भारतीय उद्योग पर चाइनीज़ उत्पादों का प्रभाव

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • वाणिज्य संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: नरेश गुजराल) ने 26 जुलाई, 2018 को ‘भारतीय उद्योग पर चाइनीज़ उत्पादों का प्रभाव’ पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2007-08 में 38 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2017-18 में 89.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। इस दौरान चीन से आयात में 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर की बढ़ोतरी हुई, वहीं निर्यात 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर बढ़ा। इससे भारत के व्यापार घाटे में वृद्धि हुई। इस व्यापार घाटे में चीन से व्यापार का हिस्सा 40% से अधिक का है। इस संबंध में कमिटी के मुख्य निष्कर्षो और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
     
  • एंटी डंपिंग ड्यूटी: जब निर्यात होने वाली वस्तुओं का मूल्य, उनके मूल देश के बाजार मूल्य से कम होता है तो उसे डपिंग कहा जाता है। इन वस्तुओं को आयात करने वाला देश विस्तृत जांच करता है और इन वस्तुओं पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाता है। कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि: (i) चाइनीज़ उत्पादों का गलत वर्गीकरण किया गया, जिसके कारण बहुत से उत्पादों पर एंटी डंपिंग ड्यूटी नहीं लगाई जा सकी, और (ii) एंटी डंपिंग उपायों का क्या असर हुआ, इसकी समीक्षा करने में सरकार की कोई रुचि नहीं है। कमिटी ने सुझाव दिया कि डायरेक्टरेट जनरल ऑफ एंटी डंपिंग को: (i) एंटी डंपिंग ड्यूटीज़ को लागू करने में ढिलाई बरतने की समस्या को दूर करना चाहिए और (ii) ड्यूटीज़ को तर्कसंगत और मौजूदा घरेलू उत्पाद लागत के अधिक से अधिक अनुरूप बनाना चाहिए।
     
  • गैरकानूनी आयात और स्मगलिंग: 2016-17 के दौरान स्मगलिंग के दौरान जब्त किए चाइनीज सामान की कीमत 1,024 करोड़ रुपए थी। कमिटी ने कहा कि देश की मुख्य एंटी स्मगलिंग खुफिया और जांच एजेंसी- डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) एक छोटे श्रमबल के साथ चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करती है। उसने सुझाव दिया कि स्मगलिंग की जांच करने के लिए डीआरआई में श्रमबल को पर्याप्त रूप से बढ़ाया जाना चाहिए।
     
  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम दर्जे के उपक्रमों (एमएसएमईज़) पर प्रभाव: कमिटी ने कहा कि असंगठित रीटेल सेक्टर में खराब क्वालिटी के चाइनीज़ उत्पादों का प्रभुत्व है। इस सेक्टर में घरेलू एमएसएमईज़ काम करते हैं जोकि महंगे लेकिन बेहतर क्वालिटी के उत्पाद बनाते हैं। कमिटी ने कहा कि घरेलू एमएसएमईज़ को बढ़ावा देने की जरूरत है। उसने सुझाव दिया कि फिनिश्ड गुड्स के आयात पर अधिक टैक्स लगाया जाए और कच्चे माल पर कम, जिससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिले।
     
  • फार्मास्युटिकल उद्योग: फार्मास्युटिकल उद्योग कच्चे माल के आयात के लिए चीन पर बहुत अधिक निर्भर है। जीवन रक्षा दवाओं जैसे कुछ मामलों में तो चीन से आयात पर 90% निर्भरता है। फार्मास्युटिकल सेक्टर में अधिक शुरुआती निवेश की जरूरत होती है। कमिटी ने सुझाव दिया कि प्रतिस्पर्धा और मूल्य स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए फार्मास्युटिकल उद्योग के लिए दूरगामी दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। यह सुझाव भी दिया गया कि सरकार को इस उद्योग को पर्याप्त संरचनात्मक सहयोग प्रदान करना चाहिए।
     
  • सोलर उद्योग: राष्ट्रीय सोलर मिशन की 84% जरूरतों को चीन से आयात के जरिए पूरा किया जाता है। कमिटी ने कहा कि भारत में ऐसी कमोडिटीज़ का आयात मूल्य, जापान और यूरोप के आयात मूल्य से कम है, जिससे यह कहा जा सकता है कि चाइनीज़ उत्पादों को भारतीय बाजारों में डंप किया जा रहा है। कमिटी ने सुझाव दिया कि: (i) एंटी डंपिंग ड्यूटीज़, जैसे व्यापार सुधार किए जाएं ताकि घरेलू सोलर उद्योग को संरक्षण प्राप्त हो, और (ii) क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को लागू किया जाए जिससे यह सुनिश्चित हो कि आयात किए गए चाइनीज़ सोलर उत्पादों में एंटीमनी जैसे हानिकारक पदार्थ न हों।
     
  • कपड़ा उद्योग: कमिटी ने कहा कि सिंथेटिक फाइबर पर मौजूदा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 18% है जिसके बाद चीन से उसी प्रकार के फाइबर का आयात बढ़ा है। इसके अतिरिक्त कम विकसित देशों जैसे बांग्लादेश के साथ भारत की मुक्त व्यापार संधि (एफटीएज़) है। बांग्लादेश में चाइनीज फाइबर से कपड़े बनाए जाते हैं और भारत में उन्हें सस्ती कीमत पर आयात किया जाता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि ऐसे एफटीएज़ पर विचार किया जाना चाहिए क्योंकि इनसे चीनी से आयात पर लगने वाली एंटी डंपिंग ड्यूटी बेअसर हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त यह सुझाव भी दिया गया कि सरकार को इस उद्योग को आधुनिक बनाने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।
     
  • पटाखा उद्योग: कमिटी ने गौर किया कि अधिकतर चाइनीज़ पटाखों में पोटाशियम क्लोरेट होता है जोकि भारत में प्रतिबंधित है। यह एक उच्च विस्फोटक रसायन होता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि खतरनाक चाइनीज़ पटाखों के आयात पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए क्योंकि इनसे जनस्वास्थ्य को खतरा होता है। कमिटी ने यह भी कहा कि 4,000 करोड़ रुपए का घरेलू पटाखा उद्योग सर्वाधिक श्रम गहन उद्योगों में से एक है। यह सुझाव दिया गया कि इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा 18% की जीएसटी दर को कम किया जाना चाहिए।
     
  • साइकिल उद्योग: कमिटी ने गौर किया कि भारत में साइकिलों की मांग हाल ही में बढ़ी है जिसका मुख्य कारण स्मार्ट सिटीज़ मिशन के अंतर्गत पब्लिक बाइक शेयर कार्यक्रम है। कमिटी ने कहा कि स्मार्ट सिटी एडमिनिस्ट्रेशंस, विशेष रूप से पुणे और कोयंबटूर में, भारतीय साइकिलों की बजाय सस्ती चाइनीज़ साइकिलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सार्वजनिक खरीद (मेक इन इंडिया को प्राथमिकता) आदेश, 2017 के अंतर्गत स्मार्ट सिटी एडमिनिस्ट्रेशंस भारतीय साइकिलों की खरीद करें।  

 

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