मंत्रालय: 
वित्त
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    जनवरी 02, 2018
    Gray
  • पारित
    लोकसभा
    जुलाई 23, 2018
    Gray
  • पारित
    राज्यसभा
    जुलाई 26, 2018
    Gray
  • नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (संशोधन) बिल, 2017 को लोकसभा में 2 जनवरी, 2018 को पेश किया गया। यह बिल नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 में संशोधन करने का प्रयास करता है। एक्ट प्रॉमिसरी नोट्स, बिल्स ऑफ एक्सचेंज और चेक्स की परिभाषा पेश करता है। इसके अतिरिक्त एक्ट चेक बाउंस होने और ऐसे ही दूसरे नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स का उल्लंघन होने पर सजा भी निर्दिष्ट करता है।
     
  • अंतरिम मुआवजा : बिल एक प्रावधान को शामिल करता है। इसके अंतर्गत चेक बाउंसिंग से संबंधित अपराध पर विचार करने वाले न्यायालय को अनुमति दी गई है कि वह चेक कर्ता (ड्रॉअर- वह व्यक्ति जो चेक लिखता है) को शिकायतकर्ता को अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दे। यह अंतरिम मुआवजा कुछ विशिष्ट स्थितियों में दिया जा सकता है। इसमें वह स्थिति भी शामिल है कि जब चेक कर्ता ने आरोप से इनकार किया हो। यह अंतरिम मुआवजा चेक की 20% राशि से अधिक नहीं होगा और निचली अदालत जिस तारीख को मुआवजा देने का आदेश देगी, उस तारीख के 60 दिनों के भीतर इसे चेक कर्ता को चुकाना होगा।
     
  • अपील की स्थिति में डिपॉजिट : बिल एक प्रावधान और शामिल करता है। इस प्रावधान में निर्दिष्ट किया गया है कि अगर चेक बाउंसिंग मामले में अपराधी ठहराया गया चेक कर्ता अपील करता है तो अपीलीय न्यायालय उसे अपराध सिद्धि के दौरान निचली अदालत द्वारा निर्देशित जुर्माने या मुआवजे की कम से कम 20% राशि जमा करने का निर्देश दे सकता है। यह राशि उस अंतरिम मुआवजे के अतिरिक्त होगी, जो चेक कर्ता ने निचली अदालत में मुकदमे के दौरान चुकाई थी।  
     
  • अंतरिम मुआवजा लौटाना : अगर चेक कर्ता दोष मुक्त हो जाता है (मुकदमे के दौरान या अपीलीय न्यायालय द्वारा), तो न्यायालय शिकायतकर्ता को निर्देश दे सकता है कि वह ब्याज के साथ अंतरिम मुआवजा (अथवा अपीलीय न्यायालय के मामले में डिपॉजिट) लौटाए। यह राशि न्यायालय के आदेश के 60 दिनों के भीतर चुकाई जाएगी।

 

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