वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने 18 फरवरी, 2020 को वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए उत्तर प्रदेश राज्य का बजट प्रस्तुत किया।

बजट के मुख्य अंश

  • 2020-21 के लिए उत्तर प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) मौजूदा मूल्यों पर 17,91,263  करोड़ रुपए अनुमानित है। यह इस अनुमान पर आधारित है कि 2019-20 में राज्य की अर्थव्यवस्था में 6की दर से बढ़ोतरी होगी। पिछले वर्ष की तुलना में 2019-20 में जीएसडीपी के 14% की दर से बढ़ने का अनुमान है। 
     
  • 2020-21 के लिए कुल व्यय 5,12,861 करोड़ रुपए अनुमानित है, जोकि 2019-20 के संशोधित अनुमान से 13.5% अधिक है। 2019-20 के लिए संशोधित अनुमान, बजट अनुमान से 27,873 करोड़ रुपए कम है (5.8%)। 
     
  • 2020-21 के लिए कुल प्राप्तियां (उधारियों के बिना) 4,24,768 करोड़ रुपए अनुमानित हैं जोकि 2019-20 के संशोधित अनुमान से 13% अधिक है। 2019-20 में कुल प्राप्तियों के (उधारियों को छोड़कर) बजटीय अनुमान (21,469 करोड़ रुपए) से कम रहने का अनुमान है (5.4%)।
  • 2020-21 के लिए राजस्व घाटा 53,195 करोड़ रुपए पर लक्षित है (जीएसडीपी के 2.97%)। 2019-20 में संशोधित अनुमान के अनुसार, इसके 3,494 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी का अनुमान है जोकि जीएसडीपी का 2.98% होगा, जबकि बजटीय अनुमान जीडीपी का 2.97% था। 2020-21 में बजट में 27,451 करोड़ रुपए के राजस्व अधिशेष का अनुमान है (जीएसडीपी का 1.53%)
     
  • आवासन और शहरी विकास (26%), पुलिस (19%) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (16%) जैसे क्षेत्रों के लिए सर्वाधिक आबंटन किए गए हैं। बिजली क्षेत्र के लिए आबंटन सबसे कम है (15%)। 

नीतिगत विशिष्टताएं

  • अप्रेंटिसशिप योजना: युवाओं को उद्योगों में अप्रेंटिस के तौर पर काम करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए नई योजना प्रस्तावित की गई है, जिसमें उन्हें अप्रेंटिसशिप के साथ-साथ हर महीने स्टाइपेंड दिया जाएग। इस स्टाइपेंड में 1,500 रुपए केंद्र सरकार की तरफ से दिए जाएंगे, 1,000 रुपए राज्य सरकार द्वारा और बाकी की राशि नियोक्ता देगा। इस योजना के लिए 100 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए गए हैं।
     
  • युवा हब्सएक लाख से अधिक प्रशिक्षित युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से युवा उद्यमी विकास अभियान के नाम से नई योजना प्रस्तावित की गई है। प्लानिंग के चरण से एक वर्ष की अवधि तक स्टार्टअप्स को वित्तीय एवं परिचालनगत सहायता प्रदान करने हेतु सभी जिलों में युवा हब्स बनाए जाएंगे। इन हब्स को स्थापित करने के लिए 50 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए गए हैं। युवा हब्स युवाओं के लिए स्वरोजगार की सभी योजनाओं को एकीकृत तरीके से लागू करेंगे और उसके लिए लगभग 1,200 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं।  
     
  • राज्य नीति आयोग: मौजूदा राज्य योजना आयोग के स्थान पर राज्य नीति आयोग गठित किया जाएगा। यह आयोग राज्य के एकीकृत और सतत विकास हेतु रोडमैप तैयार करेगा। जिला स्तर पर योजनाओं की तैयारी और समेकन के लिए एक प्रणाली तैयार की जाएगी।

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था

  • जीएसडीपी: 2018-19 में उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी 

    पिछले वर्ष की तुलना में (स्थायी मूल्यों पर) 6% की दर से बढ़ी, 

    जोकि 2015-16 में 8.8% की वृद्धि दर से लगातार गिर रही है।
     

  • क्षेत्र: 2018-19 में राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि, 

    मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों का योगदान 

    क्रमशः 24%, 26%, और 50% रहा। जबकि देश की अर्थव्यवस्था 

    में उनका योगदान क्रमशः 17%, 29% और 54% रहा।
     

  • कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 2015-16 में 5.6% से बढ़कर 2017-18 

