अप्रैल 2020

अप्रैल 2020

इस अंक की झलकियां

भारत में कोविड-19: अप्रैल के अंत तक मामलों की संख्या 33,000 के पार हुई

30 अप्रैल, 2020 तक भारत में कोरोनावायरस रोग 2019 के 33,610 पुष्ट मामले थे। इनमें से 8,373 का इलाज हो चुका था/डिस्चार्ज कर दिए गए हैं और 1,075 की मृत्यु हो गई है।

कोविड-19 की रोकथाम के लिए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाया गया

लॉकडाउन को 21 दिन की शुरुआती अवधि से बढ़ा दिया गया (जोकि 25 मार्च, 2020 से शुरू हुआ था)। इस अवधि के दौरान केवल अनिवार्य सेवाओं और वस्तुओं की अनुमति है, और 20 अप्रैल से कुछ राहत दी गई है। 

महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को जारी किया गया

अध्यादेश महामारी रोग एक्ट, 1897 में संशोधन करता है ताकि महमारियों से जूझने वाले स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को संरक्षण प्रदान किया जा सके। अध्यादेश इन बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार की शक्तियों में विस्तार करता है। 

सांसदों और मंत्रियों के मेहनताने में कटौती करने, एमपीलैड को रद्द करने वाला अध्यादेश जारी

मुख्य प्रावधानों में सांसदों और मंत्रियों के वेतन में 30की कटौती, सांसदों के कार्यालय और निर्वाचन क्षेत्र संबंधी भत्तों तथा मंत्रियों के सत्कार भत्ते में कटौती और दो वर्षों के लिए एमपीलैड को रद्द करना शामिल है। 

कोविड-19 के कारण आर्थिक स्थितियों से निपटने के लिए आरबीआई ने अनेक कदम उठाए

आरबीआई ने रिवस्र रेपो में कटौती, वित्तीय संस्थानों नाबार्ड, सिडबी और एनएचबी के पुनर्वित्तपोषण, बैंकों के लाभांश भुगतान और बैंकों के लिए लिक्विडिटी कवरेज रेशो में कटौती संबंधित उपायों की घोषणा की। 

2019-20 की चौथी तिमाही में रीटेल मुद्रास्फीति 6.7% पर

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति जनवरी 2020 में 7.6से गिरकर मार्च 2020 में 5.9हो गई। खाद्य मुद्रास्फाति इस तिमाही में ऊंची बनी रही, हालांकि जनवरी 2020 में 13.6से गिरकर मार्च 2020 में 8.8हो गई। 

केंद्र को स्वास्थ्य शिक्षा और प्रैक्टिस को रेगुलेट करने की अनुमति देने वाले अध्यादेश जारी

केंद्र सरकार को भारतीय औषधि प्रणाली की शिक्षा और प्रैक्टिस को रेगुलेट करने की अनुमति देने वाला एक अध्यादेश जारी किया गया। दूसरे अध्यादेश में होम्योपैथिक शिक्षा और प्रैक्टिस के रेगुलेशन को एक साल बढ़ाने का प्रावधान किया गया। 

ड्राफ्ट बिजली (संशोधन) बिल, 2020 जारी

बिल में यह प्रस्तावित है कि बिजली के टैरिफ में सप्लाई की लागत प्रदर्शित होनी चाहिए और इसे सब्सिडी के घटक को अलग रखना चाहिए। यह भी कि सरकारों को उपभोक्ताओं को सीधी सब्सिडी देनी चाहिए। ड्राफ्ट बिल एक बिजली कॉन्ट्रैक्ट प्रवर्तन अथॉरिटी का प्रस्ताव रखता है।

औद्योगिक संबंध संहिता, 2019 पर स्टैंडिंग कमिटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

कमिटी के सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं- औद्योगिक विवाद उठाने की समय सीमा को एक वर्ष करना, और पब्लिक युटिलिटी सर्विसेज़ जैसे बिजली, पानी और अन्य अनिवार्य सेवाओं में कार्यरत लोगों की हड़ताल पर लगे प्रतिबंध को कम करना। 

डायग्नॉस्टिक किट्स और कुछ फार्मास्युटिकल्स से संबंधित निर्यात नीतियों में संशोधन

पैरासीटामोल और एरिथ्रोमाइसिन सॉल्ट्स जैसे कुछ फार्मास्युटिकल्स को मुक्त निर्यात की अनुमति दी गई। डायग्नॉस्टिक किट्स के निर्यात को प्रतिबंधित किया गया। हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन के निर्यात पर कुछ अपवादों के साथ प्रतिबंध लगाया गया।

सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद संशोधन नियम, 2020 अधिसूचित

नियमों ने पैकेज की परिभाषा में संशोधन किए और तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग पर टेक्टुअल और पिक्टोरियल स्वास्थ्य चेतावनियों की शर्तों में परिवर्तन किए। 

आईएमडी ने दक्षिण पश्चिमी मानसून वर्ष 2020 के लिए पूर्वानुमान जारी किया

मानसून की मौसमी वर्षा (जून-सितंबर 2020 की अवधि) +/+- 5% की त्रुटि के साथ लंबी अवधि के औसत (88 सेमी) का 100% होने का अनुमान है। 96-104% के बीच बारिश होने पर बारिश को सामान्य माना जाता है।
 

समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

Saket Surya (saket@prsindia.org)

2019-10 की चौथी तिमाही में रीटेल मुद्रास्फीति 6.7% पर 

सीपीआई मुद्रास्फीति (आधार वर्ष2011-12, वर्ष दर वर्ष) जनवरी 2020 में 7.6की तुलना में मार्च 2020 में 5.9% हो गई (रेखाचित्र 1)।[1] खाद्य मुद्रास्फीति पूरी तिमाही में उच्च रही, लेकिन जनवरी 2020 में 13.6की तुलना में गिरकर मार्च 2020 में 8.8% हो गई। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) रीटेल स्तर पर वस्तुओं की कीमत में परिवर्तन का मूल्यांकन करती है। सीपीआई बास्केट में परिवारों में सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं शामिल होती हैं, जैसे खाद्य सामग्री, ईंधन, कपड़े, आवास और स्वास्थ्य सेवाएं।

डब्लूपीआई मुद्रास्फीति (आधार वर्ष2011-12, वर्ष दर वर्ष) जनवरी 2020 में 3.6से गिरकर मार्च 2020 में 1हो गई।[2]  थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) लेनदेन के शुरुआती चरण के स्तर पर वस्तुओं की थोक बिक्री के मूल्यों में परिवर्तन का मूल्यांकन करता है।

रेखाचित्र 1: 2019-20 की चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति की प्रवृत्ति (परिवर्तन का %, वर्ष दर वर्ष)

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SourcesMinistry of Statistics and Programme Implementation; Ministry of Commerce and Industry; PRS.

 

कोविड-19

30 अप्रैल, 2020 को भारत में कोविड-19 के 33,610 पुष्ट मामले हैं।[3]  इनमें से 8,373 का इलाज हो चुका है/वे डिस्चार्ज हो गए हैं और 1,075 की मृत्यु हो गई है।3  देश और विभिन्न राज्यों में रोजाना के मामलों के विवरण के लिए कृपया यहां देखें  

कोविड-19 के फैलने के साथ केंद्र सरकार ने इसके प्रकोप की रोकथाम के लिए अनेक नीतिगत फैसलों तथा प्रभावित होने वाले लोगों और व्यापारों की मदद के लिए वित्तीय उपायों की घोषणा की। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जारी अधिसूचनाओं के लिए कृपया यहां देखें। इस संबंध में अप्रैल 2020 की मुख्य घोषणाएं निम्नलिखित हैं 

महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश, 2020 जारी 

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

कोविड-19 के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की घटनाओं के मद्देनजर महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को जारी किया गया।[4],[5] अध्यादेश महामारी रोग एक्ट, 1897 में संशोधन करता है। एक्ट में खतरनाक महामारियों की रोकथाम से संबंधित प्रावधान हैं। अध्यादेश इस एक्ट में संशोधन करता है जिससे महामारियों से जूझने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को संरक्षण प्रदान किया जा सके, तथा ऐसी बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार की शक्तियों में विस्तार करता है। अध्यादेश की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अध्यादेश निर्दिष्ट करता है कि कोई भी व्यक्ति निम्नलिखित नहीं कर सकता: (i) स्वास्थ्य सेवा कर्मी के खिलाफ हिंसक कार्रवाई करना या ऐसा करने के लिए किसी को उकसाना, या (ii) महामारी के दौरान किसी संपत्ति को नुकसान या क्षति पहुंचाना, या ऐसा करने के लिए किसी को उकसाना। इस प्रावधान का उल्लंघन करने पर तीन महीने से लेकर पांच वर्ष तक की कैद या 50,000 रुपए से लेकर दो लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। अगर स्वास्थ्य सेवा कर्मी के खिलाफ हिंसक कार्रवाई गंभीर क्षति पहुंचाती है, तो अपराध करने वाले व्यक्ति को छह महीने से लेकर सात वर्ष तक की कैद हो सकती है और एक लाख रुपए से लेकर पांच लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। 

  • अध्यादेश स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को ऐसे व्यक्तियों के रूप में परिभाषित करता है जिन पर अपने कर्तव्यों का पालन करने के दौरान महामारियों के संपर्क में आने का जोखिम है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) पब्लिक और क्लिनिकल स्वास्थ्यसेवा प्रदाता जैसे डॉक्टर और नर्स, (ii) ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसे एक्ट के अंतर्गत बीमारी के प्रकोप की रोकथाम के लिए सशक्त किया गया है, और (iii) अन्य कोई व्यक्ति जिसे राज्य सरकार ने ऐसा करने के लिए नामित किया है।

  • ‘हिंसक कार्य’ में ऐसे कोई भी कार्य शामिल हैं जो स्वास्थ्य सेवा कर्मियों के खिलाफ किए गए हैं: (i) जीवन या काम की स्थितियों को प्रभावित करने वाला उत्पीड़न, (ii) जीवन को नुकसान, चोट, क्षति या खतरा पहुंचाना, (iii) कर्तव्यों का पालन करने में बाधा उत्पन्न करना, और (iv) स्वास्थ्य सेवा कर्मी की संपत्ति या दस्तावेजों को नुकसान या क्षति पहुंचाना। संपत्ति में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट, (ii) क्वारंटाइन केंद्र, (iii) मोबाइल मेडिकल यूनिट, और (iv) ऐसी अन्य संपत्ति जिससे स्वास्थ्य सेवा कर्मी का महामारी से संबंधित कोई प्रत्यक्ष हित जुड़ा हो। 

अध्यादेश के विस्तृत सारांश के लिए कृपया यहां देखें

सांसदों और मंत्रियों के वेतन और अन्य भत्तों में कटौती 

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

कोविड-19 से जूझने में केंद्र के संसाधनों को पूरा करने के लिए सरकार ने सांसदों और मंत्रियों के मेहनताने में संशोधन किया है:

  • सांसदों का मेहनताना: सांसदों का वेतन, भत्ता और पेंशन एक्ट, 1954 में संशोधन के लिए एक अध्यादेश जारी किया गया जोकि सांसदों के वेतन में 30% की कटौती करता है (एक लाख रुपए से 70,000 रुपए प्रति माह)।[6] सरकार ने सांसदों के कुछ भत्तों में कटौती के लिए 1954 के एक्ट के अंतर्गत कुछ नियमों में भी संशोधन किए हैं।[7] इनमें निर्वाचन क्षेत्र का भत्ता (70,000 रुपए से 49,000 रुपए प्रति माह) और कार्यालय भत्ता (60,000 से 54,000 प्रति माह) शामिल हैं।

  • सरकार ने दो वर्षों के लिए एमपीलैड को भी रद्द कर दिया है।[8]  इस योजना की मदद से सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्रों में विकास संबंधी कार्य कर सकते हैं।

  • मंत्रियों का मेहनताना: इसके अतिरिक्त एक दूसरा अध्यादेश भी जारी किया गया जिसके अंतर्गत एक वर्ष के लिए मंत्रियों के सत्कार भत्ते में 30की कटौती की गई। इसके लिए मंत्रियों का वेतन और भत्ते एक्ट, 1952 में संशोधन किया गया (सत्कार भत्ता आगंतुकों के सत्कार पर खर्च करने के लिए दिया जाता है)।[9] इस संशोधन के बाद प्रधानमंत्री (3,000 रुपए से 2,100 रुपए प्रति माह), कैबिनेट मंत्री (2,000 रुपए से 1,400 रुपए), राज्य मंत्री (1,000 रुपए से 700 रुपए), और डेप्युटी मंत्री (600 रुपए से 420 रुपए) के सत्कार भत्ते में कटौती हुई।

  • उल्लेखनीय है कि 1952 के एक्ट में मंत्रियों का वेतन, और दैनिक एवं निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, 1954 के एक्ट के अंतर्गत सांसद के लिए निर्दिष्ट दरों के अनुसार ही है। इसी प्रकार दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों (राज्यसभा के अध्यक्ष को छोड़कर) पर भी ऐसे ही प्रावधान लागू होते हैं जोकि दूसरे एक्ट्स से रेगुलेट होते हैं। इसीलिए सांसदों के वेतन और निर्वाचन क्षेत्र भत्ते में किए गए संशोधन मंत्रियों, लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तथा राज्यसभा के उपाध्यक्ष पर भी लागू होंगे। राज्यसभा अध्यक्ष का वेतन अध्यादेश से प्रभावित नहीं होगा (चार लाख रुपए प्रति माह)। 

अध्यादेश के पीआरएस सारांश के लिए कृपया यहां और यहां देखें। सांसदों के वेतन और सुविधाओं में कटौती के प्रभावों पर अधिक जानकारी के लिए कृपया यहां देखें 

लॉकडाउन 3 मई, 2020 तक बढ़ा

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

कोविड-19 की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटी (एनडीएमए) ने 21 दिन के राष्ट्रीय लॉकडाउन को 3 मई, 2020 तक बढ़ा दिया।[10]  इन उपायों को आपदा प्रबंधन एक्ट, 2005 के प्रावधानों के अंतर्गत जारी किया गया। एक्ट एनडीएमए और राज्य स्तरीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटीज़ की स्थापना करता है और उन्हें बीमारियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए शक्तियां प्रदान करता है। एक्ट राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की गठन भी करता है जोकि एनडीएमए के कार्यों में सहायता प्रदान करती है। 

केंद्रीय गृह सचिव (जोकि राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के अध्यक्ष हैं) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लॉकडाउन को आगे बढ़ाने से संबंधित दिशानिर्देश जारी किए।[11]  20 अप्रैल, 2020 के बाद कुछ राहत दी गई है। जिन गतिविधियों पर 20 अप्रैल, 2020 के बाद भी प्रतिबंध जारी रहेगा, वे इस प्रकार हैं: (i) स्वास्थ्यकर्मियों के लिए और सुरक्षा उद्देश्यों के अतिरिक्त सभी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्राएं, (ii) ट्रेनों, बसों और टैक्सियों में पैसेंजर यात्रा, (iii) औद्योगिक गतिविधियां और हॉस्पिटैलिटी सेवाएं (केवल अनुमत सेवाओं को छोड़कर), और (iv) सभी शिक्षण संस्थान। 

