जनवरी 2020

जनवरी 2020

इस अंक की झलकियां

संसद का बजट सत्र 2020 शुरू

सत्र के दौरान 31 दिन बैठकें होंगी और यह दो चरणों में संपन्न होगा। इस दौरान 14 बिल विचार और पारित होने के लिए सूचीबद्ध हैं। इसके अतिरिक्त 28 बिलों को प्रस्तुत, विचार तथा पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। 

संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20

2019-20 में जीडीपी के 5की दर से बढ़ने का अनुमान है। 2020-21 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6%-6.5के बीच रहने का अनुमान है। सर्वेक्षण में कारोबार समर्थित नीतियों के जरिए बाजार को मजबूत करने का सुझाव दिया गया।

राष्ट्रपति के अभिभाषण में सरकार की मुख्य उपलब्धियों का उल्लेख

अभिभाषण में मैक्रो-इकोनॉमी, वित्त एवं बैंकिंग, आंतरिक मामलों, रक्षा, परिवहन, ऊर्जा, कृषि और जल जैसे मुख्य क्षेत्रों में सरकार की मुख्य नीतिगत उपलब्धियों और लक्ष्यों का उल्लेख रहा।

2019-20 में जीडीपी के 5% की दर से बढ़ने का अनुमान, पिछले वर्ष की 6.8% की दर के मुकाबले गिरावट 

खनन को छोड़कर सभी क्षेत्रों में वृद्धि दर में पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट। मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की वृद्धि दर में जबरदस्त गिरावट, जोकि 2018-19 में 6.9से गिरकर 2019-20 में 2% हो गई। 

2019-20 की तीसरी तिमाही में रीटेल मुद्रास्फीति 5.84% पर

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति अक्टूबर 2019 में 4.62% से बढ़कर दिसंबर 2019 में 7.35% हो गई। इस तिमाही में खाद्य मूल्य अक्टूबर 2019 में 7.89% से बढ़कर दिसंबर 2019 में 14.12% हो गए। 

खनिज कानून (संशोधन) अध्यादेश, 2020 जारी

अध्यादेश कोयले के अंतिम प्रयोग पर प्रतिबंधों को हटाता है। वह खनन लीज समाप्त होने पर नए बोलीकर्ताओं को दो वर्ष की अवधि के लिए वैधानिक मंजूरियां हस्तांतरित करने का प्रावधान करता है। 

एयर इंडिया के विनिवेश के लिए प्रारंभिक सूचना ज्ञापन जारी

विनिवेश में प्रबंधन नियंत्रण, एयर इंडिया के 100% शेयरों और एयर इंडिया एक्सप्रेस लिमिटेड में एयर इंडिया की पूरी हिस्सेदारी का हस्तांतरण शामिल है। कुल ऋण 23,287 करोड़ रुपए पर फ्रीज किए जाएंगे। 

जम्मू एवं कश्मीर में इंटरनेट बंद करने और सेक्शन 144 के आदेश की वैधता पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला

अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह राज्य में इंटरनेट सेवाओं को बंद करने की समीक्षा करे और सस्पसेंशन के आदेश तथा आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के सेक्शन 144 के अंतर्गत दिए गए आदेशों को प्रकाशित करे। 

सर्वोच्च न्यायालय ने दल बदल विरोधी कानून के अंतर्गत दायर याचिका पर अपनी टिप्पणी दी

अदालत ने आदेश दिया कि अयोग्यता से संबंधित सभी याचिकाओं का तीन महीने के भीतर निपटारा किया जाए। उसने यह भी कहा कि संसद को ऐसी याचिकाओं पर फैसला देने के लिए अध्यक्ष के स्थान पर किसी स्वतंत्र मध्यस्थ निकाय की स्थापना करनी चाहिए। 

आरबीआई ने वित्तीय समावेश के लिए राष्ट्रीय रणनीति जारी की

नीति में वित्तीय समावेश के लिए राष्ट्रीय रणनीति के छह उद्देश्यों को चिन्हित किया गया है। इनमें वित्तीय सेवाओं की सार्वभौमिक पहुंच, वित्तीय साक्षरता एवं शिक्षा को सुनिश्चित करना, उपभोक्ता संरक्षण इत्यादि शामिल हैं। 

आरबीआई ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए सुपरवाइजरी एक्शन फ्रेमवर्क में संशोधन किए

संशोधित फ्रेमवर्क के अंतर्गत आरबीआई उन बैंकों के संबंध में कुछ कार्रवाइयां कर सकता है जिन्हें फ्रेमवर्क में रखा जाएगा। जैसे नई उधारियों पर रोक लगाना और प्रशासनिक खर्चों में कटौती।

कैबिनेट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) बिल, 2020 को मंजूरी दी

बिल मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 में संशोधन का प्रयास करता है जोकि मेडिकल प्रैक्टीशनर्स द्वारा गर्भपात करने का प्रावधान करता है। यह गर्भपात की सीमा को 20 हफ्ते से 24 हफ्ते करता है।

 

संसद

संसद का बजट सत्र 2020 शुरू

Rohin Garg (rohin@prsindia.org)

संसद का बजट सत्र 31 जनवरी, 2019 को शुरू हुआ। सत्र के दौरान 31 दिन बैठकें होंगी और यह दो चरणों में संपन्न किया जाएगा। पहला चरण 31 जनवरी से 11 फरवरी तक चलेगा और दूसरा चरण 2 मार्च से 3 अप्रैल तक चलेगा। [1]

सत्र की शुरुआत संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण से हुआ। वित्त मंत्री 1 फरवरी, 2020 को बजट प्रस्तुत करेंगी।

संसद की कार्यसूची में 14 बिलों पर विचार और उन्हें पारित करना शामिल है। इनमें डीएनए टेक्नोलॉजी (प्रयोग और लागू होना) रेगुलेशन बिल, 2019, माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण (संशोधन) बिल, 2019 और इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (दूसरा संशोधन) बिल, 2019 (वतर्मान में अध्यादेश के रूप में लागू) शामिल हैं।  

इसके अतिरिक्त 28 बिल प्रस्तुत, विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध हैं। इनमें खनिज कानून (संशोधन) बिल, 2020 (अध्यादेश का स्थान लेने वाला), कंपीटीशन (संशोधन) बिल, 2020, बैंकिंग रेगुलेशन (संशोधन) बिल, 2020 और सीड्स बिल, (2020) शामिल हैं। 

सत्र के दौरान लेजिसलेटिव एजेंडा पर अधिक विवरण के लिए कृपया  देखें

राष्ट्रपति के अभिभाषण में सरकार की मुख्य उपलब्धियों का उल्लेख 

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने 31 जनवरी2020 को संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित किया। [2]  उन्होंने अपने अभिभाषण में सरकार की प्रमुख नीतिगत उपलब्धियों को रेखांकित किया। अभिभाषण के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:

  • अर्थव्यवस्थाविदेशी मुद्रा भंडार 450 बिलियन USD से भी अधिक का है। अप्रैल से अक्टूबर 2019 के दौरान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश तीन अरब USD बढ़ा है।
  • वित्त और बैंकिंग: इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता, 2016 की वजह से बैंकों और अन्य संस्थानों के करीब 3.5 लाख करोड़ रुपए वापस आए हैं।  
     
  • आंतरिक मामले: कुछ प्रवासियों को नागरिकता देने के लिए संसद ने नागरिकता संशोधन एक्ट, 2019 को पारित किया है। जम्मू एवं कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 ए को रद्द किया गया है।
     
  • कृषिप्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत 43,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि आठ करोड़ से अधिक किसान परिवारों के बैंक खातों में जमा हुई है।
     
  • रोजगार सृजनविश्व में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट अप इकोसिस्टम भारत में है। स्टार्ट अप इंडिया अभियान के अंतर्गत देश में 27,000 नए स्टार्ट अप्स को मान्यता दी गई है। 
  • स्वास्थ्य: प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत 75 लाख गरीबों को मुफ्त उपचार की सुविधा मिली है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 27,000 से अधिक स्वास्थ्य और वेलनेस केंद्रों की स्थापना की गई है। 
  • महिला एवं बाल विकास: महिला सुरक्षा की दृष्टि से देश में 600 से अधिक वन स्टॉप सेंटर, 1,000 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट और प्रत्येक पुलिस स्टेशन में महिला हेल्प डेस्क बनाए गए हैं।
  • जल: देश के गांवों में हर घर तक पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पेय जल पहुंचेइसके लिए सरकार ने जल जीवन मिशन शुरू किया है। इस योजना पर 3,60,000 रुपए खर्च किए जाएंगे। 

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अधिक विवरण के लिए कृपया  देखें। 2019 में राष्ट्रपति के अभिभाषण से संबंधित विश्लेषण के लिए कृपया  देखें

 

समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 पेश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 को संसद के पटल पर रखा। [3] सर्वेक्षण की मुख्य झलकियां निम्नलिखित हैं:

  • जीडीपी और मुद्रास्फीति: 2018-19 में 6.8की तुलना में 2019-20 में जीडीपी की वृद्धि 5% रही। यह निरंतर छठी छमाही है जब जीडीपी की वृद्धि में गिरावट रही। 2020-21 में भारत की जीडीपी की वृद्धि दर 6.0%-6.5% के बीच रहने की उम्मीद है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति 2018-19 (अप्रैल से दिसंबर, 2018) में 3.7% से बढ़कर 2019-20 (अप्रैल से दिसंबर) में 4.1% रही। इसका मुख्य कारण खाद्य स्फीति में बढ़ोतरी थी। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति 2018-19 में 4.3% से गिरकर 2019-20 (अप्रैल से दिसंबर) में 1.5% रही।
     
