ऑडिट फर्म्स और नेटवर्क्स को रेगुलेट करना

रिपोर्ट का सारांश

  • कमिटी ऑफ एक्सपर्ट्स (चेयर: अनुराग अग्रवाल) ने 25 अक्टूबर, 2018 को ऑडिट फर्म्स और उनके नेटवर्क्स को रेगुलेट करने से संबंधित अपनी रिपोर्ट कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय को सौंपी। रिपोर्ट में कमिटी के निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं:
     
  • भारत में ऑडिट संरचनाएं: कमिटी ने कहा कि भारत में काम करने वाले ऑडिट नेटवर्क्स तीन प्रकार की संरचनाओं का इस्तेमाल करते हैं: (i) भारतीय चार्टर्ड एकाउंटेंट्स इंस्टीट्यूट में पंजीकृत चार्टर्ड एकाउंटेंट्स (सीए) द्वारा स्थापित फर्मों के घरेलू नेटवर्क्स, (ii) अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क्स जहां घरेलू सीए फर्म्स सदस्यता समझौते के जरिए भारत से बाहर की संस्थाओं से टाई अप करती हैं, और (iii) अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क्स जहां घरेलू सीए फर्म्स सब-लाइसेंसिंग के जरिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की सदस्य भारतीय फर्म्स से टाई अप करती हैं।
     
  • ऑडिट का प्रोफेशन: कमिटी ने कहा कि राष्ट्रीय वित्तीय सूचना अथॉरिटी (एनएफआरए) को अपने ऑडिट निरीक्षण के परिणामों को प्रकाशित करने का अधिकार होना चाहिए। यह नोट किया गया है कि प्रतिकूल रिपोर्ट से प्रतिष्ठा का नुकसान, ऑडिट फर्मों के लिए बेहतर आंतरिक जांच और संतुलन बनाने के लिए एक प्रभावी निवारक हो सकता है। इसके अतिरिक्त अगर निवेशकों को लिस्टेड संस्थाओं के ऑडिटर्स के प्रदर्शन की सही सूचना होगी तो वे बेहतर तरीके से फैसले ले सकते हैं। कमिटी ने यह भी कहा कि ऑडिट के क्षेत्र में कई सेल्फ रेगुलेटरी संगठनों के होने के लाभ हैं। इससे उनके बीच प्रतिस्पर्धा उत्पन्न होती है जोकि इस पेशे के विकास में मदद मिल सकती है।
     
  • ब्रैंड नेम का इस्तेमाल: कमिटी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क्स के साथ ब्रांडिंग से भारतीय ऑडिट फर्म्स की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़ सकती है। इसके अतिरिक्त ब्रैंड नेम वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क्स के साथ सदस्य के तौर पर जुड़ी भारतीय ऑडिट फर्म्स की सेवाएं लेने से भारतीय कंपनियों को भी लाभ मिल सकता है। उसने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड नेम्स का इस्तेमाल भारतीय कंपनियों के लिए विभिन्न कारणों से वाणिज्यिक रूप से फायदेमंद हो सकता है जैसे विदेशी निवेश तक आसान पहुंच, विदेशी ग्राहकों के साथ बेहतर संबंध इत्यादि। कमिटी ने इसके लिए चार्टर्ड एकाउंटेंट्स रेगुलेशंस, 1988 और कोड ऑफ एथिक्स, 2009 में उपयुक्त संशोधन करने का सुझाव दिया।
     
  • जवाबदेही की कानूनी व्यवस्था: कमिटी ने कहा कि ऑडिटर्स और ऑडिट फर्म्स की जवाबदेही की मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त है। नेटवर्क की जवाबदेही पर कमिटी ने सुझाव दिया कि ऑडिट फेल्योर या फ्रॉड की स्थिति में एनएफआरए को उन अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क्स पर जुर्माना लगाने का कानूनी अधिकार होना चाहिए जिनके साथ भारतीय ऑडिट फर्म्स सदस्य के तौर पर जुड़ी हैं। ऐसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क्स/एंटिटी की जुर्माने की राशि, ऑडिट फर्म्स पर लगाए गए जुर्माने की राशि का पांच गुना तक होना चाहिए।
     
  • एनएफआरए यह कार्य कर सके, इसके लिए भारत में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के अंग के रूप में कार्य करने वाले प्रत्येक ऑडिटर और ऑडिट फर्म को अथॉरिटी को वार्षिक ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट सौंपनी चाहिए जिसमें कुछ खास खुलासे होने चाहिए। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) नेटवर्क का विवरण, जिसमें भारतीय ऑडिट फर्म्स और उनके नेटवर्क की संस्थाओं के बीच भुगतान का विवरण शामिल है, और (ii) नेटवर्क का गठन करने वाली बाहरी संस्थाओं के स्वामित्व और प्रबंधन संरचना के विवरण।
     
  • गैर ऑडिट सेवाएं प्रदान करना: कमिटी ने कहा कि विभिन्न देशों में ऑडिट फर्म्स अक्सर एक समान नेटवर्क के अंग के रूप में सेवाएं प्रदान करती हैं। उसने सुझाव दिया कि फर्म्स को ऑडिटी कंपनी या उसकी होल्डिंग या सबसिडियरी कंपनी को कुछ शर्तो के साथ गैर ऑडिट सेवा प्रदान करने की अनुमति दी जाए। इन शर्तों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अगर ऑडिटर अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा है तो वह किसी वित्तीय वर्ष में ऑडिट सेवाओं का सिर्फ 50% ही गैर ऑडिट सेवाओं से अर्जित कर सकता है, और (ii) ऑडिटर को एनएफआरए के समक्ष अपने नेटवर्क के जरिए ऑडिट और गैर ऑडिट सेवा से प्राप्त फीस का खुलासा करना होगा, और (iii) ऑडिटर को एनएफआरए के समक्ष यह घोषणा करनी होगी कि गैर ऑडिट सेवाएं से प्राप्त राजस्व, ऑडिट फीस के 50% से अधिक नहीं है।
     
  • विज्ञापन: कमिटी ने सुझाव दिया कि सीएज़/सीए फर्म्स कुछ शर्तों के साथ अपने सेवाओं का विज्ञापन कर सकती हैं और काम मांग सकती हैं। ये शर्तें हैं: (i) विज्ञापन इस तरह नहीं किया जाए/काम इस तरह नहीं मांगा जाएगा, जोकि झूठ पर आधारित हो या भ्रामक हो, (ii) प्रमोट किए जाने वाली सेवाएं/दावे झूठे या भ्रामक नहीं होने चाहिए, और (iii) कोई अपमानजनक संदर्भ या दूसरों के कार्य से निराधार तुलना नहीं की जाएगी। कमिटी ने कहा कि इसके लिए चार्टर्ड एकाउंटेंट्स रेगुलेशंस, 1988 और कोड ऑफ एथिक्स, 2009 में संशोधन करने की जरूरत होगी।

 

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