जिन गतिविधियों के लिए 20 अप्रैल, 2020 के बाद अनुमति है, वे इस प्रकार हैं: (i) सभी स्वास्थ्य सेवाएं जैसे अस्पताल, क्लिनिक और वेट्स, (ii) कृषि कार्य, फिशरीज़ और बागान, (iii) पब्लिक युटिलिटीज़ जैसे एलपीजी और पोस्टल सेवाओं का प्रावधान, (iv) वित्तीय संस्थान जैसे गैर वित्तीय बैंकिंग संस्थान, बैंक और एटीएम, (v) केवल अनिवार्य वस्तुओं के लिए ई-कॉमर्स, (vi) औद्योगिक गतिविधियां जैसे तेल और गैस रिफाइनरीज़ और मैन्यूफैक्चरिंग और (viiम्यूनिसिपल कॉरपोरेशन और म्यूनिसिपैलिटी की सीमाओं के बाहर सभी दुकानें (मॉल्स में स्थित दुकानों के अतिरिक्त), और उन सीमाओं के भीतर आने वाली दुकानें (मार्केट कॉम्प्लैक्स और मॉल्स की दुकानों को छोड़कर)।[12]  

मंत्रालय ने उन प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, विद्यार्थियों और दूसरे निराश्रित लोगों की आवाजाही की अनुमति दी है, जिनमें बीमारी के लक्षण नहीं हैं।[13]  राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसे लोगों को रिसीव करने और उन्हें भेजने के लिए एक स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल बनाना होगा और एक नोडल अथॉरिटी को नामित करना होगा। एक राज्य से दूसरे राज्य में आवाजाही की स्थिति में प्रवासियों को भेजने और उन्हें रिसीव करने वाले राज्य आपस में सलाह मशविरा कर सकते हैं और सड़क से आवाजाही के लिए परस्पर राजी हो सकते हैं।  

इसके अतिरिक्त मंत्रालय ने राज्य के भीतर प्रवासी श्रमिकों की आवाजाही को भी मंजूरी दी है, अगर किसी राज्य में श्रमिक काम करने के कारण फंस गए हैं।[14] जिन गतिविधियों के लिए आवाजाही की अनुमति दी गई है, वे हैं औद्योगिक कार्य, मैन्यूफैक्चरिंग और निर्माण। अगर उन मजदूरों में बीमारी के लक्षण नहीं हैं और वे काम करने के इच्छुक हैं तो राज्य सरकारें उनकी स्किल मैपिंग कर सकती हैं और उन्हें वर्कसाइट्स पर भेज सकती हैं।

राज्य और केंद्र शासित प्रदेश केंद्र सरकार के लॉकडाउन संबंधी दिशानिर्देशों का उल्लंघन नहीं कर सकतें। हालांकि वे इन्हें और कड़ाई से लागू कर सकते हैं।

कोविड-19 के इमरजेंसी रिस्पांस और स्वास्थ्य प्रणाली के तैयारी पैकेज के लिए 15,000 करोड़ रुपए मंजूर

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

केंद्र सरकार ने कोविड-19 के इमरजेंसी रिस्पांस और स्वास्थ्य प्रणाली के तैयारी पैकेज के लिए 15,000 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है।[15] इसमें से 7,774 करोड़ रुपए कोविड-19 के तत्काल रिस्पांस के लिए खर्च किए जाएंगे। शेष राशि को अगले एक से चार वर्षों के लिए मध्यम अवधि के सहयोग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इस राशि का इस्तेमाल निम्नलिखित के लिए किया जाएगा: (i) कोविड-19 के निदान और उपचार सुविधाओं को विकसित करने हेतु, (ii) अनिवार्य चिकित्सा उपकरण और दवाओं की खरीद, और (iii) केंद्र और राज्य स्तरीय स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने हेतु ताकि भविष्य में बीमारियों की रोकथाम और उनके लिए तैयारियां की जा सकें। 

कोविड-19 के कारण आर्थिक स्थितियों को काबू में करने के लिए आरबीआई ने अनेक अतिरिक्त उपाय किए

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कोविड-19 के कारण उत्पन्न वित्तीय तनाव को कम करने के लिए अतिरिक्त उपायों की घोषणा की।[16]   उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने वित्तीय राहत देने हेतु मार्च 2020 में कुछ उपायों की घोषणा की थी।[17],[18]   इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (iबाजार में लिक्विडिटी बढ़ाना ताकि यह सुनिश्चित हो कि वित्तीय बाजार और संस्थान सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं, (iiलोन चुकाने के लिए उधारकर्ताओं को राहत देना, और (iiiपॉलिसी (रेपो) रेट में कटौती करना। अप्रैल में कुछ अन्य बड़ी घोषणाएं की गईं जो इस प्रकार हैं:

  • पॉलिसी रेट और लिक्विडिटी मैनेजमेंट: रिवर्स रेपो रेट को 4% से घटाकर 3.75% कर दिया गया है (इस दर पर आरबीआई बैंकों से उधार लेता है)। पिछले महीने रिवर्स रेपो रेट को 4.9% से घटाकर 4किया गया था। इसके अतिरिक्त आरबीआई 50,000 करोड़ रुपए की राशि के लिए टारगेटेड लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशंस करेगी।

  • वित्तीय संस्थानों का पुनर्वित्तपोषणआरबीआई ने कहा कि सभी भारतीय वित्तीय संस्थानों, जैसे राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और राष्ट्रीय हाउसिंग बैंक (एनएचबी), को बाजार से संसाधन जुटाने में फिलहाल परेशानी हो रही है। केंद्रीय बैंक इन संस्थानों को 50,000 करोड़ रुपए की राशि प्रदान करेगा (नाबार्ड को 25,000 करोड़ रुपए, सिडबी को 15,000 करोड़ रुपए और एनएचबी को 10,000 करोड़ रुपए)।

  • बैंकिंग प्रणालीबैंकों को मार्च 2020 में समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के लाभ से लाभांश पेआउट्स नहीं करने चाहिए, जब तक कि आगे कोई निर्देश नहीं आते।[19] ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए है कि कोविड-19 के मद्देनजर बैंक अपनी क्षमता को बरकरार रखने के लिए पूंजी संरक्षित रखें और अर्थव्यवस्था को सहयोग दें। इसके अतिरिक्त सितंबर 2020 तक लिक्विडिटी कवरेज रेशो (30 दिनों के लिए कुल कैश आउटफ्लो की तुलना में उच्च क्वालिटी के लिक्विड एसेट्स का अनुपात, ताकि तनावपूर्ण स्थितियों से निपटा जा सके) को मौजूदा 100से घटाकर 80कर दिया गया है।[20]   इस अनुपात को अप्रैल 2021 में पूरी तरह से बहाल किया जाएगा। 

  • म्युचुअल फंड्स के लिए लिक्विडिटी: 50,000 करोड़ रुपए के म्युचुअल फंड्स के लिए विशेष लिक्विडिटी सुविधा की घोषणा की गई है ताकि म्यूचुअल फंड पर लिक्विडिटी का दबाव कम हो सके।[21]   यह सुविधा 27 अप्रैल से 11 मई, 2020 तक उपलब्ध है या जब तक आबंटित राशि का उपयोग किया जाता है। इस सुविधा के अंतर्गत उपलब्ध राशि को बैंकों द्वारा निम्नलिखित द्वारा म्युचुअल फंड्स की लिक्विडिटी की जरूरतों के लिए खर्च किया जाएगा(iमौजूदा लोन, या (iiम्युचुअल फंड्स के कोलेट्रल के लिए रेपोज की खरीद।

  • किसानों के लिए लोनआरबीआई ने किसानों को अल्पावधि के फसल ऋण (तीन लाख रुपए तक) पर इनरेस्ट सब्वेंशन और प्रॉम्प्ट रीपेमेंट इनसेंटिव स्कीम का लाभ देने का फैसला किया है। उन किसानों के लिए जिनके खाते 1 मार्च, 2020 और 31 मई, 2020 के बीच ड्यू हैं या ड्यू होने वाले हैं।[22]   इन योजनाओं के अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होने वाले किसानों (मत्स्य और पशुपालन करने वालों को भी) को 2% का ब्याज सबवेंशन दिया जाता है।[23] इसके अतिरिक्त समय पर लोन चुकाने पर 3% का इनसेंटिव दिया जाता है। 

आरबीआई ने केंद्र और राज्यों के लिए वेज़ और मीन्स एडवांसेंज़ की सीमाएं बढ़ाईं 

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

आरबीआई ने केंद्र और राज्य सरकारों के लिए वेज़ और मीन्स एडवांसेज़ (डब्ल्यूएमए) की सीमाओं में बढ़ोतरी की घोषणा की।[24],[25]  डब्ल्यूएमए वे अस्थायी लोन्स होते हैं जो आरबीआई द्वारा केंद्र और राज्यों को दिए जाते हैं ताकि वे अपनी निकटस्थ व्यय संबंधी जरूरतों को पूरा कर सकें और उन्हें तीन महीने के भीतर चुका देना होता है। डब्ल्यूएमए सीमाओं (कि सरकार किस सीमा तक ऋण ले सकती है) को अप्रैल-सितंबर 2020 की अवधि के लिए बढ़ा दिया गया है। इसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों को कोविड-19 से संबंधित एवं अन्य व्यय के लिए अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध करना है। 

केंद्र सरकार के लिए डब्ल्यूएमए की सीमा को अप्रैल-सितंबर 2020 के लिए 1.2 लाख करोड़ से बढ़ाकर दो लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है।[26] राज्य सरकारों के लिए इस सीमा को इसी अवधि के लिए, 31 मार्च, 2020 की निर्धारित सीमा से 60बढ़ा दिया गया है।

यात्रा प्रतिबंध बढ़ाया गया, अन्य यात्रा/परिवहन संबंधित विस्तार भी जारी

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

नागरिक उड्डयनलॉकडाउन को बढ़ाने की घोषणा के साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रा उड़ानों पर लगे प्रतिबंध को भी बढ़ाया गया।[27],[28]  नागरिक उड्डयन महानिदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि एयरलाइन्स को 4 मई2020 के बाद से टिकट बुकिंग शुरू नहीं करनी चाहिए क्योंकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसी गतिविधियां शुरू की जाएंगी।[29] नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने आदेश दिया कि 3 मई2020 से पहले लॉकडाउन की अवधि के दौरान खरीदे गए फ्लाइट टिकट्स के लिए पूरा रीफंड (कैंसिलेशन फीस को वसूले बिना) दिया जाएगा।[30]

रेलवे: लॉकडाउन को बढ़ाए जाने के बाद रेल यात्राओं पर भी 3 मार्च तक प्रतिबंध को बढ़ाया गया।[31] इससे पूर्व रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि यात्री सेवाओं की बहाली और ऐसी यात्राओं के प्रोटोकॉल पर फैसला लेना अभी बाकी है।[32]  इसके अतिरिक्त निम्नलिखित के लिए पूरा रीफंड दिया जाएगा: (i) लॉकडाउन के दौरान कैंसिल होने वाली ट्रेनों के बुक किए गए टिकट, और (ii) अब तक कैंसिल न होने वाली ट्रेनों की एडवांस बुकिंग का कैंसिल होना।

मंत्रालय ने माल ढुलाई के लिए कुछ इनसेंटिव्स की घोषणा की।[33] इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) डैमरेज, वारफेज और दूसरे सहायक प्रभार की वसूली न करना (22 मार्च से 5 मई, 2020 तक वैध), (ii) खाली कंटेनर्स और खाली फ्लैट्स के मूवमेंट पर हॉलेज चार्ज न लेना (30 अप्रैल, 2020 तक वैध), और (iii) रेक्स पर न्यूनतम दूरी पर राहत। मंत्रालय ने यह घोषणा भी की कि रेलवे ने अप्रैल 2020 में 30,000 और मई में 2020 में 1,00,000 पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट कवरऑल्स बनाने का लक्ष्य रखा है।[34]  

केंद्र सरकार ने रेलवे की कोविड-19 संबंधी कुछ गतिविधियों को वित्त पोषित करने का प्रस्ताव रखा है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) आइसोलेशन वॉर्ड बनाना, (ii) रेलवे कोचों को आइसोलेशन और क्वारंटाइन वॉर्ड्स में बदलना, (iii) सैनिटाइजेशन और सफाई, और (iv) पीपीई किट्स। इस व्यय को रेलवे के एकाउंट्स में सस्पेंस की मद में शामिल किया जाएगा। 

शिपिंगशिपिंग मंत्रालय ने भारतीय बंदरगाहों पर भारतीय सीफेरर्स के साइन-ऑन और साइन ऑफ के लिए मानक संचालन प्रोटोकॉल्स (सोप्स) जारी किए गए हैं।[35] मंत्रालय ने निम्नलिखित को भी बढ़ाया है(iसीफेरर्स के सीओसी और सांविधिक सर्टिफिकेट्स, शिप सैनिटाइजेशन सर्टिफिकेट्स और निरंतर डिस्चार्ज सर्टिफिकेट्स की वैधता, और (iiभारतीय रजिस्टर्ड शिप्स के पीरिऑडिकल सर्वे और ऑडिट्स।

सड़क परिवहनसड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय सूचना केंद्र को सलाह दी है कि वह दिल्ली/राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) को छोड़कर पूरे भारत में बीएस-IV वाहनों के सीमित रजिस्ट्रेशन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मदद करे।[36]  यह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार है जिसमें अदालत ने शहर में लॉकडाउन के खत्म होने के 10 दिनों के भीतर वाहन डीलरों के पास अधिकतम 10लंबित बीएस-IV स्टॉक के सीमित और सशर्त बिक्री और रजिस्ट्रेशन की अनुमति दी थी (दिल्ली/एनसीआर को छोड़कर)।[37]  दिल्ली/एनसीआर में ऐसे वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन पर स्टे बना रहेगा। अक्टूबर 2018 में अदालत ने 1 अप्रैल, 2020 के बाद बीएस-IV वाहनों की बिक्री या रजिस्ट्रेशन पर प्रतिबंध लगाया था और सिर्फ बीएस-VI वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन की अनुमति दी थी।  

पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में अंतर-मंत्रालयी कमिटियों का गठन

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

गृह मामलों के मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में छह अंतर मंत्रालयी कमिटियों का गठन किया है। इन राज्यों में क्रमशः दो, दो, एक और एक कमिटियों का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य इन राज्यों के कुछ क्षेत्रों में लॉकडाउन के असर का आकलन करना है।[38]   इन क्षेत्रों में इंदौर (मध्य प्रदेश), मुंबई और पुणे (महाराष्ट्र), जयपुर (राजस्थान) और कोलकाता एवं हावड़ा (पश्चिम बंगाल) शामिल हैं। कमिटी निम्नलिखित की पड़ताल करेगी: (iलॉकडाउन को लागू करने के संबंध मे शिकायतें, (iiअनिवार्य वस्तुओं की सप्लाई, (iiiसोशल डिस्टेंसिंग, (ivस्वास्थ्य संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी, (vस्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, और (ivराहत शिविरों की स्थिति।  

