मंत्रालय: 
विधि एवं न्याय
  • जारी
    मार्च 02, 2019
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  • अस्वीकृत
    जुलाई 04, 2019
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  • आधार एवं अन्य कानून (संशोधन) अध्यादेश, 2019 को 2 मार्च, 2019 को जारी किया गया। यह अध्यादेश आधार (वित्तीय एवं अन्य सबसिडी, लाभ और सेवाओं का लक्षित वितरण) एक्ट, 2016, भारतीय टेलीग्राफ एक्ट, 1885 और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) निवारण एक्ट, 2002 में संशोधन करता है। आधार एक्ट यूनीक आइडेंटिटी नंबर्स, आधार नंबर्स के जरिए भारत में निवास करने वाले व्यक्तियों को सबसिडी और लाभ के लक्षित वितरण का प्रावधान करता है। इससे पूर्व ऐसा ही एक बिल 4 जनवरी, 2019 को लोकसभा में पारित किया गया था। लेकिन 16वीं लोकसभा के भंग होने के साथ यह बिल लैप्स हो गया।
     
  • आधार नंबर होल्डर का ऑफलाइन वैरिफिकेशन: आधार एक्ट के अंतर्गत व्यक्ति की पहचान आधार प्रमाणीकरण द्वारा वैरिफाई की जा सकती है। प्रमाणीकरण में व्यक्ति को अपना आधार नंबर और अपनी बायोमीट्रिक एवं डेमोग्राफिक सूचना सेंट्रल आइंडेंटिटीज़ डेटा रेपोज़िटरी को सौंपनी होती है जोकि उस व्यक्ति का वैरिफिकेशन करती है। अध्यादेश प्रमाणीकरण के बिना भी व्यक्ति की पहचान के लिए ऑफलाइन वैरिफिकेशन की अनुमति देता है। इस संबंध में यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) रेगुलेशंस के जरिए वे तरीके बताएगी जिनसे ऑफलाइन वैरिफिकेशन किया जा सके।
     
  • ऑफलाइन वैरिफिकेशन के दौरान एजेंसी को निम्नलिखित कार्य करने होंगे (i) उसे व्यक्ति की सहमति हासिल करनी होगी, (ii) उसे सूचना साझा करने के विकल्पों के बारे में बताना होगा, और (iii) वह आधार नंबर या बायोमीट्रिक सूचना को एकत्र, प्रयोग या स्टोर नहीं करेगी।
     
  • स्वैच्छिक प्रयोग: एक्ट में किसी व्यक्ति की पहचान के प्रमाण के रूप में आधार के प्रयोग का प्रावधान है जोकि प्रमाणीकरण के अधीन है। अध्यादेश इसे रीप्लेस करता है और कहता है कि व्यक्ति प्रमाणीकरण या ऑफलाइन वैरिफिकेशन के जरिए अपनी पहचान को स्थापित करने के लिए आधार नंबर का स्वेच्छा से उपयोग कर सकता है। अध्यादेश में कहा गया है कि किसी सेवा के प्रावधान के लिए आधार के माध्यम से किसी व्यक्ति की पहचान का प्रमाणीकरण केवल संसद के कानून द्वारा अनिवार्य किया जा सकता है।
     
  • अध्यादेश टेलीग्राफ एक्ट, 1885 और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) निवारण एक्ट, 2002 में संशोधन करता है और कहता है कि टेलीकॉम कंपनियां, बैंक और वित्तीय संस्थान अपने ग्राहकों की पहचान को निम्नलिखित के जरिए वैरिफाई कर सकते हैं: (i) आधार का प्रमाणीकरण या ऑफलाइन वैरिफिकेशन, (ii) पासपोर्ट, या (iii) केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कोई अन्य दस्तावेज। व्यक्ति अपनी पहचान को वैरिफाई करने का कोई भी तरीका चुन सकता है और किसी भी व्यक्ति को आधार नंबर न होने के कारण कोई सेवा प्रदान करने से इनकार नहीं किया जा सकता।
     
  • आधार का प्रयोग करने वाली संस्थाएं: एक्ट के अनुसार सरकार या किसी कानून के अंतर्गत गठित संस्था व्यक्ति की पहचान स्थापित करने के लिए आधार का प्रयोग कर सकती है। अध्यादेश इस प्रावधान को हटाता है। किसी भी संस्था को आधार के माध्यम से प्रमाणीकरण करने की अनुमति है, अगर यूआईडीएआई इस बात के लिए संतुष्ट है कि (i) वह संस्था प्राइवेसी और सिक्योरिटी के विशिष्ट मानदंडों का पालन करती है, या (ii) उसे कानून द्वारा ऐसा करने की अनुमति है, या (iii) वह राज्य हित में केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट उद्देश्य के लिए प्रमाणीकरण की मांग कर रही है।
     