    में 7.8% हुई, और फिर 2018-19 में 3.5% पर गिर गई। 

    मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र 2018-19 में क्रमशः 5.9% 

    और 7.8% की दर से बढ़े।
     

  • बेरोजगारी: पीरिऑडिक लेबर फोर्स सर्वे 2017-18 के अनुसार, 

    उत्तर प्रदेश की बेरोजगारी दर 6.4% है, 

    जोकि 6.1% की अखिल भारतीय बेरोजगारी दर से अधिक है। 

रेखाचित्र 1: उत्तर प्रदेश में जीएसडीपी और विभिन्न क्षेत्रों में विकास (वर्ष दर वर्ष, 2011-12 के स्थायी मूल्यों पर)

 

Note:  Agriculture includes other primary activities such as mining.

Sources:  Central Statistics Office, MOSPI; PRS.

2020-21 के लिए बजट अनुमान

  • 2020-21 में 5,12,861 करोड़ रुपए के कुल व्यय का लक्ष्य है। यह 2019-20 के संशोधित अनुमान से 13.5% अधिक है। इस व्यय को 4,24,768 करोड़ रुपए (85%) की प्राप्तियों (उधारियों के अतिरिक्त) और 75,791 करोड़

रुपए (15%) की उधारियों के जरिए पूरा किया जाना प्रस्तावित है। 2019-20 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 2020-21 में 13% अधिक की कुल प्राप्तियों (उधारियों के अतिरिक्त) की उम्मीद है। संशोधित अनुमानों के अनुसार, 2019-20

में राज्य में बजटीय अनुमान की तुलना में व्यय में 27,873 करोड़ रुपए की कमी (5.8%) का अनुमान है, जबकि प्राप्तियों (उधारियों को छोड़कर) के बजटीय अनुमान से 21,469 करोड़ रुपए कम (5.4%) रहने का अनुमान है।

तालिका 1बजट 2020-21 के मुख्य आंकड़े (करोड़ रुपए में)

मद

2018-19 वास्तविक

2019-20 बजटीय

2019-20 संशोधित

बअ 2019-20 से संअ 2019-20 में परिवर्तन का %

2020-21 बजटीय

संअ 2019-20 से बअ 2020-21 में परिवर्तन का %

कुल व्यय

3,91,211

4,79,701

4,51,828

-5.8%

5,12,861

13.5%

क. प्राप्तियां (उधारियों के बिना)

3,35,291

3,97,416

3,75,947

-5.4%

4,24,768

13.0%

ख. उधारियां

51,595

73,268

63,268

-13.6%

75,791

19.8%

कुल प्राप्तियां (ए+बी)

3,86,886

4,70,684

4,39,216

-6.7%

5,00,559

14.0%

राजस्व अधिशेष

28,250

27,777

26,282

-5.4%

27,451

4.4%

जीएसडीपी का % 

1.91%

1.76%

1.56%

 

1.53%

 

राजकोषीय घाटा

35,203

46,911

50,405

7.4%

53,195

5.5%

जीएसडीपी का %

2.38%

2.97%

2.98%

 

2.97%

 

प्राथमिक घाटा

3,161

11,537

15,842

37.3%

15,104

-4.7%

जीएसडीपी का %

0.21%

0.73%

0.94%

 

0.84%

 

Sources:  Uttar Pradesh Budget Documents 2020-21 (Annual Financial Statement, MTFP Statement); PRS.

2020-21 में व्यय

  • 2020-21 में पूंजीगत व्यय 1,17,744 करोड़ रुपए प्रस्तावित है जिसमें 2019-20 के संशोधित अनुमान से 9.2% की वृद्धि है। पूंजीगत व्यय में ऐसे व्यय शामिल हैं, जोकि राज्य की परिसंपत्तियों और देनदारियों को प्रभावित करते हैं, जैसे (i) पूंजीगत

परिव्यय यानी ऐसा व्यय जोकि परिसंपत्तियों का सृजन (जैसे पुल और अस्पताल) करता है और (ii) राज्य सरकार द्वारा ऋण का पुनर्भुगतान और ऋण देना।

सबसिडी: 2020-21 में राज्य के 16,726 करोड़ रुपए मूल्य की सबसिडी देने की उम्मीद है जोकि 2019-20 के संशोधित अनुमान से 5.4अधिक है। इसमें 9,050  करोड़ रुपए (54%) बिजली की सबसिडी के लिए आबंटित किए गए हैं। 2,906 करोड़ रुपए (17%) कृषि क्षेत्र की सबसिडी के लिए आबंटित किए गए हैं। 

