प्रवासी श्रमिकों के लिए कानूनी संरचना और दक्षता विकास संबंधी पहल सहित अन्य मुद्दे

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • विदेशी मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयरपर्सन: डॉ. शशि थरूर) ने 2 जनवरी, 2019 को ‘प्रवासी श्रमिकों के लिए कानूनी संरचना और दक्षता विकास संबंधी पहल सहित अन्य मुद्दे पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।
     
  • प्रवास पर नीति और आंकड़े: कमिटी ने कहा कि भारत में प्रवास से संबंधित कोई नीति नहीं है। इससे भारत अंतरराष्ट्रीय श्रम बाजार में अपने नागरिकों की क्षमताओं का उपयोग नहीं कर पाता। इसलिए कमिटी ने सुझाव दिया कि भारत को एक सुसंगत प्रवास नीति बनानी चाहिए। इसके अतिरिक्त कमिटी ने कहा कि बढ़ते प्रवास के बावजूद इस संबंध में सांख्यिकी और आंकड़े आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि विदेशी मामलों के मंत्रालय (एमईए) को प्रवास के विभिन्न पहलुओं पर एक डेटाबेस को मेनटेन करना चाहिए जैसे प्रवासियों का प्रोफाइल, उनकी नौकरी का प्रोफाइल और गंतव्य देश।
     
  • अनाधिकृत भर्ती एजेंट: कमिटी ने कहा कि अनाधिकृत भर्ती एजेंटों की समस्या बढ़ रही है और अधिकतर लोगों को उनके द्वारा विदेश भेजा जाता है। ऐसी शिकायत मिलने पर एमईए संबंधित राज्य पुलिस को ऐसे एजेंटों के विवरण भेज देता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि जिन राज्यों या जिलों में अधिक शिकायतें मिलती हैं, वहां के प्रोटेक्टर ऑफ इमिग्रेंट्स ऑफिसेज़ को शामिल करके एमईए को अपने आप कार्रवाई करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त इन कार्यालयों को स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए जिससे गैरकानूनी तरीके से की जाने वाली भर्तियों को रोका जा सके।
     
  • दक्षता विकास: कमिटी ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों की सीमित दक्षताएं उनके लिए विदेशों में रोजगार तलाशने में अड़चनें पैदा करती हैं। एमईए ने ऐसे पांच प्रमुख कारकों को रेखांकित किया जिनकी मदद से देश का श्रम बल विश्वव्यापी गतिशीलता के लिए तैयार हो सकेगा। ये पांच कारक हैं: (i) विश्वव्यापी मानदंडों के अनुकूल क्वालिफिकेशन, (ii) इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, (iii) भरोसेमंद मूल्यांकन और सर्टिफिकेशन फ्रेमवर्क, (iv) विदेश जाने से पहले ओरिएंटेशन, और (v) जॉब लिंकेज। एमईए का कहना है कि पहले दो कारकों के संबंध में तो प्रगति हुई है लेकिन कमिटी ने सुझाव दिया कि दक्षता विकास के लिए मानदंड तैयार करने के दौरान इन सभी कारकों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
     
  • रेफरल वेतन: सरकार ने इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड कंट्रीज़ (जिन देशों में प्रोटेक्टर ऑफ इमिग्रेंट्स ऑफिसेज़ से इमिग्रेशन क्लीयरेंस की जरूरत होती है) में भारतीय श्रमिकों के वेतन को रेगुलेट करने के लिए न्यूनतम रेफरल वेतन तय किए हैं। कमिटी ने कहा कि गंतव्य देशों के आर्थिक परिवर्तनों के साथ इस न्यूनतम वेतन का तालमेल नहीं है। संभव है कि इसके कारण भारतीय श्रमिकों को कम वरीयता मिले। कमिटी ने सुझाव दिया कि एमईए को श्रम मंत्रालय के साथ समन्वय करना चाहिए और हर साल रेफरल वेतन की समीक्षा करने के लिए कमिटी का गठन करना चाहिए।
     
  • जेंडर और प्रवास: कमिटी ने कहा कि महिला प्रवासी श्रमिकों के प्रति सरकार का दृष्टिकोण सिर्फ उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। हालांकि यह सिर्फ अल्पावधि का दृष्टिकोण हो सकता है जिसका असर महिला श्रमिकों के करियर संबंधी विकल्पों पर पड़ सकता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि जेंडर-सेंसिटिव प्रवास नीति की तत्काल आवश्यकता है जोकि जेंडर विशिष्ट चिंताओं और जोखिमों को ध्यान में रखे। यह नीति महिलाओं के संरक्षण पर नहीं, उनके सशक्तीकरण के व्यापक उद्देश्य पर आधारित होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त कमिटी ने यह सुझाव दिया कि इंडियाज़ मिशन अब्रॉड में चौबीसों घंटे-सातों दिन वाली महिला हेल्पलाइन शुरू की जानी चाहिए।
     
  • इमिग्रेशन बिल: कमिटी ने कहा कि प्रवास पैटर्न में बदलाव के मद्देनजर मौजूदा कानूनी प्रावधान प्रवासी श्रमिकों की परेशानियां दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। जबकि एमईए एक इमिग्रेशन मैनेजमेंट बिल का मसौदा तैयार कर रहा है, कमिटी ने इस बात पर चिंता जताई कि इस बिल को पेश होने में इतना विलंब हो रहा है। कमिटी ने सुझाव दिया कि इस बिल को अंतिम रूप दिया जाए और इसे बिना देरी किए संसद में पेश किया जाए। इसके अतिरिक्त कमिटी ने ऐसे भिन्न-भिन्न प्रावधानों का सुझाव दिया जिन्हें बिल का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सूचना प्रदान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर प्रवासी श्रमिक कल्याण केंद्र, (ii) सभी प्रवासी श्रमिकों, उन्हें नौकरी दिलाने वाली कंपनियों, दक्षता और शैक्षणिक योग्यताओं के रिकॉर्ड वाला डिजिटिल डेटाबेस बनाना, और (iii) प्रोटेक्टर ऑफ इमिग्रेंट्स के अंतर्गत एक ऐसा विभाग बनाना, जोकि नौकरी दिलाने वाली कंपनियों के खिलाफ शोषण और उत्पीड़न की शिकायतों की जांच करे।          

 

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