मंत्रालय: 
वाणिज्य एवं उद्योग
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    मार्च 14, 2017
    Gray
  • पारित
    लोकसभा
    अप्रैल 05, 2017
    Gray
  • पारित
    राज्यसभा
    जुलाई 24, 2017
    Gray
  • वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) निर्मला सीतारमन ने 14 मार्च, 2017 को लोकसभा में फुटवियर डिजाइन और विकास संस्थान बिल, 2017 पेश किया। बिल राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में फुटवियर डिजाइन और विकास संस्थान की स्थापना का प्रयास करता है। वर्तमान में इस संस्थान के अंतर्गत 12 कैंपस आते हैं।
     
  • संस्थान के कार्य : संस्थान के निम्नलिखित कार्य हैं : (i) फुटवियर और चमड़े के उत्पादों के डिजाइन और विकास से संबंधित पाठ्यक्रमों को विकसित एवं संचालित करना और उनसे संबंधित अनुसंधान, (ii) डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट देना, (iii) चमड़ा क्षेत्र से संबंधित पाठ्यक्रमों के विकास, प्रशिक्षण और कौशल विकास हेतु राष्ट्रीय संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करना, और (iv) चमड़ा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय केंद्र को विकसित करना।
     
  • संस्थान के प्राधिकरणों में निम्नलिखित शामिल हैं : (i) संस्थान से संबंधित मामलों को सुपरवाइज करने के लिए एक गवर्निंग काउंसिल, (ii) मुख्य एकैडमिक बॉडी के रूप में एक सीनेट, और (iii) कोई अन्य प्राधिकरण, जिसे गवर्निंग काउंसिल द्वारा गठित किया जाए।
     
  • गवर्निंग काउंसिल : गवर्निंग काउंसिल की जिम्मेदारियों में निम्नलिखित शामिल हैं : (i) केंद्र सरकार के पूर्ण नियंत्रण में संस्थान का प्रबंधन, (ii) सीनेट के कार्यों की समीक्षा, और (iii) एकैडमिक नियुक्तियां करना। बिल यह प्रावधान करता है कि गवर्निंग काउंसिल केंद्र सरकार की अनुमति के बिना संस्थान की किसी संपत्ति का निस्तारण नहीं करेगी।
     
  • गवर्निंग काउंसिल की संरचना : गवर्निंग काउंसिल में निम्नलिखित 15 सदस्य होंगे : (i) चेयरपर्सन, जोकि चमड़ा क्षेत्र का प्रख्यात एकैडमीशियन, वैज्ञानिक या उद्योगपति होगा और जिसे केंद्र सरकार द्वारा नामित किया जाएगा, (ii) मैनेजिंग डायरेक्टर, जोकि केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त होगा, (iii) केंद्र सरकार के चमड़ा, रीटेल या फैशन क्षेत्र तथा संस्थान से संबंधित मंत्रालयों के संयुक्त सचिव, (iv) केंद्र सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता से संबंधित मंत्रालय का एक प्रतिनिधि, और (v) उद्योग और एकैडमिक संस्थानों (जैसे चमड़ा निर्यात परिषद और राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान) के नौ पेशेवर, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नामित किया जाएगा।
     
  • सीनेट : सीनेट संस्थान की मुख्य एकैडमिक बॉडी होगी, जो भर्ती प्रक्रियाएं, एकैडमिक कंटेंट और कैलेंडर तैयार करेगी। यह गवर्निंग काउंसिल को नए पाठ्यक्रमों, शिक्षा और एकैडमिक पदों के संबंध में सुझाव भी दे सकती है।
     
  • सीनेट की संरचना : सीनेट में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं : (i) सीनेट के चेयरपर्सन के रूप में मैनेजिंग डायरेक्टर, (ii) संस्थानों के सभी परिसरों के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, (iii) संस्थान के सीनियर प्रोफेसर, (iv) चैयरपर्सन द्वारा नामित तीन बाहरी शिक्षाविद और एक पूर्व विद्यार्थी, और (v) गवर्निंग काउंसिल द्वारा नियुक्त अन्य व्यक्ति।
     
  • फंडिंग : केंद्र सरकार संस्थान को कार्य करने के लिए अनुदान दे सकती है। केंद्र सरकार के अनुदान, फीस और दूसरे स्रोतों से प्राप्त होने वाला धन एक फंड में जमा होगा, जिसका रखरखाव संस्थान द्वारा किया जाएगा।
     
  • बिल के तहत केंद्र सरकार संस्थान से एक एंडॉमेंट फंड या दूसरे फंड्स बनाने की अपेक्षा कर सकती है। संस्थान के फंड से धन इस एंडॉमेंट फंड या किसी दूसे फंड में हस्तांतरित किया जा सकता है।
     
  • मध्यस्थता ट्रिब्यूनल : अगर संस्थान और उसके किसी कर्मचारी के बीच कॉट्रैक्ट से जुड़ा कोई विवाद होता है तो मामले को मध्यस्थता ट्रिब्यूनल में ले जाया जा सकता है। ट्रिब्यूनल में निम्नलिखित सदस्य होंगे : (i) संस्थान द्वारा नियुक्त एक सदस्य, (ii) कर्मचारी द्वारा निर्दिष्ट एक व्यक्ति, और (iii) विजिटर द्वारा नियुक्त एक अंपायर। भारत के राष्ट्रपति संस्थान के विटिजर होंगे।
     
  • ट्रिब्यूनल द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम होगा और उसके खिलाफ किसी अदालत में अपील नहीं की जा सकती।

 

 

अस्वीकरणः प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) की स्वीकृति के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।