संबंधित एक आदेश जारी किया।[94] यह नेशनल इलेक्ट्रिसिटी टैरिफ पॉलिसी, 2016 के अनुरूप है। जो पावर प्लांट्स निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करेंगे, उन्हें कमीशनिंग की तारीख से 25 वर्ष की अवधि के लिए यह छूट मिलेगी:

  • ऊर्जा के सौर या वायु स्रोतों का इस्तेमाल करने वाले वाले पावर प्लांट्स जिन्हें 30 जून, 2023 तक कमीशन्ड किया गया है, पात्र होंगे। इनमें हाइब्रिड सोलर विंड पावर प्लांट्स भी शामिल हैं। 
     
  • केवल वही प्लांट्स पात्र होंगे जो रीन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (आरपीओ) वाली एंटिटीज़ को बिजली बेचते हैंभले ही बिजली की आपूर्ति आरपीओ के भीतर हो या न हो। वितरण लाइसेंसधारियों के लिए उत्पादित बिजली के लिए केंद्र सरकार से संबंधित दिशानिर्देशों के अंतर्गत एक प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए बिजली की खरीद होनी चाहिए।
     
  • सोलर पावर प्लांट्स को नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (सीपीएसयू) योजना चरण 2 या सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के मैन्यूफैक्चरिंग लिंक्ड कैपिसिटी स्कीम के टेंडर के अंतर्गत कमीशन होना चाहिए। मंत्रालय के सीपीएसयू योजना चरण 2 का लक्ष्य सरकारी उद्देश्य के लिए राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता को सहज बनाना है। इसके लिए सरकार द्वारा उत्पादन के जरिए सोलर प्रॉजेक्ट्स लगाए जाएंगे।[95]

सीईआरसी (अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन चार्ज और नुकसान की शेयरिंग) रेगुलेशंस, 2020 प्रभावी होंगे 

केंद्रीय बिजली रेगुलेटरी कमीशन (सीईआरसी) ने सीईआरसी (अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन चार्ज और नुकसान की शेयरिंग) रेगुलेशन, 2020 आगामी 1 नवंबर, 2020 से प्रभावी होंगे।[96] रेगुलेशंस 4 मई, 2020 को अधिसूचित किए गए थे जिनका उद्देश्य कुछ हितधारकों के बीच अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन चार्ज और नुकसान की शेयरिंग को रेगुलेट करना है।[97]   रेगुलेशंस निम्नलिखित पर लागू हैं: (i) नामित अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली के कस्टमर (डीआईसीज़), (ii) अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन लाइसेंसी, (iii) लोड डिस्पैच सेंटर्स (राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और राज्य), और (iv) क्षेत्रीय बिजली कमिटियां। 

 

नवीन और अक्षय ऊर्जा

Aditya Kumar (aditya@prsindia.org)

बायोमास कोजनरेशन प्रॉजेक्ट्स के संवर्धन की योजना 2021 तक बढ़ाई गई

नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने चीनी मिलों और दूसरे उद्योगों में बायोमास आधारित कोजनरेशन के संवर्धन को समर्थन देने वाली योजना को 31 मार्च, 2021 तक के लिए बढ़ा दिया है।[98] योजना 11 मई, 2018 से 31 मार्च, 2020 तक की अवधि के लिए वैध थी।[99]  यह योजना बिजली उत्पादन के लिए बायोमास आधारित कोजनरेशन प्रॉजेक्ट्स को लगाने या उसे विस्तार देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।99  

 

शिक्षा

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

यूजीसी ने इंटर्नशिप एंबेडेड प्रोग्राम्स के लिए दिशानिर्देश प्रकाशित किए 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अपरेंटिसशिप या इंटर्नशिप एम्बेडेड डिग्री कार्यक्रमों को प्रस्तुत करने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए दिशानिर्देश प्रकाशित किए हैं।[100]  दिशानिर्देशों के निम्नलिखित लक्ष्य है: (iस्नातक प्रोग्राम्स में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की रोजगारपरकता में सुधारऔर (iiउच्च शिक्षा प्रणाली और उद्योग के बीच संबंधों को सुधारना। उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षा संस्थान (एचईआई) का कोई भी प्रोग्राम इंटर्नशिप के साथ एम्बेडेड होगा। एचईआई डिग्रियां देने के लिए अधिकृत है। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:

  • इंटर्नशिप में कार्य-आधारित शिक्षा प्राप्त करने के लिए कार्यस्थल के परिसर में (संस्थान परिसर में नहीं) प्रशिक्षण की पेशकश करेगा।
     
