पूर्व सैनिकों का पुनर्वास

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • रक्षा संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर : मेजर जनरल बी. सी. खंडूरी) ने 10 अगस्त, 2017 को ‘पूर्व सैनिकों का पुनर्वास’ पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। कमिटी ने पूर्व सैनिकों के पुनर्वास और कल्याण के मुद्दे की जांच की। प्रत्येक वर्ष सशस्त्र सेना के लगभग 60,000 सैन्यकर्मी या तो सेवानिवृत्त होते हैं अथवा सक्रिय सेवा से मुक्त कर दिए जाते हैं। इनमें से अधिकतर 35-45 वर्ष के आयु वर्ग में आते हैं। कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं:
     
  •  डीजीआर का पुनर्गठन : रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत पुनर्वास महानिदेशालय (डीजीआर) सेवानिवृत्ति पूर्व और पश्चात प्रशिक्षण, पुनर्रोजगार और स्वरोजगार के जरिए पूर्व सैनिकों के पुनर्वास का कार्य करता है। कमिटी ने टिप्पणी की कि वर्तमान में डीजीआर में प्रबंधन, वित्त, बीमा और मार्केटिंग कंसल्टेंसी के क्षेत्रों में कोई विशिष्ट विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। इसके अतिरिक्त डीजीआर के पास यह सुनिश्चित करने का कोई अधिकार नहीं है कि केंद्र सरकार के किन संगठनों में पूर्व सैनिकों के लिए एक निश्चित संख्या में रिक्तियां नहीं हैं। कमिटी ने यह भी गौर किया कि अनुसूचित जातियों (एससीज़), अनुसूचित जनजातियों (एसटीज़), अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसीज़) और विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) को वैधानिक रूप से आरक्षण दिया जाता है और परिणामस्वरूप केंद्र सरकार के सभी संगठनों द्वारा लागू किया जाता है। लेकिन पूर्व सैनिकों के मामले में ऐसा नहीं है, चूंकि डीजीआर के निर्देश वर्तमान में प्रकृति से केवल कार्यकारी हैं।
     
  • कमिटी ने सुझाव दिया कि डीजीआर का पुनर्गठन किया जाना चाहिए और उसे वैधानिक शक्तियां प्रदान की जानी चाहिए। कमिटी ने टिप्पणी की कि इससे महानिदेशालय पेशेवर तरीके से कार्य करने और बड़े पैमाने पर पूर्व सैनिकों के लिए स्वरोजगार के प्रॉजेक्ट तैयार करने में सक्षम होगा। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि एससीज़, एसटीज़, ओबीसीज़ और पीडब्ल्यूडी के समान पूर्व सैनिकों के लिए भी आरक्षण लागू किया जा रहा है।
     
  • आरक्षण के प्रतिशत में वृद्धि : छठे केंद्रीय वेतन आयोग के लागू होने के बाद केंद्र सरकार की सेवाओं में ग्रुप ‘डी’ के पदों का विलय ग्रुप ‘सी’ में कर दिया गया। इसके मद्देनजर कमिटी ने सुझाव दिया कि ग्रुप ‘डी’ में पूर्व सैनिकों को जो आरक्षण मिलता था, उसे ग्रुप ‘बी’ और ‘सी’ के पदों पर लागू किया जाना चाहिए। कमिटी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की नौकरियों में ग्रुप ‘सी’ में आरक्षण को 10% से बढ़ाकर 20% कर दिया जाना चाहिए। साथ ही ग्रुप ‘डी’ के पदों के अपग्रेडेशन के परिणामस्वरूप ग्रुप ‘बी’ के पदों पर भी 10% आरक्षण दिया जाना चाहिए। पूर्व सैनिकों को सबसे अधिक आरक्षण ग्रुप ‘डी’ के पदों पर ही मिलता था। इसके लिए कमिटी ने यह तर्क दिया कि ऐसे उपायों से सेवारत सैन्य कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा और प्रतिभाशाली युवा सैन्य सेवाओं के प्रति आकर्षित होंगे।
     
  • पूर्व सैनिकों का पुनर्रोजगार : सेवानिवृत्ति के बाद रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हों, इसके लिए डीजीआर सेवानिवृत्त होने वाले/सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों को प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के जरिए अतिरिक्त कौशल प्रदान करता है। कमिटी ने टिप्पणी की कि डीजीआर के पास ऐसे प्रशिक्षित सैन्यकर्मियों की संख्या पता लगाने का कोई मैकेनिज्म नहीं है जो रोजगार प्राप्त हैं। ऐसा मैकेनिज्म न होने के कारण प्रशिक्षण पर व्यय होने वाला धन प्रभावी तरीके से उपयोग नहीं किया जाता। इसके अतिरिक्त कॉरपोरेट क्षेत्र द्वारा अपने कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी कार्यक्रमों के अंतर्गत पूर्व सैनिकों को पुनर्रोजगार प्रदान करने का कोई नियम नहीं है।
     
  • कमिटी ने सुझाव दिया कि डीजीआर को निजी क्षेत्र से सहयोग प्राप्त करने के लिए मैकेनिज्म तैयार करना चाहिए और पूर्व सैनिकों के लिए रोजगार के व्यापक अवसरों की तलाश करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त सभी प्रशिक्षण संस्थानों के साथ अपने एग्रीमेंट में इस क्लॉज को शामिल करना चाहिए कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले पूर्व सैनिकों को जॉब प्लेसमेंट में मदद दी जाएगी। प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की अवधि छह महीने से अधिक होनी चाहिए ताकि भर्ती के नियमों के अनुसार सरकारी नौकरियों में प्रशिक्षण सर्टिफिकेट को मंजूर किया जा सके।
     
  • पूर्व सैनिकों के लिए कल्याणकारी उपाय : कमिटी ने जिन प्रमुख कल्याणकारी उपायों का सुझाव दिया है, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं : (i) मृतक सैनिक की विधवा को 100% पेंशन, (ii) युद्ध के समान/उग्रवाद को नियंत्रित करने की स्थितियों में या नियंत्रण रेखा पर मारे जाने वाले सैनिकों के परिजनों को मिलने वाली पेंशन में आयकर की छूट, और (iii) विश्वयुद्ध के सैनिकों को वित्तीय सहायता।

 

 

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