मंत्रालय: 
उपभोक्ता मामले एवं खाद्य वितरण
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    सितंबर 14, 2020
    Gray
  • पारित
    लोकसभा
    सितंबर 15, 2020
    Gray
  • पारित
    राज्यसभा
    सितंबर 22, 2020
    Gray
  • अनिवार्य वस्तुएं (संशोधन) बिल, 2020 को 14 सितंबर, 2020 को लोकसभा में पेश किया गया। यह बिल 5 जून, 2020 को जारी अध्यादेश का स्थान लेता है और अनिवार्य वस्तुएं एक्ट, 1955 में संशोधन करता है। एक्ट केंद्र सरकार को कुछ वस्तुओं के उत्पादन, सप्लाई, वितरण, व्यापार और वाणिज्य को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। बिल कृषि क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि करने का प्रयास करता है। इसमें प्रावधान किया गया है कि केवल असामान्य परिस्थितियों में मूल्य वृद्धि के आधार पर कृषि उत्पाद पर स्टॉक लिमिट लागू हो सकती है।
  • खाद्य पदार्थों का रेगुलेशन: एक्ट केंद्र सरकार को कुछ वस्तुओं (जैसे खाद्य पदार्थ, उर्वरक और पेट्रोलियम उत्पाद) को अनिवार्य वस्तुओं के रूप में निर्दिष्ट करने का अधिकार देता है। केंद्र सरकार एक्ट के अंतर्गत ऐसी अनिवार्य वस्तुओं के उत्पादन, सप्लाई, वितरण, व्यापार और वाणिज्य को रेगुलेट या प्रतिबंधित कर सकती है। बिल में यह प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार केवल असामान्य परिस्थितियों में कुछ खाद्य पदार्थों, जैसे अनाज, दालों, आलू, प्याज, खाद्य तिलहन और तेलों की सप्लाई को रेगुलेट कर सकती है। इन परिस्थितियों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) युद्ध, (ii) अकाल, (iii) असामान्य मूल्य वृद्धि, और (iv) गंभीर प्रकृति की प्राकृतिक आपदा।
     
  • स्टॉक लिमिट लागू करना: एक्ट के अंतर्गत केंद्र सरकार यह रेगुलेट कर सकती है कि कोई व्यक्ति किसी अनिवार्य वस्तु का कितना स्टॉक रख सकता है। बिल में यह अपेक्षा की गई है कि विशिष्ट वस्तुओं की स्टॉक की सीमा मूल्य वृद्धि पर आधारित होनी चाहिए। स्टॉक की सीमा निम्नलिखित स्थितियों में लागू की जा सकती है: (i) अगर बागवानी उत्पाद के रीटेल मूल्य में 100% की वृद्धि होती है, और (ii) नष्ट न होने वाले कृषि खाद्य पदार्थों के रीटेल मूल्य में 50% की वृद्धि होती है। वृद्धि की गणना, पिछले 12 महीने के मूल्य, या पिछले पांच वर्ष के औसत रीटेल मूल्य (इनमें से जो भी कम होगा) के आधार पर की जाएगी।
     
  • छूट: बिल में प्रावधान है कि कृषि उत्पाद के प्रोसेसर या वैल्यू चेन के हिस्सेदार व्यक्ति पर स्टॉक की सीमा लागू नहीं होगी, अगर उस व्यक्ति का स्टॉक निम्नलिखित से कम है: (i) प्रोसेसिंग की इंस्टॉल्ड क्षमता की सीमा, या (ii) निर्यातक की स्थिति में निर्यात की मांग। वैल्यू चेन के हिस्सेदार का अर्थ है, ऐसा व्यक्ति जो किसी भी चरण में उत्पाद के मूल्य संवर्धन में संलग्न है, फील्ड में उत्पादन से लेकर अंतिम उपभोग तक। इन चरणों में कृषि उत्पाद की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, स्टोरेज, परिवहन या वितरण शामिल हैं।
     
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली की एप्लिकेबिलिटी: बिल के खाद्य पदार्थों के रेगुलेशन और स्टॉक लिमिट को लागू करने से संबंधित प्रावधान सार्वजनिक वितरण प्रणाली और लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित सरकारी आदेश पर लागू नहीं होंगे। इन प्रणालियों के अंतर्गत सरकार पात्र व्यक्तियों को रियायती कीमतों पर खाद्यान्न वितरित करती है।

 

अस्वीकरणः प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।