अक्टूबर 2019

अक्टूबर 2019

इस अंक की झलकियां

स्टैंडिंग कमिटी ने 2019-20 के दौरान जांच हेतु विषयों को चिन्हित किया

चिन्हित विषयों में भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का कार्यान्वयन, आयुष्मान भारत का कार्यान्वयन और भारत में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर शामिल हैं।

पॉलिसी रेपो रेट 5.15% पर, रिवर्स रेपो रेट में गिरावट, 4.9% पर

मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट, प्रत्येक को 0.25% कम किया। कमिटी ने मौद्रिक नीति के समायोजन के रुख को बरकरार रखने का फैसला किया।

कैबिनेट ने बीएसएनएल और एमटीएनएल के लिए रिवाइवल प्लान को मंजूरी दी

दोनों पीएसयूज़ को 4जी स्पेक्ट्रम आबंटित किए जाएंगे। केंद्र सरकार स्पेक्ट्रम आबंटन और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के लिए धनराशि प्रदान करेगी। उसने दोनों पीएसयूज़ के विलय को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

सर्वोच्च न्यायालय ने टेलीकॉम कंपनियों को 92,000 करोड़ रुपए का बकाया चुकाने का निर्देश दिया

टेलीकॉम कंपनियों से कहा गया है कि वे दूरसंचार विभाग को अपने सकल राजस्व का 8% वार्षिक लाइसेंस फीस के रूप में चुकाएं। सर्वोच्च न्यायालय ने विभाग की सकल राजस्व की परिभाषा को बरकरार रखा और कंपनियों को बकाया चुकाने का निर्देश दिया।  

कैबिनेट ने 2019-20 में रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्यों को मंजूरी दी 

एमएसपी गेहूं, जौ, चना, दालों, सफेद और पीली सरसों, और कुसम्भ के लिए मंजूर की गई है और यह 2019-20 में बोई जाने वाली फसलों पर लागू होगी। गेहूं के लिए एमएसपी में 4.6% की वृद्धि है और यह 1,925 रुपए प्रति क्विंटल मंजूर की गई है।

सीड्स एक्ट, 1966 का स्थान लेने के लिए ड्राफ्ट सीड्स बिल सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी

ड्राफ्ट बिल उत्पादन, वितरण, बिक्री, आयात और निर्यात के दौरान बीजों की गुणवत्ता को रेगुलेट करने का प्रयास करता है। यह ब्रांड नेम से बेचे जाने वाले बीजों को छोड़कर किसानों द्वारा उत्पादित बीजों पर लागू नहीं होगा।

ग्रुप इनसॉल्वेंसी पर वर्किंग ग्रुप ने रिपोर्ट सौंपी

वर्किंग ग्रुप ने सुझाव दिया कि ग्रुप इनसॉल्वेंसी के लिए एकीकृत फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया जाए। रिपोर्ट में प्रस्तावित फ्रेमवर्क के हिस्से, उनकी एप्लिकेबिलिटी और विशिष्ट प्रणालियां शामिल हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग पर अंतर-मंत्रालयी कमिटी गठित

मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत कमिटी का गठन किया गया। इसमें वित्त, कॉरपोरेट मामलों, विदेशी मामलों के मंत्रालयों और वित्तीय क्षेत्र के रेगुलेटरों के प्रतिनिधि शामिल हैं। 

सभी मेडिकल उपकरणों को रेगुलेशन के अंतर्गत लाने के लिए ड्राफ्ट अधिसूचना जारी

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी मेडिकल उपकरणों को औषधि और प्रसाधन एक्ट, 1940 के अंतर्गत रेगुलेट करने के लिए अधिसूचना जारी की। वर्तमान में भारत में 36 मेडिकल उपकरणों को रेगुलेट किया जाता है।

परिवहन ईंधनों को मार्केट करने का अधिकार देने हेतु संशोधित दिशानिर्देशों को मंजूरी

संशोधित दिशानिर्देशों में परिवहन ईंधनों को मार्केट करने का अधिकार देने के लिए न्यूनम निवेश की सीमा कर दी गई है (2,000 करोड़ रुपए से 250 करोड़ रुपए)। परिवहन ईंधनों में पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन ईंधन शामिल हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर हेतु संशोधित दिशानिर्देश जारी
संशोधित दिशानिर्देशों में चार्जिंग स्टेशनों से यह अपेक्षा की गई है कि वे सभी पांच निर्दिष्ट चार्जर मॉडलों के बजाय कम से कम एक निर्दिष्ट चार्जर मॉडल को इंस्टॉल करें। इसके अतिरिक्त बिजली सप्लाई के लिए टैरिफ की सीमा को भी हटा दिया गया है।

नेशनल काउंटर रोग ड्रोन के दिशानिर्देश जारी
रोग या अवांछित ड्रोन्स में ऐसे सिविल ड्रोन्स शामिल हैं जिन्हें गैर कानूनी तरीके से इस्तेमाल किया जाता है और जोकि सुरक्षा के लिए खतरा होते हैं। दिशानिर्देशों में सुझाव दिया गया है कि अवांछित ड्रोन्स का मुकाबला करने का फ्रेमवर्क विकसित करने और संबंधित मंत्रालयों को सलाह देने के लिए स्टीयरिंग कमिटी का गठन किया जाए।

 

संसद

Prachi Kaur (prachi@prsindia.org)

स्टैंडिंग कमिटी ने 2019-20 के दौरान जांच हेतु विषयों को चिन्हित किया

विभागों से संबंधित संसद की 18 स्टैंडिंग कमिटियों ने 2019-20 के दौरान समीक्षा के लिए विषयों को चिन्हित किया। इन कमिटियों द्वारा चिन्हित विषयों को अनुलग्नक में सूचीबद्ध किया गया है।

 

समष्टि आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) विकास

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org)

2019-20 की दूसरी तिमाही में रीटेल मुद्रास्फीति 3.5% पर

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति (आधार वर्ष 2011-12) जुलाई 2019 में 3.2% से वर्ष दर वर्ष बढ़कर सितंबर 2019 में 4% हो गई।[1]  सितंबर 2019 में खाद्य मुद्रास्फीति 5.1% थी। यह जुलाई 2019 से 2.4 है। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) मुद्रास्फीति (आधार वर्ष 2011-12) जुलाई 2019 में 1.1% से वर्ष दर वर्ष गिरकर सितंबर 2019 में 0.3% हो गई।[2]  2019-20 की दूसरी तिमाही में मुद्रास्फीति की प्रवृत्तियां रेखाचित्र 1 में प्रदर्शित हैं।

रेखाचित्र 1: 2019-20 की दूसरी तिमाही में मुद्रास्फीति की प्रवृत्तियां (% परिवर्तन, वर्ष दर वर्ष)

Sources: Ministry of Commerce and Industry; Ministry of Statistics and Programme Implementation; PRS.

पॉलिसी रेपो रेट 5.15% पर, रिवर्स रेपो रेट गिरावट के साथ 4.9% पर

मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (एमपीसी) ने 2019-20 का चौथा द्विमासिक मौद्रिक नीतिगत वक्तव्य जारी किया।[3] पॉलिसी रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों को ऋण देता है) 5.4% से गिरकर 5.15% हो गया। एमपीसी के अन्य निर्णयों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • रिवर्स रेपो रेट (जिस दर पर आरबीआई बैंकों से उधार लेता है) 5.15% से गिरकर 4.9% हो गया।
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फेसिलिटी रेट (जिस दर पर बैंक अतिरिक्त धन उधार ले सकते हैं) और बैंक रेट (जिस दर पर आरबीआई बिल्स ऑफ एक्सचेंज को खरीदता है) 5.65% से गिरकर 5.4% हो गया।
  • एमपीसी ने मौद्रिक नीति के समायोजन के रुख को बरकरार रखने का फैसला किया।

 

वित्त

जीएसटी परिषद ने राजस्व बढ़ाने के उपायों पर सुझाव देने के लिए कमिटी का गठन किया

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी राजस्व बढ़ाने के उपायों पर सुझाव देने के लिए कमिटी का गठन किया।[4] काउंसिल ने विचार के लिए निम्नलिखित क्षेत्रों के संबंध में सुझाव दिए: (i) चेक्स और बैंलेंसेज़ सहित व्यवस्थागत परिवर्तन, (ii) नीतिगत उपाय और कानूनों में जरूरी प्रासंगिक परिवर्तन, (iii) टैक्स बेस का विस्तार, (iv) स्वैच्छिक अनुपालन में सुधार, (v) अनुपालन के निरीक्षण और बेहतर डेटा एनालिटिक्स का प्रयोग करते हुए कर चोरी विरोधी उपायों में सुधार, और (vi) बेहतर प्रशासनिक समन्वय। इसके अतिरिक्त कमिटी को अनेक प्रकार के सुधारों पर विचार करने और उन पर सुझाव देने को कहा गया।

कमिटी में केंद्र सरकार के पांच अधिकारी और महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के पांच राज्य जीएसटी कमीश्नर शामिल हैं। दूसरे राज्य भी कमिटी में अधिकारियों को नामित कर सकते हैं या लिखित में सुझाव भेज सकते हैं।

कमिटी से अपनी पहली रिपोर्ट 15 दिनों (25 अक्टूबर, 2019) में सौंपने की अपेक्षा है।

कैबिनेट ने सीपीएसईज़ में रणनीतिक विनिवेश के लिए संशोधित प्रक्रिया को मंजूरी दी

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसईज़) में रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया में परिवर्तनों को मंजूर किया।[5] इससे पूर्व रणनीतिक विनिवेश के लिए सीपीएसईज़ को चिन्हित करने की जिम्मेदारी नीति आयोग की थी और वही इस संबंध में सुझाव देता था कि कितने शेयरों को बेचा जाना चाहिए।[6] संशोधित प्रक्रिया के अंतर्गत, यह कार्य अब कंसल्टेटिव ग्रुप करेगा जिसमें निम्नलिखित विभागों के सचिव शामिल होंगे: (i) निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम), (ii) प्रशासनिक मंत्रालय, (iii) कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय, (iv) सार्वजनिक उपक्रम विभाग और (v) सीईओ, नीति आयोग।[7]

ग्रुप के सुझावों को अंतर-मंत्रालयी समूह द्वारा जांचा और लागू किया जाएगा जिसके सह अध्यक्ष डीआईपीएएम के सचिव और प्रशासनिक मंत्रालय के सचिव होंगे। इससे पूर्व सिर्फ प्रशासनिक मंत्रालय इन कार्यों के लिए जिम्मेदार होता था।

संशोधित प्रक्रिया उन मामलों में लागू होगी जहां वित्तीय बोलियां आमंत्रित नहीं की गईं या पूर्व लेनदेन के असफल होने के कारण उन्हें आमंत्रित किया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि डीआईपीएएम ने सलाहकारों को शामिल करने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं जोकि सीपीएसईज़ के पुनर्गठन के लिए विस्तृत विश्लेषण करेंगे।[8]

मनी लॉन्ड्रिंग पर अंतर-मंत्रालयी कमिटी का गठन

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

वित्त मंत्रालय ने मनी लॉन्ड्रिंग पर अंतर-मंत्रालयी कोऑर्डिनेशन कमिटी का गठन किया।[9]  कमिटी को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण एक्ट, 2002 के अंतर्गत गठित किया गया है जोकि केंद्र सरकार को संबंधित एजेंसियों के बीच सहयोग और समन्वय के लिए अंतर-मंत्रालयी कोऑर्डिनेशन कमिटी के गठन की अनुमति देता है।[10] 

कमिटी के संदर्भ की शर्तों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सरकार, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, रेगुलेटरों और भारतीय वित्तीय इंटेलिजेंस यूनिट (वित्त मंत्रालय के अंतर्गत) के बीच ऑपरेशनल समन्वय, (ii) वित्तीय क्षेत्र में अथॉरिटीज़ के बीच परामर्श, (iii) मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी नीतियों या आतंकवाद के वित्त पोषण से मुकाबला करने वाली नीतियों को विकसित करना और उन्हें लागू करना।

19 सदस्यों वाली कमिटी की अध्यक्षता राजस्व सचिव द्वारा की जाएगी। कमिटी के अन्य सदस्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) आर्थिक मामलों के विभाग, वित्तीय सेवा विभाग, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय और विदेशी मामलों के मंत्रालय के सचिव, (ii) सेबी के चेयरमैन, (iii) आरबीआई के डेपुटी गवर्नर, और (iv) इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर।

सेबी ने डिपॉजिटरी रेसिट्स को जारी करने से संबंधित फ्रेमवर्क जारी किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने डिपॉजिटरी रेसिट्स को जारी करने से संबंधित फ्रेमवर्क जारी किया।[11]  डिपॉजिटरी रेसिट्स विदेशी मुद्रा वाले इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं जोकि अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज में सूचीबद्ध होते हैं। इन इंस्ट्रूमेंट्स को विदेशी डिपॉजिटरी द्वारा जारी और घरेलू कस्टोडियन (सिक्योरिटीज़ को होल्ड करने वाली एंटिटी) द्वारा ट्रांसफर किया जाता है। उल्लेखनीय है कि ये शर्तें डिपॉजिटरी रेसिट्स स्कीम, 2014 के अंतर्गत आने वाली शर्तों को अतिरिक्त हैं।[12]  

फ्रेमवर्क के अंतर्गत, केवल सूचीबद्ध कंपनियों (भारत में रजिस्टर और भारतीय स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियां) को डिपॉजिटरी रेसिट्स को जारी करने के उद्देश्य से सिक्योरिटीज़ जारी करने की अनुमति है। सूचीबद्ध कंपनियां कुछ शर्तों के अधीन होंगी। कंपनी के निदेशक या प्रमोटर इरादतन डीफॉल्टर या भगोड़े आर्थिक अपराधी नहीं होने चाहिए। सेबी द्वारा उन्हें पूंजी बाजार में प्रवेश से प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए। फ्रेमवर्क के अंतर्गत सिक्योरिटीज़ के मौजूदा होल्डर्स भी डिपॉजिटरी रेसिट्स जारी करने के लिए अपनी सिक्योरिटीज़ को ट्रांसफर करने के पात्र होंगे। सूचीबद्ध कंपनियों की शर्तें मौजूदा होल्डर्स के लिए भी लागू होंगी।