  • मौजूदा खाता घाटा (सीएडी) और राजकोषीय घाटाभारत का सीएडी 2018-19 में जीडीपी के 2.1% से गिरकर 2019-20 (अप्रैल-दिसंबर) में जीडीपी का 1.5% हो गया। 2019-20 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.3% और प्राथमिक घाटा 0.2% पर अनुमानित है (प्राथमिक घाटा ब्याज भुगतान को छोड़कर राजकोषीय घाटा होता है)। नवंबर 2019 तक राजकोषीय घाटा बजटीय स्तर के 114.8% पर रहा। सर्वेक्षण में कहा गया कि राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में मौजूदा वर्ष में थोड़ी ढिलाई दी जा सकती है, चूंकि सरकार की तात्कालिक प्राथमिकता यह है कि अर्थव्यवस्था में वृद्धि को पुर्नजीवित किया जाए। 
     
  • बाजार में भरोसा बढ़ानासर्वेक्षण में कहा गया कि 2025 तक भारत की 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की अभिलाषा के लिए यह जरूरी है कि लोगों का बाजार में भरोसा बढ़े। इसके लिए कारोबार समर्थक नीतियों की भी जरूरत होगी। इन नीतियों में निम्नलिखित शामिल हैं (iनए लोगों को समान अवसर प्रदान करना, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को कायम करना, (ii) सरकारी हस्तक्षेप के जरिए ऐसी नीतियों को समाप्त करना जोकि अनावश्यक रूप से बाजार को कमजोर बनाए (iiiरोजगार सृजन के लिए व्यापार को सक्षम बनाना, और (iv) बैंकिग क्षेत्र को अर्थव्यवस्था के सानुपातिक बनाना। 
     
  • इसके अतिरिक्त सर्वेक्षण में निम्नलिखित सुझाव दिए गए: (iसभी स्तरों पर कर्मचारी स्टॉक स्वामित्व देना और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कार्यकुशलता में सुधार हेतु वित्तीय तकनीक का उपयोग, (iiकेंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में तीव्र गति से विनिवेश जिससे उनमें लाभपरकता लाई जा सके, और (iiiरोजगार सृजन के लिए नेटवर्क प्रॉडक्ट्स के निर्यात पर ध्यान केंद्रित करना। नेटवर्क प्रॉडक्ट्स ऐसे उत्पादों को कहते हैं जिनमें ग्लोबल वैल्यू चेन के जरिए उत्पादन किया जाता है। 

2019-20 के आर्थिक सर्वेक्षण पर अधिक विवरण के लिए कृपया  देखें  

2019-20 में जीडीपी के 5% की दर से बढ़ने का अनुमान, 2018-19 में 6.8% की दर से गिरावट 

देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) (2011-12 के मौजूदा मूल्यों पर) पिछले वर्ष के मुकाबले 2019-20 में 5की दर से बढ़ने का अनुमान है। [4]  यह 2018-19 में 6.8की दर से कम है।

आर्थिक क्षेत्रों में जीडीपी का मूल्यांकन सकल मूल्य संवर्धन (जीवीए) के आधार पर किया जाता है। देश की जीवीए 2019-20 में 4.9% से बढ़ने का अनुमान है जोकि 2018-19 में 6.6% था। खनन को छोड़कर सभी क्षेत्रों में वृद्धि दर में 2018-19 के मुकाबले गिरावट की उम्मीद है। खनन में मामूली वृद्धि की उम्मीद है। मैन्यूफैक्चरिंग में जबरदस्त गिरावट हुई है। 2018-19 में वृद्धि दर 6.9% से गिरकर 2019-20 में 2% हो गई है। तालिका 1 में विभिन्न क्षेत्रों में जीवीए की वृद्धि प्रदर्शित है।

तालिका 1: विभिन्न क्षेत्रों में सकल मूल्य संवर्धन (वर्ष दर वर्ष वृद्धि का प्रतिशत) 

क्षेत्र

2017-18

2018-19

2019-20

कृषि 

5.0%

2.9%

2.8%

खनन

5.1%

1.3%

1.5%

मैन्यूफैक्चरिंग

5.9%

6.9%

2.0%

बिजली

8.6%

7.0%

5.4%

निर्माण

5.6%

8.7%

3.2%

सेवा

8.1%

7.5%

6.9%

जीवीए

6.9%

6.6%

4.9%

NoteData for 2018-19 is provisional estimates and for 2019-20 is first advance estimates.  GVA is measured at base prices (2011-12).

SourcesCentral Statistics Office, MOSPI; PRS.

2019-20 की तीसरी तिमाही में रीटेल मुद्रास्फीति 5.84पर

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति (आधार वर्ष: 2011-12, वर्ष दर वर्ष) अक्टूबर 2019 में 4.62% से बढ़कर दिसंबर 2019 में 7.35हो गई। [5] खाद्य मूल्य भी पूरी तिमाही में बढ़े। अक्टूबर 2019 में यह 7.89% थे, जोकि दिसंबर 2019 में बढ़कर 14.12% हो गए।

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) मुद्रास्फीति (आधार वर्ष2011-12, वर्ष दर वर्ष) अक्टूबर 2019 में 0% से बढ़कर दिसंबर 2019 में 2.59% हो गई। [6] 2019-20 की तीसरी तिमाही में मुद्रास्फीति की प्रवृत्तियां रेखाचित्र 1 में स्पष्ट हैं।

रेखाचित्र 1: 2019-20 की तिमाही में मुद्रास्फीति की प्रवृत्तियां (परिवर्तन का %वर्ष दर वर्ष में)

SourcesMinistry of Statistics and Programme Implementation; Ministry of Commerce and Industry; PRS.

खनन                                     

Saket Surya (saket@prsindia.org)

खनिज कानून (संशोधन) अध्यादेश, 2020 जारी

खनिज कानून (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को 10 जनवरी, 2020 को जारी किया गया। [7] यह अध्यादेश खदान और खनिज (विकास एवं रेगुलेशन) एक्ट, 1957 (एमएमडीआर एक्ट) और कोयला खदान (विशेष प्रावधान) एक्ट, 2015 (सीएमएसपी एक्ट) में संशोधन करता है। सीएमएसपी एक्ट में उन खदानों की नीलामी और आबंटन का प्रावधान है जिनका आबंटन 2014 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रद्द कर दिया गया था। एक्ट की अनुसूची I में ऐसी सभी खदानों की सूची है, अनुसूची II और III में अनुसूची I में सूचीबद्ध सभी खदानों की उपश्रेणियां हैं। अनुसूची II में ऐसी खदानें शामिल हैं जहां उत्पादन शुरू हो चुका है और अनुसूची III में ऐसी खदानें शामिल हैं जिन्हें निर्दिष्ट अंतिम उपयोग (एंड-यूज) के लिए चिन्हित किया गया है। 

अध्यादेश की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • कोयले के अंतिम उपयोग पर लगे प्रतिबंध को हटाना: वर्तमान में नीलामी के जरिए अनुसूची II और अनुसूची III की कोयला खदानों का अधिग्रहण करने वाली कंपनियां सिर्फ निर्दिष्ट अंतिम उपयोग के लिए कोयला उत्पादन कर सकती हैं जैसे बिजली उत्पादन और स्टील उत्पादन। अध्यादेश कंपनियों द्वारा कोयला उपयोग पर लगे इस प्रतिबंध को हटाता है। कंपनियों को अपने उपभोग, बिक्री या दूसरे उद्देश्यों, जिसे केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है, के लिए कोयला खनन की अनुमति होगी। वें इस कोयले को अपने सहायक संयंत्रों में भी इस्तेमाल कर सकती हैं। अध्यादेश स्पष्ट करता है कि कोयला और लिग्नाइट ब्लॉक्स की नीलामी में भाग लेने के लिए कंपनियों के पास कोयला खनन का अनुभव होना जरूरी नहीं।
     
  • उत्खनन (प्रॉस्पेक्टिंग) और खनन के लिए कम्पोजिट लाइसेंस: वर्तमान में कोयले और लिग्नाइट के उत्खनन और खनन, जिन्हें क्रमशः प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस और माइनिंग लीज कहा जाता है, के लिए अलग-अलग लाइसेंस दिए जाते हैं। उत्खनन में खनिज भंडार की खोज, स्थान निर्धारण या तलाश शामिल हैं। अध्यादेश एक नई प्रकार का लाइसेंस जोड़ता है जिसे प्रोस्पेक्टिंग लाइसेंस-कम-माइनिंग लीज कहा गया है। यह उत्खनन और खनन, दोनों प्रकार की गतिविधियों के लिए कंपोजिट लाइसेंस होगा।
  • नए बिडर्स (बोली लगाने वालों) को वैधानिक मंजूरियों का हस्तांतरण: कुछ खनिजों (कोयला, लिग्नाइट और एटॉमिक खनिजों को छोड़कर अन्य खनिज) की माइनिंग लीज की समाप्ति के बाद उसे नीलामी के जरिए नए लोगों को हस्तांतरित किया जा सकता है। इन नए लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वे खनन का काम शुरू करने से पहले वैधानिक मंजूरी हासिल करेंगे। अध्यादेश में प्रावधान है कि पूर्व पट्टाधारी को मिली मंजूरियां और लाइसेंस दो साल की अवधि के लिए सफल बिडर को दिया जाएगा। इस अवधि के दौरान नए पट्टाधारी को खनन जारी रखने की अनुमति होगी। हालांकि नए पट्टाधारी को दो साल में जरूरी मंजूरियां हासिल करनी होंगी।

अध्यादेश पर पीआरएस सारांश के लिए कृपया  देखें

कोयला बिक्री हेतु कोयला खदानों की नीलामी के मसौदा नियम जारी

कोयला मंत्रालय ने कोयले की बिक्री हेतु कोयला खदानों की नीलामी के मसौदा नियमों से संबंधित एक परिचर्चा पत्र जारी किया। [8]  

