मंत्रालय: 
गृह मामले
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    अगस्त 09, 2018
    Gray
  • गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने 9 अगस्त, 2018 को लोकसभा में मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) बिल, 2018 पेश किया। बिल मानवाधिकार संरक्षण एक्ट, 1993 में संशोधन करता है। यह एक्ट राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), राज्य मानवाधिकार आयोगों (एसएचआरसी) और मानवाधिकार अदालतों की स्थापना का प्रावधान करता है।
     
  • एनएचआरसी की संरचना : एक्ट के अंतर्गत एनएचआरसी का चेयरपर्सन वह व्यक्ति होगा जो सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो। बिल इस प्रावधान में संशोधन करता है और प्रावधान करता है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद पर रहा व्यक्ति या सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर रहा व्यक्ति एनएचआरसी का चेयरपर्सन होगा।
     
  • एक्ट कहता है कि मानवाधिकार की जानकारी रखने वाले दो व्यक्तियों को एनएचआरसी के सदस्य के रूप में नियुक्त किया जाएगा। बिल इसमें संशोधन करते हुए कहता है कि तीन व्यक्तियों को नियुक्त किया जाएगा, जिनमें से एक महिला सदस्य होगी। एक्ट के अंतर्गत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग के चेयरपर्सन्स एनएचआरसी के सदस्य होंगे। बिल में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग तथा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के चेयरपर्सन्स और राष्ट्रीय विकलांग जन आयोग के चीफ कमीशनर्स को भी एनएचआरसी का सदस्य बनाने का प्रावधान किया गया है।
     
  • एसएचआरसी के चेयरपर्सन : एक्ट के अंतर्गत एसएचआरसी का चेयरपर्सन वह व्यक्ति होगा जो उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो। बिल इस प्रावधान में संशोधन करता है और प्रावधान करता है कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद या न्यायाधीश के पद पर रहा व्यक्ति एसएचआरसी का चेयरपर्सन होगा।
     
  • कार्यकाल : एक्ट कहता है कि एनएचआरसी और एसएचआरसी के चेयरपर्सन और सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष होगा, या जब तक वे 70 वर्ष के नहीं हो जाते (इनमें से जो भी कम हो)। बिल इस कार्यकाल को तीन वर्ष या 70 वर्ष तक की आयु करता है, जो भी कम हो। बिल एनएचआरसी और एसएचआरसीज़ के चेयरपर्सन्स को दोबारा नियुक्त करने की भी अनुमति देता है।
     
  • सेक्रेटरी जनरल की शक्तियां : एक्ट में एनएचआरसी के सेक्रेटरी जनरल और एसएचआरसी के सेक्रेटरी का प्रावधान है। ये उन शक्तियों का प्रयोग करेंगे जो उन्हें दी जाएंगी। बिल इसमें संशोधन करता है और संबंधित चेयरपर्सन के नियंत्रण के साथ सेक्रेटरी जनरल और सेक्रेटरी को सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों (न्यायिक कार्यों के अतिरिक्त) का इस्तेमाल करने की अनुमति देता है।
     
  • केंद्र शासित प्रदेश : बिल प्रावधान करता है कि केंद्र शासित प्रदेशों में मानवाधिकार से संबंधित कार्यों को केंद्र सरकार एसएचआरसी को सौंप सकती है। दिल्ली के मानवाधिकार संबंधी कार्य एनएचआरसी द्वारा किए जाएंगे।            

 

अस्वीकरणः प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) की स्वीकृति के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।