फरवरी 2020

फरवरी 2020

इस अंक की झलकियां

बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू और केंद्रीय बजट पेश

बजट सत्र का दूसरा चरण 2 मार्च, 2020 को शुरू हुआ और यह 3 अप्रैल, 2020 तक चलेगा। इसके अतिरिक्त 2020-21 का बजट पेश किया गया। सरकार ने 2020-21 में 30,42,230 करोड़ रुपए के व्यय का प्रस्ताव रखा है। 

2019-20 की तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद 4.7% की दर से बढ़ा

पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले 2019-20 की तीसरी तिमाही में जीडीपी 4.7की दर से बढ़ी। दूसरी तिमाही के लिए वृद्धि अनुमान 5.1पर संशोधित किए गए थे। 

प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास बिल, 2020 लोकसभा में पेश

बिल लंबित कर विवादों को सुलझाने की एक व्यवस्था प्रदान करता है। इसके अंतर्गत एपेलेंट से विवाद को हल करने के लिए एक निश्चित राशि देने की अपेक्षा की जाती है, और मार्च 2020 के बाद अतिरिक्त राशि चुकानी होगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने थलसेना में महिलाओं को परमानेंट कमीशन देने के पक्ष में फैसला सुनाया

न्यायालय ने निर्देश दिया कि परमानेंट कमीशन लेने वाली महिला अधिकारी अपने पुरुष सहकर्मियों के समान विकल्प चुनने के लिए अधिकृत होंगी। यह फैसला थलसेना की सभी नॉन-कॉम्बैट सेवाओं पर लागू होता है। 

व्यवसायगत सुरक्षा संहिता और सेरोगेसी बिल पर कमिटी रिपोर्ट सौंपी गईं

व्यवसायगत सुरक्षा संहिता के सुझावों में राज्य सरकार की शक्तियों को स्पष्ट करना शामिल है। सेरोगेसी बिल की रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है कि किसी भी इच्छुक माता को सेरोगेट बनने की अनुमति दी जानी चाहिए। 

पोर्नोग्राफी और बच्चों पर उसके प्रभाव के मुद्दे पर एडहॉक कमिटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: (iयौन स्पष्टता को परिभाषित किया जाए(ii) बच्चों की ‘ग्रूमिंग’ को अपराध माना जाए, और (iii) साइबर बुलिंग पर जागरूकता अभियान शुरू किए जाएं। 

ड्राफ्ट कॉम्पिटीशन (संशोधन) बिल, 2020 टिप्पणियों के लिए जारी

मुख्य प्रावधानों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) कार्टेल्स की परिभाषा में क्रेताओं के कार्टेल्स को शामिल किया जाए, (ii) कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया के साथ मामलों को निपटाने के प्रावधान, और (iii) गवर्निंग बोर्ड की स्थापना। 

कैबिनेट ने केंद्रीय फसल बीमा योजनाओं के लिए संशोधित दिशानिर्देशों को मंजूरी दी

योजना के अंतर्गत सभी किसानों के लिए नामांकन को स्वैच्छिक बनाया गया है। राज्यों को यह छूट दी गई है कि वे अतिरिक्त जोखिम कवर को चुन सकते हैं और बेस कवर के विकल्प के साथ या उसके बिना एकल जोखिम बीमा प्रस्तावित कर सकते हैं। 

फिशरीज़ विभाग ने ड्राफ्ट नेशनल फिशरीज़ पॉलिसी जारी की

पॉलिसी में फिशरीज़ के समग्र विकास के लिए विभिन्न नीतियों को एकीकृत किया गया है। एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन में फिशरीज़ रिसोर्सेज़ के व्यापक प्रबंधन और रेगुलेशन को एक राष्ट्रीय कानून के जरिए सुनिश्चित किया जाएगा। 

ईज़ ऑफ लिविंग इंडेक्स और म्यूनिसिपल परफॉर्मेंस इंडेक्स 2019 लॉन्च

इन सूचकांकों मे 100 स्मार्ट सिटीज़ और 14 अन्य मिलियन प्लस शहरों के निवासियों के जीवन की गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा। इसमें जीवन की गुणवत्ता, आर्थिक क्षमता और सस्टेनेबिलिटी जैसे अनेक संकेतकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

ड्राफ्ट बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2020 पब्लिक फीडबैक के लिए जारी

पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन मंत्रालय ने ड्राफ्ट बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2020 जारी किया जिसके अंतर्गत बैटरियों के मैन्यूफैक्चरर्स और डीलर्स की कुछ जिम्मेदारियां निर्दिष्ट की गई हैं।

डीआईसीजीसी ने इंश्योर्ड बैंकों में सभी जमाकर्ताओं के लिए बीमा कवरेज को बढ़ाया

डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ने इंश्योर्ड बैंकों में जमाकर्ताओं के लिए बीमा कवरेज को एक लाख रुपए से बढ़ाकर पांच लाख रुपए किया।


 

संसद

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

बजट सत्र का दूसरा चरण प्रारंभ

बजट सत्र का पहला चरण 31 जनवरी से 11 फरवरी तक चला (सात दिनों की बैठक)। सत्र का दूसरा चरण 2 मार्च, 2020 से शुरू हुआ और 3 अप्रैल, 2020 तक चलेगा (24 दिनों की बैठक)।

बजट सत्र के लेजिसलेटिव एजेंडा में 14 बिल्स विचार और पारित होने तथा 28 बिल पेश होने, विचार और पारित होने के लिए सूचीबद्ध हैं। इनमें से तीन बिल्स लोकसभा में पेश किए जा चुके हैं। ये हैं: (i) एयरक्राफ्ट (संशोधन) बिल, 2020, (iiप्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास बिल, 2020, और (iiiआयुर्वेद शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान बिल, 2020। इसके अतिरिक्त संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश (दूसरा संशोधन) बिल, 2019 दोनों सदनों में पारित हो चुका है। 

लोकसभा में छह मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर चर्चा होगी। इनमें रेलवे, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और पर्यटन मंत्रालय शामिल हैं। राज्यसभा में पांच मंत्रालयों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें ग्रामीण विकास और विधि एवं न्याय मंत्रालय शामिल हैं। 

सत्र के दौरान लेजिसलेटिव एजेंडा पर विचार के लिए कृपया  देखें।  मुख्य 13 मंत्रालयों के व्यय संबंधी विश्लेषण के लिए कृपया  देखें।  

 

केंद्रीय बजट 2020-21

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

केंद्रीय बजट 2020-21 प्रस्तुत

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने 2020-21 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया। [1] बजट की मुख्य झलकियां इस प्रकार हैं: 

  • 2020-21 में सरकार ने 30,42,230 करोड़ रुपए के व्यय का प्रस्ताव रखा है। यह 2019-20 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 12.7अधिक है। 
     
  • विनिवेश से अधिक अनुमानित राजस्व के कारण कुल प्राप्तियों (शुद्ध उधारियों के अतिरिक्त) के 16.3% बढ़कर 22,45,893 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।
     
  • 2020-21 में सरकार ने 10% की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर (यानी वास्तविक वृद्धि जमा मुद्रास्फीति) का अनुमान लगाया है। 2019-20 में यह अनुमान 12% था।
     
  • राजस्व घाटा जीडीपी के 2.7% पर लक्षित है जोकि 2019-20 के 2.4% के संशोधित अनुमान से अधिक है। 
     
  • राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.5% पर लक्षित है जोकि 2019-20 के 3.8% के संशोधित अनुमान से कम है।

तालिका 1: बजट 2020-21 (करोड़ रुपए में)

मद

संशोधित 19-20

बजटीय 20-21

परिवर्तन का % 

कुल व्यय

26,98,552

30,42,230

12.7%

कुल प्राप्तियां (उधारियों के बिना) 

19,31,706

22,45,893

16.3%

राजकोषीय घाटा (उधारियां) 

7,66,846

7,96,337

3.8%

जीडीपी का % 

3.8

3.5

 

राजस्व घाटा

4,99,544

6,09,219

22.0%

जीडीपी का % 

2.4

2.7

 

Sources:  Budget at a Glance, Union Budget 2020-21; PRS.

वित्तीय परिव्यय के अतिरिक्त बजट में फाइनांस बिल के टैक्स प्रस्तावों का विवरण भी है। इस बजट में इनकम टैक्स की निम्न दरों का नया विकल्प भी प्रस्तावित किया गया है। अन्य प्रस्तावों में लाभांश वितरण टैक्स के भुगतान में परिवर्तन, सामाजिक सुरक्षा अंशदान के लिए कटौतियों की सीमा का प्रस्ताव, और देश में निवास से संबंधित बदलाव शामिल हैं। 

केंद्रीय बजट 2020-21 तथा मुख्य 13 मंत्रालयों के व्यय के विश्लेषण के लिए कृपया  देखें

 

समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

2019-20 की तीसरी तिमाही में जीडीपी 4.7% की दर से बढ़ी

2019-20 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर) के दौरान देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) (स्थिर कीमतों पर) पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 4.7की दर से बढ़ा। [2] पहली दो तिमाही में वर्ष दर वर्ष वृद्धि दर ऊपर की ओर संशोधित थी: पहली तिमाही में 5.6% (5% से)और दूसरी तिमाही में 5.1% (4.5% से), जिसका मुख्य कारण यह था कि आधार वर्ष को नीचे की ओर संशोधित किया गया था। रेखाचित्र 1 में तिमाही प्रदर्शन को प्रस्तुत किया गया है। 

रेखाचित्र 1: जीडीपी वृद्धि (% मेंवर्ष दर वर्ष) 

 

SourcesMOSPI; PRS.

विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में जीडीपी वृद्धि को सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) में मापा जाता है। 2018-19 की तीसरी तिमाही के मुकाबले, 2019-20 की तीसरी तिमाही में सभी क्षेत्रों में संयुक्त जीवीए 4.5% से कम हो गई। 2018-19 में यह 5.6% थी। पिछले वर्ष की तीसरी तिमाही के मुकाबले सभी क्षेत्रों में जीवीए की वृद्धि दर में गिरावट देखी गई, सिवाय कृषि, खनन और सेवा क्षेत्र को छोड़कर। कृषि में यह 2% से बढ़कर 3.5% और खनन में -4.4% से बढ़कर 3.2% हो गई। सेवा क्षेत्र में वृद्धि 7.4% पर बरकरार रही। तालिका 2 में क्षेत्रीय जीवीए वृद्धि का विवरण प्रस्तुत किया गया है। 

तालिका 2: विभिन्न क्षेत्रों में 2019-20 की तीसरी तिमाही में सकल मूल्य संवर्धन (वृद्धि में, वर्ष दर वर्ष)

क्षेत्र

तिमाही 3

तिमाही 2

तिमाही 3

2018-19

2019-20

2019-20

कृषि

2.0%

3.1%

3.5%

खनन

-4.4%

0.2%

3.2%

मैन्यूफैक्चरिंग

5.2%

-0.4%

-0.2%

बिजली

9.5%

3.9%

-0.7%

निर्माण

6.6%

2.9%

0.3%

सेवाएं

7.4%

7.3%

7.4%

जीवीए

5.6%

4.8%

4.5%

जीडीपी

5.6%

5.1%

4.7%

NoteGVA is GDP without taxes and subsidies, at basic prices (2011-12 base year).

SourcesMOSPI; PRS.

सरकार ने 2019-20 में जीडीपी वृद्धि के दूसरे अग्रिम अनुमान भी जारी किए। 2019-20 में जीडीपी (स्थिर मूल्यों पर) के 5की दर से बढ़ने का अनुमान है। इसके 2018-19 के लिए अनुमानित 6.1की वृद्धि दर से कम रहने का अनुमान है।

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट क्रमशः 5.15% और 4.9पर अपरिवर्तनीय

मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (एमपीसी) ने 2019-20 का छठा द्विमासिक मौद्रिक नीतिगत वक्तव्य जारी किया। [3]  पॉलिसी रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों को ऋण देता है) 5.15% पर अपरिवर्तनीय रही। एमपीसी के अन्य निर्णयों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • रिवर्स रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों से उधार लेता है) 4.9% पर अपरिवर्तनीय रहा।
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट (जिस दर पर बैंक अतिरिक्त धन उधार ले सकते हैं) और बैंक रेट (जिस दर पर आरबीआई बिल्स ऑफ एक्सचेंज को खरीदता है) 5.4% पर अपरिवर्तनीय रहा।
  • एमपीसी ने मौद्रिक नीति के समायोजन के रुख को बरकरार रखने का फैसला किया।

2019-20 की तीसरी तिमाही में औद्योगिक उत्पादन में 0.9% की गिरावट रही 

2019-20 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में, 2018-19 में इसी अवधि के मुकाबले 0.9की गिरावट रही। [4] बिजली क्षेत्र में 6%, जबकि मैन्यूफैक्चरिंग तथा खनन क्षेत्रों में क्रमशः 0.3% और 0.2% की गिरावट रही। रेखाचित्र 2 में 2019-20 की तीसरी तिमाही के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक उत्पादन में वर्ष दर वर्ष वृद्धि को प्रदर्शित किया गया है।  

रेखाचित्र 2: 2019-20 की तीसरी तिमाही में आईआईपी में वृद्धि (वर्ष दर वर्ष) 

SourcesMOSPI; PRS.

