मंत्रालय: 
जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    दिसंबर 12, 2018
    Gray
  • जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने 12 दिसंबर, 2018 को लोकसभा में बांध सुरक्षा बिल, 2018 पेश किया। बिल देश भर में निर्दिष्ट बांधों की चौकसी, निरीक्षण, परिचालन और रखरखाव संबंधी प्रावधान करता है। बिल इन बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत प्रणाली का भी प्रावधान करता है।
     
  • बिल किन बांधों पर लागू होता है: बिल देश के सभी निर्दिष्ट बांधों पर लागू होता है। इन बांधों में निम्नलिखित शामिल हैं : (i) 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले, या (ii) 10 से 15 मीटर के बीच की ऊंचाई वाले केवल वही बांध जिनके डिजाइन और स्ट्रक्चर बिल में निर्दिष्ट विशेषताओं वाले हों।
     
  • राष्ट्रीय बांध सुरक्षा कमिटी: बिल राष्ट्रीय बांध सुरक्षा कमिटी की स्थापना का प्रावधान करता है। कमिटी की अध्यक्षता केंद्रीय जल आयोग के चेयरपर्सन द्वारा की जाएगी। दूसरे सदस्यों को केंद्र सरकार द्वारा नामित किया जाएगा और उनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) केंद्र सरकार के अधिकतम 10 प्रतिनिधि, (ii) राज्य सरकार के अधिकतम सात प्रतिनिधि (रोटेशन द्वारा), और (iii) अधिकतम तीन बांध सुरक्षा विशेषज्ञ।
  • कमिटी के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) बांध सुरक्षा मानदंडों से संबंधित नीतियां एवं रेगुलेशंस बनाना तथा बांधों में टूट को रोकना, और (ii) बड़े बांधों में टूट के कारणों का विश्लेषण करना एवं बांध सुरक्षा प्रणालियों में बदलाव का सुझाव देना।
     
  • राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अथॉरिटी: बिल राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अथॉरिटी का प्रावधान करता है। इस अथॉरिटी का प्रमुख एडिशनल सेक्रेटरी से नीचे के स्तर का अधिकारी नहीं होगा जिसे केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा। अथॉरिटी के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) राष्ट्रीय बांध सुरक्षा कमिटी द्वारा निर्मित नीतियों को लागू करना, (ii) राज्य बांध सुरक्षा संगठनों (एसडीएसओज़) के बीच, और एसडीएसओ एवं उस राज्य के किसी बांध मालिक के बीच विवादों को सुलझाना, (iii) बांधों के निरीक्षण और जांच के लिए रेगुलेशंस को निर्दिष्ट करना, और (iv) बांधों के निर्माण, डिजाइन और उनमें परिवर्तन पर काम वाली एजेंसियों को एक्रेडेशन देना।
     
  • राज्य बांध सुरक्षा संगठन: बिल के अंतर्गत राज्य सरकारों द्वारा राज्य बांध सुरक्षा संगठनों (एसडीएसओज़) की स्थापना की जाएगी। राज्य में स्थित सभी विनिर्दिष्ट बांध उस राज्य के एसडीएसओ के क्षेत्राधिकार में आएंगे। हालांकि कुछ मामलों में राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अथॉरिटी एसडीएसओ के रूप में कार्य करेगी। इन मामलों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अगर बांध पर किसी एक राज्य का स्वामित्व है लेकिन वह दूसरे राज्य में स्थित है, (ii) अनेक राज्यों में फैला हुआ है, या (iii) उस पर केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम का स्वामित्व है।
     
  • एसडीएसओज़ के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) बांधों की निरंतर चौकसी एवं निरीक्षण करना और उनके परिचालन एवं रखरखाव पर निगरानी रखना, (ii) सभी बांधों का डेटाबेस रखना, और (iii) बांध मालिकों को सुरक्षा संबंधी सुझाव देना।
     
  • राज्य बांध सुरक्षा कमिटी: बिल राज्य सरकारों द्वारा राज्य बांध सुरक्षा कमिटी के गठन का प्रावधान करता है। कमिटी के कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) एसडीएसओ के कार्यों की समीक्षा करना, (ii) बांध की सुरक्षा जांच के आदेश देना, (iii) बांध सुरक्षा के उपायों पर सुझाव देना एवं उन उपायों के कार्यान्वयन की समीक्षा करना, और (iv) अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम, दोनों तरह के बांधों के संभावित प्रभावों का आकलन करना। राज्य कमिटी में राज्य सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
     
  • निकायों के कार्यों में परिवर्तन: बिल की अनुसूचियों में निम्नलिखित के कार्य स्पष्ट किए गए हैं : (i) राष्ट्रीय बांध सुरक्षा कमिटी, (ii) राष्ट्रीय बांध सुरक्षा अथॉरिटी, और (iii) राज्य बांध सुरक्षा कमिटी। बिल विनिर्दिष्ट करता है कि केंद्र सरकार एक अधिसूचना के जरिए इन अनुसूचियों में संशोधन कर सकती है, अगर ऐसा जरूरी माना जाता है।
     
  • बांध मालिकों की बाध्यताएं: बिल में बांध मालिकों से यह अपेक्षा की गई है कि वे प्रत्येक बांध के लिए एक सुरक्षा इकाई बनाएंगे। यह इकाई निम्नलिखित स्थितियों में बांधों का निरीक्षण करेगी: (i) बारिश के मौसम से पहले और बाद में, और (ii) हर भूकंप, बाढ़ या दूसरी प्राकृतिक आपदा या संकट की आशंका के दौरान और उसके बाद। बांध मालिकों से एक आपातकालीन कार्य योजना तैयार करने और प्रत्येक बांध के लिए निर्दिष्ट अंतराल पर नियमित जोखिम आकलन करने की अपेक्षा की जाएगी। उनसे यह अपेक्षा भी की जाएगी कि नियमित अंतराल पर वे एक विशेषज्ञ पैनल के जरिए प्रत्येक बांध का व्यापक सुरक्षा मूल्यांकन करेंगे। कुछ मामलों में यह मूल्यांकन अनिवार्य होगा, जैसे मूल संरचना में बड़ा बदलाव, या कोई बड़ी हाइड्रोलॉजिकल या भूकंपीय घटना।
     
  • अपराध और सजा: बिल में दो प्रकार के अपराधों का उल्लेख है : (i) किसी व्यक्ति को अपने कार्य करने से रोकना, और (ii) बिल के अंतर्गत जारी निर्देशों के अनुपालन से इनकार करना। अपराधियों को एक वर्ष तक के कारावास या जुर्माने या दोनों की सजा भुगतनी पड़ सकती है। अगर अपराध के कारण किसी की मृत्यु हो जाती है तो कारावास की अवधि दो वर्ष तक हो सकती है। अपराध संज्ञेय तभी होंगे जब शिकायत सरकार द्वारा, या बिल के अंतर्गत गठित किसी प्राधिकरण द्वारा की जाती है।

 

 

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