सशस्त्र सैन्यकर्मियों द्वारा प्रॉक्सी और पोस्टल वोटिंग

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश 

  • रक्षा संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयरपर्सन: मेजर जनरल बी.सी.खंडूरी (सेवानिवृत्त)) ने 8 दिसंबर, 2016 को आम चुनावों में सशस्त्र सैन्यकर्मियों द्वारा प्रॉक्सी और पोस्टल वोटिंग- एक मूल्यांकन पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।
     
  • सशस्त्र बलों के सदस्य निम्नलिखित स्थानों से वोट दे सकते हैं : (i) अपने मूल निवास स्थान से, इसके बावजूद कि वे वहां ‘सर्विस वोटर’ (सेवा मतदाता) के तौर पर सामान्यतः निवास न करते हों, या (ii) ‘सामान्य वोटर’ के तौर पर पोस्टिंग वाले स्थान से। अगर कोई व्यक्ति अपने मूल निवास स्थान से वोट देने का विकल्प चुनता है तो वह पोस्टल बैलेट द्वारा या प्रॉक्सी नियुक्त करके ऐसा कर सकता है। फिर भी कमिटी ने टिप्पणी की कि लगभग 30 लाख सैन्यकर्मी और उनके परिवार के सदस्य प्रॉक्सी और पोस्टल वोटिंग से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं के कारण वोट देने से जुड़े अपने अधिकारों का उपयोग करने में असमर्थ हैं। इसके मद्देनजर कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं।
     
  • पोस्टिंग वाले स्थान से वोटिंग की शर्त: चुनाव आयोग ने कुछ शर्तें रखी हैं जिन्हें पूरा करने के बाद ही सैन्यकर्मी पोस्टिंग वाले स्थान से वोटिंग कर सकते हैं। इसमें से एक संबंधित स्थान पर 3 वर्ष तक पोस्टिंग की न्यूनतम अवधि है। कमिटी ने टिप्पणी दी है कि सर्वोच्च न्यायालय इस शर्त को हटाने या कम करने की व्यावहारिकता की जांच कर रहा है और अपेक्षा करता है कि न्यायालय को समय-समय पर इस मामले में होने वाली प्रगति से अवगत कराया जाए।
     
  • कमिटी ने पाया कि पोस्टिंग वाले स्थान पर सैन्यकर्मियों की पत्नियों का पंजीकरण वोटर के तौर पर हो सकता है (अगर वे अपने पतियों के साथ उस स्थान पर रहती हैं) लेकिन यह लाभ महिला सैन्यकर्मियों के पतियों को नहीं मिलता है। इस बात का सुझाव दिया गया कि पतियों को भी पोस्टिंग वाले स्थान पर वोटर के तौर पर पंजीकृत किया जा सकता है।
     
  • प्रॉक्सी वोटिंग : निवास स्थान से जाने वाली वोटिंग के लिए सर्विस वोटर से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने प्रॉक्सी को नियुक्त करने के लिए एक आवेदन फॉर्म भरे और उसे अपनी युनिट के कमांडिंग ऑफिसर से सत्यापित कराए। इस फॉर्म को प्रॉक्सी के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाना चाहिए और फिर प्रथम श्रेणी के मेजिस्ट्रेट से अटेस्ट कराना चाहिए। इसके बाद फॉर्म को उस रिटर्निंग ऑफिसर के पास भेजना चाहिए जो संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव करा रहा हो। कमिटी ने पाया कि यह प्रक्रिया सर्विस वोटर, उसके प्रॉक्सी और रिटर्निंग ऑफिसरों के लिए बहुत दुष्कर है। इससे सर्विस वोटर के चयन की गोपनीयता को बरकरार रखना भी कठिन होता है। इसलिए यह सुझाव दिया गया है कि प्रॉक्सी वोटिंग प्रणाली का कोई विकल्प विकसित किया जाए।
     
  • पोस्टल बैलेट : कमिटी ने पाया कि लगभग 90% सैन्यकर्मी अपने वोट देने के अधिकार का उपयोग केवल इसलिए नहीं कर पाते क्योंकि पोस्टल बैलेट प्रणाली में कमियां हैं। पोस्टल बैलेट पेपरों को डिस्पैच करने और वापस लौटाने के लिए 14 दिनों का समय दिया जाता है। कई बार सैन्यकर्मियों को अपने बैलेट पेपर समय पर नहीं मिलते और कई बार निर्धारित समयावधि में पेपरों को लौटाना कठिन हो जाता है। यह सुझाव दिया गया कि पोस्टल बैलेट प्रणाली को तुरंत सुधारा जाए।
     
  • यह कई प्रकार से किया जा सकता है। सबसे पहले, पोस्टल बैलेटों को निर्वाचन क्षेत्रों के रिटर्निंग ऑफिसरों द्वारा डिस्पैच करने की बजाय किसी केंद्रीय स्थान से डिस्पैच किया जा सकता है। दूसरा, चुनावों में खड़े होने वाले उम्मीदवारों की सूची फाइनल होने के 24 घंटे के अंदर पोस्टल बैलेट पेपरों की प्रिंटिग की जा सकती है। तीसरा, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, यूके, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, स्विट्जरलैंड जैसे देशों की चुनाव प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जा सकता है जिससे पोस्टल बैलेट के लिए उन्नत तकनीक या इंटरनेट वोटिंग का उपयोग किया जा सके। चौथा, चुनाव आयोग को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के जरिए डाले जाने वाले वोटों की गिनती से पहले पोस्टल बैलेट को नहीं गिनना चाहिए।
     
  • इलेक्ट्रॉनिंग वोटिंग : कमिटी ने टिप्पणी दी कि सर्विस वोटर अपने बैलेट पेपर को सामान्य पोस्ट की बजाय इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भेजें, इसके लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में एक अधिसूचना जारी की है। इस संबंध में निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं : (i) ऑनलाइन पंजीकरण और वोटिंग के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिया जाए, (ii) ऑनलाइन वोटिंग को प्रभावी बनाने के लिए सर्विस वोटरों को यूनिक सर्विस नंबर दिए जाएं, और (iii) ई-पोस्टल बैलेट फाइलों के आकार को कम किया जाए जिससे जिन स्थानों पर इंटरनेट की स्पीड कम है, उन स्थानों में भी आसानी से उनकी डाउनलोडिंग संभव हो।
     
  • सर्विस वोटरों के रिकॉर्ड : कमिटी ने पाया कि जिन सैन्यकर्मियों ने चुनावों में वोट नहीं डाले हैं, उनकी संख्या और वोट न डालने के कारणों का रिकॉर्ड नहीं रखा गया है। कमिटी ने सुझाव दिया कि ऐसा तंत्र बनाया जाना चाहिए ताकि प्राप्त किए गए, गिने गए, रद्द किए गए सर्विस वोटों की संख्या और उन्हें रद्द किए जाने के कारणों का पता चल सके। इस प्रकार के आंकड़ों से चुनावों में सशस्त्र सैन्यकर्मियों का अधिक से अधिक भाग लेना संभव होगा।
     
  • आधार नंबर से जोड़ना : कमिटी ने सुझाव दिया कि प्रत्येक वोटर, चाहे वह सामान्य हो या सर्विस वोटर, को उसके आधार नंबर से जोड़ा जाए। इससे सर्विस वोटरों का सत्यापन उसी प्रकार किया जा सकेगा, जैसे बैंक अपने वित्तीय लेन-देन के लिए वन टाइम पासवर्ड का प्रयोग करते हैं।

 

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