 

वित्त

प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वाल बिल, 2020 लोकसभा में पेश

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

लोकसभा में प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास बिल, 2020 पेश किया गया। [5] बिल इनकम टैक्स और कॉरपोरेशन टैक्स से संबंधित लंबित टैक्स विवादों को सुलझाने की प्रक्रिया प्रदान करता है। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एपेलेंट (अपीलार्थी): बिल के अनुसार, एपेलेंट इनकम टैक्स अथॉरिटी, या व्यक्ति, या दोनों हो सकते हैं जिनकी अपील 31 जनवरी, 2020 तक एपेलेट फोरम में लंबित है। इन एपेलेट फोरम्स में सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, इनकम टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल और कमीशनर्स (अपील) शामिल हैं।
     
  • रेज़ोल्यूशन की प्रक्रिया: बिल एक रेज़ोल्यूशन प्रक्रिया का प्रावधान करता है जिसके अंतर्गत एपेलेंट लंबित प्रत्यक्ष कर विवादों का रेज़ोल्यूशन शुरू करने के लिए निर्दिष्ट अथॉरिटी में डिक्लेरेशन (घोषणा) दायर कर सकता है। डिक्लेरेशन दायर करने की अंतिम तारीख केंद्र सरकार अधिसूचित करेगी। इसके आधार पर निर्दिष्ट अदालत एपेलेंट द्वारा देय राशि निर्धारित कर सकती है और डिक्लेरेशन की प्राप्ति के 15 दिन के अंदर एक सर्टिफिकेट दे सकती है जिसमें देय राशि का विवरण होगा। एपेलेंट को सर्टिफिकेट प्राप्त होने के 15 दिनों के अंदर यह राशि चुकानी होगी और इस भुगतान के बारे में निर्दिष्ट अथॉरिटी को बताना होगा। यह राशि रीफंडेबल नहीं होगी।
     
  • रेज़ोल्यूशन के लिए देय राशि: विवादों के रेज़ोल्यूशन के लिए एपेलेंट द्वारा देय राशि का निर्धारण इस आधार पर किया जाएगा कि विवाद टैक्स भुगतान या ब्याज भुगतान, जुर्माने या फीस से संबंधित है। इसके अतिरिक्त उसे अतिरिक्त राशि चुकानी होगी, अगर यह भुगतान 31 मार्च, 2020 के बाद किया जाता है। तालिका 3 में विवाद निवारण के लिए एपेलेंट द्वारा देय राशि को प्रदर्शित किया गया है।

तालिका 3: विवादों को सुलझाने के लिए देय राशि

विवाद

31 मार्च, 2020 से पहले देय राशि

31 मार्च, 2020 के बाद अतिरिक्त देय राशि

टैक्स का भुगतान

विवादित टैक्स की राशि (ऐसे टैक्स से जुड़े ब्याज या जुर्माने को माफ किया जाएगा)

(i) विवादित टैक्स की राशि का 10%, या (ii) उस टैक्स से संबंधित ब्याज और जुर्माना, इनमें से जो कम होगा

फीस, ब्याज का भुगतान या जुर्माना 

विवादित राशि का 25

विवादित राशि का अतिरिक्त 5

  • एक बार निर्दिष्ट अथॉरिटी सर्टिफिकेट जारी कर दे तो यह माना जाएगा कि इनकम टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल और कमीश्नर (अपील) के समक्ष लंबित अपील वापस ले ली गई है। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के समक्ष लंबित अपील या याचिकाओं के मामलों में, एपेलेंट से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपील या याचिका को वापस ले ले।

पीआरएस के बिल के सारांश के लिए कृपया  देखें

15वें वित्त आयोग ने रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा और कृषि निर्यात पर समूहों का गठन किया

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

15वें वित्त आयोग (चेयरएन. के. सिंह) ने संदर्भ की शर्तों के मद्देनजर रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा तथा कृषि निर्यात पर दो समूहों का गठन किया। [6],[7]  

रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा: यह समूह इस बात की जांच करेगा कि क्या रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिए कोई अलग फंडिंग मैकेनिज्म स्थापित किया जाना चाहिए और अगर ऐसा किया जाता है तो उसे परिचालित करने का तरीका क्या होगा। इसमें निम्नलिखित सदस्य हैं: (iग्रुप के चेयरमैन के तौर पर एन. के. सिंह, (ii15वें वित्त आयोग के सदस्य ए. एन. झा, (iiiगृह मामलों के मंत्रालय के सचिव, (ivरक्षा मंत्रालय के सचिव, और (vवित्त मंत्रालय के सचिव (व्यय)।

कृषि निर्यात पर विशेषज्ञ समूहयह समूह 2021-22 से 2015-26 की अवधि के दौरान राज्यों के लिए प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन पर सुझाव देगा, और इसका लक्ष्य कृषि निर्यात को बढ़ाना और ऐसी फसलों को बढ़ावा देना है जोकि उच्च आय प्रतिस्थापन को सक्षम बनाएं। अन्य संदर्भ की शर्तें निम्नलिखित हैं: (i) भारतीय कृषि उत्पादों के लिए निर्यात और आयात प्रतिस्थापन के अवसरों का आकलन करना और उपयुक्त उपाय सुझाना, (ii) उच्च कृषि उत्पादकता, मूल्य संवर्धन और कचरा कम करने तथा लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए उपाय सुझाना, और (iii) वैल्यू चेन के साथ निजी निवेश की बाधाओं को चिन्हित करना और उपयुक्त नीतियों एवं सुधारों का सुझाव देना। विशेषज्ञ समूह तीन महीनों में अपने सुझाव सौंपेगा। 

डीआईसीजीसी ने जमाकर्ताओं के लिए बीमा कवरेज को बढ़ाया 

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) ने इंश्योर्ड बैंकों (किसी भी कमर्शियल बैंक या सहकारी बैंक) में जमाकर्ताओं के लिए बीमा कवर की सीमा एक लाख रुपए से बढ़ाकर पांच लाख रुपए कर दी है। [8] डिपॉजिट इंश्योरेंस वह बीमा कवर होता है जिसका दावा जमाकर्ता बैंक के लिक्विडेशन या उसके लाइसेंस के रद्द होने के बाद कर सकता है। [9]  

कैबिनेट ने सरकारी क्षेत्र की तीन बीमा कंपनियों में पूंजी लगाने को मंजूरी दी 

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने सरकारी क्षेत्र की तीन बीमा कंपनियों में 2,500 करोड़ रुपए की राशि डालने को मंजूरी दी। ये कंपनियां हैं: (iओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, (ii) नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, और (iii) युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड। [10]   

इन कंपनियों की वित्तीय स्थिति और रेगुलेटरी सॉल्वेंसी की शर्तों का पालन न करने के कारण ऐसा किया गया है। उल्लेखनीय है कि इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी 150% के न्यूनतम सॉल्वेंसी अनुपात को निर्धारित करती है। [11]  देनदारियों के मुकाबले बीमा प्रदाता की परिसंपत्ति जितनी अधिक होती है, वही सॉल्वेंसी अनुपात कहलाता है। [12] 

आरबीआई ने रीटेल भुगतान प्रणालियों के लिए नई अंब्रेला एंटिटी के अथॉराइजेशन हेतु ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया 

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रीटेल भुगतान प्रणालियों के लिए पैन इंडिया न्यू अंब्रेला एंटिटी के अथॉराइजेशन हेतु ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया है। [13]  यह निकाय भुगतान और निपटान एक्ट, 2007 के अंतर्गत भुगतान प्रणालियों को परिचालित करने के लिए अधिकृत होगा।

यह निकाय निम्नलिखित के लिए जिम्मेदार होगा: (i) रीटेल क्षेत्र में नई भुगतान प्रणालियों  को स्थापित, प्रबंधित और परिचालित करना, (ii) जोखिमों को चिन्हित और प्रबंधित करना, जैसे निपटान, ऋण, लिक्विडिटी और परिचालित जोखिम, (iiiरीटेल भुगतान प्रणालियों से संबंधित घरेलू और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों की निगरानी करना, और (iv) भुगतान प्रणालियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।

यह निकाय 500 करोड़ रुपए का न्यूनतम पेड-अप कैपिटल गठित करेगा। 25से अधिक पेड-अप कैपिटल वाली एंटिटी को प्रमोटर माना जाएगा। पेड-अप कैपिटल में किसी सिंगल प्रमोटर का निवेश 40से अधिक नहीं होना चाहिए। 

आरबीआई ने मध्यम दर्जे के उपक्रमों को फ्लोटिंग रेट पर लोन देने हेतु बाहरी बेंचमार्क को अनिवार्य किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सभी बैंकों के लिए अनिवार्य किया है कि वे मध्यम दर्जे के उपक्रमों को 1 अप्रैल, 2020 से फ्लोटिंग रेट पर दिए जाने वाले लोन्स को बाहरी बेंचमार्क्स से जोड़ें। [14]  फ्लोटिंग रेट लोन्स ऐसे लोन होते हैं जिनकी ब्याज की दरें परिवर्तनशील होती है। वर्तमान में बैंकों के ऋण की दरें आंतरिक बेंचमार्क्स पर आधारित होती हैं जैसे बेस रेट या फंड्स की मार्जिनल लागत आधारित दर। आरबीआई के एक स्टडी ग्रुप (2017) ने कहा था कि बेस रेट या फंड्स की मार्जिनल लागत आधारित दर से मौद्रिक नीति का लाभ सब तक नहीं पहुंचता। [15]  उसने यथोचित समय पर बाहरी बेंचमार्क्स के इस्तेमाल का सुझाव दिया था। 

सितंबर 2019 में आरबीआई ने बैंकों से कहा था कि वे सूक्ष् और लघु उद्यमों (एमएसई) को फ्लोटिंग रेट पर लोन देने के लिए बाहरी बेंचमार्क को अपनाएं। [16]  उल्लेखनीय है कि एमएसई में प्लांट और मशीनरी में पांच करोड़ रुपए तक निवेश किया जाता है, जबकि मध्यम दर्ज के उपक्रमों में पांच से दस करोड़ रुपए के बीच निवेश किया जाता है। [17]  

बाहरी बेंचमार्क के लिए बैंक निम्नलिखित दरों को चुन सकते हैं: (iरेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई कमर्शियल बैंको को उधार देता है), (ii) फाइनांशियल बेंचमार्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एफबीआईएल) द्वारा प्रकाशित तीन महीने का ट्रेजरी बिल यील्ड, (iiiएफबीआईएल द्वारा प्रकाशित छह महीने का ट्रेजरी बिल यील्ड, या (iv) एफबीआईएल द्वारा प्रकाशित कोई दूसरा बेंचमार्क मार्केट इंटरेस्ट रेट। बैंकों को बेंचमार्क रेट से कम पर उधार देने की अनुमति नहीं है।

 

परिवहन

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

एयरक्राफ्ट (संशोधन) बिल, 2020 लोकसभा में पेश 

एयरक्राफ्ट (संशोधन) बिल, 2020 को लोकसभा में पेश किया गया। [18]  बिल एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 में संशोधन का प्रयास करता है। एक्ट सिविल एयरक्राफ्ट्स की मैन्यूफैक्चरिंग, उनके कब्जे, इस्तेमाल, परिचालन, बिक्री, आयात और निर्यात तथा एयरोड्रोम्स की लाइसेंसिंग को रेगुलेट करता है। बिल के मुख्य प्रावधानों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अथॉरिटीज़बिल नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अंतर्गत तीन मौजूदा निकायों को एक्ट के अंतर्गत वैधानिक निकाय बनाता है। ये अथॉरिटीज़ हैं: (i) डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए), (ii) ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस), और (iii) एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट्स इनवेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी)। इनमें से प्रत्येक निकाय का एक डायरेक्टर जनरल होगा, जिसकी नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी।
     
  • डीजीसीए बिल के अंतर्गत आने वाले मामलों में सुरक्षा चौकसी तथा रेगुलेटरी काम करेगा। बीसीएएस नागरिक उड्डयन सुरक्षा से संबंधित रेगुलेटरी निगरानी का काम करेगा। एएआईबी एयरक्राफ्ट्स की दुर्घटनाओं और हादसों से संबंधित जांच करेगा। अगर जनहित में जरूरी हुआ तो केंद्र सरकार इन अथॉरिटीज़ के कामकाज से संबंधित मामलों में दिशानिर्देश जारी कर सकती है।
     
  • अपराध और सजा: एक्ट के अंतर्गत विभिन्न अपराधों के लिए अधिकतम दो वर्षों की सजा, या 10 लाख रुपए तक का जुर्माना, या दोनों भुगतने पड़ सकते हैं। इन अपराधों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) एयरक्राफ्ट में हथियार, विस्फोटक या दूसरी खतरनाक वस्तुएं ले जाना, (ii) एक्ट के अंतर्गत किसी निर्दिष्ट नियम का उल्लंघन करना, और (iii) एयरोड्रोम रेफ्रेंस प्वाइंट के इर्द-गिर्द के रेडियस में बिल्डिंग बनाना या दूसरे कंस्ट्रक्शन करना। बिल इन सभी अपराधों पर जुर्माने को बढ़ाकर 10 लाख रुपए से एक करोड़ रुपए के बीच करता है।
     