सूचीबद्ध कंपनियां केवल अनुमत न्याय क्षेत्रों में डिपॉजिटरी रसीदें जारी करने के उद्देश्य से सिक्योरिटीज़ को जारी या ट्रांसफर कर सकती हैं। अनुमत न्याय क्षेत्रों की सूची केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर जारी की जाएगी। डिपॉजिटरी रेसिट्स स्कीम, 2014 के अनुसार, अनुमत न्याय क्षेत्रों में केवल फाइनांशियल एक्शन टास्क फोर्स के सदस्य शामिल हैं (उदाहरण के लिए जापान, युनाइटेड स्टेट्स, जर्मनी और चीन)। हाल ही में केंद्र सरकार ने डिपॉजिटरी रेसिट्स स्कीम, 2014 में संशोधन किए थे ताकि योजना के अंतर्गत अनुमत न्याय क्षेत्रों में भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र को शामिल किया जा सके।[13] 

भारतीय विदेशी नागरिकों को राष्ट्रीय पेंशन सेवा में नामांकित करने की अनुमति

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने भारतीय विदेशी नागरिकों (ओसीआईज़) को राष्ट्रीय पेंशन योजना में नामांकित करने की अनुमति दी है।[14] राष्ट्रीय पेंशन योजना एक स्वैच्छिक अंशदान आधारित पेंशन योजना है जिसका उद्देश्य भारतीय नागरिकों को वृद्धावस्था सुरक्षा प्रदान करना है।[15]  विदेशी मुद्रा प्रबंधन एक्ट, 1999 के अंतर्गत दिशानिर्देशों के अधीन योजना के तहत वार्षिकी या संचित बचत प्रत्यावर्तनीय (स्वदेश भेजने योग्य) हो सकती है (अर्थात इसे भारत से बाहर स्थानांतरित किया जा सकता है)।

एक विदेशी नागरिक (बांग्लादेश या पाकिस्तान के विदेशी नागरिकों को छोड़कर) ओसीआई के अंतर्गत पंजीकरण करा सकते हैं, अगर वे: (i) संविधान की शुरुआत में भारत का नागरिक बनने के योग्य थे, (ii) संविधान के शुरुआत पर या उसके बाद किसी भी समय भारत के नागरिक थे (iii) 15 अगस्त, 1947 के बाद भारत का हिस्सा बनने वाले किसी क्षेत्र से संबंधित थे, या (iv) किसी ऐसे व्यक्ति की संतान या पौत्र हैं।[16] 

आरबीआई ने बैंकों को इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट्स को ऋण देने की अनुमति दी

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट्स (इनविट्स) को ऋण देने की अनुमति दी।[17]  इनविट्स सामूहिक बीमा योजनाएं होती हैं जिनके जरिए लोग और संस्थाएं इंफ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स में निवेश कर सकते हैं। अब तक बैंकों को इनविट्स में निवेश करने की अनुमति थी लेकिन उधार देने की नहीं।[18]

यह ऋण कुछ शर्तों पर ही दिया जा सकेगा। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) बैंकों को उन इनविट्स में निवेश नहीं करना चाहिए जहां कोई स्पेशल पर्पज़ वेहिकल वित्तीय समस्याओं का सामना कर रहा है, (ii) बैंक को इनविट्स के एक्सपोज़र पर बोर्ड समर्थित नीति लागू करनी चाहिए जिसमें अन्य विवरणों के अतिरिक्त मंजूर शर्तों और निगरानी तंत्र को शामिल करना चाहिए, और (iii) बैंकों को सभी महत्वपूर्ण मानदंडों का आकलन करना चाहिए जिसमें समय पर ऋण सेवा सुनिश्चित करने के लिए नकदी का पर्याप्त प्रवाह शामिल है। इसके अतिरिक्त बैंकों के बोर्ड की ऑडिट कमिटी को उपरिलिखित शर्त के अनुपालन की छमाही समीक्षा करनी चाहिए।

सेबी ने केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसियों के लिए साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क जारी किया

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने केवाईसी (नो योर कस्टमर) रजिस्ट्रेशन एजेंसियों के लिए साइबर सिक्योरिटी और साइबर रेज़िलिएंस पर फ्रेमवर्क जारी किया।[19]  ये संस्थाएं सेबी के अंतर्गत पंजीकृत (केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसी रेगुलेशंस, 2011) हैं जोकि निवेशकों के केवाईसी रिकॉर्ड्स रखती हैं।[20]  सेबी ने कहा कि इन एजेंसियों के पास एक व्यापक साइबर सिक्योरिटी और रेज़िलिएंस फ्रेमवर्क होना चाहिए, चूंकि ये संस्थाएं सिक्योरिटी मार्केट्स में ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड्स को रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क में ऐसे उपाय और प्रक्रियाएं शामिल हैं जोकि साइबर हमले को रोकती हैं और साइबर रेज़िलिएंस में सुधार करती हैं। साइबर हमले ऐसी कोशिशों को कहते हैं जोकि कंप्यूटर सिस्टम, नेटवर्क और डेटाबेस की पहुंच या विश्वसनीयता को संकट में डालती हैं। साइबर रेज़िलिएंस ऐसे हमलों का मुकाबला करने और उसके प्रतिक्रिया स्वरूप तैयारी करने, उसके दौरान कामकाज करने और उससे उबरने की क्षमता होती है।

फ्रेमवर्क की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • व्यापक नीति: केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसियों को व्यापक साइबर सिक्योरिटी और रेज़िलिएंस नीति बनानी चाहिए जिसमें निम्नलिखित प्रक्रियाएं शामिल होनी चाहिए: (i) महत्वपूर्ण जोखिमों को चिन्हित करना, (ii) महत्वपूर्ण एसेट्स की रक्षा, (iii) साइबर हमलों का पता लगाना, और (iv) ऐसे हादसों पर प्रतिक्रिया देना और उनसे उबरना।
  • गवर्नेंस: केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसियों को वरिष्ठ अधिकारियों को चीफ इनफॉरमेशन ऑफिसर नामित करना चाहिए जोकि: (i) साइबर सिक्योरिटी के जोखिमों का आकलन, उन्हें चिन्हित और कम करेंगे, (ii) उपयुक्त मानदंडों और नियंत्रणों को चिन्हित करेंगे, और (iii) साइबर सिक्योरिटी नीति के अंतर्गत प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष रूप से लागू करेंगे।
  • केवाईसी एजेंसियों के बोर्ड को विशेषज्ञों वाली टेक्नोलॉजी कमिटी बनानी चाहिए। कमिटी त्रैमासिक आधार पर साइबर सिक्योरिटी नीति के कार्यान्वयन की समीक्षा करेगी।
  • एक्सेस कंट्रोल: रजिस्ट्रेशन एजेंसी के सिस्टम्स, एप्लीकेशंस, डेटाबेस तक पहुंच का एक निश्चित उद्देश्य और निर्धारित अवधि होनी चाहिए। महत्वपूर्ण सिस्टम्स तक भौतक पहुंच कम से कम होनी चाहिए और उस पर सीसीटीवी कैमरा और कार्ड एक्सेस सिस्टम्स जैसे कंट्रोल्स के जरिए निगरानी रखी जानी चाहिए।
  • सूचनाओं को साझा करना: साइबर हमले और धमकियों से संबंधित सूचनाओं और संवेदनशीलता को कम करने के उपाय वाली त्रैमासिक रिपोर्ट सेबी को सौंपी जानी चाहिए।

 

कानून और न्याय

Rohin Garg (rohin@prsindia.org)

ग्रुप इनसॉल्वेंसी पर वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट जारी

ग्रुप इनसॉल्वेंसी पर वर्किंग ग्रुप (चेयर: यू. के. सिन्हा) ने 23 सितंबर, 2019 को भारतीय इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी बोर्ड को अपनी रिपोर्ट सौंपी।[21] इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता, 2016 के अंतर्गत कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रक्रियाओं (सीआईआरपीज़) के दौरान उठने वाली समस्याओं की जांच करने के लिए वर्किंग ग्रुप का गठन किया गया था, जब संकटग्रस्त कंपनी को दूसरी ग्रुप कंपनियों से लिंक कर दिया जाता है।[22]  वर्किंग ग्रुप के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एक कॉमन फ्रेमवर्क की जरूरत: वर्किंग ग्रुप ने कहा कि संहिता में उन स्थितियों को रिज़ॉल्व करने का ऐसा कोई कॉमन फ्रेमवर्क नहीं है जहां इंटरलिंक्ड कंपनियां सीआईआरपीज़ से गुजर रही हों। ऐसे मामलों में प्रत्येक ग्रुप कंपनी की इनसॉल्वेंसी को अलग-अलग तरीके से हल करना महंगा साबित हो सकता है और क्रेडिटर्स को कम मूल्य प्राप्त हो सकता है।
  • प्रस्तावित फ्रेमवर्क: वर्किंग ग्रुप ने सुझाव दिया कि ‘कॉरपोरेट ग्रुप’ की परिभाषा में होल्डिंग, सबसिडियरी और एसोसिएट कंपनियां शामिल हैं। एड्यूडिकेटिंग अथॉरिटी इस परिभाषा में दूसरे ग्रुप्स को शामिल कर सकती है। वर्किंग ग्रुप ने ग्रुप इनसॉल्वेंसी के लिए व्यापक फ्रेमवर्क का सुझाव दिया है जोकि पहले चरण में प्रक्रियागत समन्वय प्रणाली के साथ शुरू होगा।
  • प्रस्तावित फ्रेमवर्क की प्रक्रियाएं: प्रस्तावित फ्रेमवर्क में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) सभी कॉरपोरेट देनदारों, जिन्होंने डीफॉल्ट किया है और ग्रुप का हिस्सा हैं, के खिलाफ एक संयुक्त आवेदन, (ii) एक सिंगल इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल और एक सिंगल एड्यूडिकेटिंग अथॉरिटी (मुकदमेबाजी और लागत को कम करना, और समय की बचत), और (iii) ग्रुप लेनदारों (क्रेडिटर्स) की कमिटी का गठन। ये सभी प्रक्रियाएं स्वैच्छिक हो सकती हैं। कुछ मामलों में अपवाद की अनुमति दी जा सकती है जब स्टेकहोल्डर्स बुरी तरह प्रभावित हो रहे हों। इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनलों, क्रेडिटर्स की कमिटी और एड्यूडिकेटिंग अथॉरिटी के बीच समन्वय, संवाद और सूचनाओं को साझा किया जाना अनिवार्य होना चाहिए।
  • फ्रेमवर्क को चरणबद्ध तरीके से लागू करना: वर्किंग ग्रुप का सुझाव है कि ग्रुप इनसॉल्वेंसी के फ्रेमवर्क को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है। पहले चरण में सिर्फ घरेलू कंपनियों को शामिल और केवल प्रक्रियागत कन्सॉलिडेशन प्रणालियों को लागू किया जा सकता है।

पीआरएस रिपोर्ट के सारांश के लिए कृपया देखें

कॉरपोरेट मामले

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

सीएसआर व्यय का दायरा बढ़ा

कंपनी एक्ट, 2013 के अंतर्गत कुछ कंपनियों से यह अपेक्षा की गई है कि वे एक्ट की अनुसूची 7 में विनिर्दिष्ट गतिविधियों से संबंधित प्रॉजेक्ट्स पर अपनी तीन साल की औसत शुद्ध आय का कम से कम 2% हिस्सा खर्च करेंगी। इस अनुसूची में ग्यारह प्रविष्टियां हैं जिसमें गरीबी उन्मूलन और पर्यावरणीय स्थायित्व से संबंधित गतिविधियों में योगदान देना शामिल है। इनमें से एक प्रविष्टि में केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित शैक्षणिक संस्थानों में स्थित प्रौद्योगिकी इन्क्यूबेटरों के लिए सीएसआर योगदान देने की अनुमति दी गई है। इन प्रविष्टियों को संशोधित किया गया है।[23]

  • संशोधित प्रविष्टि में निम्नलिखित को सीएसआर योगदान देना शामिल है: (i) केंद्र सरकार, या केंद्र अथवा या राज्य सरकार की कोई एजेंसी या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा वित्तपोषित इनक्यूबेटर्स, (ii) ऑल इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, और (iii) नेशनल लेबोरेट्रीज़ और कुछ स्वायत्त निकाय (जैसे भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अंतर्गत स्थापित निकाय) जोकि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और मेडिसिन में अनुसंधान करते हैं और सतत विकास लक्ष्यों को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखते हैं।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण

ई-सिगरेट्स पर मसौदा बिल जारी

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट्स (उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, स्टोरेज और विज्ञापन) पर प्रतिबंध बिल, 2019 के मसौदे को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किया है।[24] बिल इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट्स के उत्पादन, निर्माण, व्यापार, स्टोरेज और विज्ञापन को प्रतिबंधित करता है। उल्लेखनीय है कि ई-सिगरेट्स को प्रतिबंधित करने पर एक अध्यादेश 28 सितंबर, 2019 को जारी किया गया था जोकि अभी लागू है।[25]

  • इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट्स: बिल के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (ई-सिगरेट्स) एक बैटरी चालित उपकरण होता है जोकि किसी पदार्थ को (प्राकृतिक या कृत्रिम तरीके से) गर्म करता है ताकि कश लेने के लिए वाष्प पैदा हो। ई-सिगरेट्स में निकोटिन और फ्लेवर हो सकते हैं और इनमें इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलिवरी सिस्टम के सभी प्रकार, हीट-नॉट बर्न उत्पाद, ई-हुक्का और ऐसे ही दूसरे उपकरण शामिल हैं।
  • ई-सिगेट्स पर प्रतिबंध: बिल भारत में ई-सिगरेट्स के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाता है। इस प्रावधान का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को एक वर्ष तक का कारावास भुगतना पड़ेगा या एक लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ेगा या दोनों सजा भुगतनी होगी। एक बार से अधिक बार अपराध करने पर तीन वर्ष तक का कारावास भुगतना पड़ेगा और पांच लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ेगा।
  • ई-सिगेट्स का स्टोरेज: ई-सिगरेट्स के स्टॉक के स्टोरेज के लिए कोई व्यक्ति किसी स्थान का प्रयोग नहीं कर सकता। अगर कोई व्यक्ति ई-सिगेट्स का स्टॉक रखता है तो उसे छह महीने तक का कारावास भुगतना होगा या 50,000 रुपए तक का जुर्माना भरना होगा, या दोनों सजा भुगतनी पड़ेगी।
  • बिल के लागू होने के बाद ई-सिगरेट का मौजूदा स्टॉक रखने वालों को इन स्टॉक्स की घोषणा करनी होगी और उन्हें अधिकृत अधिकारी के निकटवर्ती कार्यालय में जमा कराना होगा। यह अधिकृत अधिकारी पुलिस अधिकारी (कम से कम सब इंस्पेक्टर स्तर का) या केंद्र या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत कोई अन्य अधिकारी हो सकता है।

मसौदा बिल पर टिप्पणियां 8 नवंबर, 2019 तक आमंत्रित हैं। अध्यादेश पर पीआरएस के सारांश के लिए कृपया देखें

सभी मेडिकल उपकरणों को दवाओं के समान रेगुलेट करने के लिए मसौदा अधिसूचना जारी

Gayatri Mann (gayatri@prsindia.org

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक मसौदा अधिसूचना जारी की है ताकि सभी मेडिकल उपकरणों को दवाओं की तरह औषधि और प्रसाधन एक्ट, 1940 के अंतर्गत रेगुलेट किया जा सके।[26] केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रक संगठन के अनुसार, मेडिकल उपकरण मनुष्यों या पशुओं में रोग या विकार के निदान, उपचार, शमन या रोकथाम में आंतरिक या बाहरी उपयोग के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। उन्हें केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट किया जा सकता है। वर्तमान में भारत में 36 अधिसूचित मेडिकल उपकरण हैं जिनमें हार्ट वाल्व्स, बोन सीमेंट्स और स्कैल्प वेन सेट्स शामिल हैं।

इस अधिसूचना में इंस्ट्रूमेंट्स, इमप्लांट्स और एप्लाइंसेज़ सहित सभी उपकरण शामिल हैं जोकि निम्नलिखित में मदद करते हैं: (i) बीमारी, चोट या विकलांगता का निदान, रोकथाम या उपचार, (ii) शरीर रचना विज्ञान की जांच, रिप्लेसमेंट या परिवर्तन, (iii) जीवन को सपोर्ट करना, (iv) मेडिकल उपकरणों का कीटाणु शोधन, और (v) औषधियों की परिभाषा के अंतर्गत कन्सेप्शन पर नियंत्रण।

इस संबंध में मंत्रालय ने मेडिकल उपकरण नियम, 2017 में संशोधन के लिए मसौदा नियम जारी किए।[27]  मसौदा नियमों में पहले से अधिसूचित 36 उपकरणों के अतिरिक्त सभी मेडिकल उपकरणों के पंजीकरण का प्रावधान है।

नैनोफार्मास्यूटिकल्स के मूल्यांकन के लिए दिशानिर्देश जारी

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भारत में नैनोफार्मास्यूटिकल्स के मूल्यांकन के लिए दिशानिर्देश जारी किए।[28] दिशानिर्देश भारत में नैनोफार्मास्यूटिकल्स के लिए रेगुलेटरी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

नैनोटेक्नोलॉजी में नैनोस्केल रेंज (नैनोमीटर एक मीटर का एक अरबवां हिस्सा होता है) में आने वाले मैटीरियल्स के अध्ययन की तकनीक को विकसित और प्रयोग किया जाता है। नैनोफार्मास्यूटिकल्स एक ऐसा उभरता हुआ क्षेत्र है जिसमें नैनोटेक्नोलॉजी को बायोमेडिकल और फार्मास्यूटिकल्स साइंस से जोड़ा जाता है। डायनॉस्टिक्स और थेराप्यूटिक्स में इसके अनेक संभावित एप्लीकेशंस हैं, चूंकि इस प्रौद्योगिकी का उपयोग बीमारी के स्थान पर ज्यादा अच्छी तरह लक्ष्य करके और उच्च प्रभाव द्वारा दवा के उपयोग को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। 

ये दिशानिर्देश नैनोतकनीक आधारित आविष्कारों के व्यावसायीकरण को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ नैनोफार्मास्यूटिकल्स की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभाव सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं। वे उन उत्पादों वाली पारंपरिक दवाओं पर लागू नहीं होते जिनमें सूक्ष्मजीव या प्रोटीन होते हैं। चूंकि वे स्वाभाविक रूप से नैनोस्केल रेंज में मौजूद होते हैं। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:[29]

  • नए औषधि और क्लिनिकल ट्रायल्स नियम, 2019 की दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट सुरक्षा संबंधी शर्तें नैनोफार्मास्यूटिकल्स पर लागू होती हैं।
  • नैनोफार्मास्यूटिकल्स की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभाव के मूल्यांकन के लिए हर मामले पर अलग तरह के दृष्टिकोण को अपनाया जाना चाहिए, जोकि विभिन्न कारकों पर निर्भर करेगा, जैसे जैविक नाम, फार्मास्यूटिकल सामग्री पर आंकड़ों की उपलब्धता।
  • नैनोफार्मास्यूटिकल के विकास के औचित्य का स्पष्टीकरण किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त परंपरागत दवाओं की तुलना में नैनोफार्मास्यूटिकल्स के लाभ और हानियों को अध्ययनों के जरिए प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

 

कृषि

Suyash Tiwari (suyash@prsindia.org)

सीड्स एक्ट, 1966 का स्थान लेने वाला मसौदा सीड्स बिल सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए मसौदा सीड्स बिल, 2019 जारी किया।[30]  मसौदा बिल बीजों के उत्पादन, वितरण, बिक्री, आयात और निर्यात के दौरान उनकी गुणवत्ता को रेगुलेट करने का प्रयास करता है। प्रस्तावित बिल सीड्स एक्ट, 1966 का स्थान लेने का प्रयास करता है। मसौदा बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पंजीकरण: किसानों की किस्मों को छोड़कर बुवाई या रोपण के उद्देश्य से बेचे जाने वाले सभी प्रकार के बीज पंजीकृत होने चाहिए। किसानों की किस्में वे किस्में होती हैं जिन्हें पारंपरिक रूप से किसानों द्वारा अपने खेतों में उगाया और विकसित किया गया है या वे उन किस्मों के समान हैं जिनके बारे में किसानों को सामान्य ज्ञान होता है। ब्रांड नेम के अंतर्गत बिकने वाले बीजों की बजाय किसानों द्वारा उत्पादित बीजों को पंजीकृत करने की भी आवश्यकता नहीं है। बीजों की ट्रांसजेनिक किस्मों (जो अन्य किस्मों की आनुवंशिक संरचना को संशोधित करके विकसित की जाती हैं) को केवल पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत मंजूरी मिलने के बाद पंजीकृत किया जा सकता है।
  • मानदंड: केंद्र सरकार बीजों की सभी किस्मों  के अंकुरण, आनुवांशिक और भौतिक शुद्धता, और स्वास्थ्य की न्यूनतम सीमा को अधिसूचित कर सकती है। ट्रांसजेनिक किस्मों के लिए अतिरिक्त मानदंड विनिर्दिष्ट किए जा सकते हैं। ब्रांड नेम के अंतर्गत बिकने वाले बीजों के अतिरिक्त ये मानदंड किसानों द्वारा उत्पादित होने वाले बीजों पर लागू नहीं होंगे।
  • किसानों को मुआवजा: अगर बीज की पंजीकृत किस्म अपने अपेक्षित मानक के अनुसार कार्य नहीं करती (जैसा कि उत्पादक, वितरक या वेंडर ने खुलासा किया है) तो किसान उपभोक्ता संरक्षण एक्ट, 1986 के अंतर्गत उत्पादक, डीलर, वितरक या वेंडर से मुआवजे का दावा कर सकता है।
  • अपराध और सजा: बिल के किसी प्रावधान का उल्लंघन करने वाले और निर्दिष्ट मानकों का अनुपालन न करने वाले विक्रेताओं को 25,000 रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक का जुर्माना भरना होगा। मानकों, बीजों के ब्रांड के संबंध में गलत सूचना देने वाले, या नकली या गैर पंजीकृत बीजों की सप्लाई करने वाले व्यक्तियों को एक साल की कैद की सजा दी जाएगी या पांच लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ेगा, या दोनों भुगतने पड़ेंगे।

मसौदा बिल पर टिप्पणियां 13 नवंबर, 2019 तक आमंत्रित हैं।

कैबिनेट ने 2019-20 में रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्यों को मंजूरी दी

केंद्रीय कैबिनेट ने 2019-20 में बोई जाने वाली रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्यों (एमएसपी) को मंजूरी दी।[31] तालिका 1 में 2018-19 की तुलना में 2019-20 में रबी फसलों के एमएसपी में परिवर्तनों को प्रदर्शित किया गया है।

तालिका 1: 2019-20 में रबी फसलों के लिए मंजूर एमएसपी (रुपए प्रति क्विंटल)

फसल

2018-19

2019-20

परिवर्तन

गेहूं

1,840

1,925

4.6%

जौ

1,440

1,525

5.9%

चना

4,620

4,875

5.5%

दाल मसूर

4,475

4,800

7.3%

सफेद और पीली सरसों

4,200

4,425

5.4%

कुसुम्भ

4,945

5,215

5.5%

Sources:  Press Information Bureau; PRS.

अनाज के लिए भारतीय खाद्य निगम और दूसरी नामित राज्य एजेंसियां खरीद जारी रखेंगी। मोटे अनाज के लिए राज्य सरकार केंद्र से पूर्व मंजूरी लेने के बाद खरीद करेंगी। खरीदे गए पूरे अनाज को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एक्ट, 2013 के अंतर्गत राज्यों द्वारा वितरित किया जाएगा। एक्ट के अंतर्गत जारी अनाज के लिए ही सबसिडी दी जाएगी। भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारिता मार्केंटिंग परिसंघ, छोटे किसानों के एग्रीबिजनेस कन्सोर्टियम और दूसरी नामित केंद्रीय एजेंसियां दालों और तिलहन की खरीद जारी रखेंगे। नोडल एजेंसियों को इस खरीद में होने वाले नुकसान की पूरी भरपाई केंद्र सरकार द्वारा की जा सकती है।

कैबिनेट ने पीएम-किसान योजना के लिए आधार की अनिवार्यता में ढिलाई दी

केंद्रीय कैबिनेट ने पीएम-किसान योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को धनराशि जारी करने के लिए आधार सीडिंग (आधार को बैंक खाते से लिंक करना) की अनिवार्य शर्त में ढिलाई को मंजूरी दे दी है।[32] पीएम-किसान योजना में पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपए के आय समर्थन का प्रावधान है। इससे पूर्व आधार सीडिंग 1 अगस्त, 2019 के बाद धनराशि जारी करने की अनिवार्य शर्त थी (असम, जम्मू एवं कश्मीर और मेघालय को छोड़कर)। चूंकि शत प्रतिशत आधार सीडिंग इस समय सीमा तक पूरी नहीं हो सकती, इसलिए इस अनिवार्य शर्त में 30 नवंबर, 2019 तक छूट दी गई है। असम, जम्मू एवं कश्मीर और मेघालय के मामलों में यह छूट 31 मार्च, 2020 तक है।

 

गृह मामले

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

विशेष विवाह एक्ट सिक्किम में भी

भारत के राष्ट्रपति ने सिक्किम में विशेष विवाह एक्ट, 1954 के विस्तार को अधिसूचित किया है।[33] एक्ट में दो व्यक्तियों के विवाह की मान्यता और पंजीकरण का प्रावधान है, भले ही उनके धर्म कोई भी हों।[34]  सिक्किम में एक्ट के प्रावधान सरकार द्वारा अधिसूचित तारीख से लागू होंगे।

आफ्स्पा का दायरा अरुणाचल प्रदेश के तीन पुलिस स्टेशनों के क्षेत्राधिकार तक बढ़ाया गया

गृह मामलों के मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों (तिरप, चंगलांग और लांगडिंग) में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) एक्ट, 1958 (आफ्स्पा) के दायरे को बढ़ाया। उसने चार पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाकों को शामिल करने के लिए एक्ट के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र का विस्तार भी किया।[35],[36] 

ये पुलिस स्टेशन हैं: (i) नमसई जिले में नमसई और महादेवपुर, (ii) दिबांग घाटी जिले में रोइंग स्टेशन, और (iii) लोहित जिले में सुनपूरा स्टेशन।

 

परिवहन

नेशनल काउंटर रोग ड्रोन के दिशानिर्देश जारी

Prachee Mishra (prachee@prsindia.org)