2019-20 में सबसिडी पर राज्य का व्यय बजटीय चरण में 14,849 करोड़ रुपए से बढ़कर संशोधित चरण में 15,874 करोड़ रुपए होने का अनुमान है (6.9% की वृद्धि)। बिजली सबसिडी में 1,000 करोड़ रुपए की वृद्धि के कारण यह मुख्य रूप से हुआ है।

  • 2020-21 में उत्तर प्रदेश में 81,209 करोड़ रुपए का पूंजीगत परिव्यय अनुमानित है जिसमें 2019-20 के संशोधित अनुमान की तुलना में 2.8% की वृद्धि है। 2020-21 में पूंजीगत परिव्यय के लिए जिन क्षेत्रों को सर्वाधिक आबंटन किए गए, उनमें परिवहन (कुल पूंजीगत परिव्यय का 30%), बिजली (14%) और आवासन एवं शहरी विकास (11%) शामिल हैं। 
  • 2020-21 के लिए 3,95,117 करोड़ रुपए का राजस्व व्यय प्रस्तावित है जिसमें 2019-20 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 14.9% की वृद्धि है। राजस्व व्यय में सबसिडी, वेतन का भुगतान, पेंशन और ब्याज शामिल हैं। 2020-21 में कुल व्यय में राजस्व व्यय का हिस्सा 77% है। बाकी के 23% में पूंजीगत परिव्यय (16%) और लोन देना (7%) शामिल है।

तालिका 2बजट 2020-21 में व्यय (करोड़ रुपए में)

मद

2018-19 वास्तविक

2019-20 बजटीय

2019-20 संशोधित

बअ 2019-20 से संअ 2019-20 में परिवर्तन का %

2020-21 बजटीय

संअ 2019-20 से बअ 2020-21 में परिवर्तन का %

पूंजीगत व्यय

89,483

1,15,744

1,07,845

-6.8%

1,17,744

9.2%

जिसमें पूंजीगत परिव्यय

62,463

77,641

79,011

1.8%

81,209

2.8%

राजस्व व्यय

3,01,728

3,63,957

3,43,983

-5.5%

3,95,117

14.9%

कुल व्यय

3,91,211

4,79,701

4,51,828

-5.8%

5,12,861

13.5%

क. ऋण पुनर्भुगतान

20,717

35,374

25,476

-28.0%

34,897

37.0%

ब्याज भुगतान

32,042

35,374

34,563

-2.3%

38,091

10.2%

ऋण चुकौती (क+ख)

52,759

70,748

60,038

-15.1%

72,989

21.6%

Sources:  Uttar Pradesh Budget Documents 2020-21 (Annual Financial Statement); PRS.

 

2020-21 में विभिन्न क्षेत्रों के लिए व्यय

2020-21 के दौरान उत्तर प्रदेश के बजटीय व्यय का 61% हिस्सा निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए खर्च किया जाएगा। विभिन्न क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों द्वारा कितना व्यय किया जाता है, इसकी तुलना अनुलग्नक में प्रस्तुत है।

तालिका 3: उत्तर प्रदेश बजट 2020-21 में क्षेत्रवार व्यय (करोड़ रुपए में) 

क्षेत्र

2018-19

वास्तविक

2019-20

बजटीय

2019-20

संशोधित

2020-21

बजटीय

संअ 2019-20 से बअ 2020-21 में परिवर्तन का %

2020-21 के लिए बजटीय प्रावधान

शिक्षा

48,650

62,938

57,115

64,805

13.5%

  • समग्र शिक्षा अभियान के  लिए 18,363 करोड़ रुपए और मिड डे मील योजना 2,660 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं।

परिवहन

26,532

27,661

29,092

33,152

14.0%

  • गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, प्रत्येक के लिए 2,000 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं।

ग्रामीण विकास

29,315

30,277

29,836

31,402

5.3%

  • पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के लिए 6,240 करोड़ रुपए, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के लिए 5,791 करोड़ रुपए और मनरेगा के लिए 4,800 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं।

आवासन और शहरी विकास

11,206

23,513

22,572

28,349

25.6%

  • पीएम आवास योजना (शहरी) के लिए 8,241 करोड़ रुपए, अमृत योजना के लिए 2,200 करोड़ रुपए और स्मार्ट सिटीज़ मिशन के लिए 2,000 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं। 

  • शहरी स्थानीय निकायों के लिए वित्त आयोग द्वारा 4,695 करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया है।

पुलिस

16,991

23,619

22,119

26,395

19.3%

  • जिला पुलिस बलों पर व्यय के लिए 18,772 करोड़ रुपए प्रदान किए गए हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

18,102

23,884

22,553

26,266

16.5%

  • राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए 3,845 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं। 

सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण

12,826

21,937

20,723

23,438

13.1%

  • राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष से 3,578 करोड़ रुपए के व्यय की योजना है। 

बिजली

28,764

26,503

27,567

23,425

-15.0%

  • बिजली सबसिडी देने के लिए 9,050 करोड़ रुपए प्रदान किए गए हैं। 

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण

12,301

18,690

18,428

19,137

3.8%

  • मध्य गंगा और सरयू नहर परियोजना के लिए क्रमशः 1,736 करोड़ रुपए और 1,554 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं। 

कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां

15,077

12,333

12,102

12,682

4.8%

  • किसानों के बकाया बिजली भुगतान हेतु 1,200 करोड़ रुपए प्रदान किए गए हैं। 

कुल व्यय का % 

60%

61%

62%

61%

 

 

Sources:  Uttar Pradesh Budget Documents 2020-21 (Annual Financial Statement, Detailed Demands for Grants, Budget Speech); PRS.

प्रतिबद्ध देनदारियां: राज्य की प्रतिबद्ध देनदारियों में आम तौर पर वेतन भुगतान, पेंशन और ब्याज से संबंधित व्यय शामिल होते हैं। अगर बजट में प्रतिबद्ध देनदारियों के लिए बड़ा हिस्सा आबंटित किया जाता है तो इससे राज्य पूंजीगत निवेश जैसी प्राथमिकताओं पर कम व्यय कर पाता है। 2020-21 में उत्तर प्रदेश द्वारा प्रतिबद्ध देनदारियों, यानी वेतन भुगतान, पेंशन और ब्याज पर 2,24,561 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का अनुमान है (राज्य की राजस्व प्राप्तियों के 53% के बराबर)। इसका अर्थ यह है कि राज्य की 47प्राप्तियों से अन्य प्रकार के व्यय किए जाएंगे। कोई भी अतिरिक्त व्यय उधारियों के जरिए किया जाएगा। औसतन, राज्य की 50% राजस्व प्राप्तियों को प्रतिबद्ध देनदारियों पर खर्च किया जाता है। 

आम तौर पर प्रतिबद्ध देनदारियों की प्रकृति लचीली नहीं होती। इसमें साल भर में परिवर्तन की संभावना सीमित होती है। फिर भी वेतन पर राज्य के व्यय में बजटीय चरण से अंतिम चरण के दौरान कटौती हुई है। 2018-19 में वेतन पर 90,263 करोड़ रुपए खर्च किए गए जोकि बजटीय अनुमान से 13,001 करोड़ रुपए कम हैं (13%)। 2019-20 में संशोधित आंकड़ों के अनुसार, वेतन पर व्यय में 9,669 करोड़ रुपए की गिरावट का अनुमान है (8%)।

तालिका 4: 2020-21 में राज्य में प्रतिबद्ध देनदारियों पर व्यय (करोड़ रुपए में)

मद

2018-19 वास्तविक

2019-20 बजटीय

2019-20 संशोधित

बअ 2019-20 से संअ 2019-20 में परिवर्तन का %

2020-21 बजटीय

संअ 2019-20 से बअ 2020-21 में परिवर्तन का %

वेतन

90,263

1,17,779

1,08,111

-8.2%

1,24,408

15.1%

पेंशन

44,024

53,134

55,005

3.5%

62,062

12.8%

ब्याज भुगतान

32,042

35,374

34,563

-2.3%

38,091

10.2%

प्रतिबद्ध देनदारियां

1,66,329

2,06,288

1,97,678

-4.2%

2,24,561

13.6%

Sources:  Uttar Pradesh Budget Documents 2020-21 (Annual Financial Statement); PRS.
 

2020-21 में प्राप्तियां

  • 2020-21 के लिए 4,22,568 करोड़ रुपए की कुल राजस्व प्राप्तियों का अनुमान है, जोकि 2019-20 के संशोधित अनुमानों से 14.1% अधिक है। इनमें से 1,89,592 करोड़ रुपए (राजस्व प्राप्तियों का 45%) राज्य द्वारा अपने संसाधनों से जुटाए जाएंगे। 2,32,976 करोड़ रुपए (राजस्व प्राप्तियों का 55%) केंद्रीय हस्तांतरण के रूप में होंगे, यानी केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा और केंद्र सरकार द्वारा सहायतानुदान। 
     