  • बिल एक्ट के अंतर्गत आने वाले अपराधों या नियमों की कंपाउंडिंग की अनुमति देता है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) किसी व्यक्ति या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए उड़ान, और (ii) तीनों निकायों में से किसी एक के डायरेक्टर जनरल द्वारा जारी निर्देशों का उल्लंघन। डायरेक्टर जनरल्स केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट तरीकों से इन अपराधों की कंपाउंडिंग कर सकते हैं। बार-बार अपराध करने पर अपराधों की कंपाउंडिंग की अनुमति नहीं है।

पीआरएस के बिल के सारांश के लिए कृपया  देखें । 

 

स्वास्थ्य

सेरोगेसी (रेगुलेशन) बिल, 2019 पर सिलेक्ट कमिटी ने रिपोर्ट सौंपी

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

सेरोगेसी (रेगुलेशन) बिल, 2019 पर सिलेक्ट कमिटी (चेयरभूपेंद्र यादव) ने अपनी रिपोर्ट सौंपी। [19]  सेरोगेसी में कोई महिला किसी इच्छुक दंपत्ति के लिए बच्चे को जन्म देती है और जन्म के बाद उस इच्छुक दंपत्ति को बच्चा सौंप देती है। कमिटी के मुख्य निष्कर्षों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कमर्शियल बनाम निस्वार्थ (एलट्रूइस्टिक) सेरोगेसी: बिल कमर्शियल सेरोगेसी को प्रतिबंधित करता है और निस्वार्थ सेरोगेसी की अनुमति देता है। निस्वार्थ सेरोगेसी में सेरोगेट माता को गर्भावस्था के दौरान दिए जाने वाले मेडिकल खर्चे और बीमा कवरेज के अतिरिक्त कोई मौद्रिक मुआवजा नहीं दिया जाता। कमिटी ने निस्वार्थ सेरोगेसी के स्थान पर मुआवजे के आधार पर सेरोगेसी मॉडल का सुझाव दिया।
     
  • इस मुआवजे में सेरोगेट माता के स्वास्थ्य एवं वेतन संबंधी नुकसान की भरपाई होनी चाहिए। कमिटी ने कहा कि सेरोगेसी को आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि वाली महिलाओं के लिए आर्थिक अवसर के रूप में देखा जाता रहा है। कमर्शियल सेरोगेसी को प्रतिबंधित करके बिल इस सच्चाई को नजरंदाज करता है कि निस्वार्थ सेरोगेसी भी शोषण ही करती है।
     
  • इस संबंध में कमिटी ने सुझाव दिया कि सेरोगेसी को उस विशिष्ट उद्देश्य के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है जिसके कारण कोई महिला सेरोगेसी के लिए तैयार होती है। यह उद्देश्य कोई भी हो सकता है: (i) भुगतान योग्य सेवा देना और कमाई करना, या (iiनिस्वार्थ कारण से सेरोगेसी करना।
     
  • ‘निकट संबंधी’ होने के कारण सेरोगेसी करने का क्या असर हो सकता है: बिल के अंतर्गत सेरोगेट महिला इच्छुक दंपत्ति का केवल निकट संबंधी’ हो सकती है। कमिटी ने कहा कि निकट संबंधी के मानदंड से सेरोगेट माताओं की उपलब्धता कम हो सकती है और इसका उस व्यक्ति पर असर हो सकता है जिसे सचमुच सेरोगेसी की जरूरत है। इसलिए कमिटी ने सुझाव दिया कि निकट संबंधी की परिभाषा को हटाया जाए और इच्छुक महिला को सेरोगेट माता बनने की अनुमति दी जाए।  
     
  • पांच वर्ष की प्रतीक्षा अवधि: बिल के अंतर्गत इच्छुक दंपत्ति पांच वर्ष तक असुरक्षित सहवास के बाद गर्भधारण में अक्षम रहने पर या किन्हीं अन्य मेडिकल स्थितियों में गर्भधारण न कर पाने के बाद सेरोगेसी की व्यवस्था कर सकता है। कमिटी ने कहा कि पांच वर्ष की यह अवधि विशेषकर कई स्थितियों में बहुत लंबी है, जैसे गर्भाशय न होना, कैंसर के कारण गर्भाशय निकालना, और ऐसी स्थितियां, जब सामान्य गर्भावस्था संभव नहीं हो।
     
  • कमिटी ने सुझाव दिया कि बिल से इनफर्टिलिटी की परिभाषा और पांच वर्ष की प्रतीक्षा अवधि को हटाया जाए। उसने सुझाव दिया कि किसी ऐसी दंपत्ति (दंपत्ति में से कोई एक या दोनों), जिसके लिए गेस्टेशनल सेरोगेसी मेडिकल कारणों से जरूरी हो, को सेरोगेसी की अनुमति दी जानी चाहिए। जेस्टेशनल सेरोगेसी में सेरोगेट माता के गर्भ में भ्रूण को प्रत्यारोपित किया जाता है और बच्चा सेरोगेट माता से जेनेटिकली संबंधित नहीं होता। इस प्रकार वह इच्छुक महिला दंपत्ति का बच्चा कैरी करती है।     

पीआरएस रिपोर्ट के सारांश के लिए कृपया  देखें।  बिल के विश्लेषण के लिए कृपया  देखें । 

कैबिनेट ने सहायक प्रजनन तकनीक रेगुलेशन बिल, 2020 को मंजूरी दी 

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने सहायक प्रजनन तकनीक रेगुलेशन बिल, 2020 को मंजूरी दी। [20]  बिल देश में सहायक प्रजनन तकनीक सेवाओं को रेगुलेट करने का प्रयास करता है। सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) उन सभी तकनीकों को कहा जाता है जो मानव शरीर के बाहर स्पर्म (ओसिट) को हैंडिल करके तथा महिला के रीप्रोडक्टिव ट्रैक्ट में गैमेट (एंब्रेयो) को ट्रांसफर करके गर्भावस्था को संभव बनाने में मदद करती हैं। इनमें इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन, इंट्रूटेरीन इनसेमिनेशन और जेस्टेशनल सेरोगेसी शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि बिल की प्रति पब्लिक डोमेन में उपलब्ध नहीं है। प्रेस रिलीज के अनुसार, बिल एआरटी सेवाओं को रेगुलेट करने के लिए राष्ट्रीय बोर्ड का गठन करता है। ये बोर्ड निम्नलिखित कार्य करेगा: (i) क्लिनिक में काम करने वाले व्यक्तियों के लिए आचार संहिता, और (ii) फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, लेबोरेट्री और डायग्नॉस्टिक उपकरणों और क्लिनिकों और बैंकों में विशेषज्ञता प्राप्त कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम मानदंड तय करेगा।

इसके अतिरिक्त बिल में सभी एआरटी बैंकों और क्लिनिकों के केंद्रीय डेटाबेस का रखरखाव करने के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्री और रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी बनाए जाने का प्रावधान है। बिल सेक्स सिलेक्शन, मानव एंब्रेयो या गैमेट्स की बिक्री करने, और ऐसे गैरकानूनी काम करने वाली संस्थाओं के लिए सख्त सजा भी प्रस्तावित करता है।

ड्राफ्ट ड्रग और चमत्कारी उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) संशोधन बिल, 2020 जारी

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्राफ्ट ड्रग और चमत्कारी उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) संशोधन बिल, 2020 को जारी किया। [21]  बिल ड्रग और मैजिक रेमेडी (आपत्तिजनक विज्ञापन) एक्ट, 1954 में संशोधन करता है। प्रस्तावित मुख्य संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं

  • कुछ ड्रग्स के विज्ञापन पर प्रतिबंधएक्ट ऐसे ड्रग्स और उपचारों के विज्ञापनों को प्रतिबंधित करता है जिनमें चमत्कारी उपचार का दावा किया जाता है, और उन्हें अपराध बताता है। एक्ट के अनुसार, 54 बीमारियों, विकारों और स्थितियों की दवाओं के विज्ञापनों पर प्रतिबंध है।
     
  • ड्राफ्ट बिल 24 अन्य बीमारियों और विकारों को इस अनुसूची में शामिल करता है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) यौन ताकत को बढ़ाने वाली दवा या उपचार, (ii) त्वचा का गोरापन, (iii) समय से पहले बुढ़ापा आना,  और (iv) बच्चों और वयस्कों का कद बढ़ना।
     
  • सजा: एक्ट के अंतर्गत पहली बार अपराध करने पर छह महीने तक की सजा हो सकती है और जुर्माना भरना पड़ सकता है। दोबारा अपराध करने पर एक साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
     
  • ड्राफ्ट बिल सजा को बढ़ाता है। पहली बार अपराध करने पर दो साल तक सजा और 10 लाख तक का जुर्माना भरना होगा। दोबारा अपराध करने पर पांच साल तक की सजा और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना भरना होगा।

ड्राफ्ट बिल पर टिप्पणियां 3 फरवरी, 2020 से 45 दिनों तक आमंत्रित की गई हैं। 

मंत्रालय ने मानव या पशुओं पर इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों को ड्रग के रूप में अधिसूचित किया

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही मानव या पशुओं पर इस्तेमाल होने वाले सभी मेडिकल उपकरणों को ड्रग और कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के अंतर्गत ड्रग के रूप में अधिसूचित किया। [22]  यह 1 अप्रैल, 2020 से लागू होगा।

अधिसूचना के अनुसार, इंस्ट्रूमेंट्स, अपरेटस, अप्लायंसेज़ और इंप्लांट्स सहित सभी उपकरण, चाहे अनेक कारणों से उन्हें अकेले इस्तेमाल किया जा रहा हो अथवा कॉम्बिनेशन में, को इसमें कवर किया जाएगा। इन कारणों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) किसी बीमारी का निदान, रोकथाम, निगरानी या उपचार, (ii) एनाटोमी की जांच, रिप्लेसमेंट या उसमें बदलाव, और (iii) जीवन को सपोर्ट करना या उसे बरकरार रखना।

इसके अतिरिक्त मंत्रालय ने मेडिकल डिवाइस (संशोधन) नियम, 2020 को अधिसूचित किया है जिसमें मेडिकल डिवाइस के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन का प्रावधान है। [23]  अधिसूचना में वह समय अवधि भी दी गई है जब विविध जोखिमों वाले सभी मेडिकल डिवाइस को पंजीकृत किया जाना चाहिए।

 

आयुष

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान संस्थान बिल, 2020 पेश 

आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान बिल, 2020 को लोकसभा में पेश किया गया। [24]  बिल तीन आयुर्वेद संस्थानों का विलय कर एक संस्थान- आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान संस्थान बनाने का प्रयास करता है। बिल इस संस्थान को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करता है।   

  • विलय: जिन मौजूदा संस्थानों का विलय किया जाएगा, वे हैं: (i) स्नातकोत्तर शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, जामनगर, (ii) श्री गुलाब कुंवर बा आयुर्वेद महाविद्यालय, जामनगर, और (iii) भारतीय आयुर्वेदिक फार्मास्यूटिकल्स विज्ञान संस्थान, जामनगर। प्रस्तावित संस्थान गुजरात आर्युवेद विश्वविद्यालय, जामनगर के परिसर में स्थित होगा।
     
  • संस्थान का उद्देश्य: बिल के अनुसार, संस्थान का निम्नलिखित उद्देश्य होगा: (i) आयुर्वेद और फार्मेसी की मेडिकल शिक्षा में शिक्षण के पैटर्न विकसित करना, (ii) आयुर्वेद की सभी शाखाओं में लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए शिक्षण केंद्रों को एक साथ लाना, (iii) आयुर्वेद की पोस्टग्रैजुएट शिक्षा में आत्मनिर्भरता हासिल करना ताकि इस क्षेत्र में विशेषज्ञों और मेडिकल शिक्षक पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हों, और (iv) आयुर्वेद के क्षेत्र में गहन अध्ययन और अनुसंधान करना। 
     
  • संस्थान का संयोजन: बिल के अनुसार, संस्थान में 15 सदस्य होंगे। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) आयुष मंत्री, (ii) आयुष मंत्रालय के आयुर्वेद सचिव एवं तकनीकी प्रमुख, (iii) गुजरात सरकार के स्वास्थ्य विभाग के सचिव, (iv) संस्थान के निदेशक, (v) केंद्रीय आर्युवेद अनुसंधान परिषद के महानिदेशक, (vi) आयुर्वेद शिक्षा, उद्योग और अनुसंधान के तीन विशेषज्ञ, और (vii) तीन संसद सदस्य। जामनगर के स्नातकोत्तर शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक संस्थान के पहले निदेशक के तौर पर नियुक्त किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त बिल कहता है कि संस्थान की एक गवर्निंग बॉडी होगी जोकि संस्थान की शक्तियों का इस्तेमाल करेगी और निर्दिष्ट तरीके से कार्य करेंगी।  
     
