सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय समाज के कुछ वंचित वर्गों के कल्याण और सशक्तीकरण के लिए जिम्मेदार है, जैसे (i) अनुसूचित जातियां (एससी), (ii) अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसीज़), (iii) विकलांग जन, (iv) वरिष्ठ नागरिक, (v) मादक पदार्थों के व्यसन से पीड़ित व्यक्ति, और (vi) ट्रांसजेंडर व्यक्ति।  

मंत्रालय के अंतर्गत दो विभाग आते हैं: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और विकलांग जन सशक्तीकरण विभाग।

तालिका 1: मंत्रालय के लक्षित समूह की जनसंख्या

लक्षित समूह

जनसंख्या (करोड़ में)

अनुसूचित जातियां

20.14 (17%)

अन्य पिछड़ी जातियां (ओबीसीज़)

ओबीसीज़ की सरकारी जनगणना 1931 के बाद से नहीं की गई। एनएसएसओ (2009-10) ने इनकी जनसंख्या 42% अनुमानित की है।

विकलांग जन

2.68 (2%)

वरिष्ठ नागरिक

10.36 (8.6%)

Sources: Annual Report 2017-18, Department of Social Justice and Empowerment; PRS.

यह नोट मंत्रालय के अंतर्गत मुख्य मदों में किए जाने वाले व्यय और उससे संबंधित मुद्दों का विश्लेषण करता है।  

वित्तीय विवरण

बजटीय आबंटन 2018-19

2018-19 में मंत्रालय के लिए 8,820 करोड़ रुपए का कुल आबंटन किया गया, जोकि 2017-18 के संशोधित अनुमान से 12% अधिक है।[1] 

2018-19 के कुल व्यय में 7,750 करोड़ रुपए (88%) सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और 1,070 करोड़ रुपए (12%) विकलांग जन सशक्तीकरण विभाग को आबंटित किए गए हैं। 

तालिका 2 में मंत्रालय के दोनों विभागों के आबंटनों का विभाजन प्रस्तुत किया गया है।

तालिका 2: बजटीय आबंटन (2018-19) (करोड़ रु. में)

 

वास्तविक 2016-17

संअ

2017-18

बअ 2018-19

% परिवर्तन (संअ से बअ)

सामाजिक न्याय विभाग

6,516

6,908

7,750

12%

विकलांग जन विभाग

773

955

1,070

12%

कुल

7,289

7,863

8,820

12%

Notes: BE Budget Estimate; RE Revised Estimate.

SourcesUnion Budget 2018-19, Ministry of Social Justice and Empowerment; PRS.

2018-19 में दोनों विभागों का बजट अनुमान, पिछले वर्ष (2017-18) के संशोधित अनुमानों से 12% अधिक है। निम्नलिखित रेखाचित्र में 2009-10 से 2017-18 के दौरान व्यय की प्रवृत्ति प्रदर्शित है।  

रेखाचित्र 1: व्यय की प्रवृत्ति (2009-18) (करोड़ रु. में)

 Notes: The BE and actuals post 2014-15 are a combination of the Department of Social Justice and Empowerment, and the Department of Empowerment of Persons with Disabilities2017-18.

Sources: Ministry of Social Justice and Empowerment; PRS

2009-10 से 2017-18 की अवधि में मंत्रालय के व्यय में सतत वृद्धि हुई। इसमें केवल 2012-13 एक अपवाद रहा, जब मंत्रालय के व्यय में इससे पिछले वर्ष की तुलना में 2% की हल्की गिरावट हुई। 2009-10 से 2017-18 की अवधि में संचयी वार्षिक वृद्धि दर (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट- सीएजीआर) 37% थी। सीएजीआर एक विशिष्ट समयावधि के लिए वार्षिक वृद्धि दर होती है।