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने नेशनल काउंटर रोग ड्रोन के लिए दिशानिर्देश जारी किए।[37] दिशानिर्देश ड्रोन्स के अनरेगुलेटेड इस्तेमाल से उठने वाले संभावित खतरों और उन खतरों को कम करने के उपायों को रेखांकित करने का प्रयास करते हैं। ड्रोन्स (सिविलियन इस्तेमाल के लिए) को उनके अधिकतम टेक-ऑफ वजन के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है जोकि निम्नलिखित है: (i) नैनो (250 ग्राम के बराबर या उससे कम), (ii) माइक्रो (250 ग्राम और 2 किलो के बीच), (iii) छोटा (2 किलो से 25 किलो के बीच), (iv) मध्यम (25 किलो से 150 किलो के बीच, और (v) बड़ा (150 किलो से अधिक)।[38] 

दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अवांछित ड्रोन के एप्लीकेशंस: माइक्रो ड्रोन्स का गैर कानूनी उपयोग फोटोग्राफी और चौकसी तक सीमित हो सकता है, पर छोटे से बड़े ड्रोन्स को चौकसी के साथ-साथ विस्फोटक लाने के लिए दुरुपयोग किया जा सकता है। इन दुरुपयोगों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं: (i) हथियारों की डिलिवरी, (ii) हवाई क्षेत्र में दखल, (iii) व्यक्तियों या संपत्ति पर हमला, (iv) सिग्नल देना या प्रचार संबंधी संदेश देना, और (v) सामूहिक विनाश के हथियारों के लिए डिलिवरी सिस्टम्स।
  • अवांछित ड्रोन्स के प्रकार: अवैध तरीके से लक्ष्य करने के लिए निम्न प्रकार के ड्रोन्स का इस्तेमाल हो सकता है: (i) स्वायत्त ड्रोन्स (निश्चित लक्ष्य को नैविगेट करने के लिए ऑन बोर्ड कंप्यूटरों द्वारा नियंत्रित), (ii) ड्रोन स्वार्म्स (एक यूनिट के रूप में कई ड्रोन्स को नियंत्रित करना), और (iii) स्टील्थ ड्रोन्स (वे अपने रडार सिग्नेचर को कम कर सकते हैं जिससे उनका पता लगाना मुश्किल होता है)।
  • अवांछित ड्रोन्स का मुकाबल: इन ड्रोन्स का मुकाबला करने के लिए प्रभावी प्रणाली का पता लगाया जाना चाहिए और कुछ विशिष्टताएं के आधार पर उन्हें नियमित रूप से ट्रैक किया जाना चाहिए। ये विशिष्टताएं निम्नलिखित हैं: (i) न्यूनतम इंफ्रारेड सिग्नेचर्स, (ii) सीमित रेडियो फ्रीक्वेंसी, और (iii) निम्न एक्यूइस्टिक एमीशन। हालांकि, ऐसे ड्रोन का पता लगाने की चुनौतियों में नियमित और अवांछित ड्रोन को अलग करने में कठिनाई और प्रतिक्रिया में लगने वाला कम समय शामिल है।
  • संस्थागत संरचना: अनेक एजेंसियां (जैसे रक्षा, गृह मामले, नागरिक उड्डयन मंत्रालय) गैर पारंपरिक हवाई खतरों से सुरक्षा में प्रदान करती हैं। इसलिए अवांछित ड्रोन्स का मुकाबला करने हेतु फ्रेमवर्क बनाने और संबंधित मंत्रालयों को सलाह देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक स्टीयरिंग कमिटी का गठन किया जाना चाहिए। कमिटी देश में कमर्शियल सिविल ड्रोन एप्लीकेशंस को भी रेगुलेट करेगी। इसमें निम्नलिखित के सदस्य शामिल होंगे: (i) भारतीय वायु सेना, (ii) गृह मामलों का मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय, और (iii) खुफिया एजेंसियां। खतरों की नियमित निगरानी और अवांछित ड्रोन से मुकाबला करने के उपायों को लागू करने के लिए एक इंप्लिमेंटेशन कमिटी इसकी सहायता करेगी।

अनाधिकृत वाहनों की स्क्रेपिंग पर मसौदा दिशानिर्देश जारी

Rohin Garg (rohin@prsindia.org)

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देश में अनाधिकृत वाहनों के स्क्रेपिंग केंद्रों की स्थापना, अनुमति और संचालन के लिए मसौदा दिशानिर्देश जारी किए।[39]  वाहनों की स्क्रेपिंग का अर्थ होता है, कानूनी रूप से निश्चित आयु वर्ष के समाप्त होने पर वाहनों की तोड़-फोड़ ताकि कुछ घटकों का दोबारा इस्तेमाल किया जा सके। मोटर वहन एक्ट, 1988 के अंतर्गत केंद्र सरकार उन मोटर वाहनों और उनके भागों को रीसाइकिल करने के तरीकों को निर्धारित करने वाले नियम बना सकती है जोकि अपने निश्चित जीवन काल से अधिक के हो चुके हैं।[40]

मसौदा दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • पात्रता: अधिकृत वाहन स्क्रेपिंग केंद्र स्थापित करने के पात्रता संबंधी दिशानिर्देशों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) उस राज्य/केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) से स्थापना की सहमति का अधिकार हासिल करना, जहां वह स्थित होगा, और (ii) कामकाज के छह महीने के अंदर राज्य प्रदूषण बोर्ड से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट हासिल करना। इसके अतिरिक्त केंद्र में वाहनों की तोड़-फोड़ और स्क्रेपिंग के लिए अधिकृत स्क्रेपिंग यार्ड होना चाहिए। इस यार्ड में निम्नलिखित होना चाहिए: (i) एक डीपल्यूशन प्रणाली जोकि ईंधन और गैस निकालने के दौरान सभी प्रदूषकों को हटाए, और (ii) बेकार वाहनों से निपटने के लिए उपयुक्त स्थान, इत्यादि।
  • अनुमति और निरीक्षण: केंद्र को प्रदत्त अनुमति 10 वर्षों के लिए वैध होगी और इसके बाद 10 वर्षों के लिए उसे रीन्यू किया जा सकता है। लाइसेंसिंग अथॉरिटी या राज्य/यूटी सरकार द्वारा नामित अधिकारी द्वारा केंद्र का निरीक्षण किया जा सकता है। व्यवसायगत स्वास्थ्य एवं सुरक्षा अनुपालन और व्यावसायिक, पर्यावरणीय तथा श्रम मानकों के लिए केंद्र का ऑडिट भी किया जाएगा।
  • वाहनों की स्क्रेपिंग का मानदंड: जिन वाहनों की स्क्रेपिंग की जा सकती है, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) जिन्होंने अपने पंजीकरण सर्टिफिकेट रीन्यू नहीं किए, या (ii) जिनके पास 1988 के एक्ट के अनुसार, फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं हैं।
  • स्क्रेपिंग की प्रक्रिया: वाहनों को विनिर्दिष्ट दिशानिर्देशों के अनुसार स्क्रेप किया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद वाहन के स्टेटस को राष्ट्रीय वाहन रजिस्टर और वाहन डेटाबेस में अपडेट किया जाएगा।

मसौदा दिशानिर्देशों पर 15 नवंबर, 2019 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं। 

बिजली

Saket Surya (saket@prsindia.org)

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी दिशानिर्देशों में संशोधन

बिजली मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर संशोधित दिशानिर्देश और मानक जारी किए।[41]  मूल दिशानिर्देश दिसंबर 2018 में जारी किए गए थे।[42]  मूल दिशानिर्देशों में मुख्य परिवर्तनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सुरक्षा मानक: पहले के दिशानिर्देशों में निजी चार्जिंग स्टेशनों (घरों और कार्यालयों में) से यह अपेक्षा की गई थी कि वे निर्दिष्ट प्रदर्शन और तकनीकी मानदंडों को पूरा करेंगे। संशोधित दिशानिर्देशों में यह अपेक्षा की गई है कि वे निर्दिष्ट सुरक्षा मानकों का अनुपालन भी करेंगे।
  • पब्लिक चार्जिंग स्टेशन: पहले के दिशानिर्देशों में पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों से अपेक्षा की गई थी कि वे सभी पांच निर्दिष्ट चार्जर मॉडल इंस्टॉल करेंगे। संशोधित दिशानिर्देशों में यह अपेक्षा की गई है कि वे केवल एक या अधिक प्रकार के निर्दिष्ट चार्जर मॉडल लगाएंगे। ई टू-थ्री व्हीलर के चार्जिंग स्टेशंस को विनिर्दिष्ट चार्जर मॉडल के अतिरिक्त किसी और मॉडल को इंस्टॉल करने की अनुमति होगी, जोकि केंद्रीय बिजली अथॉरिटी द्वारा निर्धारित मानदंडों का विषय होगा।
  • स्टैंडएलोन बैटरी स्वैपिंग सुविधा हटाई: पहले के दिशानिर्देशों में पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों को स्टैंडएलोन बैटरी स्वैपिंग सुविधा प्रदान करने की अनुमति थी। इस प्रावधान को संशोधित दिशानिर्देशों से हटा दिया गया है।
  • टैरिफ की सीमा हटाई गई: केंद्र या राज्य बिजली रेगुलेटरी कमीशंस पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों को बिजली की सप्लाई का टैरिफ तय करते हैं। पहले के दिशानिर्देश निर्दिष्ट करते हैं कि टैरिफ सप्लाई की औसत लागत प्लस 15% से अधिक नहीं होना चाहिए। टैरिफ की सीमा को संशोधित दिशानिर्देश से हटा दिया गया है। इसके अतिरिक्त पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए अलग मीटरिंग का प्रबंध किया जाएगा।
  • केंद्रीय नोडल एजेंसी निर्दिष्ट: संशोधित दिशानिर्देशों के अंतर्गत देश में पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को रोल आउट करने हेतु एनर्जी एफिशिएंसी ब्यूरो को केंद्रीय नोडल एजेंसी के तौर पर निर्दिष्ट किया गया है।

मूल दिशानिर्देशों के सारांश के लिए कृपया देखें

विंड-सोलर हाइब्रिड प्रॉजेक्ट्स से बिजली की खरीद की नीलामी प्रक्रिया हेतु दिशानिर्देश जारी

नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने विंड-सोलर हाइब्रिड प्रॉजेक्ट्स से बिजली की खरीद की नीलामी प्रक्रिया हेतु दिशानिर्देश जारी किए।[43] इन दिशानिर्देशों को वितरण कंपनियों द्वारा प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी प्रक्रिया के जरिए इन प्रॉजेक्ट्स से बिजली की दीर्घकालीन खरीद के लिए लागू किया जाएगा। यह 2018 में घोषित राष्ट्रीय विंड-सोलर हाइब्रिड नीति के अनुरूप है। नीति बड़े ग्रिड-कनेक्टेड विंड-सोलर हाइब्रिड सिस्टम के प्रमोशन के लिए फ्रेमवर्क प्रदान करने का प्रयास करती है। दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:  

  • एप्लिकेबिलिटी: दिशानिर्देश निम्नलिखित प्रकार के प्रॉजेक्ट्स पर लागू होंगे: (i) 5 मेगावॉट और उससे अधिक के व्यक्तिगत आकार वाले। इंट्रा-स्टेट प्रॉजेक्ट्स आकार वाले होंगे गठन किया जाए। के लिए स्टीरतरीके से इस्तेमाल किया जाता है और जोकि सुरक्षा के के लिए इनकी न्यूनतम नीलामी क्षमता 25 मेगावॉट होनी चाहिए, और (ii) 50 मेगावॉट और उससे अधिक के व्यक्तिगत आकार वाले। इंटर-स्टेट प्रॉजेक्ट्सआकार वाले
  • एक संसाधन की रेटेड पावर क्षमता, दूसरे संसाधन की रेटेड पावर क्षमता का कम से कम 25% होना चाहिए। उदाहरण के लिए 100 मेगावॉट के हाइब्रिड प्रॉजेक्ट के लिए छोटे संसाधन (विंड या सोलर) को कम से कम 20 मेगावॉट का होना चाहिए। इन प्रॉजेक्ट्स में स्टोरेज क्षमता को जोड़ा जा सकता है।
  • नीलामी प्रक्रिया: नीलामी प्रक्रिया में तकनीकी रूप से टेक्निकल और प्राइज बिड सौंपा जाएगा। खरीदार (वितरण कंपनी) बोली लगाने वालों के अंतिम चयन के लिए ई-रिवर्स नीलामी का विकल्प भी चुन सकता है।
  • नीलामी में कुल हाइब्रिड पावर क्षमता मेगावॉट में खरीदी जाएगी। बोली लगाने वाले निम्नलिखित प्रकार के टैरिफ के लिए बोली लगाएंगे: (i) 25 वर्ष या उससे अधिक के लिए रुपए/किलोवॉट में एक निश्चित टैरिफ, और (ii) टैरिफ रुपए/किलोवॉट में तथा हर वर्ष टैरिफ में वृद्धि, साथ ही यह स्पष्ट करना कि कितने वर्षों तक टैरिफ में वृद्धि होती रहेगी। बोली लगाने वालों से निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाएगी: (i) भूमि अधिग्रहण, (ii) पर्यावरण और वन मंजूरियां, इत्यादि।
  • समझौते की अवधि: पावर परचेज़ एग्रीमेंट (पीपीए) के लिए न्यूनतम अवधि 25 वर्ष होगी। यह कुछ शर्तों और नियमों के अधीन पीपीए पर हस्ताक्षर करने वाले पक्षों के बीच परस्पर सहमति से बढ़ाया जा सकता है। उत्पादक से यह अपेक्षा की जाएगी कि वह पीपीए पर हस्ताक्षर के समय वार्षिक क्षमता उपयोग की घोषणा करेगा।

 

संचार

बीएसएनएल और एमटीएनएल के रिवाइवल प्लान को कैबिनेट की मंजूरी

Saket Surya (saket@prsindia.org)