  • संस्थान के कार्यसंस्थान के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (iआयुर्वेद की स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा (फार्मेसी सहित) का प्रावधान, (iiआयुर्वेद में स्नातक और स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए पाठ्यक्रम और करिकुलम निर्दिष्ट करना, (iii) आयुर्वेद की विभिन्न शाखाओं में अनुसंधान की सुविधा प्रदान करना, (iv) आयुर्वेद और फार्मेसी की शिक्षा की परीक्षाएं संचालित करना, डिग्री, डिप्लोमा और दूसरे डिस्टिंक्शंस और टाइटिल देना, और (v) आयुर्वेद के सपोर्टिंग स्टाफ जैसे नर्सों के लिए उत्तम दर्जे के कॉलेज और अस्पताल चलाना। 

पीआरएस के बिल के सारांश के लिए कृपया  देखें

 

शिक्षा

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

कैबिनेट ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कानून संस्थान (संशोधन) बिल, 2020 को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कानून संस्थान (संशोधन) बिल, 2020 को पेश करने को मंजूरी दी। [25]  बिल भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान एक्ट, 2014 और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (सार्वजनिक निजी भागीदारी) एक्ट, 2017 में संशोधन करने का प्रयास करता है।

बिल सूरत, भोपाल, भागलपुर, अगरतला और रायचूर में सार्वजनिक निजी भागीदारी के जरिए पांच भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित करता है। वर्तमान में इन संस्थानों को सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के अंतर्गत सोसायटी के तौर पर पंजीकृत किया गया है और इनके पास डिग्री या डिप्लोमा देने का अधिकार नहीं है। राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित होने पर पांच संस्थान बैचलर्स ऑफ टेक्नोलॉजी, मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी और पीएच.डी जैसी डिग्री दे सकते हैं।  

 

कॉरपोरेट मामले

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

ड्राफ्ट कॉम्पिटीशन (संशोधन) बिल, 2020 टिप्पणियों के लिए जारी 

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने पब्लिक फीडबैक के लिए ड्राफ्ट कॉम्पिटीशन (संशोधन) बिल, 2020 को जारी किया। [26]  जुलाई 2019 में कॉम्पिटीशन लॉ रिव्यू कमिटी (चेयर: इंजेती श्रीनिवास) ने अपनी रिपोर्ट में कॉम्पिटीशन एक्ट, 2002 में संशोधनों पर सुझाव दिए थे। ड्राफ्ट बिल में कमिटी के सुझावों के आधार पर एक्ट में अनेक संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं। ड्राफ्ट बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • कार्टेल की परिभाषा: वर्तमान में एक्ट में कार्टेल में उत्पादकों, विक्रेताओं या सर्विस प्रोवाइडर्स के संगठन शामिल हैं जोकि वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण या मूल्य को सीमित या नियंत्रित करते हैं। ड्राफ्ट बिल में इसमें संशोधन किया गया है और इसमें क्रेताओं के कर्टेल्स को भी शामिल किया गया है।
     
  • गवर्निंग बॉडी: ड्राफ्ट बिल में गवर्निंग बॉडी की स्थापना का प्रावधान है। इसमें 13 सदस्य होंगे जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) चेयरपर्सन, (ii) छह पूर्णकालिक सदस्य, (iii) पदेन सदस्यों के तौर पर दो सरकारी प्रतिनिधि (वित्त और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के), और (iv) चार अल्पकालिक सदस्य। गवर्निंग बोर्ड के कार्यों में निम्नलिखित शामिल होगा: (i) प्रतिस्पर्धा से जुड़े मामलों और कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) के प्रशासन के संबंध में रेगुलेशन बनाना, और (ii) किसी भी वैधानिक अथॉरिटी या सरकारी विभाग के साथ सीसीआई की ओर से अनुबंधों और मेमोरेंडम करना, उसमें संशोधन करना या उसे रद्द करना। 
     
  • सेटलमेंट्स और कमिटमेंट्स: जिन कंपनियों की प्रभुत्व का दुरुपयोग करने या गैर प्रतिस्पर्धी समझौते (जैसे एक्सक्लूसिव सप्लाई या वितरण समझौते) करने के संबंध में जांच की जा रही है, वे सीसीआई को आवेदन कर सकती हैं कि (i) मामले को सेटल किया जाए, या (ii) कमिटमेंट ऑफर किए जाएं। महानिदेशक (एक्ट के अंतर्गत जांच के लिए नियुक्त) के सीसीआई को जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद और सीसीआई द्वारा अंतिम आदेश से पहले यह आवेदन किया जा सकता है। कमिटमेंट या सेटलमेंट आवेदन को स्वीकार या रद्द करने के सीसीआई के आदेश के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती।
     
  • डील वैल्यू की सीमाएक्ट के अंतर्गत इंटरप्राइजेज का अधिग्रहण, विलय या एकीकरण कॉम्बिनेशन माना जाता है, अगर वे टर्नओवर या वैल्यू ऑफ एसेट्स की कुछ निश्चित शर्तों को पूरा करते हैं। ऐसे प्रस्तावित कॉम्बिनेशंस के लिए नोटिस देना होता है। ड्राफ्ट बिल में प्रावधान है कि केंद्र सरकार कॉम्बिनेशन फाइलिंग हेतु मानदंड (टर्नओवर या वैल्यू ऑफ एसेट्स के अतिरिक्त) निर्दिष्ट कर सकती है। 

ड्राफ्ट बिल पर 6 मार्च, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

ऑडिट की स्वतंत्रता और जवाबदेही पर परामर्श पत्र जारी

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने ऑडिट की स्वतंत्रता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधनों का सुझाव देने हेतु परामर्श पत्र जारी किया। [27] पत्र पर 15 मार्च, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

पत्र में ऑडिटर्स की स्वतंत्रता पर पांच खतरों को चिन्हित किया गया है। ये हैं: (iखुद के हित से जुड़ा खतरा, क्योंकि ऑडिटर अपने क्लाइंट की फीस पर निर्भर करता है, (ii) खुद की समीक्षा का खतरा, क्योंकि ऑडिटर अपना काम खुद ऑडिट करता है, (iiiएडवोकेसी का खतरा, क्योंकि वे क्लाइंट को प्रमोट करते हैं, (ivपरिचित होने का खतरा, क्योंकि ऑडिटर का क्लाइंट या नियोक्ता से लंबा और गहरा संबंध होता है, और (vडराए धमकाए जाने का खतरा, क्योंकि क्लाइंट के डराने-धमकाने से ऑडिटर की वस्तुनिष्ठता प्रभावित हो सकती है। इस संबंध में परामर्श पत्र में निम्नलिखित मुद्दे उठाए गए हैं:

  • भारत की बिग 4 ऑडिट फर्म्स के अल्पाधिकार के कारण उत्पन्न आर्थिक संकेद्रण को कैसे काबू किया जाए,
     
  • क्या एक ऑडिट फर्म/ऑडिटर के अंतर्गत ऑडिट की संख्या कम की जानी चाहिए और क्या एक ऑडिट फर्म के अंतर्गत भागीदारों की संख्या कम या तय की जानी चाहिए,
     
  • क्या ऑडिट फर्मों को क्लाइंट्स को गैर-ऑडिट सेवाएं प्रदान करने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए,
     
  • क्या बड़ी कंपनियों के लिए संयुक्त ऑडिट अनिवार्य होना चाहिए और यदि हां तो इन कंपनियों के लिए क्या सीमा होनी चाहिए,
     
  • मंत्रालय ने ऑडिटर्स और ऑडिट फर्मों की जवाबदेही में सुधार के लिए एक ‘कम्पोजिट ऑडिट क्वालिटी इंडेक्स’ का भी प्रस्ताव रखा। इस तरह के सूचकांक में क्या गुणात्मक और मात्रात्मक मापदंडों को शामिल किया जाना चाहिए, उन्हें कैसे मापा जाना चाहिए और किन कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होना चाहिए, इस पर सुझाव आमंत्रित किए गए थे।

 

श्रम और रोजगार 

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

स्टैंडिंग कमिटी ने व्यवसायगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2019 पर अपनी रिपोर्ट सौंपी

श्रम संबंधी स्टैंडिंग कमिटी ने व्यवसायगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता, 2019 पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। [28]  संहिता स्वास्थ्य, सुरक्षा और कार्य स्थितियों से संबंधित 13 मौजूदा श्रम कानूनों को रद्द करती है और उनका स्थान लेती है।  

  • परिभाषा: कमिटी ने कहा कि संहिता में कुछ शब्दों जैसे वेज, वर्कप्लेस, सुपरवाइजर और मैनेजर को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए।
     
  • कर्मचारी और श्रमिक: संहिता में श्रमिक को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है जोकि किसी उद्योग में मैनुअल या सुपरवाइजरी, इत्यादि काम के लिए नियुक्त है। इसमें पुलिस के रूप में नियुक्त या प्रति माह 15,000 रुपए से अधिक कमाने वाले व्यक्तियों को शामिल नहीं किया गया है। कर्मचारी को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है जिसे इस्टैबलिशमेंट द्वारा वेतन पर नियुक्त किया जाता है। इसमें अप्रेंटिस और सशस्त्र बलों के लोग शामिल नहीं हैं।
     
  • कमिटी के अनुसार, इस बारे में अस्पष्टता है कि संहिता के कौन से खंड कर्मचारियों या श्रमिकों पर लागू होते हैं। उदाहरण के लिए कार्य स्थितियों वाले खंड कर्मचारियों पर लागू होते हैं, जबकि कल्याणकारी उपाय श्रमिकों पर। कमिटी ने सुझाव दिया कि कल्याणकारी उपाय कर्मचारियों और श्रमिकों, दोनों पर लागू होने चाहिए। 
     
  • राज्य सरकारों की शक्तियां: संहिता के अंतर्गत केंद्र सरकार के इस्टैबलिशमेंट्स, मुख्य बंदरगाहों और खदानों इत्यादि से संबंधित मामलों में केंद्र सरकार, उचित सरकार होगी। दूसरे सभी मामलों में, जिनमें कारखाने और बागान आते हैं, राज्य सरकार उचित सरकार होगी। कमिटी ने कहा कि यह अस्पष्ट है कि कब उपयुक्त सरकार का अर्थ राज्य सरकारें हैं। उसने राज्य और केंद्र सरकार की जिम्मेदारियां निर्दिष्ट करने का सुझाव दिया। और यह भी कहा कि सुरक्षा और कार्य स्थितियां राज्य की जिम्मेदारी होती है।  
     
  • काम के घंटे: संहिता के अंतर्गत काम के अधिकतम घंटों को उचित सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाना चाहिए। कमिटी ने सुझाव दिया कि संहिता को प्रति दिन काम के लिए अधिकतम आठ घंटे का प्रावधान करना चाहिए। 
     
  • कवरेज: संहिता 10 या उससे अधिक श्रमिकों वाले सभी इस्टैबलिशमेंट्स, और सभी खदानों एवं डॉक्स पर लागू होती है। कमिटी ने कहा कि संहिता के अंतर्गत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की सुरक्षा को संरक्षण प्राप्त नहीं है। 
     
  • खतरनाक प्रक्रियाएं और पदार्थ: कमिटी ने यह सुझाव भी दिया कि विकसित देशों के अनुरूप खतरनाक प्रक्रियाओं की सूची बढ़ाई जानी चाहिए। 

पीआरएस रिपोर्ट के सारांश के लिए कृपया  देखें  

 

सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

सोशल मीडिया पर पोर्नोग्राफी और बच्चों पर उसके प्रभाव के मुद्दे पर एडहॉक कमिटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

राज्यसभा की एडहॉक कमिटी (चेयरजयराम रमेशन) ने सोशल मीडिया पर पोर्नोग्राफी और बच्चों पर उसके प्रभाव के मुद्दे पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। [29] कमिटी के मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं

  • परिभाषायौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण एक्ट, 2012 में बाल पोर्नोग्राफी का अर्थ है, बच्चे से यौन संबंध बनाने का कोई भी दृश्य चित्रण (जैसे फोटोग्राफ या वीडियो)। कमिटी ने सुझाव दिया कि बाल पोर्नोग्राफी की परिभाषा को व्यापक बनाया जाए ताकि उसमें लिखित सामग्री और ऑडियो रिकॉर्डिंग भी शामिल की जा सके। इसके अतिरिक्त उसने सुझाव दिया कि एक्ट में ‘यौन स्पष्टता’ को भी परिभाषित किया जाए।
     
  • ग्रूमिंग बच्चे के साथ संबंध बनाने की वह प्रक्रिया है जिससे नाबालिग से यौन संपर्क बनाना सहज हो। कमिटी ने सुझाव दिया कि ग्रूमिंग को परिभाषित किया जाए और उसे यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण एक्ट, 2012 में यौन उत्पीड़न का एक प्रकार बनाया जाए।
     