  • हस्तांतरण: 2020-21 में केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी से प्राप्त होने वाले राजस्व में पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान की तुलना में 13% की वृद्धि का अनुमान है। हालांकि 2019-20 में बजट अनुमानों की तुलना में हस्तांतरण में 11.5की गिरावट का अनुमान है जोकि 1,35,312 करोड़ रुपए हो सकता है। इसका एक कारण केंद्रीय बजट में राज्यों के हस्तांतरण में 19की कटौती हो सकती है। यह बजटीय स्तर पर 8,09,133 करोड़ से संशोधित चरण में 6,56,046 करोड़ रुपए हो सकता है। अनुलग्नक 2 में 2020-21 के लिए 15 वें वित्त आयोग के प्रमुख सुझावों को रेखांकित किया गया हैविशेष रूप से केंद्र सरकार के कर राजस्व में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों का संशोधित हिस्सा।

तालिका 5 : राज्य सरकार की प्राप्तियों का ब्रेकअप (करोड़ रुपए में)

मद

2018-19 वास्तविक

2019-20 बजटीय

2019-20 संशोधित

बअ 2019-20 से संअ 2019-20 में परिवर्तन का %

2020-21 बजटीय

संअ 2019-20 से बअ 2020-21 में परिवर्तन का %

राज्य के अपने कर*

1,20,122

1,33,807

1,27,670

-4.6%

1,58,413

24.1%

राज्य के अपने गैर कर

30,101

30,633

31,376

2.4%

31,179

-0.6%

केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी

1,36,766

1,52,863

1,35,312

-11.5%

1,52,863

13.0%

केंद्र से सहायतानुदान*

42,988

74,432

75,908

2.0%

80,112

5.5%

राजस्व प्राप्तियां

3,29,978

3,91,734

3,70,265

-5.5%

4,22,568

14.1%

उधारियां

51,595

73,268

63,268

-13.6%

75,791

19.8%

अन्य प्राप्तियां

5,313

5,682

5,682

0.0%

2,200

-61.3%

पूंजीगत प्राप्तियां

56,909

78,950

68,950

-12.7%

77,991

13.1%

कुल प्राप्तियां

3,86,886

4,70,684

4,39,216

-6.7%

5,00,559

14.0%

Note:  *States Own Tax and Grants from Centre figures have been adjusted to account for GST compensation grants as Grants from Centre.

Sources:  Uttar Pradesh Budget Documents 2020-21 (Annual Financial Statement, Detailed Receipts); PRS.

  • स्वयं कर राजस्व: 2020-21 में उत्तर प्रदेश को 1,58,413 करोड़ रुपए का कुल स्वयं कर राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है (राजस्व प्राप्तियों का 37%)। यह 2019-20 के संशोधित अनुमान से 24.1% अधिक है।

2020-21 में स्वयं कर-जीएसडीपी अनुपात 8.8% पर लक्षित है जोकि 2019-20 के संशोधित अनुमान से 7.6% अधिक है। इसका अर्थ यह है कि करों के एकत्रण में होने वाली वृद्धि अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर से अधिक है।

तालिका 6: राज्य के स्वयं कर राजस्व के मुख्य स्रोत (करोड़ रुपए में)

मद

2018-19 वास्तविक

2019-20

बजटीय

2019-20 संशोधित

बअ 2019-20 से संअ 2019-20 में परिवर्तन का %

2020-21 बजटीय

संअ 2019-20 से बअ 2020-21 में परिवर्तन का %

राज्य जीएसटी*

46,108

46,611

46,611

0.0%

55,673

19.4%

सेल्स टैक्स/वैट

23,798

24,660

22,356

-9.3%

28,287

26.5%

राज्य एक्साइज

23,927

31,517

29,403

-6.7%

37,500

27.5%

स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण फीस

15,733

19,179

17,963

-6.3%

23,197

29.1%

जीएसटी मुआवजा अनुदान

308

6,369

6,369

0.0%

7,608

19.4%

Note:  *State GST figures have been adjusted to account for GST compensation grants as grants from centre (and not state GST revenue).

Sources:  Uttar Pradesh Budget Documents 2020-21 (Annual Financial Statement, Detailed Receipts); PRS.

  • राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) राज्य के

कर राजस्व का सबसे बड़ा हिस्सा होता है।

2020-21 में एसजीएसटी से 55,673 करोड़

रुपए प्राप्त होने की उम्मीद है। 2019-20 के

संशोधित अनुमान से इसमें 19.4% की वृद्धि है।

2020-21 में राजस्व प्राप्तियों में एसजीएसटी का

योगदान 13.2% अनुमानित है।
 

  • 2020-21 में राज्य को एक्साइज से

37,500 करोड़ रुपए प्राप्त होने की उम्मीद है।

यह पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान की तुलना

में 27.5% की वृद्धि है।
 

  • 2020-21 में राज्य को सेल्स टैक्स/वैट

के जरिए 28,287 करोड़ रुपए (26.5% की

वृद्धि) और स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क

से 23,197 करोड़ रुपए (29.1% की वृद्धि)

प्राप्त होने की उम्मीद है।

जीएसटी मुआवजा: जीएसटी (राज्यों को मुआवजा) एक्ट, 2017 राज्यों को पांच वर्षों के लिए (2022 तक) जीएसटी के लागू होने के कारण होने वाले घाटे की भरपाई की गारंटी देता है। एक्ट राज्यों को उनके राजस्व में 14वार्षिक वृद्धि की गारंटी देता है जोकि जीएसटी में समाहित हो गया था। अगर राज्य का जीएसटी राजस्व, वृद्धि से मेल नहीं खाता तो इस कमी को दूर करने के लिए मुआवजा दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश को 2020-21 में 7,608 करोड़ रुपए के जीएसटी मुआवजा अनुदान की उम्मीद है जोकि 2019-20 के संशोधित अनुमान की तुलना में 19.4अधिक है। 2019-20 में राज्य को 6,369 करोड़ रुपए के मुआवजे की उम्मीद है जोकि 2018-19 में प्राप्त 308 करोड़ रुपए से काफी अधिक है। राज्य की मुआवजे की जरूरत बढ़ने से यह संकेत मिलता है कि उसकी जीएसटी राजस्व वृद्धि दर में और गिरावट हुई है जबकि एक्ट में 14की वृद्धि प्रस्तावित है।

2020-21 में घाटे, ऋण और एफआरबीएम के लक्ष्य

उत्तर प्रदेश के राजकोषीय दायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम, 2004 में राज्य सरकार की बकाया देनदारियों, राजस्व घाटे और राजकोषीय घाटे को प्रगतिशील तरीके से कम करने के लक्ष्यों का प्रावधान है।

राजस्व घाटा: यह सरकार की राजस्व प्राप्तियों और व्यय के बीच का अंतर होता है। इसका यह अर्थ होता है कि सरकार को अपना व्यय पूरा करने के लिए उधार लेने की जरूरत है जोकि भविष्य में पूंजीगत परिसंपत्तियों का सृजन नहीं करेगा।

एक बार राजस्व घाटे का हिसाब होने पर उधारियों को पूंजीगत निवेश के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। दूसरी ओर राजस्व अधिशेष का अर्थ है कि राजस्व प्राप्तियां राजस्व व्यय से अधिक हो सकती हैं। यह राज्य को अधिशेष राशि प्रदान करता है जिसे पूंजीगत निवेश या ऋण के पुनर्भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि दीर्घावधि के लिए राजस्व अधिशेष इस बात का संकेत भी है कि राज्य के पास राजस्व व्यय अपर्याप्त है। 

2020-21 के बजट अनुमानों में 27,451 करोड़ रुपए के राजस्व अधिशेष का अनुमान लगाया गया है जोकि राज्य जीडीपी का 1.53% है। यह 2019-20 के लिए अनुमानित राजस्व अधिशेष से 26,282 करोड़ रुपए अधिक है जोकि जीएसडीपी का 1.56% है। इसका अर्थ यह है कि राज्य का राजस्व संतुलन 14वें वित्त आयोग के उस सुझाव का पालन करता है जिसमें राजस्व घाटे को समाप्त करने को कहा गया है।

राजकोषीय घाटा: कुल प्राप्तियों से कुल व्यय अधिक होने को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। सरकार उधारियों के जरिए इस अंतर को कम करने का प्रयास करती है जिससे सरकार पर कुल देनदारियों में वृद्धि होती है। 2020-21 में 53,195 करोड़ रुपए के राजकोषीय घाटे का अनुमान है जोकि राज्य जीडीपी के 2.97% के बराबर है। यह अनुमान 14वें वित्त आयोग की 3% की निर्धारित सीमा के भीतर है। 2019-20 में राजकोषीय घाटा 50,405 करोड़ रुपए अनुमानित है (जीएसडीपी का 2.98%) जोकि 2018-19 में 35,203 करोड़ रुपए के राजकोषीय घाटे से 43अधिक है (जीएसडीपी का 2.38%)।

बकाया देनदारियां: पिछले कई वर्षों की राज्य की उधारियां जमा होकर बकाया देनदारियां बन जाती हैं। 2020-21 में राज्य की बकाया देनदारियों के जीएसडीपी के 28.8% के बराबर होने का अनुमान है। यह एफआरबीएम रिव्यू कमिटी (2017) द्वारा राज्यों के कुल ऋण के लिए निर्धारित 20% की सीमा से अधिक है। 

