मंत्रालय: 
संस्कृति
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    दिसंबर 28, 2018
    Gray
  • पारित
    लोकसभा
    फ़रवरी 13, 2019
    Gray
  • संस्कृति राज्य मंत्री महेश शर्मा ने 28 दिसंबर, 2018 को लोकसभा में जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) बिल, 2018 पेश किया। बिल जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक एक्ट, 1951 में संशोधन करता है।
     
  • 1951 का एक्ट अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल, 1919 को मारे गए और घायल लोगों की स्मृति में राष्ट्रीय स्मारक के निर्माण का प्रावधान करता है। इसके अतिरिक्त एक्ट राष्ट्रीय स्मारक के प्रबंधन के लिए एक ट्रस्ट बनाता है।
     
  • ट्रस्टीज़ का संयोजन: 1951 के एक्ट के अंतर्गत स्मारक के ट्रस्टीज़ में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री, (ii) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष, (iii) संस्कृति मंत्री, (iv) लोकसभा में विपक्ष के नेता, (v) पंजाब के गवर्नर, (vi) पंजाब के मुख्यमंत्री, और (vii) केंद्र सरकार द्वारा नामित तीन प्रख्यात व्यक्ति। बिल इस प्रावधान में संशोधन करता है और ट्रस्टी के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष को हटाता है। इसके अतिरिक्त बिल स्पष्ट करता है कि जब लोकसभा में विपक्ष का कोई नेता नहीं होगा, तो लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को ट्रस्टी बनाया जाएगा।
     
  • एक्ट में यह प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा नामित तीन प्रख्यात व्यक्तियों का कार्यकाल पांच वर्ष होगा और उन्हें दोबारा नामित किया जा सकता है। बिल प्रावधान करता है कि केंद्र सरकार कोई कारण बताए बिना कार्यकाल खत्म होने से पहले नामित ट्रस्टी को हटा सकती है।

 

अस्वीकरणः प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।