  • बाल पोर्नोग्राफी रखने के संबंध में अपवादकमिटी ने सुझाव दिया कि नाबालिगों को कुछ विशेष स्थितियों में अपनी अभद्र तस्वीरें रखने या उनके आदान-प्रदान के लिए प्रोसिक्यूट नहीं किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त निम्नलिखित मामलों में बाल पोर्नोग्राफी रखने के संबंध में अपवाद दिए जा सकते हैं: (iअथॉरिटीज़ को रिपोर्ट करना, और (iiजांच।
     
  • इंटरमीडियरीज़ की जिम्मेदारियांकमिटी ने सुझाव दिया कि इंटरमीडियरीज़ (जैसे इंटरनेट सर्विस प्रोवाइर्स और सर्च इंजन्स) की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया जाना चाहिए। इन जिम्मेदारियों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) बच्चों के यौन उत्पीड़न से जुड़ी सामग्री को हटाना, और (ii) बच्चों के पोर्न को एसेस करने वाले लोगों की पहचान बताना।
     
  • सोशल मीडियाकमिटी ने वे उपाय सुझाए जिनके जरिए सोशल मीडिया साइट्स नाबालिगों की रक्षा कर सकती हैं। इनमें: (i) आयु संबंधी प्रतिबंध, और (ii) लोगों को बाल शोषण से संबंधित कंटेंट को पोस्ट करने से प्रतिबंधित करना।  
  • जागरूकताकमिटी ने सुझाव दिया कि निम्नलिखित मुद्दों पर केंद्र को जागरूकता संबंधी अभियान चलाने चाहिए: (i) बाल उत्पीड़न के शुरुआत संकेत, और (ii) साइबर बुलिंग।
     
     
  • अथॉरिटीज़कमिटी ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को बाल पोर्नोग्राफी से जुड़े मुद्दे से निपटना चाहिए। इसके अतिरिक्त प्रत्येक राज्य में बाल अधिकार संरक्षण आयोगों को गठित किया जाना चाहिए।    

पीआरएस रिपोर्ट के सारांश के लिए कृपया  देखें

 

विधि और न्याय

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

कैबिनेट ने तीन वर्षों के लिए 22वें विधि आयोग के गठन को मंजूरी दी 

केंद्रीय कैबिनेट ने तीन वर्षों की अवधि के लिए 22वें विधि आयोग के गठन को मंजूरी दी। इसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे: (iचेयरपर्सन, (ii) चार सदस्य, (iiiपदेन के सदस्य के रूप में लेजिसलेटिव विभाग और कानूनी मामलों के विभाग के सचिव, और (ivअधिकतम पांच पार्ट टाइम सदस्य। 

आयोग की जिम्मेदारियों में निम्नलिखित शामिल हैं: (iऐसे कानूनों को चिन्हित करना, जो अब प्रासंगिक नहीं, (iiऐसे कानूनों के संबंध में सुझाव देना जोकि राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों को लागू करने के लिए जरूरी हैं, (iiiसरकार द्वारा संदर्भित मामलों पर अपने विचार प्रकट करना, और (ivमहत्वपूर्ण केंद्रीय कानूनों को संशोधित करना ताकि उन्हें सरल बनाया जा सके।

 

कृषि

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

कैबिनेट ने केंद्रीय फसल बीमा योजनाओं के लिए दिशानिर्देशों को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने केंद्रीय फसल बीमा योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के लिए संशोधित दिशानिर्देशों को मंजूरी दी ताकि उनके कार्यान्वयन से संबंधित मौजूदा चुनौतियों से निपटा जा सके। [30] फसल बीमा योजनाएं प्राकृतिक आपदाओं, प्रतिकूल मौसम, कीटनाशकों के प्रकोप, और फसल बाद या पूर्व के दूसरे नुकसान होने पर किसानों को बीमा कवरेज प्रदान करती हैं। संशोधित दिशानिर्देशों में प्रस्तावित मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:

  • स्वैच्छिक नामांकनदोनों योजनाओं में किसानों के लिए नामांकन स्वैच्छिक है। इससे पूर्व फसल ऋण लेने वाले किसानों के लिए नामांकन अनिवार्य था।
     
  • बीमा कवर चुनने का विकल्पराज्यों को अतिरिक्त जोखिम कवर चुनने का विकल्प दिया गया है, जैसे दोनों योजनाओं में मौसम बीच प्रतिकूलता, बुवाई को रोकना, फसल बाद नुकसान, और स्थानीय आपदा। पीएमएफबीवाई के मामले में राज्य बेस कवर के साथ या उसके बिना विशिष्ट एकल जोखिम बीमा कवर प्रस्तावित कर सकते हैं। इससे पूर्व पीएमएफबीवाई में राज्यों को निर्दिष्ट जोखिमों के अतिरिक्त कोई दूसरा जोखिम शामिल करने की अनुमति नहीं थी।
     
  • केंद्र की प्रीमियम सब्सिडी की सीमायोजना के अंतर्गत किसानों को बीमा का प्रीमियम देना होता है जोकि बीमाकृत राशि का एक निश्चित प्रतिशत होता है (खरीफ फसलों के लिए 2%, रबी फसलों के लिए 1.5और कमर्शियल एवं बागवानी फसलों के लिए 5%)। बाकी की प्रीमियम राशि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्रीमियम सब्सिडी के रूप में समान रूप से चुकाई जाती है और इसमें कोई सीमा नहीं है। संशोधित दिशानिर्देशों के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा चुकाई जाने वाली प्रीमियम सब्सिडी: (iसिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए बीमाकृत राशि के 25%, और (iiगैर सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए बीमाकृत राशि के 30से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उन जिलों को सिंचाई वाले जिले या क्षेत्र माना जाएगा, जहां 50से अधिक क्षेत्र में सिंचाई होती है। 
     
  • उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए केंद्र के हिस्से में बढ़ोतरीदोनों योजनाओं के अंतर्गत केंद्र और राज्य द्वारा समान रूप से प्रीमियम सब्सिडी दी जाती है। उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए केंद्र सरकार 90सब्सिडी देगी और शेष 10राज्य द्वारा दी जाएगी। 
     
  • राज्यों द्वारा विलंबअगर राज्य एक निर्दिष्ट समय सीमा के बाद बीमा कंपनियों को प्रीमियम सब्सिडी जारी करने में देरी करते हैं, तो उन्हें बाद के मौसमों में योजनाओं को लागू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 

खरीफ मौसम 2020-21 से संशोधित दिशानिर्देश लागू होंगे। 

कैबिनेट ने एफपीओ के गठन और प्रोत्साहन के लिए केंद्रीय योजना को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने किसान उत्पादक संगठनों का गठन और प्रोत्साहन नामक केंद्रीय योजना को मंजूरी दी जिसका लक्ष्य 2023-24 तक 10,000 नए एफपीओज़ का गठन और प्रोत्साहन है। [31] एफपीओ किसानों के ऐसे समूह होते हैं जिनका उद्देश्य इनपुट, ऋण, तकनीक एवं मार्केटिंग तक बेहतर पहुंच और बेहतर आय प्राप्त करना है।

मैदानी क्षेत्रों में न्यूनतम 300 किसान और उत्तर पूर्वी एवं पर्वतीय क्षेत्रों में न्यूनतम 100 किसान मिलकर एफपीओ बना सकते हैं। इसमें केंद्रीय कृषि मंत्री की मंजूरी से संशोधन किया जा सकता है। आकांक्षी (एस्पिरेशनल) जिलों में एफपीओ के गठन को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां इन जिलों में प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम एक एफपीओ होगा। बेहतर प्रोसेसिंग, मार्केटिंग, ब्रांडिंग, निर्यात और विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के लिए एफपीओज़ को एक जिला एक उत्पाद की अवधारणा के अंतर्गत बढ़ावा दिया जाएगा। योजना के अंतर्गत प्रत्येक एफपीओ को शुरुआत से पांच वर्षों की अवधि के लिए समर्थन प्रदान किया जाएगा। योजना के लिए 6,865 करोड़ रुपए की राशि को मंजूरी दी गई है। एफपीओ के इक्विटी बेस को मजबूती देने के लिए इक्विटी अनुदान दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त वित्तीय संस्थानों द्वारा एफपीओज़ को दिए गए ऋणों के लिए उपयुक्त गारंटी कवर देने हेतु 1,500 करोड़ रुपए तक के क्रेडिट गारंटी फंड की स्थापना की जाएगी।

तीन कार्यान्वयन एजेंसियां एफपीओ को गठित करेंगी और उन्हें बढ़ावा देंगी। ये हैं स्मॉल फार्मर्स एग्री-बिजनेस कंसोर्टियम (एसएफएसी), नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनसीडीसी), और नाबार्ड। राज्य कृषि, सहकारी और किसान कल्याण विभाग की सलाह से अपने क्षेत्र में कार्यान्वयन एजेंसी को नामित कर सकते हैं।

ड्राफ्ट नेशनल फिशरीज़ पॉलिसी जारी

फिशरीज़ विभाग ने नेशनल फिशरीज़ पॉलिसी जारी की है। [32],[33] इस नीति का उद्देश्य फिशरीज़ के समग्र विकास के लिए उसके विभिन्न पहलुओं (जैसे इनलैंड फिशरीज़, समुद्री पौधे और जीव, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग) से संबंधित नीतियों को एकीकृत करना है। ड्राफ्ट पॉलिसी की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं

  • लक्ष्यलक्ष्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (iउत्तरदायित्वपूर्ण और सतत तरीके से मछली उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना, (iiप्रभावी फिशरीज़ रिसोर्स मैनेजमेंट के लिए व्यापक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क प्रदान करना, (iiiविज्ञान और तकनीक का इस्तेमाल करते हुए महासागरों और समुद्रों में मछली पकड़ने के तरीकों को आधुनिक और विविध बनाना, (ivवैल्यू चेन को मजबूत और आधुनिक बनाना, और (vलाभप्रद रोजगार और उद्यमिता अवसरों का सृजन करना ताकि मछुआरों और किसानों की आय बढ़े और उनके जीवन स्तर में सुधार आए। 
     
  • कानूनी संरचनाराज्यों, राष्ट्रीय एजेंसियों और अन्य हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए फिशरीज़ गवर्नेंस में सुधार किया जाएगा। एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (ईईजेड) में फिशरीज़ रिसोर्सेज़ के व्यापक प्रबंधन और रेगुलेशन को एक राष्ट्रीय कानून के जरिए सुनिश्चित किया जाएगा। ईईज़ेड प्रादेशिक जल के बाहर ऐसा समुद्री क्षेत्र है जिसमें भारत के पास आर्थिक गतिविधियों के लिए विशेष अधिकार हैं और भारतीय तट से यह 200 नॉटिकल मील तक फैला हुआ है। केंद्र सरकार तटीय क्षेत्रों की राज्य सरकारों को यह शक्ति देगी कि वे ईईज़ेड और हाई सी (ईईज़ेड से परे) में मछली पकड़ने का लाइसेंस दे सकती हैं।
     
  • टिकाऊपनकेंद्र सरकार परंपरागत और छोटे मछुआरों एवं मछुआरों के समूहों को इस बात के लिए प्रोत्साहित और सशक्त करेगी कि वे गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को प्रोत्साहित हों और उच्च लागत वाले संसाधनों का दोहन स्थायी तरीके से कर सकें। वैज्ञानिक संस्थानों और मछुआरों की विशेषज्ञता को इस्तेमाल किया जाएगा ताकि संसाधनों के रिक्तिकरण की जांच करने तथा टिकाऊपन को सुनिश्चित करने के उपाय किए जा सकें। प्राकृतिक मत्स्य संसाधनों को संरक्षित करने और सतत तरीके से प्रबंधित करने के लिए व्यापक प्रबंधन योजनाएं बनाई जाएंगी।
     
  • अंतरक्षेत्रीय समन्वयकेंद्र और राज्य सरकारें जल, सिंचाई और ग्रामीण विकास जैसे नोडल विभागों के साथ काम करेंगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जल संसाधनों के प्रबंधन और उपयोग के लिए काम करने वाली सभी कमिटियों में फिशरीज़ विभाग का उचित प्रतिनिधित्व हो। सरकार को कृषि क्षेत्र की तरह फिशरीज़ को भी अधिक इनसेंटिव देना चाहिए। राज्य स्तर पर भूमि उपयोग के दायरे को बढ़ाया जाना चाहिए, विशेष रूप से कृषि के अभिन्न घटकों के रूप में मत्स्य और एक्वाकल्चर को शामिल करने के लिए। 