तालिका 7 2020-21 में उत्तर प्रदेश के बजट में विभिन्न घाटों के लक्ष्य (जीएसडीपी के के रूप में) 

वर्ष

राजस्व

राजकोषीय 

बकाया देनदारियां

घाटा (-)/अधिशेष (+)

घाटा (-)/अधिशेष (+)

2018-19

1.91%

-2.38%

30.2%

2019-20 (संअ)

1.56%

-2.98%

28.2%

2020-21 (बअ)

1.53%

-2.97%

28.8%

2021-22

1.77%

-2.93%

28.8%

2022-23

1.93%

-2.93%

28.7%

SourcesUttar Pradesh Budget Documents 2020-21 (MTFP Statement); PRS.

रेखाचित्र 2 और 3 में 2018-19 से 2022-23 के दौरान राज्य के घाटों और बकाया देनदारियों की प्रवृति को प्रदर्शित किया गया है।

रेखाचित्र 2: राजस्व एवं राजकोषीय घाटा (जीएसडीपी का %) 

 Sources:  Uttar Pradesh Budget Documents 2020-21; PRS.

रेखाचित्र  3:  बकाया देनदारियों के लक्ष्य (जीएसडीपी का %)

Sources:  Uttar Pradesh Budget Documents 2020-21; PRS.

अनुलग्नक 1: मुख्य क्षेत्रों में राज्य के व्यय की तुलना

निम्नलिखित तालिकाओं में छह मुख्य क्षेत्रों में अन्य राज्यों के औसत व्यय के अनुपात में उत्तर प्रदेश के कुल व्यय की तुलना की गई है। क्षेत्र के लिए औसत, उस क्षेत्र में 29 राज्यों द्वारा किए जाने वाले औसत व्यय को इंगित करता है। [*]

  • शिक्षा: 2020-21 में उत्तर प्रदेश ने शिक्षा के लिए बजट का 13.6% हिस्सा आबंटित किया है। अन्य राज्यों द्वारा शिक्षा पर जितनी औसत राशि का आबंटन किया गया (15.9%), उसकी तुलना में उत्तर प्रदेश का आबंटन कम है (2019-20 के बजट अनुमानों का इस्तेमाल करते हुए)।
  • स्वास्थ्य: उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 5.5% का आबंटन किया है। अन्य राज्यों के औसत आबंटन (5.2%) से यह कुछ ज्यादा है। 
  • कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां: राज्य ने 2020-21 में कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के लिए अपने बजट का 2.7हिस्सा आबंटित किया है। यह अन्य राज्यों के आबंटनों (7.1%) से काफी कम है।
  • ग्रामीण विकास: 2020-21 में उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण विकास के लिए 6.6% का आबंटन किया है। यह 2019-20 में अन्य राज्यों के औसत (6.2%) से अधिक है।
     
  • सड़क और पुल: 2020-21 में उत्तर प्रदेश ने सड़कों और पुलों के लिए 6.3% का आबंटन किया है। यह अन्य राज्यों द्वारा सड़कों और पुलों के लिए औसत आबंटन (4.2%) से काफी अधिक है।
     
  • पुलिस: 2020-21 में उत्तर प्रदेश ने पुलिस के लिए 5.5% का आबंटन किया है। यह अन्य राज्यों के औसत आबंटन (4.1%) से अधिक है।

 

Sources State Budget Documents 2019-20 and 2020-21 (Annual Financial Statement); PRS.
 

अनुलग्नक 2: 2020-21 में 15वें वित्त आयोग के सुझाव

15वें वित्त आयोग ने 1 फरवरी, 2020 को 2020-21 के वित्तीय वर्ष के लिए अपनी रिपोर्ट संसद में पेश की। आयोग ने सुझाव दिया है कि 2020-21 में केंद्र सरकार के कर राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी 41की जाए, जोकि 14वें वित्त आयोग द्वारा सुझाए 42हिस्से से 1कम है। नव निर्मित केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख को केंद्र सरकार द्वारा धनराशि देने के लिए 1% की गिरावट की गई है। 15वें वित्त आयोग ने सभी राज्यों की हिस्सेदारी को निर्धारित करने के लिए संशोधित मानदंड भी प्रस्तावित किया है।

