मंत्रालय: 
नागरिक उड्डयन
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    जुलाई 18, 2018
    Gray

बिल की मुख्‍य विशेषताएं

  • एक्ट 15 लाख से अधिक वार्षिक यात्री ट्रैफिक वाले सिविलियन एयरपोर्ट्स को मुख्य एयरपोर्ट्स के तौर पर परिभाषित करता है। बिल इस सीमा को बढ़ाकर 35 लाख से अधिक करता है।
     
  • बिल के अंतर्गत एरा निम्नलिखित निर्धारित नहीं करेगी: (i) टैरिफ, (ii) टैरिफ का स्ट्रक्चर, या कुछ मामलों में डेवलपमेंट फीस, जैसे जब टैरिफ की राशि बिड डॉक्यूमेंट (बोली लगाने वाले दस्तावेज) का हिस्सा हो जिसके आधार पर एयरपोर्ट ऑपरेशन का काम सौंपा गया हो।

प्रमुख मुद्दे और विश्‍लेषण

  • एयरलाइन उद्योग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को रेगुलेट करने और एयरपोर्ट्स की विभिन्न श्रेणियों को निष्पक्ष एवं समान अवसर प्रदान करने के लिए एरा को स्थापित किया गया था। बिल के अंतर्गत एरा अब सिर्फ कुछ एयरपोर्ट्स के टैरिफ को रेगुलेट करेगी। यह कहा जा सकता है कि रेगुलेटर की भूमिका को सशक्त बनाने की बजाय, उसके दायरा को कम कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त एरा की क्षमता में सुधार करके बिल के कुछ उद्देश्यों को हासिल किया जा सकता है।

भाग क : बिल की मुख्य विशेषताएं

संदर्भ

मार्च 2018 तक भारत में 110 ऑपरेशनल एयरपोर्ट्स हैं।[1]  इनमें 74 घरेलू, 26 अंतरराष्ट्रीय और आठ कस्टम एयरपोर्ट्स शामिल हैं। इनमें से सात का प्रबंधन निजी ऑपरेशंस (संयुक्त उपक्रम) द्वारा किया जाता है, जबकि बाकी को भारतीय एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (एएआई) ऑपरेट करती है। एएआई नागरिक उडड्यन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला निकाय है।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान निजी कंपनियों ने सिविल एयरपोर्ट्स को ऑपरेट करना शुरू किया है। इसलिए इन निजी एयरपोर्ट्स के एकाधिकार की आशंका हो सकती है। चूंकि आम तौर पर शहरों में एक ही सिविलियन एयरपोर्ट होता है जो उस क्षेत्र की सभी एयरोनॉटिकल सेवाओं को नियंत्रित करता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि निजी एयरपोर्ट ऑपरेटर्स इस एकाधिकार का दुरुपयोग न करें, एयरपोर्ट क्षेत्र में स्वतंत्र टैरिफ रेगुलेटर की जरूरत महसूस की गई। नतीजे के तौर पर भारतीय एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी एक्ट, 2008 (एरा एक्ट) पारित किया गया जिसके बाद एरा की स्थापना हुई। एरा मुख्य एयरपोर्ट्स पर एयरोनॉटिकल सेवाओं (एयर ट्रैफिक प्रबंधन, एयरक्राफ्ट की लैंडिंग और पार्किंग, ग्राउंड हैंडलिंग सर्विसेज) के लिए टैरिफ और दूसरे शुल्कों (डेवलपमेंट फी और पैसेंजर्स की सर्विस फीस) को रेगुलेट करती है। मुख्य एयरपोर्ट्स में ऐसे सिविलियन एयरपोर्ट्स शामिल हैं जिनका वार्षिक ट्रैफिक 15 लाख यात्रियों से अधिक है। 2017-18 में ऐसे 31 एयरपोर्ट्स थे (देखें तालिका 1)।[2]  जुलाई 2018 तक इनमें से 24 को एरा रेगुलेट करती थी।[3] बाकी के एयरपोर्ट्स के लिए एएआई टैरिफ निर्धारित करती है। 

प्रमुख विशेषताएं

  • मुख्य एयरपोर्ट्स की परिभाषा: एक्ट मुख्य एयरपोर्ट को ऐसे एयरपोर्ट के रूप में परिभाषित करता है जिसका वार्षिक यात्री ट्रैफिक 15 लाख से अधिक है, या ऐसा कोई भी एयरपोर्ट जिसे केंद्र सरकार अधिसूचित करे। बिल मुख्य एयरपोर्ट्स के वार्षिक यात्री ट्रैफिक की सीमा को बढ़ाकर 35 लाख से अधिक करता है। 
     