  • एचईआई के पास इंटर्नशिप एम्बेडेड प्रोग्राम शुरू करने से पहले इंटर्नशिप प्रदान करने के लिए संगठनोंउद्यमों और औद्योगिक निकायों के साथ एक पूर्व समझौता ज्ञापन होना चाहिए।
     
  • डिग्री का कम से कम 20क्रेडिट इंटर्नशिप के हिस्से होना चाहिए।
     
  • इंटर्नशिप एम्बेडेड प्रोग्राम से ग्रैजुएट होने वाले विद्यार्थी उसी विषय में मास्टर प्रोग्राम में प्रवेश लेने के लिए पात्र होंगे। यह उस विषय के लिए भी किया जा सकता है जिसके लिए उन्होंने न्यूनतम 24 क्रेडिट अर्जित किए हैं (इंटर्नशिप के दौरान अर्जित क्रेडिट सहित)।
     
  • एचईआई के पास यह विकल्प होगा कि वह  प्रोग्राम की कुल अवधि में बदलाव किए बिना डिग्री प्रोग्राम के हिस्से के रूप में इंटर्नशिप के कम से कम एक सेमिस्टर को एम्बेड कर सके। 
     
  • संस्थान उद्योग/संगठन के परामर्श से इंटर्नशिप के आकलन का विकल्प चुन सकते हैं जहां इंटर्नशिप प्रदान की जा रही है।

 

संचार

Saket Surya (saket@prsindia.org)

स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज के आकलन के तरीके के संबंध में सुझाव

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने स्पेक्ट्रम शेयरिंग के मामलों में स्पेक्ट्रम यूजेस चार्ज के आकलन के तरीकों से संबंधित सुझाव जारी किए हैं।[101] 

मोबाइल एक्सेस सर्विस देने वाले लाइसेंसियों को स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज (एसयूसी) देना होता है जिसे एनुअल ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) के प्रतिशत के तौर पर कंप्यूट किया जाता है।[102]  ये चार्ज 3से 8के बीच होते हैं जोकि वायरलेस लाइसेंसी के स्पेक्ट्रम के परिमाण और प्रकार पर निर्भर करता है।[103]  एजीआर सकल राजस्व से स्वीकार्य कटौतियों के बाद शुद्ध राजस्व होता है। सकल राजस्व से कुछ शुल्कों और करों, जैसे दूसरे सर्विस प्रोवाइडर्स को दिए जाने वाले रोमिंग चार्ज और सेवा कर एवं बिक्री कर को घटाने के बाद एजीआर प्राप्त होता है।  

लाइसेंसी जिसे किसी निर्दिष्ट प्रक्रिया (नीलामी  या प्रशासनिक आबंटन) के जरिए स्पेक्ट्रम आबंटित किया जाता है, अपने स्पेक्ट्रम को किसी दूसरे लाइसेंसी के साथ साझा कर सकता है।101  वर्तमान में स्पेक्ट्रम की शेयरिंग को सिर्फ एक ही बैंड में शेयर किया जा सकता है।101  शेयरिंग के बाद हर लाइसेंसी का एसयूसी रेट 0.5बढ़ जाता है।101  टेलीकम्यूनिकेशंस विभाग से यह अनुरोध किया गया है कि एसयूसी के बढ़े हुए रेट (इंक्रेमेंटल रेट) को सिर्फ शेयर किए गए स्पेक्ट्रम पर लागू किया जाए, न कि लाइसेंसी के पूरे बैंड पर। विभाग ने ट्राई से कहा कि वह इस संबंध में अपने सुझाव पेश करे। मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • इन्क्रेमेंटल रेट की एप्लिकेबिलिटी: ट्राई ने सुझाव दिया था कि एसयूसी रेट पर 0.5के इन्क्रेमेंट को उस विशेष बैंड के स्पेक्ट्रम पर लागू होना चाहिए जिसमें शेयरिंग की जा रही है, न कि लाइसेंसी के पूरे स्पेक्ट्रम पर। उसने कहा कि लाइसेंसी के पूरे स्पेक्ट्रम पर इन्क्रेमेंटल एसयूसी रेट लागू होने की स्थिति में, स्पेक्ट्रम शेयरिंग की लागत, उस शेयरिंग से प्राप्त होने वाले लाभ से अधिक हो सकती है। 
     
  • स्पेक्ट्रम शेयरिंग के समाप्त करने की सूचनाट्राई ने कहा कि स्पेक्ट्रम शेयरिंग के मौजूदा दिशानिर्देशों में लाइसेंसी द्वारा स्पेक्ट्रम शेयरिंग एग्रीमेंट को परस्पर समाप्त करने का विशिष्ट उल्लेख नहीं होता। उसने सुझाव दिया कि इसका उल्लेख दिशानिर्देशों में होना चाहिए। इससे जरूरत और वाणिज्यिक आधार पर स्पेक्ट्रम के प्रबंधन को फ्लेक्सिबिलिटी मिलने की उम्मीद है।

