Chapter At A Glance

 

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

मोटर वाहन (संशोधन) बिल, 2016

  • परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर गठित स्टैंडिंग कमिटी (चेयरपर्सन: मुकुल रॉय) ने 8 फरवरी, 2017 को मोटर वाहन (संशोधन) बिल, 2016 पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। यह बिल मोटर वाहन एक्ट, 1988 को संशोधित करता है और इसे लोकसभा में 9 अगस्त, 2016 को पेश किया गया था। कमिटी के प्रमुख निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं:
  • ड्राइविंग लाइसेंस : बिल में ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता की शर्त को हटा दिया गया था। कमिटी ने टिप्पणी दी कि ड्राइवर को पढ़ने, लिखने और सड़कों के चिन्हों को समझने के लायक साक्षर होना चाहिए। उसने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को नए लाइसेंस होल्डरों की क्षमता की जांच करने के लिए अनिवार्य परीक्षा निर्धारित करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त यह परीक्षा सभी राज्यों में एक समान होनी चाहिए और राज्य सरकार को परीक्षा के मानदंडों में ढिलाई करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
  • बिल में कहा गया है कि लरनर्स लाइसेंस हासिल करने के लिए एप्लीकेशन, फीस और दूसरे दस्तावेजों को ऑनलाइन जमा किया जाएगा। इसके बाद ऐसे लाइसेंस इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में जारी किए जाएंगे। कमिटी ने टिप्पणी दी कि ऐसी प्रक्रिया लागू होने पर लोग ऑनलाइन गलत जानकारी देकर लरनर्स लाइसेंस हासिल कर सकते हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि इस प्रावधान को यह सुनिश्चित करने के लिए संशोधित किया जा सकता है कि इसका दुरुपयोग हो।
  • एग्रीगेटरों को लाइसेंस : बिल में अपेक्षा की गई है कि केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों के आधार पर राज्य सरकारें एग्रीगेटरों को लाइसेंस जारी करेंगी। एग्रीगेटर एक डिजिटल इंटरमीडियरी या मार्केट प्लेस होता है। परिवहन के उद्देश्य से ड्राइवर से कनेक्ट होने के लिए यात्री एग्रीगेटर की सेवाओं का इस्तेमाल कर सकता है। कमिटी ने टिप्पणी दी कि परिवहन वाहनों के नियंत्रण का मामला राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस प्रावधान के लागू होने से एग्रीगेटरों के मामले में केंद्र सरकार के पास राज्य सरकार के मुकाबले अधिक अधिकार हो जाएंगे। कमिटी ने सुझाव दिया कि यह राज्य सरकार के लिए वैकल्पिक होना चाहिए कि वह एग्रीगेटरों के मामले में केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों का पालन करे।
  • मोटर वाहन डीलर : बिल डीलरों द्वारा नए मोटर वाहनों के पंजीकरण का प्रावधान करता है। कमिटी ने टिप्पणी दी कि अनेक राज्यों में डीलर कम संख्या में इनवॉयस बनाते हैं, ग्राहकों से लॉजिस्टिक्स की ज्यादा कीमत लेते हैं, अधिक बीमा प्रीमियम लेते हैं और दूसरे गलत काम करते हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि वाहन डीलरों के कामकाज के लिए कड़े दिशानिर्देश दिए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त डीलरों द्वारा वाहनों के पंजीकरण को भी राज्यों के लिए वैकल्पिक बनाया जा सकता है जोकि राज्य की जरूरतों के हिसाब से किया जाए।
  • थर्ड पार्टी इंश्योरेंस : 1988 के एक्ट के अंतर्गत थर्ड पार्टी इंश्योरेंस सभी मोटर वाहनों के लिए अनिवार्य है और थर्ड पार्टी इंश्योरर का दायित्व भी असीमित है। बिल थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के दायित्व की अधिकतम सीमा निर्धारित करता है। मौत की स्थिति में यह 10 लाख रुपए है और गंभीर चोट लगने की स्थिति में पांच लाख रुपए। कमिटी ने टिप्पणी दी कि अगर अदालतें इस राशि से अधिक मुआवजा तय करती हैं तो मोटर वाहन का मालिक थर्ड पार्टी को शेष राशि का भुगतान करेगा। चूंकि यह प्रावधान सड़क का इस्तेमाल करने वालों के हित में नहीं है और इससे वे असीमित जोखिम के शिकार होंगे, इसलिए कमिटी ने सुझाव दिया कि दायित्व की सीमा निर्धारित करने वाले प्रावधान को हटा दिया जाए।
  • ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन : बिल प्रावधान करता है कि 1 अक्टूबर, 2018 के बाद किसी भी मोटर वाहन को फिटनेस सर्टिफिकेट तभी जारी किए जाएं जब उनकी जांच किसी अधिकृत टेस्टिंग स्टेशन पर ऑटोमेटेड टेस्टिंग फेसिलिटी में की गई हो। कमिटी ने टिप्पणी दी कि संभव है कि सभी राज्यों में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर्याप्त संख्या में हों और ऑटोमेटेड स्टेशन तैयार करने में समय लगे। कमिटी ने सुझाव दिया कि जब तक सभी राज्यों में ऐसे स्टेशन पर्याप्त संख्या में तैयार हो जाएं, इस कदम को स्थगित किया जाना चाहिए।
  • राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड : कमिटी ने टिप्पणी दी कि सिर्फ दंड की राशि बढ़ाने से सड़कें सुरक्षित नहीं हो सकतीं। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए : (i) उच्च अधिकार प्राप्त सड़क सुरक्षा बोर्ड का गठन किया जाए, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों, दोनों के प्रतिनिधि शामिल हों, और (ii) मानदंडों को तकनीकी दृष्टिकोण से अपग्रेड और अपडेट करने के लिए पर्याप्त फंड्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा फंड के जरिए इन फंड्स के लिए राशि जुटाई जा सकती है। नए मोटर वाहनों की पहली बार बिक्री से प्राप्त अतिरिक्त सेस के जरिए यह फंड तैयार किया जा सकता है।

 

 

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