बाढ़ नियंत्रण और बाढ़ पूर्वानुमान के लिए योजनाएं

  • भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने 21 जुलाई, 2017 को ‘बाढ़ नियंत्रण और बाढ़ पूर्वानुमान के लिए योजनाएं’ पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। कैग द्वारा किए गए प्रदर्शन ऑडिट में निम्न की जांच की गई थी : (i) क्या बाढ़ नियंत्रण और बाढ़ पूर्वानुमान की योजनाएं प्रभावी हैं, और (ii) क्या समीक्षा और निगरानी तंत्र प्रभावी हैं। ऑडिट में 2007-08 से 2015-16 के दौरान 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बांधों सहित बाढ़ प्रबंधन की परियोजनाओं और नदी प्रबंधन की गतिविधियों को शामिल किया गया था। कैग के मुख्य निष्कर्षों और सुझावों में निम्नलिखित शामिल हैं:
     
  • बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रमों का वित्तीय प्रबंधन : 40 परियोजनाओं में केंद्र सरकार की तरफ से राज्यों को प्राप्त होने वाली सहायता की पहली किश्त जारी होने में विलंब पाया गया। केंद्र सरकार राज्य सरकारों से 600 करोड़ का ऋण और 18 करोड़ का ब्याज वसूल करने में असमर्थ रही। इसकी वजह यह रही कि राज्य सरकारों ने पहले 15 दिनों में कार्यक्रम कार्यान्वयन एजेंसियों को केंद्रीय सहायता की राशि जारी नहीं की। 171 करोड़ रुपए की राशि का उपयोग नहीं किया गया और 37 करोड़ रुपए कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा ऐसी परियोजनाओं के लिए डायवर्ट कर दिए गए थे जो मंजूर नहीं की गई थीं।
     
  • कैग ने सुझाव दिया कि कार्यक्रम के दिशानिर्देशों के अनुसार एक निश्चित समय सीमा में जल संसाधन मंत्रालय को फंड्स जारी करने चाहिए। मंत्रालय को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि राज्य सरकारें कार्यान्वयन एजेंसियों को निश्चित समय पर फंड्स जारी करें। कड़ी निगरानी के जरिए फंड्स का उचित उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त व्यय के ऑडिट किए हुए विवरणों, उपयोग के सर्टिफिकेट्स और दूसरे जरूरी दस्तावेजों की प्राप्ति के बाद ही मंत्रालय को फंड्स जारी करने चाहिए।
     
  • बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रमों का कार्यान्वयन : बाढ़ प्रबंधन का कार्य एकीकृत तरीके से नहीं किया गया, यानी उसमें पूरी नदी या उपनदी या एक बड़े हिस्से को शामिल नहीं किया गया और आठ राज्यों में विस्तृत परियोजना रिपोर्टें (डीपीआरज़) तैयार नहीं की गईं। इससे परियोजना की वास्तविक फंडिंग के वक्त तकनीकी डिजाइन प्रासंगिक नहीं रह जाते।
     
  • कैग ने सुझाव दिया कि जल संसाधन मंत्रालय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके द्वारा स्वीकृत सभी परियोजनाएं एकीकृत तरीके से तैयार की जाएं। ऐसी परियोजनाओं का लाभ-लागत अनुपात दिशानिर्देशों के अनुसार उचित तरीके से काम करे।
     
  • निरीक्षण और मूल्यांकन : कैग ने सुझाव दिया कि मंत्रालय को सभी बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रमों का प्रदर्शन मूल्यांकन करना चाहिए। इसके अतिरिक्त केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) को यह सुनिश्चित करने के लिए क्वालिटी टेस्ट करना चाहिए कि अच्छी निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया है।
     
  • बाढ़ पूर्वानुमान : 2012 से 2017 के दौरान 219 टेलीमेट्री स्टेशनों (बाढ़ पूर्वानुमान के इंस्ट्रूमेंटों की रीडिंग्स को रिकॉर्ड और ट्रांसमिट करने वाले स्टेशन) को इंस्टॉल करने का लक्ष्य था लेकिन अगस्त 2016 तक केवल 56 टेलीमेट्री स्टेशन इंस्टॉल किए जा सके। 59% मौजूदा टेलीमेट्री स्टेशन नॉन फंक्शनल थे, जिसके कारण उन अवधियों का रियल टाइम डेटा उपलब्ध नहीं हो सका।
     
  • कैग ने सुझाव दिया कि सीडब्ल्यूसी को बाढ़ पूर्वानुमान के लिए रियल टाइम डेटा के साथ समयबद्ध कार्रवाई योजना तैयार करनी चाहिए। इसके लिए आयोग को निम्नलिखित करना चाहिए : (i) सभी टेलीमेट्री स्टेशनों को चालू करना चाहिए, और (ii) लक्षित संख्या में टेलीमेट्री स्टेशनों को इंस्टॉल करना चाहिए। सीडब्ल्यूसी को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि चेतावनी और खतरे के निशान को उचित स्तर पर स्थिर किया जाए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि बाढ़ का पूर्वानुमान उचित और समयबद्ध तरीके से किया गया है।
     
  • बाढ़ नियंत्रण के लिए अन्य योजनाएं : असम, उत्तर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमांत क्षेत्रों की परियोजनाओं में कार्यान्वयन संबंधी विसंगतियां पाई गईं जैसे अनियमित तरीके से काम देना, टेंडरों को स्प्लिट करना और ऊंची दर पर भुगतान करना। 17 में से केवल दो राज्यों ने बांधों का मानसून से पहले और उसके बाद निरीक्षण किया था।
     
  • कैग ने सुझाव दिया कि असम, उत्तर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में हर वर्ष आने वाली बाढ़ की समस्या का हल निकालने के लिए दीर्घकालीन परियोजनाओं को त्वरित रूप से बढ़ाया जाना चाहिए। मंत्रालय को सभी बड़े बांधों के लिए आपदा प्रबंधन योजनाओं को तैयार करने और उनके कार्यान्वयन के लिए समयबद्ध कार्रवाई योजना तैयार करनी चाहिए।

 

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