  • एरा द्वारा टैरिफ का निर्धारण: एक्ट के अंतर्गत एरा निम्नलिखित के निर्धारण के लिए जिम्मेदार है : (i) हर पांच वर्षों में विभिन्न एयरपोर्ट्स की एयरोनॉटिकल सेवाओं का टैरिफ, (ii) डेवलपमेंट फीस, और (iii) पैसेंजर्स की सर्विस फीस। यह अंतरिम अवधि में टैरिफ को भी संशोधित कर सकती है। बिल कहता है कि एरा निम्नलिखित निर्धारित नहीं करेगी : (i) टैरिफ, (ii) टैरिफ का स्ट्रक्चर, या कुछ मामलों में डेवलपमेंट फीस, जैसे जब टैरिफ की राशि बिड डॉक्यूमेंट (बोली लगाने वाले दस्तावेज) का हिस्सा हो जिसके आधार पर एयरपोर्ट ऑपरेशन का काम सौंपा गया हो। इन दस्तावेजों में टैरिफ को शामिल करने से पहले (कंसेशनिंग अथॉरिटी, नागरिक उड्डयन मंत्रालय को) एरा से सलाह लेनी होगी और उस टैरिफ को अधिसूचित करना होगा।

भाग ख: प्रमुख मुद्दे और विश्‍लेषण

स्वतंत्र रेगुलेटर के रूप में एरा की भूमिका

स्वतंत्र रेगुलेटर की भूमिका कमजोर हो सकती है

एक्ट के अंतर्गत एरा सभी मुख्य एयरपोर्ट्स के टैरिफ और डेवलपमेंट फीस को रेगुलेट करती है। एक्ट मुख्य एयरपोर्ट को ऐसे एयरपोर्ट के रूप में परिभाषित करता है जिसका वार्षिक यात्री ट्रैफिक 15 लाख से अधिक है, या ऐसा कोई भी एयरपोर्ट जिसे केंद्र सरकार ने अधिसूचित किया है। जब 2008 में एरा बिल पास हुआ था, तब ऐसे 11 एयरपोर्ट्स थे। हवाई अड्डों में बढ़ते यातायात के साथ इस समय 31 एयरपोर्ट्स ऐसे हैं जिनका यात्री ट्रैफिक इस सीमा से अधिक है। बिल मुख्य एयरपोर्ट्स पर वार्षिक यात्री ट्रैफिक की सीमा को 35 लाख से अधिक करता है। इस सीमा को बढ़ाने के बाद अब 14 एयरपोर्ट्स को एरा द्वार रेगुलेट किया जाएगा। यह कहा जा सकता है कि रेगुलेटर की भूमिका सशक्त करने की बजाय, उसका दायरा कम कर दिया गया है।

एरा की स्थापना से पहले एएआई अपने नियंत्रण में आने वाले एयरपोर्ट्स के एयरोनॉटिकल शुल्क को निर्धारित करती थी और सभी एयरपोर्ट्स के प्रदर्शन मानकों को निर्दिष्ट एवं उनका निरीक्षण करती थी। विभिन्न कमिटियों का कहना था कि एएआई एयरपोर्ट ऑपरेटर और रेगुलेटर, दोनों का काम करती है जिसके कारण हितों का टकराव होता है।[4],[5]  इसके अतिरिक्त एयरपोर्ट्स और एयर ट्रैफिक कंट्रोल में प्राकृतिक एकाधिकार था। एयरलाइन उद्योग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को रेगुलेट करने और एयरपोर्ट्स की विभिन्न श्रेणियों को निष्पक्ष और समान अवसर प्रदान करने के लिए एरा की स्थापना की गई थी।[6]  एरा बिल, 2007 की समीक्षा करने वाली स्टैंडिंग कमिटी के विचार-विमर्श के दौरान नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा कि एरा को मुख्य एयरपोर्ट्स के टैरिफ को रेगुलेट करना चाहिए और उनके प्रदर्शन मानकों का निरीक्षण करना चाहिए।5 भविष्य में इस क्षेत्र में जैसे-जैसे प्रगति हो, रेगुलेटर को उनके परिणामस्वरूप दूसरे कार्य सौंपे जा सकते हैं।5 