हालांकि मंत्रालय का आबंटन पिछले वर्षों में बढ़ा है, लेकिन यह मंत्रालय की अनुदान मांगों से कम रहा है। उदाहरण के लिए 2016-17 में मंत्रालय ने 10,643 करोड़ रुपए की मांग सौंपी थी, जिसकी एवज में मंत्रालय को 6,566 करोड़ रुपए आबंटित किए गए।[2]  इसी प्रकार 2017-18 में मंत्रालय ने 10,356 करोड़ रुपए की मांग पेश की थी, लेकिन उसे केवल 6,908 करोड़ रुपए आबंटित किए गए।

जैसा कि रेखाचित्र 2 में प्रदर्शित है, 2009-10 से 2016-17 के दौरान मंत्रालय ने कुल आबंटित राशि का पूरा उपयोग (अंडरयूटिलाइजेशन) नहीं किया। 2013-14 में 18% राशि का उपयोग नहीं हुआ, जोकि इस अवधि का सबसे बड़ा आंकड़ा है। 2016-17 में केवल 1% राशि का उपयोग नहीं किया गया और 2017-18 में मंत्रालय के संशोधित अनुमानों में बजटीय आबंटन के 1% से अधिक व्यय करने की उम्मीद जताई गई है।

रेखाचित्र 2: उपभोग की प्रवृत्तियां (2009-2018) (करोड़ रु. में)

 

Notes: The BE and actuals post 2014-15 are a combination of the Department of Social Justice and Empowerment, and the Department of Empowerment of Persons with DisabilitiesData for 2017-18 is a revised estimate.

Sources: Union Budget 2009-10 to 2018-19, Ministry of Social Justice and Empowerment; PRS.

सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (2016-17) ने कहा कि फंड्स के उपयोग न होने के मुख्य कारणों में से एक उत्तर पूर्वी राज्यों द्वारा व्यय न करना है।2,[3]1996 से सरकार ने सभी मंत्रालयों के लिए यह अनिवार्य कर दिया कि वे उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए 10% का आबंटन करेंगे।[4]  स्टैंडिंग कमिटी ने कहा कि निम्नलिखित कारण इन राज्यों द्वारा फंड्स का उपयोग न करने को स्पष्ट कर सकते हैं : (i) उत्तर पूर्वी राज्यों द्वारा यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट्स समय पर न भेजना, जिसके कारण फंड्स लैप्स हो गए, और (ii) इन राज्यों द्वारा फंड्स की कम मांग करना।2 

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग

2018-19 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के लिए 7,750 करोड़ आबंटित किए गए हैं। 2017-18 के संशोधित अनुमानों की तुलना में विभाग के आबंटन में 12% की वृद्धि है। तालिका 3 में मुख्य मदों के लिए विभाग को किए गए आबंटन का विवरण दिया गया है। 

तालिका 3: मुख्य मदों के लिए आबंटन (करोड़ रु. में)

व्यय की मदें

बजटीय 2018-19

आबंटन का %

अनुसूचित जातियों के विकास के लिए अंब्रेला स्कीम

5,183

66.9%

अन्य कमजोर समूहों के विकास के लिए अंब्रेला स्कीम

1,987

25.6%

अन्य केंद्रीय योजनाएं/ प्रॉजेक्ट्स

500

6.5%

अन्य

80

1.0%

कुल

7,750

 

Sources: Demand no. 89, Department of Social Justice and Empowerment; PRS.

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग में सर्वाधिक आबंटन (66.9%) अनुसूचित जातियों के विकास की अंब्रेला स्कीम के लिए किया गया है। इन स्कीम्स में पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप और अनुसूचित जाति उप-योजना को विशेष केंद्रीय सहायता शामिल है।

2018-19 में विभाग की कुल आबंटित राशि का 79.4% हिस्सा तालिका 4 में दी गई योजनाओं के लिए आबंटित किया गया है।

तालिका 4: विभाग के व्यय की मुख्य मदें (करोड़ रु. में)

 