पड़ोसी देशों की कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के लिए एडीआई नीति में संशोधन 

Saket Surya (saket@prsindia.org)

कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न स्थितियों के मद्देनजर भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति में संशोधन किए हैं।[39]  संशोधित नीति भारत की सीमा से लगे देश की कंपनी या नागरिक या निवासी को ऑटोमैटिक रूट से निवेश करने को प्रतिबंधित करती है। ऐसी कंपनियां या व्यक्ति सरकारी रूट से ही निवेश कर सकते हैं। ऑटोमैटिक रूट के अंतर्गत विदेशी निवेशक को एफडीआई के लिए किसी मंजूरी की जरूरत नहीं होती, जबकि सरकारी रूट में सरकारी मंजूरी अनिवार्य होती है। इन देशों की कंपनियों या व्यक्तियों की मौजूदा या भविष्य की एफडीआई के ट्रांसफर के लिए भी मंजूरी की जरूरत होगी।

पाकिस्तान और बांग्लादेश की कंपनियों और नागरिकों के लिए कुछ अतिरिक्त प्रतिबंध बने रहेंगे। पहले भी पाकिस्तान और बांग्लादेश की कंपनियां या नागरिक सरकारी रूट से ही निवेश कर सकते थे। इसके अतिरिक्त पाकिस्तान की कंपनियों या नागरिकों के लिए रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश करना प्रतिबंधित है।

कुछ वस्तुओं की निर्यात नीतियों में संशोधन

Saket Surya (saket@prsindia.org)

डायग्नॉस्टिक किट्स से संबंधित निर्यात नीति को मुक्त से प्रतिबंधित कर दिया गया था।[40]  अब कुछ फार्मास्युटिकिल्स को इस नीति में संशोधन कर प्रतिबंधित से मुक्त कर दिया गया है।[41]  इसमें कुछ एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट (एपीआईज़) और इन एपीआई से बनने वाले फार्मूलेशन जैसे विटामिन बी1, बी6 और बी12, मेट्रोनाइडाजोल और एरिथ्रोमाइसीन सॉल्ट्स शामिल हैं। प्रतिबंधित निर्यात नीति का अर्थ यह है कि सरकार द्वारा किसी विशिष्ट देश या देशों को निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की मात्रा की सीमा तय होगी।

पैरासीटामोल17 अप्रैल को पैरासीटामोल से बनने वाले फार्मूलेशन्स से संबंधित निर्यात नीति को प्रतिबंधित से मुक्त किया गया।[42] हालांकि पैरासीटामोल एपीआई के निर्यात पर प्रतिबंध जारी है। 3 मार्च को पैरासीटामोल और पैरासीटामोल एपीआई से बनने वाले दोनों फार्मूलेशन्स के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था।[43]

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन: हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और उसके फार्मूलेशंस के निर्यात पर 25 मार्च को प्रतिबंध लगाया गए लेकिन कुछ अपवादों को अनुमति दी गई।[44]  इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (iस्पेशल इकोनॉमिक जोन्स और निर्यात करने वाली यूनिट्स से निर्यात ताकि वे निर्यात की बाध्यताएं पूरी कर सकें, और (iiअन्य देशों को मानवीय आधार पर। 4 अप्रैल को इन सभी अपवादों को हटा दिया गया और निर्यात को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया।[45]

हालांकि 7 अप्रैल को सरकार ने घोषणा की कि कुछ मामलों में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात को अनुमति दी जाएगी।[46]  इसमें पड़ोसी देशों से निर्यात शामिल है कि जोकि दवा के लिए भारत पर निर्भर हैं और वे देश जोकि कोविड-19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित हैं।46

पीएफ खातों में नियोक्ता के अंशदान के भुगतान की योजना प्रस्तावित

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952 इस्टैबलिशमेंट्स में कर्मचारियों के लिए अंशदान आधारित भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना और पेंशन (ईपीएस) योजना का प्रावधान करती है।

मार्च 2020 में वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत राहत पैकेज की घोषणा की थी।[47] इस पैकेज के अंतर्गत केंद्र सरकार कुछ वेतनभोगियों के ईपीएफ और ईपीएस एंटाइटिलमेंट्स के मद्देनजर भविष्य निधि खातों में 24मासिक वेतन चुकाएगी। यह अधिकतम 100 श्रमिकों वाले इस्टैबलिशमेंट्स में 15,000 रुपए प्रति माह से कम कमाने वाले लोगों के लिए किया जाएगा। 

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इस उपाय को लागू करने के लिए एक योजना अधिसूचित की है।[48] यह योजना तीन महीने की अवधि के लिए प्रभावी होगी जोकि मार्च 2020 से शुरू हुई है। 

आईबीसी की कुछ समय सीमाओं को कोविड-19 के कारण बढ़ाया गया

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता, 2016 के अंतर्गत अधिसूचित रेगुलेशनों में संशोधन प्रस्तावित किए।[49],[50],[51],[52],[53]  संहिता कंपनियों की इनसॉल्वेंसी को रिज़ॉल्व करने के लिए समयबद्ध प्रक्रिया का प्रावधान करती है। इसके अतिरिक्त संहिता कंपनी के क्रेडिटर्स को इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति देती है, अगर देनदार कंपनी के डीफॉल्ट की राशि एक करोड़ रुपए से अधिक है। संहिता कंपनियों के लिक्विडेशन के लिए प्रावधान भी तैयार करती है। मुख्य संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • समय सीमा को बढ़ाना: कोविड-19 के दौरान लॉकडाउन की अवधि को इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन या लिक्विडेशन प्रक्रिया के दौरान अपेक्षित समय अवधि में नहीं गिना जाएगा (जैसे रेज़ोल्यूशन प्लान या लिक्विडेशन प्रक्रिया की मंजूरी की समय सीमा)।50,51  यह प्रावधान 29 मार्च, 2020 (रेज़ोल्यूशन संबंधी प्रावधान) और 17 अप्रैल, 2020 (लिक्विडेशन संबंधी प्रावधान) से प्रभावी होगा।

  • फी पेमेंट की समय सीमा में राहतसंहिता के अंतर्गत इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स (आईपी) और इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल एंटिटीज़ (आईपीई) को पिछले वित्तीय वर्ष में अर्जित (आईपी द्वारा) प्रोफेशनल फीस का 0.25% और सेवाओं के टर्नओवर (आईपीई द्वारा) का 0.25हिस्सा फीस के रूप में चुकाना होता है, और वह भी हर साल 30 अप्रैल तक। इन रेगुलेशनों को वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 30 जून तक बढ़ा दिया गया है।49 इसके अतिरिक्त आईपीई के लिए पार्टनर या निदेशक की ज्वाइनिंग या उसके पद छोड़ने की जानकारी देने की समय सीमा भी सात दिन से 30 दिन कर दी गई है। आईपीई ऐसी एंटिटी होती है जोकि इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल को सहयोग देती है। यह प्रावधान 28 मार्च, 2020 से लागू है।

  • जुर्माने के भुगतान की समय सीमा: संहिता के अंतर्गत इनसॉल्वेंसी और रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल को क्रमशः इनसॉल्वेंसी और रेज़ोल्यूशन प्रक्रियाओं के विभिन्न चरणों में फॉर्म्स फाइल करने होते हैं। इन फॉर्म्स में संबंधित पक्षों की शुरुआती सहमति से लेकर रेज़ोल्यूशन प्लान या लिक्विडेशन ऑर्डर के विवरण शामिल हैं। 1 अप्रैल, 2020 के बाद फाइल होने वाले फॉर्म्स पर विलंब के प्रत्येक महीने के आधार पर जुर्माना भरना पड़ता है। इस तारीख को अप्रैल 2020 के स्थान पर 1 अक्टूबर, 2020 कर दिया गया है।52 यह प्रावधान 26 मार्च, 2020 से प्रभावी होगा। 

कोविड-19 के दौरान अदालतों का कामकाज

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

लॉकडाउन के मद्देनजर सर्वोच्च न्यायालय ने कोविड-19 के दौरान अदालतों के कामकाज के संबंध में निर्देश जारी किए हैं।[54]  उसने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय और सभी उच्च न्यायालय वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ज्यूडीशियरी का कामकाज करने के लिए अधिकृत हैं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक उच्च न्यायालय अपने और अपने अधीनस्थ न्यायालयों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के उपयोग के तौर-तरीकों को निर्धारित करने के लिए अधिकृत है जो इसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

यूजीसी ने विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं और शैक्षणिक कैलेंडर के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने कोविड-10 महामारी और देशव्यापी लॉकडाउन के मद्देनजर विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की समस्याओं पर विचार करने के लिए एक एक्सपर्ट कमिटी का गठन किया।[55]  कमिटी ने परीक्षाओं और शैक्षणिक कैलेंडर से संबंधित विषयों पर भी विचार किया। एक्सपर्ट कमिटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसके बाद कमिटी के सुझावों के आधार पर यूजीसी ने निम्नलिखित दिशानिर्देश जारी किए हैं:[56]     

  • शैक्षणिक कैलेंडरविश्वविद्यालयों में ईवन सेमिस्टर्स की क्लासेज़ 16 मार्च, 2020 से रद्द कर दी गईं। दिशानिर्देशों में यह कहा गया है कि शिक्षण को 31 मई तक जारी रखा जाना चाहिए, भले ही वह ऑनलाइन या दूरस्थ शिक्षण मोड, सोशल मीडिया (व्हॉट्सएप/यूट्यूब), ईमेल या वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हो। मौजूदा शैक्षणिक वर्ष के लिए परीक्षाएं जुलाई 2020 में की जानी चाहिए और परिणाम 31 जुलाई (टर्मिनल ईयर के विद्यार्थियों के लिए) और 14 अगस्त (इंटरमीडिएट ईयर के विद्यार्थियों के लिए) को घोषित किए जाने चाहिए।

  • शैक्षणिक सत्र 2020-21 पुराने विद्यार्थियों के लिए अगस्त 2020 और नए विद्यार्थियों के लिए सितंबर 2020 हो सकता है। नए विद्यार्थियों के लिए दाखिला प्रक्रिया अगस्त के महीने में की जा सकती है। परिणामस्वरूप 2020-21 का ईवन सेमिस्टर 27 जनवरी, 2021 से शुरू हो सकता है।  शैक्षणिक सत्र 2021-22 की शुरुआत अगस्त 2021 हो सकती है। 2019-20 के शेष सत्र और 2020-21 के शैक्षणिक सत्र के लिए शिक्षण के नुकसान की भरपाई के लिए विश्वविद्यालय छह दिन के सप्ताह का पैटर्न अपना सकता है।

  • परीक्षाएंविश्वविद्यालय ऑनलाइन या ऑनलाइन मोड में सेमिस्टर या वार्षिक परीक्षाएं ले सकती है। यह ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ के निर्देशों का पालन करते हुए और सभी विद्यार्थियों के लिए निष्पक्ष अवसरों को सुनिश्चित करते हुए किया जाना चाहिए। परीक्षाओं के वैकल्पिक, सरल तरीकों को अपनाकर ऐसा किया जा सकता है, जैसे एमसीक्यू (मल्टीपल च्वाइस क्वेश्चंस) आधारित परीक्षाएं या ओपन बुक परीक्षाएं। अगर मौजूदा स्थिति को देखते हुए परीक्षाएं नहीं की जा सकती हैं तो पिछले सेमिस्टर में आंतरिक मूल्यांकन और प्रदर्शन के आधार पर ग्रेडिंग की जा सकती है। विश्वविद्यालय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पीएचडी वाइवा परीक्षा संचालित कर सकते हैं।

  • दूसरे दिशानिर्देश: प्रत्येक विश्वविद्यालय को एक कोविड-19 सेल स्थापित करना होगा ताकि महामारी के दौरान विद्यार्थियों की परीक्षाओं और शिक्षण गतिविधियों से संबंधित शिकायतों को हल किया जा सके। उसे विद्यार्थियों को इसके बारे में प्रभावी तरीके से बताना होगा। इसके अतिरिक्त जल्द फैसला लेने के लिए यूजीसी में भी एक कोविड-19 सेल बनाया जाएगा।

बिजली क्षेत्र पर कोविड-19 और लॉकडाउन के असर को कम करने के लिए राहत उपायों की घोषणा 

Saket Surya (saket@prsindia.org)

राज्य सरकारों को एडवाइजरी: ऊर्जा मंत्रालय ने राज्य सरकारों को निम्नलिखित के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए हैं: (i) अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन नेटवर्क के ऑपरेशन और रखरखाव को अनुमति, (ii) ट्रांसमिशन प्रणाली और उत्पादन संयंत्रों से संबंधित निर्माण गतिविधियां, और (iii) लॉकडाउन की अवधि के दौरान बिजली उत्पादन युनिटिलिटीज़ की ऑपरेशनल कंटिनियुटी की अनुमति।[57],[58],[59],[60]

डिस्कॉम्स के भुगतान से संबंधित स्पष्टीकरण: 27 मार्च को विद्युत मंत्रालय ने वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को तीन महीने की मोहलत दी थी ताकि वे उत्पादन कंपनियों को भुगतान कर सकें।[61] अप्रैल को नवीन और अक्षय ऊर्जा उत्पादन कंपनियों को डिस्कॉम द्वारा भुगतान के संबंध में एक स्पष्टीकरण जारी किया।[62]  अक्षय ऊर्जा उत्पादन कंपनियों के भुगतान को अधिस्थगन के अंतर्गत कवर नहीं किया जाएगा। अक्षय ऊर्जा उत्पादन चालू स्थिति में होना चाहिए और लॉकडाउन की अवधि के दौरान भी यह जारी रहेगा।

अक्षय ऊर्जा प्रॉजेक्ट्स की समय सीमा बढ़ाई गई: नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने अक्षय ऊर्जा प्रॉजेक्ट्स को शुरू करने के लिए समय सीमा में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।[63] समय सीमा का विस्तार लॉकडाउन की अवधि और इस तरह के लॉकडाउन की समाप्ति के 30 दिन बाद के बराबर होगा।

सौर पीवी मॉड्यूल और सौर पीवी सेल्स के स्वीकृत मॉडल और मैन्यूफैक्चरर्स की एप्रूव्ड लिस्ट (एएलएमएम) के कार्यान्वयन की प्रभावी तिथि छह महीने के लिए बढ़ा दी गई है।[64]  पहले यह समय सीमा 31 मार्च, 2020 थी। एएलएमएम ऑर्डर में मॉडल और मैन्यूफैक्चरर्स के एनलिस्टमेंट की व्यवस्था है। आदेश में कहा गया है कि सभी सौर ऊर्जा प्रॉजेक्ट्स को प्रभावी तारीख के बाद एएलएमएम सूची में मैन्यूफैक्चरर्स से अनिवार्य रूप से खरीदी करनी होगी। 

कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की क्रेडिट फेसिलिटी का यूज़ंस लेटर: सीआईएल ईंधन सप्लाई एग्रीमेंट्स के लिए नकद के स्थान पर बिजली उत्पादन कंपनियों को यूज़ंस लेटर ऑफ क्रेडिट की सुविधा प्रदान करती है।[65]  इसका उद्देश्य बिजली उत्पादन कंपनियों के लिए कार्यशील पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। गैर-बिजली क्षेत्र के उपभोक्ताओं को भी यह सुविधा दी गई है। इससे बाजारों में लिक्विडिटी बढ़ेगी और कोयला उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

प्रीकन्सेप्शन और प्रीनेटल डायग्नॉस्टिक टेक्नीक नियम, 1996 के अंतर्गत कुछ प्रावधान रद्द

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

लॉकडाउन के मद्देनजर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने प्रीकन्सेप्शन और प्रीनेटल डायग्नॉस्टिक टेक्नीक्स (सेक्स सिलेक्शन पर प्रतिबंध) नियम, 1996 के अंतर्गत कुछ नियमों को रद्द कर दिया।[66]  इनमें जेनेटिक काउसिलिंग सेंटर्स, जनेटिक लैब्स और क्लिनिक्स, अल्ट्रासाउंड क्लीनिक्स और इमेजिंग सेटर्स से निम्नलिखित नियमों की अपेक्षा करना शामिल है: (iरजिस्ट्रेशन को रीन्यू करना, और (iiउनके द्वारा संचालित प्री-कन्सेप्शन या गर्भधारण संबंधी प्रक्रियाओं की मासिक रिपोर्ट फाइल करना। कुछ सरकारी अथॉरिटीज़ को त्रैमासिक रिपोर्ट दर्ज करने और लैब्स एवं क्लीनिक्स के रजिस्ट्रेशन की सूचनाओं का रखरखाव करने के नियमों को भी छूट दी गई है। नियम लॉकडाउन की तारीख यानी 24 मार्च2020 से (पूर्वव्यापी प्रभाव के साथ) 30 जून2020 तक रद्द रहेंगे।

अनुसंधान के लिए कोविड-19 के स्पेसिमन को हैंडिल करने से संबंधित दिशानिर्देश जारी

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने डीएनए अनुसंधान के लिए कोविड-19 के स्पेसिमन को हैंडिल करने से संबंधित दिशानिर्देश जारी किए हैं।[67] दिशानिर्देशों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) किन प्रक्रियाओं का पालन करना है, (ii) जोखिम आकलन और उपशमन के उपाय, (iii) वायरल इसोलेशन के लिए दिशानिर्देश, (iv) लैब की कचरा निस्तारण और शिपमेंट की प्रक्रिया। मुख्य दिशानिर्देशों में निम्नलिखित शामिल हैं:   

  • इन स्पेसिमन को हैंडिल करने वाले लैब का प्रत्येक कर्मचारी उपयुक्त पर्सनल प्रोटेक्टिव एक्विपमेंट को पहनेगा, जैसा कि विस्तृत जोखिम आकलन में निर्धारित किया गया है।

  • पुष्टि या संदिग्ध रोगियों के स्पेसिमन को संक्रामक पदार्थों के परिवहन पर डब्ल्यूएचओ रेगुलेशन 2017-18 के अंतर्गत ले जाया जाएगा।[68]

  • लैब के कचरे को दूसरे जैव रूप से खतरनाक कचरे के तौर पर हैंडिल किया जाएगा, जैसा कि बायोटेक्नोलॉजी विभाग द्वारा अधिसूचित रीकॉम्बिनेंट डीएनए रिसर्च एंड बायोकंटेनमेंट के बायोईंधन संबंधी रेगुलेशन और दिशानिर्देश (2017) में कहा गया है।[69] 

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा विकसित कॉमन बायोमेडिकल कचरा उपचार एवं निस्तारण सुविधा के लिए संशोधित दिशानिर्देश (2016) के अनुसार कचरा निस्तारण किया जाना चाहिए।[70]

यूआईडीएआई ने कॉमन सर्विस सेंटर्स के जरिए आधार अपडेशन सुविधा की अनुमति दी

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) ने कॉमन सर्विस सेंटर्स (सीएससीज़) जोकि बैंकिंग संवाददाता के तौर पर काम करता है, को आधार अपडेशन सुविधा (आधार विवरण को अपडेट करने के लिए) शुरू करने की अनुमति दी है।[71]  इससे लॉकडाउन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में आधार कार्डधारकों को राहत मिलेगी, चूंकि उन्हें इस काम के लिए बैंक की शाखा या डाकघर के आधार केंद्रों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

सीएससी वेब-एनेब्ल्ड ई-गवर्नेंस सेवाएं प्रदान करता है, जैसे आवेदन फॉर्म्स फाइल करना, सर्टिफिकेट जारी करना, और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, टेलीफोन और पानी के बिल का भुगतान।[72]  2018 मेंबैंकिंग प्रणाली के लिए सीएससी को बैंकिंग संवाददाताओं या ग्राहक सेवा बिंदुओं के रूप में संचालित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।[73] लगभग 20,000 सीएससी हैं जो बैंकिंग संवाददाताओं के रूप में काम करते हैं। यूं देश में कुल तीन लाख से अधिक सीएससी हैं (नवंबर 2018 तक)।[74] 

राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों और टाइटर रिजर्व्स में कोविड-19 की रोकथाम और प्रबंधन के लिए एडवाइजरी जारी

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों और टाइगर रिजर्व्स में कोविड-19 की रोकथाम और प्रबंधन के संबंध में एक एडवाइजरी जारी की।[75] यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर्स नेशनल वेटेनरी सर्विस लेबोरेट्रीज़ ने न्यूयॉर्क के एक चिड़ियाघर में एक टाइगर के कोविड-19 पॉजिटिव होने की पुष्टि की है। इसके बाद भारत ने यह कदम उठाया है। 

मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 वायरस के मानव से जीवों और जीवों से मानव में संक्रमण होने की आशंका हो सकती है। एडवाइजरी की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं: (i) फील्ड मैनेजर्स, वेटेनरी डॉक्टर्स और फ्रंटलाइन स्टाफ के साथ टास्क फोर्स का गठन ताकि स्थिति को जल्द प्रबंधित किया जा सके, (ii) रोग पर निगरानी रखने, उसकी मैपिंग और निगरानी प्रणाली को बढ़ाना, (iii) इन स्थानों पर लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाना और मनुष्यों एवं वन्यजीवों के बीच संपर्क को कम से कम करना, और (iv) मंत्रालय को इस स्थिति के संबंध में पूरी जानकारी देना।

इसके अतिरिक्त पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय चिड़ियाघर अथॉरिटी ने देश के चिड़ियाघरों के लिए एडवाइजरी जारी की है।[76] इस एडवाइजरी में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) किसी असामान्य लक्षणों के लिए सीसीटीवी के जरिए जानवरों की निरंतर निगरानी, (ii) बिना सेफ्टी गियर के आस-पास के क्षेत्र में हैंडलर्स के प्रवेश पर प्रतिबंध, (iii) बीमार जानवरों को आइसोलेट और क्वारंटाइन करना, और (iv) जानवरों को भोजन देने के दौरान उनसे कम से कम संपर्क।  

लॉकडाउन के दौरान सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने से संबंधित एडवाइजरी

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

जल शक्ति मंत्रालय ने राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने के लिए एडवाइजरी जारी की है कि सभी नागरिकों को सुरक्षित जल उपलब्ध हो।[77] यह एडवाइजरी सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले के अनुपालन के मद्देनजर है कि कोविड-19 से संघर्ष में देश के सभी लोगों को साफ पानी मिलना चाहिए।77 एडवाइजरी की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • उन क्षेत्रों में सप्लाई के लिए उपाय करना जहां पानी की कमी है। राहत शिविरोंअस्पतालोंक्वारंटाइन केंद्रों, वृद्धाश्रमोंस्ल्म्स और समाज के गरीब तबके की विशेष देखभाल की जा सकती है।

  • पेयजल को सुरक्षित करने के लिए रासायनिक उपचार किया जाए।

  • स्रोत से वितरण बिंदुओं तक पानी की आपूर्ति प्रणालियों की कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिए चौबीस घंटे की व्यवस्था करना।

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों के लिए विशेष रूप से मास्क और सैनिटाइजर्स जैसे व्यक्तिगत सुरक्षा उपाय करना, खास तौर उन लोगों के लिए जो क्षेत्र में जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और रखरखाव का प्रबंधन कर रहे हैं।

जल जीवन मिशन के अंतर्गत डेटा अपडेशन के लिए समय सीमा को बढ़ाया गया

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

जल शक्ति मंत्रालय ने कोविड-19 महामारी के कारण मौजूदा स्थिति को देखते हुए जल जीवन मिशन के अंतर्गत डेटा अपडेशन की समय सीमा 22 अप्रैल2020 से बढ़ाकर 5 मई2020 कर दी है।[78] इससे पहले यह समय सीमा 31 मार्च, 2020 से 22 अप्रैल, 2020 की गई थी।[79]  

जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक ग्रामीण भारत के सभी घरों में व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है।[80] इसके अंतर्गत आने वाले डेटा में सभी बस्तियों के लिए जनसंख्या और परिवार का डेटाआवास के कवरेज की जानकारी और गुणवत्ता-प्रभावितआधारभूत डेटा का सत्यापन और मासिक शारीरिक और वित्तीय प्रगति शामिल है।

मंत्रालय ने कहा है कि समय सीमा बढ़ाने के किसी और अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त यह कहा गया कि डेटा के अपडेशन में देरी कार्यक्रम के अंतर्गत प्लानिंग की प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसका कारण यह है कि नल कनेक्शन से रहित घरों की संख्याऔर पानी की गुणवत्ता-प्रभावित बस्तियों में रहने वाली आबादी से संबंधित डेटा को धनराशि जारी करते समय ध्यान में रखा जाता है।

विलंब से धनराशि का नुकसान हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मौजूदा निर्देशों के अनुसारहर महीने कार्यक्रम के लिए अधिकतम 5% बजटीय आवंटन ही जारी किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त वित्त वर्ष की पहली तिमाही मेंविभाग अपने बजट आवंटन का अधिकतम 15% ही उपयोग कर सकता है।

वर्क फ्रॉम होम सुविधा के लिए शर्तों और नियमों में छूट को बढ़ाया गया

Saket Surya (saket@prsindia.org)

मार्च मेंदूरसंचार विभाग ने 30 अप्रैल, 2020 तक वर्क फ्रॉम होम के नियम और शर्तों में कुछ छूट दी थी।[81] इस छूट को 31 मई, 2020 तक बढ़ाया गया है।[82] ये नियम और शर्तें अन्य सेवा प्रदाताओं (ओएसपी) के लिए अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने पर लागू होते हैं। ओएसपी ऐसी कंपनियां हैं जो विभिन्न एप्लिकेशन सेवाएं प्रदान करती हैं जैसे टेली-बैंकिंगटेलीकॉम कॉमर्सकॉल सेंटर और अन्य आईटी-एनेब्ल्ड सेवाएं। इन छूटों में निम्नलिखित शामिल हैं: (iपूर्व अनुमति लेने से छूटऔर (ii) सिक्योरिटी डिपॉजिट और एग्रीमेंट की शर्तों से छूट। 

कोविड-19 से संबंधित फेक न्यूज से निपटने के लिए फैक्ट चेक यूनिट बनाई गई

Saket Surya (saket@prsindia.org)

प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के अंतर्गत फैक्ट चेक यूनिट बनाई गई है जोकि कोविड-19 से संबंधित फेक न्यूज से निपटेगी।[83] कोविड-19 से संबंधित सरकारी उपायों और उसकी प्रगति की जानकारी देने वाला दैनिक बुलेटीन 1 अप्रैल से पीआईबी द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।83 सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक नोडल अधिकारी को नियुक्त किया है। यह अधिकारी मंत्रालय की कोविड-19 से संबंधित सभी शिकायतों से निपटेगा।[84]

 

स्वास्थ्य

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

इंडियन मेडिसिन सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) अध्यादेश, 2020 जारी

इंडियन मेडिसिन सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को जारी किया गया।[85]  यह अध्यादेश इंडियन मेडिसिन सेंट्रल काउंसिल एक्ट, 1970 में संशोधन करता है। एक्ट सेंट्रल काउंसिल के गठन का प्रावधान करता है जोकि भारतीय औषधि प्रणाली (आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा सहित) की शिक्षा और प्रैक्टिस को रेगुलेट करता है।

  • सेंट्रल काउंसिल का सुपरसेशन: अध्यादेश 1970 के एक्ट में संशोधन करता है और सेंट्रल काउंसिल के सुपरसेशन का प्रावधान करता है। सेंट्रल काउंसिल को सुपरेशन की तारीख के एक साल के भीतर पुनर्गठित करना होगा। इस अंतरिम अवधि में केंद्र सरकार बोर्ड ऑफ गवर्नर का गठन करेगी जोकि सेंट्रल काउंसिल की शक्तियों का इस्तेमाल करेगा।

  • बोर्ड ऑफ गवर्नर्स: बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बोर्ड) में अधिकतम दस सदस्य होंगे। सदस्यों में भारतीय औषधि के क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्ति और प्रतिष्ठित प्रशासक शामिल होंगे। वे नामित सदस्य हो सकते हैं या पदेन सदस्य, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा। केंद्र सरकार बोर्ड के चेयरपर्सन के रूप में एक सदस्य को चुनेगी।

  • बोर्ड 1970 के एक्ट के अंतर्गत गठित सेंट्रल काउंसिल की शक्तियों का इस्तेमाल करेगा और उसके लिए निर्धारित कार्य करेगा। इनमें भारतीय औषधि की प्रैक्टिस और शिक्षा को रेगुलेट करना शामिल है।   

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होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) अध्यादेश, 2020 जारी

होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को जारी किया गया।[86] यह अध्यादेश होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल एक्ट, 1973 में संशोधन करता है। एक्ट होम्योपैथिक शिक्षा और प्रैक्टिस को रेगुलेट करने वाली होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल की स्थापना करता है।

1973 के एक्ट को 2018 में संशोधित किया गया था ताकि सेंट्रल काउंसिल के सुपरसेशन का प्रावधान किया जा सके। सेंट्रल काउंसिल को सुपरसेशन की तारीख से एक वर्ष के भीतर पुनर्गठित किया जाना था। इस समय अवधि को 2019 में संशोधित करके दो वर्ष किया गया। अंतरिम अवधि में केंद्र सरकार ने सेंट्रल काउंसिल की शक्तियों के इस्तेमाल के लिए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन किया। अध्यादेश एक्ट में संशोधन करता है और सेंट्रल काउंसिल के सुपरसेशन की समय अवधि को दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष करता है।

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सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (पैकेजिंग और लेबलिंग) संशोधन नियम, 2020 अधिसूचित

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (पैकेजिंग और लेबलिंग) संशोधन नियम, 2020 को अधिसूचित किया।[87]  ये नियम सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (पैकेजिंग और लेबलिंग) नियम, 2008 में संशोधन करते हैं जिन्हें सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन पर प्रतिबंध और व्यापार एवं वाणिज्य, उत्पादन, सप्लाई और वितरण का रेगुलेशन) एक्ट, 2003 के अंतर्गत अधिसूचित किया गया था। 2020 के नियमों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं

  • परिभाषाएं2008 के नियम पैकेज को किसी भी प्रकार के पैक के रूप में परिभाषित करते हैं जिसमें सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों को उपभोक्ता बिक्री के लिए पैक किया जाता है। पैकेज में थोकया अर्ध-थोक पैकेज शामिल नहीं हैं यदि ऐसे पैकेज उपभोक्ता के उपयोग के लिए नहीं हैं। 2020 के नियम एक्ट में प्रदत्त परिभाषा के अनुरूप पैकेज की परिभाषा में संशोधन करते हैं। एक्ट रैपरबॉक्सकार्टनटिन या अन्य कंटेनर के रूप में पैकेज को परिभाषित करता है।

  • लेबलिंग2008 के नियमों में तंबाकू युक्त पैकेजों पर कुछ टेक्टुअल चेतावनियों को प्रदर्शित करने की अपेक्षा की गई है जैसे कि "तंबाकू कैंसर का कारण बनता है" और "तंबाकू दर्दनाक मौत का कारण बनता है"। 2020 के नियम पैकेजिंग पर "तंबाकू के कारण कैंसर होता है" की चेतावनी को हटाते हैं।

  • इसके अतिरिक्त 2008 के नियमों में कहा गया है कि पैकेज के 60दृश्य क्षेत्र में पिक्टोरल चेतावनी होनी चाहिए। 2020 के नियम दृश्य क्षेत्र के प्रतिशत वाले निर्देश को समाप्त करते हैं। पिक्टोरल चेतावनियों में केंद्र सरकार द्वारा दी गई इमेज होनी चाहिए। 2020 के नियमों में इस संबंध में भी परिवर्तन किया गया है कि किन इमेजेज़ को पिक्टोरल चेतावनी के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

वित्त

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन पर गठित टास्कफोर्स ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

वित्त मंत्रालय ने सितंबर 2019 में 2019-25 की अवधि के लिए 100 करोड़ रुपए से अधिक लागत वाले प्रॉजेक्ट्स के लिए नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (एनआईपी) बनाने से संबंधित एक टास्क फोर्स का गठन किया था।[88]  टास्क फोर्स ने एनआईपी पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[89],[90] एनआईपी का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर में 100 लाख करोड़ रुपए के निवेश के लिए पर्याप्त रूप से प्रॉजेक्ट्स तैयार करना है। टास्क फोर्स की मुख्य टिप्पणियों और सुझावों में शामिल हैं:

  • इंफ्रास्ट्रक्चर पर व्यय: टास्क फोर्स ने 2019-20 से 2024-25 की अवधि के दौरान भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर में 111 लाख करोड़ रुपए के पूंजीगत व्यय का अनुमान लगाया है। एनआईपी पर कुल पूंजीगत व्यय में से 79% सरकार द्वारा (केंद्र द्वारा 39% और राज्यों द्वारा 40%), और बाकी 21% निजी क्षेत्र द्वारा किए जाने की उम्मीद है।

  • क्षेत्रवार ब्रेकअपएनआईपी में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स में 71% निवेश चार क्षेत्रों में किया जाएगा। ये हैं: (i) बिजली (कुल निवेश का 24%)(ii) सड़क (18%)(iii) शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर (17%)और (iv) रेलवे (12%)। अन्य मुख्य क्षेत्रों में शामिल हैं, सिंचाई (8%) और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर (7%)।

  • प्रॉजेक्ट्स के लागू होने की स्थिति: एनआईपी के सभी प्रॉजेक्ट्स में से 44 लाख करोड़ रुपए (40%) के प्रॉजेक्ट्स लागू किए जा रहे हैं और 34 लाख करोड़ रुपए (30%) के प्रॉजेक्ट्स वैचारिक स्तर पर हैं (हाल ही में घोषित लेकिन विस्तृत योजनाएं और व्यावहारिकता संबंधी अध्ययन लंबित हैं)। 22 लाख करोड़ रुपए (20%) के प्रॉजेक्ट्स चालू हैं, जोकि अवधारणा और कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। बाकी प्रॉजेक्ट्स की स्थिति से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं हैजिनकी कीमत 11 लाख करोड़ रुपए (10%) है।

  • एनआईपी का वित्त पोषण18%-20एनआईपी को केंद्र सरकार के बजट से किए गए प्रत्यक्ष आबंटन द्वारा वित्त पोषित किए जाने की उम्मीद है और 24%-26% राज्य के बजटीय आबंटनों से। एनआईपी की 31% धनराशि बॉन्ड बाजार, बैंक और एनबीएफसीज़ के ऋण के जरिए उगाही जाएगी। निजी डेवलपर्स से इक्विटीबहुपक्षीय और द्विपक्षीय एजेंसियों से बाहरी सहायताऔर पीएसयू के आंतरिक स्रोतों में 4%-10% धन जुटाया जाएगा। इन मौजूदा स्रोतों का उपयोग करने के अतिरिक्त, जो एनआईपी के 83% -85% का वित्तपोषण करेगाटास्क फोर्स ने वित्त पोषण के अन्य स्रोतों का सुझाव भी दिया है, जैसे नए विकास वित्त संस्थाना और केंद्र एवं राज्यों द्वारा परिसंपत्ति मुद्रीकरण। 

  • सुधारटास्क फोर्स ने विभिन्न क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के लिए कई सुधारों का सुझाव दिया है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) प्रॉजेक्ट के तैयारी में सुधार, (ii) निजी क्षेत्र की कार्य निष्पादन की क्षमता बढ़ाना, (iii) विलंब से बचने के लिए सभी मंजूरियां प्रदान करना, (iv) अनुबंधों का सही होना और उनका प्रवर्तन सुनिश्चित करना, और निष्पक्ष अनुबंध, और (v) विवाद समाधान तंत्र को संस्थागत बनाना। इसके अतिरिक्त टास्क फोर्स ने क्षेत्र वार सुधारों का भी सुझाव दिया। 

 

बिजली

Saket Surya (saket@prsindia.org)

ड्राफ्ट बिजली (संशोधन) बिल, 2020 जारी

ऊर्जा मंत्रालय ने सार्वजनिक परामर्श के लिए बिजली (संशोधन) बिल, 2020 का ड्राफ्ट जारी कर दिया।[91] बिल बिजली एक्ट, 2003 में संशोधन करता है। एक्ट देश में बिजली के उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण और व्यापार के रेगुलेशन का प्रावधान करता है। ड्राफ्ट बिल पर 5 जून, 2020 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।[92]

ड्राफ्ट बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • टैरिफ का निर्धारण: एक्ट में यह प्रावधान है कि बिजली की खुदरा बिक्री के लिए टैरिफ का निर्धारण करते समयराज्य बिजली रेगुलेटरी आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि टैरिफ उत्तरोत्तर आपूर्ति की लागत को दर्शाता है। इसका अर्थ यह है कि राजस्व वसूली को बहु-वर्ष की अवधि में स्थगित किया जा सकता है। आयोग अलग-अलग उपभोक्ता खंडों के लिए अलग-अलग टैरिफ निर्दिष्ट कर सकता हैजैसे कि लोड फैक्टर और खपत के उद्देश्य के आधार पर। ड्राफ्ट बिल इसमें संशोधन करता है और यह प्रावधान करता है कि टैरिफ को बिजली की आपूर्ति की लागत को प्रदर्शित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय बिजली टैरिफ नीति के अनुसार कोई भी क्रॉस-सब्सिडी प्रदान की जाएगी।

  • सरकारी सब्सिडी: एक्ट के अंतर्गतराज्य सरकारें बिजली की कीमतें सस्ती रखने के लिए सब्सिडी प्रदान कर सकती हैं। राज्य आयोग द्वारा निर्दिष्ट तरीके से सब्सिडी का अग्रिम भुगतान किया जाना चाहिए। ड्राफ्ट बिल में प्रावधान है कि आयोग सब्सिडी को ध्यान में रखे बिना टैरिफ तय करेगा। सरकार को उपभोक्ता को सीधे सब्सिडी प्रदान करनी होगी।

  • बिजली कॉन्ट्रैक्ट प्रवर्तन अथॉरिटी: बिल में बिजली कॉन्ट्रैक्ट प्रवर्तन अथॉरिटी के गठन का प्रावधान है। अथॉरिटी उत्पादन कंपनियों और अन्य लाइसेंसधारियों के बीच बिजली के ट्रांसमिशनसप्लाई और खरीद के अनुबंधों के प्रदर्शन से संबंधित मामलों पर फैसला करेगी।

  • सिलेक्शन कमिटी: एक्ट राज्य रेगुलेटरी आयोगों के सदस्यों का चयन करने के लिए राज्य स्तर पर सिलेक्शन कमिटियों का प्रावधान करता है। राष्ट्रीय स्तर पर एक सिलेक्शन कमिटी केंद्रीय रेगुलेटरी आयोग और अपीलीय ट्रिब्यूनल के सदस्यों का चयन करती है। ड्राफ्ट बिल राज्य सिलेक्शन कमिटियों के प्रावधानों को हटाता है और एक्ट के अंतर्गत सभी नियुक्तियों के लिए एक सिलेक्शन कमिटी का प्रस्ताव करता है (रेगुलेटरी आयोगबिजली कॉन्ट्रैक्ट प्रवर्तन अथॉरिटी और अपीलीय ट्रिब्यूनल)।

 

सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

ड्राफ्ट ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) नियम, 2020 जारी

ड्राफ्ट ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) नियम, 2020 को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किया गया।[93] इन नियमों को ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) एक्ट, 2019 के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है। एक्ट ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण और संरक्षण का प्रावधान करता है। ड्राफ्ट नियमों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • आइडेंटिटी का सर्टिफिकेट जारी करनाएक्ट के अंतर्गत एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को आइडेंटिटी सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए जिला मेजिस्ट्रेट को आवेदन करना होगा। नियमों में कहा गया है कि आवेदन पत्र के साथ एक मनोवैज्ञानिक की रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी। नाबालिग की स्थिति मेंयह आवेदन बच्चे के माता-पिता या अभिभावक द्वारा किया जाएगा।

  • सर्टिफिकेट 60 दिनों के भीतर जारी होना चाहिए। जिला मेजिस्ट्रेट ट्रांसजेंडर आइडेंटिटी कार्ड भी जारी करेगा। आइडेंटिटी सर्टिफिकेट प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर ट्रांसजेंडर व्यक्ति के जेंडर और नाम (यदि आवश्यक हो) को सभी आधिकारिक दस्तावेजों में बदलना होगा। ट्रांसजेंडर व्यक्ति उन सभी अधिकारों का उपयोग करेंगे जो उन्हें सर्टिफिकेट जारी करने से पहले मिले थे। जिला मजिस्ट्रेट केवल तभी आवेदकों को सर्टिफिकेट जारी कर सकते हैं, अगर वे आवेदन की तारीख पर एक वर्ष के लिए उनके क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के निवासी हों

  • यदि कोई व्यक्ति सेक्स चेंज सर्जरी कराता है, तो जिस अस्पताल में सर्जरी हुई हो, उसके चिकित्सा अधीक्षक या मुख्य चिकित्सा अधिकारी को एक सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना होगा। आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर आइडेंटिटी का एक संशोधित सर्टिफिकेट जारी किया जाना चाहिए, जो स्त्री या पुरुष के रूप में व्यक्ति के जेंडर को दर्शाता है।

  • अपीलअगर आइडेंटिटी सर्टिफिकेट का आवेदन रद्द हो जाता हो तो आवेदक 30 दिनों के भीतर अपील कर सकता है, जिस तारीख को आवेदन रद्द हुआ हो। उसकी अपील अपीलीय अथॉरिटी को निर्देशित होगी जिसे संबंधित सरकार द्वारा नामित किया जाएगा।

  • झूठा आवेदनअगर कोई आवेदक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के आइडेंटिटी सर्टिफिकेट को हासिल करने के लिए आवेदन करता है, जबकि वह ट्रांसजेंडर नहीं है तो उसे सजा भुगतनी पड़ सकती है। 

  • ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का कल्याणनियमों में कहा गया है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को शामिल करने के लिए सभी मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं और कानूनों की समीक्षा की जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त संबंधित सरकार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से होने वाले भेदभाव को समाप्त करने के उपाय करने चाहिए। संबंधित सरकार को इन नियमों के अधिसूचित होने के दो वर्षों के भीतर सुविधाएं मुहैय्या करानी चाहिए जैसे ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए पुनर्वास केंद्र और अलग वॉशरूम्स।  

 

श्रम और रोजगार

Anya Bharat Ram (anya@prsindia.org)

औद्योगिक संबंध संहिता, 2019 पर स्टैंडिंग कमिटी ने रिपोर्ट सौंपी 

श्रम संबंधी स्टैंडिंग कमिटी ने औद्योगिक संबंध संहिता, 2019 पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।[94]  यह संहिता ट्रेड यूनियन एक्ट, 1926, औद्योगिक विवाद एक्ट, 1947, और औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) एक्ट, 1946 का स्थान लेती है। यह यूनियनों को मान्यता, स्थायी आदेशों का सर्टिफिकेशन और औद्योगिक विवादों को हल करने का प्रावधान करती है। कमिटी के मुख्य सुझाव और निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:

  • उपयुक्त सरकार: कमिटी ने कुछ मामलों में उपयुक्त सरकार की परिभाषा में परिवर्तन का सुझाव दिया। जिन मामलों में किसी नियोक्ता के इस्टैबलिशमेंट्स कई राज्यों में स्थित हैं, उन मामलों में उपयुक्त सरकार को रोजगार के मूल स्थान के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कॉन्ट्रैक्ट श्रमिक और कॉन्ट्रैक्टर के बीच विवाद होने पर उपयुक्त सरकार केंद्र या राज्य सरकार होनी चाहिए जोकि इस बात पर निर्भर करेगा कि जिस इस्टैबलिशमेंट में विवाद उत्पन्न हुआ है, वह किसके नियंत्रण में है।

  • विवाद निवारण: संहिता में औद्योगिक विवादों के लिए तीन वर्ष की समय सीमा दी गई है। कमिटी ने सुझाव दिया कि इसे एक वर्ष किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त संहिता संबंधित सरकार को यह अधिकार देती है कि वह औद्योगिक ट्रिब्यूनल के फैसले को रद्द करे या उसमें परिवर्तन करे। कमिटी ने सुझाव दिया कि इस खंड को हटा दिया जाए, चूंकि 1947 में इसी तरह के प्रावधान को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण (सेपरेशन ऑफ पावर्स) के सिद्धांत का उल्लंघन करने के कारण निरस्त कर दिया था। 

  • हड़ताल1947 का एक्ट कहता है कि पब्लिक युटिलिटी सर्विस में कार्यरत व्यक्ति तब तक हड़ताल पर नहीं जा सकता जब तक कि उसने हड़ताल पर जाने से छह सप्ताह पहले नोटिस न दिया हो या ऐसा नोटिस देने के 14 दिनों के भीतर। संहिता इस प्रावधान को सभी प्रतिष्ठानों के लिए लागू करती है। कमिटी ने सुझाव दिया कि हड़ताल पर प्रतिबंध केवल पब्लिक युटिलिटी सर्विस जैसे पानीबिजली पर लागू होना चाहिए।