ट्राई ने टेलीकॉम की विभिन्न लेयर्स पर आधारित नई लाइसेंस प्रणाली पर विचार मांगे

ट्राई ने डिफरेंशियल लाइसेंसिंग के जरिए टेलीकॉम की विभिन्न लेयर्स की अनबंडलिंग को आसान बनाने के लिए परामर्श पत्र जारी किया।[104]  मौजूदा यूनिफाइड लाइसेंस प्रणाली टेलीकॉम की अलग-अलग लेयर्स, जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, नेटवर्क, सर्विस और एप्लिकेशन के बीच कोई अंतर नहीं करती। इसका अर्थ यह है कि ऐसे अलग-अलग लाइसेंसों के लिए कोई प्रावधान नहीं है जिससे एंटिटीज़ इन लेयर्स में स्वतंत्र रूप से ऑपरेट कर सकें।   

यह परामर्श पत्र राष्ट्रीय डिजिटल कम्यूनिकेशंस नीति 2018 के अनुरूप है जिसमें टेलीकॉम की अनेक लेयर्स के लिए डिफेंशियल लाइसेंसिंग प्रणाली पर गौर किया गया है।105  ऐसी लाइसेंसिंग प्रणाली से निवेश, व्यापार सुगमता और क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त यह टेलीकॉम संसाधनों की शेयरिंग और उसके अधिकतम उपयोग के अवसर प्रदान करेगा।

मौजूदा लाइसेंसिंग प्रणाली के अनुसार, टेलीकम्यूनिकेशंस विभाग द्वारा जारी यूनिफाइड लाइसेंस इंफ्रास्ट्रक्चर, नेटवर्क और सर्विस लेयर्स को अलग-अलग नहीं करता। हालांकि ऐसे कई लाइसेंस भी हैं जो सीमित तरीके से सेग्रेगेशन के लिए प्रावधान करते हैं।105  इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (iइंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर लाइसेंस जिसमें एंटिटी की कुछ टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के स्वामित्व, स्थापना और रखरखाव तथा इन्हें टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर (टीएसपीज़) को लीज़ करने, किराए पर देने या बेचने की अनुमति है, और (iiवर्चुअल नेटवर्क ऑपरेटर (वीएनओ) लाइसेंस उन इंटरप्राइजेज, जिनके पास स्पेक्ट्रम नहीं है, को अनुमति देता है कि वे टीएसपीज़ को स्पेक्ट्रम शेयरिंग के जरिए वायरलेस सेवा प्रदान कर सकते हैं।105 

ट्राई ने निम्नलिखित मामलों पर विचार मांगे हैं: (i) नेटवर्क सर्विस और सर्विस डिलिवरी लेयर्स के सेपरेशन की जरूरत और इन दोनों लेयर्स में लाइसेंस का विस्तार, (iiक्या नेटवर्क सर्विस लाइसेंसी को सर्विस डिलिवरी में शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए, और (iiiक्या मौजूदा यूनिफाइड लाइसेंसी को अनबंडल्ड लाइसेंसिंग प्रणाली से स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

टिप्पणियां 17 सितंबर, 2020 तक आमंत्रित हैं। 

ट्राई ने ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और ब्रॉडबैंड की स्पीड बढ़ाने के रोडमैप पर विचार मांगे

ट्राई ने ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने और ब्रॉडबैंड स्पीड बढ़ाने के रोडमैप पर एक परामर्श पत्र जारी किया।[105]   ट्राई ने कहा कि कोविड-19 के बाद ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पर निर्भरता बढ़ेगी और इन सेवाओं की मांग बहुत तेजी से बढ़ने की संभावना है।

संचार को ब्रॉडबैंड और नैरोबैंड के बीच वर्गीकृत किया जा सकता है जोकि संचार के लिए जरूरी बैंडविड्थ के आधार पर तय होता है। ब्रॉडबैंड कम्यूनिकेशन एक उच्च बैंडविड्थ का उपयोग करता है और बेहतर गति प्रदान करता है। वर्तमान में एक ब्रॉडबैंड कनेक्शन को इस तरह परिभाषित किया जाता है कि जिसमें किसी एक सबस्क्राइबर को 512 kbps (kilobits प्रति सेकेंड) की न्यूनतम डाउनलोड स्पीड मिलती है।105 मार्च 2020 तकभारत में 93इंटरनेट उपभोक्ता ब्रॉडबैंड कनेक्शन का उपयोग करते थे।105 सभी देशों में ब्रॉडबैंड की स्पीड की अधिकतम सीमा अलग-अलग है। उदाहरण के लिए संयुक्त राज्य अमेरिकाब्रिटेन और चीन में यह क्रमशः 25 Mbps (Mbps प्रति सेकंड), 24 Mbps और 20 Mbps है।105