कैबिनेट ने डीआईडीएफ योजना के अंतर्गत ब्याज सब्सिडी के लिए संशोधित सीमा को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने डेयरी प्रोसेसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (डीआईडीएफ) योजना के अंतर्गत प्रदत्त ब्याज सब्सिडी पर अधिकतम सीमा में बढ़ोतरी को मंजूरी दी। [34] यह फंड डेयरी क्षेत्र (दुग्ध सहकारी संघ, और यूनियन, दुग्ध उत्पादक कंपनियां) को दुग्ध खरीद प्रणाली में सुधार करने के लिए सब्सिडी पर ऋण प्रदान करने हेतु स्थापित किया गया है। दूध और दूध आधारित मूल्य वर्धित उत्पादों की जांच, स्टोर करने, प्रोसेसिंग और मैन्यूफैक्चरिंग के लिए जरूरी उपकरणों और इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने में निवेश हेतु ऋण का उपयोग किया जा सकता है। योजना के अंतर्गत नाबार्ड बाजार से धनराशि जुटाता है और 6% की ब्याज दर पर ऋण देता है। सरकार इस ऋण पर नाबार्ड को ब्याज सब्सिडी देती है जोकि 6% की दर और बाजार से नाबार्ड द्वारा लिए गए उधार की ब्याज दर के बीच के फर्क के बराबर होता है। यह ब्याज सब्सिडी 2% की अधिकतम सीमा के अधीन है और उधार की शेष लागत का वहन लाभार्थी द्वारा किया जाता है। कैबिनेट ने ब्याज सब्सिडी की अधिकतम सीमा को 2% से 2.5% कर दिया। ब्याज सब्सिडी देने के लिए मंजूर राशि को 864 करोड़ से 1,167 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त 2019-20 तक योजना के अंतर्गत ऋण देना प्रस्तावित था, जिसे बढ़ाकर 2022-23 कर दिया गया है। 

2019-20 के लिए फसल उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान जारी

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने 2019-20 के लिए खाद्यान्न और कमर्शियल फसलों के उत्पाद के दूसरे अग्रिम अनुमान जारी किए। [35]  तालिका 4 में 2018-19 के उत्पादन के साथ 2019-20 के दूसरे अग्रिम अनुमानों की तुलना की गई है। यहां मुख्य विशेषताएं प्रस्तुत हैं: 

  • 2018-19 की तुलना में 2019-20 में खाद्यान्न उत्पादन में 2.4की वृद्धि का अनुमान है। यह वृद्धि अनाज के उत्पाद में 2.2की वृद्धि के कारण है। चावल और गेहूं के उत्पादन में क्रमशः 0.8और 2.5की वृद्धि का अनुमान है। 
     
  • 2019-20 में मोटे अनाज के उत्पादन में 5.1की वृद्धि और दालों के उत्पादन में 4.3की वृद्धि का अनुमान है। 
     
  • 2019-20 में तिलहन के उत्पादन में 8.5की वृद्धि का अनुमान है। सोयाबीन के उत्पादन में 2.7और मूंगफली के उत्पादन में 22.6की वृद्धि अनुमानित है। 
     
  • 2019-20 में कपास के उत्पादन में 24.4की बढ़ोतरी का अनुमान है। दूसरी ओर गन्ने का उत्पादन 12.7% घटकर 354 मिलियन रहने का अनुमान है।

तालिका 4: 2019-20 में फसल उत्पादन के दूसरे अग्रिम अनुमान (मिलियन टन में) 

फसल

अंतिम 2018-19

दूसरे अग्रिम अनुमान 2019-20

2018-19 में परिवर्तन का %

खाद्यान्न (क+ख)

285.2

292.0

2.4%

ख. अनाज

263.1

268.9

2.2%

    चावल

116.5

117.5

0.8%

     गेहूं

103.6

106.2

2.5%

मोटे अनाज

43.1

45.2

5.1%

ख. दालें

22.1

23.0

4.3%

     चना

9.9

11.2

12.9%

     तुअर

3.3

3.7

11.1%

तिलहन

31.5

34.2

8.5%

सोयाबीन

13.3

13.6

2.7%

मूंगफली

6.7

8.2

22.6%

कपास*

28.0

34.9

24.4%

गन्ना

405.4

353.8

-12.7%

*million bales of 170 kg each.

Sources:  Directorate of Economics and Statistics, Ministry of Agriculture and Farmers Welfare; PRS.

 

जल शक्ति

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

कैबिनेट ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण–II को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) [एसबीएम (जी)] के चरण II को मंजूरी दी। [36]  कार्यक्रम खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) प्लस पर केंद्रित है जिसमें ओडीएफ को बरकरार रखना और ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन शामिल है। इसे राज्यों द्वारा लागू किया जाता है जिन्हें केंद्र सरकार परिचालनगत दिशानिर्देश जारी करती है।

चरण-II को 1,40,8881 करोड़ रुपए के परिव्यय से 2020-21 से 20204-25 के बीच लागू किया जाएगा। इसमें से पेयजल और स्वच्छता विभाग को बजट से 52,497 करोड़ रुपए आबंटित किए जाएंगे। मनरेगा तथा ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन के राजस्व प्राप्त करने के मॉडल्स से शेष राशि की उगाही की जाएगी। 

कार्यक्रम के अंतर्गत पात्र परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय के निर्माण के लिए 12,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि देना जारी रहेगा। गांव के स्तर पर सामुदायिक प्रबंधन से चलने वाले सैनिटरी परिसर के निर्माण के लिए ग्राम पंचायतों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को दो लाख रुपए से बढ़ाकर तीन लाख रुपए प्रति परिसर कर दिया जाएगा।

ओडीएफ प्लस के ठोस और तरल कचरा प्रबंधन घटक की चार मुख्य क्षेत्रों में आउटपुट-आउटकम इंडिकेटर के आधार पर निगरानी की जाएगी, ये इस प्रकार हैं: (i) प्लास्टिक कचरा प्रबंधन, (ii) जैविक रूप से नष्ट होने वाले ठोस कचरे का प्रबंधन (इसमें पशु कचरा प्रबंधन शामिल है), (iii) मल रहित गंदे पानी का प्रबंधन, और (iv) मल कीचड़ प्रबंधन।   

 

कपड़ा 

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

कैबिनेट ने राष्ट्रीय तकनीकी टेक्सटाइल मिशन को मंजूरी दी 

आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने राष्ट्रीय तकनीकी टेक्सटाइल मिशन को मंजूरी दी। [37]  तकनीकी टेक्सटाइल, ऐसा टेक्सटाइल होता है जोकि तकनीकी प्रदर्शन और फंक्शनल विशेषताओं वाला होता है, न कि सौन्दर्य संबंधी विशेषताओं वाला। इन्हें रेलवे ट्रैक और बुलेट प्रूफ जैकेट्स जैसे क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाता है।

इस मिशन को 1480 करोड़ रुपए के परिव्यय से 2020-21 से 2023-24, यानी चार वर्षों के लिए लागू किया जाएगा। मिशन के मुख्य घटकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अनुसंधान: मिशन निम्नलिखित के विकास में अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा: (i) फाइबर, जैसे कार्बन फाइबर और नायलॉन फाइबर, (ii) टेक्सटाइल, जैसे जिओ-टेक्सटाइल और बायो-डिग्रेडेबल टेक्सटाइल। इसके लिए 1,000 करोड़ रुपए का परिव्यय किया जाएगा।
     
  • मार्केट का विकास और प्रोत्साहन: 250 बिलियन USD के विश्वस्तरीय तकनीकी टेक्सटाइल बाजार में भारतीय तकनीकी टेक्सटाइल का हिस्सा 6% (16 बिलियन USD) है। मिशन का लक्ष्य मार्केट के विकास और निवेश को बढ़ावा देने के जरिए 2024 तक घरेलू बाजार को 40-50 बिलियन USD करना है।
     
  • निर्यात: तकनीकी टेक्सटाइल के निर्यात का मौजूदा वार्षिक मूल्य लगभग 14,000 करोड़ रुपए है। मिशन का लक्ष्य 2021-22 तक निर्यात का वार्षिक मूल्य 20,000 करोड़ रुपए करना तथा यह सुनिश्चित करना है कि 2023-24 तक निर्यात में प्रति वर्ष 10% की वृद्धि हो। इसके अतिरिक्त निर्यात से संबंधित प्रभावी समन्वय और संवर्धन गतिविधियों के लिए तकनीकी टेक्सटाइल के लिए एक निर्यात संवर्धन परिषद स्थापित की जाएगी।  
     
  • शिक्षामिशन का लक्ष्य तकनीकी टेक्सटाइल और उनके एप्लीकेशन से संबंधित क्षेत्रों में उच्च इंजीनियरिंग में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देना है।

 

विज्ञान और प्रौद्योगिकी

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

कैबिनेट ने एम्पावर्ड टेक्नोलॉजी ग्रुप के गठन को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने 12 लोगों के एम्पावर्ड टेक्नोलॉजी ग्रुप के गठन को मंजूरी दी। [38]  भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार इस ग्रुप के चेयरपर्सन होंगे। 

यह ग्रुप निम्नलिखित के लिए जिम्मेदार होगा: (iसरकार को उभरती हुई प्रौद्योगिकी के अनुसंधान के संबंध में सलाह देना, (iiटेक्नोलॉजी और टेक्नोलॉजी उत्पादों की मैपिंग, (iiiचुनींदा टेक्नोलॉजी के स्वेदशीकरण के लिए रोडमैप विकसित करना, (ivटेक्नोलॉजी सप्लायर और खरीद नीति पर सरकार को सलाह देना, और (vडेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती हुई प्रौद्योगिकी में इन-हाउस विशेषज्ञता विकसित करने के लिए सरकारी विभागों को प्रोत्साहित करना।  

 

रक्षा

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

सर्वोच्च न्यायालय ने थलसेना में महिलाओं के लिए परमानेंट कमीशन के पक्ष में फैसला दिया

सर्वोच्च न्यायालय ने थलसेना की नॉन-कॉम्बैट सेवाओं में महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन देने के पक्ष में फैसला दिया। [39]   

थलसेना में तीन प्रकार की सेवाएं होती हैं: (i) कॉम्बैट, (iiकॉम्बैट सपोर्ट, और (iii) सर्विस। वर्तमान में महिलाएं सभी प्रकार की नॉन-कॉम्बैट सेवाओं में शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी, 14 वर्षों के लिए) पर कार्य कर सकती हैं। फरवरी 2019 में रक्षा मंत्रालय ने थलसेना की 10 सेवाओं, जैसे सिग्नल्स, इंजीनियर्स और आर्मी एविएशन में एसएससी वाली महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन दिया था। 

न्यायालय ने यह कहा कि 14 वर्ष तक काम करने वाली महिला अधिकारियों को पेंशन या रिटायरमेंट लाभ नहीं मिलते। इसके अतिरिक्त यह पाया गया कि सरकार के सबमिशंस महिलाओं के साथ भेदभाव करते हैं क्योंकि यह परंपरागत सोच और स्त्रियों की तथाकथित सामाजिक भूमिका पर आधारित हैं। 

न्यायालय ने निर्देश दिया कि परमानेंट कमीशन चुनने वाली महिला एसएससी अधिकारी, अपने पुरुष सहकर्मियों के समान शर्तों पर समान विकल्प के लिए अधिकृत होंगी। इसके अतिरिक्त एसएससी महिला अधिकारी, जिन्हें परमानेंट कमीशन दिया जाता है, सभी प्रकार के लाभ की पात्र होंगी जिनमें पदोन्नति और वित्तीय लाभ शामिल हैं। न्यायालय ने सरकार को इस आदेश को लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। उल्लेखनीय है कि यह फैसला सेना की कॉम्बैट सेवाओं पर लागू नहीं होता।

 

आवासन और शहरी मामले

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

ईज़ ऑफ लिविंग इंडेक्स और म्यूनिसिपल परफॉर्मेंस इंडेक्स 2019 को लॉन्च किया गया

आवासन और शहरी मामलों के मंत्रालय ने दो एसेसमेंट फ्रेमवर्क्सईज़ ऑफ लिविंग इंडेक्स 2019 और म्यूनिसिपल परफॉर्मेंस इंडेक्स 2019 को लॉन्च किया। [40]  इनसे 100 स्मार्ट सिटीज़ और 14 अन्य मिलियन प्लस शहरों के निवासियों के जीवन की गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा।

ईज़ ऑफ लिविंग इंडेक्स 2019 में तीन श्रेणियों में नागरिकों के सुगम जीवन का आकलन किया जाएगा। ये श्रेणियां हैंजीवन की गुणवत्ता, आर्थिक स्थिरता और स्थायित्व। इन्हें भी 50 संकेतकों वाली 14 श्रेणियों में बांटा जाएगा। इस आकलन में नागरिकों की अवधारणाओं का सर्वेक्षण भी किया जाएगा, जिसमें शहरों में जीवन की गुणवत्ता पर नागरिकों की अवधारणा को भी स्पष्ट किया जाएगा। 

म्यूनिसिपल परफॉर्मेंस इंडेक्स 2019 के अंतर्गत पांच श्रेणियों में म्यूनिसिपैलिटीज़ के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। ये हैं, सेवा, वित्त, प्लानिंग, तकनीक और गवर्नेंस। फिर इन्हें 20 क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा और 100 संकेतकों के आधार पर उनका मूल्यांकन किया जाएगा। 

नोडल अधिकारी सभी शहरों के डेटा को जमा और उनके बीच तुलना करेंगे। मंत्रालय के अनुसार, इन आकलनों से म्यूनिसिपैलिटीज़ को बेहतर प्लानिंग और प्रबंधन करने, शहरी प्रशासनों की कमियों को दूर करने और अपने नागरिकों के जीवन में सुधार करने में मदद मिलेगी।9 के अंतर्गत पांच श्रेणियों मंा। ों वाली 14 श्रेणियों मंली 019 को  के जरिए सुनिश्चित किया जाएगा  

