जनजाति उप-योजना

रिपोर्ट का सारांश

  • पब्लिक एकाउंट्स कमिटी (चेयर : मल्लिकार्जुन खड़गे) ने 18 दिसंबर, 2017 को ‘जनजाति उप-योजना’ पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। जनजाति उप-योजना (टीएसपी) का उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक विकास के संकेतकों के मामलों में अनुसूचित जनजातियों (एसटीज़) और सामान्य जनसंख्या के बीच के अंतर को एक निश्चित समय अवधि में कम करना है। टीएसपी उन राज्यों में लागू नहीं है जहां आदिवासी आबादी 60% से अधिक हैं। कमिटी ने तीन मंत्रालयों में टीएसपी के कार्यान्वयन पर विचार किया : (i) मानव संसाधन विकास, (ii) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, और (iii) आयुष।
     
  • कमिटी ने टीएसपी के कार्यान्वयन में कई विसंगतियों पर टिप्पणियां कीं जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं : (i) फंड्स जारी करने के विशिष्ट नियमों को न अपनाना, (ii) कमजोर कार्यक्रम प्रबंधन, (iii) निगरानी प्रणाली की कमी, और (iv) सूचना प्रदान करने वाले कार्यक्रमों को लागू न करना। कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं :
     
  • वित्तीय प्रबंधन: कमिटी ने कहा कि टीएसपी फंड्स को राज्य, जिला या ब्लॉक स्तर पर अलग-अलग मदों में नहीं रखा जाता। यह नहीं बताया जाता कि प्रत्येक स्तर पर कितना फंड दिया गया है। जबकि टीएसपी के अंतर्गत फंड्स को अलग एकाउंट में रखा जाना चाहिए ताकि उनके उचित उपयोग के लिए प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी की जा सके। कमिटी ने सुझाव दिया कि प्रत्येक स्तर पर फंड्स को अलग-अलग मदों में रखा जाए और इसका कड़ाई से अनुपालन हो। कमिटी ने कहा कि यह फंड्स को जारी करने के लिए अनिवार्य किया जाना चाहिए। कमिटी ने यह सुझाव भी दिया कि निगरानी प्रणालियों, फंड्स के उपयोग और योजनाओं के कार्यान्वयन को ट्रैक करने के लिए अधिक सक्रिय प्रयास किए जाने चाहिए।
     
  • टीएसपी फंड के लिए नॉन-लैप्सेबल पूल: कमिटी ने गौर किया कि वर्तमान में वित्तीय वर्ष के अंत में फंड्स को टीएसपी फंड के नॉन-लैप्सेबल पूल में ट्रांसफर नहीं किया गया जिसे बाद में इस्तेमाल किया जा सके। कमिटी ने निम्नलिखित सुझाव दिए: (i) आबंटित किए गए टीएसपी फंड्स का निश्चित वित्तीय वर्ष में अधिकतम उपयोग किया जाए, और (ii) उन फंड्स को पूल करने के लिए नॉन-लैप्सेबल फंड बनाया जाए जिनका उपयोग उस वित्तीय वर्ष में नहीं किया गया हो।
     
  • निरीक्षण के लिए सेंट्रल नोडल इकाई: कमिटी ने कहा कि जनजातीय कार्य मंत्रालय ने निरीक्षण प्रणाली का विवरण देने वाले दिशानिर्देश तैयार नहीं किए हैं। टीएसपी का मुख्य उद्देश्य यह है कि राज्यों में अनुसूचित जनजातियों के विकास (उनकी जनसंख्या के अनुपात में) के लिए फंड्स के निर्धारण के जरिए केंद्रीय मंत्रालयों के परिव्यय को चैनलाइज किया जाए। कमिटी ने तर्क दिया कि फंड फ्लो उचित है अथवा नहीं, यह देखने के लिए एक केंद्रीय इकाई का गठन किया जाना चाहिए। उसने सुझाव दिया कि इसके लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय को केंद्रीय नोडल इकाई बनानी चाहिए जोकि एक ऑनलाइन निरीक्षण प्रणाली के जरिए टीएसपी के बेहतर समन्वय और प्रभावशाली कार्यान्वयन को आसान बनाए।
     
  • राज्य/जिला स्तर पर नोडल इकाइयां : कमिटी के अनुसार, नीति आयोग ने यह सुझाव दिया था कि मंत्रालयों और विभागों को टीएसपी के जरिए लागू किए जाने वाले कार्यक्रमों की निगरानी के लिए नोडल इकाइयां बनानी चाहिए। इन इकाइयों को राज्य विशिष्ट आबंटनों तथा केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं और केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के अंतर्गत एसटीज़ के लिए अलग से जारी फंड्स के बारे में भी बताना चाहिए। कमिटी ने कहा कि वर्तमान में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता तथा उच्च शिक्षा विभागों में टीएसपी को तैयार और लागू करने के लिए एक विशेष इकाई है। यह सुझाव दिया गया कि सभी मंत्रालयों या विभागों को कार्यान्वयन के चरण में टीएसपी की प्रभावी निगरानी के लिए अपनी खुद की विशेष नोडल इकाइयां स्थापित करनी चाहिए।
     
  • प्लानिंग प्रोसेस में स्थानीय समुदायों की भागीदारी: 2015 में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया कि योजनाएं बनाते समय जनजातियों के लाभार्थियों के बारे में विशेष विचार नहीं किया गया जैसा कि टीएसपी के अंतर्गत अपेक्षित है। कमिटी ने कहा कि जिन ब्लॉक्स में जनजातीय जनसंख्या बड़ी संख्या में हैं, वहां की योजना प्रक्रियाओं को उन्हें भागीदार बनाकर उन प्रक्रियाओं को मजबूत बनाया जा सकता है। कमिटी ने कहा कि टीएसपी के अंतर्गत किसी कार्यक्रम को लागू करने के लिए योजना को अंतिम रूप देने से पहले स्थानीय जनजातीय समुदाय के इनपुट्स/सुझाव लिए जाने चाहिए।

 

 

अस्वीकरणः प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) की स्वीकृति के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है