केंद्रीय कैबिनेट ने बीएसएनएल और एमटीएनएल के रिवाइवल प्लान को मंजूरी दे दी है।[44]  इस योजना में इन पीएसयूज़ के वित्तीय तनाव को संबोधित किया गया है और उन्हें गुणवत्तापूर्ण और भरोसेमंद सेवाएं प्रदान करने लायक बनाने पर जोर दिया गया है। रिवाइवल प्लान की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • बीएसएनएल और एमटीएनएल का विलय: केंद्रीय कैबिनेट ने बीएसएनएल और एमटीएनएल के विलय को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
  • 4जी स्पेक्ट्रम का आबंटन: दोनों पीएसयूज़ को 4जी स्पेक्ट्रम आबंटित किए जाएंगे। केंद्र सरकार इन्हें आबंटित स्पेक्ट्रम की लागत का वित्त पोषण करेगी। केंद्र सरकार इसके लिए 23,814 करोड़ रुपए प्रदान करेगी।
  • ऋण के बोझ में कमी: केंद्र सरकार 15,000 करोड़ रुपए के दीर्घकालीन बॉन्ड्स को पेश करने के लिए दोनों पीएसयूज़ को सोवरिन गारंटी प्रदान करेगी। इससे प्राप्त धनराशि को मौजूदा ऋण को पुनर्गठित करने तथा पूंजीगत एवं परिचालनगत व्यय की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

दोनों पीएसयूज़ अपनी परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण करेंगे। मुद्रीकरण से प्राप्त धनराशि को पूंजीगत एवं परिचालनगत व्यय की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

  • वेतन के दबाव में कमी: वेतन के दबाव को कम करने के लिए दोनों पीएसयूज़ अपने 50 वर्ष और उससे अधिक के कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) का प्रस्ताव देंगे। वीआरएस योजना की लागत का वहन केंद्र सरकार करेगी। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मांग करने वाले कर्मचारियों को वन टाइम मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए 17,169 करोड़ रुपए की धनराशि की जरूरत पड़ेगी। इसके अतिरिक्त सरकार पेंशन, ग्रैजुएटी और लाभ प्रतिपूर्ति की लागत भी चुकाएगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने टेलीकॉम कंपनियों को दूरसंचार विभाग को 92,000 करोड़ रुपए का बकाया देय चुकाने का निर्देश दिया

Roshni Sinha (roshni@prsindia.org)

सर्वोच्च न्यायालय ने टेलीकॉम कंपनियों और दूरसंचार विभाग (डॉट) के बीच राजस्व शेयरिंग से संबंधित एक मामले पर फैसला सुनाया।[45] 

राष्ट्रीय टेलीकॉम नीति, 1999 के अंतर्गत टेलीकॉम कंपनियों को विभाग को राजस्व के हिस्से के रूप में वार्षिक लाइसेंस फीस चुकानी होती है। यह लाइसेंस फीस टेलीकॉम कंपनी और विभाग के बीच हस्ताक्षरित लाइसेंस समझौते के नियमों और शर्तों का एक हिस्सा है और इसे कंपनी के सकल राजस्व का 8% निर्धारित किया गया था।

विभिन्न दूरसंचार कंपनियों और विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय में एक मामला दायर किया, जिसमें लाइसेंस समझौतों के तहत ‘सकल राजस्व’ की परिभाषा की व्याख्या करने के लिए कहा गया था। दूरसंचार कंपनियों ने तर्क दिया था कि विभाग ने अवैध रूप से आय के विभिन्न तत्वों को सकल राजस्व की परिभाषा में शामिल किया है जिन्हें लाइसेंस के तहत परिचालन से अर्जित नहीं किया जाता। इनमें लाभांश आय, अल्पावधि निवेश पर ब्याज आय और कॉल पर छूट शामिल हैं।

अपने फैसले में, कोर्ट ने विभाग की ‘सकल राजस्व’ की व्याख्या को बरकरार रखा और टेलीकॉम कंपनियों को सभी बकाया राशि और दंड का भुगतान करने का निर्देश दिया। यह लगभग 92,000 करोड़ रुपए अनुमानित है।[46] 

ट्राई ने अन्य सर्विस प्रोवाइडर्स के पंजीकरण पर सुझाव जारी किए

Saket Surya (saket@prsindia.org)

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने अन्य सर्विस प्रोवाइडर्स (ओएसपी) के पंजीकरण के लिए नियम और शर्तों पर सुझाव जारी किए।[47]

ओएसपी वह कंपनियां होती हैं जोकि विभिन्न एप्लीकेशन सर्विस प्रदान करती हैं, जैसे टेली-बैंकिंग, टेली-कॉमर्स, कॉल सेंटर और दूसरी आईटी-एनेबल्ड सेवाएं।[48]  उदाहरण के लिए बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग कंपनी ओएसपी है। वे अधिकृत टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर से टेलीकॉम रिसोर्स जैसे टेलीफोन कनेक्टिविटी, इंटरनेट बैंडविथ और घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय लीज्ड लाइन्स हासिल कर सकती हैं। ये कंपनियां देश में सेवाएं प्रदान करने के लिए दूरसंचार विभाग (डॉट) में पंजीकृत होती हैं। वर्तमान में पंजीकरण के लिए ओएसपीज़ से पंजीकरण शुल्क चुकाने तथा निगमित होने का सर्टिफिकेट, निदेशकों की सूचना, और कारोबार की प्रकृति जैसी विभिन्न सूचनाएं प्रदान करने की अपेक्षा की जाती है।

इन सुझावों में ओएसपीज़ के पंजीकरण से संबंधित विभिन्न मुद्दों को लक्षित किया गया है। सुझावों में मुख्य विशेषताएं शामिल हैं:

  • पंजीकरण का दायरा: मार्च 2019 में ट्राई ने कहा था कि प्रौद्योगिकी में तरक्की से अन्य आईटी एनेबल्ड सेवाएंजैसे कई शब्दों का दायरा बढ़ गया है। इससे उन एप्लीकेशन सर्विसेज़ का दायरा भी काफी बढ़ गया है जिन्हें ओएसपी पंजीकरण की जरूरत पड़ती है।48 इसके अतिरिक्त अपने खुद के प्रयोग के लिए सेवा और ग्राहक/दूसरी कंपनियों के लिए सेवा के बीच का भेद भी नहीं रहा।48 इसके कारण ओएसपी की परिभाषा में सभी आईटी आधारित सेवाओं को शामिल किया जाना जरूरी हो गया है।48 

निम्नलिखित सुझाव इस संबंध में स्पष्टता लाने का प्रयास करते हैं: (i) केवल वॉयस आधारित और आउटसोर्स्ड ओएसपीज़ को दूरसंचार विभाग में पंजीकृत करने की जरूरत होगी, (ii) डेटा/इंटरनेट आधारित ओएसपीज़ और केवल कैप्टिव उद्देश्यों के लिए सेवाएं देने वाले ओएसपीज़ से सूचनाएं प्रदान करने की अपेक्षा की जाएगी, और (iii) कॉन्टैक्ट सेंटर सर्विस प्रोवाइडर (सीसीएसपी)/होस्टेड कॉन्टैक्ट सेंटर सर्विस प्रोवाइडर (एससीसीएसपी) से दूरसंचार विभाग में पंजीकृत करने की अपेक्षा की जाएगी। सीसीएसपी/एचसीसीएसपी वह कंपनियां होती हैं जो कॉल सेंटर स्थापित करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करती हैं। इसके अतिरिक्त एक सिंगल कंपनी के मल्टी सर्विस सेंटर्स को सिंगल ओएसपी के तौर पर पंजीकृत किया जा सकता है।

  • बैंक गारंटी से छूट: वर्तमान में दूरसंचार विभाग की पूर्व मंजूरी के साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ओएसपी के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर साझा किया जा सकता है। पर एक ही कंपनी की दो संस्थाओं के बीच इस साझेदारी की अनुमति है। इसके लिए ओएसपीज़ को बैंक गारंटी देनी होती है। ओएसपी ऐसे कर्मचारी रख सकते हैं जो घर से काम करते हों। ओएसपी से यह अपेक्षा की जाती है कि वे दूरसंचार विभाग से अनुमति लेंगे और वर्क फ्रॉम होम की सुविधा के लिए बैंक गारंटी देंगे। ट्राई ने सुझाव दिया कि दोनों मामलों में बैंक गारंटी से छूट दी जाए।

 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस

Anurag Vaishnav (anurag@prsindia.org)

कैबिनेट ने परिवहन ईंधनों को मार्केट करने का अधिकार देने हेतु संशोधित दिशानिर्देशों को मंजूरी दी  

केंद्रीय कैबिनेट ने परिवहन ईंधनों को मार्केट करने का अधिकार देने के लिए दिशानिर्देशों में संशोधन किए।[49]  परिवहन ईंधनों में मोटर स्पिरिट (पेट्रोल), हाई स्पीड डीजल और एविएशन टर्बाइन ईंधन शामिल हैं। वर्तमान में इन ईंधनों को मार्केट करने का अधिकार केवल उन कंपनियों को उपलब्ध है जिन्होंने खोज और उत्पादन, शोधन, पाइप लाइन्स या टर्मिनल्स में न्यूनतम 2,000 करोड़ रुपए निवेश किए हैं।[50] 

संशोधित नीति में इस सीमा को 250 करोड़ रुपए कर दिया गया है और इन क्षेत्रों में निवेश की जरूरत को खत्म कर दिया गया है। संशोधित नीति की अन्य महत्वपूर्ण विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:  

  • गैर-तेल कंपनियां भी रीटेल क्षेत्र में निवेश कर सकती हैं। कंपनियों को मार्केट ऑथराइजेशन के लिए संयुक्त उद्यम या सबसिडियरी स्थापित करने की छूट होगी।
  • अधिकृत संस्थाओं को ऑथरइजेशन मिलने के पांच वर्ष के भीतर अधिसूचित सुदूर क्षेत्रों में कम से कम 5% रीटेल आउटलेट्स स्थापित करने होंगे।
  • अधिकृत संस्थाओं से यह अपेक्षा की जाती है कि वे आउटलेट के चालू होने के तीन वर्षों के भीतर प्रस्तावित रीटेल आउटलेट में कम से कम एक नए उत्पादित वैकल्पिक ईंधन (उदाहरण के लिए: सीएनजी, एलएनजी, बायोईंधन या इलेक्ट्रिक चार्जिंग) की मार्केटिंग हेतु सुविधा प्रदान करे।

 

सूचना और प्रसारण

Saket Surya (saket@prsindia.org)

ट्राई ने एफएम रेडियो चैनलों की नीलामी के लिए आरक्षित मूल्य पर परामर्श आमंत्रित किए

ट्राई ने एफएम रेडियो चैनलों की नीलामी के लिए आरक्षित मूल्य पर परामर्श पत्र जारी किया।[51]

विभिन्न शहरों में एफएम रेडियो चैनल चलाने के लिए नीलामी के जरिए लाइसेंस दिया जाता है। इसके लिए विभिन्न शहरों के लिए आरक्षित मूल्य की घोषणा की जाती है। आरक्षित मूल्य, वह न्यूनतम कीमत होती है जोकि नीलामी के अंतर्गत किसी वस्तु की बिक्री के लिए स्वीकार्य होती है। 2011 में घोषित एफएम रेडियो प्रसारण नीति के नवीनतम चरण (चरण- III) के अंतर्गत ऐसा किया जा रहा है।[52] नीति के चरण- III का उद्देश्य एक लाख से अधिक आबादी वाले सभी शहरों तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के कुछ अन्य निर्दिष्ट शहरों में निजी एफएम रेडियो चैनल शुरू करना है।51  सूचना और प्रसारण मंत्रालय का इरादा है कि ऐसे 283 शहरों में एफएम रेडियो चैनलों के लिए अगले दौर की नीलामी रखी जाए।51  मंत्रालय ने इस नीलामी के लिए आरक्षित मूल्य निर्धारित करने के लिए ट्राई से सुझाव मांगें हैं।51

चरण III के अंतर्गत पूर्व नीलामियों में शहरों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया था:

  • वर्तमान शहर: एफएम रेडियो प्रसारण नीति के पूर्व चरण- II के अंतर्गत आबंटित एफएम चैनल वाले शहर,
  • नए शहर: एक लाख से अधिक आबादी वाले सभी शहर और चरण- II के अंतर्गत जिन्हें कोई एफएम चैनल आबंटित नहीं किए गए, और
  • दूसरे शहर: सीमा क्षेत्रों में एक लाख से कम की आबादी वाले निर्दिष्ट शहर।

तालिका 2: एफएम रेडियो चैनल की नीलामी के लिए आरक्षित मूल्य निर्धारित करने का तरीका

श्रेणी

आरक्षित मूल्य

मौजूदा शहर

चरण- II के अंतर्गत उस शहर में एफएम चैनल की नीलामी के लिए प्राप्त सर्वाधिक बोली

नए शहर

जनसंख्या, प्रति व्यक्ति आय, शहर में अनुमानित एफएम रेडियो श्रोताओं और चरण-II  के अंतर्गत मौजूदा एफएम चैनलों के औसत सकल राजस्व जैसे कारकों के आधार पर अनुमानित मूल्य

अन्य शहर

पांच लाख रुपए पर निर्धारित

Sources: Consultation Paper on reserve price for auction of FM Radio Channels, TRAI; PRS.

