मंत्रालय: 
वित्त
  • प्रस्तावित
    लोकसभा
    जुलाई 19, 2019
    Gray
  • पारित
    लोकसभा
    जुलाई 24, 2019
    Gray
  • पारित
    राज्यसभा
    जुलाई 29, 2019
    Gray
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने 19 जुलाई, 2019 को लोकसभा में अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स पर प्रतिबंध बिल, 2019 पेश किया। बिल अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स पर प्रतिबंध लगाने और डिपॉजिटर्स के हितों की रक्षा करने का मैकेनिज्म प्रदान करता है। यह बिल भारतीय रिजर्व बैंक एक्ट, 1934, सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) एक्ट, 1992 और मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटीज़ एक्ट, 2002 में संशोधन करने का भी प्रयास करता है।
     
  • डिपॉजिट: बिल के अनुसार डिपॉजिट उस धनराशि को कहा जाता है जिसे एडवांस, लोन या किसी दूसरे रूप में प्राप्त किया जाता है, साथ ही यह वादा किया जाता है कि उसे ब्याज या बिना ब्याज के लौटा दिया जाएगा। ऐसे डिपॉजिट को नकद या किसी सेवा के तौर पर लौटाया जा सकता है और उसे लौटाने की अवधि निर्दिष्ट हो सकती है या निर्दिष्ट नहीं भी हो सकती है। इसके अतिरिक्त बिल स्पष्ट करता है कि कुछ निश्चित धनराशि को डिपॉजिट की परिभाषा में शामिल नहीं किया जा सकता, जैसे संबंधियों से मिलने वाले लोन की राशि और किसी पार्टनरशिप फर्म में पार्टनरों द्वारा पूंजी हेतु दिए गए योगदान।
     
  • वर्तमान में नौ रेगुलेटर विभिन्न डिपॉजिट स्कीम्स की निगरानी और उन्हें रेगुलेट करते हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं : (i) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), (ii) सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी), (iii) कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय, और (iv) राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें। उदाहरण के लिए आरबीआई नॉन बैंकिंग फाइनांशियल कंपनियों की डिपॉजिट स्कीम्स को रेगुलेट करता है, सेबी म्युचुअल फंड्स को रेगुलेट करता है और राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें चिट फंड्स को रेगुलेट करती हैं, इत्यादि। सभी डिपॉजिट टेकिंग स्कीम्स को संबंधित रेगुलेटर के पास रजिस्टर किया जाता है।
     
  • अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम: बिल अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स पर प्रतिबंध लगाता है। डिपॉजिट टेकिंग स्कीम को इस प्रकार परिभाषित किया गया है कि अगर उसे कारोबार के उद्देश्य के लिए चलाया जा रहा है और वह बिल में लिस्टेड रेगुलेटरों के पास रजिस्टर नहीं है।
     
  • डिपॉजिट टेकर: बिल के अनुसार डिपॉजिट टेकर व्यक्ति, व्यक्तियों का समूह या कोई कंपनी हो सकता है जो डिपॉजिट की मांग करता है (इच्छा रखता है) या उसे प्राप्त करता है। बैंक या किसी दूसरे कानून के अंतर्गत स्थापित एंटिटीज डिपॉजिट टेकर नहीं होतीं।
     
  • सक्षम प्राधिकारी (कॉम्पेटेंट अथॉरिटी): बिल में सक्षम प्राधिकारी के तौर पर एक या एक से अधिक सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान है। ये अधिकारी राज्य या केंद्र सरकार के सचिव के पद से नीचे के अधिकारी नहीं होंगे। बिल के अंतर्गत किए गए अपराधों की सूचना मिलने पर पुलिस अधिकारी सक्षम प्राधिकारी को रिपोर्ट करेंगे। इसके अतिरिक्त पुलिस अधिकारी (पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज के पद से नीचे का अधिकारी नहीं) वारंट के साथ, या उसके बिना ऐसी किसी प्रॉपर्टी में प्रवेश कर सकते हैं, उसकी तलाशी ले सकते हैं या उसे जब्त कर सकते हैं जिसे बिल के अंतर्गत किए जाने वाले अपराधों से जुड़ी माना जाता है। सक्षम प्राधिकारी : (i) डिपॉजिट टेकर की संपत्ति और प्राप्त किए गए सभी डिपॉजिट्स को अस्थायी रूप से कुर्क कर सकता है, (ii) सबूत हासिल करने के उद्देश्य से, अगर जरूरी हो तो किसी व्यक्ति को सम्मन दे सकता है और उसकी जांच कर सकता है, और (iii) रिकॉर्ड्स और सबूत को पेश करने का आदेश दे सकता है। सक्षम प्राधिकारी की शक्तियां सिविल अदालत के समान होंगी।
     