  • कामबंदी और छंटनीसंहिता में 100 या उससे अधिक श्रमिकों या जितनी संख्या संबंधित सरकार अधिसूचित कर सकती है, वाले इस्टैबलिशमेंट्स में कामबंदी और छंटनी के लिए विशेष प्रावधान शामिल हैं। कमिटी ने सुझाव दिया है कि कर्मचारियों की संख्या की इस सीमा में बदलाव करने की शक्ति कार्यकारिणी के पास नहीं होनी चाहिए। इसके बजाय राज्य विधानमंडल को इस सीमा में परिवर्तन के संबंध में कानून में संशोधन पारित करने चाहिए।

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कॉरपोरेट मामले

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

वैल्यूएशन प्रोफेशनल के लिए फ्रेमवर्क पर एक्सपर्ट कमिटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

वैल्यूएशन प्रोफेशनल (जोकि किसी एसेट की कीमत निर्धारित करते हैं) के संस्थागत फ्रेमवर्क पर एक्सपर्ट कमिटी (चेयरएम. एस. साहू) ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।[95] इसके आधार पर कमिटी ने ड्राफ्ट वैल्यूअर्स बिल, 2020 का भी सुझाव दिया जिसका उद्देश्य स्टेकहोल्डर्स के हितों की रक्षा करना, वैल्यूएशन के पेशे को रेगुलेट करना और वैल्यूएशन सेवाओं के लिए बाजार विकसित करना है। ड्राफ्ट बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सेवा प्रदाताओं का रजिस्ट्रेशनइंस्टीट्यूट व्यक्तिगत वैल्यूअर्स, वैल्यूअर संस्थानों (वीआईज़) और वैल्यूएशन प्रोफेशनल संगठनों (वीपीओज़) को रजिस्टर कर सकता है जोकि एसेट क्लास पर आधारित होगा (जैसे प्लांट और मशीनरी, या जमीन और इमारत)। वीआई शिक्षण पाठ्यक्रम तय करेगा और परीक्षाएं संचालित करेगा। वीपीओ वैल्यूएशन के पेशे के विकास के लिए जिम्मेदार होगा। बिल रजिस्ट्रेशन के लिए दूसरी पात्रता शर्तों को भी निर्धारित करता है। उदाहरण के लिए वैल्यूअर के रूप में रजिस्टर करने के लिए किसी व्यक्ति को हायर सेकेंडरी और संबंधित एसेट क्लास के नेशनल वैल्यूएशन प्रोग्राम को पूरा करना होगा।

  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वैल्यूअर्सबिल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वैल्यूअर्स की स्थापना करता है। इंस्टीट्यूट में एक गवर्निंग काउंसिल होगी, जिसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे(i) चेयरपर्सन, (ii) तीन पूर्णकालिक सदस्य जिनमें एक व्यक्ति कानून की डिग्री और प्रोफेशनल अनुभव वाला होगा, (iii) सरकार और रेगुलेटर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले दो पदेन सदस्य, और (iv) आठ अल्पकालिक सदस्य। काउंसिल वैल्यूएशन स्टैंडर्ड्स पर सुझाव देने के लिए एक कमिटी का गठन करेगी। इंस्टीट्यूट कमिटी के सुझावों के आधार पर वैल्यूअर्स के लिए वैल्यूएशन स्टैंडर्ड्स भी निर्दिष्ट करेगी। 

  • इंस्टीट्यूट के कार्यमुख्य कार्यों में शामिल हैं: (i) एक्ट के अंतर्गत सेवा प्रदाताओं की प्रैक्टिस का विकास और रेगुलेशन, (ii) सेवा प्रदाताओं को रजिस्टर करना और उनके प्रदर्शन की निगरानी करनाऔर (iii) वीपीओ के लिए मॉडल उपनियमों को निर्दिष्ट करना।

  • जांच: एक व्यक्ति इंस्टीट्यूट को सूचित कर सकता है कि क्या वह एक्ट के अंतर्गत सेवा प्रदाताओं की सेवाओं से नाखुश है। इंस्टीट्यूट इस जानकारी या उसके रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी के आधार पर सेवा प्रदाता के खिलाफ निरीक्षण या जांच (गंभीर मामलों में) का निर्देश दे सकता है। बिल अनुसूचित अपराधों की श्रेणियों को निर्दिष्ट करता है। उल्लंघन की प्रकृति के आधार पर सेवा प्रदाता के खिलाफ चेतावनी से लेकर लाइसेंस रद्द करने तक के आदेश दिए जा सकते हैं। 30 दिनों के भीतर इन फैसलों के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है।

 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

बायोईंधन समन्वय समिति ने इथेनॉल बनाने के लिए अतिरिक्त चावल के इस्तेमाल को मंजूरी दी 

राष्ट्रीय बायोईंधन समन्वय समिति ने भारतीय खाद्य निगम के पास मौजूद अतिरिक्त चावल  का इस्तेमाल कर इथेनॉल बनाने को मंजूरी दे दी है।[96]  इस प्रकार उत्पादित इथेनॉल का उपयोग अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइज़र बनाने और इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपीकार्यक्रम के अंतर्गत पेट्रोल के साथ मिश्रित करने के लिए किया जाएगा। ईबीपी कार्यक्रम को वैकल्पिक और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 2003 में शुरू किया गया था। पेट्रोल के साथ इथेनॉल को मिश्रित करने से वाहन के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलती है और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता भी कम होती है। 

राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018 के अनुसारयदि कृषि फसल वर्ष के दौरान खाद्यान्न की अधिक आपूर्ति का अनुमान लगाया जाता हैतो राष्ट्रीय बायोईंधन समन्वय समिति की मंजूरी के आधार पर खाद्यान्न की अधिशेष मात्रा को इथेनॉल में परिवर्तित किया जा सकता है।[97]

 

परिवहन

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

रेलवे बोर्ड ने प्रतियोगिता के आधार पर पीएसयूज़ को काम सौंपने की मंजूरी दी

रेलवे बोर्ड ने प्रतियोगिता के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र की यूटिलिटीज़ (पीएसयूज़को कुछ रेलवे कार्य (परियोजनाओं) सौंपने को मंजूरी दी है।[98]  रेलवे बोर्ड के अंतर्गत विभिन्न निदेशालयों जैसे विद्युतीकरणसिग्नलिंगपुलने ऐसे कार्यों को चिन्हित किया है जिन्हें सार्वजनिक उपक्रमों को सौंपा जा सकता है। इन कार्यों में रेलवे विद्युतीकरणसिग्नलिंगदूरसंचारपुलों पर सड़क और रोलिंग स्टॉक शामिल हो सकते हैं।

भारतीय जहाजों पर सीफ़ेरर के रोजगार की शर्तों और नियमों को जारी किया गया

शिपिंग निदेशालय ने मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 1958 की शर्तों के अनुसार भारतीय फ्लैग शिप्स पर सीफ़ेरर के रोजगार के लिए नियम और शर्तें जारी कीं।[99]  इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • तटीय जहाज: इन्हें निम्नलिखित को शामिल करने के लिए परिभाषित किया गया है: (i) 6,000 सकल टन भार (जीटीसे कम और 8,000 किलोवॉट मुख्य प्रोप्लशन शक्ति से कम, (ii) भारतीय बंदरगारों पर काम करने वाले 10,000 जीटी से कम और 10,000 किलोवॉट मुख्य प्रोप्लशन शक्ति से कम के ड्रेजर, (iii) कुछ तेल टैंकर, (iv) किसी भी रूप में थोक रसायन या गैस ले जाने वाले जहाजऔर (v) सैन्य और सरकारी जहाज जोकि किसी भी वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिए उपयोग नहीं किए जाते।

  • सामूहिक सौदेबाजी का समझौता: मर्चेंट शिपिंग (मैरीटाइन लेबर) नियम, 2016 में सामूहिक सौदेबाजी का समझौता दिया गया है। इसमें सीफ़ेरर्स के लिए रोजगार के विस्तृत नियम और शर्तें शामिल हैं जिन पर जहाज-मालिकों के संघों और सीफ़ेरर्स के प्रतिनिधि संघों के बीच सहमति हुई है। जारी की गई शर्तों में कहा गया है कि इस समझौते में एक वेल्फेयर फंड का प्रावधान होना चाहिए जिसमें शिपिंग कंपनियों को सीफ़ेरर्स वेलफेयर फंड सोसायटी और सीमेन प्रोविडेंट फ़ंड ऑर्गनाइजेशन में अंशदान देना चाहिए। जहाज-मालिक इनके अतिरिक्त लाभ प्रदान कर सकते हैं। हालांकिये सामूहिक सौदेबाजी समझौते का हिस्सा नहीं होना चाहिए। इसके अतिरिक्त शिपिंग कंपनियों द्वारा किए जाने वाले इस तरह के अंशदान को सीफ़ेरर के देय वेतन से नहीं काटा जाएगा।

  • समझौता जेंडर न्यूट्रल होना चाहिए और उसे मातृत्व लाभ एक्ट, 1961 के प्रावधानों का पालन करना होगा। विकलांगता मुआवजा उपचार की लागत और देय वेतन के अतिरिक्त होना चाहिए। 50या उससे अधिक विकलांगता को पूर्ण विकलांगता माना जाएगा।

  • जहाज मालिकों की जिम्मेदारीसमझौते में कानूनी सहायता प्रदान करने और कानूनी खर्चों को वहन करने की जिम्मेदारी जहाज-मालिक की होनी चाहिए। अगर रोजगार के दौरान सीफेरर किसी बंदरगाह पर फंस जाता है, हिरासत में लिया जाता है या गिरफ्तार किया जाता है तो इस जिम्मेदारी में क्या-क्या शामिल किया जाएगा, उसका तरीका भी निर्दिष्ट होना चाहिए। 

 

गृह मामले

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

अरुणाचल प्रदेश के कुछ जिलों और पुलिस स्टेशनों में आफ्स्पा अब भी लागू

गृह मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों (यानीतिरपचांगलांगऔर लोंगडिंग) में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) एक्ट, 1958 (आफ्स्पाको लागू रखने की तारीख 30 सितंबर, 2020 तक बढ़ा दी है।[100] इसने एक्ट को चार पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में भी बढ़ाया है। ये हैं: (i) नामसाई जिले में नामसाई और महादेवपुर स्टेशन, (ii) लोअर दिबांग घाटी जिले में रोइंग स्टेशन और (iii) लोहित जिले में सुनपुरा स्टेशन।

 

कृषि

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

आईएमडी ने दक्षिण पश्चिमी मानसून वर्ष 2020 के लिए पूर्वानुमान जारी किया

भारत के मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडीने 2020 में दक्षिण-पश्चिम मानसून वर्षा के लिए अपना पहला लॉन्ग रेंज (मौसमी) पूर्वानुमान जारी किया।[101] जून-सितंबर 2020 की अवधि के दौरान मानसून की मौसमी वर्षा +/+- 5% की त्रुटि के साथ लंबी अवधि के औसत (एलपीए) का 100% होने का अनुमान है। एलपीए एक क्षेत्र में 1961 से 2010 की अवधि के दौरान औसत वर्षा हैजो देश के लिए 88 सेमी है। 96-104% के बीच बारिश होने पर बारिश को सामान्य माना जाता है।

2019 मेंदक्षिण-पश्चिम मानसून वर्षा का अनुमान एलपीए का 96% थाजबकि वास्तविक वर्षा एलपीए का 110% थी।[102]

कैबिनेट ने पीएंडके उर्वरकों के लिए संशोधित पोषण आधारित सब्सिडी दर को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2020-21 के लिए पीएंडके उर्वरकों के लिए संशोधित पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी दरों को मंजूरी दी।[103] पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना के अंतर्गतउर्वरक निर्माताओं और आयातकों को उनकी पोषक सामग्री के आधार पर फॉस्फेटिक और पोटैसिक (पीएंडकेउर्वरकों की बिक्री के लिए सब्सिडी प्रदान की जाती है। 2020-21 के लिए अनुमोदित सब्सिडी की दर सभी चार पोषक तत्वों के लिए 2019-20 की सब्सिडी दरों से कम है (तालिका 1)[104]

तालिका 1: 2020-21 में पीएंडके उर्वरकों के लिए पोषण आधारित सब्सिडी दर (प्रति किलो पर रुपए) 

पोषक तत्व

2019-20

2020-21

परिवर्तन (%)

नाइट्रोजन (एन)

18.901

18.789

-0.6%

फॉस्फेटिक (पी) 

15.216

14.888

-2.2%

पोटाश (के) 

11.124

10.116

-9.1%

सल्फर (एस) 

3.562

2.374

-33.4%

Sources:  Ministry of Chemicals and Fertilisers; PRS.