वास्तविक 2016-17

संअ 2017-18

बअ 2018-19

संअ से बअ में  परिवर्तन

अनुसूचित जातियों के विकास के लिए अंब्रेला स्कीम

पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप

2,799

3,348

3,000

-10.4%

विशेष केंद्रीय सहायता

600

800

1,000

25.0%

नागरिक अधिकारों का प्रवर्तन

223

305

404

32.3%

अजा. के लिए वेंचर कैपिटल फंड

40

40

140

250.0%

मैनुअल स्कैवेंजर्स (हाथ से मैला ढोने वालों) का पुनर्वास

0

5

20

300.0%

अन्य कमजोर समूहों के विकास के लिए अंब्रेला स्कीम

ओबीसीज़ के लिए पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप

876

885

1,100

24.3%

प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप

129

142

232

63.4%

शराब और मादक पदार्थों (दवाओं) के सेवन की रोकथाम हेतु राष्ट्रीय नीति

0

0.01

155

1549900%

आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के विकास के लिए योजना

15.12

10

103

930.0%

Notes: BE Budget Estimate; RE Revised Estimate.

Sources: Demand no. 89, Department of Social Justice and Empowerment; PRS.

  • विभाग के व्यय का 38.7% हिस्सा पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप्स के लिए है। 2017-18 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 2018-19 में आबंटन में 10.4% की गिरावट हुई है।
  • 2018-19 में मैनुअल स्कैवेंजर्स के पुनर्वास हेतु स्वरोजगार योजना के लिए 20 करोड़ रुपए का आबंटन किया गया है, जोकि 2017-18 के संशोधित अनुमानों (5 करोड़ रुपए) से काफी अधिक है। उल्लेखनीय है कि 2016-17 के वास्तविक आंकड़ों ने संकेत दिया कि हालांकि उस वर्ष की बजटीय राशि 10 करोड़ रुपए थी, पर विभाग ने इस योजना पर कोई व्यय नहीं किया।
  • 2018-19 में अनुसूचित जातियों के लिए वेंचर कैपिटल फंड में पिछले वर्ष (2017-18) के संशोधित अनुमान की तुलना में 250% की वृद्धि हुई। इस फंड के लिए 2018-19 में 140 करोड़ रुपए का आबंटन किया गया।
  • शराब और मादक पदार्थों (दवाओं) के सेवन की रोकथाम हेतु राष्ट्रीय नीति के आबंटन में बड़ा बदलाव आया। 2017-18 में इस योजना के लिए 1 लाख रुपए का संशोधित अनुमान था। 2018-19 में इसके लिए 155 करोड़ रुपए का आबंटन किया गया जोकि 2017-18 के संशोधित अनुमान से उल्लेखनीय रूप से अधिक है।

मुख्य योजनाएं

पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप 

पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना है। इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति के उन विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है, जो पोस्ट मैट्रिकुलेशन या पोस्ट सेकेंडरी चरण पर पढ़ाई कर रहे हैं। यह स्कॉलरशिप अनुसूचित जाति के केवल उन विद्यार्थियों को दी जाएगी जिनके माता-पिता/अभिभावक की आय प्रति वर्ष 2,50,000 रुपए तक है।

2018-19 में इस योजना के लिए 3,000 करोड़ रुपए आबंटित किए गए थे, जोकि 2017-18 के संशोधित अनुमानों (3,348 करोड़ रुपए) से 10% कम है। 2014-15 से 2016-17 तक इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों की संख्या प्रति वर्ष 56 लाख थी।[5] 

बजट अनुमान बनाम वास्तविक व्यय: निम्नलिखित तालिका 5 प्रदर्शित करती है कि योजना के लिए 2012-13 से 2018-19 के बीच आबंटन और वास्तविक व्यय की प्रवृत्ति क्या रही।

तालिका 5: व्यय की प्रवृत्तियां: पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप (करोड़ रु. में)

वर्ष

बजटीय

वास्तविक

उपयोग  का %

2012-13

1,500

1,655

110.3%

2013-14

1,500

2,153

143.5%

2014-15

1,500

 1,963

130.9%

2015-16

1,599

 2,214

138.5%

2016-17

2,791

2,799

100.3%

2017-18*

3,348

3,348*

100%

*Revised Estimate.