खनिज कानून (संशोधन) अध्यादेश, 2020 में प्रावधान है कि नीलामी में भाग लेने के लिए कंपनियों के पास कोयला खनन का अनुभव होना जरूरी नहीं। अध्यादेश में लाइसेंस-कम-माइनिंग लीज के जरिए अब तक खोजे न गए और आंशिक रूप से खोजे गए कोयला ब्लॉक्स की नीलामी का भी प्रावधान है।7  अगस्त, 2019 में एफडीआई नीति को संशोधित किया गया था ताकि कोयले की बिक्री के लिए कोयला खनन गतिविधियों में 100एफडीआई को अनुमति दी जा सके। [9] मंत्रालय उपरोक्त पहल के जरिए कोयले की बिक्री के लिए कोयला खदानों की नीलामी पर विचार कर रहा है। मंत्रालय ने पत्र में उन खदानों की प्राथमिकता बताने की मांग की है जिनकी पहली श्रृंखला के अंतर्गत नीलामी की जाएगी और और खदानों की एक अस्थायी सूची प्रकाशित की है। मसौदा नियमों की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • पात्रता के मानदंड: निम्नलिखित कंपनियां नीलामी में भाग लेने के लिए पात्र हैं: (i) सरकारी कंपनी, या ऐसी कंपनियों द्वारा स्थापित संयुक्त उपक्रम, या केंद्र और राज्य का संयुक्त उपक्रम, या (ii) भारत में निगमित कंपनी या दो या उससे अधिक कंपनियों द्वारा स्थापित संयुक्त उपक्रम। पूर्व आबंटी जिन्होंने: (i) निर्धारित समय अवधि में पूर्व आबंटित खदानों के लिए अतिरिक्त लेवी नहीं चुकाई हो, या (ii) जो किसी अपराध का दोषी हो, नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने का पात्र नहीं है। 
     
  • बोली का मानदंडनीलामी में भाग लेने वाले राजस्व के एक प्रतिशत हिस्से के लिए बोली लगाएंगे जिसे सरकार को चुकाना होगा। फ्लोर प्राइज राजस्व के हिस्से का 4% होगा।
     
  • भुगतान/गारंटी: नीलामी में सफल होने वालों को निम्नलिखित चुकाना होगा: (i) कोयला खदानों के अनुमानित संसाधनों के मूल्य की 0.5% अपफ्रंट राशि, (ii) सिक्योरिटी के रूप में बैंक गारंटी, (iii) प्रदर्शन सुरक्षा, और (iv) निश्चित राशि जिसमें व्यय शामिल होंगे जैसे जमीन और खदान के इंफ्रास्ट्रक्चर का मूल्य, और वैधानिक मंजूरियां हासिल करने की लागत।
     
  • कोयला उत्पादन में फ्लेक्सिबिलिटी: नीलामी में सफलत पाने वाले से एक वर्ष में अधिसूचित उत्पादन का कम से कम 50% उत्पादित करने की अपेक्षा की जाती है, जैसा कि खदान योजना में मंजूर किया गया है। तीन वर्षों में कोयला उत्पादन कम से कम 70% जरूर होना चाहिए।  

रॉयल्टी की दरों में संशोधन से संबंधित मुद्दों की जांच हेतु कमिटी का गठन

खदान मंत्रालय ने रॉयल्टी की दरों में संशोधन तथा निर्दिष्ट खनिजों के डेड रेंट से संबंधित फीडबैक की समीक्षा के लिए कमिटी का गठन किया है। [10]  इन खनिजों में कोयला, लिग्नाइट, सैंड स्टोइंग और गौण खनिज जैसे ग्रेनाइट और माइका शामिल नहीं।

खदान और खनिज (विकास और रेगुलेशन) एक्ट, 1957 के अनुसार, खनिजों (गौण खनिजों को छोड़कर) के लिए रॉयल्टी और डेड रेंट को केंद्र सरकार द्वारा हर तीन साल में एक बार संशोधित किया जा सकता है। पहले इन दरों को सितंबर 2014 में संशोधित किया गया था। गौण खनिजों की दरों को राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है। 2018 में मंत्रालय ने मुख्य खनिजों (कोयला लिग्नाइट और सैंड फॉर स्टोइंग) के लिए रॉयल्टी और डेड रेंट में संशोधन का सुझाव देने के लिए अध्ययन समूह का गठन किया था। मंत्रालय को अध्ययन समूह की रिपोर्ट पर स्टेकहोल्डर्स की टिप्पणियां प्राप्त हुई हैं। कमिटी स्टेकहोल्डर्स द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच करेगी।

मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव कमिटी के अध्यक्ष होंगे। कमिटी के सदस्यों में भारतीय खदान ब्यूरो के प्रतिनिधि, और कुछ राज्य सरकारों के खनन सचिव (झारखंड, ओड़िशा, तेलंगाना) शामिल होंगे। कमिटी को अपनी पहली बैठक की तिथि के एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। 

परिवहन

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

एयर इंडिया के विनिवेश के लिए प्रारंभिक सूचना ज्ञापन जारी 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट को आमंत्रित करने हेतु प्रारंभिक सूचना ज्ञापन जारी किया। [11]  ज्ञापन के मुख्य प्रावधानों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • विनिवेश: विनिवेश में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) प्रबंधन नियंत्रण और एयर इंडिया के 100शेयरों का हस्तांतरण और (ii) अपनी सबसिडियरी एयर इंडिया एक्सप्रेस लिमिटेड (एआईएक्सएल) में एयर इंडिया की पूरी हिस्सेदारी, और अपने संयुक्त उपक्रम एआईएसएटीएस में 50% हिस्सेदारी। अन्य कंपनियों में एयर इंडिया के इंटरेस्ट्स को दूसरी कंपनी एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग कंपनी (एआईएएचएल) में हस्तांतरित किया गया है।
     
  • ऋण और देनदारियां: कुल ऋण (एयर इंडिया और एआईएक्सएल) 23,286.5 करोड़ रुपए पर फ्रीज किया जाएगा। एयर इंडिया की देनदारियां कुछ मौजूदा और गैर मौजूदा एसेट्स के बराबर होंगी और उनका मूल्य 8,771.करोड़ रुपए (31 मार्च, 2019) होगा। एयर इंडिया और एआईएक्सएल के शेष ऋण और देनदारियां एआईएएचएल को दे दी जाएंगी। वैधानिक देय से संबंधित आकस्मिक देनदारियों और सरकार के देय की क्षतिपूर्ति सरकार द्वारा की जाएगी। रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल स्टेज पर कर्मचारियों का बकाया चुकाया जाएगा। एलायंस एयर की तरफ से एयर इंडिया द्वारा दी गई कॉरपोरेट गारंटी को नए निवेशक को हस्तांतरित नहीं किया जाएगा। 
     
  • रुचि रखने वालों के लिए पात्रता के मानदंड: रुचि रखने वालों का शुद्ध मूल्य कम से कम 3,500 करोड़ रुपए होना चाहिए। इसके अतिरिक्त वे निम्न आधार पर क्वालिफाई कर सकते हैं: (iफंड्स के मामले में न्यूनतम इनवेस्टिबल फंड्स (कुछ मानदंडों के अधीन), और (ii) फंड्स के अतिरिक्त उसके एफिलिएट्स का शुद्ध मूल्य। बोली लगाने वाले एक संघ बना सकते हैं। इस मामले में प्रत्येक सदस्य का संघ में कम से कम 10इंटरेस्ट होना चाहिए और कंपनी में कम से कम 10इक्विटी शेयर कैपिटल होना चाहिए। 

एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर वसूले जाने वाले फ्यूल थ्रूपुट चार्ज को रैशनलाइज किया गया 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरपोर्ट ऑपरेटरों द्वारा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर वसूले जाने वाले फ्यूल थ्रूपुट चार्ज को रैशनलाइज किया है। [12]  ईंधन संबंधी शुल्क तीन तरह से वसूला जाता है: (i) एयरपोर्ट ऑपरेटर चार्ज, (ii) ईंधन इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज, और (iii) इनटू प्लेन चार्ज, या इन तीनों को जोड़कर फ्यूल थ्रूपुट चार्ज बनता है। मंत्रालय ने निम्नलिखित बदलावों को मंजूरी दी है:

  • एयरपोर्ट ऑपरेटर चार्ज या फ्यूल थ्रूपुट चार्ज की किसी भी तरह से वसूली प्रत्येक एयरपोर्ट, एयरस्ट्रिप्स और हेलीपैड से तत्काल प्रभाव से हटा दी जाएगी।
     
  • मंत्रालय या एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (जैसा मामला हो) एयरपोर्ट ऑपरेटर की भरपाई करेगा- एयरपोर्ट टैरिफ को निर्धारित करते समय दूसरे टैरिफ को फिर से उपयुक्त तरीके से जांचा जाएगा। 

कैबिनेट ने इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट्स की स्थापना के लिए एनएचएआई को अधिकृत किया 

केंद्रीय कैबिनेट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग अथॉरिटी (एनएचएआई) को इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट्स (इनविट्स) को गठित करने तथा पूर्ण एवं परिचालित राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) प्रॉजेक्ट्स का मुद्रीकरण करने के लिए अधिकृत किया है। [13]  इन इनविट्स को सेबी के दिशानिर्देशों के आधार पर गठित किया जाएगा। मुद्रीकृत होने वाले एनएच प्रॉजेक्ट्स का कम से कम एक वर्ष का टोल कलेक्शन ट्रैक रिकॉर्ड होना चाहिए। एनएचएआई को इन चिन्हित राजमार्गों पर टोल वसूलने का अधिकार होगा। 

प्रत्येक इनविट के पास दो स्पेशल पर्पज वेहिकल (एसपीवीज़) होने चाहिए: (i) सभी चिन्हित पब्लिक फंडेड प्रॉजेक्ट्स को होल्ड करना, जिसे इनविट में रखा जाना है, और (ii) प्रस्तावित इनविट में इनवेस्टमेंट मैनेजर के तौर पर कार्य करना। एनएचएआई इन इनविट्स को प्राप्त होने वाली राशि के लिए अलग फंड बनाएगा। एनएचएआई के चेयरपर्सन को इनविट्स में रखे जाने वाले प्रॉजेक्ट्स को चुनने और इन इनविट्स को परिचालित करने का अधिकार है। 

निर्भया फ्रेमवर्क के अंतर्गत वाहन ट्रैकिंग योजना प्रारंभ 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने निर्भया फंड फ्रेमवर्क के अंतर्गत सुरक्षा हेतु वाहन ट्रैंकिंग प्लेटफॉर्म को लागू करने से संबंधित एक योजना शुरू की। यह योजना सभी राज्यों में लागू होगी। [14]  केंद्र सरकार निर्भया फंड बनाएगी जिसे महिलाओं की सुरक्षा में सुधार हेतु विशेष रूप से डिजाइन प्रॉजेक्ट्स पर खर्च किया जा सकता है। [15]  यह नॉन-लैप्सेबल कॉरपस फंड है जिसे वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा प्रबंधित किया जाएगा। 