पीएंडके उर्वरकों के लिए सब्सिडी प्रदान करने की लागत 2020-21 में 22,187 करोड़ रुपए है जोकि 2019-20 में 22,876 करोड़ रुपए से 3% कम होने का अनुमान है।

 

मीडिया और ब्रॉडकास्ट

Saket Surya (saket@prsindia.org)

एफएम रेडियो चैनलों की नीलामी के लिए आरक्षित मूल्य पर ट्राई के सुझाव

भारतीय दूरसंचार रेगुलेटरी अथॉरिटी (ट्राई) ने एफएम रेडियो चैनलों की नीलामी के लिए आरक्षित मूल्य पर सुझाव जारी किए[105] अक्टूबर, 2019 में ट्राई ने इस संबंध में एक परामर्श पत्र जारी किया था।[106] वर्तमान में एफएम रेडियो चैनलों के संचालन की अनुमति शहर के आधार पर दी जाती है और एक बार प्रवेश शुल्क के माध्यम से दी जाती है। यह शुल्क नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से एक सफल बोली राशि होता है। यह 2011 में घोषित एफएम रेडियो प्रसारण नीति के नवीनतम चरण (चरण- III) के अंतर्गत किया जा रहा है।[107]  

नीति के अंतर्गतनीलामी से पहले शहरवार आरक्षित मूल्य की घोषणा की जाती है। यह नीलामी के अंतर्गत किसी वस्तु की बिक्री के लिए स्वीकार्य न्यूनतम मूल्य है। इसके अतिरिक्त ऑपरेटर वार्षिक लाइसेंस शुल्क का भी भुगतान करते हैंजो वार्षिक सकल राजस्व के 4% या प्रवेश शुल्क के 2.5% के बराबर होता हैजो भी अधिक हो।106  चरण- III नीति में एक लाख से अधिक की आबादी वाले सभी शहरों और जम्मू एवं कश्मीर तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र सहित सीमावर्ती क्षेत्रों के कुछ निर्दिष्ट शहरों में निजी एफएम रेडियो चैनल स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।106  

सूचना और प्रसारण मंत्रालय 283 शहरों में एफएम रेडियो चैनलों के लिए नवीनतम दौर की नीलामी आयोजित करने का इरादा रखता है।106 इसीलिए मंत्रालय ने नीलामी के लिए आरक्षित मूल्यों को निर्धारित करने हेतु ट्राई से सुझाव मांगे थे।106 इस संबंध में ट्राई के मुख्य सुझाव निम्नलिखित हैं:

  • आरक्षित मूल्य: किसी शहर में रेडियो चैनलों के लिए आरक्षित मूल्य उस शहर में एफएम रेडियो चैनल के मूल्यांकन के 0.8 गुना पर निर्धारित किया जाना चाहिए। हालांकिउत्तर-पूर्वजम्मू और कश्मीरऔर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित शहरों के लिए कीमत 0.4 गुना निर्धारित की जानी चाहिए। 10 सीमावर्ती शहरों के लिए आरक्षित मूल्य लाख रुपए प्रति चैनल होना चाहिए।

  • प्रसारण तकनीक का विकल्प: चरण- III के अंतर्गत चैनलों की नीलामी प्रसारण के लिए टेक्नोलॉजी के विकल्प को सीमित नहीं करना चाहिए। जहां प्रसारकों ने डिजिटल तकनीक का चयन किया हैउन्हें एकल आवृत्ति पर तकनीकी व्यवहार्यता के अधीन एक से अधिक चैनल प्रसारित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

  • प्रीक्वेंसी के स्वामित्व की अधिकतम सीमा हटाना: वर्तमान मेंकिसी भी इकाई को देश में आवंटित कुल एफएम रेडियो चैनलों का 15% से अधिक रखने की अनुमति नहीं है। ट्राई ने इस सीमा को वापस लेने का सुझाव दिया है।

ट्राई ने सेट-टॉप बॉक्स की इंटरऑपरेबिलिटी पर सुझाव जारी किए

ट्राई ने सेट-टॉप बॉक्स की इंटरऑपरेबिलिटी पर सुझाव जारी किए।[108]  नवंबर 2019 में ट्राई ने इस संबंध में एक परामर्श पत्र जारी किया था।[109] सेट-टॉप बॉक्स एक ऐसा उपकरण होता है जो डिजिटल सिग्नल प्राप्त करता हैइसे डीकोड करता है और टेलीविजन पर डिस्प्ले करता है। वर्तमान मेंएक सेवा प्रदाता के सेट-टॉप बॉक्स का उपयोग किसी अन्य सेवा प्रदाता की टेलीविजन प्रसारण सेवाओं तक पहुंचने के लिए नहीं किया जा सकता है। यदि कोई ग्राहक अपने सेवा प्रदाता को बदलना चाहता हैतो उसे एक नया सेट-टॉप बॉक्स खरीदना होगा। 

सेट-टॉप बॉक्स की इंटरऑपरेबिलिटी उपभोक्ताओं को अपने सेट-टॉप बॉक्स को बदलने के बिना अपने सेवा प्रदाता को बदलने की स्वतंत्रता प्रदान करेगी। सेट-टॉप बॉक्स की इंटरऑपरेबिलिटी पर ट्राई के प्रमुख सुझाव हैं:

  • इंटरऑपरेबिलिटी की अनिवार्यता: देश के सभी सेट-टॉप बॉक्स को तकनीकी इंटरऑपरेबिलिटी को सपोर्ट करना चाहिए। सूचना और प्रसारण मंत्रालय केबल टीवी से संबंधित नियमों और लाइसेंसिंग शर्तों में संशोधन कर सकता है ताकि सेट-टॉप बॉक्स की इंटरऑपरेबिलिटी को अनिवार्य किया जा सके। तकनीकी बाधाओं के कारणसेट-टॉप बॉक्स की इंटरऑपरेबिलिटी डायरेक्ट टू होम सेगमेंट के भीतर और केबल सेगमेंट के भीतर लागू होगी। मंत्रालय द्वारा अधिसूचना की तारीख के छह महीने के भीतर ऑपरेटरों को इंटरऑपरेबल सेट-टॉप बॉक्स अपनाना होगा।

  • डिजिटल टीवी के माध्यम से इंटरऑपरेबिलिटी: ट्राई ने भारत में सभी डिजिटल टीवी सेटों के लिएउपग्रह और केबल प्लेटफार्मों दोनों के माध्यम से टीवी कन्टेंट के रिसेप्शन हेतु निम्नलिखित को अनिवार्य करने का सुझाव दिया (i) यूएसबी पोर्ट आधारित सामान्य इंटरफ़ेस और (ii) अंतर्निहित ट्यूनर।

  • समन्वय और कार्यान्वयन समिति: मंत्रालय द्वारा सदस्यों के साथ एक समन्वय समिति की स्थापना की जा सकती है: (i) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, (ii) ट्राई, (iii) भारतीय मानक ब्यूरोऔर (iv) टीवी निर्माताओं के प्रतिनिधि।

ट्राई ने टेलीविजन ऑडियंस मैनेजमेंट और रेटिंग सिस्टम पर सुझाव जारी किए

ट्राई ने टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट एंड रेटिंग सिस्टम पर सुझाव जारी किएजिसे टीआरपी प्रणाली के रूप में भी जाना जाता है।[110]  वर्तमान मेंउद्योग के नेतृत्व वाली संस्था ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बीएआरसीदेश में व्यावसायिक आधार पर टेलीविजन रेटिंग सेवाओं की एकमात्र प्रदाता है। ट्राई ने कहा कि बीएआरसी में संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है ताकि हितों के टकराव की आशंका को कम किया जा सके, उसकी साख में सुधार हो और टीआरपी प्रणाली में पारदर्शिता लाई जा सके। ट्राई के प्रमुख सुझाव हैं:

  • बीएआरसी बोर्ड की संरचना: बीएआरसी बोर्ड में कम से कम 50% स्वतंत्र सदस्य होने चाहिएजिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) मेजरमेंट टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ के रूप में एक सदस्य, (ii) राष्ट्रीय ख्याति के एक सांख्यिकीविद्और (iii) सरकार/रेगुलेटर के दो प्रतिनिधि। इसके अतिरिक्त इसके संबंधित उद्योग संगठनों को समान मतदान का अधिकार होना चाहिए, भले ही इक्विटी होल्डिंग में उनका अनुपात कितना भी हो। चेयरमैनशिप को हर दो साल में संबंधित उद्योग संघों के बीच रोटेट किया जाना चाहिए।

  • बीएआरसी के कार्य: कई डेटा संग्रह और डेटा प्रोसेसिंग एजेंसियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। बीएआरसी का कार्य केवल रेटिंग प्रकाशित करनेकार्यप्रणाली और ऑडिट तंत्र को प्रकाशित करने तक सीमित होने चाहिए।

  • रेटिंग के लिए सैंपल साइज: सैंपल साइज (उन घरों की संख्या का प्रतिनिधित्व करता है जहां ऑडियंस मेजरमेंट डिवाइस को रखा गया है) को मौजूदा 44,000 से बढ़ाकर 2020 के अंत तक 60,000 और 2022 के अंत तक एक लाख तक होना चाहिए। ट्राई ने कहा कि एक बड़ा सैंपल साइज रेटिंग को बेहतर बनाता है।

  • डेटा प्रैक्टिस: बीएआरसी को कम से कम एक वर्ष के लिए सभी प्रासंगिक डेटा रखने चाहिए। बीएआरसी को डेटा प्रोसेसिंग को इस तरह से स्वचालित करना चाहिए कि अंतिम बीएआरसी रेटिंग निर्धारित करने में किसी भी मैनुअल हस्तक्षेप की आवश्यकता न हो। सब कुछ मूल्यांकन पद्धति और सैंपल साइज की शर्तों के अनुरूप हो, इसके लिए बीएआरसी को एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा वार्षिक ऑडिट कराना चाहिए। 

संचार

Saket Surya (saket@prsindia.org)

ट्राई ने स्पेक्ट्रम शेयरिंग के लिए स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज पर टिप्पणियों को आमंत्रित किया

भारतीय दूरसंचार रेगुलेटरी अथॉरिटी (ट्राईने स्पेक्ट्रम शेयरिंग के मामलों में स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (एसयूसीके आकलन की कार्यप्रणाली पर एक परामर्श पत्र जारी किया।[111]

मोबाइल एक्सेस सेवाएं प्रदान करने वाले लाइसेंसधारियों को एसयूसी का भुगतान करना होता है जो कि समायोजित सकल राजस्व (एजीआरके प्रतिशत के रूप में होता है। क्वांटम और लाइसेंसधारी द्वारा स्वामित्व वाले स्पेक्ट्रम बैंड के प्रकार के आधार पर ये शुल्क 3% से 8% के बीच होते हैं। सकल राजस्व से कुछ शुल्क और करों को घटाने के बाद एजीआर मिलता है जैसे कि अन्य सेवा प्रदाताओं पर रोमिंग शुल्क और सकल राजस्व में शामिल किसी भी सेवा कर और बिक्री कर।

स्पेक्ट्रम शेयरिंग के मामले मेंस्पेक्ट्रम शेयर करने वाले प्रत्येक लाइसेंसधारी की एसयूसी दर में 0.5% की वृद्धि की गई है। यह बढ़ी हुई दर लाइसेंसधारियों के स्वामित्व वाले सभी स्पेक्ट्रम बैंडों पर लागू होती है। दूरसंचार विभाग को बताया गया था कि बढ़ी हुई दर केवल साझा किए जा रहे बैंडों पर लागू होनी चाहिएक्योंकि किसी विशेष स्पेक्ट्रम बैंड के लिए स्पेक्ट्रम शेयरिंग की अनुमति है। इस संदर्भ में ट्राई ने निम्नलिखित पर विचार किए:

  • क्या बढ़ी हुई दर केवल स्पेक्ट्रम बैंड पर लागू होनी चाहिए जो कि शेयर की गई है और लाइसेंसधारियों के स्वामित्व वाले सभी स्पेक्ट्रम बैंडों पर नहीं,

  • एसयूसी दर में वृद्धि स्पेक्ट्रम बंटवारे में एक बाधा हैऔर ऐसी वृद्धि को समाप्त किया जाना चाहिएऔर

  • क्या स्पेक्ट्रम शेयरिंग दिशानिर्देशों में किसी बदलाव की जरूरत है।

परामर्श पत्र पर टिप्पणियां 20 मई, 2020 तक आमंत्रित हैं।

 

[1] “Consumer Price Index Numbers on Base 2012=100 for Rural, Urban and Combined for the month of March 2020, Press Information Bureau, Ministry of Statistics and Programme Implementation, April 13, 2020.

[2] “Index Numbers of Wholesale Price in India (Base2011-12=100Review for the month of March 2020, Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, April 15, 2020.

[3] Ministry of Health and Family Welfare website, last accessed on March 31, 2020, https://www.mohfw.gov.in/index.html.

[5] “Promulgation of an Ordinance to amend the Epidemic Diseases Act, 1897 in the light of the pandemic situation of COVID-19, Press Information Bureau, Ministry of Health and Family Welfare, April 22, 2020.

[6] G.S.R240(E), Gazette of India, Lok Sabha Secretariat, April 7, 2020, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/219019.pdf.

[9] “Cabinet approves Non-operation of MPLADs for two years (2020-21 and 2021-22for managing COVID 19, Press Information Bureau, Cabinet, April 6, 2020.

[10] Order No1-137/2018-Mit-II(FTS-10548), National Disaster Management Authority, April 14, 2020, https://ndma.gov.in/images/covid/NDMA-Order-for-extending-the-Lockdown-Period-till-030520.pdf.

[12] Order No40-3/2020-DM-I(A), Ministry of Home Affairs, April 24, 2020, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHAopening_24042020.pdf.

[13] Order No40-3/2020-DM-I(A), Ministry of Home Affairs, April 29, 2020, https://www.mha.gov.in/sites/default/files/MHA_29042020.PDF.

[15] “Government of India sanctions Rs15000 crores for India COVID-19 Emergency Response and Health System Preparedness Package, Press Information Bureau, Ministry of Health and Family Welfare, April 9, 2020

[16] Governors Statement, Press Releases, Reserve Bank of India, April 17, 2020, https://prsindia.org/files/covid19/notifications/2841.IND_RBI_GovAddress_17042020.PDF.

[17] Statement on Developmental and Regulatory Practices, Reserve Bank of India, Press Releases, March 27, 2020, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=49582.

[18] “COVID-19 – Regulatory Package, Notifications, Reserve Bank of India, March 27, 2020, https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=11835.

[19] “Declaration of dividends by banks, Notifications, Reserve Bank of India, April 17, 2020, https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=11869&Mode=0.

[20] “Basel III Framework on Liquidity Standards – Liquidity Coverage Ratio (LCR)”, Notifications, Reserve Bank of India, April 17, 2020, https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=11870&Mode=0.

[21] “RBI Announces ` 50,000 crore Special Liquidity Facility for Mutual Funds (SLF-MF)”, Press Releases, Reserve Bank of India, April 27, 2020, https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=49728.

[22] “Interest Subvention (ISand Prompt Repayment Incentive (PRIfor Short Term Crop Loans during the years 2018-19 and 2019-20Extended Period on account of Covid-19, Notifications, Reserve Bank of India, April 21, 2020, https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=11877.

[23] “Interest Subvention Scheme for Short Term Crop Loans during the years 2018-19 and 2019-20, Notifications, Reserve Bank of India, March 7, 2019, https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=11494.

[24] Review of WMA Limit for Government of India for remaining part of the first half of the Financial Year 2020-21 (April 2020 to September 2020)” Press Release, Reserve Bank of India, April 20, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR2249165447564980433596041B3A6EC0A048.PDF.

[25] Review of Limits of Way and Means Advances (WMAof States/UTs, Press Release, Reserve Bank of India, April 17, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR2233E081A5B121544797AB4E8A95F9514B56.PDF.

[26] WMA Limit for Government of India for the first half of the Financial Year 2020-21 (April 2020 to September 2020)”, Press Release, Reserve Bank of India, March 31, 2020, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR21650F0950A0110D4C5092A95937F1C0D910.PDF.

[27] ”Ban on domestic flight operations – Extension of MoCA Order dated 23rd March, 2020, No4/1/2020-IR, Ministry of Civil Aviation, April 14, 2020, No4/1/2020-IR, Ministry of Civil Aviation, April 14, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130619205

[28] “Travel and Visa restrictions related to COVID-19” https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130619206 

[29] Booking of Airlines ticket for journey post lockdown during the current Covid-19, No4/1/2020-IR, Ministry of Civil Aviation, April 16, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130619367  

[30] “Refund of air fare during the lockdown period, suspending domestic and international flight operations, No4/1/2020-IR, Ministry of Civil Aviation, April 16, 2020, https://dgca.gov.in/digigov-portal/Upload?flag=iframeAttachView&attachId=130619295

[31] “All passenger train services cancelled till 3rd May 2020 in view of COVID 19 lockdown, Press Information Bureau, Ministry of Railways, April 14, 2020

[32] Publication of media reports on travel protocol etc of trains passengers on resumption of train servicesAdvisory for MediaPress Information Bureau, Ministry of Railways, April 10, 2020.

[33] “Indian Railways announces slew of Incentives for Freight Traffic during COVID pandemic” Press Information Bureau, Ministry of Railways, April 22, 2020.