Sources: Union Budget 2012-13 to 2018-19, Ministry of Social Justice and Empowerment; PRS

योजना के लिए आबंटन पिछले वर्षों में बढ़ा है। इस दौरान की प्रवृत्तियों से प्रदर्शित होता है कि फंड्स का अत्यधिक उपयोग किया गया (वास्तविक व्यय बजट अनुमानों से अधिक है)। 2013-14 में वास्तविक व्यय बजट अनुमान का 143.5% था। हालांकि 2017-18 में संशोधित अनुमान, बजट अनुमान के बराबर है। उपयोग अधिक होने या पूरा उपयोग न होने का अर्थ यह होता है कि पर्याप्त बजट का अभाव रहा, साथ ही संसाधनों की प्लानिंग और योजना के कार्यान्वयन में कमियां रहीं।

बकाया (एरियर्स):  यह योजना ओपेन एंडेड है। इसके लाभार्थियों की संख्या की कोई सीमा तय नहीं है या शैक्षणिक संस्थानों द्वारा वसूली जाने वाली फीस की राशि भी तय नहीं है।[6] इसका नतीजा यह हुआ है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य केंद्र से फंड्स जारी करने के प्रस्ताव प्रस्तुत कर रहे हैं, लेकिन केंद्रीय सहायता मांग से कम रही है। परिणामस्वरूप योजना के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की बकाया राशि जमा होती जा रही है।2  8 फरवरी को, योजना के अंतर्गत 6,825 करोड़ रुपए की राशि बकाया है जोकि विभाग के कुल आबंटित बजट का 88% है।2 

तालिका 6 में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा मांगी केंद्रीय सहायता के आंकड़े प्रदर्शित हैं। साथ ही 2014-15 से 31 जनवरी, 2018 तक योजना के अंतर्गत जारी केंद्रीय सहायता के आंकड़े प्रदर्शित किए गए हैं। 

तालिका 6: केंद्रीय सहायता (करोड़ रु. में)

वर्ष

मांगी गई सहायता

जारी कई गई सहायता

 जारी की गई सहायता का %

2014-15

4,187

1,963

53.8%

2015-16

4,532

2,214

56.8%

2016-17

4,213

2,799

58.6%

2017-18*

2,694

2,507

93%

*Data for 2017-18 not finalized

Sources: Starred question no 42, Lok Sabha; PRS.

2016-17 में केवल 58.6% केंद्रीय सहायता जारी की गई। 2016-17 के अंत में योजना के अंतर्गत संचित बकाया राशि 8,000 करोड़ रुपए से बढ़ गई। उल्लेखनीय है कि बकाया (एरियर्स) किसी एक वर्ष के बजटीय आबंटन के अतिरिक्त राशि होती है। 

सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्टैडिंग कमिटी (2016-17) ने सुझाव दिया था कि मंत्रालय को लंबित बकाया को निपटाने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ वन-टाइम स्पेशल पैकेज पर चर्चा करनी चाहिए।2व्यय वित्त कमिटी के सुझावों के आधार पर, बकाया राशि को निपटाने के लिए अतिरिक्त फंड्स का एक प्रस्ताव आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी को भेज दिया गया है।6 

विशेष केंद्रीय सहायता

विशेष केंद्रीय सहायता योजना का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले अनुसूचित जाति के लोगों के आर्थिक विकास से संबंधित योजनाओं को सहायता प्रदान करना है। योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति उप-योजना हेतु राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 100% अनुदान प्रदान किया जाता है।  

