मंत्रालय: 
सामाजिक न्याय एवं कल्याण
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    जुलाई 19, 2019
    Gray
  • पारित
    लोकसभा
    अगस्त 05, 2019
    Gray
  • सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्री थावरचंद गहलौत ने 19 जुलाई, 2019 को लोकसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) बिल, 2019 पेश किया।
     
  • ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषाः बिल कहता है कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति वह व्यक्ति है जिसका लिंग जन्म के समय नियत लिंग से मेल नहीं खाता। इसमें ट्रांसमेन (परा-पुरुष) और ट्रांस-विमेन (परा-स्त्री), इंटरसेक्स भिन्नताओं और जेंडर क्वीर आते हैं। इसमें सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान वाले व्यक्ति, जैसे किन्नर, हिंजड़ा, भी शामिल हैं। इंटरसेक्स भिन्नताओं वाले व्यक्तियों की परिभाषा में ऐसे लोग शामिल हैं जो जन्म के समय अपनी मुख्य यौन विशेषताओं, बाहरी जननांगों, क्रोमोसम्स या हारमोन्स में पुरुष या महिला शरीर के आदर्श मानकों से भिन्नता का प्रदर्शन करते हैं।
     
  • भेदभाव पर प्रतिबंध: बिल ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से भेदभाव पर प्रतिबंध लगाता है जिसमें निम्नलिखित के संबंध में सेवा प्रदान करने से इनकार करना या अनुचित व्यवहार करना शामिल हैः (i) शिक्षा, (ii) रोजगार, (iii) स्वास्थ्य सेवा, (iv) सार्वजनिक स्तर पर उपलब्ध उत्पादों, सुविधाओं और अवसरों तक पहुंच और उसका उपभोग, (v) कहीं आने-जाने (मूवमेंट) का अधिकार (vi) किसी प्रॉपर्टी में निवास करने, उसे किराये पर लेने, स्वामित्व हासिल करने या अन्यथा उसे कब्जे में लेने का अधिकार, (vii) सार्वजनिक या निजी पद को ग्रहण करने का अवसर, और (viii) किसी सरकारी या निजी प्रतिष्ठान तक पहुंच जिसकी देखभाल या निगरानी किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति द्वारा की जाती है।
     
  • निवास का अधिकार: प्रत्येक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को अपने परिवार में रहने और उसमें शामिल होने का अधिकार है। अगर किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति का निकट परिवार उसकी देखभाल करने में अक्षम है तो उस व्यक्ति को न्यायालय के आदेश के बाद पुनर्वास केंद्र में भेजा जा सकता है।
     
  • रोजगार: कोई सरकारी या निजी संस्था रोजगार से जुड़े मामलों, जैसे भर्ती, पदोन्नति इत्यादि, में किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति से भेदभाव नहीं कर सकती। अगर संस्था में 100 से अधिक व्यक्ति कार्य करते हैं, तो उससे अपेक्षा की जाती है कि वह एक्ट के तहत मिलने वाली शिकायतों से निपटने के लिए एक शिकायत निवारण अधिकारी को निर्दिष्ट करेगा।
     
  • शिक्षा: सरकार द्वारा वित्त पोषित या मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान भेदभाव किए बिना ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को समावेशी शिक्षा, खेल एवं मनोरंजन की सुविधाएं प्रदान करेंगे।
     
  • स्वास्थ्य सेवा: सरकार ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए कदम उठाएगी जिसमें अलग एचआईवी सर्विलेंस सेंटर, सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी इत्यादि शामिल है। सरकार ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों को संबोधित करने के लिए चिकित्सा पाठ्यक्रम की समीक्षा करेगी और उन्हें समग्र चिकित्सा बीमा योजनाएं प्रदान करेगी।
     
  • ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की आइडेंटिटी से जुड़ा सर्टिफिकेट: एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति जिला मेजिस्ट्रेट को आवेदन कर सकता है कि ट्रांसजेंडर के रूप में उसकी आइडेंटिटी से जुड़ा सर्टिफिकेट जारी किया जाए। संशोधित सर्टिफिकेट तभी हासिल किया जा सकता है, अगर उस व्यक्ति ने पुरुष या महिला के तौर पर अपना लिंग परिवर्तन करने के लिए सर्जरी कराई है।
     
  • सरकार द्वारा किए गए कल्याणकारी उपाय: बिल कहता है कि संबंधित सरकार समाज में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के पूर्ण समावेश और भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगी। वह ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के बचाव (रेस्क्यू) एवं पुनर्वास तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार के लिए कदम उठाएगी, ट्रांसजेंडर संवेदी योजनाओं का सृजन करेगी और सांस्कृतिक क्रियाकलापों में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देगी।
     
  • अपराध और दंड: बिल निम्नलिखित को अपराध के रूप में मान्य करता है: (i) ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से भीख मंगवाना, बलपूर्वक या बंधुआ मजदूरी करवाना (इसमें सार्वजनिक उद्देश्य के लिए अनिवार्य सरकारी सेवा शामिल नहीं है), (ii) उन्हें सार्वजनिक स्थान का प्रयोग करने से रोकना, (iii) उन्हें परिवार, गांव इत्यादि में निवास करने से रोकना, और (iv) उनका शारीरिक, यौन, मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक उत्पीड़न करना। इन अपराधों के लिए सजा छह महीने और दो वर्ष के बीच की है और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
     
  • राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद (एनसीटी): एनसीटी के निम्नलिखित सदस्य होंगे : (i) केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री (अध्यक्ष), (ii) सामाजिक न्याय राज्य मंत्री (सह अध्यक्ष), (iii) सामाजिक न्याय मंत्रालय के सचिव, और (iv) स्वास्थ्य, गृह मामलों, आवास, मानव संसाधन विकास से संबंधित मंत्रालयों के प्रतिनिधि। अन्य सदस्यों में नीति आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। राज्य सरकारों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त परिषद में ट्रांसजेंडर समुदाय के पांच सदस्य और गैर सरकारी संगठनों के पांच विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।
     
  • यह परिषद ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के संबंध में नीतियां, विधान और योजनाएं बनाने एवं उनका निरीक्षण करने के लिए केंद्र सरकार को सलाह प्रदान करेगी। यह ट्रांसजेंडर लोगों की शिकायतों का निवारण भी करेगी।

 

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