मंत्रालय: 
वित्त
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    मार्च 31, 2017
    Gray
  • पारित
    लोकसभा
    अप्रैल 06, 2017
    Gray
  • पारित
    राज्यसभा
    पारित माना जाता है
    Gray
  • कराधान कानून (संशोधन) बिल, 2017 को लोकसभा में 31 मार्च, 2017 को प्रस्तुत किया गया। यह बिल कस्टम्स एक्ट, 1962, कस्टम्स टैरिफ एक्ट, 1975, सेंट्रल एक्साइज एक्ट, 1944, फाइनांस एक्ट, 2001, फाइनांस एक्ट, 2005 में संशोधन करने का और कुछ कानूनों के प्रावधानों को निरस्त करने का प्रस्ताव रखता है।

कस्टम्स एक्ट, 1962

  • ‘कस्टम्स एरिया’ की परिभाषा : वर्तमान में कस्टम्स एक्ट, 1962 के तहत आयातित (इंपोर्टेड) वस्तुएं ‘कस्टम्स एरिया’ में तब तक रखी रहती हैं जब तक कि उन्हें कस्टम अथॉरिटीज द्वारा क्लीयर नहीं किया जाता। कस्टम्स एरिया में बंदरगाह, एयरपोर्ट आदि आते हैं। बिल कस्टम एरिया में वेयरहाउस को भी शामिल करता है।
     
  • उचित अधिकारी को जानकारी प्रदान करना : बिल एक्ट में एक प्रावधान जोड़ने की बात करता है जिसमें एक्ट के तहत उपयुक्त अधिकारी (कस्टम्स अधिकारी) को अनेक व्यक्तियों द्वारा जानकारी प्रदान करने की अपेक्षा की गई है। ऐसे व्यक्तियों और संस्थाओं में निम्नलिखित शामिल हैं : (i) इनकम टैक्स और राज्य जीएसटी अथॉरिटीज, (ii) भारतीय रिजर्व बैंक, (iii) बैंक और वित्तीय संस्थान, (iv) स्टॉक एक्सचेंज और डिपॉजिटरीज, (v) राज्य बिजली बोर्ड, (vi) कंपनी रजिस्ट्रार, (vii) रजिस्ट्रार एक्ट, 1908 के तहत आने रजिस्ट्रार और उप रजिस्ट्रार, (viii) मोटर वाहन एक्ट, 1988 के तहत आने वाली रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी, और (ix) पोस्ट मास्टर जनरल। जानकारी किस तरीके से प्रदान की जानी चाहिए, इसे सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाएगा।
     
  • अगर निश्चित समयावधि में जानकारी प्रदान नहीं की गई तो उपयुक्त अधिकारी नोटिस दे सकता है। इसके अतिरिक्त अधिकारी नोटिस देने के 30 दिन के बाद जुर्माना भी लगा सकता है। जब तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक 100 रुपए प्रति दिन के हिसाब से यह जुर्माना लगाया जाता रहेगा।

कस्टम्स टैरिफ एक्ट, 1975

  • आयात पर आईजीएसटी की वसूली : आयातित वस्तुओं पर एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) देना जरूरी होगा। आईजीएसटी आयातित वस्तुओं की कीमत, एक्ट के तहत वसूली गई कस्टम ड्यूटी और किसी अन्य कानून के तहत चार्ज करने योग्य राशि के कुल जोड़ पर वसूल किया जाएगा।
     
  • आयात पर जीएसटी मुआवजा सेस की वसूली: आयातित वस्तुओं पर जीएसटी मुआवजा सेस देना जरूरी होगा। सेस आयातित वस्तुओं की कीमत, एक्ट के तहत वसूली गई कस्टम ड्यूटी और किसी अन्य कानून के तहत चार्ज करने योग्य राशि के कुल जोड़ पर वसूल किया जाएगा।

सेंट्रल एक्साइज एक्ट, 1944

  • एक्साइज ड्यूटी की वसूली : वर्तमान में विभिन्न एक्साइजेबल वस्तुओं जैसे तंबाकू, पेट्रोलियम उत्पादों, रबर, तेल, वाहन इत्यादि पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती है। कुछ प्रकार के (i) पेट्रोलियम उत्पादों जैसे मोटर स्पिरिट, हाई स्पीड डीजल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल, और (ii) तंबाकू उत्पादों पर ड्यूटी वसूलने के लिए इसमें परिवर्तन करने का प्रस्ताव रखा गया है।
     
  • जिन वस्तुओं पर एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती है, उनका उल्लेख सेंट्रल एक्साइडज टैरिफ एक्ट, 1985 में किया गया है। इसे 1944 के एक्ट की चौथी अनुसूची में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि 1985 के एक्ट को केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर बिल, 2017 के तहत निरस्त करने का प्रस्ताव रखा गया है।
     
  • वर्तमान में सेंट्रल एक्साइज टैरिफ एक्ट, 1985 के तहत केंद्र सरकार को आपात स्थितियों में एक अधिसूचना के जरिए एक्साइज की दरों में परिवर्तन करने का अधिकार है। बिल 1944 के एक्ट में भी ऐसे ही प्रावधान जोड़ता है। इसके अतिरिक्त बिल केंद्र सरकार को एक अधिसूचना के जरिए नई चौथी अनुसूची में संशोधन की अनुमति देने से संबंधित एक प्रावधान भी जोड़ता है।

फाइनांस एक्ट, 2001

  • फाइनांस एक्ट, 2001 विभिन्न प्रकार की वस्तुओं जैसे पान मसाला, तंबाकू उत्पादों, टेलीफोन, मोटर वाहन, कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों इत्यादि पर नेशनल कलैमिटी कंटिन्जेंट ड्यूटी वसूलता है। बिल इसे केवल तंबाकू उत्पादों और कच्चे तेल तक सीमित करता है।

फाइनांस एक्ट, 2005

  • फाइनांस एक्ट, 2005 अनेक वस्तुओं जैसे पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर एडीशनल एक्साइज ड्यूटी वसूलता है। बिल इस सूची से पेट्रोलियम तेल, कच्चा तेल और अन्य संबंधित उत्पादों को हटाता है।

अनेक कानूनों को निरस्त करना

  • बिल चार कानूनों को निरस्त करने का प्रयास करता है जिनमें शुगर सेस एक्ट, 1982 और जूट मैन्यूफैक्चरिंग सेस एक्ट, 1983 शामिल हैं। बिल 10 कानूनों के कुछ प्रावधानों को निरस्त करने का प्रावधान करता है जिसमें रबर एक्ट, 1947, उद्योग (विकास और रेगुलेशन) एक्ट, 1951 और कोयला खान (संरक्षण और विकास) एक्ट, 1953 शामिल है। उपरिलिखित कानूनों के तहत एकत्र न की गई कोई भी ड्यूटी (बकाया) संबंधित एजेंसियों द्वारा इकट्ठा की जाएगी और भारत के कंसॉलिडेट फंड में जमा की जाएगी।

 

 

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