ट्राई ने निम्नलिखित पर विचार आमंत्रित किए हैं: (i) अगले दौर की नीलामी के लिए नए और वर्तमान शहरों की श्रेणियों हेतु मौजूदा तरीके की प्रासंगिकता, (ii) मौजूदा तरीके के अंतर्गत वर्तमान शहरों के लिए आरक्षित मूल्य निर्धारित करने में मुद्रास्फीति पर ध्यान देना, और (iii) रेडियो ब्रॉडकास्टिंग के लिए किसी भी तकनीक (एनालॉग, डिजिटल या दोनों) के प्रयोग की अनुमति देना (वर्तमान में केवल एनालॉग ब्रॉडकास्टिंग तकनीक की अनुमति है)।

परामर्श पत्र पर 6 नवंबर, 2019 तक टिप्पणियां आमंत्रित हैं।

 

अनुलग्नक

2019-20 में संसद की विभिन्न स्टैंडिंग कमिटीज़ ने समीक्षा के लिए जिन विषयों को चिन्हित किया है, उनका विवरण तालिका 3 में दिया गया है।

तालिका 3: 2019-20 में संसद की स्टैंडिंग कमिटीज़ निम्नलिखित विषयों की समीक्षा करेंगी

कृषि

कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग

1.   देश में प्रमाणित बीजों का उत्पादन और उपलब्धता।

2.   प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) का कार्यान्वयन- एक समीक्षा।

3.   देश में कृषि ऋण प्रणाली का कार्य।

4.   पादप संरक्षण निदेशालय, क्वारंटीन और भंडारण - प्रदर्शन की समीक्षा।

5.        प्रशिक्षण, विस्तार और प्रयोग में कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी का बहुआयामी योगदान।

6.        देश में कृषि के व्यापक विकास में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पीएसीएस) की भूमिका- एक मूल्यांकन।

7.        प्रधानमंत्री आवास बीमा योजना - एक मूल्यांकन।

8.        देश में तिलहन और दलहन का उत्पादन और उपलब्धता।

9.        भारत में सहकारी विपणन का कार्य-विश्लेषण।

10.     राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड - प्रदर्शन की समीक्षा।

11.     राष्ट्रीय बांस मिशन - एक समीक्षा।

12.     भारत में जैविक खेती के लिए गुंजाइश - नीति और योजनाओं की समीक्षा।

कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग

1.   आईसीएआर-केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान, जोधपुर, राजस्थान- प्रदर्शन की समीक्षा।

2.   आईसीएआर-केंद्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान, पोर्ट ब्लेयर, अंडमान द्वीप समूह - प्रदर्शन की समीक्षा।

3.   आईसीएआर-केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा- प्रदर्शन की समीक्षा।

4.        चावल की उच्च उपज वाली किस्मों के विकास में आईसीएआर संस्थानों का योगदान- प्रदर्शन की समीक्षा।

पशुपालन और डेयरी एवं मत्स्य विभाग

1.         स्वदेशी मवेशी नस्लों के संरक्षण और विकास के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की भूमिका।

2.         देश में पशु चिकित्सा सेवाओं और पशु वैक्सीन की उपलब्धता की स्थिति।

3.         डेयरी क्षेत्र में दूध और उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र की गुणवत्ता सुनिश्चित करना।

4.        पशुधन बीमा योजनाओं का प्रदर्शन और मूल्यांकन।

मत्स्य विभाग

1.         मछुआरों के कल्याण पर राष्ट्रीय योजना का कार्यान्वयन - एक मूल्यांकन।

2.         बाह्य दोहन से गहरे समुद्र की मछलियों की रक्षा।

3.         देश में मत्स्य पालन क्षेत्र में बीमा नीतियां- एक समीक्षा।

4.        मत्स्य पालन क्षेत्र में रोजगार सृजन और राजस्व अर्जन क्षमता।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय

1.        खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अनुसंधान और विकास संबंधी पहल और उपलब्धियां।

2.        खाद्य प्रसंस्करण संरक्षण क्षमता निर्माण/विस्तार के लिए योजना- एक मूल्यांकन।

रसायन एवं उर्वरक

रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग

1.  पेट्रोरसायन के आयात-निर्यात सहित मांग और उपलब्धता।

2.  कीटाणुनाशक- सुरक्षित प्रयोग सहित संवर्धन और विकास।

उर्वरक विभाग

1.        उर्वरकों का आयात और स्वनिर्भरता का मुद्दा।

2.        उर्वरक सबसिडी की प्रणाली का अध्ययन।

3.        उर्वरकों का प्रशासन (आवाजाही पर नियंत्रण) आदेश, 1973।

फार्मास्यूटिकल्स विभाग

1.        मेडिकल उपकरण उद्योग का संवर्धन।

2.        प्रधानमंत्री भारतीय जनौषधि परियोजना (पीएमबीजेपी)।

कोयला और इस्पात

कोयला मंत्रालय

1.        कोयला/लिग्नाइट खनन क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के मुद्दे।

2.        कोयला संरक्षण और देश में कोयला परिवहन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास।

3.        कोयला क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास।

4.        भारत में ऊर्जा मिश्रण में कोयले का भविष्य।

5.        कोयला खान श्रमिक कल्याण कार्यक्रम की समीक्षा।

6.        कोयला खानों में सुरक्षा।

7.        लिग्नाइट का उत्पादन - अनुमान और योजना।

8.        कोयला क्षेत्र में कौशल विकास।

9.        कोयला महानियंत्रक कार्यालय का प्रदर्शन।

10.      देश में अवैध कोयला खनन और कोयले की चोरी पर अंकुश लगाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी और सतर्कता गतिविधियों का कार्यान्वयन।

11.      कोयला/लिग्नाइट कंपनियों द्वारा पर्यावरण मानदंड का अनुपालन।

12.      सार्वजनिक/निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा कोयला/लिग्नाइट ब्लॉक आबंटन/पट्टे का उपयोग न करना।

13.      कोयले का आयात- प्रवृत्तियां और स्वनिर्भरता का मुद्दा।

14.      बंदरगाहों पर कोयला हैंडलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर।

खान मंत्रालय

1.        खनिज और खनिज आधारित उत्पाद में नया नीलामी तंत्र और स्वनिर्भरता।

2.        उत्तर पूर्वी राज्यों में खनिजों का खनन और क्षेत्र के विकास पर समग्र प्रभाव।

3.        भारत में एल्यूमिनियम और तांबा उद्योग का विकास।

4.        देश में लौह अयस्क, मैंगनीज और बॉक्साइट के अवैध खनन पर अंकुश लगाने के उपाय।

5.        संगठनात्मक संरचना और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) का प्रदर्शन- एक समीक्षा।

6.        संगठनात्मक संरचना और भारतीय खान ब्यूरो (आईबीएम) का प्रदर्शन - एक समीक्षा।

इस्पात मंत्रालय

1.        लौह अयस्क खानों के पट्टों का विकास और इष्टतम क्षमता उपयोग।

2.        इस्पात क्षेत्र के विकास पर इस्पात नीति और उसके प्रभाव की समीक्षा।

3.        द्वितीयक इस्पात क्षेत्र में सहायता से संबंधित मुख्य नीतिगत बदलाव।

4.        इस्पात संयंत्रों की ऊर्जा दक्षता का प्रबंधन और लौह अयस्क खनन से संबंधित पर्यावरणीय मुद्दे।

5.        इस्पात पीएसयूज़ में सुरक्षा प्रबंधन और कार्य पद्धतियां।

6.        भारत में मैंगनीज अयस्क उद्योग का विकास।

7.        इस्पात क्षेत्र में कौशल विकास।

8.        इस्पात के उपयोग को बढ़ावा देना।

9.        एनएमडीसी लिमिटेड की ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड परियोजनाओं की स्थिति।

वाणिज्य

1.        केरल और कर्नाटक के बागान क्षेत्र पर बाढ़ का असर।

2.        कच्चे तेल का आयात: व्यापार और उद्योग पर प्रभाव।

रक्षा

1.   रक्षा सेवाओं में शिकायत निवारण तंत्र।

2.   रक्षा बलों, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में राशन और लाइवरी वस्तुओं की गुणवत्ता का प्रावधान और निगरानी।

3.   पिछले दस वर्षों के दौरान नवाचार और आयात कम करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी सहित प्रमुख अनुसंधान और विकास कार्यों का आकलन।

4.   रक्षा परिसंपत्तियों से जुड़ी दुर्घटनाएं- एक गंभीर समीक्षा।

5.   इको-टास्क फोर्स सिस्टम- प्रादेशिक सेना बटालियनों को बढ़ाने सहित सशक्तीकरण के उपाय।

6.   साइबर स्पेस, अंतरिक्ष और विशेष संचालन से संबंधित नई एकीकृत संरचना।

7.   भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमईज़) के विशेष संदर्भ में मेक इन इंडिया।

8.        राष्ट्रीय कैडेट कोर्प्स की महत्वपूर्ण समीक्षा।

9.        रक्षा उत्पादन की चुनौतियां।

10.     रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) का आधुनिकीकरण।

11.     तटीय सुरक्षा- एक समीक्षा।

12.     रक्षा खरीद नीति का आकलन।

13.     आयुध कारखानों के कार्य की समीक्षा।

14.     छावनी बोर्डों के कार्य की समीक्षा।

15.     रक्षा भूमि के प्रबंधन की समीक्षा।

16.     सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए अधिकारियों की चयन प्रक्रिया की समीक्षा।

ऊर्जा

ऊर्जा मंत्रालय

1.        विद्युत क्षेत्र में रेगुलेटरों की भूमिका - एक मूल्यांकन।

2.        एनर्जी ऑडिट- एक मूल्यांकन।

3.        एकीकृत बिजली विकास योजना - एक मूल्यांकन।

4.        ग्रिड प्रबंधन में पोसोको की कार्यप्रणाली।

5.        बिजली क्षेत्र का विकास।

6.        पावर ट्रांसमिशन सिस्टम का मूल्यांकन- निकासी की मांगों से मिलान में प्रदर्शन दक्षता।

7.        बिजली की टैरिफ नीति की समीक्षा- देश भर में टैरिफ संरचना में एकरूपता की आवश्यकता।

8.        बिजली क्षेत्र के संतुलित विकास में केंद्रीय बिजली प्राधिकरण का योगदान।

9.        लोड डिस्पैच सेंटर और पावर एक्सचेंज का संचालन।

10.     थर्मल और हाइड्रो पावर प्लांट्स का प्रदर्शन।

11.     दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई)।

12.     सौभाग्‍य- प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना।

13.     डिस्कॉम के वित्तीय बदलाव में उदय की भूमिका और महत्व।

14.     भारत में बिजली उत्पादन के कार्बन फुटप्रिंट्स।

15.     बिजली क्षेत्र की कंपनियों द्वारा बिजली परियोजनाओं को चलाने/कार्य पूर्ण करने में देरी।

16.     बिजली क्षेत्र की कंपनियों को आबंटित कोयला ब्लॉकों का विकास।

नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय

1.   अक्षय ऊर्जा योजनाओं के विकास में एमएनआरई के अंतर्गत पीएसयू/संस्थानों की भूमिका।

2.   ग्रिड कनेक्टिविटी- कैप्टिव अक्षय ऊर्जा संयंत्र सहित अक्षय ऊर्जा के लिए ग्रिड कनेक्शन।

3.   175 गिगावॉट अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य की उपलब्धि के लिए कार्य योजना।

4.   अक्षय ऊर्जा के वितरण/मार्केटिंग को सस्ता और प्रभावी बनाने के उपाय।

5.   दीर्घकाल के लिए अक्षय ऊर्जा नीति और कानूनी सुधारों की आवश्यकता।

6.   अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान, डिजाइन और विकास।

7.   भारत में टाइडल पावर का विकास।

8.   अक्षय ऊर्जा- क्षमता और सामर्थ्य।

9.   बिजली क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा की भूमिका का मूल्यांकन।

10. नवीकरणीय घटकों/उपकरणों के निर्माण आधार की कमी के कारण।

11. अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में वित्तीय बाधा।

12.     भारत में विंड एनर्जी का मूल्यांकन।

विदेशी मामले

1.        भारत-यूएसए संबंध - एक महत्वपूर्ण समीक्षा।

2.        ई-पासपोर्ट सहित पासपोर्ट जारी करने की प्रणाली का प्रदर्शन।

3.        भारत का विस्तारित पड़ोस: पूर्व पर दृष्टि और पहल।

4.        विभिन्न देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियों, शरण संबंधी मुद्दों, अंतरराष्ट्रीय साइबर-सुरक्षा और वित्तीय अपराधों के मुद्दों सहित भारत तथा अंतरराष्ट्रीय कानून।

5.        भारत का पड़ोस- प्रथम नीति।

6.        जलवायु परिवर्तन वार्ता में भारत की स्थिति।

7.        अफ्रीकी देशों के साथ भारत का जुड़ाव।

8.        यूरोपीय देश और भारत - भारत और यूरोपीय संघ।

9.        भारत की मृदु शक्ति (सॉफ्ट पावर) और सांस्कृतिक कूटनीति: संभावनाएं और सीमाएं।

10.     लैटिन अमेरिका के साथ संबंध विकसित करने की संभावना।

11.     भारतीय प्रवासियों का कल्याण।

12.     भारत और द्विपक्षीय निवेश संधियां।

13.     विदेशी मिशन्स के कार्य तथा राजनीतिक/आर्थिक/वाणिज्यिक/सांस्कृतिक और कांसुलर के कार्यों का मूल्यांकन।

वित्त

1.   भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति।

2.   वित्तीय संस्थानों की देखरेख और निरीक्षण की गुणवत्ता।

3.   मुद्रास्फीति केंद्रित दिशानिर्देश और मौद्रिक हस्तांतरण।

4.   अर्थव्यवस्था में ऋण प्रवाह का सुदृढ़ीकरण- बैंकिंग प्रणाली का प्रदर्शन मूल्यांकन।

5.   प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों सहित टैक्सेशन फ्रेमवर्क का प्रभाव।

6.   दीर्घकालीन कॉरपोरेट ऋण सहित बुनियादी ढांचे की आवश्यकताओं का वित्त पोषण।

7.   इनोवेशन संबंधी इकोसिस्टम को वित्त पोषित करना।

8.   नाबार्ड की भूमिका के मूल्यांकन सहित ग्रामीण विकास का वित्तपोषण करना।

9.   विनिवेश कार्यक्रम का विश्लेषण।

10. बीमा और पेंशन क्षेत्रों का प्रदर्शन और रेगुलेशन।

11. पूंजी बाजारों का प्रदर्शन और रेगुलेशन।

12. गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) क्षेत्र को मजबूत करना।

13. इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता का क्रियान्वयन।

14. विश्व स्तर के कॉरपोरेट प्रबंधन को हासिल करने में रेगुलेटरों, ऑडिटरों, रेटिंग एजेंसियों और अन्य स्टेकहोल्डर्स की भूमिका।

15. दस ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी प्राप्त करना- भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक संभावनाएं।

खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण

खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग

1.        खाद्यान्नों की खरीद, भंडारण और वितरण - नवीनतम प्रौद्योगिकी को अपनाना और श्रमबल को प्रशिक्षित करना।

2.        गन्ना किसानों को गन्ने का बकाया भुगतान।

3.        वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (डब्ल्यूडीआरए) का कार्य।

4.        गुणवत्ता नियंत्रण कक्ष (क्यूसीसीज़)

5.        एफसीआई द्वारा गोदामों का निर्माण।

6.        खाद्य सब्सिडी और उसका उपयोग।

7.        चीनी उद्योग का विकास/संवर्धन।

8.        खाद्य तेल।

9.        सार्वजनिक वितरण प्रणाली का सुदृढ़ीकरण - तकनीकी साधनों का उपयोग और एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना का कार्यान्वयन।

उपभोक्ता मामलों से संबंधित विभाग

1.        उपभोक्ता संरक्षण के लिए कार्यक्रम।

2.        पैकेज्ड वस्तुओं का रेगुलेशन।

3.        मिलावटी दूध की सप्लाई और वितरण की समस्या और इसे जांचने के उपाय।

4.        मूल्य निगरानी प्रणाली का तंत्र।

5.        आवश्यक वस्तुओं की मूल्य वृद्धि - कारण और प्रभाव।

6.        बीआईएस- हॉलमार्किंग और ज्वैलरी।

7.        उपभोक्ता अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में पूर्वोत्तर में पहल।

8.        वजन और माप का रेगुलेशन।

9.        ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के विशेष संदर्भ सहित उपभोक्ताओं के अधिकारों और न्याय को सुनिश्चित करना।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

1.  कैंसर उपचार का वहन करने योग्य खर्चा।

2.  आयुष्मान भारत का कार्यान्वयन।

3.  मेडिकल उपकरण: रेगुलेशन और नियंत्रण।

4.  सामान्य दवाओं का संवर्धन।

5.  भारत में टीकाकरण की स्थिति और देश में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में जेई की रोकथाम एवं उससे मुकाबले की तैयारियां।

आयुष मंत्रालय

1.  आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी दवाओं का गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण।

गृह मामले

1.        दिल्ली में यातायात की खराब स्थिति का प्रबंधन।

2.        असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी)।

3.        दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते अपराध।

4.        राष्ट्रीय सुरक्षा, खुफिया तंत्रों के बीच समन्वय और आतंकवाद का मुकाबला।

5.        केंद्र शासित प्रदेशों: (i) अंडमान और निकोबार द्वीप समूह; (ii) जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख में प्रशासन, विकास और लोक कल्याण।

6.        हाल ही में आई बाढ़ पर काबू पाने में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की भूमिका।

7.        वामपंथी अतिवाद।

8.        तटीय सुरक्षा।

9.        महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा।

सूचना प्रौद्योगिकी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय

1.        प्रसार भारती के कार्यों की समीक्षा।

2.        मीडिया कवरेज में नैतिक मानदंड।

3.        फिल्म उद्योग: समस्याएं और चुनौतियां।

4.  केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के कामकाज की समीक्षा।

इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय

1.   नागरिकों के डेटा की सुरक्षा और निजता।

2.   डिजिटल भुगतान और डेटा संरक्षण के लिए ऑनलाइन सुरक्षा उपाय।

3.   यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) के कार्यों की समीक्षा।

4.   डिजिटल स्पेस में महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष जोर सहित नागरिकों की सुरक्षा और सोशल/ऑनलाइन समाचार मीडिया प्लेटफार्मों के दुरुपयोग को रोकना।

5.   इलेक्ट्रॉनिक्स/आईटी हार्डवेयर मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को बढ़ावा देना और आयात में कमी के उपाय।

6.   सीमा पार डेटा फ्लो, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) सहित सूचना प्रौद्योगिकी में नीतिगत मुद्दे।

डाक विभाग

1.        डाक विभाग में रियल एस्टेट प्रबंधन।

दूरसंचार विभाग

1.        बीएसएनएल और एमटीएनएल के कार्यों की समीक्षा और उनके प्रदर्शन में वृद्धि की योजना।

2.        ट्राई के कार्यों की समीक्षा।

3.        पूर्वोत्तर और वामपंथी अतिवाद से प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष बल सहित सार्वभौमिक सेवा बाध्यता फंड (यूएसओएफ) के अंतर्गत योजनाओं के प्रदर्शन की समीक्षा।

4.        5जी के लिए भारत की तैयारी।

श्रम

श्रम और रोजगार मंत्रालय

1.        भारत पर बाध्यकारी आईएलओ कन्वेंशंस को लागू करने के उपाय - एक मूल्यांकन।

2.        खान श्रमिकों के कार्य करने की स्थिति और कल्याण, तथा खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) के कार्यों का आकलन।

3.        सरकार/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कार्यालयों/प्रतिष्ठानों में बारहमासी प्रकृति की नौकरियों के लिए अनुबंध/आकस्मिक/सफाई कर्मचारियों की तैनाती।

4.        आउटसोर्स एजेंसियों/कंपनियों द्वारा तैनात कर्मचारियों की स्थिति और कल्याणकारी उपाय।

5.        बागान श्रमिकों का कल्याण।

6.        कर्मचारी भविष्य निधि संगठन का कार्य।

7.        कर्मचारी राज्य बीमा निगम - ईएसआई योजना की एप्लीकेबिलिटी, योजना के अंतर्गत प्रदत्त लाभ, उनके सुधार, वित्तपोषण और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर विशेष बल, कॉर्पस फंड का प्रबंधन।

8.        केंद्रीय श्रमिक शिक्षा बोर्ड का कार्य।

9.        केंद्र प्रायोजित योजनाओं का क्रियान्वयन।

10.     बाल श्रम पर राष्ट्रीय नीति - एक मूल्यांकन।

11.     बंधुआ मजदूरों की पहचान और पुनर्वास।

12.     अनुसूचित रोजगार की वर्तमान श्रेणियों का आकलन।

13.     अनुबंध/आकस्मिक श्रमिकों के कल्याण से संबंधित श्रम कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन।

14.     बीपीओ/कॉल सेंटर जैसे आईटी और दूरसंचार क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन की स्थिति।

15.     अनुसूचित रोजगार क्षेत्र में निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का कार्यान्वयन।

16.     विभिन्न प्रभागों में सीपीडब्ल्यूडी द्वारा तैनात अनुबंध और आकस्मिक श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और कल्याण/संरक्षण योजनाओं का कार्यान्वयन।

17.     असंगठित और अनौपचारिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के उपाय।

18.     विशेष रूप से मध्य पूर्व क्षेत्र में विदेशी श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए सुरक्षा उपाय।

कपड़ा मंत्रालय

1.        जूट उद्योग का विकास और संवर्धन।

2.        कपड़ा क्षेत्र में दक्षता विकास तथा मैन्यूफैक्चरिंग तथा उन्नयन।

3.        कपड़ा मंत्रालय की कल्याणकारी योजनाएं- एक मूल्यांकन।

4.        चुनौतियां/अवसर- भारतीय वस्त्र उद्योग।

5.        कपास क्षेत्र का विकास।

6.        सिल्क उद्योग के विकास और संवर्धन के लिए केंद्रीय रेशम बोर्ड की योजनाएं/कार्यक्रम- एक मूल्यांकन।

7.        हथकरघा क्षेत्र की स्थिति/प्रदर्शन।

8.        पावरलूम क्षेत्र की स्थिति और सुधार।

9.        हथकरघा और हस्तशिल्प की मार्केटिंग एजेंसियों का प्रदर्शन।

10.     नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) का कार्य।

दक्षता विकास और उद्यमिता मंत्रालय

1.        प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना।

2.        राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क- प्रभाव का आकलन।

3.        प्रशिक्षण महानिदेशालय का कामकाज।

4.        राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) का कामकाज।

5.        राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) का कार्यान्वयन।

6.        आजीविका बढ़ाने के लिए कौशल अर्जन और ज्ञान के प्रति जागरूकता (संकल्प) प्रॉजेक्ट का कार्यान्वयन।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस

1.        रीटेल आउटलेट्स का आबंटन और एलपीजी वितरण।

2.        प्राकृतिक गैस सहित पेट्रोलियम उत्पादों का मूल्य निर्धारण, विपणन और आपूर्ति।

3.        तेल क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों में मुकदमेबाजी।

4.        तेल क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों का अनुबंध प्रबंधन और खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता।

5.        हाइड्रोकार्बन संसाधनों और इलेक्ट्रिक वाहनों के विशिष्ट संदर्भ के साथ ऊर्जा सुरक्षा।

6.        तेल शोधन- एक समीक्षा।

7.        तेल सार्वजनिक उपक्रमों की सीएसआर गतिविधियां।

8.        पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत पेट्रोलियम क्षेत्र से संबंधित प्रतिष्ठानों और संगठनों के प्रदर्शन की समीक्षा।

9.        राष्ट्रीय गैस ग्रिड।

10.     वित्तीय प्रदर्शन तथा अन्य क्षेत्रों में निवेश के विशेष संदर्भ के साथ तेल क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों के प्रदर्शन की समीक्षा।

11.     तेल क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों की मानव संसाधन नीति।

12.     पेट्रोलियम क्षेत्र में विनिवेश, विलय और अधिग्रहण।

13.     पेट्रोलियम क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग।

14.     जैव ईंधन के उत्पादन में प्रगति की समीक्षा।

15.     एलएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा।

 

रेलवे

1.        रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण सहित यात्री सुविधाएं।

2.        भारतीय रेलवे की राष्ट्रीय परियोजनाएं और रणनीतिक लाइनें।

3.        रेल नेटवर्क का विस्तार।

4.        भारतीय रेल के साथ लास्ट माइल पोर्ट कनेक्टिविटी।

5.        हाई स्पीड ट्रेनों की शुरुआत।

6.        भारतीय रेलवे की समर्पित फ्रेट कॉरिडोर परियोजनाएं।

7.        भारतीय रेलवे की यात्री आरक्षण प्रणाली।

8.        भारतीय रेलवे में डिजिटलीकरण।

9.        भारतीय रेलवे के सार्वजनिक उपक्रमों की निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) संबंधित गतिविधियां।

10.     भारतीय रेलवे की उप-शहरी ट्रेन सेवाएं।

11.     राष्ट्रीय रेल विकास योजना- एक समीक्षा।

12.     भारतीय रेलवे की उत्पादन इकाइयों का प्रदर्शन।

13.     रेलवे की सरप्लस जमीन का संरक्षण और उपयोग।

14.     रेलवे के परिचालन में सुरक्षा उपाय।

15.     रेलवे जोन का पुनर्गठन।

16.     भारतीय रेलवे में कार्यशालाओं का आधुनिकीकरण और क्षमता उपयोग।

17.     राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष (आरआरएसके)।

18.     भारतीय रेलवे में भर्ती।

19.     भारतीय रेलवे द्वारा वैगनों की आवश्यकता, खरीद और उपयोग।

20.     रेल पीएसयू में कर्मचारी कल्याण के उपाय।

ग्रामीण विकास

ग्रामीण विकास विभाग

1.        महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण विकास गारंटी एक्ट (मनरेगा) का महत्वपूर्ण मूल्यांकन।

2.        प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई)।

3.        प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)।

4.        दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाईएनआरएलएम)।

5.        दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (डीडीयू-जीकेवाई) के अंतर्गत मेक इन इंडिया की प्राप्ति।

6.        ग्रामीण आबादी के वित्तीय समावेशन में बैंकों की भूमिका।

7.        गांवों में गरीबों और निराश्रितों पर राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) का प्रभाव।

8.        संसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई) के अंतर्गत आदर्श ग्रामों का निर्माण।

9.        ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों के बीच निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) निधि की स्थिति और उपयोग।

भूसंसाधन विभाग

1.  डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) का कार्यान्वयन।

पंचायती राज मंत्रालय

1.        राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए)।

शहरी विकास

1.        ठोस कचरा प्रबंधन।

2.        स्मार्ट सिटी मिशन- एक मूल्यांकन।

3.        प्रधानमंत्री आवास योजना- शहरी (पीएमएवाई-यू): 2022 तक सभी के लिए आवास और संबंधित मुद्दे।

4.        अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन (अमृत) योजना और हेरिटेज सिटीज़ डेवलपमेंट एंड ऑग्मेंटेशन योजना (ह्रदय)।

5.        दिल्ली में वायु प्रदूषण कम करने में दिल्ली नगर निगम, डीडीए, एनडीएमसी, सीपीडब्ल्यूडी और एनबीसीसी की भूमिका।

6.        भारत भर के शहरों में जल आपूर्ति, सीवरेज, स्वच्छता, ग्रीन स्पेस और अन्य शहरी सुविधाएं।

7.        शहरों में जल स्तर में गिरावट: समाधान।

8.        विभिन्न मेट्रो परियोजना का कार्यान्वयन और संबंधित मुद्दे।

9.        विशेष रूप से महानगरों में यातायात के सुगम प्रवाह के लिए शहरों में भीड़ कम करना।

10.     समग्र विकास के लिए देश के हर शहर के लिए मास्टर प्लान तैयार करने की आवश्यकता।

