आपदा प्रबंधन और राहत के लिए केंद्रीय सहायता

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • वित्त संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर: डॉ. एम. वीरप्पा मोइली) ने 13 फरवरी, 2019 को ‘आपदा प्रबंधन और राहत के लिए केंद्रीय सहायता’ पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। आपदा प्रबंधन एक्ट, 2005 के अंतर्गत आपदा प्रभावित राज्यों को राज्य आपदा मोचन कोष (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (एनडीआरएफ) के जरिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। गंभीर प्रकृति की आपदाओं के लिए एसडीआरएफ की सहायता पर्याप्त न होने पर एनडीआरएफ से अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाती है। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
     
  • राहत का स्तर: आपदा की आशंका वाले कुछ राज्यों (जैसे ओड़िशा) ने कमिटी से कहा था कि राहत व्यय की कुछ मदें मौजूदा एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के नियमों में शामिल नहीं हैं। इसलिए कमिटी ने सुझाव दिया कि एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के अंतर्गत सहायता की दरों और स्तरों को विस्तार दिया जाना चाहिए ताकि व्यय की कुछ मदों को उनमें शामिल किया जा सके। इसमें सभी सरकारी शैक्षणिक संस्थानों, गैर आवासीय सरकारी भवनों और ट्रांसमिशन पावर सब-स्टेशनों की मरम्मत शामिल है। कमिटी ने सुझाव दिया कि राहत राशि को राज्य की संवेदनशीलता के आधार पर तय किया जाना चाहिए, न कि राज्य के पहले के व्यय को देखकर।
     
  • आपदा शमन कोष: कमिटी ने सुझाव दिया कि अलग से एक आपदा शमन कोष बनाया जाए जोकि आपदा की आशंका वाले राज्यों में आपदा रोकने के स्थायी उपाय करे। कमिटी ने कहा कि आपदा के संकट को कम करने और उसे रोकने में निवेश करने से लंबे समय में राहत और आपदा प्रबंधन पर व्यय कम होगा। इसके अतिरिक्त कमिटी ने सुझाव दिया कि आपदा की आशंका वाले राज्यों में स्थित सभी संपत्तियों को व्यापक बीमा कवरेज दिया जाना चाहिए।
     
  • राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क: सेंट्रल एक्साइज और कस्टम्स के अंतर्गत कुछ वस्तुओं पर राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क (एनसीसीडी) लगाया जाता है और उसके जरिए एनडीआरएफ को वित्त पोषित किया जाता है। कमिटी ने कहा कि जीएसटी के बाद से एनसीसीडी की राशि कम हो गई है। 2015-16 में जहां एनसीसीडी से 5,690 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे, वहीं 2018-19 में 2,500 करोड़ रुपए जमा हुए। कमिटी ने कहा कि जीएसटी परिषद और वित्त मंत्रालय को इस कोष में वृद्धि पर विचार करना चाहिए।
     
  • फंडिंग मैकेनिज्म: कमिटी ने आपदा प्रबंधन के वित्त पोषण के लिए अनेक सुझाव दिए। उसने कहा कि केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं द्वारा आबंटित राशि का 10% हिस्सा क्षतिग्रस्त इमारतों की स्थायी मरम्मत के लिए विशेष रूप से निर्धारित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त फंडिंग मैकेजिन्म को और लचीला बनाने के लिए कमिटी ने सुझाव दिया कि आपदा की स्थिति में प्रभावित राज्यों की ऋण लेने की क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
     
  • कमिटी ने कहा कि एसडीआरएफ के 10% वार्षिक आबंटन को राज्य सरकार द्वारा प्राकृतिक आपदाओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि इस 10% की सीमा को खत्म कर दिया जाना चाहिए और राज्य विशिष्ट आपदाओं का सारा व्यय एसडीआरएफ से किया जाना चाहिए। कमिटी ने यह सुझाव दिया कि इसके लिए एसडीआरएफ के कॉरपस को 10% बढ़ाया जाए।
     
  • प्रभावित राज्यों की मांग और केंद्र सरकार द्वारा जारी राशि के बीच काफी अंतर होता है, इसके मद्देनजर कमिटी ने सुझाव दिया कि 2020-25 की समयावधि के लिए एसडीआरएफ के कुल कॉरपस में सालाना 15% की वृद्धि की जाए (मौजूदा वृद्धि 5% है)। इसके अतिरिक्त उसने सुझाव दिया कि गंभीर प्रकृति की आपदाओं की स्थिति में तत्काल राहत कार्य के लिए एनडीआरएफ से अग्रिम राशि स्वतः जारी हो जाए, इस संबंध में भी प्रावधान किए जाने चाहिए।
     
  • वित्तीय समायोजन में संशोधन के सुझावों को के मद्देनजर कमिटी ने कहा कि वित्त तथा गृह मामलों के मंत्रालयों को 15वें वित्त आयोग को संशोधित मेमोरेंडम सौंपना चाहिए। इसके अतिरिक्त उसने सुझाव दिया कि जरूरत पड़ने पर आपदा प्रबंधन एक्ट 2005 में उपयुक्त बदलाव किए जा सकते हैं।          

 

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