 

अल्पसंख्यक मामले

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

वर्क्फ संपत्ति लीज़ (संशोधन) नियम, 2020 अधिसूचित

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने वर्क्फ संपत्ति लीज़ (संशोधन) नियम, 2020 को अधिसूचित किया। [41]  2020 के नियम वर्क्फ संपत्ति लीज नियम, 2014 में संशोधन करते हैं। संशोधन वर्क्फ एक्ट, 1995 के अंतर्गत अधिसूचित हैं। एक्ट वर्क्फ (मुस्लिम कानूनों के अंतर्गत संपत्ति के डोनेशन) के प्रबंधन को रेगुलेट करता है। संशोधनों के मुख्य पहलुओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • लंबी लीज़ की प्रक्रियाअगर संपत्ति को एक साल से अधिक समय के लिए लीज़ पर देना है तो संपत्ति की बोलियों को मुख्य राष्ट्रीय समाचार पत्र में प्रकाशित होना चाहिए। 2014 के नियमों में कहा गया है कि यह विज्ञापन केवल उन्हीं संपत्तियों के लिए दिया जाना जरूरी है जिनका किराया प्रति माह 1,000 रुपए से अधिक है। इसमें संशोधन किया गया है और कहा गया है कि यह विज्ञापन केवल उन्हीं संपत्तियों के लिए दिया जाना जरूरी है जिनका किराया 3 जून, 2014 को प्रति माह 3,000 रुपए से अधिक है। 
     
  • रिजर्व मूल्य2014 के नियमों में कहा गया है कि वर्क्फ संपत्ति के प्रति वर्ग फुट का रिजर्व मूल्य, संपत्ति के बाजार मूल्य के 5% प्रति वर्ष से कम नहीं हो सकता। इसे इस प्रकार संशोधित किया गया है कि यह: (i) अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक क्षेत्र के संगठनों के बाजार मूल्य के 1प्रति वर्ष से कम नहीं होना चाहिए, और (iiकमर्शियल गतिविधियों के बाजार मूल्य के 2.5प्रति वर्ष से कम नहीं होना चाहिए।
     
  • सिक्योरिटी डिपॉजिट्स2014 के नियम कहते हैं कि लीज की अवधि के आधार पर सिक्योरिटी डिपॉजिट को कैलकुलेट किया जाएगा। उदाहरण के लिए अगर लीज़ एक साल तक की है तो सिक्योरिटी डिपॉजिट तीन महीने के किराये के बराबर होगा। संशोधन उन महीनों की संख्या कम करते हैं जिनका किराया सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में चुकाया जाएगा। उदाहरण के लिए अगर लीज़ एक वर्ष तक की है तो सिक्योरिटी डिपॉजिट एक महीने के किराए के बराबर होगा।
     
  • लीज़ की अवधिनियमों में इस बात की अनुमति दी गई है कि वर्क्फ संपत्तियों को निर्दिष्ट अवधि के लिए लीज किया जा सकता है। लीज़ की अवधि संपत्ति के प्रयोग के आधार पर निर्धारित की जाती है। 2014 के नियमों के अनुसार, संपत्ति को दुकान के रूप में पांच वर्ष की अवधि के लिए लीज़ पर दिया जा सकता है। संशोधन इस अवधि को 10 वर्ष करते हैं। इसके अतिरिक्त 2014 के नियमों में कहा गया है कि कृषि भूमि को वार्षिक या फसल चक्र के आधार पर लीज़ पर दिया जा सकता है। संशोधनों में कृषि भूमि को तीन वर्ष की अवधि पर लीज़ पर दिए जाने की अनुमति दी गई है। 

 

पर्यावरण और वन

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

ड्राफ्ट बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2020 पब्लिक फीडबैक के लिए जारी

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ड्राफ्ट बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2020 जारी किया। [42] ड्राफ्ट नियम बैटरी (प्रबंधन और हैंडलिंग) नियम, 2001 का स्थान लेते हैं जोकि पर्यावरण (संरक्षण) एक्ट, 1986 के अंतर्गत बैटरियों की हैंडलिंग और प्रबंधन का विवरण प्रस्तुत करते हैं। एक्ट पर्यावरण के संरक्षण और सुधार को रेगुलेट करता है। ड्राफ्ट नियमों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एप्लिकेबिलिटीनियम बैटरी और उनके कंपोनेंट्स, कंज्यूमेबल्स और स्पेयर पार्ट्स, जिनसे उत्पाद काम करता है, से संबंधित स्टेकहोल्डर्स पर लागू होंगे। इनमें प्रत्येक मैन्यूफैक्चरर, उत्पादक, कलेक्शन सेंटर, आयातक, एसेम्बलर, डीलर, रीसाइकलर, उपभोक्ता और थोक उपभोक्ता शामिल हैं।
     
  • वर्तमान में बैटरी (प्रबंधन और हैंडलिंग) नियम, 2001 सिर्फ लेड-एसिड बैटरी पर लागू होता है। ड्राफ्ट नियम सभी प्रकार की बैटरियों पर लागू होंगे। ये उन अप्लाइंसेज़ पर भी लागू होंगे जिनमें बैटरी लगाई गई है या लगाई जा सकती है। ये उन बैटरियों पर लागू होंगे जो कुछ एक्विपमेंट्स में लगाई जाती हैं, जैसे मिलिट्री एक्विपमेंट, स्पेस एक्सप्लोरेशन एक्विपमेंट और इमरजेंसी तथा अलार्म सिस्टम्स।
     
  • मैन्यूफैक्चरर और डीलर की जिम्मेदारियांड्राफ्ट नियमों के अंतर्गत मैन्यूफैक्चरर और बैटरी डीलर की जिम्मेदारियों में निम्नलिखित शामिल हैं(iनई बेची जाने वाली बैटरियों के बदले पुरानी बैटरियों को जमा करना और परचेज़ इनवॉयस जारी करना (जब वे पुरानी बैटरी जमा करें), (ii) विभिन्न जगहों पर खुद या संयुक्त रूप से कलेक्शन सेंटर शुरू करना, ताकि डीलरों और उपभोक्ताओं से पुरानी बैटरी जमा की जा सके, (iiiअधिकृत/पंजीकृत रीसाइकलर्स तक जमा की हुई बैटरियों को सुरक्षित ले जाना सुनिश्चित करना, और (ivहर साल 31 दिसंबर तक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में अपनी बिक्री और बायबैक का वार्षिक रिकॉर्ड फाइल करना।    

ड्राफ्ट नियमों पर 20 अप्रैल, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

वॉटर प्यूरिफिकेशन प्रणाली के प्रयोग से संबंधित ड्राफ्ट रेगुलेशन पब्लिक फीडबैक के लिए जारी 

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मेंब्रेन आधारित वॉटर प्यूरिफिकेशन प्रणाली के प्रयोग से संबंधित ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी किया। [43]  ड्राफ्ट रेगुलेशन कुछ मेंब्रेन आधारित वॉटर प्यूरिफिकेशन प्रणालियों, जिसे रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) प्रणाली कहा जाता है, को इंस्टॉल और इस्तेमाल करने को प्रतिबंधित करता है। यह पर्यावरण (संरक्षण) एक्ट, 1986 के अंतर्गत पर्यावरण (संरक्षण) नियम, 1986 में संशोधन करता है। यह एक्ट पर्यावरण के संरक्षण और सुधार को रेगुलेट करता है। ड्राफ्ट रेगुलेशन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं: 

  • आरओ प्रणालियों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध:  प्रतिबंध पारंपरिक फिल्टरेशन और डिसइन्फेक्शन प्रोसेस के अधीन प्रणालियों पर है या भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित पेयजल के लिए स्वीकार्य सीमा का अनुपालन करने वाले स्रोतों पर इस्तेमाल होने वाली प्रणालियों पर। 
     
  • कमर्शियल यूनिट्स की जिम्मेदारियांड्राफ्ट रेगुलेशन उन कमर्शियल यूनिट्स की कुछ जिम्मेदारियां बताता है जोकि पानी को साफ करने के लिए आरओ सिस्टम्स का इस्तेमाल करती हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (iप्यूरिफिकेशन की प्रक्रिया में बचने वाले पानी को सुरक्षित और हाइजिनिक स्थितियों में स्टोर करना, (iiपानी की खपत, रिजेक्ट जनरेशन, रिजेक्ट डिस्पोजल, डिस्कार्डेड एलिमेंट जनरेटेड और उनके डिस्पोजल का रिकॉर्ड रखना, और (iiiराज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उनका वार्षिक रिकॉर्ड देना। 
     
  • मैन्यूफैक्चरर की जिम्मेदारियां: आरओ मैन्यूफैक्चरर और उत्पादकों को जिम्मेदारियों में निम्नलिखित शामिल हैं(i) राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकरण के लिए आवेदन करना, (ii) मैन्यूफैक्चर होने वाले प्रत्येक कम्पोनेंट को यूनीक आइडेंटिफिकेशन मार्क देना ताकि उनको ट्रेस किया जा सके, (iii) प्यूरिफायर्स को रियल टाइम ऑनलाइन फ्लो से लैस करना ताकि उपभोक्ताओं को इनलेट और वॉटर आउटलेट में घुलने वाले ठोस पदार्थों के स्तर का पता चल सके, और (ivअधिकृत कलेक्शन सेंटर बनाना, ताकि उपभोक्ताओं या डीलर्स से रद्दी सामान को जमा किया जा सके।

ड्राफ्ट रेगुलेशन पर 4 मार्च, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

 

संचार

Saket Surya (saket@prsindia.org)

टेलीकॉम लाइसेंसों के ट्रांसफर/विलय के दिशानिर्देशों में सुधार से संबंधित सुझाव जारी 

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने टेलीकॉम लाइसेंसों के ट्रांसफर/विलय के दिशानिर्देशों में सुधार से संबंधित सुझाव जारी किए। [44]  सुझाव दूरसंचार विभाग (डॉट) द्वारा जारी विलय और अधिग्रहण दिशानिर्देश, 2014 में परिवर्तन करते हैं। [45]  सितंबर, 2019 में इस संबंध में परामर्थ पत्र जारी किया गया था। [46]

डॉट उपरिलिखित दिशानिर्देशों के अंतर्गत विलय और हस्तांतरण के लिए कुछ शर्तें रख सकता है।46  इससे पहले टेलीकॉम विवाद निवारण और अपीलीय ट्रिब्यूनल ने इनमें से कुछ शर्तों पर स्टे लगा दिया था।46 इससे विलय और हस्तांतरणों को अंतिम रूप देने में विलंब हुआ। सुझावों में प्रयास किया गया है कि टेलीकॉम लाइसेंसों के विलय और हस्तांतरण के अनुमोदनों को सरल बनाया जाए और उन्हें तेजी से ट्रैक किया जा सके। मुख्य सुझाव निम्नलिखित हैं: 

  • लाइसेंस के ट्रांसफर/विलय के लिए समय अवधिमौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार, विभिन्न सेवा क्षेत्रों में विभिन्न लाइसेंसों के ट्रांसफर/विलय के लिए अनुमति अवधि एक वर्ष है। इस समय अवधि को ट्रिब्यूनल की मंजूरी के बाद गिना जाता है। ट्राई ने सुझाव दिया कि किसी भी मुकदमे को आगे बढ़ाने में लगने वाला समय, जिसके कारण विलय की अंतिम मंजूरी में देरी होती है, को एक साल की अवधि की गणना से बाहर रखा जाना चाहिए।
     
  • मार्केट शेयर का कैलकुलेशन: दिशानिर्देशों के अनुसार, इच्छुक पक्षों के मार्केट शेयर के आधार पर विलय या अधिग्रहण पर कुछ प्रतिबंध हैं। लाइसेंसी के मार्केट शेयर को निर्धारित करने के दौरान उसके सबस्क्राइबर बेस और एडजेस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) को ध्यान में रखा जाना चाहिए। ट्राई ने सुझाव दिया कि: (i) मोबाइल, टेलीफोन और इंटरनेट सेवाओं जैसे कुछ प्रकार के लाइसेंसों के लिए सबस्क्राइबर की संख्या और एजीआर को ध्यान में रखा जाना चाहिए, और (ii) दूसरे किस्म के लाइसेंसों जैसे नेशनल लॉन्ग डिस्टेंस (एनएलडी) सेवा और इंटरनेशनल लॉन्ग डिस्टेंस (आईएलडी) सेवा के लिए सिर्फ एजीआर पर विचार किया जाना चाहिए।

एजीआर सर्विस प्रोवाइडर के सकल राजस्व का मूल्य होता है, जिसमें से कुछ चार्ज और टैक्स शामिल नहीं होता, जैसे दूसरे सर्विस प्रोवाइडर को दिया जाने वाला रोमिंग चार्ज, और कोई दूसरा सर्विस टैक्स और सेल्स टैक्स, जोकि सकल राजस्व में शमिल है।  