2018-19 में योजना के लिए 1,000 करोड़ रुपए का बजट अनुमान है जिसमें 2017-18 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 25% की वृद्धि है। उल्लेखनीय है कि फंड्स का उपयोग बजट अनुमान से कम है।  

तालिका 7: व्यय की प्रवृत्ति: विशेष केंद्रीय सहायता (करोड़ रु. में)

वर्ष

बजटीय

वास्तविक

उपयोग  का %

2012-13

1,200

872

72.7%

2013-14

1,051

790

75.2%

2014-15

1,060

700

66%

2015-16

1,107

800

72.2%

2016-17

800

797

99.7%

2017-18

800

800*

100%

*Revised Estimate

Sources: Union Budget 2012-13 to 2018-19, Ministry of Social Justice and Empowerment; PRS

मैनुअल स्कैवेंजर्स का पुनर्वास

2007 में मैनुअल स्कैवेंजर्स के पुनर्वास के लिए स्वरोजगार योजना की शुरुआत की गई जिसका उद्देश्य मैनुअल स्कैवेंजर्स और उनके आश्रितों का पुनर्वास करना था। मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में रोजगार पर प्रतिबंध और उनका पुनर्वास एक्ट, 2013 के आने के बाद इस योजना को नवंबर 2013 में संशोधित किया गया। योजना के अनुसार, मैनुअल स्कैवेंजर्स 40,000 रुपए की वन टाइम नकद सहायता के लिए अधिकृत हैं। इसके अतिरिक्त योजना के अंतर्गत वे कैपिटल सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी और प्रशिक्षण के लिए भी अधिकृत हैं।  

2018-19 में योजना के लिए 20 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं जबकि 2017-18 के संशोधित अनुमान 5 करोड़ रुपए थे।

तालिका 8: मैनुअल स्कैवेंजर्स के पुनर्वास हेतु आबंटन (करोड़ रु. में)

वर्ष

बजटीय

वास्तविक

उपयोग का %

2010-11

5

0

0.0%

2011-12

98

0

0.0%

2012-13

98

20

20.4%

2013-14

557

35

6.3%

2014-15

439

0

0.0%

2015-16

461

0

0.0%

2016-17

10

0

0.0%

2017-18

5

5*

100.0%

*Revised Estimate

Sources: Union Budget 2010-11 to 2018-19, Ministry of Social Justice and Empowerment; PRS

2010-11 से 2017-18 तक, सात में से पांच वर्षों के दौरान आबंटित राशि का उपयोग नहीं किया गया। सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (2016-17) ने इस बात का उल्लेख किया।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (2016-17) ने यह गौर किया कि जनगणना 2011 के अनुसार देश में 26 लाख सूखे शौचालय (इनसैनिटरी लैट्रिन्स) हैं। हालांकि कमिटी ने कहा कि मैनुअल स्कैवेंजर्स की संबंधित संख्या काफी कम, 12,737 थी (31 जनवरी, 2017 तक)। कमिटी ने कहा कि इसका कारण यह था कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने मैनुअल स्कैवेंजर्स की पहचान बहुत धीमी गति से की है। कमिटी ने यह भी कहा कि कुछ राज्यों ने सर्वे वेबसाइटों पर मैनुअल स्कैवेंजर्स की चिन्हित संख्या को अपलोड नहीं किया। चूंकि नकद सहायता के लिए अपलोड एक अनिवार्य शर्त है, इसलिए फंड्स की कोई मांग नहीं की गई।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (2016-17) ने सुझाव दिया कि मैनुअल स्कैवेंजर्स पर नया सर्वे किया जाना चाहिए। इससे फंड्स की जरूरत का बेहतर आकलन किया जाएगा और विभाग के आबंटन में वृद्धि होगी।        

विकलांग जन सशक्तीकरण विभाग

2018-19 में विकलांग जन सशक्तीकरण विभाग के लिए 1,070 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं। विभाग के आबंटन में 2017-18 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 12% की वृद्धि है। तालिका 9 में विभाग की मुख्य मदों के आबंटनों का विवरण है।

