मंत्रालय: 
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    दिसंबर 18, 2017
    Gray
  • पारित
    लोकसभा
    जुलाई 23, 2018
    Gray
  • पारित
    राज्यसभा
    जनवरी 03, 2019
    Gray
  • मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 18 दिसंबर, 2017 को लोकसभा में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (संशोधन) बिल, 2017 को पेश किया।
     
  • बिल राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद एक्ट, 1993 में संशोधन करता है। यह एक्ट राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की स्थापना करता है। एनसीटीई देश भर में शिक्षकों की शिक्षण व्यवस्था को विकसित करने की योजना बनाती है और उसमें समन्वय स्थापित करती है। परिषद शिक्षकों की शिक्षण व्यवस्था के नियमों और मानकों के पालन को भी सुनिश्चित करती है। 2017 के इस बिल की मुख्य विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं :
     
  • शिक्षकों के कुछ शिक्षण संस्थानों को पूर्वव्यापी (रेट्रोस्पेक्टिव) मान्यता: बिल निम्नलिखित संस्थानों को पूर्वव्यापी मान्यता प्रदान करने का प्रयास करता है: (i) केंद्र सरकार द्वारा नामित, (ii) केंद्र सरकार या राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार द्वारा वित्त पोषित, (iii) जिन संस्थानों को एक्ट के अंतर्गत मान्यता प्राप्त नहीं है, और (iv) जिन संस्थानों ने एनसीटीई की स्थापना की तिथि और उसके बाद से शैक्षणिक वर्ष 2017-2018 तक शिक्षकों को शिक्षा पाठ्यक्रम प्रस्तावित किया हो।
     
  • नए पाठ्यक्रम शुरू करने की पूर्वव्यापी अनुमति: इसके अतिरिक्त बिल निम्नलिखित संस्थानों को शिक्षक शिक्षा के नए पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की पूर्वव्यापी अनुमति देने का प्रयास करता है: (i) केंद्र सरकार द्वारा नामित, (ii) केंद्र सरकार या राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार द्वारा वित्त पोषित, (iii) जिन संस्थानों ने शिक्षक शिक्षा के नए पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने के लिए आवश्यक कुछ शर्तों को पूरा किया हो, और (iv) जिन संस्थानों ने एनसीटीई की स्थापना की तिथि और उसके बाद से शैक्षणिक वर्ष 2017-2018 तक शिक्षकों को शिक्षा पाठ्यक्रम प्रस्तावित किया हो।

 

 

अस्वीकरणः प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) की स्वीकृति के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।