[34] “In big boost to provide protection to Health Care professionals in fight against COVID 19, Indian Railways plans to produce over 30,000 coveralls (PPEsin April 2020, Press Information Bureau, Ministry of Railways, April 15, 2020.

[35] “SOPs issued for sign-on and sign-off of Indian Seafarers at Indian Ports and their movement, Press Information Bureau, Ministry of Shipping, April 22, 2020

[36] Limited registration of BS-IV vehicles to be allowed as per Apex Court order dated 27.3.2020, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, April 1, 2020

[37] Writ Petition(s)(CivilNo(s). 13029/1985, M.C.Mehta vs Union of India, March 27, 2020, https://main.sci.gov.in/supremecourt/1985/63998/63998_1985_0_1_21579_Order_27-Mar-2020.pdf

[38] “Central Government constitutes 6 Inter-Ministerial Central Teams to make assessment of situation and augment State efforts to fight and contain spread of COVID-19 effectively, Press Information Bureau, Ministry of Home Affairs, April 20, 2020.

[39] Press Note No3, (2020 Series), Department for Promotion of Industry and Internal Trade, April 17, 2020, https://dipp.gov.in/sites/default/files/pn3_2020.pdf.

[40] Notification No 59/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, April 4,2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%2059%20Final%20Eng_0.pdf.

[41] Notification No 2/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, April 4,2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%202%20Final_0.pdf.

[42] Notification No 03/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, April 17, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Notification%20No.%2003%20dt%2017.04.2020_0.pdf.

[43] Amendment in Export Policy of APIs and formulations made from these APIs, Ministry of Commerce and Industry, The Gazette of India, March 3, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/216551.pdf.

[44] Notification No 54/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, March 25, 2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/notification%2054_0.pdf

[45] Notification No 1/2015-20, Directorate General of Foreign Trade, Ministry of Commerce and Industry, April 4,2020, https://dgft.gov.in/sites/default/files/Noti%201%20Final%20Eng_0.pdf.

[46] Official Spokesperson's response to media queries on COVID19 related drugs and pharmaceuticals, Ministry of External Affairs, April 7, 2020, https://www.mea.gov.in/response-to-queries.htm?dtl/32619/Official_Spokespersons_response_to_media_queries_on_COVID19_related_drugs_and_pharmaceuticals.

[47] Finance Minister announces Rs 1.70 Lakh Crore relief package under Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana for the poor to help them fight the battle against Corona Virus, Press Information Bureau, Ministry of Finance, March 26, 2020.

[48] “A Scheme to implement the PMGKY package for credit of employees’ and employers share of EPF and EPS contributions (24of wagesfor three months by Govtof India, Ministry of Labour and Employment, https://www.epfindia.gov.in/site_docs/PDFs/Circulars/Y2020-2021/SchemeCOVID_24_10042020.pdf

[49] Insolvency and Bankruptcy Board of India (Insolvency Resolution Process for Corporate Persons) (Second AmendmentRegulations, 2020, https://ibbi.gov.in/uploads/legalframwork/ba2702f58a4ed1841e0e7a9a71ba40ec.pdf.

[50] Insolvency and Bankruptcy Board of India (Insolvency Resolution Process for Corporate Persons) (Third AmendmentRegulations, 2020, https://ibbi.gov.in/uploads/legalframwork/3d8c8efd906d320e296833445c91a0a4.pdf.

[51] Insolvency and Bankruptcy Board of India (Liquidation Process) (Second AmendmentRegulations, 2020, https://ibbi.gov.in/uploads/legalframwork/51250311f7791102b612ff9c9810b997.pdf.

[52] Insolvency and Bankruptcy Board of India (Insolvency Professionals) (AmendmentRegulations, 2020, https://ibbi.gov.in/uploads/legalframwork/ac467ecac3ad7a0f66433d3cbedfa03d.pdf.

[53] Insolvency and Bankruptcy Board of India (Model Bye-Laws and Governing Board of Insolvency Professional Agencies) (AmendmentRegulations, 2020, https://ibbi.gov.in/uploads/legalframwork/685f38c7444a9a6b8ddad11ac23c90cf.pdf.

[54] In reGuidelines for Court Functioning Through Video Conferencing During COVID-19 Pandemic, April 6, 2020, https://main.sci.gov.in/supremecourt/2020/10853/10853_2020_0_1_21588_Judgement_06-Apr-2020.pdf.

[55] “Issues related to Examinations and Academic Calendar, University Grants Commission, April 17, 2020, https://www.ugc.ac.in/pdfnews/2611352_Letter---Issues-related-to-examinations-and-academic-calendar.pdf.

[56] “UGC Guidelines on Examinations and Academic

Calendar for the Universities in View of COVID-19

Pandemic and Subsequent Lockdown, University Grants Commission, April 29, 2020, https://www.ugc.ac.in/pdfnews/4276446_UGC-Guidelines-on-Examinations-and-Academic-Calendar.pdf.

[61] “Power minister approves major relief measures for power sector, Ministry of Power, Press Information Bureau, March 28, 2020.

[62] FNo283/20/2020-GRID SOLAR (ii), Ministry of New and Renewable Energy, April 1, 2020, https://mnre.gov.in/img/documents/uploads/file_f-1585801699131.pdf.

[63] “MNRE Grants Extension for RE Projects considering disruption on account of lockdown due to COVID-19 for a period of 30 Days beyond lockdown, Ministry of Power, Press Information Bureau, April 21, 2020.

[64] “MNRE extends effective date for implementation of Approved Lists of Models and Manufacturers of Solar PV Modules and Solar PV Cells by six months to 30.09-2020, Ministry of New and Renewable Energy, Press Information Bureau, April 21, 2020.

[65] “CIL to extend Usance LC facility to Power and Non-Power consumers, Ministry of Coal, Press Information Bureau, April 9, 2020.

[66] G.S.R237(E), Ministry of Health and Family Welfare, April 4, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/219008.pdf.

[67] “Interim Guidelines on laboratory biosafety to handle COVID-19 specimen for R&D purpose, Department of Biotechnology, April 8, 2020, http://dbtindia.gov.in/sites/default/files/OM_Interim_Guidance_COVID.pdf.

[68] “Guidance on regulations for the transport of infectious substances 20172018, World Health Organisation, https://www.who.int/ihr/publications/WHO-WHE-CPI-2017.8/en/.

[69] “Regulations and Guidelines on Biosafety of Recombinant DNA Research and Biocontainment, 2017, Department of Biotechnology, Ministry of Science and Technology, https://rcb.res.in/upload/Biosafety_Guidelines.pdf.

[70] “Revised Guidelines for Common Bio-medical Waste Treatment and Disposal Facilities (2016), Central Pollution Control Board, https://jspcb.nic.in/upload/uploadfiles/files/Guidelines%20for%20CBWTF.pdf.

[71] “UIDAI allows Aadhaar updation facility through CSCs, Press Information Bureau, Ministry of Electronics and Information Technology, April 28, 2020.

[72] Common Services Centres, Ministry of Electronics and Information Technology, https://meity.gov.in/content/common-services-centers-0.

[73] “CSC to play role in shaping New India, Press Information Bureau, Ministry of Electronics and Information Technology, November 27, 2018.

[74] “Access of Digital Services through Common Services Centres, Unstarred Question No 1853, answered on December 28, 2018, Ministry of Electronics and Information Technology, Rajya Sabha.

[75] “Advisory regarding containing and management of COVID-19 in National Parks/Sanctuaries/Tiger Reserves.”, Ministry of Environment, Forests and Climate Change, Press Information Bureau, April 6, 2020.

[76] “Central Zoo Authority advises zoos in India to remain on high alert in view of a Tiger found COVID 19 positive in New York.”, Ministry of Environment, Forests and Climate Change, Press Information Bureau, April 6, 2020.

[77] Letter no11048/4/2020-Water-DDWS, Advisory in compliance of Honble Supreme Courts order date 03.04.2020 in WP (PILNo10808/2020, Ministry of Jal Shakti, April 13, 2020, https://jalshakti-ddws.gov.in/sites/default/files/Advisory.pdf.

[78] Letter noeG/15/2018-NIC-MODWS, Allocation and release of funds in 2020-21 under Jal Jeevan Mission extension of deadline for 31st March, 2020 ending data updation, Ministry of Jal Shakti, April 20, 2020, https://jalshakti-ddws.gov.in/sites/default/files/Extension_of_deadline_2020.pdf.

[79] Letter noeG/15/2018-NIC-MOWS, Jal Jeevan Mission Extension of deadline for data updation (2019-20), Ministry of Jal Shakti, April 20, 2020, https://jalshakti-ddws.gov.in/sites/default/files/Extension_of_deadline.pdf.

[80] Website of Jal Jeevan Mission, Ministry of Jal Shakti, last accessed on April 27, 2020, https://jaljeevanmission.gov.in/.

[81] No18-5/2015-CS-I(Pt.), Department of Telecommunications, March 13, 2020, https://dot.gov.in/sites/default/files/Relaxation%20inT%26C %20of%20OSP%2013.3.20.PDF.

[82] No18-5/2015-CS-I(Pt.), Department of Telecommunications, April 15, 2020, https://dot.gov.in/sites/default/files/2020_04_15%20WFH%20Relaxations%20OSP.pdf.

[83] “PIB sets up COVID19 Fact Check Unit, Ministry of Information and Broadcasting, Press Information Bureau, April 1, 2020.

[84] J-11013/20/2020-CPGRAMS/EW, Ministry of Information and Broadcasting, April 12, 2020, https://prsindia.org/files/covid19/notifications/2567.IND_I&B_Nodal_Officer_Apr_12.pdf.

[85] The Indian Medicine Central Council (AmendmentOrdinance, 2020, https://www.prsindia.org/billtrack/indian-medicine-central-council-amendment-ordinance-2020

[87] G.S.R248(E), Cigarettes and other Tobacco Products (Packaging and LabellingAmendment Rules, 2020, Ministry of Health and Family Welfare, April 13, 2020, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2020/219047.pdf.

[88] Constitution of task force for drawing up National Infrastructure Pipeline of Rs100 Lakh Crore from FY 2019-20 to FY 2024-25, Press Information Bureau, Ministry of Finance, September 7, 2019.

[89] Volume I, Report of the Task Force National Infrastructure Pipeline, Department of Economic Affairs, Ministry of Finance, April 30, 2020, https://dea.gov.in/sites/default/files/Report%20of%20the%20Task%20Force%20National%20Infrastructure%20Pipeline%20%28NIP%29%20-%20volume-i_0.pdf.

[90] Volume II, Report of the Task Force National Infrastructure Pipeline, Department of Economic Affairs, Ministry of Finance, April 30, 2020, https://dea.gov.in/sites/default/files/Report%20of%20the%20Task%20Force%20National%20Infrastructure%20Pipeline%20%28NIP%29%20-%20volume-ii_0.pdf.

[91] Proposed Amendment to Electricity Act, 2003, Ministry of Power, April 17, 2020, https://powermin.nic.in/sites/default/files/webform/notices/Draft_Electricity_Amendment_Bill_2020_for_comments.pdf.

[93] Draft Transgender Persons

(Protection of RightsRules, 2020, Ministry of Social Justice and Empowerment, April 17, 2020, http://socialjustice.gov.in/writereaddata/UploadFile/draftrule1604.pdf

[94] Report no8The Industrial Relations Code, 2019Standing Committee on Labour and Employment, April 23, 2020, http://164.100.47.193/lsscommittee/Labour/17_Labour_8.pdf.

[95] “Report of the Committee of Experts to Examine the Need for an Institutional Framework for Regulation and Development of Valuation Professionals, Volume 1, Ministry of Corporate Affairs, April 2, 2020, http://www.mca.gov.in/Ministry/pdf/Notice_14042020.pdf.

[96] “Surplus rice available with FCI allowed to be converted to ethanol for utilization in making alcohol-based hand-sanitizers and for blending in Petrol, Press Information Bureau, Ministry of Petroleum and Natural Gas, April 20, 2020.

[97] “National Biofuel Policy 2018, Ministry of Petroleum and Natural Gas, http://petroleum.nic.in/sites/default/files/biofuelpolicy2018_1.pdf.

[99] “Terms and Conditions for employment of seafarers engaged on Indian flag ships, Merchant Shipping Notice No 7 of 2020, Directorate General of Shipping, Ministry of Shipping, April 24, 2020, https://www.dgshipping.gov.in/writereaddata/News/202004240157109585517MSN_07of2020.pdf

[100] S.O1235(E), Gazette of India, Ministry of Home Affairs, April 1, 2020, http://www.egazette.nic.in/WriteReadData/2020/218988.pdf.

[101] “Long Range Forecast for the 2020 Southwest Monsoon Season Rainfall, Press Release, India Meteorological Department, Ministry of Earth Sciences, April 15, 2020, https://mausam.imd.gov.in/backend/assets/press_release_pdf/1st_stage_LRF_apr_2020_English.pdf.

[102] “End of Season Report for the 2019 Southwest Monsoon, India Meteorological Department, Ministry of Earth Sciences, January 31, 2020, https://mausam.imd.gov.in/imd_latest/contents/season_report.php.

[103] Cabinet approves fixation of Nutrient Based Subsidy (NBSrates for Phosphatic and Potassic (P&Kfertilizers for the year 2020-21, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, April 22, 2020.

[104] Cabinet approves Nutrient Based Subsidy (NBSrates for Phosphatic and Potassic (P&Kfertilizers for the year 2019-20, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, July 31, 2019.

[105] Recommendations on Reserve Price for Auction of FM Radio channels, Telecom Regulatory Authority of India, April 10, 2020, https://trai.gov.in/sites/default/files/Recommendation_FM_11042020_0.pdf.

[106] “Consultation Paper on Reserve Price for auction of FM Radio channels, TRAI, October 16, 2019,  https://main.trai.gov.in/sites/default/files/CP_16102019_0.pdf.

[107] “Policy Guidelines On Expansion Of FM Radio Broadcasting Services Through Private Agencies (Phase-III), Ministry of Information and Broadcasting, July 25, 2011, http://www.aroi.in/pdf/PolicyGuidelines_FMPhaseIII.pdf.

[108] Recommendations on Interoperability of Set-Top Box, Telecom Regulatory Authority of India, April 11, 2020, https://trai.gov.in/sites/default/files/Recommendation_11042020_0.pdf.

[109] “Consultation Paper On Interoperability of Set Top Box, Telecom Regulatory Authority of India, November 11, 2019,  https://main.trai.gov.in/sites/default/files/CP_STB_Interoperable_11112019_0.pdf.

[110] “Recommendations on Review of Television Audience Measurement and Rating System in India, Telecom Regulatory Authority of India, April 28, 2020, https://trai.gov.in/sites/default/files/Recommendation_28042020_0.pdf.

[111] “Consultation Paper on Methodology of applying Spectrum Usage Charges (SUCunder the weighted average method of SUC assessment, in cases of Spectrum Sharing, Telecom Regulatory Authority of India, April 22, 2020, https://trai.gov.in/sites/default/files/CP_22.04.2020_Methodology_for_SUC.pdf.

 

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