मंत्रालय: 
सामाजिक न्याय एवं कल्याण
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    अप्रैल 05, 2017
    Gray
  • पारित
    लोकसभा
    अप्रैल 10, 2017
    Gray
  • पारित
    राज्यसभा
    अगस्त 06, 2018
    Gray
  • पारित
    लोकसभा
    अगस्त 09, 2018
    Gray
  • सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण मंत्री थावरचंद गहलौत ने 5 अप्रैल, 2017 को लोकसभा में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (रिपील) बिल, 2017 को पेश किया।
     
  • रिपील : यह बिल राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग एक्ट, 1993 को निरस्त (रिपील) करने का प्रयास करता है। यह एक्ट राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की स्थापना करता है। आयोग के पास पिछड़े वर्गों को संविधान की अनुसूची में शामिल करने और उन्हें हटाने से संबंधित आवेदनों की जांच करने तथा इस सिलसिले में केंद्र सरकार को सलाह देने का अधिकार है।
     
  • इस बिल को संविधान (123वां संशोधन) बिल, 2017 के साथ प्रस्तावित किया गया है जोकि संविधान के तहत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का प्रावधान करता है। इस बिल के उद्देश्य तथा कारणों के कथन में स्पष्ट किया गया है कि संविधान के तहत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की स्थापना के बाद एक्ट निरर्थक हो जाएगा, इसलिए इसे रिपील यानी रद्द किया जा सकता है।
     
  • रिपील का प्रभाव : यह बिल कहता है कि एक्ट को रिपील करने से (i) एक्ट के तहत दिए जाने वाले अधिकारों, वरीयताओं या जिम्मेदारियों, (ii) एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर दिए गए दंड, या (iii) एक्ट के अंतर्गत किए गए किसी काम पर असर नहीं होगा।

 

अस्वीकरणः प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) की स्वीकृति के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।