ब्रॉडबैंड कनेक्शन को लास्ट माइल कनेक्टिविटी के मोड पर फिक्स और मोबाइल बेस्ड के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। फिक्स्ड ब्रॉडबैंड ग्राहक को किसी परिसर (निश्चित स्थान) में प्रदान किया जाता है जबकि मोबाइल ब्रॉडबैंड एक पोर्टेबल कनेक्शन होता है जो वायरलेस नेटवर्क से जुड़े हैंडहेल्ड डिवाइस (मोबाइलडोंगल) के जरिए प्रदान किया जाता है। मार्च 2020 तकभारत में 97ब्रॉडबैंड सबस्क्राइबर मोबाइल ब्रॉडबैंड का उपयोग करते थे।

ट्राई ने कहा कि भारत में मोबाइल ब्रॉडबैंड की डाउनलोड स्पीड 12 Mbps और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की लगभग 38.19 Mbps है।105 जबकि विश्वव्यापी औसत क्रमशः 14.9 Mbps और 83 Mbps है।105 मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड में 138 देशों में भारत का स्थान 129वां है और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड स्पीड में 174 देशों में 75वां।105 उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय डिजिटल कम्यूनिकेशंस नीति 2018 में 2022 तक प्रत्येक नागरिक के लिए 50 Mbps की ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी हासिल करने की मांग की गई है।105  

जिन मुद्दों पर टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैंउनमें शामिल हैं: (iब्रॉडबैंड की परिभाषा में संशोधन और ऐसे संशोधन के मानदंड की जरूरत(iiऑप्टिकल फाइबर बिछाने और सामान्य डक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए राइट ऑफ वे की अनुमति, (iiiफिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेवाओं की सबस्क्रिप्शन रेट में सुधार के तरीके(ivमोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड के धीमे होने का कारण और इस समस्या को कैसे दूर किया जा सकता हैऔर (vकंज्यूमर डिवाइस के लिए न्यूनतम मानदंडों की जरूरत।

टिप्पणियां 21 सितंबर2020 तक आमंत्रित हैं।

 

अल्पसंख्यक मामले

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

नई रोशनी योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के लिए आधार नामांकन जरूरी

अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय अल्पसंख्यक महिलाओं में नेतृत्व विकास के लिए नई रोशनी नामक योजना चलाता है।[106] इस योजना का उद्देश्य अल्पसंख्यक महिलाओं को सरकारी प्रणालियों, बैंकों और मध्यस्थों से इंटरैक्ट करने के टूल्स प्रदान करना है। मंत्रालय ने अधिसूचित किया है कि लाभार्थियों को इस योजना के अंतर्गत लाभ हासिल करने के लिए आधार नंबर का प्रमाण देना होगा। जिन महिलाओं का अब तक आधार के अंतर्गत नामांकन नहीं हुआ है, उन्हें योजना के अंतर्गत उपलब्ध प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने से पहले नामांकन करना होगा।  

 

[1] Ministry of Health and Family Welfare website, last accessed on August 28, 2020, https://www.mohfw.gov.in/index.html.

[2] Order No40-3/2020-DM-I(A), Ministry of Home Affairs, March 24, 2020, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHAorder%20copy.pdf

[3] Order No40-3/2020-DM-I(A), Ministry of Home Affairs, August 29, 2020, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHAOrder_Unlock4_29082020.pdf.

[4] Statement on Developmental and Regulatory Policies, Reserve Bank of India, August 6, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR150332B938A0C7E4C64AE20D15EA85F8DB1.PDF

[5] Resolution Framework for COVID-19-related Stress, Reserve Bank of India, August 6, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NT168F87DBE0F71643B3B17BC8278108C16B.PDF

[6] Prudential Framework for Resolution of Stressed Assets, Reserve Bank of India, June 7, 2019, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/PRUDENTIALB20DA810F3E148B099C113C2457FBF8C.PDF

[7] Reserve Bank announces constitution of an Expert Committee, Press Release, Reserve Bank of India, August 7, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR1567043C21BC02048D6B687D7EEC5983E26.PDF

[8] Guidelines for Credit Guarantee Scheme for Subordinate Debt to Stressed/NPA MSMEs, Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises, August 19, 2020, https://msme.gov.in/sites/default/files/SubdebtBookletversion2.pdf.

