मंत्रालय: 
श्रम एवं रोजगार
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    जुलाई 23, 2019
    Gray
  • श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने 23 जुलाई, 2019 को लोकसभा में व्यवसागत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता, 2019 को पेश किया। संहिता न्यूनतम 10 श्रमिकों वाले इस्टैबलिशमेंट्स, और सभी खानों एवं डॉक्स पर लागू होती है। यह अप्रेंटिसों पर लागू नहीं होती। इसके अतिरिक्त यह कुछ किस्म के इस्टैबलिशमेंट्स और कर्मचारियों के वर्गों के लिए विशेष प्रावधान करती है, जैसे कारखाने, खानें और भवन एवं निर्माण श्रमिक।
     
  • संहिता सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों से संबंधित 13 श्रम कानूनों को रद्द करती है और उनका स्थान लेती है। इनमें कारखाना एक्ट, 1948, खान एक्ट, 1952 और अनुबंध श्रमिक (रेगुलेशन और उन्मूलन) एक्ट, 1970 शामिल हैं।
     
  • संबंधित अथॉरिटीज़: संहिता के अंतर्गत आने वाले सभी इस्टैबलिशमेंट्स पंजीकरण अधिकारियों से पंजीकृत होने चाहिए। इसके अतिरिक्त इंस्पेक्टर-कम फेसिलिटेटर दुर्घटनाओं की जांच कर सकता है और इस्टैबलिशमेंटस का निरीक्षण कर सकता है। इन अधिकारियों को केंद्र या राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है। इसके अतिरिक्त सरकार कुछ इस्टैबलिशमेंट्स से कह सकती है कि वे सुरक्षा समितियों का गठन करें जिनमें नियोक्ता तथा श्रमिकों के प्रतिनिधि शामिल हों।
     
  • सलाहकार संस्थाएं: केंद्र और राज्य सरकारें राष्ट्रीय और राज्य स्तरों पर व्यवसायगत सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सलाहकार बोर्ड्स बनाएंगी। संहिता के अंतर्गत मानदंड, नियम और रेगुलेशन बनाने के लिए ये बोर्ड्स केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह देंगे।
     
  • नियोक्ताओं के कर्तव्य: संहिता नियोक्ताओं के कर्तव्यों को विनिर्दिष्ट करती है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) ऐसे कार्यस्थल प्रदान करना, जो चोट या बीमारी की आशंका वाले जोखिमों से मुक्त हों, और (ii) कर्मचारियों को निशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच प्रदान करना, जैसा विनिर्दिष्ट किया जाए। अगर कार्यस्थल पर किसी दुर्घटना में कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है या उसे गंभीर शारीरिक चोट लगती है तो नियोक्ता को संबंधित अथॉरिटीज़ को इसकी सूचना देनी चाहिए।
     
  • कर्मचारियों के अधिकार और कर्तव्य: संहिता के अंतर्गत कर्मचारियों के कर्तव्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा का स्वयं ध्यान रखना, (ii) सुरक्षा और स्वास्थ्य के विनिर्दिष्ट मानदंडों का पालन करना, और (iii) इंस्पेक्टर को असुरक्षित स्थितियों की सूचना देना। प्रत्येक कर्मचारी को नियोक्ता से सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी मानदंडों की जानकारी हासिल करने का अधिकार है।
     
  • काम के घंटे: इस्टैबलिशमेंट्स और कर्मचारियों के विभिन्न वर्गों के लिए काम के घंटे केंद्र या राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट नियमों के अनुसार प्रदान किए जाएंगे। ओवरटाइम के लिए श्रमिक को दैनिक मजदूरी की दर से दोगुनी रकम चुकाई जाएगी। महिला श्रमिक अपनी मर्जी से शाम सात बजे के बाद और सुबह छह बजे से पहले काम कर सकती हैं, अगर केंद्र या राज्य सरकार द्वारा इसकी मंजूरी हो।
     
  • अवकाश: कोई कर्मचारी हफ्ते में छह दिन से ज्यादा काम नहीं करेगा। हालांकि मोटर परिवहन श्रमिकों के लिए अपवाद प्रदान किया गया है। श्रमिकों की वैतनिक वार्षिक छुट्टी का कैलकुलेशन कम से कम हर 20 दिन के काम पर एक छुट्टी का होगा। सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों के लिए मेडिकल अवकाश सेवा की अवधि का एक बटा अठारहवें से कम नहीं होना चाहिए। मेडिकल अवकाश के दौरान श्रमिकों को उनकी आधी दैनिक मजदूरी चुकाई जानी चाहिए।
     
  • कार्य स्थितियां और सुविधाएं: नियोक्ता से यह अपेक्षा की जाती है कि वह स्वच्छ कार्य परिवेश प्रदान करेगा जो हवादार, आरामदेह तापमान और आर्द्रता वाला, खुला हुआ हो, वहां पीने के लिए साफ पानी मिले, शौचालय-यूरिनल हो। अन्य सुविधाएं केंद्र सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट मानदंडों के अनुरूप हों। इन सुविधाओं में पुरुष, महिलाओं और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के लिए अलग-अलग स्नानगार और लॉकर रूम, कैंटीन, प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा और क्रेश शामिल हैं।
     
  • अपराध और दंड: संहिता के अंतर्गत ऐसे अपराध, जिसमें किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाए, करने पर दो वर्ष तक के कारावास की सजा भुगतनी पड़ सकती है या पांच लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है, अथवा दोनों सजा भुगतनी पड़ सकती है। इसके अतिरिक्त अदालत यह निर्देश भी दे सकती है कि पीड़ित के उत्तराधिकारियों को जुर्माने की कम से कम आधी राशि मुआवजे के तौर पर दी जाए। जिन उल्लंघनों में सजा विनिर्दिष्ट नहीं की गई है, उनमें नियोक्ता को दो से तीन लाख रुपए के बीच का जुर्माना भरना पड़ेगा। अगर कर्मचारी संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो उसे 10,000 रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ेगा।

 

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