योजना की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • उद्देश्य: प्रस्तावित प्रणाली महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा बढ़ाने का प्रयास करती है। इसके लिए सभी सार्वजनिक यात्री परिवहन वाहनों पर लोकेशन ट्रैकिंग उपकऱण और इमरजेंसी बटन लगाए जाएंगे ताकि आपात स्थिति में चेतावनी दी जा सके। प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में निरीक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे जो इन इकाइयों का निरीक्षण करेंगे और डिस्ट्रेस कॉल्स का जवाब देंगे।
     
  • सिस्टम की जांचप्रस्तावित प्रणाली में एक वेहिकल लोकेशन ट्रैकिंग (वीएलटी) डिवाइस होगा जिसमें इमरजेंसी बटन लगे होंगे। ये डिवाइस वाहन की लोकेशन, स्वास्थ्य की स्थिति, चेतावनी और दूसरे डेटा को समय-समय पर निरीक्षण केंद्र भेजेंगे। परिवहन विभाग के अधिकारी इस सिस्टम को एक्सेस कर सकेंगे और केंद्र में चेतावनियों का निरीक्षण कर सकेंगे।
     
  • कार्यान्वयन: राज्य 1 जनवरी, 2019 से पहले पंजीकृत होने वाले वाहनों में वीएलटी डिवाइस लगाने के लिए समय अवधि को अधिसूचित करेंगे। वीएलटी मैन्यूफैक्चरर वाहन डेटाबेस में यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर इंटर करेगा ताकि वीएलटी डिवाइस को निर्दिष्ट वाहन से लिंक किया जा सके।
     
  • फंडिंगयोजना की कुल लागत को केंद्र और राज्यों द्वारा उस अनुपात में वहन किया जाएगा, जिसका उल्लेख निर्भया फ्रेमवर्क में है। मंत्रालय द्वारा फंडिंग में बैकएंड सॉफ्टवेयर की लागत, निरीक्षण केंद्रों की स्थापना, अधिकारियों का प्रशिक्षण, डेटा स्टोरेज के लिए क्लाउड सर्विस शामिल हैं।  

ड्रोन्स की स्वैच्छिक घोषणा से संबंधित दिशानिर्देश जारी

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भारत में गैर अनुपालन वाले ड्रोन्स की स्वैच्छिक घोषणा से संबंधित दिशानिर्देश जारी किए। [16]  मंत्रालय ने अगस्त 2018 में असैन्य ड्रोन्स के परिचालन से संबंधित रेगुलेशन जारी किए थे। [17] रेगुलेशंस में यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर हासिल करने की प्रक्रिया, मानव रहित एयरक्राफ्ट ऑपरेटर परमिट, और अन्य शर्तें, जैसे असैन्य ड्रोन्स के आइडेंटिफिकेशन का प्रावधान है। 

हालिया दिशानिर्देशों में यह प्रावधान है कि ड्रोन्स संचालकों को 31 जनवरी, 2020 तक सरकार को जरूरी सूचना देनी होगी। सूचना मिलने के बाद ड्रोन मान्यता संख्या और स्वामित्व मान्यता संख्या दी जाएगी। ये ऐसे ड्रोन को संचालित करने के लिए कोई अधिकार नहीं प्रदान करेंगे। इन संख्याओं के बिना ड्रोन संचालक के खिलाफ लागू कानूनों के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।  

 

विधि और न्याय

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

जम्मू एवं कश्मीर में टेलीकॉम सेवाओं को रद्द करने एवं सेक्शन 144 लगाने से संबंधित आदेशों की वैधता पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला

सर्वोच्च न्यायालय ने निम्नलिखित को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला दिया: (i) टेंपररी सस्पेंशन ऑफ टेलीकॉम सर्विसेज़ (पब्लिक इमरजेंसी ऑर पब्लिक सर्विस) रूल, 2017 के अंतर्गत अगस्त 2019 से जम्मू एवं कश्मीर में मोबाइल, लैंडलाइन और इंटरनेट सेवाओं को रद्द करने की संवैधानिकता, और (ii) आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (सीआरपीसी) के सेक्शन 144 के अंतर्गत अगस्त 2019 से जिला मेजिस्ट्रेट द्वारा गतिविधियों और सार्वजनिक सभाओं पर पाबंदी के आदेश की वैधता। [18]    

अदालत ने निम्नलिखित प्रश्नों पर सुनवाई की: (i) क्या सरकार को 2017 के नियमों और सीआरपीसी के सेक्शन 144 के अंतर्गत दिए गए आदेश को प्रस्तुत करने की जरूरत है, (ii) क्या बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, और किसी पेशे, व्यापार या कारोबार को करने की स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 19 के अंतर्गत प्रदत्त मूलभूत अधिकारों का अंग हैं, और (iii) क्या इंटरनेट एक्सेस पर प्रतिबंध और सीआरपीसी के सेक्शन 144 के अंतर्गत प्रतिबंध वैध थे।

पहले प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सभी टेलीकॉम सस्पेंशन आदेशों को प्रस्तुत किया जाना चाहिए। अगर राज्य के पास विशेषाधिकार या सार्वजनिक हित से संबंधित दावा है तो वह इस सीमा तक आदेश को फिर से लागू कर सकता है। राज्य को किसी भी नए सिरे से औचित्य साबित करना होगा।

दूसरे सवाल पर न्यायालय ने कहा कि बोलने की स्वतंत्रता और इंटरनेट पर व्यापार करने की स्वतंत्रता को क्रमशः संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) और (जी) के अंतर्गत संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। इसलिए इन स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध: (i) संविधान के अनुच्छेद 19 (2) और अनुच्छेद 19 (6) के अंतर्गत निर्दिष्ट, जैसे राज्य सुरक्षातक सीमित होने चाहिए और (iiउन्हें आनुपातिकता के सिद्धांत पालन करना चाहिए। इन सिद्धांतों का एक वैध उद्देश्य होना चाहिए, उद्देश्य और स्वतंत्रता के प्रतिबंध के बीच एक औचित्य संबंध होना चाहिए और इस का सबूत होना चाहिए कि वह उपाय लक्ष्य हासिल करने का सबसे आसान तरीका है।  

इन सिद्धांतों को लागू करते हुए न्यायालय ने सस्पेंशन के मौजूदा आदेशों की समीक्षा का निर्देश दिया और कहा कि इंटरनेट सेवाओं को अनिश्चितकाल के लिए बंद करना 2017 के नियमों के अंतर्गत अनुचित है। न्यायालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेशों को प्रकाशित करने और 2017 के नियमों के अंतर्गत समीक्षा समितियों को हर सात वर्किंग दिनों में आदेशों की समीक्षा करने का निर्देश दिया। 2017 के नियमों में प्रावधान है कि केंद्र और राज्यों की समीक्षा समितियों की स्थापना की जाए जिनमें सरकारी सचिव शामिल हों।

न्यायालय ने सीआरपीसी के सेक्शन 144 के अंतर्गत शक्तियों के उपयोग से संबंधित कानूनी स्थिति का सारांश भी प्रस्तुत किया। अन्य के अतिरिक्त उसने कहा कि सेक्शन 144 के अंतर्गत शक्तियों को तभी इस्तेमाल किया जा सकता है जब निम्नलिखित शर्तों का पालन किया जाए: (i) आदेश में वे भौतिक तथ्य हों जिनके आधार पर उन्हें पारित किया गया है, और (ii) प्रस्तुत किए गए खतरे की प्रकृति आपातकालीन है और यह लोगों को नुकसान पहुंचा सकती है। यह कहा गया कि सेक्शन 144 के अंतर्गत बार-बार आदेश देने से शक्तियों का दुरुपयोग हो सकता है। उसने निर्देश दिया कि संबंधित अथॉरिटीज़ जम्मू एवं कश्मीर में सेक्शन 144 के अंतर्गत दिए गए सभी आदेशों को प्रकाशित करें। 

दल बदल विरोधी कानून के अंतर्गत अयोग्यता पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला 

सर्वोच्च न्यायालय ने मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष को निर्देश दिया कि वह चार हफ्ते के भीतर दल बदल से संबंधित याचिका पर फैसला सुनाएं। इससे पूर्व राज्य में एक राजनीतिक दल का विधायक दूसरे राजनीतिक दल में चला गया था। [19] यह मामला उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर किया गया था। इसमें अध्यक्ष द्वारा अयोग्यता की याचिका के निपटारे में विलंब को चुनौती दी गई थी। 

न्यायालय ने कहा कि अध्यक्ष को एक उचित एवं निश्चित समय सीमा में अयोग्यता संबंधी याचिका पर फैसला लेना चाहिए, जोकि तीन महीने से अधिक नहीं होनी चाहिए। उसने कहा कि अयोग्यता संबंधी याचिका में अध्यक्ष की भूमिका पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए क्योंकि अध्यक्ष भी किसी न किसी राजनीतिक दल का सदस्य होता है। उसने सुझाव दिया कि संसद संविधान को संशोधित करने पर विचार कर सकती है ताकि अध्यक्ष के स्थान पर एक वैकल्पिक मध्यस्थ अथॉरिटी को लाया जा सके। यह अथॉरिटी स्थायी ट्रिब्यूनल हो सकता है जिसका प्रमुख सर्वोच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश हो या उसके स्थान पर एक बाह्य स्वतंत्र तंत्र की स्थापना की जाए।