[9] Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises (MSMEslaunches another funding scheme to help the distressed MSME sector, Press Information Bureau, Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises, June 24, 2020.

[11] ‘External Benchmark Based Lending Medium Enterprises, Notifications, Reserve Bank of India, February 26, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NOT167D1 928275E5B34287AD44E1D5DFDB6561.PDF.

[12] External Benchmark Based Lending, Notifications, Reserve Bank of India, September 4, 2019, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NOTI53B2 38D8EB8CD847E7AE8031090F4DCE00.PDF.

[13] Notification No29/2015-2020, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, August 25, 2020, https://content.dgft.gov.in/Website/dgftprod/044dee49-bea7-4bf0-9cb7-5511f5cdab52/Noti%20%2029%20Eng.pdf

[14] Notification No23/2015-2020, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, August 4, 2020, https://content.dgft.gov.in/Website/dgftprod/5b45c9f5-baab-4dd6-b576-348e2fb8cf03/Noti%20No.%2023%20dated%2004.08.2020%20-%20Eng.pdf

[15] Notification No44/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, January 31, 2020, https://content.dgft.gov.in/Website/Noti%2044_0.pdf

[16] Notification No6/2015-2020, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, May 16, 2020, https://content.dgft.gov.in/Website/Notification%20English%20Final_0.pdf

[17] Notification No16/2015-2020, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, June 29, 2020, https://content.dgft.gov.in/Website/dgftprod/78ceceb3-0638-4a28-9a29-d0627a147a90/Noti%2016%20Eng_0.pdf

[18] Notification No29/2015-2020, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, July 28, 2020, https://content.dgft.gov.in/Website/dgftprod/e576fbb1-b0f9-4276-913e-cab13010b16b/Noti%2021%20Eng.pdf

[19] Notification No53/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, March 24, 2020, https://content.dgft.gov.in/Website/Noti%2053_0.pdf

[20] Order No40-3/2020-DM-1(A), Ministry of Home Affairs, July 29, 2020, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/Unlock3_29072020.pdf.

[21] “Eligibility Criteria for purchase of tickets for outbound repatriation flights by Air India and Air India Express, Ministry of Civil Aviation, accessed on August 25, 2020, 

https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/Vande_Bharat_Mission_Eligibillity_criteria_Outbound_7_May%202020.pdf.

[22] “About Air Transport Bubbles, Ministry of Civil Aviation, last accessed on August 25, 2020, https://www.civilaviation.gov.in/en/about-air-transport-bubbles.

[23] Order No40-3/2020-DM-1(A), Ministry of Home Affairs, August 22, 2020, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHASOP_22082020.pdf.

[24] Guidelines for international arrivals, Ministry of Health and Family Welfare, August 2, 2020, https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/RevisedguidelinesforInternationalArrivals02082020.pdf.pdf.

[25] Guidelines for international arrivals, Ministry of Health and Family Welfare, May 24, 2020, https://www.mohfw.gov.in/pdf/Guidelinesforinternationalarrivals.pdf

[26] Office Memorandum NoAV.29017/5/2020-DT, Ministry of Civil Aviation, August 27, 2020, https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/Updation_of_Guidelines.pdf.

[27] Office Memorandum NoAV.29017/5/2020-DT, Ministry of Civil Aviation, August 27, 2020, https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/SOP_domestic.pdf.

[28] Praneeth Kand OrsvsUniversity Grants Commission (UGCand Ors., MANU/SC/0645/2020, Supreme Court of India, August 28, 2020, https://main.sci.gov.in/supremecourt/2020/15106/15106_2020_35_1501_23651_Judgement_28-Aug-2020.pdf.

[29] “UGC Revised Guidelines on Examinations and Academic Calendar for the Universities in view of COVID-19 Pandemic, University Grants Commission, July 6, 2020, https://www.ugc.ac.in/pdfnews/6100894_UGC-RevisedGuidelines-on-Examinations-and-Academic-Calendar-forthe-Universities-in-view-of-COVID-19Pandemic_06_07_2020.pdf.

[30] Companies (Corporate Social Responsibility PolicyRules, 2020, Ministry of Corporate Affairs, August 24, 2020, http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/csr_26082020.pdf

[31] Companies (Corporate Social Responsibility PolicyRules, 2020, Ministry of Corporate Affairs, February 27, 2014, https://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/CompaniesActNotification2_2014.pdf

[32] Schedule VII, Companies Act, 2013, https://www.mca.gov.in/SearchableActs/Schedule7.htm

[33] G.S.R313(E), Ministry of Corporate Affairs, e-Gazette, May 26, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/219562.pdf

[34] G.S.R525(E), Ministry of Corporate Affairs, e-Gazette, August 24, 2020, http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/NotificationCompAct_26082020.pdf

[35] Validity of Motor Vehicle documents extended till December this yearPress Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, August 24, 2020

[36] Shipping Ministry reduces port tariff rates ranging from 60to 70for Cruise Ships, Press Information Bureau, Ministry of Shipping, August 14, 2020.  