तालिका 9: व्यय की मुख्य मदें (करोड़ रु. में)

व्यय की मदें

बजटीय 

आबंटन का %

राष्ट्रीय विकलांग जन कल्याण कार्यक्रम*

368

34%

अन्य कमजोर समूहों के विकास हेतु अंब्रेला कार्यक्रम **

300

28%

स्वायत्त निकाय

257

24%

अन्य

145

13%

कुल

1,070

 

*Includes allocation to the scheme for assistance to disabled persons for purchase/fitting of appliances.

** Includes allocation to the schemes under Persons with Disability Act, 1995.

Sources: Demand no. 90, Department of Empowerment of Persons with Disabilities; PRS.

राष्ट्रीय विकलांग जन कल्याण कार्यक्रम में जिन योजनाओं के लिए आबंटन शामिल हैं, उनमें निम्नलिखित शामिल है : (i) उपकरणों की खरीद/फिटिंग के लिए विकलांग जन को सहायता संबंधी योजना (एडीआईपी), और (ii) दीनदयाल विकलांग जन पुनर्वास योजना। इन योजनाओं में सर्वाधिक आबंटन एडीआईपी योजना के लिए है (220 करोड़ रुपए, कुल बजट का 21%)।

अन्य कमजोर समूहों के विकास हेतु अंब्रेला कार्यक्रम में विकलांग जन एक्ट, 2005 के अंतर्गत आने वाली योजनाएं शामिल हैं। विकलांग जन एक्ट 2005 को लागू करने के लिए इन योजनाओं हेतु 300 करोड़ रुपए का आबंटन किया गया है, जोकि विभाग के कुल आबंटन का 28% है।

उपकरणों की खरीद/फिटिंग के लिए विकलांग जन को सहायता

केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में 2005 में एडीआईपी योजना शुरू की गई। यह योजना विभिन्न एजेंसियों (जैसे एनजीओज़ और विकलांग जन पुनर्वास केंद्रों) को वित्तीय सहायता प्रदान करती है जिससे वे उपकरणों और सहायक यंत्रों की खरीद में विकलांग जन (जिन्हें जरूरत हो) की सहायता कर सकें। 2018-19 में विभाग के बजट में इस योजना के लिए दूसरा सबसे बड़ा आबंटन (21%) किया गया।3

2018-19 में योजना के लिए 220 करोड़ रुपए का आबंटन किया गया जिसमें 2017-18 के संशोधित अनुमान (200 करोड़ रुपए) की तुलना में 10% की वृद्धि है। 

तालिका 10 में 2014-15 से 2017-18 के दौरान योजना के आबंटन और वास्तविक व्यय की प्रवृत्तियां प्रदर्शित की गई हैं।

तालिका 10: एडीआईपी पर बजटीय बनाम वास्तविक व्यय (करोड़ रु. में)

वर्ष

बजटीय

वास्तविक

उपयोग का %

2014-15

110

101

92.1%

2015-16

125

151

120.4%

2016-17

130

170

130.7%

2017-18

150

200*

133.3%

2018-19

220

-

-

*Revised estimates.

Sources: Report No. 37, Standing Committee on Social Justice and Empowerment, (2016-17); PRS.

पिछले तीन वर्षों में एडीआईपी का वास्तविक व्यय, बजट अनुमानों से काफी हद तक आगे निकल गया। 2016-17 में यह 130% था और 2017-18 में इसके 133% होने की उम्मीद जताई गई है।

लक्ष्य हासिल2014-15 से 2016-17 की अवधि के दौरान समूचे व्यय में वृद्धि की प्रवृत्ति देखी गई। हालांकि इन तीन वर्षों में विभाग अपने लक्ष्य (लाभार्थियों की संख्या) हासिल करने में असफल रहा।

