मंत्रालय: 
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    मार्च 15, 2021
    Gray
  • रेफर
    स्टैंडिंग कमिटी
    अप्रैल 16, 2021
    Gray
  • राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (संशोधन) बिल, 2021 को लोकसभा में 15 मार्च, 2021 को पेश किया गया। बिल राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा और अनुसंधान एक्ट, 1998 में संशोधन का प्रयास करता है। 1998 के एक्ट के अंतर्गत पंजाब में राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थान की स्थापना की गई थी और उसे राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया था। राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का अर्थ है, किसी एक्ट के अंतर्गत स्थापित एक स्वायत्त संस्थान जिसके पास परीक्षाएं संचालित करने, डिग्रियां, डिप्लोमा और दूसरी शैक्षणिक पदवियां या टाइटिल्स देने की शक्ति हो। राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को केंद्र सरकार से वित्त पोषण प्राप्त होता है। बिल के मुख्य संशोधनों में निम्नलिखित शामिल हैं:
     
  • राष्ट्रीय महत्व के नए संस्थान: बिल छह अन्य राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित करता है। ये संस्थान: (i) अहमदाबाद, (ii) हाजीपुर, (iii) हैदराबाद, (iv) कोलकाता, (v) गुवाहाटी, और (vi) रायबरेली में स्थित हैं।
     
  • काउंसिल की स्थापना: बिल एक काउंसिल का प्रावधान करता है जोकि बिल के अंतर्गत आने वाले संस्थानों की गतिविधियों के बीच समन्वय स्थापित करेगी ताकि फार्मास्यूटिकल शिक्षा और अनुसंधान का विकास हो और मानदंड बरकरार रहें। काउंसिल के कामकाज में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) पाठ्यक्रम की अवधि और संस्थानों में दाखिले के मानदंडों से संबंधित मामलों पर सलाह देना, (ii) भर्ती, सेवा शर्तों और फीस के लिए नीतियां बनाना, (iii) संस्थानों की विकास योजनाओं की समीक्षा करना और उन्हें मंजूरी देना, और (iv) केंद्र सरकार से धनराशि आबंटन के संबंध में सिफारिश करने के लिए संस्थानों के बजट अनुमानों की समीक्षा करना।
     
  • काउंसिल का संयोजन: काउंसिल में निम्नलिखित सदस्य होंगे: (i) चेयरपर्सन के रूप में फार्मास्यूटिकल्स पर प्रशासनिक नियंत्रण रखने वाले केंद्र सरकार के मंत्रालय या विभाग का प्रभारी मंत्री (पदेन), (ii) वाइस चेयरपर्सन के रूप में फार्मास्यूटिकल्स पर प्रशासनिक नियंत्रण रखने वाले केंद्र सरकार के मंत्रालय या विभाग का राज्य मंत्री (पदेन), (iii) हर गवर्नर बोर्ड के चेयरपर्सन (पदेन), (iv) हर संस्थान के डायरेक्टर (पदेन), (v) अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के चेयरपर्सन (पदेन), (vi) वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के डायरेक्टर जनरल (पदेन), और (vii) संसद (लोकसभा और राज्यसभा) के तीन सदस्य। किसी पदेन सदस्य का कार्यकाल तब तक बना रहेगा, जब तक वह उस पद पर है जिसके आधार पर वह काउंसिल का सदस्य बना है। काउंसिल के अन्य सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष होगा।
     
  • बोर्ड ऑफ गवर्नर्स: एक्ट ने संस्थान के मामलों के नियंत्रण और प्रबंधन के लिए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की स्थापना की है। बोर्ड में 23 सदस्य होंगे जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) चेयरपर्सन के रूप में प्रतिष्ठित शिक्षाविद या प्रोफेशनल, (ii) संस्थान का डायरेक्टर (पदेन), (iii) फार्मास्यूटिकल क्षेत्र के दो उद्योगपति, और (iv) तीन संसद सदस्य।
     
  • बोर्ड गवर्नर बोर्ड के सदस्यों की संख्या प्रत्येक संस्थान में 12 करता है। बोर्ड की अध्यक्षता प्रतिष्ठित शिक्षाविद या प्रोफेशनल करेगा। बोर्ड के पदेन सदस्यों में निम्नलिखित शामिल होंगे: (i) संस्थान के डायरेक्टर, (ii) राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों से संबद्ध केंद्र सरकार के फार्मास्यूटिकल विभाग का ज्वाइंट सेक्रेटरी, (iii) संबंधित राज्य सरकार में मेडिकल या तकनीकी शिक्षा से संबंधित सेक्रेटरी, और (iv) भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल का एक प्रतिनिधि। अन्य सदस्यों में शामिल हैं: (i) विशेष ज्ञान वाले तीन फार्मास्यूटिकल एक्सपर्ट (इनमें से कम से कम एक महिला हो), (ii) फार्मास्यूटिकल क्षेत्र के दो उद्योगपति, और (iii) संस्थान के दो प्रोफेसर।

 

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