[37] “Aarogya Setu introduces Open API Service, a novel feature to help the people, businesses and the economy to return to normalcy, Press Information Bureau, Ministry of Electronics and Information Technology, August 22, 2020.

[38] Guiding Principles and SOP on preventive measures for Media Production to contain spread of COVID-19, Ministry of Information and Broadcasting, August 21, 2020, https://mib.gov.in/sites/default/files/SOP%20on%20Media%20Production%2021%20Aug%202020%20%281%29.pdf.

[39] Cabinet approves measures to provide liquidity in the Power Sector Dues to the financial stress caused by COVID-19, Ministry of Power, August 19, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1646947.

[40] Power Ministry advises Gencos and Transcos to charge Late Payment Surcharge at a rate not exceeding 12per annum, Ministry of Power, August 22, 2020, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1647854.

[41] Presentation made by Union Finance & Corporate Affairs Minister MsNirmala Sitharaman under Aatmanirbhar Bharat Abhiyaan to support Indian economy in fight against COVID-19, Ministry of Finance, May 13, 2020, https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/Aatmanirbhar%20Presentation%20Part-1%20Business%20including%20MSMEs%2013-5-2020.pdf

[42] Estimates of Gross Domestic Product
 for the First Quarter 
(April-June2020-2021Press Release, Central Statistics Office, Ministry of Statistics and Programme Implementation, August 31, 2020, http://www.mospi.gov.in/sites/default/files/press_release/PRESS_NOTE-Q1_2020-21.pdf

[43] “Quick Estimates of Index of Industrial Production and Use Based Index for the Month of June 2020 (Base 2011-12=100)”, Press Release, Central Statistics Office, Ministry of Statistics and Programme Implementation, August 11, 2020,   http://www.mospi.gov.in/sites/default/files/press_release/iipJune20.pdf

[44] Monetary Policy Statement, 2020-21, Reserve Bank of India, August 6, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR1497A6D2EBE3DB24DF68ECD63544FF8722F.PDF

[45] Borrowing options to meet the GST Compensation requirement for 2020-21, Press Information Bureau, Ministry of Finance, August 29, 2020.

[47] Securities and Exchange Board of India (Research AnalystsRegulations, 2014, https://www.sebi.gov.in/sebi_data/commondocs/RESEARCHANALYSTS-regulations_p.pdf

[48] Circular NoSEBI/HO/IMD/DF1/CIR/P/2020/147, Securities and Exchange Board of India, August 3, 2020, https://www.sebi.gov.in/legal/circulars/aug-2020/procedural-guidelines-for-proxy-advisors_47250.html

[50] Circular NoSEBI/HO/IMD/DF1/CIR/P/2020/157, Securities and Exchange Board of India, August 27, 2020, https://www.sebi.gov.in/legal/circulars/aug-2020/procedural-guidelines-for-proxy-advisors-extension-of-implementation-timeline_47412.html

[51] Framework for authorization of pan-India Umbrella Entity for Retail Payments, Reserve Bank of India, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/Content/PDFs/FRAMEWORK867D1583D86445828ADEF4DF5D1C4E41.PDF

[52] Reserve Bank invites comments on the draft framework for recognition of a Self-Regulatory Organisation (SROfor Payment System Operators, Press Release, Reserve Bank of India, August 18, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR20728B58D1E0D2644099B3220A4854AFB9C.PDF. . 

[53] The Payment and Settlement Systems Act, 2007.

[54] Draft framework for recognition of a Self-Regulatory Organisation for Payment System Operators, Reserve Bank of India, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/Content/PDFs/SRO180820201773C582533449418FE4D369A8709A08.PDF

[55] Circular NoDPSS.CO.PD No.116/02.12.004/2020-21, Reserve Bank of India, August 6, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/21ODR602F0A579EB246AA885776A76122DB0C.PDF

[56] Circular NoDPSS.CO.PD.No.115/02.14.003/2020-21, Reserve Bank of India, August 6, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NOTI22E337913692C04560A953EEC75CCF099C.PDF

[57] Draft Health Data Management Policy, Ministry of Health and Family Welfare, https://ndhm.gov.in/stakeholder_consultations/ndhm_policies

[58] Report of the Committee on Business Responsible Reporting, Ministry of Corporate Affairs, August 2020, http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/BRR_11082020.pdf