2014-15 से 2016-17 के दौरान लाभार्थियों की लक्षित संख्या 2.8 लाख प्रति वर्ष थी। 2017-18 में सरकार का लक्ष्य 3.5 लाख का था।[7] 

तालिका 11 में नामांकित लाभार्थियों की लक्षित और वास्तविक संख्या प्रदर्शित की गई है।

तालिका 11: लाभार्थियों की संख्या

वर्ष

बजटीय

वास्तविक

कितना लक्ष्य हासिल नहीं हुआ

2014-15

2,80,000

2,39,560

17%

2015-16

2,80,000

2,05,614

36%

2016-17

2,80,000

2,18,975*

28%

2017-18

3,50,000

1,08,064**

31%

* As on January 31, 2017.

** Data updated till October 31, 2017.

Sources: Report No. 37, Standing Committee on Social Justice and Empowerment, (2016-17); Report No. 48, Standing Committee on Social Justice and Empowerment, (2017-18); Niti Aayog Report on Three Year Action Agenda; PRS.

2017-18 के लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभाग को 2017-18 के अंत तक कम से कम 2,41,936 अतिरिक्त लाभार्थियों को नामांकित करने की जरूरत है। जैसा कि तालिका 12 में प्रदर्शित है, पिछले वर्षों में नामांकित लाभार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (2017-18) ने कहा कि योजना का कार्यान्वयन पूरी तरह से न होने के कई कारण हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल है : (i) विकलांग जन में योजना से संबंधीत जागरूकता का अभाव, और (ii) विकलांग जन की कुल संख्या निर्धारित करने के लिए पुराने और असामान्य (गिने-चुने) जनगणना सर्वेक्षण पर निर्भरता।[8]  उल्लेखनीय है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमानों के अनुसार, विकलांग जन जनसंख्या का 15% हैं।[9]  हालांकि 2011 में भारत की जनगणना के सबसे हालिया आंकड़े बताते हैं कि विकलांग जन की संख्या कुल जनसंख्या का केवल 2% है और मंत्रालय की योजनाओं का लाभ लेने के लिए पात्र है। 

सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (2016-17) ने यह भी गौर किया कि कुछ राज्यों में निर्धारित समयावधि में लाभार्थियों की संख्या लगातार कम हुई है। कमिटी ने दोहराया कि योजना के अंतर्गत अधिक लाभार्थियों को शामिल किए जाने की जरूरत है।3 

विकलांग जन एक्ट, 1995 के कार्यान्वयन हेतु योजनाएं (सिपडा)

इस योजना का उद्देश्य विकलांग जन (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) एक्ट, 1995 के कार्यान्वयन को सहज बनाना है। यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। 2015 में शुरू किए गए सुगम्य भारत अभियान पर योजना का संपूर्ण बल है।

2018-19 में योजना के लिए 300 करोड़ रुपए आबंटित किए गए जिसमें 2017-18 के संशोधित अनुमान की तुलना में 16% की वृद्धि है।

तालिका 12 प्रदर्शित करती है कि योजना के अंतर्गत खर्च की गई राशि और कुल बजट आबंटन में उपयोग की गई राशि का कितना हिस्सा है।

तालिका 12: सिपडा के लिए उपयोग की गई राशि (करोड़ रु. में)

वर्ष

बजटीय

वास्तविक

उपयोग का %

2014-15

80

43.09

46%

2015-16

135

69.42

49%

2016-17

193

110.71

43%

2017-18

207

257*

-

2018-19

300

-

-

*Revised estimates.

Sources: Report No. 37, Standing Committee on Social Justice and Empowerment, (2016-17); PRS.