  • नामित अदालतें: बिल में विशिष्ट क्षेत्रों में एक या एक से अधिक नामित अदालतों की स्थापना का प्रावधान है। इस अदालत की अध्यक्षता ऐसे जज द्वारा की जाएगी, जो जिला और सत्र जज, या अपर जिला और सत्र जज के पद से नीचे का जज न हो।
     
  • डिपॉजिट टेकर के एसेट्स को अस्थायी रूप से कुर्क करने के बाद सक्षम प्राधिकारी निम्नलिखित के लिए नामित अदालत जा सकता है : (i) अस्थायी कुर्की को स्थायी बनाने के लिए, और (ii) एसेट्स को बेचने की अनुमति मांगने के लिए। सक्षम प्राधिकारी को 30 दिनों के भीतर अदालत जाना होगा (जिसे 60 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है)। नामित अदालत के निर्देशानुसार सक्षम प्राधिकारी जमा राशि की उगाही करने और डिपॉजिटरों में उसे बांटने के लिए एक बैंक खाता भी खोलेगा।
     
  • नामित अदालत की निम्नलिखित शक्तियां होंगी: (i) वह अस्थायी कुर्की को स्थायी कर सकती है, (ii) अस्थायी रूप से कुर्क की गई संपत्ति के कुछ हिस्से को कुर्की से मुक्त कर सकती है या कुर्की के आदेश को रद्द कर सकती है, (iii) डिपॉजिटर्स और उनकी बकाया राशि की लिस्ट को फाइनल कर सकती है, और (iv) सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दे सकती है कि वह संपत्ति को बेचकर उससे प्राप्त होने वाली राशि को डिपॉजिटर्स के बीच समान रूप से बांटे। सक्षम प्राधिकारी के अदालत जाने के 180 दिनों के भीतर अदालत को इस प्रक्रिया को पूरा करना होगा।
     
  • सेंट्रल डेटाबेस: बिल में कहा गया है कि केंद्र सरकार डिपॉजिट टेकर्स की सूचनाओं का ऑनलाइन सेंट्रल डेटाबेस बनाने के लिए किसी अथॉरिटी को नामित कर सकती है। सभी डिपॉजिट टेकर्स को अपने कारोबार के संबंध में डेटाबेस अथॉरिटी को सूचना देनी होगी। सक्षम प्राधिकारी अनरेगुलेटेड डिपॉजिट्स की सभी सूचनाओं को अथॉरिटी के साथ साझा करेगा।
     
  • अपराध और सजा: बिल तीन प्रकार के अपराधों और उनकी सजा को स्पष्ट करता है। इन अपराधों में निम्नलिखित शामिल हैं : (i) अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स को चलाना (विज्ञापन देना, प्रमोट और ऑपरेट करना या उसके लिए धनराशि लेना), (ii) रेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स में धोखे से डीफॉल्ट करना, और (iii) जान-बूझकर झूठे तथ्य देकर अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स में निवेश करने के लिए डिपॉजिटर्स को गलत तरीके से उकसाना। उदाहरण के लिए अनरेगुलेटेड डिपॉजिट प्राप्त करने पर दो से लेकर सात साल तक के कारावास की सजा भुगतनी होगी और तीन से 10 लाख रुपए तक का जुर्माना भरना होगा। अनरेगुलेटेड डिपॉजिट्स के रीपेमेंट में डीफॉल्ट करने पर तीन से लेकर 10 साल तक के कारावास की सजा भुगतनी होगी और पांच लाख रुपए से लेकर डिपॉजिटर्स की जमा राशि से दुगुनी राशि का जुर्माना भरना होगा। बिल के अंतर्गत बार-बार अपराध करने पर पांच से लेकर 10 साल तक के कारावास की सजा भुगतनी होगी और 10 लाख से लेकर पांच करोड़ रुपए तक का जुर्माना भरना होगा।

 

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