  • बच्चों के आधार नंबर: अध्यादेश निर्दिष्ट करता है कि आधार नंबर देने के लिए किसी बच्चे का नामांकन करते समय एजेंसी को उसके माता-पिता या अभिभावक की सहमति लेनी चाहिए। एजेंसी को माता-पिता या अभिभावक को इस संबंध में जानकारियां देनी चाहिए कि सूचना को किस तरीके से इस्तेमाल किया जाएगा, उस सूचना को किसके साथ साझा किया जाएगा और उस सूचना को हासिल करना उनका अधिकार है। अठारह वर्ष का होने के बाद बच्चा आधार को रद्द करने के लिए आवेदन कर सकता है।
     
  • कुछ मामलों में सूचना का खुलासा: एक्ट के अंतर्गत आधार से संबंधित सूचना की सिक्योरिटी और गोपनीयता संबंधी प्रावधान उस स्थिति में लागू नहीं होंगे, जब जिला अदालत (या उससे ऊपर के स्तर की अदालत) ने इस संबंध में कोई आदेश दिए हों। अध्यादेश ऐसे खुलासे की अनुमति तभी देता है, जब इस संबंध में उच्च न्यायालय (या उससे ऊपर के स्तर की अदालत) ने आदेश दिए हों।
     
  • इसके अतिरिक्त एक्ट के अंतर्गत ज्वाइंट सेक्रेटरी और उससे ऊपर के स्तर का कोई अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में सूचना के खुलासे का निर्देश जारी कर सकता है। अध्यादेश इसमें संशोधन करता है और कहता है कि ऐसे निर्देश सेक्रेटरी और उससे ऊपर के स्तर का कोई अधिकारी ही जारी कर सकता है।
     
  • यूआईडीएआई फंड: एक्ट के अंतर्गत यूआईडीएआई द्वारा जमा की गई फीस और राजस्व को भारत के समेकित कोष में जमा कराया जाएगा। अध्यादेश इस प्रावधान को हटाता है और यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया फंड की स्थापना करता है। यूआईडीएआई फीस, अनुदान और शुल्क को इस फंड में जमा करेगी। इस फंड को यूआईडीएआई अपने कर्मचारियों को वेतन और भत्ते देने में इस्तेमाल करेगी।
     
  • शिकायत: एक्ट के अंतर्गत सिर्फ यूआईडीएआई द्वारा शिकायत दर्ज कराने पर ही अदालतें किसी अपराध का संज्ञान ले सकती हैं। अध्यादेश इसमें संशोधन करता है और कुछ मामलों में लोगों को शिकायत दर्ज करने की अनुमति देता है, जैसे अगर किसी व्यक्ति द्वारा किसी दूसरे के आधार का इस्तेमाल किया जाए, या किसी की पहचान का खुलासा हो जाए।
     
  • अध्यादेश नामांकन करने वाली एजेंसियों, आग्रह करने वाली एजेंसियों और ऑफलाइन वैरिफिकेशन की मांग करने वाली संस्थाओं को शामिल करने के लिए आधार इकोसिस्टम की परिभाषा प्रस्तुत करता है। अध्यादेश यूआईडीएआई को इस बात की अनुमति देता है कि एक्ट के अंतर्गत अपना कामकाज करने के लिए जरूरी होने पर वह इन संस्थाओं को निर्देश दे सकती है।
     
  • सजा: अध्यादेश के अंतर्गत यूआईडीएआई आधार इकोसिस्टम की किसी संस्था के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकती है। संस्था के खिलाफ निम्नलिखित स्थितियों में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है (i) अगर वह संस्था एक्ट या अथॉरिटी के निर्देशों का पालन नहीं करती, और (ii) अथॉरिटी द्वारा अपेक्षित सूचना प्रदान नहीं करती। यूआईडीएआई द्वारा नियुक्त एडजुडिकेटिंग ऑफिसर्स ऐसे मामलों में फैसला लेंगे और वे इन संस्थाओं पर एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगा सकते हैं। एडजुडिकेटिंग ऑफिसर के फैसलों के खिलाफ टेलीकॉम विवाद समाधान और अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील की जाएगी।

 

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