अदालती आदेशों को लागू करने के लिए भारत ने यूएई को पारस्परिक देश घोषित किया 

विधि और न्याय मंत्रालय ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को सिविल प्रोसीजर कोड, 1908 के अंतर्गत ‘पारस्परिक क्षेत्र’ घोषित किया। उसने यूएई की अदालतों की एक सूची को ‘सुपीरियर कोर्ट्स’ घोषित किया। [20]  इन अदालतों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) फेडरल सुप्रीम कोर्ट, और (ii) कुछ स्थानीय अदालतें, जैसे अबू धाबी ज्यूडीशियल डिपार्टमेंट और दुबई कोर्ट्स। सामान्यतः भारत की दीवानी अदालत के आदेश को उसी अदालत या किसी अन्य अदालत (जिसके क्षेत्राधिकार में वह मामला आता हो) में आदेश की प्रति फाइल करके लागू किया जाता है। पारस्परिक क्षेत्र के सुपीरियर कोर्ट्स के स्थानीय आदेशों को भारत में लागू किया जा सकता है, जैसे वह भारत की दीवानी अदालत में दिए गए हों।  

 

गृह मामले

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

भारत सरकार, असम सरकार और बोडो प्रतिनिधियों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर 

भारत सरकार, असम सरकार और बोडो प्रतिनिधियों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। [21] प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बोडो क्षेत्रों के विकास हेतु विशिष्ट परियोजनाएं चलाने के लिए केंद्र सरकार तीन वर्षों के लिए 1500 करोड़ रुपए का विशेष पैकेज देगी। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार और असम सरकार नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड के कुछ गुटों के 1500 कैडेट्स के पुनर्वास के लिए उपाय करेगी।  

 

वित्त

आरबीआई ने वित्तीय समावेश के लिए राष्ट्रीय रणनीति जारी की

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

आरबीआई ने वित्तीय समावेश 2019-2024 के लिए राष्ट्रीय रणनीति जारी की। [22] यह रणनीति भारत में वित्तीय समावेश की नीतियों के दृष्टिकोण और लक्ष्यों को निर्धारित करती है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय समावेश वित्तीय सेवाओं तक पहुंच को सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील समूहों एवं निम्न आय वर्ग के समूहों को निश्चित समय तथा सस्ती दरों पर ऋण मुहैय्या कराने की प्रक्रिया होती है। आरबीआई के मुख्य निष्कर्षों तथा सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • वित्तीय समावेश के उपायआरबीआई ने कहा कि देश में वित्तीय समावेश को बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं(iप्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई), जिसके अंतर्गत 89,257 करोड़ रुपए की जमा से 34 करोड़ खाते खोले गए हैं, और (iiबैंक खाता धारकों को सबस्क्राइब करने हेतु अटल पेंशन योजना जैसी योजनाएं।
     
  • हालांकि उसने अनेक अंतरालों को चिन्हित किया है जोकि वित्तीय समावेश के लिए एक बाधा बने हुए हैं, जैसे: (iअपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर (ग्रामीण इलाकों के कुछ हिस्सों में, पर्वतीय और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में दूर-दराज के क्षेत्रों में), (ii) ग्रामीण क्षेत्रों में खराब दूरसंचार एवं इंटरनेट कनेक्टिविटी, (iii) सामाजिक-सांस्कृतिक अवरोध, और (iv) पेमेंट प्रॉडक्ट स्पेस में मार्केट प्लेयर्स की कमी। 
     
  • वित्तीय समावेश के रणनीतिक उद्देश्य: आरबीआई ने वित्तीय समावेश के लिए राष्ट्रीय नीति के छह रणनीतिक उद्देश्यों को चिन्हित किया: (i) वित्तीय सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच, (ii) वित्तीय सेवाओं का बेसिक बुके देना, (iii) जीविकोपार्जन और दक्षता विकास तक पहुंच, (iv) वित्तीय साक्षरता और शिक्षा, (v) उपभोक्ता संरक्षण और शिकायत निवारण, और (vi) प्रभावी समन्वय। इस दृष्टिकोण को हासिल करने के लिए उसने कुछ माइलस्टोन्स चिन्हित किए जैसे: (क) मार्च 2020 तक पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले प्रत्येक गांव (या पहाड़ी क्षेत्रों में 500 घरों का छोटा गांव) को बैंकिंग एक्सेस देनाऔर (b) मार्च 2022 तक नकदरहित समाज बनाने हेतु इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए डिजिटल वित्तीय सेवाओं को मजबूत करना। 
     
  • वित्तीय समावेश के मापदंड: आरबीआई ने सुझाव दिया कि वित्तीय समावेश को तीन मुख्य संकेतकों से जुड़े मापदंडों पर मापा जाना चाहिए। इनमें निम्नलिखित के लिए मापदंड शामिल हैं: (iएक्सेस, जैसे एक निर्दिष्ट आबादी पर बैंक शाखाओं या एटीएम की संख्या, (iiउपयोग, जैसे बचत खाते, बीमा या पेंशन पॉलिसी वाले वयस्कों का प्रतिशत, और (iiiऔर सेवाओं की गुणवत्ता, जैसे शिकायत निवारण (प्राप्त होने वाली शिकायतों की संख्या और उन्हें निपटाए जाने की संख्या के जरिए)। 

रिपोर्ट के पीआरएस सारांश के लिए कृपया  देखें

आरबीआई ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए सुपरवाइजरी एक्शन फ्रेमवर्क में संशोधन किए

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों (यूसीबीज़) के लिए अपने सुपरवाइजरी एक्शन फ्रेमवर्क में संशोधन किए हैं ताकि वित्तीय स्ट्रेस वाले यूसीबीज़ को रिजॉल्व किया जा सके और फ्रेमवर्क को अधिक प्रभावशाली बनाया जा सके। [23]  

सुपरवाइजरी एक्शन फ्रेमवर्क के अंतर्गत यूसीबी द्वारा सुधारात्मक कार्रवाई शुरू करने या आरबीआई द्वारा सुपरवाइजरी कार्रवाई के लिए कुछ ट्रिगर्स को चिन्हित किया गया है। संशोधित फ्रेमवर्क ने विशिष्ट कार्रवाइयों को अधिसूचित किया है जोकि आरबीआई द्वारा तब शुरू की जा सकती हैं जब बैंक सुपरवाइजरी एक्शन फ्रेमवर्क के अंतर्गत रखा जाएगा

  • वर्तमान में एक यूसीबी को फ्रेमवर्क के अंतर्गत रखा जा सकता है, अगर उसके ग्रॉस (सकल) नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) उसके एडवांस (अग्रिम) के 10से अधिक हों। [24] संशोधित फ्रेमवर्क निर्दिष्ट करता है कि एक यूसीबी को फ्रेमवर्क में रखा जा सकता है, अगर उसका शुद्ध एनपीए (यानी प्रोविजंस को हटाकर सकल एनपीए) उसके शुद्ध अग्रिम का 6से अधिक हो। इसके अतिरिक्त यह निर्दिष्ट करता है कि ऐसे मामलों में आरबीआई कुछ उपाय कर सकती हैं, जैसे: (iशुद्ध एनपीए को 6से कम करने के लिए बोर्ड अनुमोदित योजना प्रस्तुत करने की यूसीबी को सलाह देना, (ii) आरबीई के पूर्व अनुमोदन के बिना लाभांश के भुगतान पर रोक लगाना, (iii) जिन क्षेत्रों में एनपीए का बड़ा अनुपात है, उन्हें ऋण देने पर रोक लगाना। 
     
  • एक यूएसबी को फ्रेमवर्क के अंतर्गत रखा जा सकता है, अगर उसे लगातार दो वित्तीय वर्षों तक घाटा (या संचित घाटा) हुआ है। संशोधित फ्रेमवर्क निर्दिष्ट करता है कि ऐसे मामलों में आरबीआई कुछ कार्रवाई कर सकती है, जैसे: (i) लाभांश के भुगतान पर रोक लगाना, (ii) आरबीआई के पूर्व अनुमोदन के लिए पूंजीगत व्यय पर रोक लगाना, या (iii) ऑपरेटिंग या प्रशासनिक व्यय में कमी के लिए उपाय करना। 
     
  • एक यूसीबी को फ्रेमवर्क में रखा जा सकता है, अगर उसका कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट्स रेशो (सीआरएआर) 9से कम है। संशोधित फ्रेमवर्क के अनुसार, ऐसे मामलों में आरबीआई : (iयूसीबी को यह सलाह दे सकती है कि वह 12 महीने के भीतर सीआरएआर को 9से अधिक करने के संबंध में बोर्ड समर्थित योजना सौंपे, (ii) यूसीबी का विलय दूसरे बैंक में करने या उसे क्रेडिट सोसायटी में बदलने हेतु बोर्ड समर्थित प्रस्ताव की मांग कर सकती है, या (iii) नई उधारियों पर रोक लगा सकती है और नए लोन्स की सीमाएं तय कर सकती है, इत्यादि। 

इसके अतिरिक्त आरबीआई ने यह भी अधिसूचित किया है कि 500 करोड़ रुपए या उससे अधिक की कुल परिसंपत्ति वाले यूसीबी को अपने उन सभी उधारकर्ताओं की क्रेडिट इनफॉरमेशन आरबीआई के सेंट्रल रेपोसिटरी ऑफ इनफॉरमेशन ऑन लार्ज क्रेडिट्स को देनी चाहिए जिनका एग्रीगेट एक्सपोजर 5 करोड़ रुपए या उससे अधिक है। [25] 

आईआरडीएआई ने स्टैंडर्ड इनडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस प्रॉडक्ट पर दिशानिर्देश जारी किए

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय बीमा और रेगुलेटरी विकास अथॉरिटी (इरडा) ने सभी सामान्य और स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को स्टैंडर्ड इनडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस प्रॉडक्ट से संबंधित दिशानिर्देश जारी किए। [26] ये दिशानिर्देश निम्नलिखित सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं: (क) उद्योग में स्टैंडर्ड प्रॉडक्ट, और (ख) बीमित लोगों को उद्योग में पोर्टेबिलिटी देना। दिशानिर्देशों के अनुसार, यह प्रॉडक्ट एक वर्ष की अवधि तथा क्षतिपूर्ति के आधार पर प्रदान किया जाएगा। उसमें कोई एड-ऑन्स या वैकल्पिक कवर नहीं होगा। प्रॉडक्ट में कुछ बुनियादी अनिवार्य कवर शामिल होंगे: (i) अस्पताल में भर्ती होने का खर्च (अधिकतम 5,000 रुपए प्रतिदिन), (ii) अस्पताल में भर्ती होने से पहले के मेडिकल खर्च जोकि भर्ती होने से 30 दिन पहले किए जाएंगे, और (iii) भर्ती होने के बाद का मेडिकल खर्च, जोकि डिस्चार्ज होने के 60 दिन बाद तक किया जाए। पॉलिसी के तहत बीमित न्यूनतम और अधिकतम राशि क्रमशः एक लाख रुपए और पांच लाख रुपए होगी।