[59] Constitution of Committee for finalising the Business Responsibility Reporting (BRRFormat for Listed and Unlisted Companies, Ministry of Corporate Affairs, November 14, 2018, http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/NewandUpdateConstitutionOfCommitte_15112018.pdf

[60] National Guidelines on Responsible Business Conduct, Ministry of Corporate Affairs, March 2019, https://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/NationalGuildeline_15032019.pdf

[61] Aadhaar Authentication for Good Governance (Social Welfare, Innovation, KnowledgeRules, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220856.pdf

[62] Aadhaar and Other Laws (AmendmentAct, 2019, https://uidai.gov.in/images/news/Amendment_Act_2019.pdf

[63] Central Government constitutes National Council for Transgender Persons, Ministry of Social Justice and Empowerment, Press Information Bureau, August 24, 2020.

[64] S.O2849(E), Ministry of Social Justice and Empowerment, August 21, 2020, https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/221294.pdf.

[65] “Policy Guidelines for Empanelment of Social Media Platforms with Bureau of Outreach and Communication

Ministry of Information and Broadcasting, August 17, 2020, https://mib.gov.in/sites/default/files/PolicyGuidelinesforSocialMediaPlatforms2020.pdf.

[66] G.S.R496 (E), The Sugar Development Fund (AmendmentRules, 2020, Department of Food and Public Distribution, August 7, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220998.pdf.

[68] Cabinet approves Fair and Remunerative Price of sugarcane payable by sugar mills for the sugar season 2020-21, Press Information Bureau, Ministry of Consumer Affairs, Food & Public Distribution, August 19, 2020.

[69] “Cabinet approves Determination of Fair and Remunerative Price’ of sugarcane payable by sugar mills for 2019-20 sugar season, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, July 24, 2019.  

[70] MoD releases draft Defence Production and Export Promotion Policy 2020, Press Information Bureau, Ministry of Defence, August 3, 2020.

[71] Draft Defence Production and Export Promotion Policy (DPEPP2020, Ministry of Defence, August 3, 2020,       https://www.makeinindiadefence.gov.in/admin/webroot/writereaddata/upload/recentactivity/Draft_DPEPP_03.08.2020.pdf

[72] Innovations for Defence Excellence", Department of Defence Production, Ministry of Defence, https://www.makeinindiadefence.gov.in/admin/writereaddata/upload/files/Complete%20document%20on%20iDEX_1.pdf.

[73] MoD's big push to Aatmanirbhar Bharat initiative; Import embargo on 101 items beyond given timelines to boost indigenisation of defence production, Press Information Bureau, Ministry of Defence, August 9, 2020.

[74] Presentation of details of 4th Tranche announced by Union Finance & Corporate Affairs Minister SmtNirmala Sitharaman under Aatmanirbhar Bharat Abhiyaan to support Indian economy to fight against COVID-19, May 16, 2020, https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/AatmaNirbhar Bharat Full Presentation Part 4 16-5-2020.pdf.

[75] DRDO identifies 108 Systems and Subsystems for industry to design, develop and manufacture towards achieving Atmanirbhar Bharat, Press Information Bureau, Ministry of Defence, August 24, 2020.

[76] “Cabinet approves proposal for leasing out three airports Jaipur, Guwahati and Thiruvananthapuram of Airports Authority of India through Public Private Partnership, Press Information Bureau, Ministry of Civil Aviation, August 19, 2020.

[77] “Cabinet approves leasing out six airports Ahmedabad, Jaipur, Lucknow, Guwahati, Thiruvananthapuram and Mangaluru through PPP, Press Information Bureau, Government of India, November 8, 2018.

[78] Starred Question No256, Lok Sabha, Ministry of Civil Aviation, December 9, 2019, http://164.100.24.220/loksabhaquestions/annex/172/AS256.pdf

[79] Airports AAI airports awarded in principle’ on PPP, Press Information Bureau, Ministry of Civil Aviation, December 23, 2019.

[80] Annual Report 2017-18, Ministry of Civil Aviation, https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/annual_report-2017_18_en.pdf

[81] Association of Private Airport Operators, http://www.apaoindia.com/?page_id=32.

[82] 78 New Routes Approved Under UDAN 4.0, Press Information Bureau, Ministry of Civil Aviation, August 27, 2020.

