मंत्रालय: 
महिला एवं बाल कल्याण
  • प्रस्तावित
    राज्यसभा
    दिसंबर 13, 2012
    Gray
  • रेफर
    स्टैंडिंग कमिटी
    दिसंबर 21, 2012
    Gray
  • रिपोर्ट
    स्टैंडिंग कमिटी
    सितंबर 24, 2013
    Gray
  • पारित
    राज्यसभा
    दिसंबर 13, 2013
    Gray
  • फ़रवरी 11, 2019
  • महिला और बाल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा तीरथ ने 13 दिसंबर, 2012 को राज्यसभा में महिलाओं का अशोभनीय चित्रण (निषेध) संशोधन बिल, 2012 पेश किया।
     
  • यह बिल महिलाओं का अशोभनीय चित्रण (निषेध) एक्ट, 1986 को संशोधित करने का प्रयास करता है जिसके तहत विज्ञापनों या प्रकाशनों, लेखन और चित्रों (विशेष रूप से प्रिंट मीडिया में) के जरिए महिलाओं के अशोभनीय चित्रण को प्रतिबंधित किया गया है।
     
  • बिल एक्ट के दायरे को बढ़ाने की बात कहता है जिससे उसमें संचार के नए साधनों जैसे इंटरनेट, सेटेलाइट आधारित संचार के साधनों, केबिल टेलीविजन इत्यादि को भी शामिल किया जा सके।
     
  • बिल ऐसी सभी सामग्री के प्रकाशन या वितरण को प्रतिबंधित करता है जिसमें महिलाओं का अशोभनीय चित्रण हो। यह प्रावधान ऐसी किसी सामग्री पर लागू नहीं होता जोकि विज्ञान, साहित्य या कला के लिहाज से अथवा धार्मिक उद्देश्य से प्रकाशित की गई हो या जिसमें प्राचीन स्मारकों या मंदिरों में वास्तुशिल्प से संबंधित सामग्री हो।
     
  • बिल ‘महिलाओं के अशोभनीय चित्रण’, ‘इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म’ और ‘पब्लिश’ जैसे शब्दों की नई परिभाषाएं पेश करता है। ‘महिलाओं का अशोभनीय चित्रण’ का अर्थ है महिला की आकृति या रूप का इस प्रकार वर्णन करना जोकि अशोभनीय या अपमानजनक प्रतीत होता हो अथवा सार्वजनिक नैतिकता को खराब या प्रभावित करने वाला लगता हो। ‘इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म’ का अर्थ है, मीडिया, मैगनेटिक या ऑप्टिकल फॉर्म में उत्पन्न, भेजी या संचित की गई कोई भी सामग्री (इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 में भी यही परिभाषा दी गई है)। ‘पब्लिश’ में ऑडियो विजुअल मीडिया के जरिए प्रकाशन या वितरण या ब्रॉडकास्ट शामिल है।
     
  • बिल ‘विज्ञापन’ और ‘वितरण’ की परिभाषाओं को संशोधित करता है जिससे सभी प्रकार के मीडिया (प्रकाशन और इलेक्ट्रॉनिक) को इसमें शामिल किया जा सके।
     
  • बिल इस कानून के तहत किए गए अपराधों की जांच के लिए इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के स्तर के पुलिस अधिकारी को अधिकृत करता है।
     
  • बिल विभिन्न अपराधों में दंड को बढ़ाता है। महिलाओं के अशोभनीय चित्रण से संबंधित पहले अपराध पर दो की बजाय तीन साल का कारावास और 2,000 रुपए की बजाय 50,000 से 1,00,000 रुपए के बीच का जुर्माना कर दिया गया है। इसके बाद फिर से अपराध करने पर कारावास की अवधि दो से सात साल के बीच और जुर्माना एक लाख से पांच लाख के बीच होगा।

 

 

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