मंत्रालय: 
गृह मामले
  • प्रस्तावित
    राज्यसभा
    फ़रवरी 06, 2019
    Gray
  • रेफर
    स्टैंडिंग कमिटी
    फ़रवरी 18, 2019
    Gray
  • गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 फरवरी, 2019 को राज्यसभा में संविधान (एक सौ पच्चीसवां संशोधन) बिल, 2019 पेश किया। बिल वित्त आयोग और संविधान की छठी अनुसूची से संबंधित प्रावधानों में संशोधन करता है। छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के आदिवासी क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है।
     
  • ग्राम और नगर परिषद: छठी अनुसूची कहती है कि इन चार राज्यों में कुछ क्षेत्रों के आदिवासी इलाके स्वायत्त जिले होंगे। प्रत्येक में एक जिला परिषद होगी। इसके अतिरिक्त गवर्नर स्वायत्त जिले को स्वायत्त क्षेत्रों में विभाजित कर सकता है जिसमें से प्रत्येक में एक क्षेत्रीय परिषद होगी। जिला एवं क्षेत्रीय परिषद क्रमशः स्वायत्त जिलों और क्षेत्रों का प्रशासन चलाएंगी।
     
  • बिल जिला और क्षेत्रीय परिषदों के अतिरिक्त ग्राम और नगर परिषदों के गठन के लिए छठी अनुसूची में संशोधन करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में गांवों या गांवों के समूहों के लिए ग्राम परिषदों का गठन किया जाएगा और प्रत्येक जिले के शहरी क्षेत्रों में नगर परिषद बनाई जाएगी। इसके अतिरिक्त जिला परिषदें विभिन्न विषयों पर कानून बना सकती हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) ग्राम और नगर परिषदों की संख्या और उनका संयोजन, (ii) ग्राम और नगर परिषदों में चुनावों के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन, और (iii) ग्राम और नगर परिषदों की शक्तियां और कार्य।
       
     
  • इसके अतिरिक्त बिल कहता है कि गवर्नर ग्राम और नगर परिषदों के बीच शक्तियों और जिम्मेदारियों को बांटने के लिए नियम बना सकता है। ये नियम निम्नलिखित से संबंधित हो सकते हैं: (i) आर्थिक विकास के लिए योजना बनाना, (ii) भूमि सुधारों को लागू करना, (iii) शहरों और नगरों की योजना बनाना, और (iv) भूमि उपयोग का रेगुलेशन, इत्यादि।
     
  • राज्य वित्त आयोग: बिल इन राज्यों में वित्त आयोग बनाने का प्रावधान करता है, जिससे जिला, ग्राम और नगर परिषदों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा की जा सके। यह आयोग निम्नलिखित के संबंध में सुझाव देगा: (i) राज्यों और जिला परिषदों के बीच करों का वितरण, (ii) राज्य के कन्सॉलिडेटेड फंड से जिला, ग्राम और नगर परिषदों को सहायतानुदान, और (iii) जिला, ग्राम और नगर परिषदों की वित्तीय स्थिति में सुधार के उपाय।
     
  • वित्त आयोग: संविधान के अंतर्गत वित्त आयोग के कार्यों में राष्ट्रपति को निम्नलिखित के संबंध सुझाव देना शामिल है: (i) संघ और राज्यों के बीच करों का वितरण, और (ii) राज्यों को सहायतानुदान का प्रावधान। बिल के अनुसार, इन कार्यों के अतिरिक्त वित्त आयोग सुझाव देगा कि किसी राज्य को कन्सॉलिटेडेट फंड देने के लिए क्या उपाय किए जाएं जिससे छठी अनुसूची के चार राज्यों के आदिवासी क्षेत्रों की जिला, ग्राम और नगर परिषदों को वित्तीय संसाधन मुहैय्या कराए जा सकें।
     
  • परिषदों के चुनाव: बिल के अनुसार इन चार राज्यों में राज्य चुनाव आयोग द्वारा जिला, क्षेत्रीय, ग्राम और नगर परिषदों के चुनाव कराए जाएंगे। राज्य चुनाव आयोग की नियुक्ति गवर्नर द्वारा की जाती है।
     
  • परिषद के सदस्यों की सदस्यता भंग: छठी अनुसूची में कहा गया है कि गवर्नर जिला और क्षेत्रीय परिषदों के गठन के नियम बना सकता है जिसमें यह भी शामिल है कि इन परिषदों में निर्वाचन के लिए सदस्यों की क्या योग्यता होगी। बिल इस प्रावधान को भी शामिल करता है कि गवर्नर दल बदल के आधार पर इन सदस्यों की सदस्यता भंग करने के नियम बना सकता है।                 

 

अस्वीकरणः प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।