इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन और वैल्यू एडिशन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए योजना का कार्यान्वयन

स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट का सारांश

  • कृषि संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (चेयर : हुकुम देव नारायण यादव) ने 28 अगस्त, 2017 को ‘इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन और वैल्यू एडिशन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए योजना का कार्यान्वयन’ पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस योजना को 2008 में खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) उद्योग मंत्रालय ने प्रारंभ किया था। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादों के संरक्षण (प्रिज़रवेशन) के लिए कोल्ड चेन्स, वैल्यू एडिशन और इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधाएं उपलब्ध कराना है ताकि फसल बाद के नुकसान को कम किया जा सके। कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर में प्रोसेसिंग यूनिट्स, कोल्ड स्टोरेज और रेफ़्रिजरेटेड वैन्स शामिल हैं। योजना के संबंध में कमिटी के मुख्य निष्कर्ष और सुझाव निम्नलिखित हैं :
     
  • योजना की प्रगति : 2008 से योजना के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष कोल्ड चेन प्रॉजेक्ट्स का आबंटन फेज़ वाइस किया जाता है। 2008-09 और 2016-17 के बीच 102 प्रॉजेक्ट पूरे किए गए। वर्तमान में, 134 प्रॉजेक्ट्स चालू हैं जिनमें 31 प्रॉजेक्ट पिछले कई वर्षों से चल रहे हैं। कमिटी ने टिप्पणी की कि कार्यान्वयन की इस धीमी गति से योजना का उद्देश्य निष्फल हो जाता है। इसके अतिरिक्त यह टिप्पणी भी की गई कि 2016-17 में 103 प्रॉजेक्ट्स के लिए 180 करोड़ रुपए का आबंटन किया गया, जोकि पिछले वर्ष 30 प्रॉजेक्ट्स के लिए आबंटित की गई राशि के ही बराबर है। कमिटी ने सुझाव दिया कि इन अतिरिक्त प्रॉजेक्ट्स के अनुरूप उपयुक्त वित्तीय आबंटन किया जाना चाहिए।
     
  • वैल्यू एडिशन की सुविधाएं : वैल्यू एडिशन में कृषि उत्पाद की सॉर्टिंग, ग्रेडिंग और प्री-कूलिंग शामिल होती है जोकि उत्पाद का मूल्य संवर्धन करती है। इसके लिए फ्रीजर और राइपिंग चैंबर (उत्पाद को पकाने वाले चैंबर) जैसी सुविधाओं का उपयोग किया जाता है। कमिटी ने गौर किया कि किसानों को वैल्यू एडिशन के लिए जरूरी प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत है। वर्तमान में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय इस योजना के अंतर्गत ऐसा प्रशिक्षण प्रदान नहीं करता। कमिटी ने सुझाव दिया कि वैल्यू एडिशन के संबंध में किसानों में जागरूकता पैदा करने और उन्हें प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए योजना के अंतर्गत ऐसा प्रावधान किया जाना चाहिए।
     
  • कोल्ड चेन नेटवर्क : स्टोरेज की सुविधा न होने के कारण फल और सब्जियों जैसे नष्ट होने वाले उत्पाद कटाई के बाद बर्बाद हो जाते हैं। कमिटी ने गौर किया कि नष्ट होने वाले मुख्य कृषि उत्पादों से हर साल 92,651 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है। यह सुझाव दिया गया कि इस नुकसान को कम करने के लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर देश व्यापी इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क बनाया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त यह सुझाव दिया गया कि जिला स्तर पर कोल्ड चेन समन्वय और निरीक्षण कमिटी गठित की जानी चाहिए। योजना के कार्यान्वयन को सहज बनाने के लिए किसी सांसद या विधायक को इस निरीक्षण कमिटी का सदस्य बनाया जा सकता है।
     
  • कोल्ड चेन प्रॉजेक्ट्स का वितरण : कमिटी ने गौर किया कि उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में कोल्ड चेन प्रॉजेक्ट्स की संख्या, कृषि में उन राज्यों के योगदान से मेल नहीं खाती। यह सुझाव दिया गया कि इन राज्यों को कोल्ड चेन प्रॉजेक्ट्स के वितरण पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।
     
  • उत्तर पूर्वी क्षेत्रों में योजना का कार्यान्वयन : कमिटी ने टिप्पणी की कि उत्तर पूर्वी और हिमालयी राज्यों में 43 कोल्ड चेन प्रॉजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इनमें से नौ प्रॉजेक्ट उत्तर पूर्वी क्षेत्र के लिए आबंटित किए गए हैं। अब तक नौ में से चार प्रॉजेक्ट ही पूरे हो पाए हैं। कमिटी ने टिप्पणी की कि इनमें से अधिकतर प्रॉजेक्ट 2011-12 में आबंटित किए गए थे। यह देखते हुए इस योजना के कार्यान्वयन की गति बहुत धीमी है। यह टिप्पणी करते हुए कि खाद्य प्रसंस्करण के लिए उत्तर पूर्वी क्षेत्र में सनराइज जोन होने की क्षमता है, कमिटी ने सुझाव दिया कि इन प्रॉजेक्ट्स के कार्यान्वयन में तेजी लाई जानी चाहिए।

 

 

अस्वीकरणः प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) की स्वीकृति के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है