मंत्रालय: 
आवास और शहरी मामलों
  • आवासन और शहरी कार्य मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 31 जुलाई, 2017 को लोकसभा में सार्वजनिक परिसर (अनाधिकृत कब्जा करने वालों की बेदखली) संशोधन बिल, 2017 पेश किया। बिल सार्वजनिक परिसर (अनाधिकृत कब्जा करने वालों की बेदखली) एक्ट, 1971 में संशोधन करता है। इस एक्ट में कुछ मामलों में सार्वजनिक परिसरों से अनाधिकृत कब्जा करने वालों की बेदखली का प्रावधान है।
     
  • निवास स्थान : बिल ‘निवास स्थान पर कब्जा’ को इस प्रकार पारिभाषित करता है कि इसका अर्थ किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक स्थान पर कब्जा किया जाना है जिसे उस कब्जे के लिए अधिकृत किया गया (लाइसेंस दिया गया) हो। यह लाइसेंस किसी निश्चित अवधि के लिए होना चाहिए या उस अवधि के लिए जब तक कि वह व्यक्ति पद पर बना हुआ है। इसके अतिरिक्त केंद्र, राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकार या किसी संवैधानिक अथॉरिटी (जैसे संसदीय सचिवालय, या केंद्र सरकार की कोई संस्था या राज्य सरकार) द्वारा बनाए गए नियम के तहत इस कब्जे की अनुमति होनी चाहिए।
     
  • बेदखली का नोटिस : बिल निवास स्थान से बेदखली के लिए एक प्रक्रिया बनाने की बात कहता है। बिल में यह अपेक्षा की गई है कि अगर किसी व्यक्ति ने किसी निवास स्थान पर अनाधिकृत कब्जा किया है तो एस्टेट ऑफिसर (केंद्र सरकार का एक अधिकारी) उसे लिखित नोटिस जारी करेगा। नोटिस में उस व्यक्ति से तीन कार्य दिनों के भीतर कारण बताने की अपेक्षा की जाएगी कि उसे बेदखली का आदेश क्यों न दिया जाए। इस लिखित नोटिस को निवास स्थान के विशिष्ट हिस्से पर लगाया जाना चाहिए।
     
  • बेदखली का आदेश : कारण बताओ पर विचार करने और दूसरी जांच के बाद एस्टेट ऑफिसर बेदखली का आदेश देगा। अगर कोई व्यक्ति आदेश नहीं मानता तो एस्टेट ऑफिसर उसे निवास स्थान से बेदखल कर सकता है और उस स्थान को अपने कब्जे में ले सकता है। इसके लिए एस्टेट ऑफिसर उतनी ताकत का प्रयोग कर सकता है, जितनी जरूरी हो।
     
  • नुकसान की भरपाई : अगर निवास स्थान में अनाधिकृत कब्जा करने वाला व्यक्ति अदालत के बेदखली के आदेश को चुनौती देता है, तो उसे कब्जे की वजह से हर महीने होने वाले नुकसान की भरपाई करनी होगी

  

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