छत्तीसगढ़ की चौथी विधानसभा का कामकाज (2014-2018)

वाइटल स्टैट्स

छत्तीसगढ़ की चौथी विधानसभा का कामकाज (2014-2018)

छत्तीसगढ़ की पांचवीं विधानसभा के चुनाव दो चरणों में होने वाले हैं: पहला चरण 12 नवंबर, 2018 और दूसरा चरण 20 नवंबर, 2018 को होगा। इस संदर्भ में हम चौथी विधानसभा (जनवरी 2014 से सितंबर 2018) के कामकाज के आंकड़े प्रस्तुत कर रहे हैं।

चौथी विधानसभा वर्ष में औसत 29 दिन चली, 3 अविश्वास प्रस्ताव पेश किए गए

·   वर्तमान विधानसभा कुल 145 दिन चली। यह तीसरी विधानसभा (2009-2013) की तुलना में कम है जोकि 159 दिन चली थी। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार यह तय करती है कि विधानसभा कितनी अवधि के लिए चलनी चाहिए।

·   चौथी विधानसभा में तीन बार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई (2015, 2017 और 2018)। यह चर्चा कुल मिलाकर 57 घंटे चली।

·   2011 और 2016 के बीच छत्तीसगढ़ विधानसभा एक वर्ष में औसत 36 दिन चली। यह 26 राज्य विधानसभाओं में 8वें स्थान पर है। ये सभी विधानसभाएं कुल मिलाकर वर्ष में औसत 28 दिन ही चलीं (2011 से 2016 के बीच)।

कुल 145 बैठकों में बजट सत्र की अवधि 98 दिन रही (68%)

 

 

 

 

 

Note: The Assembly had three to four sessions every year.

Note: Legend indicates discussion time on each item.

·   विधानसभा की कुल 145 बैठकों में बजट सत्र 98 दिन चला (68%)। जबकि प्रत्येक बजट सत्र की औसत अवधि 20 दिन थी, गैर बजट सत्र की अवधि बहुत कम थी (4 दिन)।

·   बजट सत्र का राज्य विधानसभाओं में बहुत महत्व होता है। सत्र राज्यपाल के अभिभाषण से शुरू होता है, और फिर उस पर चर्चा होती है। इसके बाद राज्य का वार्षिक बजट और सभी मंत्रालयों की अनुदान मांगें (डीएफजीज़) पटल पर रखी जाती हैं। इसके बाद उस पर सदन में चर्चा होती है।

·   बजट सत्र के दौरान छत्तीसगढ़ विधानसभा का 57% समय बजट पर चर्चा करते हुए बीता। इसमें से 45% समय विभिन्न मंत्रालयों के व्यय प्रस्तावों (डीएफजीज़) और 12% समय अन्य व्यय एवं कर प्रस्तावों पर चर्चा करते हुए बीता। राज्यपाल के अभिभाषण पर विचार-विमर्श में 7% समय बीता।  

विधि निर्माण में 5% समय बीता; 104 बिल पास हुए

Note: The 104 Bills passed do not include 20 Appropriation Bills.

 

·   निम्नलिखित क्षेत्रों से जुड़े बिल्स सबसे अधिक पेश किए गए: (i) वित्त, राजस्व और टैक्सेशन, और (ii) उच्च एवं तकनीकी शिक्षा।

·   104 बिल्स में से 95 संशोधन बिल थे। छह प्रिंसिपल बिल्स थे और तीन बिल्स मौजूदा एक्ट्स को निरस्त करने वाले थे। अधिकतर संशोधन बिल निम्नलिखित क्षेत्रों से संबंधित थे: (i) वित्त एवं टैक्सेशन (19 बिल्स), और (ii) उच्च शिक्षा (11 बिल्स)।

·   प्रिंसिपल बिल्स में छत्तीसगढ़ आधार बिल, 2018, छत्तीसगढ़ जीएसटी बिल, 2017, छत्तीसगढ़ दुकान और स्थापना बिल, 2017, छत्तीसगढ़ विशेष न्यायालय बिल, 2015, और छत्तीसगढ़ फिजियोथेरेपी एवं ऑक्यूपेशनल थेरेपी परिषद बिल, 2015 शामिल हैं।

94% बिल्स पेश होने के एक हफ्ते के अंदर पारित हो गए; बिल पर चर्चा और उसकी समीक्षा कम हुई

·   15% बिल्स जिस दिन पेश किए गए, उसी दिन पारित हो गए। इसमें छत्तीसगढ़ जीएसटी बिल, 2017 और छत्तीसगढ़ श्रम कानून संशोधन एवं विविध प्रावधान बिल, 2017 शामिल हैं।

·   79% बिल्स पेश होने के एक हफ्ते के अंदर पारित हो गए। 

·   सिर्फ छह बिल्स को पारित होने में एक हफ्ते से ज्यादा समय लगा। यह संशोधन बिल कृषि उत्पाद बाजार, स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, चिकित्सा विज्ञान परिषद, मोटर वाहन कराधान, पंचायती राज और राज्य एफआरबीएम से संबंधित थे।

प्रत्येक सत्र में 10% समय प्रश्न काल में बीता

·   मंत्रियों से सदन में तारांकित प्रश्नों का उत्तर देने की अपेक्षा की जाती है। हर दिन प्रश्न काल में 25 तारांकित प्रश्नों को उत्तर देने के लिए चुना जाता है।

·   सदन में मंत्रियों ने औसत नौ प्रश्नों के मौखिक उत्तर दिए।

Sources: Session end resume and list of Bills passed for years 2014 to 2018 from Chhatisgarh Legislative Assembly website; PRS.

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