2014-15 से 2016-17 के दौरान सिपडा के लिए किए गए आबंटन का पूरा उपयोग नहीं किया गया। 2016-17 में केवल 43% बजटीय आबंटन का उपयोग किया गया। विभाग के अनुसार, अधिकतर फंड्स सुगम्य भारत अभियान के अंतर्गत प्रयोग किया जाना प्रस्तावित है।

उल्लेखनीय है कि 2016-17 के बजटीय आबंटन में सरकार सुगम्य भारत अभियान पर खास तौर से 193 करोड़ रुपए खर्च करने को प्रतिबद्ध है। हालांकि आबंटन पूरी योजना के लिए किया गया था और अभियान के लिए कोई विशेष फंड्स नहीं दिए गए थे।[10]

सुगम्य भारत अभियान:  सुगम्य भारत अभियान की शुरुआत 2015 में हुई थी। यह सरकार का फ्लैगशिप कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य पब्लिक युटिलिटी एरियाज (सरकारी इमारतों, हवाई अड्डों, सड़कों) में विकलांग जन को बाधा रहित पहुंच प्रदान करना है। 2017-18 में इस कार्यक्रम को लागू करने के लिए विभाग को अत्यधिक आबंटन (207 करोड़ रुपए) किया गया। सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी कमिटी (2016-17) ने गौर किया कि निर्माण चरण में भी किसी नए इंफ्रास्ट्रक्चर को बाधा रहित बनाया जाए, इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए।3  यह कहा गया कि इसका परिणाम यह होगा कि किसी नए इंफ्रास्ट्रक्चर को बाधा रहित बनाने के लिए अतिरिक्त व्यय करना होगा।  

नीति आयोग के अनुसार, विभाग का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में 10,000 सरकारी इमारतों और निजी क्षेत्र की 75% इमारतों को पूर्ण रूप सुगम्य बनाना होगा। यह योजना 2017-18 से प्रारंभ की गई है। इसके अतिरिक्त सरकार के स्वामित्व वाले 75% सार्वजनिक परिवहन और निजी क्षेत्र के स्वामित्व वाले 50% परिवहन को सुगम्य बनाने का लक्ष्य भी रखा जाएगा।7  

18 दिसंबर, 2017 को 50 शहरों की 1662 इमारतों का एसेस ऑडिट पूरा कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त ए1, ए, बी श्रेणी के 709 रेलवे स्टेशनों में से 644 को और 1,41,572 बसों में से 12,894 को सुगम्यता संबंधी विशेषताएं प्रदान की गई हैं।[11]  विभाग को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि सुगम्यता संबंधी लक्ष्य को 2019-20 तक हासिल कर लिया जाए।

 

[1] Demand for Grants 2018-19, Ministry of Social Justice and Empowerment, February 1, 2018

[2] 36th Report, Standing Committee on Social Justice and Empowerment, Ministry of Social Justice and Empowerment, March 2017.

[3] 37th Report, Standing Committee on Social Justice and Empowerment, Ministry of Social Justice and Empowerment, March 2017.

[4] Ministry of Development of North East Region, http://www.mdoner.gov.in/content/rationale.

[5] Unstarred Question no. 761, Rajya Sabha, Ministry of Social Justice and Empowerment, February 8, 2018, http://164.100.158.235/question/annex/245/Au761.pdf.

[6] Unstarred Question no. 2315, Lok Sabha, Ministry of Social Justice and Empowerment, January 2, 2018, http://164.100.47.190/loksabhaquestions/annex/13/AU2315.pdf.

[7] Three Year Action Agenda, Niti Aayog, August 2017, http://niti.gov.in/writereaddata/files/coop/IndiaActionPlan.pdf 

[8] 48th Report, Standing Committee on Social Justice and Empowerment, Ministry of Social Justice and Empowerment, January 2018.

[9]World Report on Disability, World Health Organisation, 2011.

[10]Increased Budget Allocation to Social Justice Ministry to Boost Social Welfare Schemes, Press Information Bureau, Ministry of Social Justice and Empowerment, March 3, 2016.

[11]Year End Review of 2017 M/o Social Justice and Empowerment, Press Information Bureau, Ministry of Social Justice and Empowerment, December 18, 2017.

 

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