तालिका 8 में केंद्र सरकार के कर राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी प्रदर्शित की गई है [†] जोकि 2015-20 के लिए 14वें वित्त आयोग और 2020-21 के लिए 15वें वित्त आयोग के सुझावों पर आधारित है। 15वें वित्त आयोग ने सुझाव दिया है कि 2020-21 के लिए केंद्र के कर राजस्व में राज्य का हिस्सा 7.35% हो (2015-20 के लिए 14वें वित्त आयोग द्वारा सुझाए 7.54% हिस्से से कम)। इसका अर्थ यह है कि 2020-21 में केंद्र के कर राजस्व में प्रति 100 रुपए पर उत्तर प्रदेश को 7.35 रुपए मिलेंगे। तालिका 8 में 2019-20 और 2020-21 के लिए केंद्र द्वारा राज्यों को अनुमानित हस्तांतरण को प्रदर्शित किया गया है (करोड़ रुपए में)।

तालिका 3: 14वें और 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत केंद्रीय कर राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी (2020-21) 

राज्य

केंद्र के कर राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी

केंद्र द्वारा राज्यों को हस्तांतरण

14वां विआ (2015-20)

15वां विआ (2020-21)

% परिवर्तन

2019-20 संअ

2020-21 बअ

% परिवर्तन

आंध्र प्रदेश

1.81

1.69

-7%

28,242

32,238

14%

अरुणाचल प्रदेश

0.58

0.72

24%

8,988

13,802

54%

असम

1.39

1.28

-8%

21,721

24,553

13%

बिहार

4.06

4.13

2%

63,406

78,896

24%

छत्तीसगढ़ 

1.29

1.4

9%

20,206

26,803

33%

गोवा

0.16

0.16

0%

2,480

3,027

22%

गुजरात

1.3

1.39

7%

20,232

26,646

32%

हरियाणा

0.46

0.44

-4%

7,112

8,485

19%

हिमाचल प्रदेश

0.3

0.33

10%

4,678

6,266

34%

जम्मू एवं कश्मीर

0.78

-

-

12,171

-

-

झारखंड

1.32

1.36

3%

20,593

25,980

26%

कर्नाटक

1.98

1.49

-25%

30,919

28,591

-8%

केरल

1.05

0.8

-24%

16,401

15,237

-7%

मध्य प्रदेश

3.17

3.23

2%

49,518

61,841

25%

महाराष्ट्र

2.32

2.52

9%

36,220

48,109

33%

मणिपुर

0.26

0.29

12%

4,048

5,630

39%

मेघालय

0.27

0.31

15%

4,212

5,999

42%

मिजोरम

0.19

0.21

11%

3,018

3,968

31%

नागालैंड

0.21

0.23

10%

3,267

4,493

38%

ओड़िशा

1.95

1.9

-3%

30,453

36,300

19%

पंजाब

0.66

0.73

11%

10,346

14,021

36%

राजस्थान

2.31

2.45

6%

36,049

46,886

30%

सिक्किम

0.15

0.16

7%

2,408

3,043

26%

तमिलनाडु

1.69

1.72

2%

26,392

32,849

24%

तेलंगाना

1.02

0.87

-15%

15,988

16,727

5%

त्रिपुरा

0.27

0.29

7%

4,212

5,560

32%

उत्तर प्रदेश

7.54

7.35

-3%

1,17,818

1,40,611

19%

उत्तराखंड

0.44

0.45

2%

6,902

8,657

25%

पश्चिम बंगाल

3.08

3.08

0%

48,048

58,963

23%

कुल 

42

41

-2%

6,56,046

7,84,181

20%

Sources:   Reports of 14th and 15th Finance Commissions (2020-21); Union Budget Documents 2020-21; PRS.

इसके अतिरिक्त 15वें वित्त आयोग ने 2020-21 के लिए विशेष लक्ष्यों के लिए कुछ सहायतानुदान दिए जाने का सुझाव दिया है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) राजस्व घाटा समाप्त करने के लिए राज्यों को 74,341 करोड़ रुपए का अनुदान, जोकि उत्तर प्रदेश को नहीं दिया जाएगा, और (ii) स्थानीय निकायों को 90,000 करोड़ रुपए का अनुदान, जिसके लिए उत्तर प्रदेश को 14,447 करोड़ रुपए मिलेंगे (इसमें ग्रामीण स्थानीय निकायों को 9,752 करोड़ रुपए और शहरी स्थानीय निकायों को 4,695 करोड़ रुपए दिए जाएंगे)।

 

[*] 29 states include all states except Manipur.  It also includes the Union Territory of Delhi and the erstwhile state of Jammu and Kashmir.

[†] This excludes the cess and surcharge revenue of the central government as it is outside the divisible pool and not shared with states As per the 2019-20 union budget, cess and surcharge revenue account for 15of the estimated gross tax revenue of the central government.

 

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