सीमा सुरक्षा : क्षमता निर्माण और संस्थान

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश 

  • गृह मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (चेयरपर्सन: पी. चिदंबरम) ने 11 अप्रैल, 2017 को ‘सीमा सुरक्षा : क्षमता निर्माण और संस्थान’ पर अपनी रिपोर्ट सौंपी।
     
  • सीमा पर स्थित चौकियां: कमिटी ने सीमा पर स्थित इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे चौकियां बनाने, बाड़ और फ्लडलाइट लगाने से जुड़े विषयों पर टिप्पणियां कीं। कमिटी ने पाया कि भारत-बांग्लादेश सीमा और भारत-पाकिस्तान सीमा पर 509 चौकियां बनाने के प्रस्ताव को 2016 में संशोधित करके 422 कर दिया गया। कमिटी ने सुझाव दिया कि इस संशोधन पर पुनर्विचार किया जाए क्योंकि 509 चौकियां बनाने से ही दो चौकियों के बीच की दूरी घटकर 3.5 किलोमीटर होगी। कमिटी ने इस बात पर चिंता जताई कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर नए लक्ष्य को पूरा नहीं किया जा सका है (2016 के अंत तक 326 चौकियां बनाने के लक्ष्य की जगह 97 चौकियां बनाने का काम ही पूरा हुआ है)।
     
  • बाड़ लगाना: कमिटी ने टिप्पणी की कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम काफी धीमी गति से किया गया (जुलाई 2015 से अब तक, 17 महीनों में 21 किलोमीटर बाड़ लगाई गई)। कमिटी ने कहा कि इस गति से सरकार मार्च 2019 तक सीमा सील नहीं कर पाएगी, जैसा कि लक्ष्य है।
     
  • कमिटी गौर किया कि थार रेगिस्तान में रेत के टीलों के खिसकने के कारण बाड़ लगाने का काम बेअसर हो गया। कमिटी ने सभी सॉल्यूशंस, जैसे अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर बनी फेंसिंग की जांच करने के लिए टेक्निकल एक्सपर्ट कमिटी के गठन की मांग की।
     
  • सड़क से कनेक्टिविटी: कमिटी ने टिप्पणी की कि कुछ सीमा क्षेत्र सड़कों से जुड़े हुए नहीं हैं और वहां सड़क परियोजनाएं लंबित पड़ी हैं। इनमें जम्मू, पंजाब जैसे क्षेत्र और भारत-चीन एवं नेपाल की सीमाएं शामिल हैं। कमिटी ने कहा कि इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए सीमा सड़क संगठन के पास पर्याप्त संसाधन मौजूद नहीं हैं। इसलिए कमिटी ने ऐसे निर्माण के लिए किसी निजी कंपनी के साथ संयुक्त उपक्रम करने का सुझाव दिया।
     
  • सीमाओं की सुरक्षा करने वाले बल: कमिटी ने गौर किया कि असम राइफल्स भारत-म्यांमार सीमा के लिए समर्पित सुरक्षा बल नहीं है। वह फिलहाल यह काम कर रहा है। कमिटी ने सुझाव दिया कि सरकार को इस सीमा की सुरक्षा के लिए एक समर्पित सशस्त्र बल पर अंतिम निर्णय लेना चाहिए। कमिटी ने यह भी पाया कि सैन्यकर्मियों की संख्या कम होने के कारण सीमाओं की सुरक्षा करने वाले जवानों को एक दिन में 16 से 18 घंटे तक काम करना पड़ता है। कमिटी ने सुझाव दिया कि इस व्यवस्था को बदला जाना चाहिए जैसे कि जवान 4 घंटे की दो शिफ्ट करें और शिफ्ट्स के बीच 8 से 10 घंटे का अंतराल हो।
     
  • तटीय सुरक्षा: कमिटी ने टिप्पणी की कि तटीय सुरक्षा योजना के चरण दो को लक्ष्य के अनुरूप मार्च 2016 तक पूरा नहीं किया गया। उसने योजना को जल्द से जल्द पूरा करने का सुझाव दिया। इस योजना के तहत विभिन्न तटीय राज्यों को समुद्री पुलिस थानों, जेटी, नावों, वाहनों इत्यादि से लैस किया जाना था। इसके अतिरिक्त कमिटी ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि योजना की 177 वीं रिपोर्ट पर उसके सुझावों का पालन नहीं किया गया।
     
  • आतंकवाद विरोध: कमिटी ने गौर किया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), खुफिया ब्यूरो (आईबी), बहु एजेंसी केंद्र (एमएसी) और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के कार्यों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए कोई एकीकृत प्राधिकरण नहीं है। कमिटी ने टिप्पणी की कि 2012 में राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र (एनसीटीसी) के गठन से संबंधित एक अधिसूचना जारी की गई थी। लेकिन राज्यों की संघवाद संबंधी चिंताओं के कारण इस पर निर्णय लंबित कर दिया गया। कमिटी ने सुझाव दिया कि एनसीटीसी को आतंकवाद निरोध के नोडल केंद्र के रूप में पुनर्जीवित करने के लिए अधिसूचना फिर से जारी की जानी चाहिए। कमिटी ने यह टिप्पणी भी कि पठानकोट आतंकी हमले को एक साल से अधिक समय हो गया है लेकिन एनआईए ने अब तक जांच पूरी नहीं की है। कमिटी ने सुझाव दिया कि जांच को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
     
  • खुफिया सूचनाएं: कमिटी ने गौर किया कि नवंबर 2013 में नैटग्रिड परियोजना के कार्यान्वयन को मंजूरी मिल गई थी लेकिन यह अब भी प्रारंभिक चरण में है। कमिटी ने टिप्पणी की कि हालांकि यह परियोजना सितंबर 2018 से चालू हो जाएगी लेकिन तब तक डेटा शेयरिंग और बेसिक एनालिटिक्स का बहुत सारा काम पूरा नहीं होगा। कमिटी ने यह टिप्पणी की कि इस परियोजना का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं था, फंड्स का पूरा इस्तेमाल नहीं किया गया था और तकनीकी सलाहकारों एवं सबजेक्ट मैटर एक्सपर्ट्स के पद भी खाली थे।
     
  • कमिटी ने बहु एजेंसी केंद्र से जुड़े कुछ मुद्दों पर प्रकाश डाला जोकि केंद्रीय एजेंसियों और राज्यों के बीच खुफिया सूचनाओं को साझा करने का काम करती है। कमिटी ने टिप्पणी की कि कुल प्राप्त इनपुट्स में राज्य स्तरीय एजेंसियों का योगदान कम है और सुझाव दिया कि इस दिशा में सभी बाधाओं का विश्लेषण किया जाना चाहिए।
     
  • नकली करंसी नोट: कमिटी ने सीमा क्षेत्रों से नकली करंसी नोट प्राप्त होने पर चिंता जताई। उसने गौर किया कि सीमा पर स्थित सुरक्षा बलों के पास उपलब्ध डिटेक्शन मशीनों को बदलने के लिए कोई उपाय नहीं किए गए हैं जोकि नए नोटों के अनुकूल हों। कमिटी ने सरकार से जमीनी और तटीय सीमाओं के जरिए नकली नोटों की तस्करी रोकने के लिए रणनीति बनाने की मांग की।

 

 

अस्वीकरणः प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) की स्वीकृति के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है