मंत्रालय: 
युवा मामले एवं खेल
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    अगस्त 10, 2017
    Gray
  • रेफर
    स्टैंडिंग कमिटी
    अगस्त 22, 2017
    Gray
  • रिपोर्ट
    स्टैंडिंग कमिटी
    जनवरी 05, 2018
    Gray
  • वापस लिए गए
    लोकसभा
    जुलाई 23, 2018
    Gray
  • युवा मामलों और खेल राज्य मंत्री विजय गोयल ने 10 अगस्त, 2017 को लोकसभा में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय बिल, 2017 पेश किया। बिल की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं :
     
  • विश्वविद्यालय की स्थापना: बिल मणिपुर में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रावधान करता है। यह विश्वविद्यालय निम्नलिखित क्षेत्रों में खेल की शिक्षा को बढ़ावा देगा : (i) खेल विज्ञान, (ii) खेल प्रौद्योगिकी, (iii) खेल प्रबंधन, और (iv) खेल की कोचिंग। विश्वविद्यालय खेल के चुनिंदा पाठ्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र के रूप में कार्य करेगा। यह देश के अन्य हिस्सों में कैंपस और शिक्षण केंद्रों की स्थापना भी कर सकता है। इसे डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट देने का अधिकार होगा।
     
  • उद्देश्य: विश्वविद्यालय के निम्नलिखित उद्देश्य हैं: (i) फिजिकल एजुकेशन और खेल विज्ञान में अनुसंधान, विकास एवं ज्ञान का प्रसार करना, (ii) फिजिकल एजुकेशन और खेल के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूती देना, (iii) विभिन्न स्तरों पर ज्ञान कौशल, दक्षताओं और सामर्थ्य को उत्पन्न करना, और (iv) प्रतिभावान एथलीटों को प्रशिक्षित करना, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट के रूप में उभर सकें।
     
  • विश्वविद्यालय की अथॉरिटीज: बिल विश्वविद्यालय के अंतर्गत अनेक अथॉरिटीज का प्रावधान करता है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) कोर्ट (सभा), जोकि विश्वविद्यालय की व्यापक नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा करेगा, (ii) एग्जीक्यूटिव काउंसिल (कार्यकारी परिषद), जोकि मुख्य कार्यकारी निकाय होगी, (iii) एकेडमिक एंड एक्टिविटी काउंसिल (शैक्षिक और गतिविधि परिषद), जोकि शैक्षिक नीतियों का सामान्य निरीक्षण करेगी, और (iv) बोर्ड ऑफ स्पोर्ट्स स्टडीज (खेल अध्ययन बोर्ड), जोकि विभिन्न डिग्रियों के लिए अनुसंधान के विषयों और अनुसंधान डिग्रियों की अन्य शर्तों को मंजूरी देगी, (v) फाइनांस कमिटी (वित्त समिति), जोकि एकाउंट्स और व्यय संबंधी प्रस्तावों की जांच करेगी, और (vi) अन्य अथॉरिटीज, जिन्हें विधि द्वारा घोषित किया जा सकता है।
     
  • एग्जीक्यूटिव काउंसिल: एग्जीक्यूटिव काउंसिल विश्वविद्यालय के सभी प्रशासनिक मामलों का संचालन करेगी। एग्जीक्यूटिव काउंसिल के निम्नलिखित सदस्य होंगे : (i) वाइस चांसलर (केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त), (ii) एडीशनल सेक्रेटरी और फाइनांशियल एडवाइजर, युवा मामले और खेल मंत्रालय, और (iii) चार प्रख्यात खिलाड़ी, इत्यादि। काउंसिल के कार्यों में निम्नलिखित शामिल है : (i) शैक्षिक और गैर शैक्षिक पदों का सृजन, (ii) विश्वविद्यालय के वित्त और संपत्ति का प्रबंधन करना और उन्हें रेगुलेट करना, और (iii) ज्ञान की वृद्धि करने के लिए उद्योगों और गैर सरकारी एजेंसियों के साथ पार्टनरशिप करना।
     
  • केंद्र सरकार की भूमिका: केंद्र सरकार विश्वविद्यालय के कार्यो की समीक्षा और उनका निरीक्षण करेगी। एग्जीक्यूटिव काउंसिल निरीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई कर सकती है। अगर उसकी कार्रवाई से केंद्र सरकार संतुष्ट न हो तो उसे केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों का अनुपालन करना होगा। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार विश्वविद्यालय की ऐसी किसी कार्रवाई को अमान्य घोषित कर सकती है जोकि एक्ट के सुसंगत न हो।
     
  • फंडिंग: विश्वविद्यालय से एक फंड मेनटेन करने की अपेक्षा की जाती है जिसमें केंद्र एवं राज्य सरकार से प्राप्त होने वाले फंड्स, फीस और किसी अन्य स्रोत से प्राप्त होने वाले धन (अनुदान और उपहार) को जमा किया जाएगा। फाइनांस कमिटी के सुझावों के आधार पर बोर्ड यह निर्णय करेगा कि इन फंड्स का निवेश किस प्रकार किया जाए।
     
  • विवाद और अपील की प्रक्रिया : अगर किसी विद्यार्थी या उम्मीदवार का नाम विश्वविद्यालय के रोल्स से हटा दिया जाता है और उसे परीक्षा में बैठने से रोका जाता है तो वह एग्जीक्यूटिव काउंसिल से अपील कर सकता है। काउंसिल ऐसे निर्णय की पुष्टि कर सकती है, उसमें परिवर्तन कर सकती है या उस निर्णय को उलट सकती है। अगर किसी विद्यार्थी के खिलाफ विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक कार्रवाई के कारण विवाद पैदा होता है तो मामले को (विद्यार्थी के आग्रह पर) ट्रिब्यूनल ऑफ आर्बिट्रेशन के पास भेजा जा सकता है। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय और किसी कर्मचारी के बीच उत्पन्न होने वाले विवाद को भी ट्रिब्यूनल ऑफ आर्बिट्रेशन के पास भेजा जाएगा।

 

 

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