फिनटेक संबंधी मुद्दों पर स्टीयरिंग कमिटी

कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • फिनटेक संबंधी मुद्दों पर गठित स्टीयरिंग कमिटी ने 2 सितंबर, 2019 को वित्त मंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपी। फिनटेक संबंधी रेगुलेशंस को अधिक फ्लेक्सिबल बनाने और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस कमिटी का गठन किया गया था। फिनटेक (फाइनांशियल टेक्नोलॉजी) तकनीक आधारित उन व्यापारों को कहते हैं जो वित्तीय संस्थानों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं और उनके साथ सहयोग भी करते हैं। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
     
  • फिनटेक सेवाओं का विस्तारीकरण: कमिटी ने कहा कि भारत ने फिनटेक उत्पादों और सेवाओं की वृद्धि में महत्वपूर्ण प्रगति की है, खास तौर से भुगतान, ऋण और निवेश तथा सलाहकारी सेवाओं के क्षेत्रों में। कमिटी ने उन उभरती हुई तकनीकों पर गौर किया जोकि फाइनांशियल टेक्नोलॉजी के एनेबलर के रूप में काम करती हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) डेटा-फोकस्ड टेक्नोलॉजी, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, सेंसर बेस्ड टेक्नोलॉजी और बायोमैट्रिक्स, (ii) ऑपरेशनल एक्सिलेंस वाली टेक्नोलॉजी, जैसे डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी, रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन और चैटबोट्स, (iii) इंफ्रास्ट्रक्चरल एनेबलर्स, जैसे ओपन एप्लीकेशन प्रोग्राम इंटरफेस, और (iv) फ्रंट-एंड इंटरफेस जैसे गैमिफिकेशन या ऑग्मेंटेड और वर्चुअल रियैलिटी।
     
  • कमिटी ने कहा कि बैंकों और नॉन बैंकिंग संस्थाओं के बीच डिजिटल भुगतान को लेकर एक समान आजादी नहीं है। उदाहरण के लिए आधार एनेबल्ड भुगतान प्रणाली जैसे भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा केवल बैंकिंग संस्थानों को प्राप्त है। कमिटी ने सुझाव दिया कि डिजिटल भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर में भेदभावकारी रेगुलेटरी अवरोध खत्म किए जाने चाहिए। फिनटेक के दायरे को बढ़ाने के लिए कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) साइबर सुरक्षा को मजबूती देने, धोखाधड़ी एवं मनी लॉन्ड्रिंग को नियंत्रित करने के लिए फिनटेक का इस्तेमाल, (ii) भारत में वर्चुअल बैंकिंग की उपयुक्तता की जांच, और (iii) फाइनांशियल इंस्ट्रूमेंट्स की डीमैटीरियलाइजिंग (फिजिकल सर्टिफिकेट्स को इलेक्ट्रॉनिक रूप में बदलना)।
     
  • फिनटेक को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत कार्रवाइयां: कमिटी ने कहा कि फिनटेक को अपनाने और उसे बढ़ावा देने के लिए सरकार, वित्तीय रेगुलेटरों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को अनेक कदम उठाने चाहिए। वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बैक-एंड प्रक्रियाओं को ऑटोमेट करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग की संभावनाओं को तलाशना चाहिए। इसके अतिरिक्त एमएसएमई मंत्रालय को डीएफएस और आरबीआई के साथ सहयोग करना चाहिए ताकि एमएसएमई के लिए व्यापारिक वित्त पोषण हेतु ब्लॉकचेन समाधानों को लागू किया जा सके। कमिटी ने सुझाव दिया कि सरकार को देश में भूमि रिकॉर्ड्स के आधुनिकीकरण और मानकीकरण का काम करना चाहिए जोकि तीन वर्ष की अवधि में पूरा हो जाए। इसी के साथ एक अंतर्विभागीय स्टीरिंग कमिटी का गठन किया जाना चाहिए।
     
  • रेगुलेशंस के संबंध में कमिटी ने कहा कि विश्व के अनेक देशों ने (जिनमें यूके, सिंगापुर, कनाडा, थाईलैंड शामिल हैं) वित्तीय क्षेत्र में इनोवेशंस को एनेबल करने के लिए रेगुलेटरी सैंडबॉक्स की स्थापना की है। सैंडबॉक्स एक ऐसा वातावरण प्रदान करता है जिसमें बाजार के प्रतिभागियों को नियंत्रित माहौल में ग्राहकों के साथ नए उत्पाद, सेवाओं या बिजनेस मॉडल का परीक्षण करने का मौका मिलता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि रेगुलेटरों को ऐसी प्रक्रियाओं की पेश करना चाहिए ताकि नए प्रयोगों की प्रेरणा मिल सके।
     
  • वित्तीय समावेश: कमिटी ने कहा कि फिनटेक में वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने की क्षमता है। उसने सुझाव दिया कि फिनटेक को निम्नलिखित के लिए उपयोग किया जाए: (i) किसानों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग बेस्ड क्रेडिट स्कोरिंग मैकेनिज्म के साथ एक क्रेडिट रजिस्ट्री बनाई जाए ताकि ऋण से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सके, (ii) कृषि फसल बीमा योजनाओं में प्रबंधन और प्रीमियम भुगतान का दावा किया जा सके, और (iii) छोटी बचत वाले उत्पादों, सभी लघु पेंशन और सरकारी पेंशन योजनाओं के लिए कॉमन डिजिटल प्लेटफॉर्म को तैयार किया जा सके जिसके जरिए पेंशन सबस्क्राइबर विभिन्न प्रकार के डिजिटल भुगतानों की मदद से योजनाओं को सबस्क्राइब कर सकें।
     
  • प्रशासनिक उपाय: कमिटी ने सुझाव दिया कि चूंकि फाइनांशियल टेक्नोलॉजी एक उभरता हुआ क्षेत्र है, इसलिए सरकार को जोखिमों और लाभ की साझा जानकारियों के लिए अन्य देशों के साथ सहयोग करना चाहिए। वित्त क्षेत्र से जुड़े सभी रेगुलेटरों को फाइनांशियल टेक्नोलॉजी पर एक सलाहकारी परिषद की स्थापना करनी चाहिए ताकि उद्योग के विशेषज्ञों को साथ लाया जा सके। रेगुलेटरी संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए अंतर रेगुलेटरी टेक्निकल ग्रुप का गठन किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त फाइनांशियल टेक्नोलॉजी पर अंतर-मंत्रालयी समूह बनाया जाना चाहिए। यह समूह फिनटेक सेवाओं को एनेबल करने वाली तकनीकों के एप्लीकेशंस की संभावनाएं तलाशेगा।
     
  • कमिटी ने कहा कि फिनटेक उद्योग के उभरने से निजता और डेटा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। इसके अतिरिक्त प्रस्तावित ड्राफ्ट डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2018 का फाइनांशियल टेक्नोलॉजी क्षेत्र के विकास पर बहुत हैं। इसके अतिरिक्त प्रस्तावित ड्राफ्ट डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2018 का फाइनांशियल टेक्नोलॉजी क्षेत्र के विकास पर दीर असर हो सकता है। इस संबंध में कमिटी ने सुझाव दिया कि वित्तीय क्षेत्र में डेटा प्रोटेक्शन पर वित्त मंत्रालय को एक टास्क फोर्स का गठन करना चाहिए।

 

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