 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

कैबिनेट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) बिल, 2020 को मंजूर किया

केंद्रीय कैबिनेट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) बिल, 2020 को मंजूरी दी। [27]  बिल मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 में संशोधन का प्रयास करता है जोकि पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टीशनर द्वारा कुछ स्थितियों में गर्भपात का प्रावधान करता है। [28]  मुख्य सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं: 

  • एक्ट के अंतर्गत, गर्भपात 20 हफ्तों में कराया जा सकता है, अगर: (iगर्भावस्था को जारी रखने से मां के जीवन को खतरा हो सकता या उसकी सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता है, या (iiइस बात का पर्याप्त खतरा है कि अजन्मा बच्चा शारीरिक या मानसिक असामान्यताओं के कारण गंभीर रूप से विकलांग हो सकता है। संशोधन विशेष श्रेणी की महिलाओं के लिए गर्भपात की अधिकतम सीमा को 20 हफ्ते से 24 हफ्ते करता है। इनमें बलात्कार पीड़ित, परिवार के किसी सदस्य द्वारा बलात्कार से पीड़ित या दूसरी संवेदनशील महिलाएं (जैसे विकलांग महिलाएं और नाबालिग लड़कियां) शामिल हैं।

  • इसके अतिरिक्त गर्भपात के लिए 24 हफ्ते की सीमा उन मामलों पर लागू नहीं होगी, जहां मेडिकल बोर्ड ने भ्रूण के असामान्य होने का निदान दिया है। मेडिकल बोर्ड के संयोजन, कार्य और अन्य विवरणों को निर्दिष्ट किया जाएगा।

  • एक्ट के अनुसार, पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टीशनर की सलाह पर 12 हफ्तों में गर्भपात कराया जा सकता है। 12 से 20 हफ्तों के बीच गर्भपात करने के लिए दो मेडिकल प्रैक्टीशनर्स की सलाह (ओपीनियन) की जरूरत होती है। संशोधन में कहा गया है कि: (i20 हफ्ते तक गर्भपात के लिए एक पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टीशनर की सलाह की जरूरत होगी, और (ii20 से 24 हफ्ते के बीच गर्भपात कराने के लिए दो पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टीशनर की सलाह की जरूरत होगी।

  • संशोधनों में यह भी प्रस्तावित किया गया है कि जिस महिला का गर्भपात किया गया है, उसका नाम और दूसरे विवरण का खुलासा नहीं किया जाएगा, केवल उस व्यक्ति को छोड़कर जिसे कानून द्वारा अधिकृत किया गया है।  

राष्ट्रीय डेंटल आयोग बिल, 2020 का मसौदा सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किया गया

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय डेंटल आयोग बिल, 2020 का मसौदा सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किया गया। [29]  मसौदा बिल डेंटिस्ट्स एक्ट, 1948 को रद्द करने का प्रयास करता है और डेंटल शिक्षा प्रणाली के लिए प्रावधान करता है जोकि निम्नलिखित को सुनिश्चित करे: (iपर्याप्त और उच्च क्वालिटी के डेंटल प्रोफेशनल्स की उपलब्धता, (iiडेंटल प्रोफेशनल्स द्वारा हालिया डेंटल रिसर्च को अपनाया जाए, (iiiडेंटल संस्थानों का आवर्ती मूल्यांकन, और (ivप्रभावशाली शिकायत निवारण प्रणाली। बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • राष्ट्रीय डेंटल आयोग का संयोजन: बिल राष्ट्रीय डेंटल आयोग (एनडीसी) की स्थापना का प्रावधान करता है। बिल के पारित होने के तीन वर्षों के भीतर राज्य सरकारें अपने स्तर पर राज्य डेंटल काउंसिल बनाएंगी।  एनडीसी में 30 सदस्य होंगे, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा।
     
  • एनडीसी के सदस्यों में निम्नलिखित शामिल होंगे: (iचेयरपर्सन (जोकि डेंटस प्रैक्टीशनर होने चाहिए)(ii) अंडरग्रैजुएट एवं पोस्ट ग्रैजुएट डेंटल एजुकेशन बोर्ड के प्रेज़िडेंट्स, (iii) स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के महानिदेशक, और (ivपंजीकृत डेंटल प्रैक्टीशनर्स द्वारा अपने बीच से नौ सदस्यों (पार्ट टाइम) का चयन। राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में से चुने गए ये सदस्य दो वर्षों तक अपने पद पर बने रहेंगे।
     
  • राष्ट्रीय डेंटल आयोग के कार्य: एनडीसी के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) डेंटल संस्थानों और डेंटल प्रोफेशनल्स को रेगुलेट करने के लिए नीतियां बनाना, (ii) स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित मानव संसाधन और इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी जरूरतों का मूल्यांकन करना, (iii) यह सुनिश्चित करना कि राज्य की डेंटल काउंसिल्स बिल के रेगुलेशंस का पालन कर रही हैं, (iv) निजी डेंटल संस्थानों और डीम्ड विश्वविद्यालयों, जोकि बिल के अंतर्गत रेगुलेट होते हैं, में अधिकतम 50% सीटों के लिए फीस निर्धारित करने हेतु दिशानिर्देश बनाना। 
     
  • स्वायत्त बोर्ड्स: बिल एनडीसी की निगरानी में कुछ स्वायत्त बोर्डों का गठन करता है। प्रत्येक बोर्ड में प्रेज़िडेंट और चार सदस्य होंगे जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी। ये बोर्ड हैं: (i) अंडरग्रैजुएट डेंटल एजुकेशन बोर्ड, (iiपोस्ट ग्रैजुएट डेंटल डेंटल एजुकेशन बोर्ड(iiiडेंटल एसेसमेंट और रेटिंग बोर्ड, और (iv) एथिक्स और डेंटल रजिस्ट्रेशन बोर्ड। 

मसौदा बिल पर टिप्पणियां 20 फरवरी, 2020 तक आमंत्रित हैं। 

कैबिनेट ने राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग बिल, 2019 में संशोधनों को मंजूर किया 

केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग बिल, 2019 में संशोधनों को मंजूर किया। [30] इन संशोधनों का विवरण पब्लिक डोमेन में उपलब्ध नहीं है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन संशोधनों में होम्योपैथी शिक्षा के क्षेत्र में जरूरी रेगुलेटरी सुधारों को सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।

राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग बिल 2019 को राज्यसभा में 7 जनवरी, 2019 को पेश किया गया था। [31] बिल केंद्रीय होम्योपैथी काउंसिल एक्ट, 1973 को रद्द करता है और होम्योपैथी चिकित्सा की शिक्षा और प्रैक्टिस के रेगुलेशन का प्रावधान करता है। 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी कमिटी ने (चेयरपर्सनप्रो. राम गोपाल यादव) 27 नवंबर, 2019 को बिल पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। [32] 

कमिटी ने आयोग की स्थापना, अपील प्रक्रिया, फीस के रेगुलेशन और आयोग के अंतर्गत गठित स्वायत्त बोर्ड्स के संबंध में अनेक सुझाव दिए। 

बिल पर अधिक विवरण के लिए कृपया  देखें  

कैबिनेट ने राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग बिल, 2019 में संशोधनों को मंजूर किया 

केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग बिल, 2019 में संशोधनों को मंजूर किया। [33] इन संशोधनों का विवरण पब्लिक डोमेन में उपलब्ध नहीं है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन संशोधनों के जरिए आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा शिक्षा के क्षेत्रों में जरूरी रेगुलेटरी सुधारों को सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। 

राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग बिल, 2019 को 7 जनवरी, 2019 को राज्यसभा में पेश किया गया। [34]  बिल केंद्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली काउंसिल एक्ट, 1970 को रद्द करता है और आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा की शिक्षा और प्रैक्टिस के रेगुलेशन का प्रावधान करता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी कमिटी (चेयरपर्सनप्रो. राम गोपाल यादव) ने 27 नवंबर, 2019 को बिल पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। [35]  कमिटी ने आयोग की स्थापना, अपील प्रक्रिया, फीस के रेगुलेशन और आयोग के अंतर्गत गठित स्वायत्त बोर्ड्स के संबंध में अनेक सुझाव दिए। 

बिल पर अधिक विवरण के लिए कृपया  देखें  

 

पर्यावरण एवं वन

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

वेटलैंड्स (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2019 को लागू करने से संबंधित दिशानिर्देश जारी

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वेटलैंड्स (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2019 को लागू करने से संबंधित दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया। [36]  इन नियमों में वेटलैंड्स के संरक्षण हेतु विभिन्न निकायों की स्थापना का प्रावधान है और इसमें उनकी शक्तियां एवं कार्यों को स्पष्ट किया गया है। [37]

दिशानिर्देश राज्य/केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) के प्रशासनों को नियमों को लागू करने के संबंध में सहयोग देते हैं। इन नियमों में वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) के प्रबंधन और प्रशासनिक मामलों से संबंधित दिशानिर्देश हैं। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं

  • वेटलैंड अथॉरिटी की भूमिका:  वेटलैंड्स नियमों के अनुसार, राज्य में वेटलैंड्स अथॉरिटी राज्य/यूटी में सभी वेटलैंड अथॉरिटीज़ के लिए विशिष्ट एक नोडल अथॉरिटी है। अथॉरिटी के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) राज्य/यूटी के सभी वेटलैंड्स की एक सूची तैयार करना और नियमों के अंतर्गत रेगुलेशंस के लिए वेटलैंड्स का सुझाव देना, (ii) जिन गतिविधियों को रेगुलट किया जाना है और अधिसूचित वेटलैंड्स में किन गतिविधियों की अनुमति है, उनकी एक व्यापक सूची बनाना, और (iii) संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियों को वेटलैंड्स के संरक्षण और सतत प्रबंधन के संबंध में जरूरी निर्देश देना।
     
