नॉन लैप्सेबल कैपिटल फंड अकाउंट का सृजन

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • रक्षा संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर : मेजर जनरल बी. सी. खंडूरी) ने 10 अगस्त, 2017 को ‘नॉन लैप्सेबल कैपिटल फंड अकाउंट का सृजन’ पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। वर्तमान में रक्षा बजट के दो घटक हैं, पूंजी और राजस्व। राजस्व को वेतन, परिवहन और दूसरे राजस्व कार्यों एवं रखरखाव के लिए इस्तेमाल किया जाता है। पूंजी का उपयोग भूमि अधिग्रहण, निर्माण कार्यों और पूंजी अधिग्रहण, जैसे हथियारों की खरीद के लिए किया जाता है।
     
  • इससे पूर्व कमिटी ने नॉन लैप्सेबल कैपिटल फंड अकाउंट का सृजन करने का सुझाव दिया था। ऐसे फंड के धन को रक्षा मंत्रालय द्वारा आने वाले वर्षों में और जब आवश्यकता हो, वित्त मंत्रालय की दोबारा मंजूरी लिए बिना उपयोग किया जा सकता है। कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं :
     
  • नॉन लैप्सेबल कैपिटल फंड अकाउंट के सृजन का समर्थन न करने के कारण : कमिटी ने टिप्पणी की कि इससे पूर्व रक्षा और वित्त मंत्रालयों ने इस फंड के सृजन का समर्थन नहीं किया था। इसके निम्नलिखित कारण हैं : (i) ऐसे किसी प्रस्ताव की उपयोगिता की सीमा, चूंकि फंड से किसी राशि के उपयोग के लिए संसदीय अनुमति की अपेक्षा होगी(ii) अपनी पूंजी आधुनिकीकरण और अधिग्रहण योजनाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए सुरक्षा बल मौजूदा बजट के आबंटन में बढ़ोतरी कर सकते हैं; और (iii) पिछले कुछ वर्षों में ऐसा कोई मौका नहीं आया, जब आगामी वर्षों में कैरी फॉरवर्ड करने के लिए कोई पर्याप्त धन राशि सरप्लस में उपलब्ध थी।
     
  • नॉन लैप्सेबल कैपिटल फंड अकाउंट के सृजन के कारण : कमिटी ने गौर किया कि पिछले कुछ वर्षों में रक्षा मंत्रालय के पूंजीगत व्यय के लिए किया गया आबंटन अनुमान से कम था। जबकि रक्षा मंत्रालय ने 2017-18 में 1,46,155 करोड़ रुपए के पूंजीगत व्यय का अनुमान लगाया था, बजट अनुमान के चरण पर केवल 86,528 करोड़ रुपए (59%) का आबंटन किया गया था। कमिटी ने कहा कि पूंजी अधिग्रहण के लिए आबंटन बनाम अनुमान में इतना अंतर होने से रक्षा मंत्रालय के खरीद प्रस्तावों और अनुबंधों पर असर होता है।
     
  • कमिटी ने टिप्पणी की कि रक्षा खरीद और अधिग्रहण एक जटिल प्रक्रिया है और इसे अमल में आने में पांच से दस वर्ष लगते हैं। मंत्रालय इसके लिए वेंडरों की तरफ से होने वाली चूक को भी जिम्मेदार ठहराता है।
     
  • परिणाम के तौर पर, संभव है कि इसके लिए किसी एक वित्तीय वर्ष में आबंटित किए गए फंड्स का उसी वर्ष में पूरी तरह उपयोग न हो पाए। कमिटी ने सुझाव दिया कि नॉन लैप्सेबल कैपिटल फंड अकाउंट बनाने से यह सुनिश्चित होगा कि किसी विशेष वस्तु के लिए आबंटित धन को केवल उसी विशिष्ट वस्तु पर पूरी तरह खर्च किया जाएगा। अगर किसी एक वर्ष में ऐसा नहीं होता, तो अगले वर्ष में यह व्यय किया जा सकता है। यह भी कहा गया कि वित्त की कमी के कारण उपकरणों, हथियारों और गोला-बारूद की खरीद में विलंब होता है और हमारे सुरक्षा बलों की परिचालनगत तैयारी पर असर होता है।
     
  • कमिटी ने कहा कि ऐसा फंड बनाने से यह सुनिश्चित होगा कि नियमों और शर्तों के कारण जो वित्तीय कमी होती है, उसके चलते चालू खरीद प्रॉजेक्ट्स में देरी नहीं होगी।

 

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