मंत्रालय: 
श्रम
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    अगस्त 07, 2014
    Gray
  • रेफर
    स्टैंडिंग कमिटी
    सितंबर 16, 2014
    Gray
  • रिपोर्ट
    स्टैंडिंग कमिटी
    दिसंबर 22, 2014
    Gray
  • जुलाई 01, 2019
  • लोकसभा में 7 अगस्त, 2014 को कारखाना (संशोधन) बिल, 2014 पेश किया गया। यह बिल कारखाना एक्ट, 1948 को संशोधित करने का प्रस्ताव रखता है।
     
  • एक्ट का उद्देश्य कारखानों में पर्याप्त सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करना और श्रमिकों के स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देना है। उद्देश्य और कारण के कथन के अनुसार, मैन्यूफैक्चरिंग की पद्धतियों में परिवर्तन और नई तकनीक, आईएलओ कन्वेंशनों की स्वीकृति, न्यायिक फैसलों, विभिन्न कमिटियों के सुझावों और प्रमुख कारखाना निरीक्षकों के सम्मेलनों में लिए गए निर्णयों के आधार पर बिल में संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं।
     
  • परिभाषाएं: एक्ट कहता है कि कारखाना कोई भी ऐसा परिसर होता है (जिसमें कुछ अपवाद हैं) जहां मैन्यूफैक्चरिंग बिजली की सहायता से की जाती हो और जहां पिछले 12 महीनों से कम से कम 10 व्यक्ति काम करते हों (20 या उससे अधिक, अगर बिजली का इस्तेमाल नहीं किया जाता)। बिल कहता है कि राज्य सरकार नियुक्त श्रमिकों की न्यूनतम संख्या को 20 (जहां बिजली का इस्तेमाल किया जाता है) और 40 (जहां बिजली का इस्तेमाल नहीं किया जाता है) व्यक्तियों तक कर सकती है।
     
  • बिल निम्नलिखित की परिभाषाओं में भी संशोधन करता हैः (i) जोखिमपरक प्रक्रियाएं, (ii) मैन्यूफैक्चरिंग प्रक्रियाएं, (iii) संचालक/अधिष्ठाता (ऑक्यूपायर) और, (iv) निर्धारित/विहित (प्रिस्क्राइब्ड)। यह दो परिभाषाओं को और शामिल करता हैः (i) जोखिमपरक पदार्थ, और (ii) विकलांगता।
     
  • नियम बनाने का अधिकारः एक्ट राज्य सरकारों को विभिन्न विषयों पर नियम बनाने की अनुमति देता है। बिल उनमें से कुछ विषयों पर केंद्र सरकार को नियम बनाने का अधिकार देता है।
     
  • एक्ट राज्य सरकारों को किसी भी विषय के संबंध में नियम बनाने की अनुमति देता है, जोकिः (i) एक्ट के दायरे में आते हैं या विहित किए गए हों, या (ii) एक्ट के उद्देश्यों को लागू करने के लिए उपयुक्त हों। बिल कहता है कि नियम बनाने का राज्य सरकारों का अधिकार उन विषयों तक सीमित है जिन पर केंद्र सरकार को ऐसा अधिकार प्राप्त नहीं है। केंद्र सरकार व्यवसायगत सुरक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्रों और अन्य कुछ विषयों में एकरूपता लाने के लिए राज्य सरकारों की सलाह से नियम बना सकती है।
     
  • अपराधों का प्रशमन (कंपाउंडिंग): बिल केंद्र और राज्य सरकार को यह अनुमति देता है कि वे मुकदमेबाजी से पहले कुछ अपराधों के प्रशमन के लिए अधिकृत अधिकारियों और राशि का निर्धारण कर सकती है। केंद्र या राज्य सरकारें प्रशमनीय अपराधों की सूची में संशोधन कर सकती हैं।
     
  • महिलाओं और विकलांगों का रोजगारः एक्ट महिलाओं को निम्नलिखित स्थितियों में काम करने पर प्रतिबंध लगाता हैः (i) कुछ प्रकार की गतिमान मशीनों (मशीन इन मोशन) पर कार्य करना, (ii) रुई धुनकी (कॉटन ओपनर) के पास कार्य करना, और (iii) शाम सात बजे से सुबह छह बजे तक काम करना। बिल में पहले दो प्रावधानों को हटा दिया गया है। बिल राज्य सरकारों को यह अधिकार देने का प्रस्ताव रखता है कि अगर निम्नलिखित शर्तो को पूरा किया जाता है तो महिलाओं को कारखाने या कारखाना समूहों में रात में काम करने की अनुमति दी जा सकती हैः (i) अगर महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और आराम के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं (रात के क्रेश, महिलाओं का शौचालय और कारखाने से घर तक पहुंचाने वाला परिवहन साधन सहित), और (ii) उसने महिला श्रमिकों, नियोक्ता और नियोक्ता तथा श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों से सलाह ली है और उनकी सहमति प्राप्त की है।
     
  • बिल कुछ खास कार्यों या प्रक्रियाओं में गर्भवती महिलाओं और विकलांगों के रोजगार पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास करता है।
     
  • सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मैन्यूफैक्चरर का दायित्व: एक्ट में डिजाइनर, इंपोर्टर, सप्लायर या मैन्यूफैक्चरर पर कारखानों में उपयोग की जाने वाली वस्तु की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व डाला गया है। बिल के तहत कारखानों में उपयोग किए जाने वाले किसी भी पदार्थ के लिए डिजाइनर, इंपोर्टर, सप्लायर या मैन्यूफैक्चरर ही जिम्मेदार हैं।
     
  • श्रमिक की सुरक्षा: बिल निम्नलिखित प्रस्ताव रखता है: (i) जोखिमपरक काम करने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपकरणों और कपड़ों की आपूर्ति, और (ii) जोखिमपरक प्रक्रियाओं के संबंध में नियम। इसके द्वारा निम्नलिखित के संबंध में प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं: (i) खतरनाक धुएं और गैस से सावधानियां, (ii) विस्फोटक या ज्वलनशील धूल या गैस और (iii) खतरनाक कार्य।
     
  • श्रमिकों के लिए सुविधाएं: एक्ट में 150 से अधिक व्यक्तियों को रोजगार देने वाले कारखाने को शेल्टर या रेस्टरूम प्रदान करने का आदेश दिया गया है। बिल कहता है कि 75 श्रमिकों से अधिक संख्या वाले कारखाने को पुरुष और महिला कर्मचारियों के लिए अलग से शेल्टर या रेस्टरूम प्रदान करने चाहिए।
     
  • ओवरटाइम और वैतनिक अवकाश: बिल में श्रमिक को दिए जाने वाले ओवरटाइम के घंटों को बढ़ाया गया है और श्रमिकों को वैतनिक अवकाश के अधिकार के संबंध में प्रावधानों में छूट प्रदान की गई है।
     
  • दंड: एक्ट में विभिन्न अपराधों के लिए दंड का निर्धारण है। बिल में 12 अपराधों के लिए दंड को बढ़ा दिया गया है (संचालक या मैनेजर, श्रमिक, या किसी वस्तु या पदार्थ के डिजाइनर, इंपोर्टर, सप्लायर या मैन्यूफैक्चरर द्वारा उल्लंघनों सहित)।

 

यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।