कृषि मार्केटिंग और साप्ताहिक ग्रामीण हाट की भूमिका

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • कृषि संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: हुकुमदेव नारायण यादव) ने 3 जनवरी, 2019 को ‘कृषि मार्केटिंग और साप्ताहिक ग्रामीण हाट’ पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। अधिकतर राज्यों में कृषि मार्केटिंग का रेगुलेशन राज्य सरकारों द्वारा स्थापित कृषि उत्पाद विपणन समितियों (एपीएमसीज़) द्वारा किया जाता है। लेकिन एपीएमसी बाजारों में अपने उत्पादों को बेचने की स्थिति में छोटे और सीमांत किसानों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे पर्याप्त बचत न होना, एपीएमसी बाजारों की दूरियां और परिवहन के साधनों की कमी। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण हाट ऐसे बाजार होते हैं जहां किसान अपने उत्पाद बेच सकते हैं। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल है:
     
  • एपीएमसी के साथ समस्याएं: कमिटी ने कहा कि एपीएमसी एक्ट्स के प्रावधानों को सही अर्थों में लागू नहीं किया गया। इसके निम्नलिखित कारण हैं: (i) एपीएमसी बाजारों में व्यापारियों की सीमित संख्या के कारण प्रतिस्पर्धा की कमी, (ii) व्यापारियों की गुटबाजी, और (iii) कमीशन और बाजार शुल्क के नाम पर गैर जरूरी कटौतियां। इसके अतिरिक्त कमिटी ने गौर किया कि अधिकतर किसानों की पहुंच एपीएमसी बाजारों सहित सरकारी खरीद केंद्रों तक नहीं होती। उसने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को वैकल्पिक मार्केटिंग प्लेटफॉर्म बनाने को वरीयता देनी चाहिए और कृषि मार्केटिंग में सुधारों के लिए स्टेकहोल्डर्स से परामर्श करना चाहिए।
     
  • एपीएमसी एक्ट्स में सुधार: कमिटी ने गौर किया कि एपीएमसी एक्ट्स में तुरंत सुधार करने की जरूरत है। ये एक्ट्स मार्केटिंग के विभिन्न चैनलों और उनमें प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने पर बहुत अधिक प्रतिबंध लगाते हैं। कमिटी ने कहा कि हालांकि केंद्र सरकार मॉडल एक्ट्स के जरिए एपीएमसी एक्ट्स में सुधार के लिए राज्य सरकारों से बार-बार अनुरोध करती है लेकिन इस संबंध में राज्यों का रवैया उदासीन ही रहता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों की एक कमिटी बनाए ताकि कृषि मार्केटिंग के लिए आम सहमति और कानूनी संरचना तैयार की जा सके।
     
  • शुल्क: कमिटी ने गौर किया कि हालांकि बाजार शुल्क और कमीशन व्यापारियों से वसूले जाने चाहिए लेकिन उन्हें किसानों से जमा किया जाता है। कुछ राज्यों में लागू न होने के बावजूद बाजार शुल्क वसूला जाता है। इसके अतिरिक्त अगर किसी वस्तु की खरीद-बिक्री एक से अधिक एपीएमसी बाजारों में की जाती है, तो एक ही राज्य में कारोबार होने के बावजूद हर बार बाजार शुल्क चुकाना पड़ता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि (i) कृषि उत्पाद पर शुल्क और सेस हटाया जाए, और (ii) केंद्र सरकार इस संबंध में राज्य सरकारों के साथ चर्चा करे।
     
  • बाजारों की उपलब्धता: कमिटी ने कहा कि एक एपीएमसी बाजार का औसत क्षेत्र 496 वर्ग किलोमीटर है जोकि 2006 में राष्ट्रीय किसान आयोग (चेयर: डॉ. एम.एस.स्वामीनाथन) द्वारा 80 वर्ग किलोमीटर के सुझाव से बहुत अधिक है। कमिटी ने कहा था कि इस जरूरत को पूरा करने के लिए 41,000 बाजारों की जरूरत है। इस संबंध में कमिटी ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को (i) कृषि बाजारों की संख्या बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों से परामर्श करना चाहिए, और (ii) जिन राज्यों में एपीएमसी नहीं हैं, वहां मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना चाहिए।
     
  • इंफ्रास्ट्रक्चर: कमिटी ने कहा कि अधिकतर एपीएमसी बाजारों में इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी सुविधाओं की हालत बहुत खराब है। इनमें बैंकिंग, इंटरनेट कनेक्टिविटी और ड्राइंग (सुखाने) की सुविधाएं भी खस्ता हालत में हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को (i) इन बाजारों में इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग सुविधा, डिजिटल कनेक्टिविटी और दूसरी सुविधाओं में सुधार के लिए राज्य सरकारों से परामर्श करना चाहिए, और (ii) एपीएमसी बाजारों के आधुनिकीकरण के लिए केंद्रीय प्रायोजित योजना तैयार करनी चाहिए।
     
  • ग्रामीण हाट: कमिटी ने कहा कि ग्रामीण हाट में किसान ग्राहकों तक सीधा पहुंच सकते हैं, इन हाटों में आने के लिए परिवहन पर उतना खर्च नहीं करना पड़ता, इसलिए ऐसी हाट कृषि बाजारों के मुकाबले अधिक व्यावहारिक होती हैं। कमिटी ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को ग्रामीण हाट को एपीएमसी एक्ट्स के दायरे में लाने के लिए राज्य सरकारों से बातचीत करनी चाहिए।
     
  • ग्राम योजना: कमिटी ने कहा कि ग्रामीण कृषि बाजार (ग्राम) योजना का उद्देश्य देश की ग्रामीण हाटों में इंफ्रास्ट्रक्चर और जन सुविधाओं में सुधार करना है। इस योजना के अंतर्गत मौजूदा 22,000 में से 4,600 हाटों को मनरेगा और दूसरी सरकारी योजनाओं के जरिए विकसित और अपग्रेड किया जाएगा। कमिटी ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को (i) इस योजना के अंतर्गत आने वाली हाटों की संख्या बढ़ानी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक पंचायत क्षेत्र में एक हाट मौजूद हो, और (ii) इसे पूर्ण रूप से केंद्र की वित्त पोषित योजना बनाना चाहिए।
     
  • कमिटी ने कहा कि चूंकि ग्राम योजना के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत धन की जरूरत होती है, इसलिए केंद्र और राज्य स्तरों पर विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय की आवश्यकता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि योजना बनाने और उसके समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए निरीक्षण कमिटी बनाई जानी चाहिए।
     
  • ई-नाम योजना: कमिटी ने कहा कि 18 राज्यों के 585 बाजार इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ई-नाम) योजना के पोर्टल से जुड़े हुए हैं। यह योजना मौजूदा एपीएमसी बाजारों को इस उद्देश्य के साथ जोड़ती है कि कृषि उत्पादों की इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग के लिए एकीकृत राष्ट्रीय बाजार का सृजन किया जा सके। कमिटी ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को योजना के कवरेज को उन राज्यों तक बढ़ाना चाहिए जहां एपीएमसी न हों। उसने यह सुझाव भी दिया कि सरकार को ई-नाम पोर्टल पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना चाहिए ताकि किसानों की डिजिटल साक्षरता और भागीदारी बढ़ाई जा सके।

 

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