मंत्रालय: 
वित्त
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    मई 13, 2015
    Gray
  • रेफर
    स्टैंडिंग कमिटी
    मई 15, 2015
    Gray
  • रिपोर्ट
    स्टैंडिंग कमिटी
    अप्रैल 28, 2016
    Gray
  • पारित
    लोकसभा
    जुलाई 27, 2016
    Gray
  • पारित
    राज्यसभा
    अगस्त 02, 2016
    Gray
  • बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन बिल, 2015 को श्री अरुण जेटली, वित्त मंत्री द्वारा 13 मई, 2015 को लोक सभा में पेश किया गया था। यह बिल बेनामी लेनदेन एक्ट, 1988 में संशोधन का प्रस्ताव रखता है। एक्ट के तहत बेनामी लेनदेन पर रोक है और बेनामी संपत्तियों को जब्त किया जा सकता है।
     
  • बिल में (i) बेनामी लेनदेन की परिभाषा में संशोधन करने, (ii) निर्णय देने वाले अधिकारियों और बेनामी लेनदेन से निपटने के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल की स्थापना करने, और (iii) बेनामी लेनदेन करने के लिए दंड का प्रावधान है।
     
  • एक्ट के तहत बेनामी लेनदेन ऐसे लेनदेन हैं जहाँ कोई व्यक्ति किसी संपत्ति का धारक है या संपत्ति उसके नाम ट्रांसफर की जाती है, लेकिन संपत्ति के लिए भुगतान अन्य व्यक्ति द्वारा किया जाता है। बिल इस परिभाषा में संशोधन करते हुए अन्य लेनदेन को भी बेनामी के रूप में शामिल करता है, जैसे कि संपत्तियों के वे लेनदेन जहाँ: (i) लेनदेन नकली नाम से किया गया हो, (ii) मालिक को मालूम नहीं हो या संपत्ति के स्वामित्व की जानकारी होने से मना करता हो, या (iii) संपत्ति का भुगतान करने वाले व्यक्ति का पता नहीं हो।
     
  • बिल में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों को बेनामी लेनदेन की परिभाषा से बाहर रखा जाएगा। इनमें वे मामले शामिल हैं जब संपत्ति धारक: (i) हिंदू अविभाजित परिवार का सदस्य हो, और संपत्ति उसके या उसके परिवार के अन्य सदस्य के लाभ के लिए रखी जा रही हो, और जिसका भुगतान उस परिवार की आय के स्रोतों से किया गया हो; (ii) ऐसा व्यक्ति जिसे इसकी जिम्मेदारी दी गई हो; (iii) ऐसा व्यक्ति जिसने अपने पति/पत्नी या बच्चे के नाम से लेनदेन किया हो, और उस संपत्ति के लिए भुगतान अपनी आय से किया हो।
     
  • बिल में बेनामीदार वह व्यक्ति है जिसके नाम पर बेनामी संपत्ति ट्रांसफर की गई हो या रखी हो, और लाभ पाने वाला वह व्यक्ति है जिसके लाभ के लिए बेनामीदार ने संपत्ति रखी हो।
     
  • एक्ट के तहत, बेनामी संपत्तियों को प्राप्त करने का अधिकार नियमों द्वारा तय किया जाना था। बिल में बेनामी लेनदेन के संबंध में पूछताछ या जाँच करने के लिए चार प्राधिकारणों को स्थापित किया गया है: (i) प्रारंभिक अधिकारी, (ii) अप्रूविंग अथॉरिटी, (iii) प्रशासनिक और (iv) निर्णय देने वाली अथॉरिटी।
     
  • यदि प्रारंभिक अधिकारी मानता है कि कोई व्यक्ति बेनामीदार है, तो वह उस व्यक्ति को नोटिस जारी कर सकता है। प्रारंभिक अधिकारी अप्रूविंग अथॉरिटी से स्वीकृति के साथ नोटिस जारी करने की तारीख से 90 दिन के लिए संपत्ति पर नियंत्रण रख सकता है। नोटिस की अवधि की समाप्ति पर, प्रारंभिक अधिकारी संपत्ति पर नियंत्रण जारी रखने का आदेश जारी कर सकता है।
     
  • यदि संपत्ति पर नियंत्रण जारी रखने का आदेश पारित किया जाता है, तो प्रारंभिक अधिकारी निर्णय देने वाली अथॉरिटी के पास मामला विचारार्थ भेजेगा। निर्णय देने वाली अथॉरिटी मामले से संबंधित सभी दस्तावेज़ों और सबूतों की जाँच करेगी और तब संपत्ति पर बेनामी के रूप में नियंत्रण रखने या नहीं रखने पर आदेश पारित करेगी।
     
  • बेनामी संपत्ति को जब्त करने के आदेश के आधार पर, प्रशासक निर्धारित शर्तों के अधीन संपत्ति को प्राप्त करेगा और उसका प्रबंधन करेगा।
     
  • बिल में निर्णय देने वाली अथॉरिटी द्वारा पारित किसी भी आदेश के विरुद्ध अपील की सुनवाई के लिए एक अपीलीय ट्रिब्यूनल की स्थापना का भी प्रावधान है। अपीलीय ट्रिब्यूनल के आदेशों के विरुद्ध हाई कोर्ट में अपील की जाएगी।
     
  • एक्ट के तहत, बेनामी लेनदेन के लिए तीन वर्ष तक का कारावास, या जुर्माना, या दोनों दंड हैं। बिल में इसे एक वर्ष से सात वर्ष तक के कठोर कारावास में बदलने, और बेनामी संपत्ति के उचित बाज़ार मूल्य के 25% तक को जुर्माने के रूप में लेने का प्रावधान है।
     
  • गलत जानकारी देने के लिए बिल में छह माह से पाँच वर्ष तक के कठोर कारावास, और बेनामी संपत्ति के उचित बाज़ार मूल्य के 10% तक को जुर्माने के रूप में लेने का भी प्रावधान है।
     
  • बिल के तहत दंडनीय किसी भी अपराध पर मुकदमे के लिए कुछ निश्चित सेशन्स कोर्ट स्पेशल कोर्ट के रूप में निर्धारित किए जाएंगे।

 

यह सारांश मूल रूप से अंग्रेज़ी में तैयार की गया था। हिन्दी में इसका अनुवाद किया गया है। हिन्दी रूपान्तर में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेज़ी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।