[83] Regional Connectivity Scheme UDAN, Ministry of Civil Aviation, October 2016, https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/Final%20Regional%20Connectivity%20Scheme%20%28RCS%29.pdf

[84] Draft Rules, G.S.R515(E)., Ministry of Road Transport and Highways, August 18, 2020, egazette.nic.in/WriteReadData/2020/221236.pdf

[85] Draft Rules, GS.   R491(E). Ministry of Road Transport and Highways, August 5, 2020, egazette.nic.in/WriteReadData/2020/220988.pdf

[86] “MoRTH invites public suggestions on enforcing BIS certification for two-wheeler helmets, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, August 1, 2020

[87] MoRTH allows Sale and Registration of Electric Vehicles without batteriesPress Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, August 12, 2020

[88] FASTag made mandatory for availing all discounts on the National Highways Fee PlazasPress Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, August 26, 2020

[89] G.S.R523(E), Ministry of Road Transport and Highways, August 24, 2020, egazette.nic.in/WriteReadData/2020/221323.pdf

[90] “Indian Railways introduces Drone based surveillance system for Railway Security, Press Information Bureau, Indian Railways, August 18, 2020.

[91] “Note on the proposal for mining reforms, Ministry of Mines, August 24, 2020, https://mines.gov.in/writereaddata/UploadFile/notice24082020.pdf

[92] Atmanirbhar Bharat Abhiyan, Part IV,   Ministry of Finance, May 16, 2020, https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/AatmaNirbhar%20Bharat%20Full%20Presentation%20Part%204%2016-5-2020.pdf

[93] Section 10A of the Mines and Minerals (Development and RegulationAct, 1957 inserted by the Mines and Minerals Development and Regulation (AmendmentAct, 2015, https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/1421/1/A1957-67.pdf

[94] “Charging infrastructure for Electric Vehicle-Revised guidelines and standards, Ministry of Power, October 1, 2019, https://powermin.nic.in/sites/default/files/webform/notices/Charging_Infrastructure_for_Electric_Vehicles%20_Revised_Guidelines_Standards.pdf.

[95] Order No302/4/2017-GRID SOLAR, Ministry of New and Renewable Energy, march 5, 2019, https://mnre.gov.in/img/documents/uploads/fdd16dbd0a154973a7e5884edeed5e08.pdf.

[96] Notification NoL-1/250/2019/CERC, Central Electricity Regulatory Commission, August 8, 2020, http://www.cercind.gov.in/2020/Regulation/Effective_Date_of_Sharing_Regulations2020.pdf.

[97] Notification NoL-1/250/2019/CERC, Central Electricity Regulatory Commission, May 4, 2020, http://www.cercind.gov.in/2020/regulation/158-Gaz.pdf.

[98] OM Number 19/276/276-Biomass Power Division, Ministry of New and Renewable Energy, August 24, 2020, https://mnre.gov.in/img/documents/uploads/file_f-1598492901930.pdf.

[99] “Scheme to support promotion of biomass based cogeneration in sugar mills and other industries in the country (up to March 2020)”, Ministry of New and Renewable Energy, May 5, 2018, https://164.100.77.194/img/documents/uploads/997d351fae16480dbb85065f47ad1c51.pdf

[100] Union HRD Minister virtually launches UGC Guidelines for Higher Education Institutions to offer Apprenticeship/Internship embedded Degree Programme, Ministry of Human Resource Development, August 7, 2020, https://www.mhrd.gov.in/sites/upload_files/mhrd/files/ugc_pr_0.pdf.

[101] Recommendations on Methodology of applying Spectrum Usage Charges (SUCunder the weighted average method of SUC assessment, in cases of Spectrum Sharing, Telecom Regulatory Authority of India, August 17, 2020, https://trai.gov.in/sites/default/files/Recommendation_17082020_0.pdf.

[102] Recommendations on Auction of Spectrum in 700 MHz, 800 MHz, 900 MHz, 1800 MHz, 2100 MHz, 2300 MHz, 2500 MHz,3300-3400 MHz, 3400-3600 MHz Bands,

Telecom Regulatory Authority of India, August 1, 2018,

https://main.trai.gov.in/sites/default/files/RecommendatinsAuctionofSpectrum01082018.pdf.   

[103] Spectrum Usage Charges (SUC)- Overview, Website of Principal Controller of Communication Accounts, Tamil Nadu, Ministry of Communications, as accessed on March 3, 2020, https://ccatn.gov.in/license%20fee/overview%20spc.htm.

[104] “Consultation Paper on Enabling Unbundling of Different Layers Through Differential Licensing, Telecom Regulatory Authority of India, August 20, 2020, https://trai.gov.in/sites/default/files/Consultation_Paper_20082020_0.pdf.  

[105] “Consultation Paper on Roadmap to Promote Broadband Connectivity and Enhanced Broadband Speed, Telecom Regulatory Authority of India, August 20, 2020, https://trai.gov.in/sites/default/files/Broadband_CP_20082020_0.pdf

[106] S.O2795(E), Ministry of Minority Affairs, August 13, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/221202.pdf

 

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