ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में बेहतर परिणामों के लिए प्रदर्शन आधारित भुगतान

एक्सपर्ट कमिटी की रिपोर्ट का सारांश 

  • एक्सपर्ट कमिटी (चेयर: सुमित बोस) ने जनवरी 2017 में ‘ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में बेहतर परिणामों के लिए प्रदर्शन आधारित भुगतान’ पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। कमिटी का गठन दिसंबर 2016 में किया गया था ताकि पंचायतों में उपलब्ध मानव संसाधनों पर नजर रखी जा सके और यह सुझाव दिया जा सके कि इन संसाधनों को किस प्रकार आगे बढ़ाया जा सकता है और कार्यक्रमों को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए इन्हें सुनियोजित किया जा सकता है। कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं :
     
  • पंचायतों में मानव संसाधन: ग्राम पंचायत स्तर पर कमिटी ने अनेक कमियों का उल्लेख किया, जैसे (i) कर्मचारियों का अभाव, (ii) क्वालिफिकेशंस में कमी, (iii) भर्ती में कड़ाई न होना, (iv) सेवा के नियम और शर्तों का खराब होना, (v) प्रदर्शन के लिए निम्न स्तर का इन्सेंटिव, और (vi) पर्याप्त प्रशिक्षण का न होना। पंचायतों में अधिकतर श्रमशक्ति योजनाओं के संबंध में अलग-थलग होकर काम करती है और अधिकतर कार्यक्रमों के सुपरवाइजर के प्रति जवाबदेह होते हैं, पंचायतों के प्रति नहीं।
     
  • कमिटी ने सुझाव दिया कि प्रत्येक पंचायत के पास फुलटाइम सेक्रेटरी होना चाहिए जोकि सामान्य प्रशासनिक और विकास संबंधी कार्य करें। पंचायत में एक तकनीकी सहायक भी होना चाहिए जो इंजीनियरिंग से संबंधित कार्य करेगा। मौजूदा ग्राम रोजगार सेवकों को इंजीनियरिंग का जरूरी काम करने के लिए औपचारिक रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए जैसे जल आपूर्ति और सैनिटेशन से संबंधित काम।
     
  • सामाजिक जिम्मेदारी : ग्राम पंचायतों की सामाजिक जिम्मेदारी बढ़ाने के लिए कमिटी ने राज्य पंचायत राज एक्ट के प्रावधानों के अनुसार (जैसे एक वर्ष में कम से कम चार बैठकें) और विशेष परिस्थितियों में वोटरों के अनुरोध करने पर ग्राम सभा की नियमित बैठक करने का सुझाव दिया है। बैठक को गंभीर, प्रभावशाली और समावेशी बनाने के लिए लोगों को इसका नोटिस कम से कम सात दिन पहले दिया जाना चाहिए।
     
  • कमिटी ने कार्यान्वयन संबंधी कुछ उपाय भी सुझाए जिनमें निम्नलिखित शामिल है : (i) भागीदारीपूर्ण प्लानिंग और बजटिंग, (ii) निश्चित बजट के प्रभावपूर्ण उपयोग के लिए स्टेटस स्टडीज की तैयारी, (iii) व्यय की भागीदारीपूर्ण ट्रैकिंग, और (iv) पंचायतों का सामाजिक ऑडिट, इत्यादि।
     
  • इनफॉरमेशन एंड कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी (आईसीटी) : कमिटी ने टिप्पणी की कि अनेक राज्यों ने ऐसे कानून बनाए हैं जो नागरिकों को सार्वजनिक सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता की गारंटी देते हैं। इसमें पंचायतों द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाएं भी शामिल हैं। सेवाओं को समय पर उपलब्ध कराने और अगर इनमें सफलता नहीं मिलती, तो उसके कारणों का पता लगाने के लिए यह जरूरी है कि पंचायतों के कामकाज में आईसीटी को लागू किया जाए।
     
  • आईसीटी का अधिक से अधिक उपयोग करने के लिए कमिटी ने सुझाव दिया कि पंचायतों को निम्नलिखित कार्यों के लिए केवल ट्रांजैक्शन बेस्ड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए : (i) स्थानीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अपने कार्य करने के लिए, (ii) स्थानीय योजना और निरीक्षण प्रक्रिया से संबंधित डेटाबेस को मेनटेन करने के लिए, (iii) ई-खरीद सहित वित्तीय प्रबंधन के लिए, और (iv) अपने कार्यों के प्राक्कलन (एस्टिमेशन) और संचालन के लिए। कमिटी ने एकाउंटिंग के डबल इंट्री सिस्टम को अपनाने और कैशबुक के इलेक्ट्रॉनिक मेनटेनेंस के लिए नियमों में संशोधन के सुझाव भी दिए।
     
  • प्रदर्शन और काम की क्वालिटी का निरीक्षण : कमिटी ने टिप्पणी की कि पंचायतों, इंटरमीडिएट्स और उनके अधिकारियों के प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग में सुधार की पूरी गुंजाइश है। कमिटी ने यह भी कहा कि पंचायतों, पंचायतों के कर्मचारियों और इंफ्रास्ट्रक्टर के राजस्व और व्यय का डेटा उपलब्ध नहीं है।
     
  • कमिटी ने सुझाव दिया कि पंचायतों द्वारा जिन सभी कार्यक्रमों का निरीक्षण किया जाता है, उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाली प्रणाली भी मौजूद होनी चाहिए। ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के जरिए बनाए जाने वाले सभी एसेट्स के लिए स्टैंडर्ड्स विकसित किए जाने चाहिए। इसके अतिरिक्त पंचायती राज मंत्रालय को जरूरी डेटा संकलित करने चाहिए जैसे क्षेत्रफल, जनसंख्या, कर्मचारी और पंचायत कार्यालय के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता, इत्यादि।
     
  • कमिटी ने कहा कि उसके सुझावों को लागू करने में अगर फंड्स की कमी होती है तो राज्यों को पांच वर्षों तक सहायता देने के प्रावधान को संशोधित राष्ट्रीय ग्राम पंचायत अभियान में शामिल किया जा सकता है। इससे राज्यों को प्रोत्साहन मिलेगा। इस अभियान का उद्देश्य पंचायतों की क्षमताओं और प्रभाव को बढ़ाना है।

 

 

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