  • प्रतिबंधित गतिविधियांदिशानिर्देशों में ऐसी गतिविधियों की सूची दी गई है जोकि वेटलैंड्स में प्रतिबंधित हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) उद्योग लगाना और मौजूदा उद्योगों का विस्तार, (ii) ठोस अपशिष्ट या उद्योगों और मानव बस्तियों से अपशिष्टों को बहाना, और (iii) अतिक्रमण या गैर वेटलैंड्स उपयोग हेतु वेटलैंड्स को बदलना। 
     
  • एकीकृत प्रबंधन योजनादिशानिर्देशों में सुझाव दिया गया है कि राज्य/यूटी प्रशासन प्रत्येक अधिसूचित वेटलैंड के प्रबंधन के लिए योजना तैयार करे। योजना एक ऐसे दस्तावेज को कहा गया है जोकि: (i) वेटलैंड के उपयोग हेतु रणनीतियों और कार्रवाइयों को स्पष्ट करता है, (ii) वेटलैंड्स की इकोलॉजिकल प्रकृति में बदलाव का पता लगाने के लिए निगरानी के महत्व के बारे में बताता है, और (iii) रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और नीतिगत प्रतिबद्धताओं का अनुपालन सुनिश्चित करता है। 
     
  • उल्लंघन: वेटलैंड्स अथॉरिटीज़ यह सुनिश्चित करती हैं कि वेटलैंड्स नियम और दूसरे संबंधित अधिनियम, नियम और रेगुलेशंस का पालन किया जा रहा है। वेटलैंड्स या उसके प्रभावी जोन की सीमा (राज्य/यूटी प्रशासन) के भीतर कोई प्रतिबंधित या रेगुलेटेड गतिविधियों को वेटलैंड्स नियम का उल्लंघन माना जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर पर्यावरण (संरक्षण) एक्ट, 1986 के अंतर्गत सजा हो सकती है। 

सैंड माइनिंग के प्रवर्तन और निगरानी संबंधी दिशानिर्देश जारी

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने सैंड माइनिंग के प्रवर्तन और निगरानी संबंधी दिशानिर्देश जारी किए। [38]  यह स्थायी रेत प्रबंधन दिशानिर्देश, 2016 का अनुपूरक है जोकि देश में सैंड माइनिंग के प्रबंधन पर केंद्रित है। अवैध सैंड माइनिंग से संबंधित मामलों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा जारी किए गए विभिन्न आदेशों को ध्यान में रखते हुए दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं।

दिशानिर्देश के उद्देश्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) देश में सैंड माइनिंग को रेगुलेट करना, (ii) अवैध लैंड माइनिंग को रोकना, (iii) सैंड माइनिंग की निगरानी के लिए आईटी- एनेबल्ड सेवाओं और तकनीक का इस्तेमाल, और (iv) पर्यावरणीय मंजूरियों के बाद निगरानी को सुनिश्चित करना। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट:  दिशानिर्देशों में खनन की अनुमति या प्रतिबंध वाले क्षेत्रों को चिन्हित करने की प्रक्रियाओं का प्रावधान है। उसमें जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार करने से संबंधित दिशानिर्देशों का प्रावधान है जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) खनन लीज देने से पहले रिपोर्ट तैयार करना, और (ii) पर्यावरणीय एवं सामाजिक कारकों के आधार पर माइनिंग और नो माइनिंग क्षेत्रों को स्पष्ट करना।
     
  • अवैध खनन: सभी रेगुलेटरी प्रक्रियाओं और नीतियों के बावजूद, अवैध खनन के मामले और नियमित निगरानी की जरूरत होती है। दिशानिर्देशों में सुझाव दिया गया है कि साइट्स पर मानवरहित कृत्रिम वाहनों या ड्रोन्स का प्रयोग करते हुए दूर से नजर रखी जा सकती है। 
     
  • ड्रोन का उपयोग मात्रा का विश्लेषण करने और भूमि उपयोग पर निगरानी रखने के लिए किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त दिशानिर्देश नाइट-विज़न ड्रोन के माध्यम से खनन गतिविधियों की रात में निगरानी का प्रस्ताव करते हैं। अवैध खनन के कारण होने वाले पर्यावरणीय नुकसान का आकलन जिला प्रशासन द्वारा गठित एक कमिटी द्वारा किया जाएगा।
     
  • पर्यावरणीय मंजूरियां: संभावित पर्यावरणीय प्रभावों पर विचार करने के बाद रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ द्वारा खनन के लिए मंजूरी दी जाती है। हालांकि यह देखा गया है कि अक्सर लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) एक ऐसे स्थान के लिए दिया जाता है जहां पर्यावरण के लिहाज से खनन नहीं किया जाना चाहिए। दिशानिर्देशों में प्रावधान है कि एलओआई को उन स्थानों के लिए प्रदान किया जाना चाहिए जहां पर्यावरण और आस-पास के लोगों पर कम से कम असर होने की आशंका है। 

 

वाणिज्य और उद्योग

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

राष्ट्रीय स्टार्टअप एडवाइजरी काउंसिल का गठन

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्टार्टअप एडवाइजरी काउंसिल के गठन की अधिसूचना दी। [39] काउंसिल स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए जरूरी उपायों पर सरकार को सलाह देगी। परिषद के कार्यों में शामिल हैं: (iसभी क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देना(iiरेगुलेटरी अनुपालन और लागत को कम करनाऔर (iiiस्टार्टअप्स को आसानी से पूंजी उपलब्ध करना।

काउंसिल की अध्यक्षता वाणिज्य और उद्योग मंत्री करेंगे। परिषद के गैर-आधिकारिक सदस्यों में शामिल होंगे: (iसफल स्टार्टअप के अधिकतम 10 संस्थापक(iiउद्योग संघों के अधिकतम छह सदस्यऔर (iiiइनक्यूबेटर्स और एसिलेटर्स के इंटरेस्ट्स का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकतम छह सदस्य। वे दो साल तक या अगले आदेशों तकजो भी पहले होअपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। पदेन सदस्यों में निकायों से नामांकित व्यक्ति जैसे नीति आयोगराजस्व विभाग और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय शामिल होंगे।

 

रक्षा

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने 5,100 करोड़ रुपए की लागत से खरीद को मंजूरी दी 

डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने सशस्त्र बलों के लिए 5,100 करोड़ रुपए की लागत से उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी। [40]  इस तरह की खरीद स्वदेशी स्रोतों से की जाएगी। इस राशि से रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा थलसेना के लिए डिजाइन और भारत में निर्मित इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम्स खरीदे जाएंगे।

काउंसिल ने रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) में इनोवेशंस फॉर डिफेंस एक्सिलेंस (आईडेक्स) के समावेश को भी मंजूरी दी। आईडेक्स का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में तकनीक के विकास को बढ़ावा देना है। इसके लिए अनुसंधान संस्थानों, शिक्षाविदों, उद्योग और स्टार्टअप्स को फंडिंग या अनुदान दिए जाएंगे। [41] डीपीपी में आईडेक्स के समावेश से सशस्त्र बलों के लिए उन संस्थाओं द्वारा  पूंजीगत खरीद के नए आयाम खुलेंगे जो आईडेक्स में संलग्न हैं।  

 

संचार

Saket Surya (saket@prsindia.org)

ट्राई ने ट्रैफिक मैनेजमेंट प्रैक्टिसेज़ और नेट न्यूट्रिलिटी के लिए मल्टी-स्टेकहोल्डर बॉडी पर विचार मांगे 

भारतीय टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (ट्राई) ने ट्रैफिक मैनेजमेंट प्रैक्टिसेज़ और नेट न्यूट्रिलिटी के लिए मल्टी स्टेकहोल्डर बॉडी पर परामर्श पत्र जारी किया। [42] नेट न्यूट्रिलिटी का अर्थ है, एक्सेस होने वाले कंटेंट, इस्तेमाल होने वाले प्रोटोकॉल्स या तैनात किए जाने वाले यूजर एक्विपमेंट की परवाह किए बिना इंटरनेट का गैर भेदभावकारी एक्सेस।

इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर टेलीकॉम नेटवर्क्स में ट्रैफिक के कन्जेशन के प्रबंधन के लिए ट्रैफिक मैनेजमेंट प्रैक्टिसेज़ (टीएमपी) जैसी विभिन्न प्रैक्टिसेस को तैनात कर सकते हैं। लेटेंसी सेंसिटिव ट्रैफिक को प्राथमिकता देने के लिए भी टीएमपी की जरूरत पड़ सकती है। उदाहरण के लिए इंटरनेट टेलीफोनी में यह आवश्यक है कि अच्छी वॉयस क्वालिटी प्राप्त करने के लिए नियमित अंतराल पर ऑडियो डेटा दिया जाए। ऑडियो डेटा की अनियमित डिलीवरी से यूजर को खराब आवाज सुनाई देती है। टीएमपी में कुछ प्रतिबंध भी लागू हो सकते हैं जैसे कंटेंट की श्रेणी और प्रकृति के आधार पर इंटरनेट ट्रैफिक पर प्रतिबंध। 

ट्राई ने कहा कि इनमें से कुछ नेट न्यूट्रिलिटी के लिहाज चिंता का विषय हो सकते हैं और इसे सामान्य रूप से लागू नहीं किया जाना चाहिएक्योंकि नेट न्यूट्रिलिटी के लिए सभी प्रकार के ट्रैफिक से साथ एक समान व्यवहार किया जाना चाहिए। कुछ टीएमपी विशिष्ट स्थितियों जैसे कि अधिक ट्रैफिक की स्थिति के लिए जरूरी हो सकते हैं। टीएमपी के अंतर्गत सर्विस प्रोवाइडर द्वारा किसी भी प्रतिबंध या हस्तक्षेप को आनुपातिक, अस्थायी और पारदर्शी होना चाहिए। इसलिए विभिन्न टीएमपी की तर्कशीलता को निर्धारित करने और ऐसी प्रैक्टिसेज़ के बारे में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक फ्रेमवर्क अपनाया जाना चाहिए।