नेशनल ओपन डिजिटल इकोसिस्टम्स की रणनीति पर परामर्श पत्र जारी 

इलेक्ट्रॉनिक्स और इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने ‘नेशनल ओपन डिजिटल इकोसिस्टम्स (नोड) की रणनीति’ पर परामर्श श्वेतपत्र जारी किया। [47]  यह पत्र डिजिटल गवर्निंग के लिए राष्ट्रीय रणनीति को संदर्भित है। ऐसे इकोसिस्टम के मुख्य घटक निम्नलिखित हैं: (iपब्लिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें सरकार के डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं जैसे आधार और जीएसटी नेटवर्क, (iiडेटा गोपनीयता, सुरक्षा और डोमेन-विशिष्ट नीतियों और मानकों के संबंध में बुनियादी ढांचे को नियंत्रित करने के कानून, और (iii) इस इंफ्रास्ट्रक्चर को लाभप्रद बनाना ताकि सभी के लिए यह महत्वपूर्ण साबित हो। 

नोड का एक उदाहरण है, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत ई-ट्रांसपोर्ट मिशन मोड प्रॉजेक्ट।47  इसके दो एप्लीकेशंस हैं- वाहन और सारथी जोकि क्रमशः वाहन रजिस्ट्रेशन और ड्राइवर लाइसेंसिंग ऑपरेशन को ऑटोमेट करते हैं। ऐसे डिजिटलीकृत डेटा की उपलब्धता से प्लेटफॉर्म नागरिकों, ऑटोमोबाइल डीलर्स, बीमा कंपनियों और पुलिस को सेवाएं प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त प्लेटफॉर्म यह सुनिश्चित करता है कि डेटा दूसरे सिस्टम्स में एकीकृत हो सके, जैसे राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से चोरी हुए वाहनों का डेटा और इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी से बीमा संबंधी डेटा। यह बाहरी एप्लीकेशंस जैसे पेमेंट गेटअवेज़ और डिजिलॉकर से इंटरऑपरेबिलिटी प्रदान करता है।

परामर्श पत्र नोड के लिए निम्नलिखित सिद्धांतों को रेखांकित करता है: (iखुलापन और इंटरऑपरेबिलिटी, (iiदोबारा इस्तेमाल और शेयर करने की क्षमता, (iiiसुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना, (ivजिम्मेदार संस्थानों को परिभाषित करना, और (vप्रभावी शिकायत निवारण करना। पत्र में निम्नलिखित बिंदुओं पर टिप्पणियों की मांग की गई है:

  • क्या किसी सिद्धांत को जोड़ा, संशोधित किया जाना चाहिए या हटा दिया जाना चाहिए, 
     
  • नोड में सरकारी लीगेसी सिस्टम्स को माइग्रेट करने की चुनौतियां,
     
  • क्या ऐसे नोड ओपन सोर्स होने चाहिए या ओपन एपीआई और ओपन स्टैंटर्ड्स पर्याप्त हैं,
     
  • क्या प्रत्येक नोड के अपने स्टैंडर्ड हो सकते हैं या सभी क्षेत्रों में नोड का समान गवर्नेंस फ्रेमवर्क होना चाहिए,
     
  • इन नोड्स के लिए फाइनांसिंग मॉडल्स,
     
  • ऐसे सिस्टम्स द्वारा नागरिकों को संवेदनशील बनाने का संभावित खतरा, जैसे डेटा प्राइवेसी, एक्सक्लूजन और डेटा के इस्तेमाल पर अधिकार होना,
     
  • को-क्रिएटर्स और यूजर्स के व्यापक समुदाय का मोबलाइजेशन, और 
     
  • प्रभावी शिकायत निवारण प्रणालियां।

श्वेतपत्र पर 31 मार्च, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

 

[1] Union Budget 2020-21,  https://www.indiabudget.gov.in/

[2] “Press Note on Second Advance Estimates of National Income 2019-20 and Quarterly Estimates of Gross Domestic Product for the Third Quarter (Q3Of 2019-20, Ministry of Statistics and Programme Implementation, February 28, 2020,  http://www.mospi.gov.in/sites/default/files/press_release/PRESS_NOTE_SAE_Q3_%202019-20_28022020.pdf

[3] “Sixth Bi-Monthly Policy Statement 2019-20, Press Release, Reserve Bank of India, February 6, 2020,  https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR18906DB2B4D9A35C4B928BB05884BC6602DD.PDF .

[4] Quick Estimates of Index of Industrial Production and Use-Based Index for the Month of December, 2019 (Base 2011-12=100)” Press Release, Ministry of Statistics and Programme Implementation, February 12, 2020,  http://www.mospi.gov.in/sites/default/files/press_release/iipdec19.pdf .

[5] The Direct Tax Vivad Se Vishwas Bill, 2020, Ministry of Finance, February 5, 2020,  http://164.100.47.4/BillsTexts/LSBillTexts/Asintroduced/29_2020_Eng.pdf .

[6] Finance Commission constitutes Group on Defence and Internal Security, Press Information Bureau, Finance Commission, February 13, 2020.

[7] Finance Commission constitutes High Level Expert Group on Agriculture Exports, Press Information Bureau, Finance Commission, February 17, 2020.

[8] "Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (DICGCincreases the insurance coverage for depositors in all insured banks to Rs 5 lakh", Press Releases, Reserve Bank of India, February 4, 2020,  https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=49330 .

[9] "A Guide to Deposit Insurance", Frequently Asked Questions, Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation,  https://www.dicgc.org.in/FD_A-GuideToDepositInsurance.html#q3 .

[10] Cabinet approves proposal for capital infusion for OICL, NICL and UIICL, Press Information Bureau, Cabinet, February 12, 2020

[11] Insurance Regulatory and Development Authority, Department of Financial Services,  https://financialservices.gov.in/insurance-divisions/Insurance-Regulatory-&-Development-Authority .

[12] Insurance Regulatory and Development Authority (Assets, Liabilities, and Solvency Margin of InsurersRegulations, 2000, Notification, July 14, 2000,  https://www.irdai.gov.in/ADMINCMS/cms/frmGeneral_Layout.aspx?page=PageNo58&flag=1 .

[13] "Draft Framework for authorisation of a pan-India New Umbrella Entity (NUEfor Retail Payment Systems", Press Releases, Reserve Bank of India, February 10, 2020,  https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=49373 .

[14] ‘External Benchmark Based Lending Medium Enterprises, Notifications, Reserve Bank of India, February 26, 2020,  https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NOT167D1928275E5B34287AD44E1D5DFDB6561.PDF .

[15] ‘Report of the Internal Study Group to Review the Working of the Marginal Cost of Funds Based Lending Rate System, Reserve Bank of India, September 2017,  https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs//PublicationReport/Pdfs/MCLRCFF20B31A4A24D0487D8659079CF392B.PDF .

[16] External Benchmark Based Lending, Notifications, Reserve Bank of India, September 4, 2019,  https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/NOTI53B238D8EB8CD847E7AE8031090F4DCE00.PDF .

[17] Frequently asked questions, Micro Small and Medium Enterprises, Reserve Bank of India,  https://www.rbi.org.in/commonperson/English/Scripts/FAQs.aspx?Id=966 .

[18] The Aircraft (AmendmentBill, 2020, as introduced in Lok Sabha, February 4, 2020,  https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Aircraft%20%28Amendment%29%20Bill%2C%202020.pdf

[19] Select Committee Report on The Surrogacy (RegulationBill, 2019, Rajya Sabha, February 5, 2020,  https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Select%20Comm%20Report-%20Surrogacy%20Bill.pdf .

[20] Cabinet approves the Assisted Reproductive Technology Regulation Bill 2020; Path breaking measures taken to protect womens reproductive rights, Cabinet, Press Information Bureau, February 19, 2020.  

[21] Draft Drugs and Magic Remedies (Objectionable Advertisements) (AmendmentBill, 2020, Ministry of Health and Family Welfare, February 3, 2020,  https://mohfw.gov.in/sites/default/files/Draft%20of%20the%20Drugs%20and%20Magic%20Remedies.pdf .

[22] S.O648 (E), Gazette of India, Ministry of Health and Family Welfare, February 11, 2020.

[23] G.S.R 102 (E), Gazette of India, Ministry of Health and Family Welfare, February 11, 2020.

[24] Institute of Teaching and Research in Ayurveda Bill, 2020, Ministry of AYUSH, February 10, 2020,  https://prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Institute%20of%20Teaching%20and%20Research%20in%20Ayurveda%20Bill%2C%202020.pdf .

[25] “Cabinet approves the Indian Institutes of Information Technology Laws (AmendmentBill, 2020, Cabinet, Press Information Bureau, February 5, 2020.  

[26] Draft Competition (AmendmentBill, 2020,  http://feedapp.mca.gov.in//pdf/Draft-Competition-Amendment-Bill-2020.pdf

[27] “Notice inviting comments on the Consultation Paper to examine the existing provisions of law and make suitable amendments therein to enhance audit independence and accountability, Ministry of Corporate Affairs, February 6, 2020,  http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/Comments_08022020.pdf

[28] Report no4, Standing Committee on Labour and Employment: ‘Code on Occupational Safety, Health and Working Conditions, 2019, Lok Sabha, February 11, 2020,  https://prsindia.org/sites/default/files/bill_files/SCR-%20Occupational%20Safety%2C%20Health%20and%20Working%20Conditions%20Code%2C%202019.pdf .

[29] Report to study the alarming issue of pornography on social media and its effect on children and society as a whole,  Adhoc Committee, Rajya Sabha, February 3, 2020,  https://rajyasabha.nic.in/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/71/140/0_2020_2_17.pdf

[30] Cabinet approves Revamping of "Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (PMFBY)" and "Restructured Weather Based Crop Insurance Scheme (RWBCIS)" to address the existing challenges in implementation of Crop Insurance Schemes.”, Press Information Bureau, Cabinet, February 19, 2020.

[31] CCEA approves scheme for "Formation and Promotion of Farmer Producer Organizations (FPOs) " to form and promote 10,000 new FPOs, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, February 19, 2020.

[32] National Fisheries Policy, 2020, Department of Fisheries, February 6, 2020,  http://dof.gov.in/sites/default/filess/06.02.20%20National%20Fisheries%20Policy%202020.pdf .

[33] FNoj-1101/10/2019-Fy, Department of Fisheries, February 6, 2020,  http://dof.gov.in/sites/default/filess/OM%20to%20Deptts%20and%20Ministries%20NPF_0.pdf .

[34] CCEA approves upward revision of interest subvention from "upto 2%" to "upto 2.5p.a." under the scheme Dairy processing and Infrastructure Development Fund (DIDF)”, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, February 19, 2020.

[35] Second Advance Estimates of Production of Foodgrains and Commercial Crops for 2019-20, Directorate of Economics and Statistics, Ministry of Agriculture and Farmers’ Welfare, February 18, 2020,  https://eands.dacnet.nic.in/Advance_Estimate/2nd_Adv_Estimates2019-20_Eng.pdf .

[36] “Cabinet approves Swachh Bharat Mission (GrameenPhase-II, Press Information Bureau, Cabinet, February 19, 2020.

[37] “CCEA approves Creation of National Technical Textiles Mission, Press Information Bureau, Ministry of Textiles, February 26, 2020,  https://pib.gov.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=1604416

[38] Cabinet approves the Constitution of an empowered Technology Group, Press Information Bureau, Cabinet, February 19, 2020

[39] Ministry of Defence vs Babita Puniya & Ors., Civil Appeals Nos 9367-9369 of 2011,  https://main.sci.gov.in/supremecourt/2010/20695/20695_2010_8_1501_20635_Judgement_17-Feb-2020.pdf

[40][40] Ease of Living Index and Municipal Performance Index 2019 Launched, Press Information Bureau, Ministry of Housing and Urban Affairs, February 7, 2020

[41] G.S.R126(E), Gazette of India, Ministry of Minority Affairs, February 18, 2020.

[42] S.O770 (E), Gazette of India, Ministry of Environment, Forests and Climate Change, February 20, 2020,  http://moef.gov.in/wp-content/uploads/2020/02/BATTERY-RULE.pdf .

[43] Draft regulation on use of membrane based water purification systems, Ministry of Environment, Forests and Climate Change, February 3, 2020,  http://moef.gov.in/wp-content/uploads/2020/02/Draft_Regulation_MWPS_Eng-Hindi.pdf .

[44] Recommendations on Reforming the Guidelines for Transfer/Merger of Telecom Licenses, Telecom Regulatory Authority of India, February 21, 2020,   https://main.trai.gov.in/sites/default/files/Recommendation_21022020_0.pdf .

[45] Guidelines for Merger and Acquisitions, 2014, Department of Telecommunications,  https://dot.gov.in/sites/default/files/DOC200214_0.pdf .

[46] Consultation Paper on Reforming the Guidelines for

Transfer/Merger of Telecom Licenses, Telecom Regulatory

Authority of India, September 19, 2019, https://main.trai.gov.in/sites/default/files/CP_19092019_0.pdf.

[47] Strategy for National Open Digital Ecosystems, Ministry of Electronics and Information Technology,  https://static.mygov.in/rest/s3fs-public/mygov_158219311451553221.pdf .

 

 

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