एरा की क्षमता में सुधार करके बिल के कुछ उद्देश्यों को हासिल किया जा सकता है

बिल के उद्देश्यों और कारणों के कथन में कहा गया है कि इस क्षेत्र में तेजी से वृद्धि हुई, और एरा पर जबरदस्त दबाव पड़ा, जबकि उसके पास सीमित संसाधन हैं। इसलिए अगर एरा के दायरे में बहुत अधिक एयरपोर्ट्स आ जाएंगे तो वह अच्छी तरह से अपने काम नहीं कर पाएगी। अगर एरा की समस्या सीमित संसाधन हैं तो सवाल यह है कि क्या इसका हल उसके क्षेत्राधिकार में कटौती करके निकाला जा सकता है (जैसा कि बिल कर रहा है), या उसकी क्षमता बढ़ाकर। 

रेगुलेशन प्रणाली में अक्सर परिवर्तन हो सकते हैं

वर्तमान में 31 मुख्य एयरपोर्ट्स हैं (15 लाख से अधिक वार्षिक ट्रैफिक वाले) और एरा उनमें से 24 के टैरिफ को रेगुलेट करती है।3  बिल के अंतर्गत एरा 14 मुख्य एयरपोर्ट्स को रेगुलेट करेगी (35 लाख से अधिक वार्षिक ट्रैफिक वाले)। बाकी के 10 एयरपोर्ट्स को एएआई रेगुलेट करेगी। उम्मीद है कि 2030-31 तक देश का एयर ट्रैफिक 10-11% की औसत वार्षिक दर से बढ़ेगा।[7]  इसका अर्थ यह है कि कुछ वर्षों में दूसरे 10 एयरपोर्ट्स का ट्रैफिक भी 35 लाख से अधिक हो जाएगा और वे फिर एरा के दायरे में आ जाएंगे। इससे इन एयरपोर्ट्स की रेगुलेशन प्रणाली में निरंतर परिवर्तन हो सकता है। निम्नलिखित तालिका में प्रमुख एयरपोर्ट्स की वर्तमान सूची दी गई है:

तालिका: भारत में मुख्य एयरपोर्ट्स की सूची (अक्टूबर 2018 तक)

35 लाख से अधिक वार्षिक ट्रैफिक वाले एयरपोर्ट्स

15 से 35 लाख के बीच के वार्षिक ट्रैफिक वाले एयरपोर्ट्स

अहमदाबाद

गोवा

लखनऊ

अमृतसर*

कोयंबटूर

पोर्ट ब्लेयर*

वाराणसी*

बेंगलुरु

गुवाहाटी

मुंबई

बागडोगरा*

इंदौर

रायपुर*

विशाखापट्टनम

चेन्नई

हैदराबाद

पुणे

भुवनेश्वर

मैंगलोर

रांची*

 

कोच्चि

जयपुर

तिरुअनंतपुरम

कलिकट

नागपुर

श्रीनगर

 

दिल्ली

कोलकाता

 

चंडीगढ़

पटना

त्रिची*

 

* - वर्तमान में एरा इन एयरपोर्ट्स का टैरिफ रेगुलेट नहीं करती। Sources: AAI Traffic News; AERA website; PRS.

 

[1]Handbook on Civil Aviation Statistics, 2017-18, http://dgca.nic.in/reports/hand-ind.htm.

[2]AAI Traffic News, Annexure III, March 2018, https://www.aai.aero/sites/default/files/traffic-news/Mar2k18annex3.pdf.

[3]Major airports, Airports Economic Regulatory Authority of India website, last accessed on October 1, 2018, http://aera.gov.in/content/airport.php#.

[4].  Report of the Committee on a Roadmap for the Civil Aviation Sector, Ministry of Civil Aviation, November 23, 2003, www.prsindia.org/uploads/media/AERA/bill149_20080311149_Naresh_Chandra_Committee_Report_on_Civil_Aviation.pdf.

[5].  133rd Report: The Airports Economic Regulatory Authority of India Bill, 2007, Standing Committee on Transport, Tourism and Culture, April 17, 2008, http://164.100.47.5/committee_web/ReportFile/20/102/133.pdf.  

[6]The Airports Economic Regulatory Authority Bill, 2007, http://www.prsindia.org/uploads/media/AERA/1189057428_Airports.pdf.

[7].  “Volume 3, Chapter 3: Civil Aviation, India Transport Report: Moving India to 2032, National Transport Development Policy Committee, June 17, 2014, http://planningcommission.nic.in/sectors/NTDPC/volume3_p1/civil_v3_p1.pdf.

 

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