नेट न्यूट्रिलिटी के सिद्धांतों की निगरानी और प्रवर्तन की चुनौतियों के मद्देनजर ट्राई द्वारा एक मल्टी-स्टेकहोल्डर बॉडी की परिकल्पना की गई है। यह निकाय दूरसंचार विभाग को नेट न्यूट्रिलिटी के सिद्धांतों की निगरानी और प्रवर्तन के बारे में सलाह और सहयोग दे सकता है। इसमें विभिन्न श्रेणियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य शामिल हो सकते हैं जैसे: (iदूरसंचार और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर(iiकंटेंट सर्विस प्रोवाइडर(iiiशिक्षाविद और अनुसंधान कर्ताऔर (ivनागरिक समाज।

ट्राई ने निम्नलिखित मामलों पर विचार मांगे हैं: (iटीएमपी के प्रकार(iiनेट न्यूट्रिलिटी के परिप्रेक्ष्य से टीएमपी का तर्क (iii) क्या ऐसे टीएमपी की अग्रिम सूची तैयार की जा सकती है या समय-समय पर अपडेट किए जाने की जरूरत होगी, (ivनेट न्यूट्रिलिटी के उल्लंघन का पता लगाने के लिए सेटअपऔर (vमल्टी-स्टेकहोल्डर बॉडी की संरचनाकार्यभूमिका और जिम्मेदारियां।

 

[1] Session Alert – Budget Session 2020, February 1, 2020,  https://www.prsindia.org/sessiontrack/session-alert/844793.

[3] Economic Survey of India 2019-2020, Ministry of Finance, January 31, 2020,  https://www.indiabudget.gov.in/economicsurvey/.

[4] “Press Note on First Advance Estimates of National Income 2019-20, Ministry of Statistics and Programme Implementation, January 7, 2020,  http://www.mospi.gov.in/sites/default/files/press_release/Presss%20note%20for%20FAE%202019-20.pdf

[5] “Consumer Price Index Numbers on Base 2012=100 for Rural, Urban and Combined for the month of December 2019, Press Release, Ministry of Statistics and Programme Implementation, January 13, 2020,  http://www.mospi.gov.in/sites/default/files/press_release/cpi_pr_13jan20.pdf.

[6] “Index Numbers of Wholesale Price in India (Base2011-12=100): Review for the month of December, 2019, Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, January 14, 2020.

[7] The Mineral Laws (AmendmentOrdinance, 2020, Ministry of Coal, January 10, 2020,  https://coal.nic.in/sites/upload_files/coal/files/curentnotices/Mineral-Laws_Amendment_Ordinance_2020.pdf.

[8] Discussion Paper Auction of Coal Mines for Sale of Coal – For Public Consultation Only, Ministry of Coal, January 14, 2020,  https://www.coal.nic.in/sites/upload_files/coal/files/curentnotices/Discussion-Paper-Auction-of-Coal-Mines.pdf.

[9] “Cabinet approves proposal for Review of FDI policy on various sectors,  Union Cabinet, Press Information Bureau, August 28, 2019,  https://pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=1583294.

[10] Order No 9/1/2018-M.V.  (part III), Ministry of Mines, January 3, 2020,  https://mines.gov.in/writereaddata/UploadFile/combinepdf06012020.pdf.

[11] Preliminary Information Memorandum for inviting Expression of Interest for strategic disinvestment of Air India Limited including AIs shareholding interest in the AIXL and AISATS, Ministry of Civil Aviation, January 27, 2020,  https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/AI_Preliminary_IM_Jan2020.pdf

[12] F.NoAV-13030/216/2016-ER (Pt 2), Ministry of Civil Aviation, January 8, 2020,  https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/Letter.pdf

[13] No.NH-37012/01/2019-H, Ministry of Road Transport and Highways, January 1, 2020,  https://morth.nic.in/sites/default/files/circulars_document/Circular%20Invit.pdf

[14] NoRT-16011/1/2018-T, Ministry of Road Transport and Highways, January 15, 2020,  https://morth.nic.in/sites/default/files/circulars_document/Letter%20VTS%20Guidelines-compressed.pdf

[15] Framework for Nirbhaya Fund, Ministry of Women and Child Development,  https://wcd.nic.in/sites/default/files/Approved%20framework%20for%20Nirbhaya%20Fund_0.pdf

[16] File NoAV-22011/4/2015-DG, Ministry of Civil Aviation, January 13, 2020,  https://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/Drone_Registration_Public_Notice_13012020.pdf

[17] FNo05-13/2014-AED VolIV, Requirements for Operation of Civil Remotely Piloted Aircraft System (RPAS), Director General of Civil Aviation, August 27, 2018,  http://dgca.nic.in/cars/D3X-X1.pdf

[18] Anuradha Bhasin vsUnion of India, Writ Petition (CivilNo1031 of 2019, Supreme Court of India, January 10, 2019,  https://main.sci.gov.in/supremecourt/2019/28817/28817_2019_2_1501_19350_Judgement_10-Jan-2020.pdf

[19] Keisham Meghachandra Singh vsThe Honble Speaker Manipur Legislative Assembly & Ors., Civil Appeal No547 of 2020, Supreme Court of India, January 21, 2019,  https://main.sci.gov.in/supremecourt/2019/27562/27562_2019_4_1501_19772_Judgement_21-Jan-2020.pdf

[20] G.S.R38(E), Gazette of India, Ministry of Law and Justice, January 17, 2020,  http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/215535.pdf

[21] Bodo-Agreement, Press Information Bureau, Ministry of Home Affairs, January 27, 2020,  https://mha.gov.in/sites/default/files/PR_2020BodoSettlementEng_27012020.pdf

[22] " National Strategy for Financial Inclusion (NSFI): 2019-2024", Press Releases, Reserve Bank of India, January 10, 2020,  https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=49116.

[23] Supervisory Action Framework for Primary (UrbanCo-operative Banks (UCBs), Notifications, Reserve Bank of India, January 6, 2020,  https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=11779.

[24] Supervisory Action Framework for Urban Co-operative Banks (UCBs), Notifications, Reserve Bank of India, November 27, 2014,  https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=9364.

[25] Reporting of Large Exposures to Central Repository of Information on Large Credits (CRILC) – UCBs, Notifications, Reserve Bank of India, January 16, 2020,  https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=11790.

[26] Guidelines on Standard Individual Health Insurance Product, Insurance Regulatory Development Authority of India, January 1, 2020,  https://www.irdai.gov.in/admincms/cms/uploadedfiles/Guidelines%20on%20Standard%20Individual%20Health%20Insurance%20Product.pdf.

[27] “Cabinet approves The Medical Termination of Pregnancy (AmendmentBill, 2020, Cabinet, Press Information Bureau, January 29, 2020

[28] The Medical Termination of Pregnancy Act, 1971, Ministry of Health and Family Welfare,  https://mohfw.gov.in/acts-rules-and-standards-health-sector/acts/mtp-act-1971.

[29] The Draft National Dental Commission Bill, 2020, Ministry of Health and Family Welfare, January 28, 2020,  https://mohfw.gov.in/newshighlights/seeking-comments-draft-national-dental-commission-bill-2020.

[30] “Cabinet approves official amendments in the National Commission for Homoeopathy Bill, 2019, Cabinet, Press Information Bureau, January 29, 2020.  

[31] The National Commission for Homoeopathy Bill, 2019, Ministry of AYUSH, January 7, 2019,  https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Nationl%20commission%20for%20Homoeopathy%20bill%2C%202019.pdf.

[32] Report No116, Standing Committee on Health and Family Welfare, The National Commission for Homoeopathy Bill, 2019, Rajya Sabha, November 27, 2019,  https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Nationl%20commission%20for%20Homoeopathy%20bill%2C%202019.pdf.

[33] “Cabinet approves Proposal for Official Amendments in the National Commission for Indian System of Medicine Bill, 2019, Cabinet, Press Information Bureau, January 29, 2020.  

[34] The National Commission for Indian System of Medicine Bill, 2019, Ministry of AYUSH, January 7, 2019,  https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Nationl%20commission%20for%20Indian%20system%20of%20medicine%20bill%2C%202019.pdf.

[35] Report No115, Standing Committee on Health and Family Welfare, The National Commission for Indian System of Medicine Bill, 2019, Rajya Sabha, November 27, 2019,  https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/SCR%20-%20National%20Commission%20for%20Indian%20System%20of%20Medicine%20Bill%2C%202019.pdf.

[36] Guidelines for implementing Wetlands (Conservation and ManagementRules, 2019, Ministry of Environment, Forests and Climate Change, January 6, 2020,  http://moef.gov.in/wp-content/uploads/2020/01/final-version-and-printed-wetland-guidelines-rules-2017-03.01.20.pdf.

[37] G.S.R1203(E), Ministry of Environment, Forests and Climate Change, September 26, 2017.

[38] Enforcement and Monitoring Guidelines for sand mining, Ministry of Environment, Forests and Climate Change, January 2020,  http://moef.gov.in/wp-content/uploads/2020/01/EM_Guidelines_Sand-Mining.pdf.

[39] Notification noFNo5(24)/2019, Ministry of Commerce and Industry, January 21, 2020

[40] "Defence Acquisition Council, chaired by Raksha Mantri Shri Rajnath Singh, approves several procurement proposals to boost Make in India’", Press Information Bureau, Ministry of Defence, January 21, 2020

[41] "Innovations for Defence Excellence", Department of Defence Production, Ministry of Defence,  https://www.makeinindiadefence.gov.in/admin/writereaddata/upload/files/Complete%20document%20on%20iDEX_1.pdf.

[42] Consultation  Paper on Traffic Management Practices (TMPs) and Multi-Stakeholder Body for Net Neutrality, Telecom Regulatory Authority of India, January 2, 2020,  https://main.trai.gov.in/sites/default/files/CP_02012020_0.pdf.

 

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