भारतीय फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी का कामकाज

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: प्रोफेसर राम गोपाल यादव) ने 7 अगस्त, 2018 को ‘भारतीय फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी का कामकाज’ पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। एफएसएसएआई विज्ञान के आधार पर फूड स्टैंडर्ड्स को बनाने के लिए जिम्मेदार है। साथ ही वह उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए खाद्य पदार्थों की मैन्यूफैक्चरिंग, स्टोरेज, वितरण और बिक्री को भी रेगुलेट करती है। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं :
     
  • रेगुलेटरी फ्रेमवर्क: कमिटी ने कहा कि फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के लागू होने के एक दशक बाद भी एफएसएसएआई अब तक फूड टेस्टिंग लेबोरेट्रीज़ के एक्रेडेशन, फूड लेबलिंग स्टैंडर्ड्स और जेनेटिकली इंजीनियर्ड फूड जैसी विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए रेगुलेशंस नहीं बना पाई है। इसके अतिरिक्त एफएसएसएआई उन क्षेत्रों को भी चिन्हित नहीं कर पाई है जिनके लिए स्टैंडर्ड्स बनाए जाने हैं या उनमें संशोधन किया जाना है। यह कहा गया कि अधिकतर राज्यों में अलग से फूड सेफ्टी विभाग नहीं है जो फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड्स को प्रभावी तरीके से लागू करें। इसके निम्नलिखित परिणाम हो रहे हैं: (i) क्वालिटी चेक की कमी, (ii) खाने में मिलावट, (iii) भ्रम पैदा करने वाली लेबलिंग और (iv) खराब खाद्य पदार्थों की बिक्री।
     
  • कमिटी ने सुझाव दिया कि एफएसएसएआई को उन सभी स्तरों पर रेगुलेशन बनाना और उन्हें अधिसूचित करना चाहिए जिन्हें एक साल के अंदर एक्ट में निर्दिष्ट किया गया है। इसके अतिरिक्त कमिटी ने सुझाव दिया कि सभी राज्यों में फूड सेफ्टी विभागों की स्थापना की जाए ताकि एक व्यापक फूड सेफ्टी मैकेनिज्म को लागू किया जा सके।
     
  • लाइसेंसिंग और पंजीकरण: एक्ट के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति लाइसेंस लिए बिना खाने-पीने का कोई बिजनेस न तो शुरू कर सकता है, और न ही उसे चला सकता है। कमिटी ने कहा कि खाने-पीने के बहुत से बिजनेस बिना लाइसेंस या निरस्त हो चुके लाइसेंस के साथ चलाए जा रहे थे। इसके अतिरिक्त केंद्र और राज्य की लाइसेंसिंग अथॉरिटीज़ पूरे दस्तावेज न होने के बावजूद लाइसेंस जारी कर रही थीं। यह कहा गया कि ऐसे मामले भी बहुत कम हैं, जब रीन्यूअल के लिए आने वाले लाइसेंसों को रद्द किया जाए। कमिटी के अनुसार, एफएसएसएआई को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उत्पाद मंजूरी की पूर्व प्रणाली के अंतर्गत जारी किए गए सभी लाइसेंसों की समीक्षा की गई है और उत्पाद मंजूरी की वर्तमान प्रणाली के अंतर्गत जैसा अपेक्षित है, उसी के हिसाब से लाइसेंस रद्द और दोबारा जारी किए जा रहे हैं।
     
  • फूड सेफ्टी सर्वे: कमिटी ने कहा कि एफएसएसएआई ने सर्वे करने का काम राज्यों पर छोड़ दिया है लेकिन राज्यों के पास इस काम को करने के लिए संसाधन नहीं हैं। हालांकि इस एक्ट को लागू करने के लिए कोई सर्वेक्षण नहीं किया गया। एफएसएसएआई के पास फूड बिजनेस पर कोई डेटाबेस भी नहीं है। इसलिए यह सुझाव दिया गया कि एफएसएसएआई और राज्यों की फूड अथॉरिटीज़ को अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले फूड बिजनेसेज़ पर सर्वेक्षण करने चाहिए।
     
  • फूड रीकॉल प्लान्स: कमिटी के कहा कि कई बार किसी फूड आइटम पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। इसे देखते हुए एफएसएसएआई को सुनिश्चित करना चाहिए कि हर फूड बिजनेस के पास एक फूड रीकॉल प्लान हो। कमिटी ने यह सुझाव भी दिया कि एफएसएसएआई हर पखवाड़े में रीकॉल की रिपोर्ट्स जारी करे ताकि उपभोक्ताओं को मिलावटी और मिस ब्रांडिंग वाले उत्पादों के बारे में जानकारी हो सके।
     
  • फूड टेस्टिंग लेबोरेट्रीज़: कमिटी ने कहा कि लेबोरेट्रीज़ की कमी होने के साथ-साथ अधिकतर फूड लेबोरेट्रीज़ (एफएसएसएआई और राज्य स्तरीय फूड अथॉरिटीज़ द्वारा फूड सैंपल्स की टेस्टिंग करने वाली) में कर्मचारियों और फंक्शनल फूड सेफ्टी उपकरणों की भी कमी है और इससे फूड सैंपल्स की टेस्टिंग सही तरीके से नहीं हो पाती। यह कहा गया कि देश में इस समय 266 लेबोरेट्रीज़ हैं जिनमें से कई में जरूरी मानदंडों जैसे हेवी मेटल, कीटनाशक और बैक्टीरियल विषाक्तता को जांचने की सुविधाएं नहीं हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि सही परिणाम हासिल करने के लिए देश में परीक्षण के लिए एक समान (यूनिफॉर्म) व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त उसने सुझाव दिया कि प्रत्येक राज्य लेबोरेट्रीज़ में कर्मचारियों की भर्ती से संबंधित अपने रेगुलेशन बनाए और रिक्तियों को भरने के लिए नियमित परीक्षाएं आयोजित करे।
     
  • कमिटी ने यह सुझाव भी दिया कि राज्य स्तरीय 62 फंक्शनल फूड लेबोरेट्रीज़ में से सिर्फ 13 के पास नेशनल एक्रेडेशन बोर्ड ऑफ टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेट्रीज़ का एक्रेडेशन है। इस संबंध में कमिटी ने कहा कि प्रभावी फूड क्वालिटी मैनेजमेंट के लिए सभी लेबोरेट्रीज़ के लिए एक्रेडेशन को अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए।
     
  • एक्ट में संशोधन: कमिटी ने देश में एक समान फूड सेफ्टी रेगुलेटरी प्रणाली बनाने के लिए मौजूदा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 में अनेक संशोधनों का सुझाव दिया। ये सुझाव निम्नलिखित से संबंधित हैं : (i) फूड डाई के इस्तेमाल को रेगुलेट करना, (ii) प्राथमिक उत्पादन को रेगुलेट करना, यानी किसानों और मछुआरों द्वारा कीटनाशकों का प्रयोग, और (iii) फूड सेक्टर के विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को शामिल करने के उद्देश्य से एफएसएसएआई के चेयरपर्सन और सीईओ के चयन की प्रक्रिया में परिवर्तन करना।
     
  • कर्मचारियों की कमी: कमिटी ने कहा कि एफएसएसएआई और राज्य स्तरीय सेफ्टी अथॉरिटीज में कर्मचारियों की अत्यधिक कमी है जिससे राज्यों में खाद्य सुरक्षा के उपायों पर असर पड़ता है। उसने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय राज्य के साथ मिलकर कार्रवाई योजना तैयार करने ताकि कर्मचारियों की कमी की समस्या को दूर किया जा सके।

 

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