11.     शहरों के डी-कंक्रीटाइजेशन की आवश्यकता।

12.     अतिक्रमण को हटाना और संबंधित मुद्दे।

13.     महानगरों में झुग्गियां: सुधार और झुग्गीवासियों के पुनर्वास की आवश्यकता।

14.     सीपीडब्ल्यूडी और एनबीसीसी द्वारा चालू परियोजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी।

15.     वर्तमान दौर के मद्देनजर पुनर्विकास के नियमों के साथ भूमि अधिग्रहण, जमीन की पूलिंग और भूमि उपयोग में परिवर्तन पर केंद्रित नीति का मूल्यांकन।

16.     शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी)/ नगर निगमों के अधिकारियों का जन केंद्रित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण।

 

 

 

जल संसाधन

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय

1.        गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों का संरक्षण, विकास, प्रबंधन और प्रदूषण का उपशमन तथा और कावेरी नदी का कायाकल्प।

2.        जल प्रबंधन: भारत में समस्याएं और चुनौतियां और मेघालय में जल नीति के संदर्भ में किए गए उपाय।

3.        भूजल: एक मूल्यवान, किंतु घटता संसाधन।

4.        देश में बाढ़ प्रबंधन और बांधों से पानी छोड़ने के लिए निर्णय आधारित सहायता प्रणाली विकसित करना।

5.   देश की संपत्ति के रूप में नदियां- अंतर-राज्यीय विवादों सहित उनकी शुद्धता और स्थिरता बरकरार रखने के उपाय।

6.   नदियों को जोड़ने की समीक्षा।

7.   भारत में वर्षा जल संचयन।

8.   हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में विभिन्न धाराओं के विशेष संदर्भ के साथ जलाशयों का अतिक्रमण।

9.   सूक्ष्म सिंचाई- ड्रिप सिंचाई/स्प्रिंकलर पर विशेष जोर सहित जल के संरक्षण और प्रबंधन के लिए नया दृष्टिकोण।

10. भारत में मुख्य और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा।

11. नदी तटों, बाढ़ के मैदानों का संरक्षण और मिट्टी के कटाव के नियंत्रण के लिए पहल।

12. बांध और बैराज: वर्तमान स्थिति तथा सुरक्षा।

13. भागीदारी सिंचाई प्रबंधन (पीआईएम) और जल प्रयोक्ता संघों (डब्ल्यूयूएज़) की स्थिति और प्रगति।

14. जल निकायों का रखरखाव और निर्माण- (i) सरकार और स्थानीय निकायों और (ii) निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत आने वाले उद्योगों की भूमिका।

15. डब्ल्यूएपीसीओएस लिमिटेड की भूमिका और कार्य की समीक्षा।

पेय जल और स्वच्छता विभाग

1.        स्वच्छ भारत मिशन के प्रदर्शन की समीक्षा - स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत निर्मित बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और स्थिरता।

2.        राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) का प्रदर्शन।

3.        ग्रामीण भारत में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता- मुद्दे और दृष्टिकोण।

4.        भारत में पेयजल की गुणवत्ता- उपायों और उपलब्धियों की समीक्षा।

Sources: Various issues of Bulletin-II, Lok Sabha; PRS.

 

 

[1]Consumer Price Index Numbers on Base 2012=100 for Rural, Urban and Combined for the month of September 2019, Press Information Bureau, Ministry of Statistics and Programme Implementation, October 14, 2019.

[2]Index Numbers of Wholesale Price in India (Base: 2011- 12=100) Review for the month of September 2019, Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry, October 14, 2019.

[3]Fourth Bi-Monthly Monetary Policy Statement 2019-20, Reserve Bank of India, October 4, 2019, https://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/PressRelease/PDFs/PR865A67C25ACCD20475696264BABF2DFA063.PDF.

[4] F. No. 590, GST Council, October 10, 2019, http://www.gstcouncil.gov.in/sites/default/files/committees-dynamic/OM-590-1-CoO-Revenue-Augmentation_0.pdf.

[5] No. 3/9/2018, Department of Investment and Public Asset Management, Ministry of Finance, October 9, 2019, https://dipam.gov.in/sites/default/files/Instructions%20regarding%20Subsidiaries%2C%20Units%2C%20JVs_1.pdf?download=1.

[6] Government approves the proposal of Department of Investment and Public Asset Management for laying down the Procedure and Mechanism for Strategic Disinvestment of Central Public Sector Enterprises (CPSEs)”, Press Information Bureau, Ministry of Finance, March 1, 2016.

[7] No. 3/9/2018, Department of Investment and Public Asset Management, Ministry of Finance, October 9, 2019, https://dipam.gov.in/sites/default/files/Instructions%20regarding%20Consultative%20Group_2.pdf?download=1.

[8] No. 3/3/2019, Department of Investment and Public Asset Management, Ministry of Finance, October 23, 2019, https://dipam.gov.in/sites/default/files/RFP%20for%20General%20Advisor.pdf?download=1.

[9] G.S.R. 762(E), Notification, Department of Revenue, Ministry of Finance, October 7, 2019, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/213042.pdf.

[10] Section 72A, Prevention of Money Laundering Act, 2002.

[11]Framework for issue of Depository Receipts, Circulars, Securities and Exchange Board of India, October 10, 2019, https://www.sebi.gov.in/legal/circulars/oct-2019/framework-for-issue-of-depository-receipts_44609.html.

[12] F. No. 9/1/2013-ECB, Depository Receipts Scheme, 2014, Notifications, Ministry of Finance, The Gazette of India, October 24, 2014.

[13] F. No. 9/1/2013-ECB, Notification, Ministry of Finance, The Gazette of India, October 7, 2019.

[14]PFRDA permitted now Overseas Citizen of India to enroll in NPS at par with Non-Resident Indians, Press Information Bureau, Ministry of Finance, October 30, 2019.

[15] Understanding NPS, Pension Fund Regulatory and Development Authority, https://www.pfrda.org.in/index1.cshtml?lsid=86.

[16] Overseas Citizenship of India Scheme, Ministry of External Affairs, https://www.mea.gov.in/overseas-citizenship-of-india-scheme.htm.

[17]Lending by banks to InvITs, Notifications, Reserve Bank of India, October 14, 2019, https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=11713.

[18]Prudential Guidelines Banksinvestment in units of REITs and InvITs, Notifications, Reserve Bank of India, April 18, 2017, https://www.rbi.org.in/Scripts/NotificationUser.aspx?Id=10929.

[19]Cyber Security & Cyber Resilience framework for KYC Registration Agencies, Circulars, Securities and Exchanges Board of India, October 15, 2019, https://www.sebi.gov.in/legal/circulars/oct-2019/cyber-security-and-cyber-resilience-framework-for-kyc-registration-agencies_44661.html.

[20] KYC Registration Agency Regulations, 2011, Regulations, Securities and Exchange Board of India, December 2, 2011, https://www.sebi.gov.in/legal/regulations/apr-2017/sebi-kyc-know-your-client-registration-agency-regulations-2011-last-amended-on-march-6-2017-_34700.html.

[21] Report of the Working Group on Group Insolvency, Insolvency and Bankruptcy Board of India, https://ibbi.gov.in/uploads/resources/d2b41342411e65d9558a8c0d8bb6c666.pdf.

[22] The Insolvency and Banking Code, 2016, Insolvency and Bankruptcy Board of India, https://ibbi.gov.in//uploads/legalframwork/17139a881bcc8a56c9f641e8e3a2f6b9.pdf.

[23] G.S.R. 776(E), Gazette of India, Ministry of Corporate Affairs, October 11, 2019, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/213151.pdf.

[24] The Draft Prohibition of Electronic Cigarettes (Production, Manufacture, Import, Export, Transport, Sale, Distribution, Storage, and Advertisement) Bill, 2019, Ministry of Health and Family Welfare, https://mohfw.gov.in/sites/default/files/THE%20PROHIBITION%20OF%20ELECTRONIC%20CIGARETTES%20BILL%2C%202019.pdf.

[25] The Prohibition of Electronic Cigarettes (Production, Manufacture, Import, Export, Transport, Sale, Distribution, Storage, and Advertisement) Ordinance, 2019, https://www.prsindia.org/sites/default/files/bill_files/Prohibition%20of%20Electronic%20Cigarettes%20Ordinance%2C%202019.pdf.

[26]Notice Regarding medical device notification to bring all device under regulation, Ministry of Health and Family Welfare, October 28, 2019. https://mohfw.gov.in/sites/default/files/drugsregulationdivision.pdf.

[27] S.O. 797 (E) Gazette of India, Ministry of Health and Family Welfare, October 18, 2019, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/213308.pdf.

[28]Guidelines Released for Evaluation of Nanopharmaceuticals in India, Press Information Bureau, Ministry of Science and Technology, October 24, 2019.

[29] Guidelines for evaluation of Nanopharmaceuticals in India, Department of Biotechnology, Ministry of Science and Technology, October 24, 2019, http://dbtindia.gov.in/sites/default/files/uploadfiles/Guidelines_For_Evaluation_of_Nanopharmaceuticals_in_India_24.10.19.pdf.

[30] Draft Seeds Bill, 2019, Ministry of Agriculture and FarmersWelfare, October 2019, http://agricoop.gov.in/sites/default/files/DraftSeedBill.pdf.

[31] CCEA approves MSP for Rabi Crops of 2019-20 to be marked in Rabi Marketing Season 2020-21, Press Information Bureau, Cabinet Committee on Economic Affairs, October 23, 2019.

[32] Cabinet approves relaxation of Aadhaar seeding of data of the beneficiaries under Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi (PM-Kisan)”, Press Information Bureau, Cabinet, October 9, 2019.

[33] S.O. 3675(E), Gazette of India, Ministry of Home Affairs, October 11, 2019, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/213147.pdf.

[34] Special Marriage Act, 1954, http://legislative.gov.in/sites/default/files/A1954-43_1.pdf.

[35] S.O. 3559(E), Gazette of India, Ministry of Home Affairs, October 1, 2019, http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/212925.pdf.

[36] The Armed Forces (Special Powers) Act, 1954, http://legislative.gov.in/sites/default/files/A1958-28.pdf.

[37] National Counter Rogue Drone Guidelines, Ministry of Civil Aviation, October 18, 2019, http://www.civilaviation.gov.in/sites/default/files/Counter_rogue_drone_guidelnes_NSCS.pdf.

[38] F. No. 05-13/2014-AED Vol. IV, Requirements for Operation of Civil Remotely Piloted Aircraft System (RPAS), Director General of Civil Aviation, December 1, 2018, http://dgca.nic.in/cars/D3X-X1.pdf.

[39] Public Circulation of Draft Guidelines for setting up, authorization, and operation of Authorized Vehicle Scrapping Facility in the country, Ministry of Road Transport and Highways website, https://morth.nic.in/sites/default/files/circulars_document/Drft%20Guidelines%20for%20Vehicle%20Scrapping%20%281%29.pdf.

[40] The Motor Vehicles Act, 1988, Ministry of Road Transport and Highways website, https://morth.nic.in/motor-vehicles-act-1988-0

[41]Charging infrastructure for Electric Vehicle-Revised guidelines and standards, Ministry of Power, October 1, 2019, https://powermin.nic.in/sites/default/files/webform/notices/Charging_Infrastructure_for_Electric_Vehicles%20_Revised_Guidelines_Standards.pdf.

[42]Charging Infrastructure for Electric Vehicles Guidelines and Standards, No.12/2/2018-EV, Ministry of Power, December 14, 2018, https://powermin.nic.in/sites/default/files/webform/notices/sc an0016%20%281%29.pdf.

[43]Guidelines for Tariff Based Competitive Bidding Process for Procurement of Power From Grid Connected Wind Solar Hybrid Projects,  Ministry of New and Renewable Energy, October 11, 2019, https://mnre.gov.in/sites/default/files/webform/notices/CircularHybridDraftstandardbiddingguidelines.pdf.

[44]Union Cabinet approves revival plan of BSNL and MTNL and in-principle merger of the two, Press Information Bureau, Cabinet, October 23, 2019, https://pib.gov.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=1588848.

[45] Union of India vs. Association of Unified Telecom Service Providers of India Etc, Civil Appeal Nos. 6328-6399 of 2015, October 24, 2019, https://sci.gov.in/supremecourt/2015/23627/23627_2015_4_1502_17864_Judgement_24-Oct-2019.pdf.  

[46] Adjusted gross revenue: Supreme Court tells telecom companies to pay government ₹92,000 crore, The Hindu, October 24, 2019, https://www.thehindu.com/business/Industry/sc-allows-centres-plea-to-recover-adjusted-gross-revenue-of-92k-crore-from-telecom-companies/article29785489.ece.

 

[47] Information note to the Press (Press Release No.1 03,2019), Recommendations on "Review of Terms and Conditions for registration of Other Service Providers (OSPs)", TRAI, October 21, 2019, https://main.trai.gov.in/sites/default/files/PR_No.103of2019.pdf.

[48] Consultation Paper on Review of Terms and Conditions for registration of Other Service Providers (OSPs), TRAI, March 29, 2019, https://main.trai.gov.in/sites/default/files/CP_OSP_29032019.pdf.

[49]CCEA approves Review of Guidelines for Granting Authorization to market Transportation Fuels, Press Information Bureau, Ministry of Petroleum and Natural Gas, October 23, 2019.

[50]Report of the Expert Committee to review guidelines for granting authorisation to market transportation fuels, Ministry of Petroleum and Natural Gas, April 2019, http://petroleum.nic.in/sites/default/files/expertcomm_0.pdf.

[51]Consultation Paper on Reserve Price for auction of FM Radio channels, TRAI, October 16, 2019,  https://main.trai.gov.in/sites/default/files/CP_16102019_0.pdf.

[52]Policy Guidelines On Expansion Of FM Radio Broadcasting Services Through Private Agencies (Phase-III), Ministry of Information and Broadcasting, July 25, 2011, http://www.aroi.in/pdf/PolicyGuidelines_FMPhaseIII.pdf.

 

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